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भाग I · स्था. 11.2025 
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सुप्रीम कोर्ट: 'शादी जैसे' लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाएं Section 498A के तहत सुरक्षित

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· Judiciary & landmark judgments· Prelims + Mains·

चर्चा में क्यों

उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि 'विवाह के समान' लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं को IPC की धारा 498A के तहत अपने साथी या ससुराल वालों द्वारा उत्पीड़न के विरुद्ध संरक्षण प्राप्त है।

पृष्ठभूमि

उच्चतम न्यायालय ने धारा 498A के संबंध में कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा है। न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि यदि 'विवाह का आशय' सिद्ध होता है, तो यह संरक्षण सह-जीवन (live-in relationships) पर भी लागू होगा, जिसमें साथी या उनके रिश्तेदारों द्वारा पहुँचाई गई मानसिक या शारीरिक क्षति सम्मिलित है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • अधिनियम / विधेयकIPC की धारा 498A पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला के प्रति क्रूरता से संबंधित है।
  • संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय देश का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।
  • तथ्ययह स्पष्टीकरण स्पष्ट करता है कि 'विवाह के समान' लिव-इन संबंध (live-in relationships) उक्त धारा के तहत सुरक्षा के पात्र हैं।

मेन्स के लिए

Q. भारत में लिव-इन संबंधों के संदर्भ में 'विवाह' और 'घरेलू हिंसा' की परिभाषा के न्यायिक विकास का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • legal recognition of live-in relationships
  • protection of women's rights
  • judicial interpretation of IPC sections
  • social shift in domestic dynamics

कीवर्ड: Judicial Interpretation · Domestic Violence · Legal Protection · Live-in Relationships · Gender Justice

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: NDTV ↗यह भी: GS1 · Women & gender issues

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।