यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के राजव्यवस्था एवं संविधान भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 981 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधार (352) · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले (270) · संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचा (101) · संसद एवं राज्य विधानमंडल (56) · मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व एवं कर्तव्य (41) · पंचायती राज एवं शहरी स्थानीय निकाय (36) · संघवाद एवं केंद्र-राज्य संबंध (34) · वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएं (34) · कार्यपालिका (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री) (30) · संवैधानिक संस्थाएं (CAG, UPSC, वित्त आयोग, NCSC...) (27)
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच 'विश्वास की कमी' (trust deficit) पर ध्यान दिया।
SIR प्रक्रिया को मतदाता सूची से डुप्लिकेट, प्रवासी और मृत मतदाताओं के नाम हटाने के साथ-साथ 'अवैध प्रवासियों' की पहचान करने के लिए तैयार किया गया है। अप्रैल 2026 तक, यह प्रक्रिया 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाECI: मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) करने के लिए जिम्मेदार संवैधानिक निकाय।
तथ्यअप्रैल 2026 तक, SIR प्रक्रिया 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) में आयोजित की गई है।
तथ्यSIR के उद्देश्यों में डुप्लीकेट, माइग्रेटेड (migrated) और मृत मतदाताओं को हटाना और अवैध प्रवासियों की पहचान करना शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्वाचन की शुचिता बनाए रखने में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका का परीक्षण कीजिए और संवैधानिक निकायों एवं राज्य सरकारों के बीच 'विश्वास की कमी' (trust deficits) के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
संस्थागत टकराव: मतदाता सूची की सफाई में 'वोटर ट्रिब्यूनल' और 'एडजुडिकेशन' के इस्तेमाल पर विवाद
डेमोग्राफिक संवेदनशीलता: 'अवैध अप्रवासी' की पहचान बनाम असली निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा में चुनौतियां
प्रशासनिक पारदर्शिता: गहन पुनरीक्षण के दौरान राजनीतिक ध्रुवीकरण रोकने के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल की ज़रूरत
मुख्य शब्द: संवैधानिक निकाय · चुनावी अखंडता · विश्वास की कमी · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे · न्यायिक निर्णय
चर्चा में क्यों: फ्रीलांस पत्रकारों और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने IT रूल्स, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों का विरोध किया है। इनका आरोप है कि ये संशोधन सूचना और प्रसारण मंत्रालय को समाचार रिपोर्टिंग पर अत्यधिक नियंत्रण प्रदान करते हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइन्स एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के विरोध में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पारदर्शिता की कमी के प्रमाण के रूप में Molitics और 4PM News जैसे न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर हाल ही में की गई टेकडाउन रिक्वेस्ट (takedown requests) का हवाला दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाएडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India): न्यूज़ एडिटर्स के लिए एक प्रतिनिधि संस्था।
अधिनियम / विधेयकInformation Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021: यह डिजिटल मीडिया एथिक्स और इंटरमीडियरी (Intermediary) की जिम्मेदारियों को नियंत्रित करता है।
तथ्यMolitics और 4PM News: टेकडाउन रिक्वेस्ट के संबंध में विरोध प्रदर्शन में विशेष रूप से इन न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स का उल्लेख किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर डिजिटल सामग्री को विनियमित करने की राज्य की शक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के बीच उत्पन्न होने वाले तनाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
पारदर्शिता की कमी: न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स को सरकार द्वारा हटवाने के अनुरोधों में सार्वजनिक जवाबदेही का अभाव
रेगुलेटरी ओवररीच: सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा व्यक्तिगत फ्रीलांस पत्रकारों पर सीधा नियंत्रण करने की संभावना
मुख्य शब्द: प्रेस की आज़ादी · डिजिटल सेंसरशिप · रेगुलेटरी ओवरसाइट · पारदर्शिता · इंटरमीडियरी लायबिलिटी
चर्चा में क्यों: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान के रिकॉर्ड स्तर को भारत की लोकतांत्रिक शक्ति के एक ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में वर्णित किया है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान असम और पुडुचेरी दोनों में 85% से अधिक मतदान दर्ज किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इस उच्च भागीदारी का श्रेय चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता में जनता के विश्वास को दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यअसम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में वोटर टर्नआउट (Voter turnout) 85% से अधिक रहा।
पदज्ञानेश कुमार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) के रूप में कार्यरत हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च मतदान प्रतिशत किस प्रकार भारत के लोकतंत्र के स्वास्थ्य को प्रतिबिंबित करता है और चुनावी अखंडता सुनिश्चित करने में चुनाव आयोग की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
संस्थागत भरोसा: ECI के निष्पक्ष प्रशासन में जनता के विश्वास के पैमाने के रूप में भारी मतदान
समावेशिता मेट्रिक्स: विविध जनसांख्यिकीय और ग्रामीण-शहरी अंतर के बीच समान मतदान सुनिश्चित करने में चुनौतियां
मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · लोकतांत्रिक भागीदारी · संवैधानिक आदेश · पारदर्शिता · मतदाता जुड़ाव
