यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के राजव्यवस्था एवं संविधान भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,002 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधार (361) · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले (276) · संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचा (101) · संसद एवं राज्य विधानमंडल (57) · मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व एवं कर्तव्य (42) · पंचायती राज एवं शहरी स्थानीय निकाय (37) · वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएं (35) · संघवाद एवं केंद्र-राज्य संबंध (34) · कार्यपालिका (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री) (31) · संवैधानिक संस्थाएं (CAG, UPSC, वित्त आयोग, NCSC...) (28)
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनावी नामावली की शुचिता सुनिश्चित करनेके उद्देश्य से 11 जुलाई, 2026 को पांच क्षेत्रों के लिए मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया, जिसमें लगभग 24 लाख नामों को हटाने का प्रावधान है।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण आयोग (ECI) ने ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम तथा दादरा और नगर हवेली एवं दान और दीव के लिए मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया है। कुल 3.72 करोड़ मूल निर्वाचकों में से, प्रवास, मृत्यु या पुनरावृत्ति प्रविष्टियों के कारण 24 लाख नामों को हटा दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाElection Commission of India (ECI) संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के संचालन के लिए उत्तरदायी एक संवैधानिक निकाय है।
तथ्यजुलाई 2026 की ड्राफ्ट सूची में ओडिशा ने 20.12 लाख नामों के साथ सर्वाधिक विलोपन दर्ज किया।
तथ्यदादरा और नगर हवेली और दमन और दीव में मतदाता सूची में 30% की कमी देखी गई।
तथ्यमतदाताओं के पास 11 जुलाई, 2026 से 11 सितंबर, 2026 तक की अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले नाम हटाने (deletions) के लिए एक महीने की अवधि होगी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करने में निर्वाचन नामावली के समय-समय पर पुनरीक्षण के महत्व और बड़े पैमाने पर होने वाले प्रवास के प्रबंधन में निर्वाचन आयोग के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: पश्चिम बंगाल सरकार ने एक समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के प्रारूप की जांच के लिए न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति का गठन 2 जुलाई को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने से संबंधित एक प्रारूपित समान नागरिक संहिता (UCC) की समीक्षाकरने हेतु किया गया था। पश्चिम बंगाल 2014 के बाद समान नागरिक संहिता को अपनाने वाला चौथा राज्य बनने का लक्ष्य रखता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानभारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
तथ्य2024 तक, तीन भारतीय राज्यों ने आधिकारिक रूप से Uniform Civil Code को अपनाया है।
पदपश्चिम बंगाल UCC समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत जैसे बहुलवादी समाज में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के कार्यान्वयन के संवैधानिक और सामाजिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: आर्थिक नुकसान को कम करनेके उद्देश्य से, संसद की संयुक्त समिति ने 2029 तक 'One Nation, One Election' को कार्यान्वित करने पर चर्चा करने हेतु गोवा कैबिनेट के साथ बैठक की।
संसद की संयुक्त समिति एक साथ चुनाव (simultaneous elections) से संबंधित विधेयकों की समीक्षा कर रही है। समिति ने रिपोर्ट में बार-बार होने वाले चुनावों के कारण अनुमानित ₹7 लाख करोड़ के आर्थिक नुकसान का उल्लेख किया है और परामर्शित नागरिक समाज के हितधारकों से 99% समर्थन प्राप्त होने की सूचना दी है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यबार-बार होने वाले चुनावों के कारण अनुमानित आर्थिक हानि: ₹7 लाख करोड़।
तथ्य'One Nation, One Election' को लागू करने का लक्ष्य वर्ष: 2029।
संस्थासंसद की संयुक्त समिति: एक साथ चुनाव (simultaneous elections) पर विधेयकों की जांच करने के लिए गठित निकाय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा को लागू करने में निहित संवैधानिक और तार्किक चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। साथ ही, बार-बार होने वाले चुनावों का राष्ट्र के राजकोषीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अधिकारियों ने मतदाता डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचक नामा के विशेष गहन संशोधन (SIR) की समीक्षा हेतु विशाखापट्टनम का क्षेत्रीय दौरा किया।
प्रधान सचिव अविनाश कुमार और अवर सचिव संजय कुमार सहित निर्वाचन आयोग (ECI) के अधिकारियों ने विशाखापट्टनम में मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया और मतदाता सूचियों का मानचित्रण किया। इस समीक्षा के दौरान मतदाताओं के साथ संवाद किया गया तथा GVMC आयुक्त और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के साथ समन्वय स्थापित किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाElection Commission of India (ECI) संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनावों के संचालन के लिए उत्तरदायी एक संवैधानिक निकाय है।
