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भाग I · स्था. 11.2025 
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राजव्यवस्था एवं संविधान करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के राजव्यवस्था एवं संविधान भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 961 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधार (337) · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले (268) · संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचा (100) · संसद एवं राज्य विधानमंडल (56) · मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व एवं कर्तव्य (40) · पंचायती राज एवं शहरी स्थानीय निकाय (36) · संघवाद एवं केंद्र-राज्य संबंध (34) · वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएं (34) · कार्यपालिका (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री) (29) · संवैधानिक संस्थाएं (CAG, UPSC, वित्त आयोग, NCSC...) (27)

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › पंचायती राज एवं शहरी स्थानीय निकायप्रीलिम्स

राजस्थान में पंचायत चुनाव 15 नवंबर तक पूरे होंगे, हाई कोर्ट को मिली शेड्यूल

चर्चा में क्यों: सीमांकन और OBC आयोग की रिपोर्टिंग में हुई देरी के पश्चात, राजस्थान उच्च न्यायालय को पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक संशोधित कार्यक्रम प्राप्त हुआ है, जिसे 15 नवंबर, 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 15 अप्रैल, 2026 की प्रारंभिक समय-सीमा का अनुपालन न करने के कारण राज्य निर्वाचन आयोग को अवमानना नोटिस जारी किया है। नई समय-सीमा ओबीसी (OBC) आयोग की रिपोर्ट के अगस्त 2026 में प्रस्तुत किए जाने पर निर्भर है, ताकि निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन और मतदाता सूची संशोधनों की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाराज्य निर्वाचन आयोग: पंचायतों और नगर पालिकाओं के चुनावों के संचालन और पर्यवेक्षण के लिए उत्तरदायी संवैधानिक निकाय।
  • तथ्यचुनाव पूर्ण करने की समय सीमा: 15 नवंबर, 2026।
  • तथ्यOBC आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुति: अगस्त 2026।
  • स्थानराजस्थान उच्च न्यायालय: चुनाव की समयसीमा की वैधता की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में स्थानीय निकाय चुनावों की शुचिता सुनिश्चित करने में समयबद्ध परिसीमन और मतदाता सूची के संशोधन के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएंप्रीलिम्स + मेन्स

महाराष्ट्र में असुरक्षित इमारतों के लिए सेक्शन 79A फिर से लागू

चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र विधानमंडल ने MHADA अधिनियम की धारा 79A को पुनर्जीवित करने के लिए एक विधेयक पारित किया है, जो MHADA को 'सेस' (cess) भवनों को असुरक्षित घोषित करने का अधिकार प्रदान करता है। इसका उद्देश्य मुंबई में 13,000 भवनों के पुनर्विकास से संबंधित कानूनी गतिरोध को समाप्त करना है।

यह संशोधन महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) को C1 (मरम्मत से परे जर्जर) नोटिस जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के रूप में नामित करता है। सीस्ड (Cessed) भवन वे संरचनाएं हैं जो मुंबई के आइलैंड सिटी में 1 सितंबर, 1969 से पूर्व निर्मित की गई थीं और जो MHADA को मरम्मत सेस (repair cess) का भुगतान करती हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाMHADA: Maharashtra Housing and Area Development Authority वह निकाय है जिसे सेस्ड (cessed) इमारतों के पुनर्विकास की देखरेख करने हेतु अधिकार प्राप्त है।
  • तथ्यमुंबई के आइलैंड सिटी (Island City) में 1 सितंबर, 1969 से पहले निर्मित इमारतों को 'सेस्ड बिल्डिंग्स' (Cessed buildings) के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • तथ्यधारा 79A मकान मालिकों के लिए 9 महीने और किरायेदारों (51% सहमति के साथ) के लिए 6 महीने की अवधि प्रदान करती है ताकि MHADA के हस्तक्षेप से पहले पुनर्विकास (redevelopment) शुरू किया जा सके।
मेन्स के लिए

प्रश्न: शहरी नवीनीकरण में वैधानिक निकायों के महत्व और जर्जर शहरी आवासों के संदर्भ में निजी संपत्ति के अधिकारों तथा सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेप्रीलिम्स + मेन्स

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में गौ-वध पर रोक लगाई, सरकार ने दी चुनौती

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में गौ-वध पर प्रतिबंध लगाने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी है, जिससे राज्य की विधायी शक्ति बनाम न्यायिक निरीक्षण के विषय पर एक कानूनी विवाद उत्पन्न हो गया है।

