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भाग I · स्था. 11.2025 
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सुप्रीम कोर्ट: बंद कमरे में जातिसूचक टिप्पणी सार्वजनिक अपराध नहीं, चार्ज रद्द

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चर्चा में क्यों

उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि बंद कमरे में जातिगत अपशब्दों का प्रयोग सार्वजनिक अपराध की श्रेणी में नहीं आता, और इस प्रकार SC/ST अधिनियम के दायरे को स्पष्ट किया।

पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक विद्यालय प्रबंधक के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया। न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि 'सार्वजनिक दृश्य' के लिए किसी घटना का सामान्य जनता के लिए दृश्यमान या श्रव्य होना आवश्यक है, जो बंद कमरे में हुए विवाद के मामले में अनुपस्थित था।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • अधिनियम / विधेयकअनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989।
  • संस्थाभारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)।
  • तथ्यन्यायालय ने SC/ST Act के तहत निजी विवादों और सार्वजनिक अपराधों के बीच अंतर स्पष्ट किया।

मेन्स के लिए

प्रश्न: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के संदर्भ में 'सार्वजनिक दृश्य' (public view) की न्यायिक व्याख्या और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की गरिमा की सुरक्षा पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS2 · कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)यह भी: GS2 · विधेयक, अधिनियम एवं अध्यादेश

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।