पदप्रधान सचिव और अवर सचिव ECI सचिवालय के भीतर प्रशासनिक पद हैं।
तथ्यSpecial Intensive Revision (SIR) निर्वाचक नामा की सटीकता को अपडेट और सत्यापित करने की एक प्रक्रिया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में निर्वाचन नामावली के समय-समय पर संशोधन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने UAPA के अंतर्गत कम दोषसिद्धि दर और निष्पक्ष न्यायिक समीक्षा के अभाव को रेखांकित किया है, जिससे UK-शैली की न्यायिक समीक्षा प्रणाली को अपनाने पर बहस शुरू हो गई है।
अवैध गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) को आतंकवाद और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए 1967 में अधिनियमित किया गया था। यूनाइटेड किंगडम का 'प्रोस्क्राइबड ऑर्गेनाइजेशन्स अपील कमीशन' (POAC) राज्य द्वारा प्रतिबंधित संगठनों की स्वतंत्र समीक्षा के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकUAPA: अवैध गतिविधियों और आतंकवाद की रोकथाम के लिए 1967 में अधिनियमित।
संस्थाPOAC: एक UK-आधारित स्वतंत्र निकाय जो संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के निर्णय की समीक्षा करता है।
तथ्यUAPA की विशेषता उच्च-स्तरीय गिरफ्तारियों के बावजूद ऐतिहासिक रूप से कम दोषसिद्धि दर है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यूएपीए (UAPA) के अंतर्गत प्रतिबंधित संगठनों के लिए एक सुव्यवस्थित न्यायिक समीक्षा तंत्र की आवश्यकता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
चर्चा में क्यों: मेघालय में एक हत्याकांड पर उच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात, सर्वोच्च न्यायालय इस तथ्य की समीक्षा कर रहा है कि क्या गिरफ्तारी के लिखित आधार प्रदान करना एक अनिवार्य कानूनी आवश्यकता है।
उच्चतम न्यायालय मेघालय सरकार द्वारा सोनम रघुवंशी की जमानत के संबंध में दायर एक अपील पर विचार कर रहा है। उच्च न्यायालय ने पूर्व में यह निर्णय दिया था कि गिरफ्तारी मेमो में तथ्यों का आधार नहीं था और इसे बिना किसी विचार-विमर्श के तैयार किया गया था, जबकि राज्य सरकार ने इसे केवल एक लिपिकीय त्रुटि बताया था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानभारतीय संविधान का अनुच्छेद 22 यह प्रावधान करता है कि गिरफ्तार किए गए किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों के बारे में सूचित किया जाना चाहिए।
संस्थाभारत के सर्वोच्च न्यायालय के पास परस्पर विरोधी न्यायिक दृष्टांतों को सुलझाने के लिए मामलों को बड़ी पीठ (larger bench) के पास भेजने की शक्ति है।
तथ्यइस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई, 2024 के लिए निर्धारित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अनुच्छेद 22 के अंतर्गत नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और राज्य की मनमानी कार्रवाई को रोकने में 'गिरफ्तारी के लिखित आधार' के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि विधि के शासन के लिए अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता अनिवार्य है, और बाहरी दबावों के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच के रूप में स्व-नियमन पर बल दिया।
उच्चतम न्यायालय ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) को अपने अनुशासनात्मक तंत्र का प्रदर्शन ऑडिट करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि एक कार्यात्मक लोकतंत्र में विधिज्ञों की स्वतंत्रता एक परिभाषित विशेषता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाBar Council of India (BCI): Advocates Act, 1961 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय, जिसका उद्देश्य कानूनी पेशे को विनियमित करना है।
तथ्यइस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय की अगली सुनवाई 31 अगस्त, 2024 के लिए निर्धारित है।
संविधानविधि का शासन (Rule of Law): एक मौलिक सिद्धांत जो यह सुनिश्चित करता है कि सभी व्यक्ति और संस्थान कानून के अधीन हैं और उसके प्रति जवाबदेह हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विधि के शासन और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को बनाए रखने में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को अपनी अनुशासनात्मक कार्यप्रणाली का ऑडिट करने का निर्देश दिया है और कानूनी शिक्षा के मानकों में सुधार हेतु एक राष्ट्रीय कानूनी अकादमी का प्रस्ताव दिया है।
उच्चतम न्यायालय ने एक बैंक के पैनल से एक अधिवक्ता को हटाने के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय बार एसोसिएशन (IBA) की 'कॉशन लिस्ट' (Caution List) गंभीर कदाचार के लिए आरक्षित है, न कि कानूनी परामर्श में हुई मामूली त्रुटियों के लिए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाBar Council of India (BCI): Advocates Act, 1961 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय, जिसका कार्य कानूनी पेशे को विनियमित करना है।
संस्थाIndian Bar Association (IBA): भारत में वकीलों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक गैर-सरकारी संगठन (NGO)।