13 जुलाई, 2026 को, उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के 27 मई, 2026 के आदेश पर रोक लगा दी। तमिलनाडु सरकार ने तर्क दिया कि यह प्रतिबंध तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: देश की शीर्ष अदालत, जिसके निर्णय अन्य सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं।
  • अधिनियम / विधेयकTamil Nadu Animal Preservation Act, 1958: पशुधन के संरक्षण को विनियमित करने वाला राज्य विधान।
  • तथ्ययह स्थगन आदेश 27 मई, 2026 को लागू किए गए प्रतिबंध के संबंध में 13 जुलाई, 2026 को जारी किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पशु कल्याण पर कानून बनाने के संबंध में राज्य सरकार की शक्तियों और ऐसे विधायी कार्यों की समीक्षा करने में न्यायपालिका की भूमिका के बीच संवैधानिक संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा देने के लिए संसद का मानसून सेशन

चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार 'वन्दे मातरम्' को वैधानिक संरक्षण प्रदान करनेउद्देश्य से 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026' को पेश करनेके लिए जुलाई 2026 में संसद का मानसून सत्र आहूत कर रही है।

मानसून सत्र 20 जुलाई, 2026 को शुरू होने के लिए निर्धारित है। प्रमुख विधायी विषयों में आयकर (संशोधन) विधेयक और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकराष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम: यह राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगान के लिए कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
  • संस्थासुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन: यह सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक संरचना और संख्या से संबंधित है।
  • तथ्यमानसून सत्र: बजट सत्र के साथ मिलकर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले संसद के दो प्रमुख सत्रों में से एक।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राष्ट्रीय प्रतीकों के संरक्षण में विधायी संशोधनों के महत्व और सार्वजनिक शिकायतों के निवारण में संसदीय सत्रों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचाप्रीलिम्स + मेन्स

मध्य प्रदेश में UCC बिल को मंजूरी, आदिवासी समुदायों को रखा बाहर

चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 19 जुलाई, 2026 को एक समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों का मानकीकरण करना है, जबकि अनुसूचित जनजातियों को इससे छूट दी गई है।

इस विधेयक का प्रारूप सेवानिवृत्त उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व वाली एक समिति द्वारा तैयार किया गया था। यह विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है, बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाता है, और लिव-इन संबंधों के लिए शपथ-पत्र की आवश्यकता निर्धारित करता है, जिसमें विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों और संविधान के भाग XXI के अंतर्गत संरक्षित समुदायों को बाहर रखा गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संविधानभारतीय संविधान का भाग XXI अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन का प्रावधान करता है।
  • अधिनियम / विधेयकमध्य प्रदेश UCC मसौदा विधेयक विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है और बहुविवाह को प्रतिबंधित करता है।
  • तथ्यइस विधेयक को 19 जुलाई, 2026 को मध्य प्रदेश कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अनुसूचित जनजातियों को छूट प्रदान करते हुए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली संवैधानिक चुनौतियों और सामाजिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेप्रीलिम्स + मेन्स

सिर्फ गालियां देना IPC की धारा 294 के तहत अश्लीलता नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 294 के दायरे को स्पष्ट करते हुए यह निर्णय दिया कि केवल अपशब्दों का प्रयोग, कामुक या भ्रष्ट करने के इरादे के बिना, अश्लीलता की श्रेणी में नहीं आता है।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति विपुल एम. पन्चोली की सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने तमिलनाडु में भूमि विवाद से संबंधित एक दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि धारा 294(b) के अंतर्गत किसी सामग्री को कानूनी रूप से अश्लील वर्गीकृत करने के लिए उसका 'कामुक' या 'भ्रष्ट करने वाला' होना आवश्यक है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • अधिनियम / विधेयकIPC की धारा 294: सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कृत्यों और गीतों से संबंधित है।
  • अधिनियम / विधेयकIPC की धारा 326: महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उसके साथ हमला करने या आपराधिक बल प्रयोग से संबंधित है।
  • अधिनियम / विधेयकIPC की धारा 506(ii): यह आपराधिक धमकी के लिए दंड से संबंधित है।
  • तथ्ययह मामला अगस्त 2017 में तमिलनाडु में एक भूमि विवाद से उत्पन्न हुआ था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत 'अश्लीलता' की न्यायिक व्याख्या और सार्वजनिक व्यवस्था तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर इसके निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारप्रीलिम्स + मेन्स

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने शुरू किया नया आउटरीच कैंपेन

चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास के दौरान मतदाताओं की मनमानी ढंग से सूची से कटौती के विपक्ष के आरोपों का खंडन करने के लिए एक सार्वजनिक संपर्क अभियान शुरू किया।

