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भाग I · स्था. 11.2025 
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राजव्यवस्था एवं संविधान करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के राजव्यवस्था एवं संविधान भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 982 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधार (353) · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले (270) · संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचा (101) · संसद एवं राज्य विधानमंडल (56) · मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व एवं कर्तव्य (41) · पंचायती राज एवं शहरी स्थानीय निकाय (36) · संघवाद एवं केंद्र-राज्य संबंध (34) · वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएं (34) · कार्यपालिका (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री) (30) · संवैधानिक संस्थाएं (CAG, UPSC, वित्त आयोग, NCSC...) (27)

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेमेन्स

मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्मधिकारी ने कहा कि तमिलनाडु में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु को 60 से बढ़ाकर 61 या 62 करने का प्रस्ताव विचाराधीन है

चर्चा में क्यों: मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्मधिकारी ने कहा कि तमिलनाडु में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु को 60 से बढ़ाकर 61 या 62 करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।

यह प्रस्ताव तमिलनाडु के न्यायिक अधिकारियों, जिनमें मजिस्ट्रेट, मुंसिफ, सब जज, सेशंस जज और डिस्ट्रिक्ट जज शामिल हैं, से संबंधित है। वर्तमान में सेवानिवृत्ति (superannuation) की आयु 60 वर्ष है, जिसे बढ़ाकर 61 या 62 वर्ष करने का प्रस्ताव है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पदसुश्रुत अरविंद धर्मधिकारी: मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस।
  • तथ्यतमिलनाडु में न्यायिक अधिकारियों के लिए सुपरएनुएशन (superannuation) की वर्तमान आयु: 60 वर्ष।
  • तथ्यन्यायिक अधिकारियों के लिए प्रस्तावित रिटायरमेंट की उम्र: 61 या 62 वर्ष।
मेन्स के लिए

प्रश्न: न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि के राज्य की न्यायपालिका की स्वतंत्रता और दक्षता पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • अनुभव बनाम ऊर्जा: अनुभवी न्यायिक समझ और सक्रिय, ऊर्जावान न्याय के बीच संतुलन
  • प्रशासनिक बोझ: न्यायिक रिक्तियों और निचली अदालतों में केस निपटान की रफ्तार पर संभावित असर

मुख्य शब्द: सेवानिवृत्ति · न्यायिक स्वतंत्रता · प्रशासनिक दक्षता · न्यायिक अधिकारी · रिटायरमेंट की उम्र

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारप्रीलिम्स + मेन्स

चुनाव आयोग ने बताया कि चल रहे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान जब्त किए गए अवैध प्रलोभन (inducements) की राशि ₹500 करोड़ से अधिक है

चर्चा में क्यों: चुनाव आयोग ने बताया कि चल रहे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान जब्त किए गए अवैध प्रलोभन (inducements) की राशि ₹500 करोड़ से अधिक है, जो पिछले लोकसभा चुनावों में हुई बरामदगी से ज्यादा है।

27 अप्रैल, 2026 को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में नकद (₹58.28 करोड़), शराब (₹126.85 करोड़), ड्रग्स (₹110.12 करोड़) और मुफ्त उपहारों (₹184.85 करोड़) की जब्ती की रिपोर्ट दी। पश्चिम बंगाल, केरल, असम, पुडुचेरी और तमिलनाडु के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा 15 मार्च को की गई थी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्य27 अप्रैल, 2026 तक पश्चिम बंगाल में जब्त की गई कुल अवैध inducements (प्रलोभन) की राशि: ₹510 करोड़।
  • तथ्यपश्चिम बंगाल में जब्त किए गए फ्रीबीज (freebies) का मूल्य: ₹184.85 करोड़।
  • तथ्यपश्चिम बंगाल, केरल, असम, पुडुचेरी और तमिलनाडु के लिए चुनाव शेड्यूल की घोषणा 15 मार्च को की गई।
  • संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) चुनावों के दौरान अवैध प्रलोभनों (illicit inducements) की रिपोर्टिंग और उन्हें जब्त करने के लिए जिम्मेदार संस्था है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान अवैध प्रलोभनों और 'मुफ्त उपहारों' (freebies) के उपयोग को रोकने में चुनाव आयोग के समक्ष आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • एन्फोर्समेंट गैप: ग्रामीण इलाकों में कैश और शराब के विकेंद्रीकृत वितरण पर नज़र रखने में मुश्किल
  • रेगुलेटरी वैक्यूम: कल्याणकारी वादों और अवैध फ्रीबीज़ के बीच अंतर करने के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचे की कमी
  • लॉजिस्टिक बाधा: हाई-इंटेंसिटी पोलिंग फेज के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध आवाजाही की रियल-टाइम मॉनिटरिंग

मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · अवैध प्रलोभन · आचार संहिता · पारदर्शिता · चुनाव की निगरानी

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएंमेन्स

एक संसदीय समिति ने इस बात पर हैरानी जताई कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने केंद्रीय विधि मंत्रालय (Union Law Ministry) से अनिवार्य जांच (vetting) कराए बिना नियम जारी कर दिए

चर्चा में क्यों: एक संसदीय समिति ने इस बात पर हैरानी जताई कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने केंद्रीय विधि मंत्रालय (Union Law Ministry) से अनिवार्य जांच (vetting) कराए बिना नियम जारी कर दिए।

समिति ने यह नोट किया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विधि मंत्रालय की मंजूरी न मिलने की बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन से पहले अधीनस्थ विधान की संवैधानिक और कानूनी अखंडता सुनिश्चित करने के लिए ऐसी जांच अनिवार्य है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थानेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission - NMC): भारत में मेडिकल शिक्षा और प्रैक्टिस के लिए नियामक संस्था।
  • तथ्यसंघीय कानून मंत्रालय (Union Law Ministry) अधीनस्थ विधानों (subordinate legislation) की जांच करने के लिए जिम्मेदार है ताकि संवैधानिक और कानूनी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
  • तथ्यद गज़ट ऑफ इंडिया (The Gazette of India) एक आधिकारिक सार्वजनिक जर्नल है जहाँ रेगुलेशंस और रूल्स प्रकाशित किए जाते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: संवैधानिक वैधता और प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने में अधीनस्थ विधान के लिए विधि मंत्रालय द्वारा कानूनी जांच (लीगल वेटिंग) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • प्रक्रियात्मक चूक: अधीनस्थ नियमों में संवैधानिक और कानूनी जांच की कमी से मुकदमेबाजी का खतरा
  • संस्थागत निगरानी: वैधानिक निकायों द्वारा मनमानी नियम बनाने से रोकने के लिए स्टैंडर्डाइज्ड वेटिंग प्रोटोकॉल की ज़रूरत
  • प्रशासनिक जवाबदेही: सार्वजनिक नीति में निरंतरता के लिए मंत्रालयों द्वारा स्थापित विधायी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: अधीनस्थ विधान · संवैधानिक वैधता · सांविधिक निगरानी · प्रशासनिक कानून · नियम बनाने वाली अथॉरिटी