चर्चा में क्यों: उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के पूरा होने की घोषणा की है, जिससे राज्य के मतदाता आधार में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया 166 दिनों तक चली, जिसमें सभी 75 जिलों और 403 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को शामिल किया गया। 10 अप्रैल, 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची (electoral roll) में कुल 13.39 करोड़ मतदाता दर्शाए गए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यउत्तर प्रदेश के कुल मतदाता: 10 अप्रैल, 2026 तक 13.39 करोड़ मतदाता।
तथ्यलिंग आधारित विवरण: 7.30 करोड़ पुरुष, 6.09 करोड़ महिलाएं, और 4,206 थर्ड-जेंडर (third-gender) मतदाता।
तथ्यSIR एक्सरसाइज का दायरा: उत्तर प्रदेश के 75 जिले और 403 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (Assembly constituencies)।
पदनवदीप रिन्वा उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) के रूप में कार्यरत हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में आवधिक मतदाता सूची संशोधन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
डेमोग्राफिक सटीकता: मतदाता सूची में पिछड़े समूहों और थर्ड-जेंडर मतदाताओं को शामिल करना सुनिश्चित करना
लॉजिस्टिक स्केल: अलग-अलग भौगोलिक और प्रशासनिक इकाइयों में गहन पुनरीक्षण करने की चुनौतियां
डेटा इंटीग्रिटी: डुप्लिकेट एंट्री को कम करना और 'एक व्यक्ति, एक वोट' सिद्धांत सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: मतदाता सूची · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे · समावेशी प्रतिनिधित्व · जनसांख्यिकीय डेटा · मुख्य निर्वाचन अधिकारी
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए महिला कर्मचारियों की उच्च संख्या को ध्यान में रखते हुए अपने मतदान कर्मियों की तैनाती की रणनीति में बदलाव किया है।
भारत निर्वाचन आयोग ने तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत उन मतदान केंद्रों की 'नेगेटिव लिस्ट' (negative list) बनाई जाएगी जहाँ पहुंचना कठिन है। आयोग इन केंद्रों के लिए कंप्यूटर-आधारित रेंडमाइजेशन (randomisation) का उपयोग करेगा, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि सॉफ्टवेयर एक ही निर्वाचन क्षेत्र के भीतर स्थित केंद्रों पर महिला कर्मियों की तैनाती को प्राथमिकता दे।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यECI उन दुर्गम पोलिंग स्टेशनों की पहचान करने के लिए 'negative list' का उपयोग करेगा जहाँ कोई महिला कर्मी तैनात नहीं की जाएगी।
तथ्यECI का सॉफ्टवेयर एक ही निर्वाचन क्षेत्र के भीतर पोलिंग स्टेशनों पर महिला कर्मियों की नियुक्ति को प्राथमिकता देगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: चुनाव प्रबंधन में लैंगिक-समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में आने वाली तार्किक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों तथा इन चुनौतियों के समाधान में तकनीकी हस्तक्षेप की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
लॉजिस्टिक बाधाएं: दूरदराज के पोलिंग स्टेशनों की भौगोलिक पहुंच के साथ उच्च महिला कर्मियों की भागीदारी को संतुलित करना
सेफ्टी प्रोटोकॉल: 'नेगेटिव लिस्ट' से दुर्गम क्षेत्रों में महिला स्टाफ के लिए जोखिम कम करना
तकनीकी एकीकरण: ऑपरेशनल सुरक्षा बनाए रखते हुए कर्मियों की तैनाती को बेहतर बनाने के लिए कंप्यूटर-आधारित रेंडमाइजेशन का उपयोग
मुख्य शब्द: चुनाव प्रबंधन · जेंडर इनक्लूसिविटी · लॉजिस्टिक ऑप्टिमाइजेशन · रैंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर · प्रशासनिक सुरक्षा
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अदालतें धार्मिक विश्वासों और प्रथाओं में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। कोर्ट ने कहा कि आस्था की जांच के लिए तर्क (logic) एक उपयुक्त साधन नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक प्रथाओं में सुधार की पहल स्वयं धर्मों के भीतर से ही आनी चाहिए। कोर्ट ने तर्क दिया कि राज्य किसी धर्म की मूल मान्यताओं को समाप्त नहीं कर सकता और इस संदर्भ में 1972 के शेषमल्ल बनाम तमिलनाडु राज्य (Seshammal versus State of Tamil Nadu) मामले का हवाला दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदसॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व किया।
तथ्यकोर्ट ने धर्म में राज्य के हस्तक्षेप के संबंध में 1972 के सेशम्मल बनाम तमिलनाडु राज्य (Seshammal versus State of Tamil Nadu) केस का संदर्भ दिया।
संस्थासुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक प्रथाओं को निर्धारित करने में 'constitutional morality' की सीमाओं पर चर्चा की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं का संवैधानिक नैतिकता और आस्था की स्वतंत्रता के बीच संतुलन के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
न्यायिक संयम: अंधविश्वास मिटाने की राज्य की शक्ति और बुनियादी धार्मिक मान्यताओं की सुरक्षा के बीच संतुलन
आंतरिक सुधार: यह तर्क कि धार्मिक विकास राज्य द्वारा थोपे जाने के बजाय स्वाभाविक और समुदाय के नेतृत्व में होना चाहिए
संवैधानिक नैतिकता: आस्था के निजी क्षेत्र पर लागू होने पर सार्वजनिक नैतिकता की सीमाओं को परिभाषित करना
मुख्य शब्द: न्यायिक संयम · संवैधानिक नैतिकता · धार्मिक स्वतंत्रता · धर्मनिरपेक्षता · आंतरिक सुधार
चर्चा में क्यों: बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पोंडा विधानसभा उपचुनाव के लिए जारी किए गए नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है, क्योंकि गोवा विधान सभा का शेष कार्यकाल एक साल से कम है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि जब विधानसभा का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम हो, तो उपचुनाव कराने की आवश्यकता नहीं होती है। यह निर्णय 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट' (Representation of the People Act) के संबंध में दो मतदाताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर आधारित था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकRepresentation of the People Act: भारत में चुनावों और उपचुनावों को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कानून।
स्थानपोंडा: गोवा में विवादित विधानसभा उपचुनाव (Assembly bye-election) का स्थान।
तथ्यकोर्ट ने फैसला दिया कि यदि विधानसभा का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम है, तो उपचुनाव (by-election) की आवश्यकता नहीं है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उपचुनाव आयोजित करने के लिए कानूनी और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का परीक्षण कीजिए तथा चुनावी अखंडता सुनिश्चित करने में न्यायिक निरीक्षण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
