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GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचामेन्स चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने शरियत एप्लीकेशन एक्ट, 1937 को रद्द करने के बजाय, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मामले में संसद के निर्णय पर भरोसा करने की प्राथमिकता व्यक्त की।
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों के संदर्भ में शरियत एप्लीकेशन एक्ट, 1937 (Shariat Application Act, 1937) पर विचार किया। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि इस अधिनियम के प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
- अधिनियम / विधेयकशरियत एप्लीकेशन एक्ट (Shariat Application Act), 1937: एक एक्ट जो विरासत और विवाह के मामलों में मुस्लिम पर्सनल लॉ के लागू होने का प्रावधान करता है।
- तथ्यइंडियन सक्सेशन एक्ट (Indian Succession Act): विरासत (inheritance) से संबंधित एक केंद्रीय कानून, जिसकी इस संदर्भ में कोर्ट ने लागू होने की योग्यता पर सवाल उठाया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत जैसे बहुलवादी समाज में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली संवैधानिक चुनौतियों और सामाजिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- संवैधानिक टकराव: धार्मिक पर्सनल लॉ के मुकाबले आर्टिकल 14 (समानता) और आर्टिकल 15 (गैर-भेदभाव) के बीच संतुलन
- विधायी स्वायत्तता: अल्पसंख्यक अधिकारों और समान नागरिक संहिता के लक्ष्य के बीच संतुलन बनाने में संसदीय समझ की भूमिका
- जेंडर जस्टिस: पर्सनल लॉ के तहत महिलाओं के लिए विरासत कानूनों में प्रणालीगत असमानताओं को दूर करना
मुख्य शब्द: यूनिफॉर्म सिविल कोड · पर्सनल लॉ · लैंगिक न्याय · अनुच्छेद 44 · विधायी समझ · बहुलता
चर्चा में क्यों: पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची (electoral roll) के संशोधन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। यह कदम भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की उस रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें बताया गया है कि विसंगतियों (discrepancies) का फैसला करने के लिए राज्य द्वारा प्रदान किए गए ग्रुप 'A' के अधिकारियों की कमी है।
ECI ने 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम बंगाल के लिए अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की, जिसमें संशोधन से पहले की सूची की तुलना में लगभग 8.3% की शुद्ध कमी दिखाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने अनमैप्ड मामलों (unmapped cases) और तार्किक विसंगतियों के निपटारे में सहायता के लिए पड़ोसी राज्यों से न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- संस्थाECI: वह संस्था जो अंतिम मतदाता सूची (electoral roll) प्रकाशित करने और न्यायिक अधिकारियों से निर्णय (adjudication) के लिए अनुरोध करने के लिए जिम्मेदार है।
- तथ्यपश्चिम बंगाल मतदाता सूची में कमी: संशोधन से पहले की सूची की तुलना में लगभग 8.3% की शुद्ध कमी।
- पदग्रुप 'A' अधिकारी: मतदाता सूची adjudication (निर्णय) के लिए राज्य से प्रदान करने के लिए अनुरोधित अधिकारियों की विशिष्ट श्रेणी।
- तथ्यअंतिम मतदाता सूची प्रकाशन की तारीख: 28 फरवरी, 2026।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में सटीक मतदाता सूची प्रबंधन के महत्व और प्रशासनिक विसंगतियों को दूर करने में न्यायिक निरीक्षण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- प्रशासनिक टकराव: राज्य द्वारा दिए गए कर्मियों और चुनावी न्याय के लिए ECI की ज़रूरतों के बीच विवाद
- न्यायिक हस्तक्षेप: मतदाता सूची पुनरीक्षण में चुनाव आयोग की स्वायत्तता और बाहरी न्यायिक निगरानी के बीच संतुलन
- डेटा इंटीग्रिटी: मतदाता सूची में तार्किक निरंतरता सुनिश्चित करना ताकि अयोग्य मतदाताओं को शामिल होने से रोका जा सके या किसी का अधिकार न छीने
मुख्य शब्द: मतदाता सूची · न्यायिक निगरानी · प्रशासनिक टकराव · स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव · विसंगति का फैसला
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स (Information Technology Rules) की संवैधानिकता पर बहस सुनी, जिसमें सरकार ने दावा किया कि ये नियम व्यंग्य या आलोचना को लक्षित नहीं करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी ऑनलाइन कंटेंट से निपटने के लिए बनाए गए इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स (Information Technology Rules) की जांच की। एडिटर्स गिल्ड और कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इन नियमों को अस्पष्ट और असंवैधानिक बताते हुए इन्हें चुनौती दी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थासुप्रीम कोर्ट: भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था जो IT Rules की संवैधानिकता की सुनवाई करती है।
- तथ्यInformation Technology Rules: फेक ऑनलाइन कंटेंट से निपटने के लिए बनाए गए नियम।
- पदकुणाल कामरा: स्टैंड-अप कॉमेडियन और IT Rules के खिलाफ मामले में याचिकाकर्ता।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय संविधान के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा और ऑनलाइन 'फर्जी' सामग्री के विनियमन के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोध का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- कानूनी अस्पष्टता: 'फेक' कंटेंट की सटीक परिभाषा की कमी से संभावित ओवर-सेंसॉरशिप का खतरा
- संवैधानिक टकराव: राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य के हितों के सामने आर्टिकल 19(1) की अभिव्यक्ति की आज़ादी को संतुलित करना
मुख्य शब्द: भाषण की स्वतंत्रता · संवैधानिक वैधता · डिजिटल गवर्नेंस · सूचना का अधिकार · रेगुलेटरी ओवररीच
GS2सामाजिक न्याय › स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्यप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को COVID-19 टीकाकरण के बाद होने वाली गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (AEFI) के लिए 'नो-फॉल्ट' मुआवजा नीति (no-fault compensation policy) तैयार करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला AEFI (Adverse Events Following Immunization) के कारण हुई कथित मौतों के लिए मुआवजे की मांग करने वाली एक याचिका पर आधारित है। कोर्ट ने 2022 के जैकब पुलियेल (Jacob Puliyel) फैसले का हवाला दिया, जिसमें वैक्सीन से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं के डेटा संग्रह और सार्वजनिक रिपोर्टिंग पर जोर दिया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थासुप्रीम कोर्ट: केंद्र सरकार को 'नो-फॉल्ट' मुआवजा नीति (no-fault compensation policy) बनाने का निर्देश दिया।
- तथ्यAEFI: यह टीकाकरण के बाद होने वाली गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (serious adverse events following immunization) को संदर्भित करता है।
- पदजैकब पुलियेल जजमेंट (2022): कोर्ट द्वारा वैक्सीन से संबंधित घटनाओं के डेटा कलेक्शन और पब्लिक रिपोर्टिंग के संबंध में उद्धृत किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बड़े पैमाने पर आयोजित राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में सार्वजनिक विश्वास और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में 'नो-फॉल्ट' (बिना किसी दोष के) मुआवजा ढांचे के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- पारदर्शिता की कमी: जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए AEFI पर स्टैंडर्ड डेटा कलेक्शन और पब्लिक रिपोर्टिंग की ज़रूरत
- लायबिलिटी बनाम जवाबदेही: सरकारी इम्युनिटी और पीड़ितों को मुआवज़ा देने की ज़रूरत के बीच संतुलन
- सूचित सहमति: सार्वजनिक स्वास्थ्य में भागीदारी के लिए वैक्सीन के साइड-इफेक्ट जोखिमों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: नो-फॉल्ट कंपनसेशन · AEFI · सूचित सहमति · सार्वजनिक स्वास्थ्य पारदर्शिता · न्यायिक निगरानी
GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएंप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने नए ट्रिब्यूनल बिल के इंतज़ार के दौरान विभिन्न ट्रिब्यूनल्स के अध्यक्षों और सदस्यों के कार्यकाल को 8 सितंबर तक बढ़ाने के केंद्र के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल सदस्यों के कार्यकाल को 8 सितंबर तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। अटॉर्नी जनरल, आर वेंकटरमणी ने बताया कि कामकाज और नियुक्तियों से संबंधित एक नए ट्रिब्यूनल बिल को संसद के बजट या मानसून सत्र में पेश करने की योजना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थासुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन और सदस्यों के कार्यकाल के विस्तार को मंजूरी दी।
- पदआर. वेंकटरमणी भारत के अटॉर्नी जनरल के रूप में कार्यरत हैं।
- तथ्यट्रिब्यूनल सदस्यों के लिए प्रस्तावित विस्तार 8 सितंबर तक वैध है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में अर्ध-न्यायिक न्यायाधिकरणों के कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक विधायी ढांचे की आवश्यकता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- जवाबदेही का अंतर: व्यापक कानून की कमी से ट्रिब्यूनल सदस्यों की स्वतंत्रता और निगरानी पर चिंताएं पैदा हुई
- विधायी देरी: इंटरिम एक्सटेंशन पर निर्भरता से कार्यात्मक संकट और न्यायिक बैकलॉग की समस्या पैदा हो सकती है
- संस्थागत ईमानदारी: कानून का शासन बनाए रखने के लिए नियुक्तियों और कामकाज पर स्पष्ट नियमों की ज़रूरत
मुख्य शब्द: अर्ध-न्यायिक · जवाबदेही · विधायी निरीक्षण · न्यायिक स्वतंत्रता · वैधानिक ढांचा
GS2सामाजिक न्याय › कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)मेन्स चर्चा में क्यों: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए 'कम इयरली, गो इयरली' (Come Early, Go Early) योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य उनके पेशेवर और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना है।
यह योजना महिला सरकारी कर्मचारियों को सुबह 9:15 से 9:45 के बीच पहुंचने पर अपने निर्धारित कार्य घंटे पूरे करने के बाद जाने की अनुमति देती है। इस घोषणा में मातृत्व अवकाश (maternity leave) और बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के आधे वेतन वाले अवकाश (half-pay leave) जैसे मौजूदा कल्याणकारी उपायों पर भी प्रकाश डाला गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- योजना'Come Early, Go Early' स्कीम: MMR में महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए महाराष्ट्र राज्य की पहल।
- तथ्य'Come Early, Go Early' स्कीम के लिए एलिजिबिलिटी विंडो: आगमन सुबह 9:15 और 9:45 के बीच होना चाहिए।