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेमेन्स

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution

चर्चा में क्यों: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution - ADR) तंत्र में सेवा देने हेतु सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का एक व्यवस्थित राष्ट्रीय रजिस्ट्री बनाने का प्रस्ताव दिया है।

CJI सूर्यकांत ने एक ऐसे ढांचे का सुझाव दिया है जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मध्यस्थ (mediators), मध्यस्थता करने वाले (arbitrators), कानूनी शिक्षक और पूर्व-मुकदमा परामर्शदाताओं (pre-litigation counsellors) के रूप में सेवा देने की अनुमति दी जाएगी। यह प्रस्ताव उनके जुड़ाव को जवाबदेही और समर्थन के साथ एक संस्थागत सेवा के रूप में मानने पर जोर देता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पदसूर्यकांत: भारत के मुख्य न्यायाधीश (अप्रैल 2026 तक)।
  • तथ्यADR मैकेनिज्म में मेडिएशन (mediation), लोक अदालत और आर्बिट्रेशन (arbitration) शामिल हैं।
  • संस्थायह प्रस्ताव रिटायर्ड जजों के लिए एक नेशनल रजिस्ट्री (National Registry) का सुझाव देता है ताकि उन्हें संस्थागत सहायता प्रदान की जा सके।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एकीकरण से न्यायिक लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय तक पहुंच में सुधार करने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • संस्थागत जवाबदेही: मध्यस्थता और आर्बिट्रेशन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रिटायर्ड जजों के लिए औपचारिक फ्रेमवर्क बनाना
  • न्यायिक दक्षता: प्री-लिटिगेशन काउंसलिंग और कोर्ट के बाहर समझौते को बढ़ावा देकर कोर्ट का बोझ कम करना
  • न्याय तक पहुँच: आम जनता के लिए तेज़ और कम लागत वाले विवाद समाधान हेतु न्यायिक विशेषज्ञता का लाभ उठाना

मुख्य शब्द: वैकल्पिक विवाद समाधान · न्यायिक लंबित मामले · न्याय तक पहुँच · संस्थागत जवाबदेही · मध्यस्थता · आर्बिट्रेशन

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारप्रीलिम्स

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के बाद, जिसमें 68 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए

चर्चा में क्यों: विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के बाद, जिसमें 68 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, तमिलनाडु में 85.1% का अब तक का सबसे अधिक मतदाता मतदान दर्ज किया गया।

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) अभ्यास के परिणामस्वरूप तमिलनाडु में 68 लाख से अधिक मतदाताओं को सूची से हटा दिया गया। पिछले चक्रों की तुलना में नए मतदाताओं की संख्या कम होने के बावजूद, मतदान करने वाले मतदाताओं की कुल संख्या 85.1% के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यहाल के चुनाव में तमिलनाडु में वोटर टर्नआउट (voter turnout) 85.1% रहा।
  • तथ्यविशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के परिणामस्वरूप 68 लाख से अधिक मतदाताओं को हटा दिया गया।
  • स्थानतमिलनाडु: राज्य में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर भिन्नता दर्ज की गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में गहन पुनरीक्षण अभ्यासों के माध्यम से मतदाता सूची के शुद्धिकरण से मतदान प्रतिशत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा इंटीग्रिटी: मतदाता सूची की सटीकता बनाम पात्र मतदाताओं का मताधिकार छिनने की संभावना
  • जनसांख्यिकीय बदलाव: शहरी और ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों के बीच मतदाता पंजीकरण में स्थानिक विविधताएं

मुख्य शब्द: मतदाता सूची · मतदाता मतदान · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे · जनसांख्यिकीय विविधता · लोकतांत्रिक अखंडता

स्रोत: द हिंदू ↗+2 और खबरें इस विषय पर
GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारप्रीलिम्स + मेन्स

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 65 पोल ड्यूटी अधिकारियों द्वारा विधानसभा चुनावों में मतदान करने की मांग से संबंधित एक याचिकाखारिज कर दी है

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 65 पोल ड्यूटी अधिकारियों द्वारा विधानसभा चुनावों में मतदान करने की मांग से संबंधित एक याचिकाखारिज कर दी है। कोर्ट ने उन्हें अपील ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunals) के समक्ष अपील दायर करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि मतदान से उनका बाहर किया जाना भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान उपयोग की गई 'AI-आधारित स्वचालित प्रणाली' (AI-driven automated system) के कारण हुआ था। भारत निर्वाचन आयोग ने बहिष्कार के AI-आधारित होने के दावे का खंडन किया है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्य65 पश्चिम बंगाल पोल ड्यूटी ऑफिसर्स ने विधानसभा चुनावों में वोट देने की मांग करते हुए याचिका दायर की।
  • स्थानपश्चिम बंगाल: वह राज्य जहाँ पोल ड्यूटी अधिकारियों को तैनात किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विशेष गहन पुनरीक्षण जैसी चुनावी प्रक्रियाओं में एआई-संचालित स्वचालित प्रणालियों के एकीकरण के निहितार्थों और ऐसी तकनीकी संक्रमणों में न्यायिक निरीक्षण की आवश्यकता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • एल्गोरिद्मिक ट्रांसपेरेंसी: मतदाता सूची में AI-आधारित बहिष्करण के मानदंडों पर स्पष्टता की कमी
  • ड्यू प्रोसेस: ऑटोमेटेड सिस्टम की प्रशासनिक कुशलता और वोट देने के व्यक्तिगत अधिकार के बीच संतुलन
  • न्यायिक हस्तक्षेप: चुनावी चक्र के दौरान कोर्ट के हस्तक्षेप की सीमाएं

