सुप्रीम कोर्ट का फैसला: भारत में हर गिरफ्तारी के लिए सीधा कम्युनिकेशन जरूरी
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चर्चा में क्यों
विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने यह निर्णय दिया कि सत्ता के मनमाने प्रयोग को रोकने के लिए संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों की प्रत्यक्ष सूचना देना अनिवार्य है।
पृष्ठभूमि
उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया है कि केवल परिजनों को सूचित करना या अस्पष्ट अभिलेख प्रदान करना पर्याप्त नहीं है। यह निर्णय इस बात पर बल देता है कि अनुच्छेद 22(1) और CrPC की धारा 50 के अनुसार, प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों के बारे में सूचित किया जाना अनिवार्य है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संविधानअनुच्छेद 22(1) गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी प्राप्त करने और कानूनी व्यवसायी से परामर्श करने के अधिकार की गारंटी देता है।
- अधिनियम / विधेयकCode of Criminal Procedure (CrPC) की धारा 50 व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों के बारे में सूचित करना अनिवार्य बनाती है।
- पदउच्चतम न्यायालय (Supreme Court) भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जो कार्यकारी कार्यों पर न्यायिक पुनरावलोकन (judicial review) का प्रयोग करती है।
मेन्स के लिए
Q. राज्य की मनमानी कार्रवाई के विरुद्ध मौलिक अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने में गिरफ्तारी के दौरान प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Protection of Article 21
- Prevention of custodial torture
- Judicial oversight of executive power
कीवर्ड: Arbitrary power · Procedural safeguards · Due process · Judicial review · Fundamental rights
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।