- योजनालड़की बहिन, लेख लड़की और अन्नपूर्णा: महिलाओं के विकास के लिए महाराष्ट्र सरकार की योजनाएं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: औपचारिक कार्यबल में 'कम जल्दी, जाएं जल्दी' (Come Early, Go Early) जैसी कार्यस्थल नीतियों के माध्यम से लैंगिक समानता और महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान की विवेचना कीजिए।
- वर्क-लाइफ बैलेंस: महिलाओं के लिए घरेलू काम और प्रोफेशनल ड्यूटी के 'डबल बर्डन' को संबोधित करना
- संस्थागत समर्थन: महिला कर्मचारियों के लिए पैसिव वेलफेयर से एक्टिव वर्कप्लेस फ्लेक्सिबिलिटी की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: लैंगिक समानता · वर्क-लाइफ बैलेंस · महिला सशक्तिकरण · समावेशी शासन · सामाजिक-आर्थिक विकास
GS2सामाजिक न्याय › कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)प्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: छत्तीसगढ़ सरकार ने जबरन, प्रलोभन या गलत जानकारी देकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए 'छत्तीसगढ़ फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल, 2026' (Chhattisgarh Freedom of Religion Bill, 2026) को मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के वक्तव्य के बाद छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। इस कानून का उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है, जिसमें विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं से जुड़े एक मामले का उल्लेख किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- अधिनियम / विधेयकछत्तीसगढ़ फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल, 2026: धार्मिक धर्म परिवर्तन को विनियमित करने के लिए प्रस्तावित कानून।
- तथ्ययह बिल जबरदस्ती, प्रलोभन या गलत बयानी (misrepresentation) के माध्यम से किए गए धर्म परिवर्तन को लक्षित करता है।
- स्थानछत्तीसगढ़: वह राज्य जहाँ इस बिल को BJP सरकार द्वारा मंजूरी दी गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और संवेदनशील समुदायों की सुरक्षा हेतु धर्मांतरण को विनियमित करने की राज्य की शक्ति के बीच संवैधानिक संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
- संवैधानिक संघर्ष: अनुच्छेद 25 (अंतरात्मा की स्वतंत्रता) और राज्य द्वारा जनजातीय पहचान की सुरक्षा के बीच संतुलन
- विधायी मंशा: लक्षित एंटी-कन्वर्जन फ्रेमवर्क के जरिए हाशिए पर मौजूद समूहों के व्यवस्थित शोषण को रोकना
- संघीय टकराव: 'प्रलोभन' की अलग-अलग राज्य-स्तरीय परिभाषाओं से राष्ट्रीय धार्मिक सद्भाव प्रभावित होने की संभावना
मुख्य शब्द: धार्मिक स्वतंत्रता · कमज़ोर वर्ग · विधायी निगरानी · संवैधानिक संतुलन · आदिवासी अधिकार
चर्चा में क्यों: संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, हरीश पर्वथनेनी ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों की अंतरराष्ट्रीय कानून और UN चार्टर के उल्लंघन के रूप में निंदा की है।
भारत ने रमजान के दौरान पाकिस्तान के कार्यों की आलोचना की और देश पर 'व्यापार और पारगमन आतंकवाद' (trade and transit terrorism) का आरोप लगाया। भारत ने पाकिस्तान से WTO के मानदंडों और UN चार्टर के सिद्धांतों का पालन करने का आग्रह किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- पदहरीश पर्वथनेनी: UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि।
- तथ्यभारत ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक (airstrikes) की UN चार्टर (Charter) के उल्लंघन के रूप में निंदा की।
- तथ्यभारत ने पाकिस्तान से WTO मानदंडों का पालन करने का आग्रह किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: क्षेत्रीय हवाई हमलों और 'व्यापार एवं पारगमन आतंकवाद' (trade and transit terrorism) के अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिरता पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
- कानूनी टकराव: संप्रभु सैन्य कार्रवाई और UN चार्टर के तहत दायित्वों के बीच विवाद
- आर्थिक-सुरक्षा संबंध: क्षेत्रीय व्यापार गलियारों और WTO अनुपालन पर 'ट्रेड और ट्रांजिट टेररिज्म' का प्रभाव
मुख्य शब्द: अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून · UN चार्टर · व्यापार और ट्रांजिट आतंकवाद · संप्रभुता · क्षेत्रीय स्थिरता
चर्चा में क्यों: भारत ने खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने के कारण पैदा हुई पेट्रोलियम की गंभीर कमी को दूर करने के लिए 'फ्रेंडशिप पाइपलाइन' के जरिए बांग्लादेश को 5,000 मीट्रिक टन डीजल की आपूर्ति की।
भारत ने ऊर्जा की कमी को दूर करने के लिए बांग्लादेश को 5,000 मीट्रिक टन डीजल भेजा है। यह खेप 'फ्रेंडशिप पाइपलाइन' (Friendship Pipeline) के माध्यम से भेजी गई, जो 2023 से चालू है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यभारत ने बांग्लादेश को 5,000 metric tonnes डीजल की आपूर्ति की।
- स्थानफ्रेंडशिप पाइपलाइन (Friendship Pipeline): भारत और बांग्लादेश को जोड़ने वाली एक एनर्जी पाइपलाइन।
- तथ्यफ्रेंडशिप पाइपलाइन (Friendship Pipeline) 2023 से चालू है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की ऊर्जा कूटनीति और 'फ्रेंडशिप पाइपलाइन' जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने बांग्लादेश के साथ उसके रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को किस प्रकार सुदृढ़ किया है, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- एनर्जी सिक्योरिटी: क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए गल्फ सप्लाई में आने वाली रुकावटों को कम करना
- स्ट्रेटेजिक लेवरेज: घरेलू ऊर्जा मांग और द्विपक्षीय सप्लाई कमिटमेंट्स के बीच संतुलन
- क्षेत्रीय एकीकरण: क्रॉस-बॉर्डर पाइपलाइन्स के जरिए दक्षिण एशियाई ऊर्जा कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना
मुख्य शब्द: एनर्जी डिप्लोमेसी · क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · रणनीतिक स्वायत्तता · ऊर्जा सुरक्षा · द्विपक्षीय व्यापार
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए मतदाताओं की अपीलों की सुनवाई के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में विशेष ट्रिब्यूनल (Tribunals) गठित करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को इन ट्रिब्यूनलों के लिए मानदेय और खर्चों का भुगतान करने का आदेश दिया है। भारत निर्वाचन आयोग को न्यायिक अधिकारियों द्वारा स्वीकृत मतदाताओं की पूरक सूची को अंतिम मतदाता सूची में जोड़ना होगा और बाहर किए गए मतदाताओं को उनके निष्कासन के कारणों की सूचना देनी होगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थाECI: स्पेशल ट्रिब्यूनल्स (Special Tribunals) के लिए मानदेय (Honorarium) देने और खर्चों को कवर करने के लिए जिम्मेदार है।
- स्थानपश्चिम बंगाल: वह राज्य जहाँ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया हुई।
- तथ्यट्रिब्यूनल की अध्यक्षता रिटायर्ड जजों (retired judges) द्वारा की जाएगी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक लोकतंत्र में समावेशी मतदाता सूची के महत्व का परीक्षण कीजिए और मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में न्यायिक निरीक्षण की भूमिका की चर्चा कीजिए।
- संस्थागत भरोसा: राज्य सरकारों और चुनाव आयोग के बीच 'ट्रस्ट डेफिसिट' को दूर करना
- प्रक्रियात्मक पारदर्शिता: व्यक्तिगत मतदाताओं को बाहर करने के विशिष्ट कारण बताना ज़रूरी
- न्यायिक हस्तक्षेप: चुनाव में भाग लेने के अधिकार के साथ चुनाव आयोग की प्रशासनिक स्वायत्तता को संतुलित करना
मुख्य शब्द: मतदाता सूची · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे · न्यायिक निगरानी · विश्वास की कमी · मतदान का अधिकार
चर्चा में क्यों: राजस्थान विधानसभा ने लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनावों में चुनाव लड़ने वाले व्यक्तियों के लिए दो-बच्चे के मानदंड को समाप्त करने वाला एक विधेयक पारित किया है।
राजस्थान विधानसभा ने ध्वनि मत (voice vote) के माध्यम से इस संशोधन को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को नगर निगम पार्षद, मेयर और अध्यक्ष के पदों के लिए चुनाव लड़ने की अनुमति देता है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
- अधिनियम / विधेयकराजस्थान बिल विशेष रूप से अर्बन लोकल बॉडी (ULB) चुनावों के लिए दो-बच्चे की सीमा को रद्द करता है।
- तथ्ययह बिल म्युनिसिपल काउंसलर, मेयर और चेयरपर्सन के पदों को कवर करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्थानीय निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवारों पर से जनसांख्यिकीय प्रतिबंधों को हटाने से भारत में जमीनी स्तर के लोकतंत्र और समावेशिता को कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है, चर्चा कीजिए।
- लोकतांत्रिक समावेशिता: विविध जनसांख्यिकीय प्रोफाइल को शामिल करने के लिए पात्र उम्मीदवारों के पूल का विस्तार
- प्रशासनिक निरीक्षण: नगर पालिका स्तर पर उम्मीदवार की पात्रता और प्रतिनिधि शासन की ज़रूरत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: जमीनी स्तर की लोकतंत्र · लोकतांत्रिक भागीदारी · समावेशिता · स्थानीय शासन · विधायी संशोधन
GS2सामाजिक न्याय › स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्यमेन्स चर्चा में क्यों: तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री सी. दामोदर राजा नरसिम्हा ने अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplants) के लिए नीति में बदलाव और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट (Clinical Establishments Act) के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए निजी अस्पताल प्रबंधन के साथ बैठक की।
तेलंगाना सरकार का लक्ष्य अंग दान की प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निजी अस्पतालों में प्रत्यारोपण (transplant) उपचार के लिए किफायती कीमतें सुनिश्चित करना है। इस पहल में राज्य में प्रत्यारोपण के लिए आने वाले अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए दिशा-निर्देश शामिल हैं और यह दान किए गए अंगों के प्रभावी उपयोग पर जोर देती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- पदसी. दामोदर राजा नरसिम्हा: तेलंगाना के हेल्थ मिनिस्टर।
- अधिनियम / विधेयकक्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट (Clinical Establishments Act): क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन को नियंत्रित करने वाला कानून।
- तथ्यप्राइवेट अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट (organ transplant) ट्रीटमेंट पर प्राइस कंट्रोल लागू करने के लिए तेलंगाना सरकार की पहल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अंग प्रत्यारोपण को विनियमित करने में आने वाली चुनौतियों और जीवन रक्षक उपचारों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने में विधायी ढांचों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- रेगुलेटरी गैप: प्राइवेट हेल्थकेयर में स्टैंडर्डाइज्ड प्राइसिंग की कमी से ऑर्गन ट्रांसप्लांट की कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ रही हैं