तथ्यउच्चतम न्यायालय का निर्णय स्पष्ट करता है कि IBA Caution List विशेष रूप से 'गंभीर कदाचार' (serious misconduct) के लिए है, न कि सामान्य व्यावसायिक त्रुटियों के लिए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में न्यायपालिका में सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कानूनी पेशे हेतु एक सुदृढ़ अनुशासनात्मक ढांचे की आवश्यकता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: Waqf (Amendment) Act 2025 के अंतर्गत पुनर्गठन के पश्चात, मध्य प्रदेश वाकफ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल करने वाला देश का प्रथम राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है, जिसमें हिंदू सदस्य सँवर पटेल (अध्यक्ष), मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव को सम्मिलित किया गया है। यह बोर्ड वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, अभिलेखों के रखरखाव और यह सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है कि धन का उपयोग धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कल्याण के उद्देश्यों हेतु किया जाए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाWaqf Board: एक वैधानिक निकाय जो Waqf संपत्तियों (मुस्लिम धार्मिक बंदोबस्तों द्वारा धारित भूमि/भवन) के प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है।
अधिनियम / विधेयकWaqf (Amendment) Act 2025: वह विधायी ढांचा जिसके तहत मध्य प्रदेश ने बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को एकीकृत किया।
तथ्यमध्य प्रदेश भारत का पहला राज्य है जिसने Waqf Board में हिंदू सदस्यों के इस विशिष्ट समावेश को लागू किया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: धार्मिक संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देनेमें धार्मिक बंदोबस्ती निकायों (religious endowment bodies) में समावेशी प्रतिनिधित्व के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने वाले राज्य कानूनों को बरकरार रखा और यह निर्णय दिया कि अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत जुआ एक मौलिक अधिकार नहीं है।
उच्चतम न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि धन के लिए खेले जाने वाले ऑनलाइन खेल एक मौलिक अधिकार के अंतर्गत आते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कौशल की उपस्थिति के बावजूद, अनिश्चित परिणामों पर दांव लगाना अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत संरक्षित नहीं है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानअनुच्छेद 19(1)(g) किसी भी पेशे को अपनाने, या किसी भी व्यवसाय, व्यापार या व्यापार करने के अधिकार की गारंटी देता है।
तथ्यन्यायालय ने निर्णय दिया कि तकनीकी नवाचार स्वचालित रूप से जुआ जैसी गतिविधियों को संवैधानिक संरक्षण प्रदान नहीं करता है।
संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय संवैधानिक अधिकारों की व्याख्या करने वाला सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लोक कल्याण के हित में राज्य किस सीमा तक ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों को विनियमित कर सकता है, जबकि साथ ही व्यापार या व्यवसाय करने के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, इस पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक SDPI नेता के विरुद्ध जारी किए गए एक्सटर्नमेंट (बाहर निकालने) के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने निर्णय दिया कि सरकारी नीतियों के विरुद्ध विरोध करना ऐसे उपायों को न्यायोचित नहीं बनाता है और यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति माधव जमदार की अध्यक्षता में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के विरुद्ध जारी एक वर्ष के बहिष्करण (externment) आदेश को रद्द कर दिया। न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि उक्त आदेश सार्वजनिक असहमति को दबाने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण (mala fide) तरीके से जारी किया गया था और यह याचिकाकर्ता के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानभारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है।
संस्थाएक्सटर्नमेंट ऑर्डर आमतौर पर बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ रायोट्स एक्ट (Bombay Prevention of Riots Act) या इसी तरह के राज्य-विशिष्ट सुरक्षा कानूनों के तहत जारी किए जाते हैं।
तथ्यन्यायालय ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव के विरुद्ध जारी एक वर्षीय एक्सटर्नमेंट (externment) आदेश को रद्द कर दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक लोकतंत्र में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध एक्सटर्नमेंट (निर्वासन) आदेशों का उपयोग, असहमति के मौलिक अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन किस सीमा तक करता है? का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में तीन विधानसभा सीटों के लिए उपचुनावों की घोषणा की है, जो चुनावों के समय के संबंध में ECI की विवेकाधीन शक्तियों को रेखांकित करता है।
निर्वाचन आयोग (ECI) ने 3 जुलाई, 2026 को बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में तीन विधानसभा सीटों के लिए उपचुनावों की घोषणा की। यद्यपि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of People Act) रिक्त पद के छह महीने के भीतर चुनाव कराने का अधिदेश प्रदान करता है, तथापि निर्वाचन आयोग के पास उस समयावधि के भीतर विशिष्ट तिथि निर्धारित करने का विवेकाधिकार सुरक्षित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाभारत में चुनाव आयोजित करने के लिए Election Commission of India (ECI) एक संवैधानिक निकाय है।