सांविधिक व्याख्या: रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपल्स एक्ट के तहत 'शेष कार्यकाल' की सीमा स्पष्ट करना
न्यायिक जांच: प्रतिनिधि लोकतंत्र के संवैधानिक जनादेश के साथ चुनाव आयोग के प्रशासनिक अधिकार को संतुलित करना
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · जनप्रतिनिधित्व अधिनियम · बाय-इलेक्शन · चुनावी अखंडता · संवैधानिक आदेश
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, ताकि धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के बीच संतुलन की जांच की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की एक पीठ इस मामले की जांच कर रही है। केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि पूजा स्थलों पर कुछ आयु समूहों में लिंग आधारित प्रतिबंध भेदभाव की श्रेणी में नहीं आते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: धार्मिक संस्थानों में महिलाओं के लिए समानता के अधिकार और अनुच्छेद 25 एवं 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के मध्य उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोध का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संवैधानिक टकराव: धार्मिक संप्रदायों के सामूहिक अधिकारों के मुकाबले व्यक्तिगत मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन
न्यायिक व्याख्या: अनुमेय प्रतिबंधों को परिभाषित करने में 'अनिवार्य धार्मिक प्रथाओं' की सीमा का निर्धारण
मुख्य शब्द: धर्म की स्वतंत्रता · लैंगिक समानता · अनिवार्य धार्मिक प्रथाएं · संवैधानिक नैतिकता · न्यायिक समीक्षा
चर्चा में क्यों: चुनाव आयोग 17 राज्यों और 5 UTs में अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद मतदाता सूची के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के तीसरे चरण को लागू करने पर विचार कर रहा है।
चुनाव आयोग मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के अंतिम चरण को आयोजित करने की योजना बना रहा है। आयोग ने पहले ही 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण पूरा कर लिया है, जिसमें लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) करने के लिए जिम्मेदार संस्था है।
तथ्यSIR का आयोजन पहले ही 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) में किया जा चुका है, जिसमें लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
तथ्यअप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद, SIR के अंतिम चरण को 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों (Union territories) के लिए प्लान किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में मतदाता सूची के आवधिक और गहन संशोधन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
डेटा इंटीग्रिटी: 'एक व्यक्ति, एक वोट' सुनिश्चित करने के लिए मृत या स्थानांतरित मतदाताओं को शामिल होने से रोकना
लॉजिस्टिक बॉटलनैक: विविध भौगोलिक क्षेत्रों में विशाल मतदाता डेटाबेस अपडेट करने में चुनौतियां
समावेशी अंतर: यह सुनिश्चित करना कि हाशिए पर रहने वाले और प्रवासी समुदायों को मतदाता सूची में सही ढंग से शामिल किया जाए
मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · मतदाता सूची पुनरीक्षण · लोकतांत्रिक प्रक्रिया · प्रशासनिक दक्षता · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने वोटर रोल फ्रीज (voter roll freeze) को टालने के लिए पश्चिम बंगाल की याचिकाको खारिज कर दिया और मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की जांच के लिए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को मतदाता सूची से नाम हटाने (voter exclusion) की अपीलों से जुड़े 19 ट्रिब्यूनलों की निगरानी के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची को फ्रीज करने से पहले 6 अप्रैल तक सभी आपत्तियों की जांच कर ली जाएगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाNIA: मालदा में न्यायिक अधिकारियों की घेराबंदी (gheraoing) की जांच के लिए National Investigation Agency को जिम्मेदारी दी गई है।
तथ्य19 ट्रिब्यूनल: वोटर एक्सक्लूजन अपील्स (voter exclusion appeals) के लिए एक कमेटी द्वारा देखे जाने वाले ट्रिब्यूनल की संख्या।
तथ्य6 अप्रैल: मतदाता सूची फ्रीज (freeze) होने से पहले सभी आपत्तियों की जांच के लिए चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित डेडलाइन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में एक सटीक और समावेशी मतदाता सूची बनाए रखने के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
प्रशासनिक जवाबदेही: राज्य स्तर के चुनावी प्रबंधन में 'लाड़-प्यार' वाले नौकरशाही पर कोर्ट की आलोचना को संबोधित करना
न्यायिक निगरानी: मतदाता सूची से नाम हटने की विसंगतियों को दूर करने में हाई कोर्ट समितियों की भूमिका का संतुलन
डिजिटल गवर्नेंस: चुनावी अपीलों के लिए ऑनलाइन फाइलिंग के जरिए लागत-प्रभावशीलता और पारदर्शिता को बढ़ावा देना
मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · न्यायिक निगरानी · प्रशासनिक जवाबदेही · डिजिटल गवर्नेंस · मतदाता समावेश
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें मतदान के दिन या उससे एक दिन पहले समाचार पत्रों में राजनीतिक विज्ञापन देने पर रोक लगाई गई है, जब तक कि MCMC से पूर्व-प्रमाणन (pre-certification) न प्राप्त हो।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने यह अनिवार्य किया है कि राजनीतिक विज्ञापनों को मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) द्वारा पूर्व-प्रमाणित (pre-certified) किया जाना चाहिए। प्रमाणन के लिए आवेदन प्रस्तावित प्रकाशन तिथि से कम से कम दो दिन पहले जमा किए जाने चाहिए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाMCMC: Media Certification and Monitoring Committee वह संस्था है जो राजनीतिक विज्ञापनों को प्रमाणित करने के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यमतदान के दिन और उससे एक दिन पहले अखबारों में राजनीतिक विज्ञापन (Political advertisements) बिना पूर्व-प्रमाणन (pre-certification) के प्रतिबंधित हैं।
