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भाग I · स्था. 11.2025 
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,426 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (517) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (348) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (242) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (197) · रक्षा तकनीक (118) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

ISRO की एक टीम ने JAXA के साथ मिलकर चंद्रयान-5 चंद्र अन्वेषण मिशन के लिए लॉन्च साइट की तैयारियों का आकलन करने के लिए जापान का दौरा किया

चर्चा में क्यों: ISRO की एक टीम ने JAXA के साथ मिलकर चंद्रयान-5 चंद्र अन्वेषण मिशन के लिए लॉन्च साइट की तैयारियों का आकलन करने के लिए जापान का दौरा किया।

ISRO और JAXA गहरे अंतरिक्ष अभियानों (deep space missions) के लिए तकनीकी अनुकूलता, सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए सहयोग कर रहे हैं। यह मिशन चंद्रयान-3 मिशन के सफल परिणामों पर आधारित है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation)।
  • संस्थाJAXA: जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (Japan Aerospace Exploration Agency)।
  • तथ्यचंद्रयान-5: 2028 के लिए नियोजित एक लूनर एक्सप्लोरेशन मिशन (lunar exploration mission)।
  • तथ्यचंद्रयान-3: ISRO द्वारा पिछला सफल चंद्र मिशन।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी किस प्रकार भारत की गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण की क्षमताओं और तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती है, चर्चा कीजिए।

  • तकनीकी तालमेल: डीप स्पेस मिशन की विश्वसनीयता के लिए साझा इंफ्रास्ट्रक्चर और सेफ्टी प्रोटोकॉल
  • भू-राजनीतिक लाभ: संयुक्त स्पेस साइंस और टेक्नोलॉजी विकास के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देना

मुख्य शब्द: अंतरिक्ष सहयोग · चंद्र अन्वेषण · तकनीकी अनुकूलता · डीप स्पेस मिशन · द्विपक्षीय साझेदारी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) एंथ्रोपिक (Anthropic) के साथ इसके AI सिस्टम

चर्चा में क्यों: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) एंथ्रोपिक (Anthropic) के साथ इसके AI सिस्टम, मिथोस (Mythos) से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों के संबंध में चर्चा कर रहा है।

MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने 'AI गवर्नेंस: एथिक्स, डेटा प्रोटेक्शन और लीगल फ्रेमवर्क' विषय पर आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान Mythos के संबंध में चिंताएं व्यक्त कीं। इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन IITM Pravartak, धीरुभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ और डेक्कन सेंटर फॉर इंटरनेशनल रिलेशंस द्वारा किया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकएंथ्रोपिक (Anthropic): एक कंपनी जो AI सिस्टम मिथोस (Mythos) विकसित कर रही है।
  • पदएस. कृष्णन: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव।
  • तथ्यMythos: एक AI सिस्टम जिसे भारत सरकार द्वारा एक संभावित खतरे (potential threat) के रूप में पहचाना गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों के लिए एक वैश्विक विनियामक ढांचा स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए, जो सुरक्षा खतरों को कम करने के साथ-साथ तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा दे सके। चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: मल्टीनेशनल टेक फर्म्स पर घरेलू AI सुरक्षा मानक लागू करने में कठिनाई
  • संप्रभुता बनाम इनोवेशन: नेशनल सिक्योरिटी की चिंताओं और फ्रंटियर AI मॉडल्स तक खुली पहुंच की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • एन्फोर्समेंट गैप: AI में 'थ्रेट' क्लासिफिकेशन की पहचान और उसे कम करने के लिए मानकीकृत अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल की कमी

मुख्य शब्द: AI गवर्नेंस · डेटा प्रोटेक्शन · तकनीकी संप्रभुता · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · डिजिटल एथिक्स

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तेलंगाना सरकार ने अमराबाद टाइगर रिज़र्व में पायलट आधार पर AI-आधारित वन और वन्यजीव निगरानी प्रणाली तैनात करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने अमराबाद टाइगर रिज़र्व में पायलट आधार पर AI-आधारित वन और वन्यजीव निगरानी प्रणाली तैनात करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है।