अधिनियम / विधेयकRepresentation of People Act के अनुसार, किसी सीट के रिक्त होने के छह महीने के भीतर उपचुनाव आयोजित करना अनिवार्य है।
तथ्यजुलाई 2026 तक, पूरे भारत में 14 विधानसभा सीटें और 6 संसदीय सीटें (3 Lok Sabha, 3 Rajya Sabha) रिक्त थीं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उपचुनावों के निर्धारण में भारत निर्वाचन आयोग की विवेकाधीन शक्तियों की सीमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निरंतरता सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने विद्युत वितरण कंपनियों के CAG ऑडिट हेतु दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) के निर्देश को रोकने वाले अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) के आदेश पर रोक लगा दी है।
उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के बिजली वितरण कंपनियों (discoms) के ऑडिट के संबंध में यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का आदेश जारी किया है। यह मामला DERC के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा ऑडिट कराने के निर्देश और उसके पश्चात APTEL द्वारा उस निर्देश को रद्द करने के मध्य उत्पन्न हुए विवाद से संबंधित है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाAPTEL: Appellate Tribunal for Electricity बिजली विवादों के लिए एक अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) निकाय है।
संस्थाDERC: Delhi Electricity Regulatory Commission बिजली टैरिफ और वितरण के लिए राज्य-स्तरीय नियामक है।
संस्थाCAG: Comptroller and Auditor General of India संघ का सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थान है।
पदउच्चतम न्यायालय: भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, जो नियामक आदेशों पर न्यायिक पुनरावलोकन (judicial review) का प्रयोग करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बिजली वितरण जैसे सार्वजनिक उपयोगिता क्षेत्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा किए जाने वाले स्वतंत्र ऑडिट के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: गृह मंत्रालय (MHA) ने स्थानीय स्वायत्तता की मांगों को संबोधित करनेके उद्देश्य से, लद्दाख की प्रस्तावित निर्वाचित कार्यकारी संस्था को सिविल सेवकों पर पर्यवेक्षी अधिकार प्रदान करने हेतु बैठक के कार्यवृत्त में संशोधन किया है।
गृह मंत्रालय (MHA) ने लद्दाख के निर्वाचित नेताओं के साथ 22 मई को हुई बैठक के संशोधित कार्यवृत्त (minutes) जारी किए हैं। इस संशोधन में नौकरशाही निरीक्षण हेतु एक खंड शामिल किया गया है और अनुच्छेद 371 के अंतर्गत एक अनुकूलित संवैधानिक सुरक्षा मॉडल की योजना प्रस्तावित की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानअनुच्छेद 371: महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड और अन्य विभिन्न राज्यों के लिए विशेष प्रावधान प्रदान करता है।
संस्थागृह मंत्रालय (MHA): केंद्र शासित प्रदेशों में आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों के लिए उत्तरदायी।
तथ्यसंशोधित कार्यवृत्त विशेष रूप से लद्दाख के लिए छठी अनुसूची (Sixth Schedule) की स्थिति और राज्य का दर्जा देने की मांग को संबोधित करते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संघीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के संदर्भ में लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में निर्वाचित निकायों को स्थानीय प्रशासनिक निरीक्षण प्रदान करने के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत में 100 घरों के अवैध ध्वस्तीकरण के लिए राज्य सरकार की आलोचना की और बेघर हुए व्यक्तियों के पुनर्वास का आदेश दिया।
30 मई, 2024 को सूरत के नरीसनगर क्षेत्र में 100 घरों को ध्वस्त कर दिया गया। गुजरात उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ स्तर की जांच के अभाव पर टिप्पणी की और पूर्व सूचना के बावजूद पुलिस आयुक्त की निष्क्रियता पर प्रश्नचिह्न लगाया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाSurat Municipal Corporation (SMC) सूरत में नागरिक प्रशासन के लिए उत्तरदायी स्थानीय शहरी निकाय है।
स्थाननारिसनगर, गुजरात के सूरत में स्थित एक क्षेत्र है।
तथ्य30 मई, 2024 को नरिसनगर क्षेत्र में 100 घरों को ध्वस्त कर दिया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नगर निकायों द्वारा मनमाने ढंग से किए जाने वाले विध्वंस को रोकने के लिए आवश्यक प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का परीक्षण कीजिए और विस्थापित शहरी आबादी के पुनर्वास के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सटीक मतदाता डेटा सुनिश्चित करनेके लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पारदर्शिता स्पष्ट की।
झारखंड में SIR प्रक्रिया का शुभारंभ 30 जून, 2024 को हुआ, जिसमें 31,892 बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) को सम्मिलित किया गया। इस प्रक्रिया के माध्यम से राज्य के 2.64 करोड़ मतदाताओं में से 82% का सफलतापूर्वक मानचित्रण (मैपिंग) कर लिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाBooth Level Officers (BLOs) निर्वाचक नामा को अपडेट करने के लिए जिम्मेदार प्राथमिक क्षेत्रीय स्तर के कार्यकर्ता हैं।