- नैतिक निगरानी: अंग प्रत्यारोपण की मांग और पारदर्शी, गैर-व्यावसायिक दान प्रोटोकॉल की आवश्यकता के बीच संतुलन
- केंद्र-राज्य तनाव: राज्य स्तरीय क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट नियमों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य गाइडलाइन्स के बीच तालमेल ज़रूरी
मुख्य शब्द: समान पहुंच · नियामक निगरानी · क्लीनिकल गवर्नेंस · कीमतों में पारदर्शिता · सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति
चर्चा में क्यों: कर्नाटक विधानसभा ने कर्नाटक ज्ञान भंडार पांडुलिपि और डिजिटाइजेशन बिल (Karnataka Jnana Bhandar Manuscripts and Digitisation Bill) सहित चार विधेयक पेश किए।
कर्नाटक ज्ञान भंडार पांडुलिपि और डिजिटलीकरण विधेयक का उद्देश्य पांडुलिपियों के प्रबंधन के लिए एक समर्पित निकाय बनाना है। कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (संशोधन) विधेयक स्थानीय चुनावों में EVMs के बजाय बैलेट पेपर के उपयोग का प्रस्ताव करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- अधिनियम / विधेयककर्नाटक ज्ञान भंडार पांडुलिपि और डिजिटाइजेशन बिल: पांडुलिपि प्रबंधन के लिए एक निकाय स्थापित करने का प्रस्ताव।
- अधिनियम / विधेयककर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (Amendment) बिल: EVMs के बजाय बैलेट पेपर के उपयोग का प्रस्ताव।
- अधिनियम / विधेयककर्नाटक लोकायुक्त (संशोधन) बिल: इसका उद्देश्य लोकायुक्त की सेवा शर्तों को जजों और चीफ जस्टिस के समान बनाना है।
- स्थानकर्नाटक लेजिस्लेटिव असेंबली: चार बिलों को पेश करने का वेन्यू (venue)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और शैक्षिक अनुसंधान को बढ़ावा देने में पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और उनके संरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- संस्थागत निगरानी: राज्य द्वारा संचालित पांडुलिपि संरक्षण और मानकीकृत राष्ट्रीय आर्काइवल प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
- लोकतांत्रिक अखंडता: ग्रामीण स्थानीय निकायों में बैलेट पेपर बनाम EVM की लॉजिस्टिक व्यवहार्यता और सुरक्षा का मूल्यांकन
- न्यायिक समानता: भ्रष्टाचार विरोधी प्रभाव पर लोकयुक्त सेवा शर्तों को न्यायपालिका के बराबर लाने का आकलन
मुख्य शब्द: सांस्कृतिक संरक्षण · डिजिटल आर्काइविंग · विकेंद्रीकृत शासन · भ्रष्टाचार विरोधी ढांचा · विधायी सुधार
GS2सामाजिक न्याय › स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्यप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: राजामहेन्द्रवरम में दूषित दूध से संबंधित 12 लोगों की मौत के बाद, आंध्र प्रदेश के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने जागरूकता अभियान और एक टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू की है।
आंध्र प्रदेश का खाद्य सुरक्षा विभाग दूध में मिलावट की पहचान करने के संबंध में जनता को शिक्षित करने के लिए पैम्फलेट और बुकलेट वितरित कर रहा है। यह पहल राजमहेंद्रवरम में दूषित दूध के कारण हुई 12 मौतों की एक श्रृंखला के बाद शुरू की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यराजमहेन्द्रवरम में दूषित दूध से 12 मौतें जुड़ी हुई हैं।
- तथ्यडिटेक्शन के तरीकों में व्हाइट स्ट्रीक्स (white streaks) की पहचान, फोम फॉर्मेशन (foam formation) और आयोडीन सॉल्यूशन के साथ कलर चेंज शामिल हैं।
- संस्थाआंध्र प्रदेश का फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट (Food Safety Department) जागरूकता अभियान के लिए नोडल बॉडी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और दूध में बड़े पैमाने पर होने वाली मिलावट को रोकने के लिए आवश्यक संस्थागत और विनियामक उपायों की चर्चा कीजिए।
- रेगुलेटरी ओवरसाइट: राज्य स्तर पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के प्रवर्तन को मजबूत करना
- जन जागरूकता: खाद्य सुरक्षा मानकों और ग्रामीण उपभोक्ता साक्षरता के बीच की जानकारी के अंतर को कम करना
- सप्लाई चेन इंटीग्रिटी: डेयरी सेक्टर में कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेसेबिलिटी की कमी को दूर करना
मुख्य शब्द: खाद्य सुरक्षा · सार्वजनिक स्वास्थ्य · नियामक निगरानी · मिलावट · उपभोक्ता जागरूकता
GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › पंचायती राज एवं शहरी स्थानीय निकायप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने 10 मार्च, 2026 को 86 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति हेतु एक जी.ओ. जारी किया। यह निर्णय निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यकाल की समाप्ति और आगामी जनगणना-2027 (Census-2027) के कारण लिया गया है।
सरकार ने उन 86 नगरीय स्थानीय निकायों (ULBs) के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की है, जिनका कार्यकाल 17 मार्च, 2026 को समाप्त हो रहा है। इन नियुक्तियों में नगर निगमों के लिए जिला कलेक्टर और नगर पालिकाओं के लिए संयुक्त कलेक्टर, राजस्व मंडल अधिकारी और विशेष उप-कलेक्टर शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
- तथ्यआंध्र प्रदेश की 86 अर्बन लोकल बॉडीज (ULBs) को स्पेशल ऑफिसर्स सौंपे गए।
- तथ्यस्पेशल ऑफिसर्स का कार्यकाल छह महीने या चुनाव होने तक होता है।
- पदडिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स को म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के लिए स्पेशल ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जाता है।
- पदनगर पालिकाओं के लिए जॉइंट कलेक्टर्स, रेवेन्यू डिविजनल ऑफिसर्स और स्पेशल डिप्टी कलेक्टर्स की नियुक्ति की जाती है।
- तथ्ययह निर्णय आगामी Census-2027 और 23 ULBs के चुनावों में देरी से प्रभावित था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी स्थानीय निकायों में प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष अधिकारी के रूप में नियुक्त करने के स्थानीय स्वशासन के सिद्धांत पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
- लोकतांत्रिक घाटा: निर्वाचित प्रतिनिधित्व का अस्थायी निलंबन जमीनी स्तर की जवाबदेही में बाधा डालता है
- प्रशासनिक निरीक्षण: कार्यकारी दक्षता और स्थानीय निकायों की स्वायत्तता के बीच संतुलन
- संस्थागत घर्षण: नौकरशाही के आदेश और समुदाय के नेतृत्व वाले विकास के बीच संभावित टकराव
मुख्य शब्द: शहरी स्थानीय निकाय · स्थानीय स्वशासन · प्रशासनिक निगरानी · लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण · विशेष अधिकारी
चर्चा में क्यों: CBSE स्कूलों की नेशनल काउंसिल ने प्रधानमंत्री को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के बीच बिना निगरानी के डिजिटल और सोशल मीडिया के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक 'नेशनल चाइल्ड डिजिटल सेफ्टी फ्रेमवर्क' (National Child Digital Safety Framework) की सिफारिश की गई है।
यह रिपोर्ट स्कूल लीडर्स, शिक्षकों और अभिभावकों से प्राप्त 6.3 लाख प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। इसमें पाया गया कि 74% उत्तरदाताओं ने बताया कि छात्र शैक्षणिक पढ़ाई के अलावा प्रतिदिन दो घंटे से अधिक समय स्क्रीन पर बिताते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्य74% उत्तरदाताओं ने बताया कि छात्र शैक्षणिक पढ़ाई के अलावा स्क्रीन पर रोजाना दो घंटे से अधिक समय बिताते हैं।
- तथ्ययह रिपोर्ट स्कूल लीडर्स, एजुकेटर्स और पेरेंट्स से प्राप्त 6.3 लाख रिस्पॉन्स पर आधारित थी।
- संस्थानेशनल काउंसिल ऑफ CBSE स्कूल्स ने रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शिक्षा में तकनीकी एकीकरण और नाबालिगों को डिजिटल जोखिमों से सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करनेके लिए एक राष्ट्रीय बाल डिजिटल सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
- रेगुलेटरी गैप: अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर स्टैंडर्डाइज्ड उम्र-सत्यापन सिस्टम और पेरेंटल ओवरसाइट मैकेनिज्म की कमी
- पेडागोजिकल शिफ्ट: स्कूलों में डिजिटल टेक्नोलॉजी के अनियंत्रित स्क्रीन टाइम से हटकर उसे स्ट्रक्चर्ड और रेगुलेटेड एजुकेशनल यूज़ की ओर ले जाना
मुख्य शब्द: डिजिटल साक्षरता · बाल कल्याण · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · डिजिटल सुरक्षा · शिक्षा नीति
GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › संवैधानिक संस्थाएं (CAG, UPSC, वित्त आयोग, NCSC...)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: लद्दाख के पूर्व LG, कविंदर गुप्ता ने 10 मार्च, 2026 को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ली। इस दौरान उन्होंने इस पद की गैर-पक्षपाती प्रकृति (non-partisan nature) पर जोर दिया।
कविंदर गुप्ता ने शिमला स्थित लोक भवन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल पद का कार्यभार संभाला। इससे पहले वे लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में कार्यरत थे।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- पदकविंदर गुप्ता: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल (मार्च 2026 तक)।
- स्थानलोक भवन: शिमला में शपथ ग्रहण समारोह (swearing-in ceremony) का स्थल।
- तथ्यगुप्ता ने पहले लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में कार्य किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संघ और राज्य के बीच एक सेतु के रूप में राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका पर चर्चा कीजिए तथा इस पद के गैर-पक्षपाती बने रहने के महत्व को रेखांकित कीजिए। चर्चा कीजिए।
- संवैधानिक टकराव: केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल की भूमिका और राज्य की कार्यकारी स्वायत्तता के बीच संतुलन
- विकास का लक्ष्य: राज्य स्तर के शासन में जनजातीय कल्याण और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ना
मुख्य शब्द: संवैधानिक नैतिकता · संघीय ढांचा · राज्य स्वायत्तता · गैर-पक्षपाती शासन
GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भारत निर्वाचन आयोग का प्राथमिक लक्ष्य एक हिंसा-मुक्त और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान बिना किसी भेदभाव के कानून के शासन (Rule of Law) को लागू करने का निर्देश दिया है। आयोग केवल पात्र मतदाताओं को शामिल करनेसुनिश्चित करने के लिए शुद्ध मतदाता सूची (Electoral Rolls) बनाए रखने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थाECI: भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार संस्था।
- तथ्यपश्चिम बंगाल चुनावों के लिए ECI का प्राथमिक लक्ष्य: हिंसा और डराने-धमकाने से मुक्त वातावरण।
- तथ्यECI का जनादेश वोट देने के अधिकार की रक्षा के लिए शुद्ध मतदाता सूची बनाए रखने को शामिल करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्वाचन हिंसा की प्रवृत्तियों वाले राज्यों में चुनावी प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करनेके लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए उपायों की चर्चा कीजिए।