निर्वाचन आयोग (ECI) की ECINET पहल ने अपने प्रायोगिक चरण के दौरान 101 मिलियन से अधिक पंजीकरण फॉर्मों को संसाधित किया। विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यास वर्तमान में दस्तावेजीकरण आवश्यकताओं के संबंध में कानूनी चुनौतियों और विपक्षी दलों के विरोध का सामना कर रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) एक संवैधानिक निकाय है जिसकी स्थापना अनुच्छेद 324 के तहत की गई है।
  • तथ्यECINET के पायलट चरण में 101 मिलियन से अधिक पंजीकरण फॉर्मों को प्रोसेस किया गया।
  • संस्थाECI निर्वाचक नामा (electoral rolls) तैयार करने और उनमें संशोधन करने के लिए उत्तरदायी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: निर्वाचन नामा की शुचिता सुनिश्चित करने में निर्वाचन आयोग की भूमिका और मतदाता पंजीकरण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › संवैधानिक संस्थाएं (CAG, UPSC, वित्त आयोग, NCSC...)प्रीलिम्स

भारत निर्वाचन आयोग ने बताया 95 करोड़ वोटर और 12 लाख ऑडिटर

चर्चा में क्यों: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 17 जुलाई, 2026 को आयोजित एक मीडिया सम्मेलन के दौरान भारत की मतदाता सूचियों के विशाल विस्तार और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) की ऑडिटिंग भूमिका पर प्रकाश डाला।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची में लगभग 95 करोड़ मतदाताओं की संख्या दर्ज की है। इस प्रक्रिया में 12 लाख बूथ स्तर के अधिकारी (BLOs) और 15 लाख बूथ स्तर के एजेंट (BLAs) समवर्ती लेखा परीक्षकों (concurrent auditors) के रूप में कार्यरत हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यजुलाई 2026 तक भारत की मतदाता सूची में लगभग 95 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
  • संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है।
  • पदज्ञानेश कुमार ने 2026 में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य किया।
  • तथ्य12 लाख Booth Level Officers (BLOs) और 15 लाख Booth Level Agents (BLAs) चुनावी प्रक्रिया में समवर्ती लेखा परीक्षकों (concurrent auditors) के रूप में कार्य करते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा अपनाई जाने वाली 'समानांतर ऑडिटिंग' (concurrent auditing) की कार्यप्रणाली के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेप्रीलिम्स + मेन्स

सुप्रीम कोर्ट ने 'सेकंड-क्लास पैसेंजर' शब्द पर जताई नाराजगी, दिए 8 लाख रुपये

चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने आधिकारिक दस्तावेजों में 'द्वितीय श्रेणी के यात्री' (second-class passenger) शब्द के प्रयोग की आलोचना की है और इसे असंवैधानिक तथा अपमानजनक बताया है, क्योंकि इसका ऐतिहासिक रूप से वर्ग विभाजन से संबंध रहा है।

उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2015 की रेल दुर्घटना में मृत चंद्रकांत ठक्कर की पत्नी को ₹8,00,000 का मुआवजा प्रदान किया। न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि रेलवे के दस्तावेजीकरण में प्रयुक्त शब्दावली प्रतिगामी ऐतिहासिक वर्ग विभाजन को प्रतिबिंबित करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: संविधान के तहत सर्वोच्च न्यायिक निकाय और अपील की अंतिम अदालत।
  • तथ्य2015 के ट्रेन दुर्घटना मामले में पीड़ित के परिवार को ₹8,00,000 का मुआवजा प्रदान किया गया।
  • पदउच्चतम न्यायालय के पास असंवैधानिक शब्दावली या प्रथाओं को रद्द करने की न्यायिक समीक्षा (judicial review) की शक्ति है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: प्रतिगामी प्रशासनिक शब्दावली के विरुद्ध नागरिकों की गरिमा की रक्षा करने और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचाप्रीलिम्स + मेन्स

वोटर लिस्ट से नाम हटने पर नागरिकता खत्म नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दी सफाई

चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अर्थ भारतीय नागरिकता का हनन नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि नागरिकता की स्थिति का निर्धारण केवल संबंधित प्राधिकारी द्वारा अंतिम अधिनिर्णयन के माध्यम से ही किया जा सकता है। वर्तमान में, मतदाता सूची से नाम हटाने के संबंध में लगभग 33.5 लाख अपील लंबित हैं, जिनमें से निपटान किए गए मामलों के 70% में नामों की बहाली हुई है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, जो न्यायिक पुनरावलोकन (judicial review) का प्रयोग करती है।
  • तथ्य33.5 लाख: न्यायालय के अवलोकन के अनुसार निर्वाचन नामा (electoral roll) विलोपन से संबंधित लंबित अपीलों की कुल संख्या।
  • तथ्य70%: उन निपटाए गए मामलों का प्रतिशत जिनमें निर्वाचक नामा (electoral roll) में नाम बहाल किए गए।
  • योजनाअन्नपूर्णा योजना: महिलाओं को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने वाली एक केंद्र सरकार की योजना।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए मतदाता सूची को प्राथमिक निर्धारक के रूप में उपयोग करने के कानूनी और प्रशासनिक निहितार्थों तथा नागरिकता की स्थिति के स्पष्ट अधिनिर्णयन की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस ↗+1 और खबरें इस विषय पर
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने की सहमति दी है