तथ्य2024 के संशोधन चक्र के अनुसार, झारखंड का कुल मतदाता आधार लगभग 2.64 करोड़ है।
पदमुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) चुनाव के संचालन और मतदाता सूची के रखरखाव के लिए जिम्मेदार राज्य-स्तरीय प्राधिकरण है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में 'सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार' के सिद्धांत को बनाए रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करने में आवधिक मतदाता सूची संशोधन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: पारदर्शिता की रक्षाके उद्देश्य से कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा प्रस्तावित अनशन के मद्देनजर, महाराष्ट्र सरकार ने सूचना के अधिकार (Right to Information) नियमों में किए गए संशोधनों पर रोक लगा दी है।
महाराष्ट्र सरकार ने कार्यकर्ताओं से औपचारिक आपत्तियां प्राप्त करने के पश्चात RTI नियमों में किए गए संशोधनों पर रोक लगा दी है। यह स्थगन उन नियमों को पुन: प्रभावी बनाता है जो 12 जून, 2026 से पूर्व लागू थे।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानसूचना का अधिकार (RTI) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) से व्युत्पन्न है।
अधिनियम / विधेयकसूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act), 2005, सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचना प्राप्त करने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
तथ्यमहाराष्ट्र सरकार ने विशेष रूप से 12 जून, 2026 से पहले प्रभावी नियमों को बहाल करने के लिए संशोधनों पर रोक लगा दी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सूचना के अधिकार अधिनियम की अखंडता सुनिश्चित करने में नागरिक समाज और सार्वजनिक आंदोलन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने आतंकवाद से जुड़े संबंधों के आरोपी एक व्यक्ति के विरुद्ध जारी निवारक निरोध आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने इस निर्णय में इस बात पर बल दिया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, जिसे मनमाने ढंग से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख उच्च न्यायालय ने फयाज़ अहमद लोन की हिरासत को रद्द कर दिया है, जिन्हें कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जोड़ा गया था। न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि जिला मजिस्ट्रेट का आदेश पर्याप्त साक्ष्यों से रहित था और यह वस्तुनिष्ठ कानूनी आधार के बजाय पुलिस के व्यक्तिपरक दृष्टिकोण पर आधारित था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानभारतीय संविधान का अनुच्छेद 22 मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है।
संस्थाजम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों पर है।
तथ्यनिवारक निरोध (Preventive detention) एक कानूनी तंत्र है जिसमें किसी व्यक्ति को भविष्य में अपराध करने से रोकने के लिए हिरासत में लिया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आंतरिक सुरक्षा की स्थितियों में निवारक निरोध (preventive detention) का उपयोग करने की राज्य की शक्ति और व्यक्तिगत मौलिक अधिकारों के संरक्षण के बीच संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने लाहौल-स्पीति और पांगी में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को समय से पूर्व भंग करने के राज्य सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने यह निर्णय देते हुए कहा कि यह निर्णय संवैधानिक रूप से संरक्षित पांच-वर्षीय कार्यकाल का उल्लंघन करता है।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि जनजातीय क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के कार्यकाल को राज्य के शेष हिस्सों के साथ समन्वित करने का राज्य सरकार का प्रयास असंवैधानिक है। न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि जनवरी 2026 में सम्मिलित किया गया प्रावधान निर्वाचित प्रतिनिधियों के वर्तमान कार्यकाल पर पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं होता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानपंचायती राज संस्थाएं (PRIs) 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा शासित होती हैं।
तथ्यउच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि PRIs के लिए संवैधानिक रूप से संरक्षित कार्यकाल पांच वर्ष है।
स्थानलाहुल-स्पीति और पांगी हिमाचल प्रदेश राज्य के जनजातीय क्षेत्र हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पंचायती राज संस्थाओं के निश्चित कार्यकाल को सुनिश्चित करना जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को बनाए रखने और कार्यकारी अतिरेक को रोकने में किस प्रकार महत्वपूर्ण है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है, जिसमें गौ-वध पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया था; इस अपील में सरकार ने 1976 के सरकारी आदेश की प्रवर्तनीयता को चुनौती दी है।
मद्रास उच्च न्यायालय ने 27 मई, 2024 को एक आदेश जारी किया, जिसमें गोवध पर प्रतिबंध लगाने का अधिदेश दिया गया है। तमिलनाडु सरकार 19 अगस्त, 1976 के एक विशिष्ट सरकारी आदेश के कार्यान्वयन को चुनौती दे रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: देश की शीर्ष अदालत, जिसके पास मूल, अपीलीय और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
तथ्यसंबंधित सरकारी आदेश अगस्त 1976 का है।