मुख्य शब्द: एल्गोरिद्मिक जवाबदेही · चुनावी अखंडता · उचित प्रक्रिया · तकनीकी गवर्नेंस · न्यायिक समीक्षा

स्रोत: द हिंदू ↗+2 और खबरें इस विषय पर
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भारत निर्वाचन आयोग ने बताया कि 23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में महिलाओं की मतदान संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक रही

चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग ने बताया कि 23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में महिलाओं की मतदान संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक रही।

मतदाताओं की कुल भागीदारी में महिलाओं की हिस्सेदारी 85.76% रही, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 83.57% रही। करूर और वीरपंडी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत 93% से अधिक रहा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यतमिलनाडु विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी (turnout): 85.76%।
  • तथ्यतमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पुरुषों की वोटिंग (turnout) 83.57% रही।
  • तथ्यसबसे अधिक मतदान प्रतिशत (>93%): करूर और वीरपंडी निर्वाचन क्षेत्र।
  • संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (EC) EVM और VVPAT की सुरक्षा का प्रबंधन करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय चुनावी प्रक्रियाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी में योगदान देने वाले कारकों और जमीनी स्तर के लोकतंत्र (grassroots democracy) पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • डेमोग्राफिक शिफ्ट: स्थानीय शासन और राजनीतिक निर्णय लेने में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
  • सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर: EVM/VVPAT स्टोरेज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए CCTV और सशस्त्र गार्ड्स का एकीकरण

मुख्य शब्द: मतदाता मतदान · चुनावी अखंडता · लैंगिक समानता · जमीनी स्तर की लोकतंत्र · भारत निर्वाचन आयोग

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारप्रीलिम्स

पश्चिम बंगाल के हिंगलगंज पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज संदीप सरकार को 2026 विधानसभा चुनावों के दौरान पक्षपाती व्यवहार के आरोपों के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने निलंबित करने का आदेश दिया है

चर्चा में क्यों: पश्चिम बंगाल के हिंगलगंज पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज संदीप सरकार को 2026 विधानसभा चुनावों के दौरान पक्षपाती व्यवहार के आरोपों के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने निलंबित करने का आदेश दिया है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल के हिंगलगंज पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज को निलंबित कर दिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने यह दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं कि मतदान समाप्त होने के बाद पोलिंग बूथ के सर्विलांस कैमरों से प्राप्त SD कार्डों को निगरानी में रखा जाना चाहिए।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • स्थानहिंगलगंज पुलिस स्टेशन पश्चिम बंगाल में स्थित है।
  • तथ्यECI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, वोटिंग समाप्त होने के बाद पोलिंग बूथ के कैमरों से प्राप्त SD कार्ड्स को सुपरविजन (supervision) में रखना अनिवार्य है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान निष्पक्ष कानून प्रवर्तन सुनिश्चित करने और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • संस्थागत स्वायत्तता: पक्षपाती हस्तक्षेपरोकने के लिए राज्य पुलिस बलों पर चुनाव आयोग का अधिकार सुनिश्चित करना
  • डेटा इंटीग्रिटी: छेड़छाड़ या अनधिकृत पहुंच रोकने के लिए सर्विलांस फुटेज को सुरक्षित करने के प्रोटोकॉल
  • जनता का भरोसा: पुलिस की ऑपरेशनल जरूरतों और निष्पक्ष चुनावी निगरानी की आवश्यकता के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: भारत निर्वाचन आयोग · पक्षपाती व्यवहार · चुनावी शुचिता · निगरानी प्रोटोकॉल · निष्पक्षता

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस लिसा गिल को 25 अप्रैल, 2026 से आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया है

चर्चा में क्यों: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस लिसा गिल को 25 अप्रैल, 2026 से आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया है।

जस्टिस लिसा गिल को पिछले महीने हाई कोर्ट में एक जज के रूप में नियुक्त किया गया था, जिसके बाद उन्हें चीफ जस्टिस के पद पर पदोन्नत किया गया। यह नियुक्ति मौजूदा चीफ जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की 24 अप्रैल, 2026 को सेवानिवृत्ति के बाद की गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पदजस्टिस लिसा गिल: 25 अप्रैल, 2026 तक आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस।
  • तथ्यजस्टिस धीरज सिंह ठाकुर: 24 अप्रैल, 2026 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में रिटायर हुए।
  • संस्थाभारत के राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के साथ परामर्श से हाई कोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में हाई कोर्ट के न्यायाधीशों और मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और इसमें शामिल परामर्श प्रक्रिया का विश्लेषण कीजिए।

  • संस्थागत स्वायत्तता: कार्यकारी नियुक्ति शक्तियों और न्यायिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन
  • कंसल्टेटिव फ्रेमवर्क: न्यायिक योग्यता सुनिश्चित करने में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका

मुख्य शब्द: न्यायिक नियुक्ति · संवैधानिक आदेश · हाई कोर्ट · कार्यपालिका-न्यायपालिका इंटरफेस

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सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC परिसर में हुई छापेमारी के विवाद के दौरान पश्चिम बंगाल में 'संवैधानिक मशीनरी के टूटने' के दावे के संबंध में डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ED) से सवाल पूछे

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC परिसर में हुई छापेमारी के विवाद के दौरान पश्चिम बंगाल में 'संवैधानिक मशीनरी के टूटने' के दावे के संबंध में डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ED) से सवाल पूछे।

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के अधिकारियों के खिलाफ ED के रिजोइंडर (rejoinder) पर रोक लगा दी है। यह विवाद कोलकाता में I-PAC परिसर में कोयला तस्करी मामले की जांच के दौरान कानून के शासन (rule-of-law) के उल्लंघन के आरोपों से संबंधित है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • संस्थाED: Directorate of Enforcement वह केंद्रीय एजेंसी है जो Prevention of Money Laundering Act को लागू करने के लिए जिम्मेदार है।
  • पदसॉलिसिटर जनरल: ED की ओर से सुप्रीम कोर्ट में तुषार मेहता ने पेशी दी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संघीय विवादों के संदर्भ में 'संवैधानिक तंत्र के पतन' के आधार को लागू करने के कानूनी और संवैधानिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • संघीय टकराव: केंद्रीय जांच शक्तियों और राज्य कार्यकारी स्वायत्तता के बीच संघर्ष
  • न्यायिक निगरानी: एजेंसियों की मनमानी को रोकने और प्रक्रियात्मक अखंडता में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
  • रूल ऑफ लॉ: छापेमारी के दौरान प्रशासनिक ज़रूरत और स्थापित कानूनी प्रोटोकॉल के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: संवैधानिक मशीनरी · संघवाद · कानून का शासन · न्यायिक समीक्षा · कार्यपालिका की अतिरेक

