सुप्रीम कोर्ट ने शरियत एप्लीकेशन एक्ट, 1937 को रद्द करने के बजाय, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मामले में संसद के निर्णय पर भरोसा करने की प्राथमिकता व्यक्त की
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने शरियत एप्लीकेशन एक्ट, 1937 को रद्द करने के बजाय, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मामले में संसद के निर्णय पर भरोसा करने की प्राथमिकता व्यक्त की।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों के संदर्भ में शरियत एप्लीकेशन एक्ट, 1937 (Shariat Application Act, 1937) पर विचार किया। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि इस अधिनियम के प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकशरियत एप्लीकेशन एक्ट (Shariat Application Act), 1937: एक एक्ट जो विरासत और विवाह के मामलों में मुस्लिम पर्सनल लॉ के लागू होने का प्रावधान करता है।
- तथ्यइंडियन सक्सेशन एक्ट (Indian Succession Act): विरासत (inheritance) से संबंधित एक केंद्रीय कानून, जिसकी इस संदर्भ में कोर्ट ने लागू होने की योग्यता पर सवाल उठाया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत जैसे बहुलवादी समाज में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली संवैधानिक चुनौतियों और सामाजिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संवैधानिक टकराव: धार्मिक पर्सनल लॉ के मुकाबले आर्टिकल 14 (समानता) और आर्टिकल 15 (गैर-भेदभाव) के बीच संतुलन
- विधायी स्वायत्तता: अल्पसंख्यक अधिकारों और समान नागरिक संहिता के लक्ष्य के बीच संतुलन बनाने में संसदीय समझ की भूमिका
- जेंडर जस्टिस: पर्सनल लॉ के तहत महिलाओं के लिए विरासत कानूनों में प्रणालीगत असमानताओं को दूर करना
मुख्य शब्द: यूनिफॉर्म सिविल कोड · पर्सनल लॉ · लैंगिक न्याय · अनुच्छेद 44 · विधायी समझ · बहुलता
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