स्थानमद्रास उच्च न्यायालय: तमिलनाडु राज्य की सर्वोच्च न्यायिक संस्था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पशुधन संबंधी नियमों के संबंध में राज्य-स्तरीय कार्यकारी आदेशों और न्यायिक अधिदेशों के बीच उत्पन्न संघर्ष का विश्लेषण कीजिए और संघवाद तथा सार्वजनिक व्यवस्था पर इसके निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सटीक गणना सुनिश्चित करने और वर्तमान मतदाताओं को पिछले निर्वाचन नामा से जोड़ने के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की घोषणा की है।
दिल्ली में SIR प्रक्रिया 1 अक्टूबर, 2024 तक की आयु के सभी 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के मतदाताओं को सम्मिलित करती है। इसमें बूथ-स्तरीय अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जाता है और इसके लिए 2002-2005 की अवधि के पिछले निर्वाचन नामा से डेटा को जोड़ना आवश्यक है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थामुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO): किसी विशिष्ट राज्य/UT में मतदाता सूची तैयार करने और उसके रखरखाव के लिए उत्तरदायी।
तथ्यSIR Revision Period: 30 जून, 2024 से 29 जुलाई, 2024 तक घर-घर जाकर सर्वेक्षण (door-to-door visits) निर्धारित हैं।
तथ्यप्रारूप और अंतिम मतदाता सूची की तिथियाँ: प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन 5 अगस्त, 2024 को; अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 अक्टूबर, 2024 को।
तथ्यपात्रता: मतदाताओं की आयु 1 अक्टूबर, 2024 तक 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने और चुनावी धोखाधड़ी को रोकने में समय-समय पर मतदाता सूची के संशोधन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने चुनावी पारदर्शिता में भारत के नेतृत्व और अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं चुनावी सहायता संस्थान (IDEA) की अध्यक्षता में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ने बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) के साथ संवाद करने हेतु जम्मू और कश्मीर का दौरा किया। वर्तमान में भारत, अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनावी सहायता संस्थान (IDEA) की अध्यक्षता कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाIDEA: International Institute for Democracy and Electoral Assistance, जिसकी अध्यक्षता भारत द्वारा की जाती है।
पदमुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC): भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के प्रमुख।
तथ्यBooth Level Officers (BLOs): मतदाता सूची के रखरखाव और मतदान संबंधी व्यवस्था के लिए जिम्मेदार प्राथमिक क्षेत्रीय स्तर के अधिकारी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बदलती तकनीकी और तार्किक चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में भारतीय चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले तंत्रों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: तेलंगाना उच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग (ECI) को उन निर्वाचन क्षेत्रों में उर्दू भाषा में चुनावी गणना प्रपत्र (electoral enumeration forms) प्रदान करने पर विचार करने का निर्देश दिया है, जहाँ उर्दू भाषी आबादी की संख्या महत्वपूर्ण है।
न्यायमूर्ति बी. विजयसेन रेड्डी की अध्यक्षता में तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से संबंधित एक याचिका पर विचार किया। याचिकाकर्ता ने उन निर्वाचन क्षेत्रों में उर्दू भाषा के फॉर्म उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जहाँ 20% या उससे अधिक जनसंख्या उर्दू भाषी है। याचिकाकर्ता ने वर्तमान प्रावधान को चुनौती दी जिसमें फॉर्म केवल तेलुगु और अंग्रेजी में उपलब्ध कराए जाते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाECI: अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय, जिसका कार्य संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों का संचालन और पर्यवेक्षण करना है।
तथ्ययाचिकाकर्ता का अनुरोध विशेष रूप से उन निर्वाचन क्षेत्रों को लक्षित करता है जहाँ 20% या उससे अधिक उर्दू बोलने वाले लोग हैं।
स्थानतेलंगाना उच्च न्यायालय: निर्वाचक नामा संशोधनों से संबंधित याचिका की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्वाचन प्रक्रियाओं में भाषाई समावेशिता के महत्व की चर्चा कीजिए, जो सार्वभौमिक मताधिकार और अल्पसंख्यक भाषाई समूहों के सूचना के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग छह करोड़ अपात्र मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
SIR की शुरुआत बिहार में की गई थी और बाद में इसे 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया गया। उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु किए गए इस संशोधन की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थानिर्वाचन आयोग (ECI) वह संवैधानिक निकाय है जो मतदाता सूची तैयार करने और उसका रखरखाव करने के लिए उत्तरदायी है।
तथ्य2023 के अंत तक संपन्न हुए विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद मतदाता सूची से लगभग छह करोड़ नाम हटा दिए गए।