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने असम, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले आगामी 2026 विधानसभा चुनावों के लिए आवश्यक दस्तावेजों की रूपरेखा तैयार की है

चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने असम, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले आगामी 2026 विधानसभा चुनावों के लिए आवश्यक दस्तावेजों की रूपरेखा तैयार की है।

आगामी विधानसभा चुनावों में लगभग 17.8 करोड़ लोग मतदान के पात्र हैं। मुख्य पहचान पत्र इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) है, हालांकि सरकार द्वारा जारी अन्य कई पहचान पत्रों को भी स्वीकार किया जाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यअसम, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के 2026 विधानसभा चुनावों में लगभग 17.8 करोड़ लोग वोट देने के पात्र हैं।
  • संस्थाEPIC (Electoral Photo Identity Card) मतदान के लिए आवश्यक प्राथमिक दस्तावेज़ है।
  • तथ्यआधार Card, PAN Card, इंडियन पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस को स्वीकार्य पहचान पत्रों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • तथ्यनए वोटर के रूप में पंजीकरण के लिए Form 6 का उपयोग किया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के विविध लोकतांत्रिक परिदृश्य में समावेशी और पारदर्शी चुनावी प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करनेके लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए उपायों की चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक बाधा: विविध ग्रामीण और शहरी जनसांख्यिकी में मतदाता सूची को रियल-टाइम अपडेट करना सुनिश्चित करना
  • पहचान सत्यापन: हाशिए पर रहने वाले समूहों के लिए वोट देने के संवैधानिक अधिकार और आधार के इस्तेमाल के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: मतदाता सूची · सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार · मतदाता पंजीकरण · भारत निर्वाचन आयोग · लोकतांत्रिक भागीदारी

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारप्रीलिम्स + मेन्स

ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) ने चुनावी मैपिंग प्रक्रिया के दौरान लगभग 9.8 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की सूचना दी है

चर्चा में क्यों: ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) ने चुनावी मैपिंग प्रक्रिया के दौरान लगभग 9.8 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की सूचना दी है। इस मामले में गलत तरीके से नाम कटने से रोकने के लिए घर-घर जाकर सत्यापन (door-to-door verification) करने के निर्देश दिए गए हैं।

ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने मतदाता सूची से 9.8 लाख नाम हटाने की सूचना दी है। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) को Form-7 के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के समाधान के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यमैपिंग प्रक्रिया के दौरान ओडिशा की मतदाता सूची से 9.8 लाख मतदाताओं को हटा दिया गया।
  • तथ्यफॉर्म-7: मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने का विरोध करने या उसे हटाने के लिए मतदाताओं द्वारा उपयोग किया जाने वाला विशिष्ट आवेदन फॉर्म।
मेन्स के लिए

प्रश्न: लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करने में एक सुदृढ़ मतदाता सूची के रखरखाव के महत्व और मताधिकार से वंचित होने की घटनाओं को रोकने में घर-घर जाकर सत्यापन (डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन) की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • डेटा इंटीग्रिटी: तकनीकी गलतियों या फिजिकल वेरिफिकेशन की कमी के कारण व्यवस्थित रूप से मतदाता सूची से नाम हटने का जोखिम
  • प्रक्रियात्मक सुरक्षा: 'वोट देने के अधिकार' की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ऑटोमेटेड मैपिंग और मैनुअल वेरिफिकेशन के बीच संतुलन की ज़रूरत

मुख्य शब्द: मतदाता सूची · अधिकारों से वंचित करना · प्रक्रियात्मक अखंडता · मतदाता सत्यापन · लोकतांत्रिक जवाबदेही

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इनकम टैक्स विभाग ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों द्वारा घोषित संपत्तियों के सत्यापन के लिए मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) पेश किया है

चर्चा में क्यों: इनकम टैक्स विभाग ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों द्वारा घोषित संपत्तियों के सत्यापन के लिए मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) पेश किया है।

आयकर विभाग ने उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के चुनावी हलफनामों और उनके आयकर रिटर्न के बीच विसंगतियों की जांच के लिए मद्रास हाई कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा है। कोर्ट ने उम्मीदवारों द्वारा संपत्ति के खुलासे से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई जून 17, 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाइनकम टैक्स विभाग: चुनाव हलफनामों (affidavits) में उम्मीदवारों द्वारा घोषित संपत्तियों के सत्यापन के लिए जिम्मेदार।
  • स्थानमद्रास हाई कोर्ट: संपत्ति विसंगतियों (asset discrepancies) से संबंधित याचिकाओं की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
  • तथ्यकोर्ट ने एसेट डिस्क्लोजर (asset disclosure) याचिकाओं पर सुनवाई 17 जून, 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु उम्मीदवारों द्वारा संपत्ति के विवरण के प्रकटीकरण के महत्व और ऐसे घोषणाओं के सत्यापन में वैधानिक निकायों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • वेरिफिकेशन में रुकावट: चुनाव हलफनामों और टैक्स रिटर्न के बीच रियल-टाइम क्रॉस-रेफरेंसिंग की कमी
  • पारदर्शिता बनाम प्राइवेसी: जनता के जानने के अधिकार और व्यक्ति के प्राइवेसी के अधिकार के बीच संतुलन
  • संस्थागत निगरानी: खुलासों में 'समय संबंधी विसंगति' रोकने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड वेरिफिकेशन मैकेनिज्म की ज़रूरत

मुख्य शब्द: पारदर्शिता · चुनावी अखंडता · संपत्ति का खुलासा · सांविधिक सत्यापन · जवाबदेही

लोकसभा ने 131वें संशोधन विधेयक को खारिज कर दिया, जो परिसीमन पैकेज का हिस्सा था और इसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव शामिल था

