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भाग I · स्था. 11.2025 
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सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट जजों की सैलरी बढ़ाने वाला बिल पास

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चर्चा में क्यों

लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया, जिसके माध्यम से शीर्ष न्यायालय की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव है।

पृष्ठभूमि

यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करता है। यह विधेयक न्यायधीशों की संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान करता है, जिससे मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित कुल स्वीकृत संख्या 38 हो जाएगी।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • अधिनियम / विधेयकSupreme Court (Number of Judges) Act, 1956: सर्वोच्च न्यायालय की संख्या को विनियमित करने वाला प्राथमिक विधान।
  • तथ्यस्वीकृत संख्या: 34 से बढ़कर 38 न्यायाधीश हो गई।
  • तथ्यपुइसने जज (Puisne judges): साधारण न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है।
  • संस्थालोकसभा: 3 अगस्त, 2026 को ध्वनि मत (voice vote) द्वारा विधेयक पारित किया गया।

मेन्स के लिए

Q. उच्चतम न्यायालय की स्वीकृत संख्या में वृद्धि के न्यायिक लंबित मामलों के निपटान और न्यायिक विचार-विमर्श की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Judicial pendency vs. quality of judgment
  • Impact on judicial infrastructure
  • Procedural scrutiny in legislative process

कीवर्ड: Judicial Pendency · Sanctioned Strength · Puisne Judges · Legislative Procedure · Judicial Infrastructure

पूरी खबर पढ़ें →स्रोत: The Hindu ↗यह भी: GS2 · Bills, Acts & ordinances

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।