चर्चा में क्यों: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने की सहमति दी है, जिसमें दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन की निरंतर निगरानी को चुनौती दी गई है। इस याचिका में अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

आइशे घोष ने 20 जुलाई, 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को डराने-धमकाने के उद्देश्य से स्थायी निगरानी टावर और फोटोग्राफी का उपयोग किया। याचिका में दावा किया गया है कि ये कृत्य अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) का उल्लंघन करते हैं और डेटा प्रसंस्करण के लिए किसी घोषित कानूनी आधार का अभाव है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संविधानअनुच्छेद 19(1)(a) भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
  • संविधानअनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के एकत्र होने के अधिकार की गारंटी देता है।
  • तथ्ययाचिका में आरोप है कि निगरानी में जंतर-मंतर पर एक स्थायी टावर के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी शामिल है।
  • संस्थापुलिस निगरानी के विरुद्ध चुनौती सुनने वाली न्यायिक संस्था दिल्ली उच्च न्यायालय है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: एक लोकतंत्र में राज्य की सुरक्षा उपायों और शांतिपूर्ण विरोध के मौलिक अधिकार के बीच उत्पन्न होने वाले तनाव का परीक्षण कीजिए। असहमति की अभिव्यक्ति पर 'चिलिंग इफेक्ट' (भयपूर्ण प्रभाव) को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को किस प्रकार विनियमित किया जा सकता है? का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचाप्रीलिम्स + मेन्स

मराठा आरक्षण पर बॉम्बे हाई कोर्ट में बड़ी सुनवाई, 50% कैप पर सवाल

चर्चा में क्यों: बॉम्बे उच्च न्यायालय महाराष्ट्र SEBC अधिनियम, 2024 की संवैधानिक वैधता की जांच कर रहा है, जो मराठा समुदाय के लिए 10% आरक्षण और 50% आरक्षण की सीमा पर इसके प्रभाव से संबंधित है।

महाराष्ट्र राज्य सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) हेतु आरक्षण अधिनियम, 2024, शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान करता है। न्यायालय वर्तमान में इस बात का मूल्यांकन कर रहा है कि क्या यह अधिनियम न्यायिक दृष्टांतों द्वारा निर्धारित आरक्षण की 50% की स्थापित सीमा का उल्लंघन करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संविधानइंद्रा साहनी मामले (1992) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरक्षण पर 50% की सीमा निर्धारित की गई थी।
  • अधिनियम / विधेयकमहाराष्ट्र SEBC अधिनियम, 2024: शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में मराठों के लिए 10% आरक्षण प्रदान करता है।
  • तथ्यमराठा समुदाय को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) की श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा रहा है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: समानता के सिद्धांत को सुनिश्चित करते हुए, सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों को समायोजित करने के लिए 50% आरक्षण की सीमा से परे जाने को राज्य किस सीमा तक न्यायसंगत ठहरा सकता है? का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल याचिकाएं मंजूर कीं, लाइव-स्ट्रीमिंग पर रोक

चर्चा में क्यों: एक याचिकाकर्ता द्वारा उत्पन्न व्यवधान की घटना के पश्चात, उच्चतम न्यायालय ने वर्चुअल याचिकाओं के लिए एक प्रोटोकॉल को मंजूरी दी और लाइव-स्ट्रीमिंग पर प्रतिबंध लगा दिया।

उच्चतम न्यायालय की पूर्ण पीठ ने गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से लाइव-स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध लगाते हुए आभासी उपस्थिति (virtual appearances) की अनुमति देने वाले प्रोटोकॉल को अनुमोदित किया है। न्यायालय ने 'समाधान समारोह' के हिस्से के रूप में 9,177 मामलों के निपटान हेतु 21-23 अगस्त तक एक विशेष लोक अदालतनिर्धारित की है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थासुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के अन्य सभी न्यायाधीश शामिल होते हैं।
  • तथ्य21-23 अगस्त के लिए निर्धारित विशेष Lok Adalat का लक्ष्य 9,177 मामलों का निपटान करना है।
  • पदभारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) Full Court की कार्यवाही की अध्यक्षता करते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को सुनिश्चित करने में न्यायिक गरिमा बनाए रखने की चुनौतियों और आभासी कार्यवाही (virtual proceedings) की प्रभावकारिता का विश्लेषण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेमेन्स