चर्चा में क्यों: लोकसभा ने 131वें संशोधन विधेयक को खारिज कर दिया, जो परिसीमन पैकेज का हिस्सा था और इसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव शामिल था।

131वां संशोधन विधेयक एक व्यापक परिसीमन पैकेज का हिस्सा था। इसे लोकसभा में संसद सदस्यों के मतदान द्वारा खारिज कर दिया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्य131वां संशोधन विधेयक (Amendment Bill) लोकसभा में विफल हो गया।
  • संस्थालोकसभा भारत की संसद का निचला सदन है।
  • तथ्यबिल में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव शामिल था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विधायी निकायों में लिंग आधारित आरक्षण के कार्यान्वयन में निहित संवैधानिक और प्रक्रियात्मक चुनौतियों तथा संसदीय प्रतिनिधित्व पर परिसीमन के निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • प्रतिनिधित्व का टकराव: सीमांकन में समान लिंग कोटा और 'एक व्यक्ति, एक वोट' के सिद्धांत के बीच संतुलन
  • विधायी बाधा: आरक्षण के लिए संवैधानिक संशोधन पारित करने में प्रक्रियात्मक जटिलता और राजनीतिक प्रतिरोध

मुख्य शब्द: परिसीमन · संवैधानिक संशोधन · महिला आरक्षण · संसदीय प्रक्रिया · प्रतिनिधित्व

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राज्यसभा के मनोनीत सदस्य हरिवंश को 17 अप्रैल, 2026 को निर्विरोध रूप से राज्यसभा का उपसभापति चुना गया

चर्चा में क्यों: राज्यसभा के मनोनीत सदस्य हरिवंश को 17 अप्रैल, 2026 को निर्विरोध रूप से राज्यसभा का उपसभापति चुना गया।

पूर्व भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त हुए पद को भरने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हरिवंश को नामित किया गया। संसद के विशेष सत्र और विपक्षी नेताओं के साथ परामर्श के बाद यह चुनाव संपन्न हुआ।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • पदहरिवंश: राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन (Deputy Chairman) के रूप में निर्वाचित।
  • संस्थाराज्यसभा: भारत की संसद का ऊपरी सदन (Upper House)।
  • तथ्यहरिवंश राज्यसभा के मनोनीत सदस्य थे।
  • पदरंजन गोगोई: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जिनकी सेवानिवृत्ति से यह पद खाली हुआ।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राज्यसभा में मनोनीत सदस्यों की भूमिका के महत्व और संसदीय नेतृत्व के चुनाव में आम सहमति बनाने की महत्ता पर चर्चा कीजिए।

  • संस्थागत प्रतिनिधित्व: विधायी नेतृत्व में नामित सदस्यों बनाम निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका में संतुलन
  • सहमति बनाना: संसदीय कार्यालयों के सुचारू बदलाव को सुनिश्चित करने में अंतर-पार्टी परामर्श की भूमिका

मुख्य शब्द: नामांकित सदस्य · संसदीय नेतृत्व · आम सहमति बनाना · राज्यसभा · विधायी प्रक्रिया

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए EVMs और VVPAT यूनिट्स की कमीशनिंग की प्रक्रिया शुरू की है

चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए EVMs और VVPAT यूनिट्स की कमीशनिंग की प्रक्रिया शुरू की है।

निर्वाचन आयोग (ECI) ने 23 अप्रैल, 2026 के चुनाव से पहले तमिलनाडु के सभी निर्वाचन क्षेत्रों के लिए EVMs और VVPAT इकाइयों की कमीशनिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत उम्मीदवारों और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में, EVMs के 5% हिस्से से यादृच्छिक रूप से चुने गए 1,000 वोटों का मॉक पोल (Mock Poll) शामिल था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाECI: यह वह संस्था है जो राज्य विधानसभा चुनावों के लिए EVMs और VVPAT यूनिट्स को कमीशन करने के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यMock poll parameters: 5% EVMs में से रैंडमली चुने गए 1,000 votes।
  • पदउम्मीदवार या उनके अधिकृत प्रतिनिधि और जनरल ऑब्जर्वर (General Observers) को कमीशनिंग प्रोसेस (Commissioning Process) को देखने की अनुमति है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रक्रिया की अखंडता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाए गए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की चर्चा कीजिए।

  • पारदर्शिता तंत्र: मॉक पोल के जरिए EVM-VVPAT सिंक्रोनाइज़ेशन का सार्वजनिक सत्यापन
  • संस्थागत निगरानी: चुनावी धोखाधड़ी को रोकने में जनरल ऑब्जर्वर और उम्मीदवार प्रतिनिधियों की भूमिका
  • टेक्नोलॉजिकल ट्रस्ट: मतदाता के भरोसे के लिए इलेक्ट्रॉनिक एफिशिएंसी और फिजिकल ऑडिट ट्रेल्स के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · मॉक पोल · VVPAT · पारदर्शिता · भारत निर्वाचन आयोग

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सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि पश्चिम बंगाल के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए मतदाता

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि पश्चिम बंगाल के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए मतदाता, जिन्हें अपीलीय न्यायाधिकरणों (Appellate Tribunals) द्वारा 21 या 27 अप्रैल तक मंजूरी मिल गई है, वे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए पात्र हैं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (logical discrepancy) श्रेणी के तहत क्लियर किए गए मतदाताओं पर लागू होता है। 11 अप्रैल तक, मतदाता सूची से नाम हटाने (voter list purges) के संबंध में 34 लाख से अधिक अपील दायर की गई थीं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाAppellate Tribunals वे निकाय हैं जो Special Intensive Revision (SIR) के दौरान हटाए गए मतदाताओं के मामलों को सुलझाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • तथ्यपश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की विसंगतियों के संबंध में 11 अप्रैल तक 34 लाख से अधिक अपील दायर की गईं।
  • स्थानविशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) और उसके बाद का कोर्ट का फैसला विशेष रूप से पश्चिम बंगाल राज्य से संबंधित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत को बनाए रखने में समावेशी और त्रुटि-रहित मतदाता सूची सुनिश्चित करने के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • प्रशासनिक बाधा: मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के दौरान 'लॉजिकल विसंगतियों' को सुलझाने में देरी
  • संवैधानिक आदेश: चुनावी सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में गलतियों से वोट देने के अधिकार में बाधा न आए

