सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को COVID-19 टीकाकरण के बाद होने वाली गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (AEFI) के लिए 'नो-फॉल्ट' मुआवजा नीति (no-fault compensation policy) तैयार करने का निर्देश दिया है
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को COVID-19 टीकाकरण के बाद होने वाली गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (AEFI) के लिए 'नो-फॉल्ट' मुआवजा नीति (no-fault compensation policy) तैयार करने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला AEFI (Adverse Events Following Immunization) के कारण हुई कथित मौतों के लिए मुआवजे की मांग करने वाली एक याचिका पर आधारित है। कोर्ट ने 2022 के जैकब पुलियेल (Jacob Puliyel) फैसले का हवाला दिया, जिसमें वैक्सीन से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं के डेटा संग्रह और सार्वजनिक रिपोर्टिंग पर जोर दिया गया था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थासुप्रीम कोर्ट: केंद्र सरकार को 'नो-फॉल्ट' मुआवजा नीति (no-fault compensation policy) बनाने का निर्देश दिया।
- तथ्यAEFI: यह टीकाकरण के बाद होने वाली गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (serious adverse events following immunization) को संदर्भित करता है।
- पदजैकब पुलियेल जजमेंट (2022): कोर्ट द्वारा वैक्सीन से संबंधित घटनाओं के डेटा कलेक्शन और पब्लिक रिपोर्टिंग के संबंध में उद्धृत किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बड़े पैमाने पर आयोजित राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में सार्वजनिक विश्वास और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में 'नो-फॉल्ट' (बिना किसी दोष के) मुआवजा ढांचे के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- पारदर्शिता की कमी: जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए AEFI पर स्टैंडर्ड डेटा कलेक्शन और पब्लिक रिपोर्टिंग की ज़रूरत
- लायबिलिटी बनाम जवाबदेही: सरकारी इम्युनिटी और पीड़ितों को मुआवज़ा देने की ज़रूरत के बीच संतुलन
- सूचित सहमति: सार्वजनिक स्वास्थ्य में भागीदारी के लिए वैक्सीन के साइड-इफेक्ट जोखिमों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: नो-फॉल्ट कंपनसेशन · AEFI · सूचित सहमति · सार्वजनिक स्वास्थ्य पारदर्शिता · न्यायिक निगरानी
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