तथ्यविज्ञापन प्रमाणन (advertisement certification) के लिए आवेदन प्रस्तावित प्रकाशन तिथि से दो दिन पहले जमा किए जाने चाहिए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान 'पेड न्यूज' (सशुल्क समाचार) पर अंकुश लगाने और एक समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड) सुनिश्चित करने में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका की चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के दौरान अभिव्यक्ति की आज़ादी और गलत जानकारी व 'पेड न्यूज़' को रोकने की ज़रूरत के बीच संतुलन
संस्थागत बाधा: MCMC द्वारा डिजिटल और प्रिंट मीडिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में चुनौतियां
मुख्य शब्द: आचार संहिता · पेड न्यूज़ · समान अवसर की स्थिति · पारदर्शिता · रेगुलेटरी ओवरसाइट
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने CBI को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े ₹1,270 करोड़ के सरकारी अनुबंधों (Public Contracts) में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोपों की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को पिछले 10 वर्षों में दिए गए ₹1,270 करोड़ के अनुबंधों की अवार्ड प्रक्रिया और वैधानिक अनुपालन (statutory compliance) की जांच करने का आदेश दिया है। CBI को इसके तहत लाभकारी स्वामित्व (beneficial ownership) और फंड फ्लो (fund flows) का पता लगाने का काम सौंपा गया है, जिसे 16 सप्ताह की अनिवार्य समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाCBI: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (Central Bureau of Investigation), भारत की एक प्रमुख जांच एजेंसी।
तथ्यकथित कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू: 10 साल की अवधि के लिए ₹1,270 करोड़ का आवंटन।
तथ्यजांच की समयसीमा: CBI को 16 हफ्तों के भीतर प्रारंभिक जांच (preliminary inquiry) पूरी करने का निर्देश दिया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सार्वजनिक अनुबंधों के आवंटन में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
संस्थागत निगरानी: हाई-वैल्यू पब्लिक प्रोक्योरमेंट प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए मजबूत ऑडिट मैकेनिज्म की ज़रूरत
पारदर्शिता की कमी: कॉन्ट्रैक्ट देने में सार्वजनिक खुलासे के अभाव से भाई-भतीजावाद की संभावना
न्यायिक हस्तक्षेप: प्रशासनिक अखंडता सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट की शक्ति और कार्यकारी स्वायत्तता के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: जवाबदेही · पारदर्शिता · सार्वजनिक खरीद · न्यायिक समीक्षा · भाई-भतीजावाद · प्रशासनिक ईमानदारी
चर्चा में क्यों: 'द हिंदू' (The Hindu) में प्रकाशित एक लेख के लेखक का तर्क है कि भारत के संविधान में कार्यपालिका (Executive) के लिए कार्यकाल की कोई सीमा न होना, चुनावी प्रक्रिया के बावजूद जवाबदेही को प्रभावित कर सकता है।
नरेंद्र मोदी ने तेरह साल से अधिक समय तक प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने के बाद, भारत में किसी भी निर्वाचित पद पर सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड बनाया। यह लेख दो विशिष्ट सुधारों का सुझाव देता है: विश्वास प्रस्ताव (confidence motion) के वोटों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने से छूट देना और प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के लिए कार्यकाल की सीमा (term limits) लागू करना।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यअप्रैल 2026 तक, प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का कार्यकाल तेरह साल से अधिक हो गया।
संविधानभारतीय संविधान में वर्तमान में कार्यपालिका (executive branch) के लिए कोई विशिष्ट कार्यकाल की सीमा (term limits) नहीं है।
अधिनियम / विधेयकएंटी-डिफेक्शन कानून (Anti-defection law): एक ऐसा तंत्र जो वर्तमान में कॉन्फिडेंस मोशन (confidence motions) पर मतदान को अयोग्य घोषित करने से जोड़ता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: क्या वर्तमान संवैधानिक ढांचा भारत में लंबे समय तक कार्यकारी सत्ता के बने रहने से उत्पन्न होने वाले जोखिमों के विरुद्ध पर्याप्त नियंत्रण और संतुलन प्रदान करता है? इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
जवाबदेही का अंतर: चुनावी चक्र लंबे समय तक सत्ता में रहने के संरचनात्मक फायदों को रोकने के लिए अपर्याप्त हो सकते हैं
विधायी टकराव: अविश्वास प्रस्ताव पर स्वतंत्र मतदान की ज़रूरत और दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के बीच संघर्ष
इंस्टीट्यूशनल डिज़ाइन: इस बात पर बहस कि एग्जीक्यूटिव रोटेशन और नई लीडरशिप सुनिश्चित करने के लिए औपचारिक टर्म लिमिट ज़रूरी है या नहीं
मुख्य शब्द: कार्यपालिका की जवाबदेही · दलबदल विरोधी कानून · संवैधानिकवाद · सत्ता में होने का फायदा · चेक्स एंड बैलेंसेज
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा तमिलनाडु के DGP के रूप में नियुक्त संदीप राय राठौर के कार्यकाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस पर चर्चा हो रही है कि क्या वे पूरे कार्यकाल के लिए पात्र हैं या उन्हें आने वाली सरकार द्वारा बदला जा सकता है।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संदीप राय राठौर को तमिलनाडु के डायरेक्टर-जनरल ऑफ पुलिस (DGP) और हेड ऑफ पुलिस फोर्स (HoPF) के रूप में नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही राज्य के DGP/HoPF नियुक्तियों के लिए न्यूनतम दो साल के कार्यकाल का आदेश दिया था।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदडायरेक्टर-जनरल ऑफ पुलिस (DGP): किसी राज्य की पुलिस फोर्स में सर्वोच्च पद का अधिकारी।
तथ्यसुप्रीम कोर्ट ने State DGP/HoPF की नियुक्तियों के लिए न्यूनतम दो साल का कार्यकाल अनिवार्य किया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अनुच्छेद 324 के अंतर्गत राज्य पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति के संबंध में चुनाव आयोग की शक्तियों के संवैधानिक निहितार्थों और ऐसे अधिकारियों के लिए कार्यकाल की सुरक्षा की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत स्वायत्तता: चुनावों के दौरान निष्पक्ष निगरानी के लिए चुनाव आयोग की ज़रूरत और राज्य सरकार के कार्यकारी नियंत्रण के बीच संतुलन