मुख्य शब्द: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार · मतदाता सूची · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटाए गए · अपीलीय ट्रिब्यूनल · मतदान का अधिकार

स्रोत: द हिंदू ↗+1 और खबरें इस विषय पर
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सरकार ने महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन का प्रस्ताव दिया है

चर्चा में क्यों: सरकार ने महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जो 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन (redrawing of constituencies) से जुड़ा है।

इस प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना है, साथ ही 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यमहिलाओं के लिए प्रस्तावित आरक्षण संसद और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटों के लिए है।
  • तथ्यनिर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित है।
  • संविधानप्रस्तावित संवैधानिक संशोधन को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में महिलाओं के लिए आरक्षण को जनसंख्या आधारित परिसीमन से जोड़ने के संवैधानिक और संघीय निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • संघीय टकराव: कम आबादी वृद्धि वाले दक्षिणी राज्यों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असमान नुकसान पर चिंता
  • संवैधानिक बाधा: सीटों के वितरण और प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने वाले संशोधनों के लिए दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत
  • लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व: राज्यों के लिए समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के साथ जेंडर इनक्लूसिविटी की ज़रूरत के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: संवैधानिक संशोधन · परिसीमन · संघवाद · लैंगिक प्रतिनिधित्व · जनगणना डेटा

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) 2026 के विधानसभा चुनावों के हिस्से के रूप में चेन्नई जिले में वरिष्ठ नागरिकों और बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए डाक मतपत्र (Postal Voting) के जरिए मतदान करा रहा है

चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) 2026 के विधानसभा चुनावों के हिस्से के रूप में चेन्नई जिले में वरिष्ठ नागरिकों और बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए डाक मतपत्र (Postal Voting) के जरिए मतदान करा रहा है।

फॉर्म 12D के माध्यम से घर से मतदान का विकल्प चुनने वाले 8,947 मतदाताओं के लिए डाक मतपत्र (Postal voting) के जरिए मतदान कराया जा रहा है। चेन्नई जिले में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 18 अप्रैल, 2026 तक सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच चलेगी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यचेन्नई जिले में पोस्टल वोटिंग के तहत उन 8,947 वोटरों को कवर किया गया जिन्होंने होम वोटिंग का विकल्प चुना था।
  • अधिनियम / विधेयकहोम वोटिंग (Home Voting) का विकल्प चुनने के लिए मतदाताओं द्वारा फॉर्म 12D का उपयोग किया जाता है।
  • संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) वोटर इंफॉर्मेशन स्लिप्स (VIS) वितरित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्य85 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और बेंचमार्क डिसेबिलिटीज (benchmark disabilities) वाले व्यक्तियों के लिए पोस्टल वोटिंग (Postal voting) की सुविधा दी जाती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में हाशिए पर रहने वाले समुदायों और वृद्ध आबादी के लिए समावेशी चुनावी भागीदारी सुनिश्चित करने में डाक मतपत्र (पोस्टल वोटिंग) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक जटिलता: घर से मतदान के लिए सुरक्षित बैलट ट्रांजिट और वेरिफिकेशन सुनिश्चित करना
  • समावेशी जनादेश: बेंचमार्क डिसेबिलिटी वाले लोगों के लिए मतदान की शारीरिक बाधाओं को कम करना
  • इंटेग्रिटी की चिंताएं: आसान पहुंच और प्रॉक्सी वोटिंग रोकने के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: समावेशी लोकतंत्र · चुनावी अखंडता · सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार · लॉजिस्टिक फ्रेमवर्क · मतदाताओं की पहुंच

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चर्चा में क्यों: के. पुरुषोत्तम रेड्डी द्वारा दायर एक याचिका के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में एक फैसला सुनाया। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया से चुनावी ढांचे की एकरूपता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि परिसीमन (delimitation) के दौरान संवैधानिक जनादेश और राजनीतिक विवेक के बीच स्पष्ट सीमाएं बनी रहनी चाहिए। यह फैसला आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के बीच निर्वाचन क्षेत्रों के समायोजन में समानता की मांग करने वाली एक याचिका पर आधारित है।

प्रीलिम्स बिंदु (1)
  • तथ्य2025 का फैसला विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर में निर्वाचन क्षेत्र समायोजन (constituency adjustments) से संबंधित था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: लोकतांत्रिक स्थिरता सुनिश्चित करनेके लिए परिसीमन प्रक्रियाओं के दौरान एक समान चुनावी ढांचे को बनाए रखने के संवैधानिक महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • संवैधानिक अखंडता: जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व के जनादेश और स्थिर चुनावी सीमाओं की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • संघीय टकराव: निर्वाचन क्षेत्रों में समानता की राज्य-विशिष्ट मांगों और समान राष्ट्रीय चुनावी मानकों के बीच तालमेल बिठाना

मुख्य शब्द: संवैधानिक आदेश · चुनावी ढांचा · परिसीमन · लोकतांत्रिक स्थिरता · राजनीतिक विवेक

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महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने एक याचिका दायर कर भारतीय संसद से मांग की है कि महिला आरक्षण अधिनियम (Women's Reservation Act) को जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन (delimitation) की प्रक्रियाओं से अलग किया जाए

चर्चा में क्यों: महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने एक याचिका दायर कर भारतीय संसद से मांग की है कि महिला आरक्षण अधिनियम (Women's Reservation Act) को जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन (delimitation) की प्रक्रियाओं से अलग किया जाए।