- संस्थागत स्वायत्तता: हाई-स्टेक्स असेंबली चुनावों के दौरान राजनीतिक दबाव और कानून प्रवर्तन की तटस्थता के बीच संतुलन
- चुनावी अखंडता: अस्थिर क्षेत्रों में सटीक मतदाता सूची बनाए रखने और मतदाताओं को डराने से रोकने में चुनौतियां
मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · कानून का शासन · मतदाताओं को डराना · भारत निर्वाचन आयोग · स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव
स्रोत: द हिंदू ↗+1 और खबरें इस विषय पर GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेमेन्स चर्चा में क्यों: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जेंडर रिप्रेजेंटेशन (gender representation) में सुधार के लिए हाई कोर्ट कॉलेजियम से यह मानदंड स्थापित करने का आग्रह किया है, ताकि जजों की नियुक्ति के लिए योग्य महिला सुप्रीम कोर्ट वकीलों पर विचार किया जा सके।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका में निरंतर लैंगिक विविधता (Gender Diversity) सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत सुधार की वकालत की। उन्होंने हाई कोर्ट में महिला मुख्य न्यायाधीशों और जिला स्तर पर महिला न्यायाधीशों की बढ़ती संख्या के साथ एक सकारात्मक रुझान पर ध्यान दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
- पदसूर्यकांत: भारत के मुख्य न्यायाधीश (मार्च 2026 तक)।
- तथ्यCJI ने विभिन्न हाई कोर्ट्स में चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत महिलाओं की बढ़ती संख्या पर प्रकाश डाला।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय न्यायपालिका के भीतर लैंगिक विविधता सुनिश्चित करने में संस्थागत सुधारों के महत्व पर चर्चा कीजिए। न्यायपालिका की कॉलेजियम प्रणाली को अधिक समावेशी कैसे बनाया जा सकता है? चर्चा कीजिए।
- स्ट्रक्चरल बैरियर: कॉलेजियम प्रक्रिया में जेंडर-इंक्लूसिव चयन के लिए औपचारिक मानदंडों की कमी
- संस्थागत जड़ता: जिला स्तर और हाई कोर्ट प्रतिनिधित्व में प्रगति के बावजूद लापरवाही का जोखिम
मुख्य शब्द: जेंडर डाइवर्सिटी · न्यायिक नियुक्तियाँ · संस्थागत सुधार · कॉलेजियम सिस्टम · प्रतिनिधित्व
GS3 · अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा · 27
चर्चा में क्यों: VEM Technologies और जर्मन कंपनी TKMS ने भारतीय नौसेना के पनडुब्बी बेड़े (submarine fleet) के लिए भारत में भारी वजन वाले टॉरपीडो (heavyweight torpedoes) के संयुक्त उत्पादन के लिए एक टीमिंग एग्रीमेंट (Teaming Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं।
VEM Technologies और TKMS (जर्मनी) ने टॉरपीडो उत्पादन के लिए एक रणनीतिक टीमिंग एग्रीमेंट (Teaming Agreement) किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय नौसेना के मौजूदा पनडुब्बी बेड़े को आपूर्ति करना और एक संभावित जॉइंट वेंचर (Joint Venture) के माध्यम से भविष्य के निर्यात अवसरों की संभावनाओं को तलाशना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- विज्ञान-तकनीकTKMS: टोरपीडो और नेवल सिस्टम्स (naval systems) में विशेषज्ञता रखने वाली एक जर्मन नेवल फर्म।
- तथ्ययह समझौता भारतीय नौसेना के सबमरीन बेड़े के लिए हैवीवेट टॉरपीडो (heavyweight torpedoes) के उत्पादन पर केंद्रित है।
- पदVEM Technologies: घरेलू टॉरपीडो निर्माण के लिए TKMS के साथ साझेदारी करने वाली एक भारतीय इकाई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रणनीतिक रक्षा साझेदारी और 'मेक इन इंडिया' पहल किस प्रकार भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसेना प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता में योगदान देती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: हाई-प्रिसिजन वेपनीरी के लिए स्वदेशी आरएंडडी और विदेशी तकनीकी विशेषज्ञता के बीच संतुलन
- स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: समुद्री डिफेंस को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण अंडरवॉटर वॉरफेयर कंपोनेंट्स पर आयात निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · रक्षा स्वदेशीकरण · समुद्री सुरक्षा · तकनीकी हस्तांतरण · रणनीतिक साझेदारी
चर्चा में क्यों: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत की सशस्त्र सेनाओं को एक आधुनिक, एकीकृत और तकनीकी रूप से उन्नत सैन्य शक्ति में बदलने के लिए ‘Defence Forces Vision 2047’ रोडमैप का अनावरण किया।
यह रोडमैप हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (Headquarters Integrated Defence Staff) द्वारा तैयार किया गया है। यह तीन मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है: सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर समन्वय (jointness), स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देना और भविष्य के युद्धों के लिए नवाचार (innovation) का लाभ उठाना।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थाHeadquarters Integrated Defence Staff (HQ IDS) वह संस्था है जो Defence Forces Vision 2047 तैयार करने के लिए जिम्मेदार है।
- तथ्ययह रोडमैप भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष (2047) को लक्षित करता है।
- विज्ञान-तकनीकयह विजन भविष्य के युद्ध के लिए स्वदेशी तकनीकों और इनोवेशन (innovation) को बढ़ावा देने पर जोर देता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रक्षा बलों के विजन 2047 के उद्देश्यों की प्राप्ति में 'संयुक्तता' (jointness) और स्वदेशी तकनीकी एकीकरण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- इंटर-सर्विस सिनर्जी: बेहतर ट्राई-सर्विस इंटीग्रेशन के लिए संस्थागत साइलो्स को दूर करना
- आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी R&D और मैन्युफैक्चरिंग के जरिए आयात पर निर्भरता कम करना
- तकनीकी समानता: उन्नत युद्ध क्षमताओं के जरिए बदलते भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना
मुख्य शब्द: एकता · स्वदेशी तकनीक · रणनीतिक सुधार · इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ · भविष्य का युद्ध
चर्चा में क्यों: परमाणु ऊर्जा विभाग ने घोषणा की है कि आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में थोरियम को यूरेनियम ईंधन में बदलने के लिए एक हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलरेटर (High-energy proton accelerator) स्थापित किया जाएगा।
राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (RRCAT) परमाणु ऊर्जा के लिए थोरियम भंडार का उपयोग करने की परियोजना का नेतृत्व करेगा। इस सुविधा का उद्देश्य रिएक्टरों के लिए थोरियम को यूरेनियम ईंधन में बदलकर भारत के दीर्घकालिक परमाणु अनुसंधान रोडमैप को समर्थन देना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- स्थानविशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश: हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर (high-energy proton accelerator) के लिए चुना गया स्थल।
- संस्थाराजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (RRCAT): इसकी स्थापना 1984 में डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (Department of Atomic Energy) के तहत की गई थी।
- विज्ञान-तकनीकप्रोटॉन एक्सेलेरेटर (Proton Accelerator): इसका उपयोग न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए थोरियम को यूरेनियम फ्यूल में बदलने के लिए किया जाता है।
- तथ्यRRCAT: यह पार्टिकल एक्सेलरेटर (particle accelerators) और लेजर टेक्नोलॉजी (laser technologies) में रिसर्च का नेतृत्व करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की ऊर्जा सुरक्षा में थोरियम-आधारित परमाणु ऊर्जा के महत्व और थोरियम-से-यूरेनियम रूपांतरण में आने वाली तकनीकी बाधाओं का विश्लेषण कीजिए।
- रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन: न्यूक्लियर फ्यूल मिक्स में विविधता लाने के लिए भारत के विशाल थोरियम भंडार का इस्तेमाल
- तकनीकी बाधा: हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लॉन्ग-टर्म R&D ज़रूरतें
- ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू थोरियम कन्वर्जन के जरिए यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: न्यूक्लियर रोडमैप · थोरियम साइकिल · पार्टिकल एक्सीलरेटर · ऊर्जा सुरक्षा · RRCAT
GS3कृषि › फसल पैटर्न एवं सिंचाईप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने जल जीवन मिशन (JJM) की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। इसके लिए ₹8.7 लाख करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, ताकि इसका मुख्य फोकस बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के बजाय सेवा वितरण (Service delivery) पर केंद्रित किया जा सके।
इस मिशन को 'सुजलाम भारत' फ्रेमवर्क के तहत पुनर्गठित किया जाएगा, जिसमें पेयजल शासन और संस्थागत ढांचे को शामिल किया जाएगा। इसका लक्ष्य हर गाँव में संपूर्ण जल आपूर्ति प्रणाली को डिजिटल रूप से मैप करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- योजनाजल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) की एक्सटेंशन अवधि: दिसंबर 2028 तक।
- तथ्यJJM के लिए विस्तारित बजट: ₹8.7 लाख करोड़।
- तथ्यसुजलाम भारत: ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों को डिजिटल रूप से मैप करने के लिए एक फ्रेमवर्क।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण जल प्रबंधन में बुनियादी ढांचा निर्माण से सेवा वितरण की ओर हुए बदलाव और भारत में सतत ग्रामीण विकास के लिए इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
- संस्थागत बाधा: लंबे समय तक जल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने के लिए मजबूत स्थानीय शासन की ज़रूरत
- डिजिटल इंटीग्रेशन: ग्रामीण जल आपूर्ति सिस्टम की 100% डिजिटल मैपिंग हासिल करने में चुनौतियां
- राजकोषीय स्थिरता: पानी की सेवा वितरण की आवर्ती लागत के साथ उच्च पूंजीगत खर्च का संतुलन
मुख्य शब्द: सेवा वितरण · संस्थागत ढांचा · डिजिटल मैपिंग · ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर · जल शासन
GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (insolvency resolution process) को तेज़ करने के लिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्ट्सी कोड (IBC) और कंपनीज एक्ट, 2013 में संशोधनों को मंजूरी दी है।
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने दिवाला समाधान आवेदनों के लिए आवश्यक समय को कम करने के लिए संशोधनों का प्रस्ताव दिया है। IBC (संशोधन) बिल, 2025 को बजट सत्र के दूसरे भाग के दौरान पेश करने की योजना है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
- अधिनियम / विधेयकIBC (Amendment) Bill, 2025: इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन (insolvency resolution) आवेदनों के लिए समय को कम करने का प्रस्ताव।