कानूनी अस्पष्टता: कार्यकाल की सुरक्षा पर न्यायिक आदेश और आर्टिकल 324 के तहत चुनाव आयोग की विवेकाधीन शक्तियों के बीच टकराव
मुख्य शब्द: अनुच्छेद 324 · कार्यकाल सुरक्षा · चुनाव आयोग · कार्यकारी प्राधिकरण · न्यायिक आदेश
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म की आयु वाली महिलाओं के प्रवेश से संबंधित अपने 2018 के फैसले की समीक्षा के लिए नौ न्यायाधीशों की बेंचनिर्धारित की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में नौ न्यायाधीशों की बेंच 7 अप्रैल से इस मामले की सुनवाई करेगी। यह समीक्षा 2019 के एक फैसले के बाद की जा रही है, जिसमें धार्मिक प्रथाओं और न्यायिक हस्तक्षेप पर इसके व्यापक प्रभावों के कारण मामले को एक बड़ी बेंच (Larger Bench) के पास भेजा गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाभारत का सुप्रीम कोर्ट देश का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।
तथ्यसबरीमाला मंदिर केरल राज्य में स्थित है।
तथ्ययह रिव्यू 2018 के उस फैसले से संबंधित है जो मासिक धर्म की आयु वाली महिलाओं के बारे में था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप के संदर्भ में, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और समानता के अधिकार के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोधों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संवैधानिक संघर्ष: अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 15 (भेदभाव पर रोक) के बीच संतुलन
न्यायिक अतिरेक: धार्मिक रीति-रिवाजों में न्यायिक जांच की सीमा पर बहस
बहुलता बनाम व्यक्तिगत अधिकार: सामूहिक धार्मिक परंपराओं और समानता के व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · धार्मिक स्वतंत्रता · समानता का अधिकार · संवैधानिकवाद · सबरीमाला फैसला
चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चुनावी मानचित्र को फिर से तैयार करने के लिए प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों के बावजूद, स्थिर जनसंख्या वाले राज्यों के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र कम नहीं होंगे।
सरकार की योजना 2029 के आम चुनाव से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की संख्या में आधा वृद्धि करने की है। इन सीटों में से एक-तिहाई सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यप्रस्तावित विस्तार: लोकसभा और विधानसभाओं के आकार को आधा बढ़ाना।
तथ्यप्रस्तावित आरक्षण: विस्तारित सीटों का एक-तिहाई हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा।
पदप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2029 के जनरल इलेक्शन से पहले इस योजना की घोषणा की।
तथ्यइन संशोधनों पर विचार करने के लिए संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल को फिर से शुरू होगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जनसंख्या स्थिरीकरण के आधार पर निर्वाचन मानचित्र को पुनर्गठित करने के संवैधानिक और संघीय निहितार्थों का वर्तमान परिसीमन मानदंडों के संदर्भ में समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संघीय टकराव: सफल जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों और उच्च विकास वाले राज्यों के बीच संभावित असंतुलन
संवैधानिक बाधा: सीमांकन बदलाव के लिए विशेष बहुमत या राज्यों द्वारा पुष्टि की आवश्यकता
प्रतिनिधित्व समानता: स्थिर क्षेत्रों के लिए समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के साथ जनसांख्यिकीय बदलावों को संतुलित करना
मुख्य शब्द: परिसीमन · संघवाद · संवैधानिक संशोधन · प्रतिनिधित्व · आबादी का स्थिरीकरण
चर्चा में क्यों: जस्टिस बी.वी. नागरथना ने सहकारी संघीय दृष्टिकोण (cooperative federal approach) की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र को राज्यों को अधीनस्थ नहीं मानना चाहिए और राजनीतिक मतभेदों के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.वी. नागरथ्ना ने चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में व्याख्यान दिया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए प्रतिरोधात्मक मुकदमेबाजी (adversarial litigation) के बजाय संवाद और मध्यस्थता (mediation) की वकालत की।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदजस्टिस बी.वी. नागरथ्ना: सुप्रीम कोर्ट के जज।
स्थानचाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी: लेक्चर का वेन्यू (Venue)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के संवैधानिक संतुलन को बनाए रखने में सहकारी संघवाद के महत्व और केंद्र-राज्य विवादों के समाधान में संवाद की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत टकराव: राजनीतिक ध्रुवीकरण का जोखिम सार्वजनिक सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी को प्रभावित कर सकता है
संवैधानिक जनादेश: संघीय ढांचे के तहत केंद्र की कार्यकारी शक्ति और राज्यों की स्वायत्तता के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सहकारी संघवाद · संवैधानिकवाद · संघीय संतुलन · अंतर-राज्यीय संबंध · एडवर्सेरियल लिटिगेशन
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने वाली चुनाव याचिकाओं (election petitions) का निर्णय रिकॉर्ड पर पहले से उपलब्ध सबूतों के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि अतिरिक्त सबूतों के लिए मामले को वापस भेजने (remanding) पर।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पानीपत में सरपंच के चुनाव से संबंधित पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मामलों का फैसला केवल संबंधित पक्षों द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानपानीपत: पंजाब में सरपंच चुनाव याचिका का स्थान।
तथ्यफरवरी 2025: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की तारीख।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता सुनिश्चित करनेके लिए चुनावी विवादों के न्यायनिर्णयन में न्यायिक निरंतरता और 'अभिलेखीय साक्ष्य' (evidence on record) के सिद्धांत के महत्व की चर्चा कीजिए।
न्यायिक दक्षता: मौजूदा रिकॉर्ड तक सबूतों के दायरे को सीमित करके अंतहीन मुकदमेबाजी को रोकना
लोकतांत्रिक अखंडता: चुनाव परिणामों में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए चुनावी विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · चुनाव याचिका · रिकॉर्ड पर सबूत · न्यायनिर्णयन · लोकतांत्रिक प्रक्रिया