भारत भर के 488 वकीलों द्वारा हस्ताक्षरित एक याचिका में महिलाओं के लिए आरक्षण अधिनियम (Women's Reservation Act) के कार्यान्वयन को राज्य चुनावों और जनगणना के आंकड़ों के संग्रह के बाद तक टालने की मांग की गई है। कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के लिए सीटों के आवंटन पर निर्णय लेने के लिए राजनीतिक दलों और स्वतंत्र उम्मीदवारों वाले एक विशेष समिति के गठन का प्रस्ताव दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • पदइस याचिका पर पूरे भारत से 488 वकीलों ने हस्ताक्षर किए।
  • तथ्यकार्यकर्ता महिलाओं के लिए सीटों के आवंटन पर निर्णय लेने के लिए एक विशेष समिति का प्रस्ताव दे रहे हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अद्यतन जनगणना डेटा और परिसीमन के अभाव में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जुड़ी संवैधानिक और तार्किक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा की निर्भरता: अपडेटेड जनगणना के आंकड़ों की कमी से सीटों के आवंटन और सीमांकन में अनिश्चितता पैदा होती है
  • प्रतिनिधित्व समानता: आनुपातिक प्रतिनिधित्व और समर्पित सीट आवंटन तंत्र की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • संस्थागत टकराव: विधायी जनादेश और राज्य स्तर के चुनावी चक्र के समय के बीच संभावित संघर्ष

मुख्य शब्द: परिसीमन · महिला आरक्षण · जनगणना डेटा · आनुपातिक प्रतिनिधित्व · विधायी संशोधन

सरकार ने लोकसभा की संख्या बढ़ाने और सीमांकन (Delimitation) के क्रम तथा महिलाओं के आरक्षण को स्पष्ट करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और सीमांकन विधेयक पेश किया है

चर्चा में क्यों: सरकार ने लोकसभा की संख्या बढ़ाने और सीमांकन (Delimitation) के क्रम तथा महिलाओं के आरक्षण को स्पष्ट करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और सीमांकन विधेयक पेश किया है।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा की संख्या बढ़ाने और जनसंख्या के अनुपात के आधार पर सीटों के वितरण को समायोजित करने का प्रस्ताव करता है। परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) एक आयोग की स्थापना करता है, जिसके लिए परिसीमन हेतु नवीनतम जनगणना की आवश्यकता होगी और यह प्रावधान तीन केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किए जाते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • अधिनियम / विधेयकसंविधान (131वां संशोधन) बिल: लोकसभा के आकार को बढ़ाने और जनसंख्या के अनुपात के आधार पर सीटों के वितरण को समायोजित करने का प्रस्ताव करता है।
  • अधिनियम / विधेयकडेलिमिटेशन बिल (Delimitation Bill): यह एक ऐसे कमीशन की स्थापना करता है जिसके लिए डेलिमिटेशन हेतु नवीनतम जनगणना (Census) की आवश्यकता होती है।
  • तथ्यडिलिमिटेशन बिल (Delimitation Bill) के प्रावधान तीन केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) तक विस्तारित किए गए हैं।
  • तथ्य131वें Amendment Bill के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षण परिसीमन (delimitation) के बाद प्रभावी होगा।
मेन्स के लिए

प्रश्न: लोकसभा के आकार में वृद्धि और महिलाओं के लिए आरक्षण के संदर्भ में परिसीमन के समय के संवैधानिक और जनसांख्यिकीय निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • डेमोग्राफिक इक्विटी: जनसंख्या आधारित सीट वितरण और फेडरल पैरिटी के सिद्धांत के बीच संतुलन
  • विधायी क्रम: सीमांकन के बाद महिला आरक्षण में देरी का राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव
  • डेटा निर्भरता: सटीक निर्वाचन क्षेत्र सीमा निर्धारण के लिए नवीनतम जनगणना डेटा का उपयोग करने में चुनौतियां

मुख्य शब्द: परिसीमन · संवैधानिक संशोधन · प्रतिनिधित्व · जनसांख्यिकीय आनुपातिकता · महिला आरक्षण

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सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने केरल हाई कोर्ट में जज के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए दो महिला वकीलों, लिज मैथ्यू एंथरापर और ए.के

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने केरल हाई कोर्ट में जज के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए दो महिला वकीलों, लिज मैथ्यू एंथरापर और ए.के. प्रीथा की सिफारिश की है।

ये सिफारिशें बार से न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नत होने वाले वकीलों के लिए निर्धारित कोटे के तहत की गई हैं। केरल हाई कोर्ट कॉलेजियम ने पहले भी विचार के लिए प्रिंसिपल सेशंस जज के रूप में कार्यरत पांच न्यायिक अधिकारियों की सिफारिश की थी।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थासुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम: भारत में न्यायिक नियुक्तियों के लिए नामों की सिफारिश करने वाली संस्था।
  • तथ्यलिज़ मैथ्यू एंथरापर और ए.के. प्रीथा: केरल हाई कोर्ट के लिए नामांकित वकील।
  • तथ्यकेरल हाई कोर्ट कॉलेजियम ने प्रिंसिपल सेशंस जज के रूप में कार्यरत पांच न्यायिक अधिकारियों की सिफारिश की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका और उच्च न्यायपालिका में लैंगिक विविधता के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • पारदर्शिता की कमी: चयन के लिए सार्वजनिक मानदंडों का अभाव और कॉलेजियम प्रक्रिया में जवाबदेही की कमी
  • महिला वकील के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में शामिल होने के रास्ते में आने वाली सिस्टम की बाधाओं को दूर करना

मुख्य शब्द: न्यायिक स्वतंत्रता · कॉलेजियम सिस्टम · जेंडर डाइवर्सिटी · न्यायिक नियुक्तियाँ · कानून का शासन

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सुप्रीम कोर्ट ने मतदान केंद्रों पर दोहरा मतदान रोकने के लिए आइरिस (iris) और फिंगर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (finger biometric verification) शुरू करने से संबंधित एक याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने मतदान केंद्रों पर दोहरा मतदान रोकने के लिए आइरिस (iris) और फिंगर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (finger biometric verification) शुरू करने से संबंधित एक याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।

अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में पहचान की चोरी और एक से अधिक बार मतदान की समस्या को खत्म करने के लिए बायोमेट्रिक पहचान (biometric identification) लागू करने की मांग की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट, अगले आम चुनाव से पहले इसके वित्तीय प्रभावों और आवश्यक कानूनी संशोधनों का मूल्यांकन कर रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • पदसूर्यकांत: याचिका पर कोर्ट के विचार के समय भारत के मुख्य न्यायाधीश।
  • तथ्यप्रस्तावित बायोमेट्रिक सिस्टम में फिंगर और आइरिस (iris) पहचान दोनों शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के विविध जनसांख्यिकीय परिदृश्य में गोपनीयता संबंधी चिंताओं और तार्किक व्यवहार्यता की चुनौतियों का समाधान करते हुए, चुनावी अखंडता सुनिश्चित करने में जैव-मितीय प्रमाणीकरण (biometric authentication) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • प्राइवेसी-सिक्योरिटी ट्रेड-ऑफ: चुनावी धोखाधड़ी रोकने के लिए राज्य के हित और प्राइवेसी के अधिकार के बीच संतुलन
  • लॉजिस्टिक बाधाएं: दूरदराज के ग्रामीण पोलिंग स्टेशनों में बायोमेट्रिक हार्डवेयर के लिए भारी लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतें
  • डेटा इंटीग्रिटी: सेंट्रलाइज्ड स्टोरेज से जुड़े जोखिम और संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा लीक होने की संभावना

मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन · निजता का अधिकार · तकनीकी गवर्नेंस · दोहरा मतदान

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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं से संबंधित 34 लाख से अधिक लंबित अपीलों पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं से संबंधित 34 लाख से अधिक लंबित अपीलों पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की, जिन्हें 'तार्किक विसंगतियों' (logical discrepancies) के कारण मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि वोट देने का अधिकार एक 'भावनात्मक अधिकार' (sentimental right) है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम बंगाल में मतदाताओं को सूची से बाहर करने के संबंध में विभिन्न अपीलीय न्यायाधिकरणों (Appellate Tribunals) के समक्ष 34 लाख से अधिक अपील लंबित हैं। इन मामलों की सुनवाई आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से दस दिन पहले होने वाली है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यपश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के संबंध में अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunals) के सामने 34 लाख से अधिक अपील लंबित हैं।
  • स्थानपश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विसंगतियों और लंबित अपीलों को विशेष रूप से नोट किया गया है।
  • संस्थाAppellate Tribunals वे निकाय हैं जो वर्तमान में वोटर एक्सक्लूजन (voter exclusion) अपीलों की सुनवाई कर रहे हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मतदाता सूची के प्रबंधन में समावेशिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों पर चर्चा करते हुए, 'संवेगात्मक अधिकार' के रूप में मतदान के अधिकार के संवैधानिक महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • प्रशासनिक अड़चन: 34 लाख अपीलों का भारी बैकलॉग चुनावों से पहले शिकायत निवारण में सिस्टम की देरी को उजागर करता है
  • प्रक्रियात्मक निष्पक्षता: डेटा में 'तार्किक विसंगतियों' और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के मौलिक अधिकार के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: संवैधानिक नैतिकता · सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार · चुनावी अखंडता · मतदान का अधिकार · प्रशासनिक दक्षता

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भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दूसरे चरण के परिणाम घोषित किए हैं

चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दूसरे चरण के परिणाम घोषित किए हैं, जिसके तहत 9 राज्यों और 3 UTs की समेकित मतदाता सूची में 10.2% की कटौती की गई है।

SIR फेज II (SIR Phase II) ने 67 लाख मृत मतदाताओं और 1.28 करोड़ डुप्लिकेट (duplicate) मतदाताओं की पहचान की। उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की सर्वाधिक शुद्ध विलोपन (net deletion) संख्या 2.04 करोड़ दर्ज की गई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल का स्थान 83.86 लाख के साथ रहा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यSIR Phase II के बाद समेकित मतदाता सूची (consolidated electoral rolls) में 10.2% की कमी देखी गई।
  • तथ्यसक्रिय मतदाताओं की संख्या घटाकर 45.81 करोड़ कर दी गई।
  • तथ्यउत्तर प्रदेश में 2.04 करोड़ मतदाताओं का सबसे अधिक नेट डिलीशन (net deletion) दर्ज किया गया।
  • तथ्यSIR Phase II ने 67 लाख मृत मतदाताओं और 1.28 करोड़ डुप्लीकेट (duplicate) मतदाताओं की पहचान की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करने में आवधिक मतदाता सूची संशोधन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • डेटा इंटीग्रिटी: चुनावी धोखाधड़ी रोकने के लिए 'घोस्ट' वोटर्स और डुप्लीकेट एंट्रीज को कम करना
  • प्रशासनिक दक्षता: चुनावी डेटाबेस के साथ मृत्यु रिकॉर्ड के रियल-टाइम सिंक्रोनाइज़ेशन में चुनौतियां

मुख्य शब्द: मतदाता सूची · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे · लोकतंत्र · डेटा इंटीग्रिटी · भारत निर्वाचन आयोग

स्रोत: द हिंदू ↗+1 और खबरें इस विषय पर
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तमिलनाडु की एक NGO ने भारत निर्वाचन आयोग से दृष्टिबाधित मतदाताओं के लिए मतदान की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए ऑडियो-सक्षम VVPAT सिस्टम लागू करने का आग्रह किया है

चर्चा में क्यों: तमिलनाडु की एक NGO ने भारत निर्वाचन आयोग से दृष्टिबाधित मतदाताओं के लिए मतदान की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए ऑडियो-सक्षम VVPAT सिस्टम लागू करने का आग्रह किया है।

तमिलनाडु में दृष्टिबाधित व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक NGO ने भारत निर्वाचन आयोग से 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए ऑडियो-सक्षम VVPAT सिस्टम शुरू करने का अनुरोध किया है। इस NGO ने तर्क दिया कि वर्तमान सिस्टम दृष्टिबाधित मतदाताओं को दूसरों पर निर्भर होने के लिए मजबूर करते हैं, जो 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) का उल्लंघन है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकदिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (Rights of Persons with Disabilities Act), 2016।
  • तथ्यVVPAT का अर्थ Voter Verifiable Paper Audit Trail है।
  • स्थानतमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए निर्धारित हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय चुनावी प्रक्रिया में दिव्यांगजनों के लिए समावेशी और गुप्त मतदान सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • संवैधानिक संघर्ष: वोट देने के अधिकार और मत की गोपनीयता के बीच संतुलन
  • तकनीकी अंतर: मौजूदा EVM-VVPAT आर्किटेक्चर में दृष्टिबाधित मतदाताओं के लिए सुलभ हार्डवेयर की कमी

मुख्य शब्द: समावेशी लोकतंत्र · मतदान की गोपनीयता · सुलभ इंफ्रास्ट्रक्चर · मतदान का अधिकार · तकनीकी हस्तक्षेप

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