- संस्थाकॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री: IBC और कंपनीज एक्ट (Companies Act) में संशोधन प्रस्तावित करने के लिए जिम्मेदार नोडल मिनिस्ट्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के अंतर्गत दिवाला समाधान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने से व्यापार करने की सुगमता और ऋण प्रवाह में होने वाले सुधारों पर चर्चा कीजिए।
- समयबद्ध समाधान: एसेट डेप्रिसिएशन को कम करने और वित्तीय संस्थानों के लिए रिकवरी रेट सुधारने के लिए देरी कम करना
- रेगुलेटरी क्लैरिटी: डिस्ट्रेस्ड कॉर्पोरेट डेटर्स के लिए प्रक्रियात्मक ओवरलैप कम करने हेतु कंपनी एक्ट और IBC में तालमेल
मुख्य शब्द: इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्ट्सी कोड · ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · कॉरपोरेट गवर्नेंस · डिस्ट्रेस्ड एसेट्स · क्रेडिट फ्लो
GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से LNG शिपमेंट में व्यवधान के बाद, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक क्षेत्रों को प्राकृतिक गैस आवंटन में प्राथमिकता देने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act), 1955 को लागू किया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने घरेलू पाइप वाली प्राकृतिक गैस, वाहनों के ईंधन के लिए CNG, LPG उत्पादन, उर्वरक निर्माण, चाय उद्योगों और औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को ONGC पेट्रोल एडिशन्स लिमिटेड, GAIL पटा पेट्रोकेमिकल और रिलायंस O2C को आपूर्ति देना प्राथमिकता देनी होगी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- अधिनियम / विधेयकEssential Commodities Act, 1955: गैस आवंटन को प्राथमिकता देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा इसका उपयोग किया गया।
- तथ्यनए आवंटन के तहत रिफाइनरियों को उनके पिछले खपत स्तर का 65% प्राप्त होगा।
- तथ्यप्राथमिकता वाले क्षेत्रों (Priority sectors) में घरेलू पाइप वाली प्राकृतिक गैस (piped natural gas), CNG, LPG उत्पादन, उर्वरक निर्माण, चाय उद्योग और औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं।
- स्थानहोर्मुज जलडमरूमध्य: LNG शिपमेंट में व्यवधान का स्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपूर्ति श्रृंखला में होने वाले व्यवधानों के प्रबंधन में आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- सप्लाई चेन की कमजोरी: LNG आयात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री रास्तों पर भारी निर्भरता
- रेगुलेटरी इंटरवेंशन: औद्योगिक विकास और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़रूरत के बीच संतुलन
- सेक्टोरल प्रायोरिटाइजेशन: रिफाइनरी की जरूरतों और उर्वरक और चाय जैसे जरूरी मैन्युफैक्चरिंग के बीच ट्रेड-ऑफ
मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · सप्लाई चेन रेज़िलिएंस · रेगुलेटरी इंटरवेंशन · आवश्यक वस्तुएं · रणनीतिक आवंटन
चर्चा में क्यों: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) चार प्रमुख खगोलीय सुविधाओं (astronomical facilities) के निर्माण और अपग्रेडेशन के लिए ₹3,500 करोड़ के प्रोजेक्ट हेतु कैबिनेट की मंजूरी मांग रहा है।
इस परियोजना में नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप (NLST), नेशनल लार्ज ऑप्टिकल इन्फ्रारेड टेलिस्कोप (NLOT), लद्दाख के हनले में अपग्रेड किया गया हिमालयन चंद्र टेलिस्कोप (uHCT) और कॉस्मोलॉजी एजुकेशन एंड रिसर्च ट्रेनिंग सेंटर (COSMOS 2) शामिल हैं। इन सुविधाओं के निर्माण के तीन से 13 वर्षों की अवधि में पूरा होने की उम्मीद है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
- विज्ञान-तकनीकNLST: सूर्य के लिए भारत की अगली पीढ़ी की विंडो।
- विज्ञान-तकनीकNLOT: भारत का पहला सेगमेंटेड मिरर लार्ज अपर्चर ऑप्टिकल इन्फ्रारेड ऑब्जर्वेटरी (segmented mirror large aperture optical infrared observatory)।
- स्थानuHCT: यह लद्दाख के हानले में स्थित है।
- तथ्यप्रोजेक्ट की लागत: ₹3,500 करोड़।
- संस्थाIIA: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष विज्ञान और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में नेतृत्व की भारत की आकांक्षा के संदर्भ में, स्वदेशी बड़े पैमाने के खगोलीय बुनियादी ढांचे के विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- तकनीकी संप्रभुता: हाई-रिज़ॉल्यूशन सोलर और इन्फ्रारेड डेटा के लिए अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं पर निर्भरता कम करना
- ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट: एडवांस कॉस्मोलॉजी रिसर्च के लिए स्पेशलाइज्ड वर्कफोर्स तैयार करने में COSMOS 2 की भूमिका
मुख्य शब्द: अंतरिक्ष विज्ञान · खगोलीय इंफ्रास्ट्रक्चर · तकनीकी संप्रभुता · डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन · स्वदेशी रिसर्च
चर्चा में क्यों: BARC के शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि रिएक्टर के डिजाइन में बदलाव की आवश्यकता और कम प्लूटोनियम उत्पादन के कारण HALEU-Thorium ईंधन भारत के तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए अनुपयुक्त हो सकता है।
'करेंट साइंस' (Current Science) में प्रकाशित यह अध्ययन संकेत देता है कि HALEU-थोरियम के उपयोग से रिफ्यूलिंग मशीनरी में घिसावट बढ़ सकती है। यह यह भी बताता है कि यह ईंधन प्राकृतिक यूरेनियम की तुलना में कम प्लूटोनियम पैदा करता है, जिससे भारत की परमाणु योजना के दूसरे चरण के लिए आर्थिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- विज्ञान-तकनीकHALEU-Thorium: एक न्यूक्लियर फ्यूल टाइप जिसे भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (three-stage nuclear energy program) के लिए मूल्यांकन किया जा रहा है।
- संस्थाभाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC): वह रिसर्च बॉडी जिसने HALEU-Thorium पर अध्ययन किया।
- तथ्यHALEU-Thorium, नेचुरल यूरेनियम की तुलना में कम प्लूटोनियम पैदा करता है, जो न्यूक्लियर प्लान के दूसरे चरण की इकोनॉमिक वायबिलिटी (economic viability) को प्रभावित करता है।
- पदNTPC Ltd. और Clean Core Thorium Energy: कंपनियाँ वर्तमान में HALEU-Thorium फ्यूल विकल्प का मूल्यांकन कर रही हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में थोरियम-आधारित ईंधन चक्रों की ओर संक्रमण से जुड़ी तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
- तकनीकी बाधा: रिएक्टर के बड़े डिज़ाइन बदलाव और रिफ्यूलिंग मशीनरी पर बढ़ते दबाव की ज़रूरत
- आर्थिक बाधा: नेचुरल यूरेनियम की तुलना में HALEU-थोरियम से कम प्लूटोनियम यील्ड स्टेज-दो की व्यवहार्यता को प्रभावित कर रही है
मुख्य शब्द: तीन चरणों वाला परमाणु कार्यक्रम · थोरियम फ्यूल साइकिल · प्लूटोनियम उत्पादन · न्यूक्लियर रिएक्टर डिज़ाइन · ऊर्जा सुरक्षा
GS3कृषि › फसल पैटर्न एवं सिंचाईप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता ने हीटवेव से होने वाली मौतों को कम करने और अनुमानित हीटवेव के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'हीट वेव एक्शन प्लान 2026' (Heat Wave Action Plan 2026) लॉन्च किया।
हीट वेव एक्शन प्लान 2026 में काम के घंटों को पुनर्गठित करने, कूलिंग शेल्टर (cooling shelters) स्थापित करने और पानी वितरित करने जैसे उपायों को शामिल किया गया है। यह योजना हीटस्ट्रोक के मामलों के लिए अस्पतालों की तैयारी को अनिवार्य बनाती है और रिफ्रेशमेंट वितरण के लिए NGOs और सामुदायिक समूहों को भी इसमें शामिल करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- योजनाहीट वेव एक्शन प्लान 2026: आंध्र प्रदेश में हीटवेव के जोखिमों को मैनेज करने के लिए एक राज्य-स्तरीय पहल।
- तथ्यइन उपायों में काम के घंटों को रीशेड्यूल (reschedule) करना और कूलिंग शेल्टर (cooling shelters) स्थापित करना शामिल है।
- पदवंगलपुडी अनिता: आंध्र प्रदेश में गृह और आपदा प्रबंधन मंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में जलवायु-प्रेरित लू (heatwaves) से निपटने और संवेदनशील आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य-विशिष्ट आपदा प्रबंधन योजनाओं के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन: सुचारू इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए स्वास्थ्य, श्रम और डिजास्टर मैनेजमेंट विभागों को जोड़ना
- कम्युनिटी-आधारित लचीलापन: लास्ट-माइल रिलीफ वितरण के अंतर को पाटने के लिए NGO और स्थानीय कम्युनिटी नेटवर्क का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: आपदा प्रबंधन · क्लाइमेट एडैप्टेशन · सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा · हीटवेव से बचाव के उपाय · राज्य शासन
GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी की समस्या को दूर करने के लिए नॉर्वे और यू.एस. से LNG आयात के स्रोतों में विविधता ला रहा है और घरों के लिए LPG उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने घरेलू उपयोग के लिए LPG उत्पादन में 10% की वृद्धि की है। सरकार वाणिज्यिक LPG आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा करने और राहत प्रदान करने के लिए एक समिति का गठन कर रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यMoPNG ने घरेलू उपयोग के लिए LPG उत्पादन में 10% की वृद्धि की।
- स्थाननॉर्वे और यू.एस. को LNG आयात के स्रोतों के रूप में पहचाना गया है।
- संस्थापेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) गैस आपूर्ति के लिए नोडल मंत्रालय है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में होने वाले उतार-चढ़ाव और घरेलू खपत एवं औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन की चुनौतियों के संदर्भ में भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
- सप्लाई चेन में अस्थिरता: नॉर्वे और यू.एस. से लंबी दूरी के LNG आयात की भारी लागत बनाम घरेलू उपलब्धता
- सेक्टोरल प्रायोरिटाइजेशन: आर्थिक विकास के लिए औद्योगिक ऊर्जा मांगों के मुकाबले घरेलू एलपीजी जरूरतों को संतुलित करना
- रेगुलेटरी राहत: कमर्शियल सप्लाई की कमी को दूर करने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड कमेटी मैकेनिज्म की ज़रूरत
मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · सप्लाई चेन मैनेजमेंट · आयात विविधीकरण · क्षेत्रीय प्राथमिकताएं · संसाधन आवंटन
GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (Cabinet Committee on Economic Affairs) ने पश्चिम बंगाल और झारखंड में माल ढुलाई क्षमता और ग्रामीण कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए कुल ₹4,474 करोड़ की दो रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
इन परियोजनाओं में सांतरागाछी और खड़गपुर के बीच चौथी लाइन और सैंथिया से पाकुड़ तक का कनेक्शन शामिल है। यह विस्तार रेल नेटवर्क में 192 किमी की वृद्धि करेगा और इससे माल ढुलाई (freight traffic) में 31 MTPA की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
- तथ्यकुल प्रोजेक्ट कॉस्ट: ₹4,474 करोड़।