तथ्यSIR के तीसरे चरण में 36.73 करोड़ मतदाताओं की लक्षित जनसंख्या शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करने में निर्वाचक नामा के समय-समय पर और गहन पुनरीक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण है परंतु यह निर्णायक प्रमाण नहीं है, जो यात्रा दस्तावेजों और वैधानिक नागरिकता की स्थिति के बीच कानूनी अंतर को रेखांकित करता है।
नागरिकता अधिनियम, 1955, जन्म, पितृत्व, निवास या प्राकृतिककरण के आधार पर भारतीय नागरिकता की प्राप्ति और समाप्ति को विनियमित करता है। कई अन्य लोकतंत्रों के विपरीत, भारत में कोई सार्वभौमिक, स्वतंत्र नागरिकता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, और सत्यापन के लिए विभिन्न दस्तावेजों पर निर्भरता बनी रहती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकनागरिकता अधिनियम, 1955: भारतीय नागरिकता के अर्जन और समाप्ति को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक विधान।
तथ्यपासपोर्ट की स्थिति: केवल भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन इसे कानूनी रूप से साक्ष्य माना जाता है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं।
संस्थाMEA: विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) पासपोर्ट जारी करने और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व की देखरेख करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सार्वभौमिक नागरिकता प्रमाणपत्र (Universal Citizenship Certificate) के अभाव के कानूनी और प्रशासनिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए और नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने हेतु उचित उपाय सुझाइए। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन नामा के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के संबंध में चेतावनी जारी की है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतर्गत बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण और संग्रहण किया जाएगा। यह प्रक्रिया 25 जून से 24 जुलाई तक संचालित होने निर्धारित है, जबकि निर्वाचन सूची का अंतिम प्रकाशन 1 अक्टूबर को किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाBooth Level Officers (BLOs) निर्वाचक नामा के रखरखाव के लिए जिम्मेदार प्राथमिक क्षेत्र-स्तरीय कर्मी हैं।
तथ्यवर्तमान चक्र के लिए Special Intensive Revision (SIR) अवधि 25 जून से 24 जुलाई तक निर्धारित है।
तथ्यसंशोधित मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 1 अक्टूबर के लिए निर्धारित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में निर्वाचन नामावली के समय-समय पर संशोधन के महत्व और इस प्रक्रिया में जमीनी स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: कैबिनेट की नियुक्तियों की समिति (ACC) ने न्यायालयों के समक्ष संघ के प्रतिनिधित्व में कानूनी निरंतरता सुनिश्चित करनेके लिए तुषार मेहता को भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में पुन: नियुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की है।
मंत्रिमंडल की नियुक्तियों की समिति (ACC) ने 1 जुलाई, 2024 से तीन वर्ष की अवधि के लिए भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में तुषार मेहता की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, पांच अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASGs) को 1 जुलाई, 2026 से तीन वर्ष के लिए पुन: नियुक्त किया गया है, तथा चेतन शर्मा को 1 जुलाई, 2026 से छह महीने की अवधि के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के रूप में पुन: नियुक्त किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थासॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया: भारत के अटॉर्नी जनरल के बाद देश के सर्वोच्च विधि अधिकारी।
संस्थाAppointments Committee of the Cabinet (ACC): एक उच्च-स्तरीय समिति जो कुछ उच्च-स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति की सिफारिश करती है।
पदतुषार मेहता: 1 जुलाई, 2024 से तीन साल के कार्यकाल के लिए भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में पुन: नियुक्त किए गए।
तथ्यचेतन शर्मा: 1 जुलाई, 2026 से छह महीने के कार्यकाल के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में पुन: नियुक्त किए गए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: न्यायपालिका के समक्ष केंद्र सरकार के लिए सुसंगत कानूनी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और विधि के शासन को बनाए रखने में सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: निर्वाचन शुचिता सुनिश्चित करनेके उद्देश्य से, पूर्व-SIR मैपिंग प्रक्रिया के दौरान तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के मतदाता डेटा के 38% में विसंगतियों की पहचान की है।
लगभग 89.88 लाख व्यक्तियों (तेलंगाना के कुल मतदाताओं का 38%) को माता-पिता के नाम में विसंगति और आयु अंतराल जैसे त्रुटियों के कारण चिह्नित किया गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतर्गत 25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर जाकर गणना करने का चरण शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थानिर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (EROs) निर्वाचक नामा तैयार करने और उनके रखरखाव के लिए उत्तरदायी होते हैं।
तथ्यतेलंगाना में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में 25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर जाकर गणना करने का चरण शामिल है।
