सरकार के आश्वासन के बाद दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के केस बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
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चर्चा में क्यों
उच्चतम न्यायालय ने सरकार द्वारा कानूनी कार्रवाई न करने के आश्वासन के पश्चात दिल्ली और अन्य राज्यों को विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामलों को वापस लेने की अनुमति प्रदान की है, जो विरोध के अधिकार और कानून प्रवर्तन के मध्य संतुलन को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी (FIR) को वापस लेने पर निर्णय दिया। जुलाई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मार्च के दौरान हुई हिंसा की 20 घटनाओं की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करने का आदेश दिया गया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था।
- तथ्यन्यायालय ने जुलाई के 20 विशिष्ट हिंसा की घटनाओं की जांच का आदेश दिया।
- पदसॉलिसिटर जनरल: भारत सरकार के सर्वोच्च पदस्थ विधि अधिकारी।
मेन्स के लिए
Q. शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था एवं कानून के शासन को बनाए रखने के राज्य के कर्तव्य के बीच संवैधानिक संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Fundamental rights vs. Public order
- Judicial oversight of executive actions
- Rule of law and criminal antecedents
कीवर्ड: Right to Protest · Rule of Law · Judicial Review · Public Order · Criminal Antecedents
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