दिल्ली हाई कोर्ट में 3 दिन की हड़ताल टली, DHCBA ने फैसला लिया

चर्चा में क्यों: दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (DHCBA) ने एक हड़ताल को स्थगित कर दिया है, क्योंकि केंद्रीय विधि मंत्री और मुख्य न्यायाधीश ने जिला न्यायालयों के वित्तीय क्षेत्राधिकार को ₹... से बढ़ाने के संबंध में चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

धनराधिक क्षेत्राधिकार से तात्पर्य उस मौद्रिक सीमा से है जिसके आधार पर एक न्यायालय विवाद के मूल्य के अनुसार सुनवाई करने हेतु अधिकृत होता है। प्रस्तावित वृद्धि का उद्देश्य मामलों को उच्च न्यायालयों से जिला न्यायालयों में स्थानांतरित करना है, किंतु अधिवक्ताओं ने बौद्धिक संपदा (IP) मुकदमों पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में डेटा के अभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यदिल्ली जिला न्यायालयों के लिए प्रस्तावित वित्तीय क्षेत्राधिकार में वृद्धि: ₹2 करोड़ से ₹10 करोड़।
  • संस्थाDHCBA: Delhi High Court Bar Association।
  • पदअर्जुन राम मेघवाल: भारत के केंद्रीय कानून मंत्री।
  • तथ्यहड़ताल की अवधि: 14 जुलाई से शुरू होने वाले लगातार तीन दिन।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जिला न्यायालयों के वित्तीय क्षेत्राधिकार में वृद्धि का न्यायिक पदानुक्रम और बौद्धिक संपदा अधिकारों जैसे विशिष्ट मुकदमों की दक्षता पर पड़ने वाले प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारप्रीलिम्स

दिल्ली वोटर लिस्ट अपडेट में देरी, भारत निर्वाचन आयोग ने 19 अक्टूबर तक बढ़ाया समय

चर्चा में क्यों: निर्वाचन गणना प्रपत्रों के धीमे डिजिटलीकरण के कारण, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की समय-सीमा को बढ़ाकर 19 अक्टूबर, 2024 कर दिया है।

निर्वाचक मंडल (ECI) दिल्ली में 1.45 करोड़ से अधिक मतदाताओं के निर्वाचन नामा का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) आयोजित कर रहा है। घोषणा के समय तक, केवल 15% गणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया गया है, जबकि पुरानी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली जैसे विशिष्ट जिले 10% से कम की प्रगति के साथ पिछड़ रहे हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाElection Commission of India (ECI) संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के संचालन के लिए उत्तरदायी एक संवैधानिक निकाय है।
  • तथ्यसंशोधन अपडेट के अनुसार, दिल्ली के 1.45 करोड़ मतदाताओं के केवल 15% नामांकन फॉर्म (enumeration forms) को डिजिटल किया गया था।
  • तथ्यदिल्ली निर्वाचन संशोधन के लिए ड्राफ्ट रोल 17 अगस्त, 2024 को प्रकाशित होने निर्धारित हैं।
  • तथ्यसंशोधित मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन अब 19 अक्टूबर, 2024 के लिए निर्धारित किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में एक डिजिटल मतदाता सूची प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और समावेशी एवं सटीक मतदाता पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस ↗+6 और खबरें इस विषय पर
GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व एवं कर्तव्यप्रीलिम्स + मेन्स

पैगंबर मोहम्मद पर अपमानजनक कंटेंट रोकने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने पैगंबर मुहम्मद के विरुद्ध सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री पर रोक लगानेकी मांग करने वाली एक याचिकाको खारिज कर दिया और इस बात पर बल दिया कि मानक कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करने के लिए अनुच्छेद 32 का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

15 जुलाई, 2026 को, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिंह और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मोहम्मद अनस चौधरी द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को अनुच्छेद 32 के तहत प्रत्यक्ष न्यायिक हस्तक्षेप मांगने के बजाय विशिष्ट कानूनों और सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2009 का उपयोग करने का निर्देश दिया।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संविधानभारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने के अधिकार का प्रावधान करता है।
  • संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय देश का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।
  • तथ्यसूचना प्रौद्योगिकी (सूचना के अवरोधन, निगरानी और डिक्रिप्शन के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम 2009 में स्थापित किए गए थे।
  • तथ्ययाचिका को 15 जुलाई, 2026 को खारिज कर दिया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने के राज्य के दायित्व के बीच संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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लद्दाख के 7 जिलों को मिलेंगे LAHDC एक्ट के फायदे, लोकल काउंसिल होंगी पावरफुल

चर्चा में क्यों: लद्दाख प्रशासन का लक्ष्य केंद्र शासित प्रदेश में शासन को विकेंद्रीकृत करने हेतु लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) अधिनियम के लाभों को सभी सात जिलों तक विस्तारित करना है।