चर्चा में क्यों: राजस्थान हाई कोर्ट ने ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 की आलोचना करते हुए अपने स्वयं के उन टिप्पणियों को हटा दिया है, जिसमें इस कानून को संवैधानिक गारंटी में कटौती बताया गया था।
राजस्थान हाई कोर्ट ने नए संशोधन की आलोचना करने वाली अपनी 30 मार्च, 2026 की टिप्पणी को हटाने के लिए अपने फैसले में संशोधन किया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अपनी लैंगिक पहचान (gender) को स्वयं निर्धारित करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को मौजूदा कानूनी ढांचे के अनुरूप अपनी नीति बनाने का निर्देश दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदराजस्थान हाई कोर्ट: वह न्यायिक संस्था जिसने ट्रांसजेंडर अधिकारों पर दिए गए फैसले में संशोधन किया।
तथ्यट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026: न्यायिक समीक्षा (Judicial review) के तहत विशिष्ट कानून।
संविधानस्वयं की पहचान के आधार पर जेंडर (Gender) चुनने का अधिकार: कोर्ट द्वारा इसे मौलिक अधिकार (Fundamental Right) के रूप में मान्यता दी गई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण और विधायी संशोधनों के बीच संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
न्यायिक निगरानी: विधायी अधिनियमों द्वारा स्थापित संवैधानिक गारंटी को कम न होने देने में हाई कोर्ट की भूमिका
पहचान के अधिकार: राज्य द्वारा निर्धारित पहचान ढांचे और व्यक्ति के अपनी जेंडर चुनने के अधिकार के बीच टकराव
मुख्य शब्द: मौलिक अधिकार · न्यायिक समीक्षा · ट्रांसजेंडर अधिकार · संवैधानिक गारंटी · स्व-पहचान
चर्चा में क्यों: कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 2017 में चयनित तीन वर्क इंस्पेक्टरों की नियुक्ति करे। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) उन नियमों के तहत बनाई गई कैडर को प्रभावित नहीं कर सकता जो वैधानिक नियमों (Statutory Rules) के तहत बनाई गई हैं।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने उन तीन उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिनका चयन 2017 में किया गया था। इन उम्मीदवारों को 2021 में सरकार द्वारा वर्क इंस्पेक्टर कैडर (work inspector cadre) को समाप्त करने के बाद नियुक्ति से वंचित कर दिया गया था। कोर्ट ने पूर्व में सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों और 2019 के सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर 'लॉजिटिमेट एक्सपेक्टेशन' (legitimate expectation) का हवाला दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाकर्नाटक हाई कोर्ट: राज्य की न्यायपालिका संस्था।
तथ्यउम्मीदवारों का चयन 2017 में किया गया था।
तथ्यसरकार द्वारा 2021 में इस कैडर (Cadre) को समाप्त कर दिया गया था।
तथ्यकोर्ट ने 2019 के सत्यापित दस्तावेजों की जांच की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्रशासनिक विधि में 'वैध अपेक्षा' (legitimate expectation) के सिद्धांत और वैधानिक कैडर में परिवर्तन करने के संबंध में कार्यकारी शक्ति की सीमाओं का विश्लेषण कीजिए।
कार्यपालिका की अतिरेक: कार्यकारी आदेशों और लोक सेवा कैडर को नियंत्रित करने वाले वैधानिक नियमों के बीच टकराव
प्रशासनिक निष्पक्षता: रेट्रोस्पेक्टिव पॉलिसी बदलाव के खिलाफ उम्मीदवारों के अधिकारों की सुरक्षा
न्यायिक निगरानी: सरकारी भर्ती में प्रक्रियात्मक शुद्धता सुनिश्चित करने में हाई कोर्ट की भूमिका
मुख्य शब्द: वैध अपेक्षा · सांविधिक नियम · कार्यकारी आदेश · न्यायिक समीक्षा · प्रशासनिक कानून
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए 8वीं पूरक सूची प्रकाशित की, वहीं NIA ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए रखने के मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।
चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया में 52 लाख मामलों का निपटारा किया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को मालदा के कालीचक्र में एक ब्लॉक ऑफिस में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए रखने की घटना की जांच करने का काम सौंपा गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNIA: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (National Investigation Agency), गृह मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय एजेंसी।
तथ्यपश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के संशोधन में 52 लाख मामलों का निपटारा किया गया।
स्थानकालियाचक: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एक ब्लॉक ऑफिस।
तथ्यपश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित 8वीं सप्लीमेंट्री लिस्ट (supplementary list)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में मतदाता सूची के संशोधन के महत्व और न्यायिक अखंडता बनाए रखने में केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत अखंडता: चुनाव के दौरान न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और स्वायत्तता सुनिश्चित करना
चुनावी पारदर्शिता: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और सार्वजनिक आंदोलनों के प्रबंधन में चुनौतियां
संघीय टकराव: राज्य स्तर के प्रशासन और केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच तालमेल
मुख्य शब्द: मतदाता सूची पुनरीक्षण · नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी · न्यायिक सत्यनिष्ठा · स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव · प्रशासनिक निगरानी
चर्चा में क्यों: राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग (SEC) और उसके कमिश्नर को अदालत द्वारा निर्धारित समय सीमा से आगे पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में देरी करने के आरोप में अवमानना नोटिस जारी किए हैं।
यह याचिका पूर्व विधायक संयम लोढ़ा द्वारा राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission) और कमिश्नर राजेश्वर सिंह के खिलाफ दायर की गई है। अदालत ने मतदाता सूची संशोधन के लिए राज्य चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित समय-सीमा पर सवाल उठाए हैं, जो 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के लिए अदालत द्वारा तय की गई समय-सीमा से अधिक है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाराज्य चुनाव आयोग (SEC) पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों (urban local bodies) के चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यचुनाव कराने के लिए कोर्ट द्वारा निर्धारित डेडलाइन 15 अप्रैल थी।