- तथ्यनेटवर्क विस्तार: 192 किलोमीटर।
- तथ्यफ्रेट कैपेसिटी में वृद्धि: 31 MTPA।
- स्थानप्रोजेक्ट के स्थान: पश्चिम बंगाल और झारखंड।
- तथ्यप्रभाव: लगभग 5,652 गाँवों के लिए कनेक्टिविटी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: खनिज संपन्न राज्यों में रेल बुनियादी ढांचे के विस्तार से भारत की लॉजिस्टिक दक्षता और ग्रामीण आर्थिक एकीकरण में होने वाले योगदान का विश्लेषण कीजिए।
- लॉजिस्टिक दक्षता: राष्ट्रीय लॉजिस्टिक लागत कम करने के लिए कोयला और खाद्यान्न की फ्रेट बॉटलनैक्स को कम करना
- ग्रामीण-शहरी जुड़ाव: 5,652 गाँवों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के अंतर को कम करना
मुख्य शब्द: लॉजिस्टिक्स दक्षता · मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी · माल ढुलाई क्षमता · ग्रामीण एकीकरण · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासमेन्स चर्चा में क्यों: तमिलनाडु राज्य योजना आयोग (SPC) ने एक अध्ययन जारी किया है, जिसमें प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए कानूनी सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा फंड और अनिवार्य पंजीकरण का प्रस्ताव दिया गया है।
SPC अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि तमिलनाडु में प्लेटफॉर्म श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा मामूली आय अर्जित करता है और उनमें से एक महत्वपूर्ण अनुपात प्रवासी है। यह अध्ययन बड़े प्लेटफॉर्म्स के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष (Social Security Funds) और आंतरिक विवाद समाधान समितियों (Internal Dispute Resolution Committees) के निर्माण का प्रस्ताव देता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थातमिलनाडु स्टेट प्लानिंग कमीशन (SPC) वह संस्था है जिसने गिग वर्कर (gig worker) स्टडी जारी की।
- तथ्यरिपोर्ट में तमिलनाडु प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड (Tamil Nadu Platform Based Gig Workers Welfare Board) के ऑनलाइन पोर्टल पर गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म्स का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन करने का सुझाव दिया गया है।
- तथ्ययह स्टडी यूनियन बनाने (unionization) के लिए कानूनी सुरक्षा और गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए सोशल सिक्योरिटी फंड्स की स्थापना की सिफारिश करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में गिग श्रमिकों (gig workers) को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में आने वाली चुनौतियों की चर्चा कीजिए और प्लेटफॉर्म-आधारित रोजगार के लिए एक समर्पित विनियामक ढांचे की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिए।
- रेगुलेटरी गैप: औपचारिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध की कमी मौजूदा लेबर कानूनों को लागू करना मुश्किल बनाती है
- सोशल सिक्योरिटी डेफिसिट: गैर-पारंपरिक कार्य संरचनाओं के लिए प्रोविडेंट फंड और हेल्थ इंश्योरेंस की कमी
- प्रवासी भेद्यता: राज्य-विशिष्ट कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित पहुंच के कारण प्रवासी गिग वर्कर्स की बड़ी संख्या प्रभावित
मुख्य शब्द: गिग इकोनॉमी · सामाजिक सुरक्षा · प्लेटफ़ॉर्म वर्क · श्रम कल्याण · प्रवासी श्रमिक
स्रोत: द हिंदू ↗+1 और खबरें इस विषय पर GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: पांचवें राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) ने बेंगलुरु में टिकटों की बिक्री पर मनोरंजन शुल्क (entertainment fee) और टैक्स लगाने की शक्ति ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) को देने की सिफारिश की है।
पांचवें राज्य वित्त आयोग ने अनुमान लगाया है कि प्रस्तावित मनोरंजन शुल्क और कर से सालाना 300 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है। यह प्रस्ताव विशेष रूप से नवनिर्मित ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अधिकार क्षेत्र के भीतर आने वाले मनोरंजन स्थलों के टिकटों की बिक्री को लक्षित करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यपांचवें वित्त आयोग ने प्रस्तावित एंटरटेनमेंट टैक्स (Entertainment Tax) से सालाना ₹300 करोड़ तक के राजस्व का अनुमान लगाया था।
- स्थानग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (Greater Bengaluru Authority - GBA) वह संस्था है जिसे बेंगलुरु में शुल्क लगाने के लिए प्रस्तावित किया गया है।
- संस्थापाँचवाँ राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) वह संस्था है जो सिफारिशें करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी जैसी क्षेत्रीय संस्थाओं को कर लगाने की शक्तियों का विकेंद्रीकरण करने के राजकोषीय निहितार्थों और प्रशासनिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
- राजस्व उत्पादन: मनोरंजन टिकटों की भारी बिक्री से स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े फंड की संभावना
- रेगुलेटरी अस्पष्टता: 'एंटरटेनमेंट' की स्पष्ट परिभाषा न होने से कॉर्पोरेट नॉन-कॉम्प्लायंस या मुकदमेबाजी हो सकती है
- राजकोषीय संघवाद: शहरी नियोजन में स्थानीय अधिकार की स्वायत्तता के साथ राज्य-स्तरीय राजस्व लक्ष्यों का संतुलन
मुख्य शब्द: राजकोषीय विकेंद्रीकरण · राजस्व सृजन · अर्बन गवर्नेंस · टैक्सेशन पॉलिसी · स्थानीय निकाय स्वायत्तता
GS3आंतरिक सुरक्षा › मनी लॉन्ड्रिंग एवं संगठित अपराधप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: केरल कैबिनेट ने नशीली दवाओं से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए एक्साइज विभाग के तहत केरल स्टेट नार्कोटिक कंट्रोल ब्यूरो (State NCB) की स्थापना को मंजूरी दी है।
केरल स्टेट नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो (State NCB) राजस्व विभाग (Excise department) के अंतर्गत कार्य करेगा। सरकार ने पालक्कड़, वायनाड और कासरगोड में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों से निपटने के लिए विशेष मोबाइल स्क्वाड इकाइयों हेतु 41 अतिरिक्त पदों को भी मंजूरी दी है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- संस्थाकेरल स्टेट नार्कोटिक कंट्रोल ब्यूरो (State NCB) एक्साइज विभाग (Excise department) के अंतर्गत काम करता है।
- तथ्यस्पेशल मोबाइल स्क्वाड यूनिट्स के लिए 41 अतिरिक्त पदों को मंजूरी दी गई।
- स्थानपलक्कड़ में अगली, वायनाड में मणंतवाड़ी और कासरगोड को स्पेशल मोबाइल स्क्वाड फोकस के लिए पहचाना गया है।
- तथ्यनए NRI पुलिस स्टेशन में 25 कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बढ़ते नशीले पदार्थों के व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक संस्थागत उपायों और सामुदायिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य-स्तरीय प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- अंतर-विभागीय समन्वय: नार्कोटिक्स नियंत्रण के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ एक्साइज विभाग की निगरानी को जोड़ना
- टारगेटेड पुलिसिंग: स्पेशल मोबाइल स्क्वाड यूनिट्स के जरिए SC/ST समुदायों के खिलाफ होने वाली स्थानीय हिंसा से निपटना
मुख्य शब्द: नारकोटिक्स कंट्रोल · कानून प्रवर्तन · स्टेट ब्यूरो · अनुसूचित जातियाँ · कृपया अपना टेक्स्ट प्रदान करें · सार्वजनिक सुरक्षा
GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)प्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: पांचवें राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) ने सिफारिश की है कि कर्नाटक सरकार शहरों से प्राप्त होने वाले अपने कुल GST राजस्व का कम से कम 5% शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) के लिए आरक्षित करे।
कमिश्न ने अनुमान लगाया है कि 5% GST राजस्व आवंटन से नगर निकाय के राजस्व में 52% की वृद्धि होगी। इसने प्राकृतिक आपदाओं और संक्रामक रोगों से निपटने के लिए वार्ड-वार फंड के हस्तांतरण (Devolution) का भी प्रस्ताव दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यपांचवें राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) ने कर्नाटक में शहरी स्थानीय निकायों (urban local self-governments) को GST राजस्व का 5% आवंटन करने की सिफारिश की।
- तथ्यप्रस्तावित आवंटन से म्युनिसिपल बॉडी के रेवेन्यू में 52% की वृद्धि होने का अनुमान है।
- स्थानग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (Greater Bengaluru Authority) उन निकायों में से एक है जिन्हें सिफारिश में शामिल किया गया है।
- तथ्यकमिश्न ने प्राकृतिक आपदाओं और संक्रामक रोगों (communicable diseases) के लिए फंड को वार्ड-वार बांटने का सुझाव दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सतत शहरी शासन और बुनियादी ढांचा विकास सुनिश्चित करने में शहरी स्थानीय निकायों को राजकोषीय हस्तांतरण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- राजकोषीय स्वायत्तता: GST शेयर के जरिए नगर निगम के राजस्व को राज्य की आर्थिक वृद्धि से जोड़ना
- डिजास्टर रेजिलिएंस: लोकल इमरजेंसी रिस्पॉन्स और पब्लिक हेल्थ के लिए वार्ड-वार फंड डिवोल्यूशन
- राजस्व विविधीकरण: गैर-टैक्स आय के लिए म्युनिसिपल प्रॉपर्टी और विज्ञापन होर्डिंग्स का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: राजकोषीय संघवाद · अर्बन गवर्नेंस · राजस्व हस्तांतरण · स्थानीय स्वशासन · टिकाऊ शहरीकरण
चर्चा में क्यों: कर्नाटक हाई कोर्ट ने श्रवथी वैली लायन मकाक सेंचुरी (Sharavathi Valley Lion Macaque Sanctuary) पर पड़ने वाले इसके प्रभाव की चिंताओं के कारण ₹10,000 करोड़ की श्रवथी पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर काम रोकने का अंतरिम आदेश जारी किया है।
यह परियोजना ₹10,000 करोड़ की एक पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक (Pumped Storage Hydroelectric) पहल है, जो श्रवथी वैली लायन मकाक सेंचुरी और उसके इको-सेंसिटिव ज़ोन (Eco-sensitive zone) के भीतर स्थित है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड और नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ से प्राप्त मंजूरियों की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका के बाद निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यशरावती पंपड स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹10,000 करोड़ है।
- स्थानयह प्रोजेक्ट कर्नाटक में शरवथी वैली लायन मकाक सेंचुरी (Sharavathi Valley Lion Macaque Sanctuary) के भीतर स्थित है।
- संस्थानेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (National Board for Wildlife) और स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड प्रोजेक्ट की मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार संस्थाएं हैं।