तथ्यनिर्वाचक नामा के प्रारूप के संबंध में दावों और आपत्तियों की समय सीमा 30 अगस्त निर्धारित की गई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में मतदाता सूची के समय-समय पर और गहन पुनरीक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निष्क्रिय मतदाताओं को हटाने और मतदाता सूची को अद्यतन करने के उद्देश्य से 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषणा की है।
बूथ स्तर के अधिकारी (BLOs) तेलंगाना में एक महीने तक चलने वाला पुनरीक्षण अभियान संचालित करेंगे। इस प्रक्रिया के अंतर्गत निर्वाचक नामा की सटीकता सुनिश्चित करने हेतु अनुपस्थित, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं को विलोपन हेतु चिह्नित किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाBooth Level Officers (BLOs) निर्वाचक नामा के रखरखाव के लिए जिम्मेदार प्राथमिक क्षेत्रीय स्तर के कर्मी हैं।
तथ्यविशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य विलोपन की पहचान करते हुए 10-15% अतिरिक्त मतदाताओं को जोड़ना है।
पदसी. सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने और 'घोस्ट वोटिंग' (छाया मतदान) को रोकने में निर्वाचन नामावली के समय-समय पर पुनरीक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया है कि निर्धारित फुटपाथों पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, जिसमें मोटर चालित यातायात की तुलना में पैदल चलने वालों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
उच्चतम न्यायालय ने पैदल चलने वालों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने के कारण मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की आलोचना की। न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक घातक पैदल यात्री दुर्घटना में एक परिवार के लिए मुआवजे की राशि को कम कर दिया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानफुटपाथ पर चलने के अधिकार की व्याख्या अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत एक मौलिक अधिकार के रूप में की गई है।
अधिनियम / विधेयकMotor Vehicles Act: भारत में सड़क परिवहन और यातायात को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक विधान।
तथ्ययह शासनादेश नगर पालिकाओं और सड़क स्वामित्व वाली एजेंसियों को बुनियादी ढांचा नियोजन में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आदेश देता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या किस प्रकार शहरी बुनियादी ढाँचे की चुनौतियों के समाधान और संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक हो सकती है, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गेम्सक्राफ्ट (Gameskraft) के निदेशकों की गिरफ्तारी को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने यह निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तारियाँ नए साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि पुराने आरोपों पर।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि PMLA के अंतर्गत गिरफ्तारी अंतिम विकल्प के रूप में अपनाई जानी चाहिए। न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि अधिकारियों को हिरासत में गिरफ्तारी की कार्यवाही शुरू करने से पूर्व समन के माध्यम से सहयोग प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूर्ण रूप से निष्पादित करना चाहिए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकPMLA: Prevention of Money Laundering Act, 2002, धन शोधन (money laundering) अपराधों की जांच और अभियोजन के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
संस्थाकर्नाटक उच्च न्यायालय: भारत में कर्नाटक राज्य के अधिकार क्षेत्र वाला एक राज्य उच्च न्यायालय।
तथ्यन्यायालय ने निर्णय दिया कि PMLA ढांचे के तहत गिरफ्तारी के लिए 'पुराने आरोप' (stale allegations) पर्याप्त आधार नहीं हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के अंतर्गत राज्य की गिरफ्तारी की शक्तियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए आवश्यक न्यायिक सुरक्षा उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री द्वारा एक केस फाइल गुम करने के आरोपों की जांच का आदेश दिया है, जो न्यायिक रिकॉर्ड-कीपिंग में प्रशासनिक अक्षमताओं को रेखांकित करता है।
उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री न्यायालय के अभिलेखों, प्रकरणों की सूची और प्रक्रियात्मक अनुपालन के लिए उत्तरदायी है। यह महासचिव के पर्यवेक्षण में कार्य करती है और संविधान के अनुच्छेद 146 के ढांचे द्वारा शासित होती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संविधानअनुच्छेद 146: सर्वोच्च न्यायालय के लिए पर्याप्त न्यायाधीशों की संख्या और एक रजिस्ट्री की स्थापना का प्रावधान करता है।
संस्थामहासचिव, सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री के कामकाज के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक प्रमुख होते हैं।
पदवर्तमान में न्यायमूर्ति सूर्यकांत भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं जो इस जाँच की अध्यक्षता कर रहे हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री के समक्ष आने वाली प्रशासनिक चुनौतियों का परीक्षण कीजिए और न्यायिक अभिलेखों की अखंडता एवं सुलभता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।