पदराजेश्वर सिंह राजस्थान के इलेक्शन कमिश्नर (Election Commissioner) हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्थानीय निकाय चुनावों के समयबद्ध संचालन को सुनिश्चित करने में राज्य निर्वाचन आयोगों की संवैधानिक भूमिका और प्रशासनिक विलंब के जमीनी लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संस्थागत स्वायत्तता: SEC की प्रशासनिक टाइमलाइन और समय पर चुनाव के लिए न्यायिक आदेशों के बीच संतुलन
डेमोक्रेटिक डेफिसिट: स्थानीय निकाय चुनावों में देरी का विकेंद्रीकृत शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण पर प्रभाव
मुख्य शब्द: जमीनी स्तर की लोकतंत्र · संस्थागत स्वायत्तता · न्यायिक निगरानी · विकेंद्रीकृत शासन · कोर्ट की अवमानना
चर्चा में क्यों: एक RJD सांसद ने राज्यसभा में CAG की एक रिपोर्ट पर चिंता जताई है, जिसमें निर्धारित फंड में सेस (Cess) संग्रह के हस्तांतरण में ₹3.69 लाख करोड़ की कमी की ओर इशारा किया गया है।
CAG की रिपोर्ट में पिछले पांच दशकों के दौरान हुई कमियों की पहचान की गई है। इसमें वित्त वर्ष 2023-24 और पिछले वर्षों के बीच ₹3.69 लाख करोड़ की राशि का हस्तांतरण नहीं किया गया है। विशेष रूप से ऑयल इंडस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड, स्वास्थ्य, शिक्षा, इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड और मोनेटाइजेशन ऑफ नेशनल हाईवेज फंड में कमियों को नोट किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाCAG: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India), भारत की सर्वोच्च ऑडिट संस्था है।
तथ्यCAG द्वारा सेस ट्रांसफर (cess transfers) में ₹3.69 लाख करोड़ की कमी की पहचान की गई।
तथ्यप्रभावित फंड्स में ऑयल इंडस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड (Oil Industry Development Board), हेल्थ, एजुकेशन, इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (Investor Education and Protection Fund) और मोनेटाइजेशन ऑफ नेशनल हाईवेज फंड (Monetisation of National Highways Fund) शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सेस-आधारित कोषों के प्रबंधन में राजकोषीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
ऑडिट ओवरसाइट: निर्धारित विकास फंड में समय पर सेस कलेक्शन ट्रांसफर में सिस्टम की कमियों की पहचान
राजकोषीय जवाबदेही: सार्वजनिक खर्च में रिसाव रोकने के लिए आधिकारिक खातों और वास्तविक फंड ट्रांसफर के बीच के अंतर को दूर करना
मुख्य शब्द: राजकोषीय पारदर्शिता · ऑडिट ओवरसाइट · सेस मैनेजमेंट · सार्वजनिक जवाबदेही · वित्तीय शासन
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के MA&UD विभाग ने 1 अप्रैल, 2026 को एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर 87 नगर पालिकाओं और 13 नगर निगमों में वार्डों का निर्धारण (delimit) करने का निर्णय लिया गया है।
यह परिसीमन विशाखापट्टनम, विजयवाड़ा, गुंटूर, नेल्लोर, कुरनूल, तिरुपति और अनंतपुर सहित प्रमुख शहरों को प्रभावित करता है। यह कदम आंध्र प्रदेश नगर पालिका नियम 2004 और नगर निगम नियम 2005 के अनुरूप है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यपरिसीमन (Delimitation) 2011 की जनगणना के जनसंख्या मानदंडों पर आधारित है।
संस्थाMA&UD डिपार्टमेंट आंध्र प्रदेश में म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए नोडल बॉडी है।
अधिनियम / विधेयकआंध्र प्रदेश म्युनिसिपैलिटीज (फिक्सेशन ऑफ स्ट्रेंथ ऑफ नगर पंचायत और म्युनिसिपल काउंसिल) रूल्स, 2004।
अधिनियम / विधेयकआंध्र प्रदेश म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस (Fixation of Strength of Elected Members) रूल्स, 2005।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते भारतीय राज्यों में समान प्रतिनिधित्व और प्रभावी शहरी शासन सुनिश्चित करने में समय-समय पर वार्डों के परिसीमन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
डेमोग्राफिक अलाइनमेंट: आबादी में बदलाव के हिसाब से वार्ड का साइज तय करना ताकि कम प्रतिनिधित्व को रोका जा सके
प्रशासनिक दक्षता: भौगोलिक रूप से सुसंगत वार्ड सीमाओं के ज़रिए म्युनिसिपल सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाना
मुख्य शब्द: अर्बन गवर्नेंस · वार्ड सीमांकन · जनसांख्यिकीय प्रतिनिधित्व · नगर निगम प्रशासन · विकेंद्रीकरण
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची संशोधन पर अपडेट्स पर सुनवाई की, जहाँ भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अभी तक उन मतदाताओं के लिए ट्रिब्यूनल (Tribunals) शुरू नहीं किए हैं जिनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बताया कि अप्रैल 2026 की शुरुआत तक 60 लाख में से 47 लाख दावों का निपटारा कर दिया गया था। निर्वाचन आयोग (ECI) ने उन मतदाताओं के मामलों पर फैसला करने के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनलों को अधिसूचित किया, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यपश्चिम बंगाल की मतदाता सूची संशोधन में लगभग 87 लाख नाम हटाने का अनुमान है।
तथ्यआगामी चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में वोटर रोल (voter roll) 7 करोड़ मतदाताओं से नीचे गिर सकता है।
संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) मतदाता सूची (electoral roll) में संशोधन की अधिसूचना देने और उसकी निगरानी के लिए जिम्मेदार संस्था है।
पदभारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने अपडेट्स पर सुनवाई की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में एक सटीक और समावेशी मतदाता सूची के महत्व पर चर्चा कीजिए।
प्रक्रियात्मक देरी: ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली में सुस्ती से न्याय के चरण के दौरान वंचित मतदाताओं के लिए अनिश्चितता पैदा होती है
डेटा इंटीग्रिटी: व्यवस्थित वोटर सप्रेशन रोकने के लिए बड़े पैमाने पर होने वाले विलोपन (87 लाख) के लिए मजबूत वेरिफिकेशन ज़रूरी है
