लाइवस्ट्रीम आर्काइव एक्सेस के प्रोटोकॉल पर सुप्रीम कोर्ट की योजना से एक्टिविस्टों में भारी विरोध
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही के लाइवस्ट्रीम अभिलेखागार (archives) तक पहुंच को विनियमित करने के लिए एक प्रोटोकॉल की घोषणा की है, ताकि उनके व्यावसायिक शोषण और दुरुपयोग को रोका जा सके।
पृष्ठभूमि
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 31 जुलाई, 2026 को इस प्रोटोकॉल की घोषणा की। यह कदम 24 जुलाई के उस अंतरिम आदेश के अनुसरण में उठाया गया है, जिसमें वाणिज्यिक शोषण को रोकनेके उद्देश्य से डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर न्यायालय की कार्यवाही के प्रसार पर प्रतिबंध लगाया गया था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायिक मंच।
- तथ्ययह प्रोटोकॉल सर्वोच्च न्यायालय और राज्य उच्च न्यायालयों के लाइवस्ट्रीम के अभिलेखागार को विनियमित करने का लक्ष्य रखता है।
- तथ्ययह कदम 24 जुलाई, 2026 के एक अंतरिम आदेश के बाद शुरू किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: डिजिटल युग में 'खुली न्याय प्रणाली' के सिद्धांत और न्यायिक कार्यवाही के व्यावसायिक शोषण को रोकने की आवश्यकता के बीच उत्पन्न तनाव का विश्लेषण कीजिए।
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।