- अधिनियम / विधेयकWildlife (Protection) Act संरक्षित अभयारण्यों (sanctuaries) के भीतर निर्माण पर लगने वाली पाबंदियों को नियंत्रित करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (eco-sensitive zones) में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास और जैव विविधता के संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।
- रेगुलेटरी ओवरसाइट: वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत 'इको-सेंसिटिव ज़ोन' की सीमाओं की व्याख्या में अस्पष्टता
- विकास के ट्रेड-ऑफ: ग्रिड स्थिरता के लिए पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो की तत्काल ज़रूरत और लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए हैबिटेट फ्रैगमेंटेशन के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: इको-सेंसिटिव ज़ोन · पंप स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी · जैव विविधता संरक्षण · सतत विकास · रेगुलेटरी जांच
GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (Cabinet Committee on Economic Affairs) ने नोएडा एयरपोर्ट लिंक रोड के लिए पूंजीगत लागत (capital costs) में 23% की वृद्धि और उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले एक नए चार-लेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की लागत को ₹2,942 करोड़ से संशोधित कर ₹3,630 करोड़ कर दिया गया है। हरियाणा सरकार इस प्रोजेक्ट की अतिरिक्त लागत में ₹450 करोड़ का योगदान दे रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यनोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की संशोधित लागत: ₹3,630 करोड़।
- तथ्यनोएडा एयरपोर्ट लिंक रोड के लिए हरियाणा सरकार का योगदान: ₹450 करोड़।
- तथ्यउज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे कॉरिडोर: ₹3,839 करोड़ की प्रोजेक्ट कॉस्ट।
- संस्थाकैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (Cabinet Committee on Economic Affairs): इंफ्रास्ट्रक्चर लागत संशोधनों को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार निकाय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की लॉजिस्टिक दक्षता और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ाने में बहु-पक्षीय कनेक्टिविटी (multi-modal connectivity) और अंतर-राज्यीय गलियारों के महत्व की चर्चा कीजिए।
- राजकोषीय प्रबंधन: कैपिटल एक्सपेंडिचर में बढ़ोतरी और प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता के बीच संतुलन
- लॉजिस्टिक तालमेल: इंडस्ट्रियल हब्स और एविएशन गेटवे के बीच ट्रांजिट समय में कमी
- अंतर-राज्यीय सहयोग: राज्य और केंद्र सरकारों के बीच कोलैबोरेटिव फंडिंग मॉडल
मुख्य शब्द: पूंजीगत व्यय · लॉजिस्टिक दक्षता · अंतर-राज्य कनेक्टिविटी · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट
GS3पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी › प्रजातियां, संरक्षित क्षेत्र एवं आर्द्रभूमिप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: WWF India और Microsoft द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि केरल के इडुक्की जिले में 13 वर्षों के दौरान 6,465 आग के बिंदु (fire points) दर्ज किए गए। यह अध्ययन जैव विविधता से समृद्ध आवासों की सुरक्षा के लिए शुरुआती पहचान (early detection) की आवश्यकता पर जोर देता है।
अध्ययन में केरल के इडुक्की क्षेत्र के उच्च ऊंचाई वाले वन क्षेत्रों और घास के मैदानों व वनों के मिश्रित क्षेत्रों (grassland-forest mosaics) में जनवरी से अप्रैल के बीच मौसमी आग लगने के पैटर्न की पहचान की गई है। इसमें विशेष रूप से नीलगिरी तहर जैसी प्रजातियों के आवासों को होने वाले खतरे और इसके परिणामस्वरूप होने वाले मानव-पशु संघर्ष के जोखिम पर ध्यान दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- स्थानइडुक्की जिला केरल राज्य में स्थित है।
- पर्यावरणनिलगिरी तहर एक ऐसी प्रजाति है जिसका आवास (habitat) इस क्षेत्र में लगने वाली जंगल की आग से खतरे में है।
- तथ्य13 साल की अवधि में इडुक्की (Idukki) में 6,465 फायर पॉइंट्स रिकॉर्ड किए गए।
- विज्ञान-तकनीकWWF India की Tech for Conservation पहल ने इस अध्ययन के लिए Microsoft के साथ साझेदारी की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जैव विविधता से समृद्ध आवासों पर वनों की आग के पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों की चर्चा कीजिए तथा प्रारंभिक पहचान के लिए तकनीकी हस्तक्षेपों का सुझाव दीजिए।
- हैबिटेट फ्रैगमेंटेशन: ग्रासलैंड-फॉरेस्ट मोज़ेक का नुकसान नीलगिरी तहर जैसी एंडेमिक प्रजातियों की नीश रिक्वायरमेंट्स को प्रभावित कर रहा है
- मानव-वन्यजीव संघर्ष: भोजन के मुख्य स्रोतों के नष्ट होने से वन्यजीव मानव बस्तियों के करीब आ रहे हैं
- तकनीकी हस्तक्षेप: ऊंचे इलाकों में रियल-टाइम फायर पॉइंट डिटेक्शन के लिए सैटेलाइट इमेजरी और AI का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · जल्दी पता लगाने वाले सिस्टम · हैबिटेट मोज़ेक · मानव-पशु संघर्ष · संरक्षण के लिए तकनीक
GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: भारतीय रेलवे ने कम लागत वाले यात्रा विकल्प प्रदान करने के लिए चेरलापल्ली से नागरकोइल और कामाख्या को जोड़ने वाली दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के शुरू होने की घोषणा की है।
दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) ने इस वित्त वर्ष में ई-ऑक्शन (e-auctions) के माध्यम से ₹602.06 करोड़ की कमाई करके अपने स्क्रैप बिक्री के लक्ष्य को पार कर लिया है। नई ट्रेनें तेलंगाना को आंध्र प्रदेश और असम से जोड़ेंगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यSCR ने इस वित्त वर्ष में e-auctions के जरिए स्क्रैप बिक्री से ₹602.06 करोड़ कमाए।
- स्थानचेरलापल्ली तेलंगाना में स्थित है।
- तथ्यनई ट्रेनों के लिए इनॉर्गुलर रन (Inaugural runs) 11 और 13 मार्च के लिए शेड्यूल किए गए हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अमृत भारत एक्सप्रेस पहल के विस्तार से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और भारतीय रेलवे के लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में होने वाले योगदान का विश्लेषण कीजिए।
- लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडर्नाइजेशन के लिए स्क्रैप-सेल रेवेन्यू का एकीकरण
- क्षेत्रीय एकीकरण: तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और असम के बीच मल्टी-स्टेट कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना
- ऑपरेशनल व्यवहार्यता: लागत प्रभावी यात्री यात्रा और हाई-फ़्रीक्वेंसी रीजनल रेल लिंक्स के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर · सार्वजनिक परिवहन · रेलवे आधुनिकीकरण · आर्थिक एकीकरण
GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹2.81 लाख करोड़ के अतिरिक्त सकल व्यय हेतु लोकसभा से मंजूरी मांगते हुए अनुदान की पूरक मांगों (Supplementary Demands for Grants) का दूसरा बैच पेश किया।
सरकार ने ₹2,81,289.26 करोड़ के कुल अतिरिक्त व्यय (gross additional expenditure) के लिए मंजूरी मांगी है। इसमें ₹2,01,142.96 करोड़ का शुद्ध नकद व्यय (net cash outgo) और ₹80,145.71 करोड़ का वह व्यय शामिल है, जिसकी भरपाई बचत या बढ़ी हुई प्राप्तियों/वसूली के माध्यम से की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यवित्त वर्ष 2026 के लिए कुल अतिरिक्त व्यय (Gross additional expenditure) की मांग: ₹2,81,289.26 करोड़।
- तथ्यनेट कैश आउटगो (Net cash outgo) कंपोनेंट: ₹2,01,142.96 करोड़।
- तथ्यबचत/रिकवरी द्वारा मैच किया गया व्यय: ₹80,145.71 करोड़।
- संस्थाSupplementary Demands for Grants को संसदीय मंजूरी के लिए लोकसभा में पेश किया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सरकारी व्यय पर संसदीय नियंत्रण और राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने में 'पूरक अनुदान मांगों' (Supplementary Demands for Grants) के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- राजकोषीय पारदर्शिता: मध्य-वर्ष बजट बदलावों की रियल-टाइम संसदीय जांच के लिए मैकेनिज्म
- रेवेन्यू मैचिंग: राजकोषीय घाटा लक्ष्यों को बनाए रखने के लिए शुद्ध नकद खर्च को आंतरिक बचत और बेहतर रिकवरी के साथ संतुलित करना
मुख्य शब्द: अनुपूरक अनुदान की मांगें · राजकोषीय अनुशासन · संसदीय निगरानी · नेट कैश आउटगो · कुल अतिरिक्त व्यय
चर्चा में क्यों: नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने सरकार से पश्चिम एशिया में चल रहे लंबे संघर्ष के कारण होने वाली कुकिंग गैस की कमी को दूर करने का आग्रह किया है, क्योंकि इससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर (Hospitality Sector) को खतरा पैदा हो रहा है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आपूर्ति संबंधी समस्याओं की समीक्षा करने और घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए एक समिति का गठन किया है। आपूर्ति में कमी के कारण कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे हैदराबाद में पेइंग गेस्ट (Paying Guest) आवासों सहित विभिन्न व्यवसायों पर इसका असर पड़ रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थाNRAI: नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया।
- तथ्यपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय LPG उत्पादन और आपूर्ति के लिए नोडल मंत्रालय है।
- स्थानहैदराबाद: गैस की कमी से पेइंग गेस्ट (Paying Guest) आवास प्रभावित।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भू-राजनीतिक संघर्षों का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों और इसके परिणामस्वरूप घरेलू आतिथ्य एवं खाद्य सेवा उद्योगों पर होने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
- सप्लाई चेन की कमजोरी: क्षेत्रीय भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान आयातित ऊर्जा इनपुट्स पर भारी निर्भरता
- महंगाई का दबाव: LPG की कीमतों में बढ़ोतरी और MSMEs की ऑपरेशनल कॉस्ट के बीच सीधा संबंध
- पॉलिसी इंटरवेंशन: घरेलू उत्पादन विस्तार और तत्काल सप्लाई स्टेबलाइजेशन उपायों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · सप्लाई चेन में रुकावट · MSME की संवेदनशीलता · भू-राजनीतिक जोखिम · LPG उत्पादन
GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के पर्यटन मंत्री कंदुला दुर्गेश ने राज्य में अम्यूजमेंट और थीम पार्क विकसित करने के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया है। इस दौरान उन्होंने पर्यटन नीति 2024-29 के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों (incentives) पर जोर दिया।
आंध्र प्रदेश सरकार ₹50 करोड़ से अधिक के निवेश के लिए प्रोत्साहन और सरल भूमि आवंटन की सुविधा प्रदान कर रही है। इन परियोजनाओं के लिए मुख्य लक्षित स्थानों में अमरावती, विशाखापट्टनम और तिरुपति शामिल हैं, जिनमें टियर-2 और टियर-3 शहरों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यआंध्र प्रदेश में सरल भूमि आवंटन (land allocation) के लिए निवेश की सीमा: ₹50 करोड़।
- योजनाआंध्र प्रदेश टूरिज्म पॉलिसी 2024-29।