मुख्य शब्द: मतदाता सूची · न्यायिक निर्णय · मतदाता सूची से नाम हटाना · लोकतांत्रिक अखंडता · प्रशासनिक देरी
चर्चा में क्यों: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसला दिया है कि निजी आवासों में धार्मिक प्रार्थना सभाएं आयोजित करने के लिए व्यक्तियों को अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने दो निवासियों द्वारा दायर की गई एक याचिकाखारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने अपने निवास पर ईसाई प्रार्थना सभाओं पर रोक लगाने वाले पुलिस नोटिस को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि ऐसे समारोहों पर कोई कानून प्रतिबंध नहीं लगाता है, लेकिन शोर प्रदूषण या कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में अधिकारी हस्तक्षेप कर सकते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानछत्तीसगढ़ हाई कोर्ट।
तथ्यअथॉरिटी केवल शोर प्रदूषण (noise pollution) या कानून और व्यवस्था (law and order) की समस्याओं की स्थिति में ही कार्रवाई कर सकती है।
तथ्यइलाहाबाद हाई कोर्ट ने इससे पहले 2026 में इसी तरह का फैसला सुनाया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और निजी स्थानों में सार्वजनिक व्यवस्था एवं ध्वनि प्रदूषण को विनियमित करने की राज्य की शक्ति के बीच संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
प्राइवेसी बनाम रेगुलेशन: व्यक्तिगत पूजा की आज़ादी और सार्वजनिक परेशानी रोकने के लिए राज्य के आदेश के बीच संतुलन
न्यायिक व्याख्या: निजी संपत्ति अधिकारों के संदर्भ में 'पूर्व अनुमति' की शर्तों के दायरे को परिभाषित करना
मुख्य शब्द: धर्म की स्वतंत्रता · निजता का अधिकार · सार्वजनिक व्यवस्था · न्यायिक समीक्षा · धर्मनिरपेक्षता
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने हेतु निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन (delimitation) के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम के कारण क्षेत्रीय असंतुलन की चिंताओं को लेकर कांग्रेस ने सभी दलों की बैठक की मांग की है।
केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करते हुए 2029 तक महिला आरक्षण कानून को लागू करने की योजना बना रही है। कांग्रेस का तर्क है कि सभी राज्यों में समान रूप से 50% सीटें बढ़ाने से अधिक और कम जनसंख्या वाले राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का अंतर बढ़ सकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकेंद्र सरकार ने महिलाओं के लिए आरक्षण हेतु सीमांकन (delimitation) के लिए 2011 की जनगणना के डेटा का उपयोग करने का प्रस्ताव दिया है।
तथ्यइस प्रस्ताव के तहत महिला आरक्षण कानून को लागू करने का लक्ष्य वर्ष 2029 है।
तथ्यकांग्रेस ने महिलाओं के लिए सीटों में एक समान 50% की वृद्धि के संबंध में चिंता जताई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: महिला आरक्षण के कार्यान्वयन के संदर्भ में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन हेतु पुराने जनगणना आंकड़ों के उपयोग के संवैधानिक और संघीय निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संघीय टकराव: छोटे राज्यों की तुलना में अधिक आबादी वाले राज्यों को ज्यादा सीटें आवंटित करना
प्रतिनिधित्व का अंतर: समान सीट वृद्धि के कारण छोटे राज्यों के राजनीतिक प्रभाव के हाशिए पर जाने का जोखिम
समावेशिता की दुविधा: महिलाओं के आरक्षण और SC, ST और OBC श्रेणियों के लिए कोटा के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: परिसीमन · संघवाद · महिला आरक्षण · जनगणना डेटा · प्रतिनिधित्व का अंतर
चर्चा में क्यों: प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने पांच राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों के दौरान नैतिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने और 'पेड न्यूज' (Paid News) को रोकने के लिए मीडिया संस्थानों को एक एडवाइजरी जारी की है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस परामर्श में विशेष रूप से 'पेड न्यूज' (paid news), चुनाव से पहले और चुनाव के बाद के सर्वेक्षण (pre-poll/exit poll) के संचालन और धर्म, जाति या नस्ल के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देने वाली रिपोर्टिंग पर रोक लगाने को लक्षित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्ययह एडवाइजरी असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों को कवर करती है।
तथ्यPCI गाइडलाइन्स उम्मीदवारों के व्यक्तिगत चरित्र के संबंध में झूठे बयान प्रकाशित करने पर रोक लगाती हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करने और पत्रकारिता नैतिकता को बनाए रखने में भारतीय प्रेस परिषद जैसी वैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी गैप: 'पेड न्यूज़' और गलत जानकारी पर जुर्माना लगाने के लिए PCI के पास दंडात्मक शक्तियों की कमी
नैतिक संघर्ष: प्रेस की आज़ादी और सांप्रदायिक नफ़रत को रोकने के बीच संतुलन
सूचना की सत्यता: यह सुनिश्चित करना कि एग्जिट पोल और प्री-पोल डेटा मतदाताओं को गुमराह न करें
मुख्य शब्द: पत्रकारिता की नैतिकता · पेड न्यूज़ · सांविधिक निकाय · चुनावी अखंडता · प्रेस की आज़ादी
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
यह चुनाव तमिलनाडु विधानसभा के सभी 234 निर्वाचन क्षेत्रों को कवर करता है। नामांकन दाखिल करने की अवधि 30 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगी, और चुनाव के मई 6 तक संपन्न होने की उम्मीद है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतमिलनाडु विधान सभा में कुल निर्वाचन क्षेत्र (constituencies): 234।
संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) चुनाव नोटिफिकेशन जारी करने के लिए जिम्मेदार संस्था है।
स्थानकोलाथुर और पेरामबुर तमिलनाडु के असेंबली निर्वाचन क्षेत्र (Assembly constituencies) हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच राज्य विधानसभा चुनावों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
लॉजिस्टिक ओवरसाइट: 234 निर्वाचन क्षेत्रों में एक साथ नामांकन फाइलिंग और जांच का प्रबंधन
रेगुलेटरी न्यूट्रलिटी: हाई-प्रोफाइल नेतृत्व वाले चुनावों के बीच निष्पक्ष आचरण सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: भारत निर्वाचन आयोग · निर्वाचन क्षेत्र · नामांकन · विधानसभा · लोकतांत्रिक प्रक्रिया