सुप्रीम कोर्ट: बंद कमरे में जातिसूचक टिप्पणी सार्वजनिक अपराध नहीं, चार्ज रद्द
GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले· प्रीलिम्स + मेन्स·
चर्चा में क्यों
उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि बंद कमरे में जातिगत अपशब्दों का प्रयोग सार्वजनिक अपराध की श्रेणी में नहीं आता, और इस प्रकार SC/ST अधिनियम के दायरे को स्पष्ट किया।
पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक विद्यालय प्रबंधक के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया। न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि 'सार्वजनिक दृश्य' के लिए किसी घटना का सामान्य जनता के लिए दृश्यमान या श्रव्य होना आवश्यक है, जो बंद कमरे में हुए विवाद के मामले में अनुपस्थित था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकअनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989।
- संस्थाभारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)।
- तथ्यन्यायालय ने SC/ST Act के तहत निजी विवादों और सार्वजनिक अपराधों के बीच अंतर स्पष्ट किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के संदर्भ में 'सार्वजनिक दृश्य' (public view) की न्यायिक व्याख्या और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की गरिमा की सुरक्षा पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
- CJI Kant: मेहता के आरोपों के बीच शर्मा को जवाब देने का मिला मौका · 27 अगस्त 2026
- कुमार लोकतंत्र अभियान का नेतृत्व करेंगे: चेन्नई में 300 स्कूलों के 1,000 प्रतिनिधियों की बैठक · 26 अगस्त 2026
- 27 July को बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस Ajay Gadkari और Kamal Khata · 26 अगस्त 2026
- कर्नाटक में वोटर लिस्ट से 1.08 करोड़ नाम कटे, 19.5% की भारी गिरावट · 26 अगस्त 2026
- मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल के नए नाम के रूप में 'Keralam' को अधिसूचित किया · 26 अगस्त 2026
- सुप्रीम कोर्ट ने ECI को 38 लाख वोटर लिस्ट अपील्स की डिटेल देने का आदेश दिया · 26 अगस्त 2026
कोई गलती या कोई कमी?
किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।