- स्थानअम्यूजमेंट पार्क्स के लिए मुख्य टारगेट लोकेशन: अमरावती, विशाखापट्टनम और तिरुपति।
- संस्थाइंडियन एसोसिएशन ऑफ अम्यूजमेंट पार्क्स एंड इंडस्ट्रीज (IAAPI)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में राज्य-संचालित पर्यटन नीतियों और बुनियादी ढांचा निवेश किस प्रकार क्षेत्रीय आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को गति दे सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।
- इन्वेस्टमेंट-आधारित विकास: एंटरटेनमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और टूरिज्म हब्स विकसित करने के लिए प्राइवेट कैपिटल का इस्तेमाल
- अर्बन-रूरल बैलेंस: टियर-2 और टियर-3 शहरों में अम्यूजमेंट पार्क विकसित कर टूरिज्म को डिसेंट्रलाइज करने की रणनीति
मुख्य शब्द: निवेश प्रोत्साहन · पर्यटन नीति · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · क्षेत्रीय आर्थिक हब · भूमि आवंटन
चर्चा में क्यों: केरल वन विभाग और ट्रावनकोर नेचर हिस्ट्री सोसाइटी (TNHS) ने वझाचल वन्यजीव डिवीजन में किए गए एक जीव सर्वेक्षण (faunal survey) के दौरान 26 नई प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया है।
यह मल्टी-टैक्सा सर्वे (multi-taxa survey) 26 फरवरी से 1 मार्च, 2026 के बीच आयोजित किया गया था, जिसमें 50 विशेषज्ञों और वन कर्मचारियों ने भाग लिया। इस सर्वेक्षण में 175 तितली प्रजातियों (जिसमें 13 नई प्रजातियां शामिल हैं) और 187 पक्षी प्रजातियों को दर्ज किया गया, जिनमें ब्लैक स्टॉर्क (Black Stork) और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल (Greater Spotted Eagle) भी शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- पर्यावरणवazhachal वन्यजीव डिवीजन में ब्लैक स्टॉर्क (Black Stork), ब्लैक-हेडेड इबिस (Black-headed Ibis) और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल (Greater Spotted Eagle) रिकॉर्ड किए गए।
- तथ्यसर्वेक्षण में 175 तितली प्रजातियां (butterfly species), 45 ओडोनेट (odonate) प्रजातियां, 30 चींटी प्रजातियां, 33 मकड़ी प्रजातियां और छह सिकाडा (cicada) प्रजातियां दर्ज की गईं।
- स्थानवाझाचल वाइल्डलाइफ डिवीजन केरल में स्थित है और यह वेस्टर्न घाट्स (Western Ghats) का हिस्सा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पश्चिमी घाट के संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों के भीतर स्थानिक प्रजातियों की पहचान और संरक्षण में बहु-वर्ग (multi-taxa) जैव विविधता सर्वेक्षणों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- डेटा-आधारित संरक्षण: ब्लैक स्टॉर्क जैसी दुर्लभ प्रजातियों के लिए खास हैबिटेट की पहचान कर सुरक्षा को प्राथमिकता देना
- बायोडायवर्सिटी मॉनिटरिंग: पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए मल्टी-टैक्सा डेटा का उपयोग
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · स्थानिक प्रजातियां · पश्चिमी घाट · पशु सर्वेक्षण · आवास संरक्षण
चर्चा में क्यों: सोमवार की रात इंटरनेशनल बॉर्डर (International Border) पर पाकिस्तान के ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि का पता चलने के बाद, सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया।
इस ऑपरेशन में भारतीय सेना, पुलिस और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के कर्मी शामिल हैं। तलाशी अभियान दाबोह, भाई नल्ला, लाला चक्क और मलानी सहित कई स्थानों पर केंद्रित किया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- स्थानसंबा: जम्मू-कश्मीर का वह जिला जहाँ ड्रोन गतिविधि (drone activity) का पता चला।
- संस्थाBSF: Border Security Force, जो भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।
- तथ्यडबोह, भाई नल्ला, लाला चक्क और मलानी: सर्च ऑपरेशंस (search operations) के लिए चिन्हित विशिष्ट स्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा बनाए रखने में ड्रोन तकनीक द्वारा उत्पन्न चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ गैर-पारंपरिक खतरों का मुकाबला करने के लिए आवश्यक उपायों का विश्लेषण कीजिए।
- तकनीकी असमानता: पारंपरिक रडार सिस्टम से छोटे और कम ऊंचाई वाले ड्रोन का पता लगाने में कठिनाई
- इंटेलिजेंस गैप: रियल-टाइम सिग्नल इंटरसेप्शन और काउंटर-ड्रोन जैमिंग क्षमताओं की ज़रूरत
- ज्यूरिसडिक्शनल कोऑर्डिनेशन: संयुक्त ऑपरेशंस के दौरान आर्मी, BSF और स्टेट पुलिस के बीच सहज तालमेल
मुख्य शब्द: गैर-पारंपरिक सुरक्षा · काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी · सीमा की अखंडता · असिमेट्रिक वॉरफेयर · इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन
GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: उत्तर प्रदेश सरकार ने 'प्रोजेक्ट गंगा' के तहत हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार करने के लिए वनओटीटी इंटरटेनमेंट लिमिटेड (हिंदुजा ग्रुप) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस परियोजना का लक्ष्य दो से तीन वर्षों के भीतर उत्तर प्रदेश के 20 लाख से अधिक घरों तक इंटरनेट की पहुंच प्रदान करना है। इसका उद्देश्य एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना है और न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यप्रोजेक्ट Ganga का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के 20 लाख से अधिक घरों को इंटरनेट एक्सेस प्रदान करना है।
- तथ्ययह प्रोजेक्ट एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखता है।
- तथ्यइस पहल के तहत न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 स्थानीय युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है।
- स्थानयह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश राज्य में लागू किया जा रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गति वाले ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार से डिजिटल विभाजन को पाटने और भारत में समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
- इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण इलाकों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की कमी को दूर करना ताकि डिजिटल सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके
- स्किल डेवलपमेंट: ग्रामीण युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर बनाना ताकि स्थानीय ई-गवर्नेंस और आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा मिल सके
- जेंडर इनक्लूसिविटी: डिजिटल साक्षरता और सर्विस प्रोविजन में महिलाओं की भागीदारी को प्राथमिकता देकर जेंडर डिजिटल डिवाइड को दूर करना
मुख्य शब्द: डिजिटल डिवाइड · लास्ट-माइल कनेक्टिविटी · समावेशी विकास · ई-गवर्नेंस · डिजिटल साक्षरता
GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEमेन्स चर्चा में क्यों: महारत्न ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने कमी के कारण कमर्शियल LPG सिलेंडर का उत्पादन रोक दिया है, जिससे हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टरों में आपूर्ति की गंभीर समस्या पैदा हो गई है।
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कमर्शियल LPG सिलेंडर का उत्पादन रोक दिया है। फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ऑफ इंडिया ने आपूर्ति में आए व्यवधान के कारण केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से राहत की मांग की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थाOMCs: Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum 'महारत्न' ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ हैं।
- तथ्यरिपोर्ट की गई कमी के कारण, कमर्शियल LPG सिलेंडर वर्तमान में बॉटलिंग प्लांट्स पर रोके गए हैं।
- तथ्यउपभोक्ता गैस डिलीवरी के संबंध में IVRS सिस्टम में समस्याओं और एजेंसियों की गैर-प्रतिक्रिया (unresponsive) की रिपोर्ट कर रहे हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: औद्योगिक ईंधन की कमी का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा आतिथ्य क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और वाणिज्यिक एलपीजी (LPG) की एक स्थिर आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
- सप्लाई चेन में रुकावट: बॉटलिंग प्लांट्स पर उत्पादन रुकने से छोटे ढाबों के लिए स्थानीय स्तर पर कमी आई
- रेगुलेटरी रुकावट: कमज़ोर IVRS सिस्टम और गैर-जिम्मेदार एजेंसियां कमर्शियल यूजर्स तक आखिरी मील की डिलीवरी में बाधा डाल रही हैं
मुख्य शब्द: सप्लाई चेन मैनेजमेंट · MSME की मजबूती · ऊर्जा सुरक्षा · लास्ट-माइल कनेक्टिविटी · बाज़ार में हस्तक्षेप
GS3पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी › प्रजातियां, संरक्षित क्षेत्र एवं आर्द्रभूमिप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: तमिलनाडु वन विभाग ने जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) को बढ़ाने के लिए बकिंघम कैनाल के किनारे 20,000 मैंग्रोव पौधे लगाकर तटीय पारिस्थितिकी तंत्र (Coastal Ecosystem) बहाली परियोजना शुरू की है।
ICICI बैंक के CSR कार्यक्रम के सहयोग से, चेन्नई वन मंडल ने 20,000 मैंग्रोव पौधे लगाए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य मैंग्रोव प्रजातियों की एक ग्रीन बेल्ट स्थापित करना और बकिंघम नहर प्रणाली के भीतर ज्वारीय प्रवाह (tidal flow) में सुधार करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यबकिंघम कैनाल (Buckingham Canal) के किनारे 20,000 मैंग्रोव सीडलिंग्स (mangrove seedlings) लगाए गए।
- स्थानयह प्रोजेक्ट तमिलनाडु के चेन्नई फॉरेस्ट डिवीजन में स्थित है।
- संस्थाICICI बैंक ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) प्रोग्राम के माध्यम से सहायता प्रदान की।
- पर्यावरणक्लाइमेट रेजिलिएंस (climate resilience) और टाइडल फ्लो (tidal flow) को बेहतर बनाने के लिए मैंग्रोव को चुना गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में तटीय जलवायु लचीलेपन और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ाने में मैंग्रोव बहाली की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- इकोलॉजिकल बफर: तटीय कटाव और तूफान के खिलाफ प्राकृतिक बाधा के रूप में मैंग्रोव
- पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप: लोकल एनवायरनमेंट रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट्स के लिए CSR फंड का इस्तेमाल
- हाइड्रोलॉजिकल इम्पैक्ट: नहर प्रणालियों में लवणता संतुलन बनाए रखने के लिए टाइडल फ्लो में सुधार
मुख्य शब्द: क्लाइमेट रेजिलिएंस · कोस्टल इकोसिस्टम का पुनरुद्धार · मैंग्रोव संरक्षण · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · जैव विविधता
ये सत्यधीश के अपने यूपीएससी नोट्स हैं, जो द हिंदू में छपी खबरों के आधार पर लिखे गए हैं। सत्यधीश का द हिंदू से कोई संबंध नहीं है। हर नोट में मूल खबर का लिंक है; पूरी खबर द हिंदू की वेबसाइट पर पढ़ें। नोट्स कैसे बनते हैं