LAHDC अधिनियम को मूल रूप से 1997 में स्थानीय शासन पर निर्वाचित परिषदों को कार्यकारी शक्तियाँ प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। वर्ष 2019 में लद्दाख को एक विधानमंडल रहित केंद्र शासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया था और वर्तमान में यह अपने जिलों में 32 तहसीलों से मिलकर बना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाLAHDC: लद्दाख में एक स्वायत्त निकाय जिसके पास स्थानीय शासन के मुद्दों पर कार्यकारी शक्तियाँ हैं।
  • तथ्य17 नए तहसीलों की अधिसूचना के बाद, लद्दाख में वर्तमान में 32 तहसीलें शामिल हैं।
  • स्थानलद्दाख: एक केंद्र शासित प्रदेश जिसमें विधानमंडल नहीं है, जिसे 2019 में जम्मू और कश्मीर से अलग किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: लद्दाख जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों में सहभागी लोकतंत्र और प्रभावी स्थानीय शासन सुनिश्चित करने में स्वायत्त पहाड़ी परिषदों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू ↗+1 और खबरें इस विषय पर
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लोकसभा सीटों के लिए 1971 की आबादी का आधार बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने PIL खारिज किया

चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन हेतु 1971 की जनगणना के आंकड़ों के उपयोग को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL)खारिज कर दी है, और वर्तमान परिसीमन प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है।

उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि मतदान का अधिकार परिसीमन प्रक्रिया से स्वतंत्र है। न्यायालय ने संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के आवंटन हेतु 1971 के जनसंख्या आंकड़ों के उपयोग को बरकरार रखा, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि प्रतिनिधित्व स्थापित संवैधानिक ढांचे के अनुरूप बना रहे।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संविधाननिर्वाचनों का परिसीमन भारत के संविधान के प्रावधानों और Delimitation Act द्वारा शासित होता है।
  • तथ्यवर्तमान में, प्रत्येक राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या निर्धारित करने के लिए 1971 की जनगणना के आंकड़ों को आधार (baseline) माना जाता है।
  • संस्थाभारत के सर्वोच्च न्यायालय के पास विधायी संशोधनों पर न्यायिक पुनरावलोकन (judicial review) की शक्ति है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करें।
मेन्स के लिए

प्रश्न: संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में आनुपातिक जनसंख्या प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और संघीय स्थिरता बनाए रखने के बीच संवैधानिक संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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तमिलनाडु चुनाव में बच्चों को टारगेट करने वाले कैंपेन पर ECI की जांच

चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान बच्चों को लक्षित करने वाले राजनीतिक अभियानों पर लगाए गए प्रतिबंधों की समीक्षा के संबंध में मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) को सूचित किया।

निर्वाचन आयोग (ECI) ने स्पष्ट किया है कि बच्चे कानूनी रूप से मतदाताओं के व्यवहार को प्रभावित नहीं करते हैं क्योंकि मतदाता संरक्षित वयस्क हैं। निर्वाचन आयोग सोशल मीडिया की सुलभता के कारण बच्चों को लक्षित करने वाले राजनीतिक प्रचार को विनियमित करने के लिए दिशा-निर्देशों पर विचार कर रहा है। निर्वाचन आयोग ने चुनाव अवधि के दौरान अवैध वितरण को रोकनेके लिए ₹599.24 करोड़ की नकद राशि की जब्ती की सूचना दी है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाभारत में चुनाव संपन्न कराने के लिए Election Commission of India (ECI) एक संवैधानिक निकाय है।
  • तथ्यECI ने तमिलनाडु में अवैध नकदी वितरण के विरुद्ध निवारक उपायों के दौरान ₹599.24 करोड़ की नकदी जब्त की।
  • पदमद्रास उच्च न्यायालय चुनाव संचालन से संबंधित Public Interest Litigation (PIL) की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान समान अवसर सुनिश्चित करने और संवेदनशील समूहों के शोषण को रोकने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए उपायों का विश्लेषण कीजिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने विवादित रिपोर्ट को ऑनलाइन अपलोड करने का दिया ऑर्डर

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने समान कानूनी मानक सुनिश्चित करनेके उद्देश्य से यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी की रिपोर्ट को ऑनलाइन प्रकाशित करने का निर्देश दिया है।

उच्चतम न्यायालय का यह आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय (17 मार्च) और पटना उच्च न्यायालय (9 जुलाई) द्वारा 'दुष्कर्म के प्रयास' की परिभाषा के संबंध में दिए गए विशिष्ट निर्णयों के अनुपालन में है। न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि प्राथमिकी (FIR) दर्ज करते समय न्यायाधीशों को स्थापित नियमावलियों का पालन करना अनिवार्य है और संबंधित राज्यों को तदनुसार पुलिस थानों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाNational Judicial Academy (NJA): भारत में न्यायाधीशों को न्यायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्थापित एक स्वायत्त निकाय।
  • पदभारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI): भारत के सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी, जो सर्वोच्च न्यायालय की अध्यक्षता करते हैं।
  • तथ्यसुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता और सभी न्यायिक अधिकारियों के लिए सुलभता सुनिश्चित करने हेतु NJA रिपोर्ट के ऑनलाइन प्रकाशन का आदेश दिया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: यौन अपराधों के मामलों के निपटान में पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु न्यायिक संवेदनशीलता और मानकीकृत प्रोटोकॉल के महत्व पर चर्चा कीजिए।

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कर्नाटक में 9.37 लाख वोटर नहीं मिले, चुनाव आयोग ने लिस्ट में पहचान की

चर्चा में क्यों: कर्नाटक निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान 9.37 लाख से अधिक अप्राप्य मतदाताओं की पहचान की है, जिससे सत्यापन का उत्तरदायित्व राजनीतिक दलों पर स्थानांतरित हो गया है।

निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक के कुल 5.54 करोड़ निर्वाचकों में से 9.37 लाख निर्वाचकों को अप्राप्य (untraceable) पाया है। विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के अंतर्गत राजनीतिक दलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अंतिम मतदाता सूची के अद्यतनीकरण से पूर्व इन मामलों का सत्यापन करें।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थानिर्वाचन आयोग (ECI) चुनावी नामावली तैयार करने और उनके रखरखाव के लिए उत्तरदायी एक संवैधानिक निकाय है।
  • तथ्यजुलाई 2026 तक, कर्नाटक के 5.54 करोड़ निर्वाचकों में से 9.37 लाख अप्राप्य (untraceable) मतदाताओं की पहचान की गई।
  • तथ्यSpecial Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची की सटीकता और अखंडता सुनिश्चित करने की एक आवधिक प्रक्रिया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: एक विशाल लोकतंत्र में सटीक मतदाता सूची बनाए रखने में आने वाली चुनौतियों और सत्यापन प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू ↗+2 और खबरें इस विषय पर
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पोर्नोग्राफी से बच्चों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मांगी नेशनल पॉलिसी

चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को नाबालिगों के लिए पोर्नोग्राफी तक आसान ऑनलाइन पहुंच को संबोधित करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने का निर्देश दिया है, और इसे 'सर्वोच्च सार्वजनिक महत्व' का विषय बताया है।

13 जुलाई, 2026 को, उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि वर्तमान कानून मुख्य रूप से अश्लील सामग्री के उत्पादन और वितरण को दंडित करते हैं, न कि उसे देखने की क्रिया को। न्यायालय ने नाबालिगों को ऑनलाइन अश्लील सामग्री से बचाने के लिए एक राष्ट्रीय कार्ययोजना अनिवार्य की है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, जो न्यायिक पुनरावलोकन (judicial review) का प्रयोग करती है।
  • तथ्यवर्तमान कानूनी ढांचा: मुख्य रूप से अश्लील सामग्री के उत्पादन और वितरण पर केंद्रित है।
  • पदसंघ सरकार: राष्ट्रीय नीतियों और कार्य योजनाओं को तैयार करने के लिए उत्तरदायी कार्यकारी निकाय।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और ऑनलाइन पोर्नोग्राफी के विनियमन के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली कानूनी और नैतिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

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जम्मू-कश्मीर में DDCs का कार्यकाल खत्म, लोकल संस्थाएं हुईं बंद

चर्चा में क्यों: जम्मू और कश्मीर में जिला विकास परिषदों (DDCs) का पांच वर्षीय कार्यकाल 24 फरवरी, 2026 को बिना नए चुनावों के समाप्त हो गया है, जिसने क्षेत्र में विकेंद्रीकृत शासन की प्रभावकारिता पर एक बहस छेड़ दी है।

जम्मू और कश्मीर में प्रत्यक्ष स्थानीय लोकतंत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2021 में DDCs की स्थापना की गई थी। इन परिषदों ने 24 फरवरी, 2026 को अपना प्रारंभिक पांच-वर्षीय कार्यकाल पूर्ण कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में यह संस्थागत निष्क्रियता की अवधि में है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • संस्थाDistrict Development Councils (DDCs) जम्मू और कश्मीर में जमीनी स्तर पर शासन की सुविधा के लिए डिज़ाइन की गई स्थानीय निकाय हैं।
  • तथ्यजम्मू और कश्मीर में DDCs का प्रारंभिक कार्यकाल 2021 में स्थापित किया गया था और यह 24 फरवरी, 2026 को समाप्त होगा।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जम्मू और कश्मीर जैसे संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देने में जिला विकास परिषदों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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19 राज्यों के नए वोटर्स से मांगे जाएंगे माता-पिता की डिटेल

चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करनेके उद्देश्य से 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के नए मतदाताओं से उनके माता-पिता के मतदान केंद्र और क्रम संख्या की जानकारी प्राप्त करने हेतु ECINET पोर्टल को अपडेट किया है।

यह अद्यतन उन 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होता है जहाँ जून 2023 से विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया जारी थी या पूर्ण हो चुकी है। बिहार को विशेष रूप से इस आवश्यकता से बाहर रखा गया है। यह डेटा ECINET ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से एकत्र किया जा रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाECI: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय।
  • तथ्यECINET: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता पंजीकरण और प्रबंधन के लिए उपयोग किया जाने वाला ऑनलाइन पोर्टल।
  • तथ्यSIR: Special Intensive Revision, निर्वाचक नामा को अद्यतन और सत्यापित करने के लिए एक आवधिक अभ्यास है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: निर्वाचन नामा की शुचिता बनाए रखने में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revisions) के महत्व और पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान प्रथम बार के मतदाताओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

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बिना कानूनी संशोधन के फॉर्म 6 में चुनाव आयोग ने जोड़ा नया सेक्शन

चर्चा में क्यों: निर्वाचन आयोग (ECI) ने औपचारिक विधायी संशोधन के बिना, पिछले चुनावी संशोधनों में माता-पिता की स्थिति से संबंधित एक नया कॉलम ऑनलाइन फॉर्म 6 में सम्मिलित किया है।

निर्वाचक आयोग (ECI) ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में एक अतिरिक्त खंड जोड़ा है, जिसमें यह पूछा गया है कि क्या आवेदक या उनके माता-पिता पिछले विशेष गहन संशोधन (SIR) के अंतर्गत सम्मिलित थे। इस विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान, 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 5.58 करोड़ नाम हटा दिए गए थे, जिससे बच्चों के पंजीकरण के संबंध में चिंताएं उत्पन्न हुई हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकRepresentation of the People Act, 1950 की धारा 28 निर्वाचकीय नामावली (electoral rolls) में संशोधन की प्रक्रिया को नियंत्रित करती है।
  • संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) चुनावों के संचालन के लिए उत्तरदायी एक संवैधानिक निकाय है।
  • तथ्यविशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 10 राज्यों और 3 UTs में मतदाता सूची से 5.58 करोड़ नाम हटा दिए गए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अंतर्गत औपचारिक विधायी संशोधनों के बिना निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावी प्रपत्रों में प्रक्रियात्मक परिवर्तन करने के संवैधानिक और कानूनी निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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पश्चिम बंगाल ने ड्राफ्ट Uniform Civil Code की जांच के लिए बनाया हाई-लेवल पैनल

चर्चा में क्यों: पश्चिम बंगाल सरकार ने एक समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के प्रारूप की जांच के लिए न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है।

समिति का गठन 2 जुलाई को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने से संबंधित एक प्रारूपित समान नागरिक संहिता (UCC) की समीक्षाकरने हेतु किया गया था। पश्चिम बंगाल 2014 के बाद समान नागरिक संहिता को अपनाने वाला चौथा राज्य बनने का लक्ष्य रखता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संविधानभारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
  • तथ्य2024 तक, तीन भारतीय राज्यों ने आधिकारिक रूप से Uniform Civil Code को अपनाया है।
  • पदपश्चिम बंगाल UCC समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत जैसे बहुलवादी समाज में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के कार्यान्वयन के संवैधानिक और सामाजिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

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मद्रास हाई कोर्ट ने ECI को 31 जुलाई तक उपचुनाव की अधिसूचना से रोका

चर्चा में क्यों: मद्रास उच्च न्यायालय ने संभावित दोहरे प्रतिनिधित्व को रोकनेहेतु भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को तमिलनाडु के पांच निर्वाचन क्षेत्रों में 31 जुलाई, 2026 तक उपचुनावों की अधिसूचना जारी करने से रोक दिया है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 10 जुलाई, 2026 को के. वेंकटचलापथी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के अनुसरण में स्थगन आदेश जारी किया। यह स्थगन तमिलनाडु के उन पांच विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों पर लागू होता है जहाँ वर्तमान में चुनावी याचिकाएं लंबित हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाECI: संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनावों के संचालन के लिए उत्तरदायी एक संवैधानिक निकाय।
  • स्थानमद्रास उच्च न्यायालय: तमिलनाडु राज्य की सर्वोच्च न्यायिक संस्था।
  • तथ्यन्यायालय ने उपचुनावों की अधिसूचना के लिए 31 जुलाई, 2026 की समय-सीमा निर्धारित की है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: चुनावों की समय-सारणी निर्धारित करने में निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता के संवैधानिक महत्व और चुनावी शुचिता सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

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