यह सिस्टम सामान्य कैमरों और थर्मल सेंसिंग (Thermal Sensing) के हाइब्रिड मॉडल का उपयोग करेगा, जो वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से एक केंद्रीय कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे। इसे वन्यजीवों की गतिविधियों की निगरानी करने, शिकार (Poaching) या अपराध-संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और अवैध खनन या घुसपैठ का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकयह सर्विलांस सिस्टम (surveillance system) सामान्य कैमरों और थर्मल सेंसिंग (thermal sensing) के हाइब्रिड मॉडल का उपयोग करता है।
  • तथ्ययह पायलट प्रोजेक्ट विशेष रूप से तेलंगाना के अमराबाद टाइगर रिज़र्व (Amrabad tiger reserve) के लिए लक्षित है।
  • विज्ञान-तकनीकयह सिस्टम सेंट्रल कंट्रोल रूम को वन्यजीवों की मूवमेंट पैटर्न (movement patterns) पर रियल-टाइम अलर्ट और रिपोर्ट्स प्रदान करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वन्यजीव संरक्षण और बाघ अभयारण्यों जैसे संरक्षित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और थर्मल सेंसिंग के एकीकरण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा-आधारित संरक्षण: शिकार रोकने के लिए मूवमेंट पैटर्न की रियल-टाइम मॉनिटरिंग
  • तकनीकी निगरानी: घने जंगल वाले इलाकों में विजिबिलिटी की कमी को दूर करने के लिए थर्मल सेंसिंग का इस्तेमाल
  • मल्टी-पर्पस मॉनिटरिंग: वन्यजीव संरक्षण और अवैध खनन/घुसपैठ के ओवरलैपिंग मुद्दों का समाधान

मुख्य शब्द: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · वन्यजीव संरक्षण · थर्मल सेंसिंग · रियल-टाइम मॉनिटरिंग · अवैध शिकार विरोधी

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बढ़ते निजी स्पेस इकोसिस्टम (Private Space Ecosystem) के लिए छात्रों को प्रशिक्षित करने हेतु विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सात स्पेस लैबोरेटरीज स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा की

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बढ़ते निजी स्पेस इकोसिस्टम (Private Space Ecosystem) के लिए छात्रों को प्रशिक्षित करने हेतु विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सात स्पेस लैबोरेटरीज स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा की।

सरकार भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सात स्पेस लैबोरेटरीज (Space Laboratories) स्थापित करने की योजना बना रही है। इस पहल का उद्देश्य एक निजी स्पेस इकोसिस्टम (Private Space Ecosystem) को समर्थन देना है, जिसमें 2019 से अब तक 400 से अधिक स्टार्टअप्स उभरकर सामने आए हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्य2019 से अब तक भारत में 400 से अधिक space startups उभर कर सामने आए हैं।
  • योजनाTechnology Adoption Fund: नवाचारों के व्यावसायीकरण (commercialization) को सुगम बनाने और व्यक्तियों को स्पेस टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित करने के लिए एक सरकारी कार्यक्रम।
  • तथ्यसरकार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सात स्पेस लैबोरेटरीज (space laboratories) स्थापित करने की योजना बना रही है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में एक निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र (private space ecosystem) को बढ़ावा देने के महत्व और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार करने में शैक्षणिक-औद्योगिक संबंधों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • स्किल गैप: प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स में विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की कमी को दूर करना
  • कमर्शियलाइजेशन की बाधा: अकादमिक इनोवेशन और मार्केट-रेडी स्पेस टेक के बीच की दूरी को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी अडॉप्शन फंड का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम · कौशल विकास · तकनीक का व्यावसायीकरण · एकेडमिक-इंडस्ट्री लिंकेज · स्पेस टेक्नोलॉजी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स + मेन्स

177 अध्ययनों की समीक्षा से पता चलता है कि एंडोक्राइन-डिस्ट्रक्टिंग केमिकल्स (EDCs) और जलवायु परिवर्तन का संयुक्त प्रभाव वैश्विक प्रजनन दर में गिरावट का एक मुख्य कारण हो सकता है

चर्चा में क्यों: 177 अध्ययनों की समीक्षा से पता चलता है कि एंडोक्राइन-डिस्ट्रक्टिंग केमिकल्स (EDCs) और जलवायु परिवर्तन का संयुक्त प्रभाव वैश्विक प्रजनन दर में गिरावट का एक मुख्य कारण हो सकता है।

अध्ययन में उपभोक्ता वस्तुओं में पाए जाने वाले थैलेट्स (phthalates) और PFAS (per- and polyfluoroalkyl substances) को प्रमुख एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स (endocrine-disrupting chemicals) के रूप में पहचाना गया है। शोध यह संकेत देता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के साथ-साथ ये रसायन विभिन्न प्रजातियों में हार्मोन और पर्यावरणीय लिंग निर्धारण (environmental sex determination) को बाधित करते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकPhthalates और PFAS को प्रजनन संबंधी समस्याओं से जुड़े एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स (Endocrine-disrupting chemicals - EDCs) के रूप में पहचाना गया है।
  • तथ्यइस अध्ययन में टॉक्सिन्स (toxins), जलवायु और प्रजनन क्षमता के बीच संबंध स्थापित करने के लिए कुल 177 रिसर्च पेपर्स की समीक्षा की गई।
  • विज्ञान-तकनीकEndocrine-disrupting chemicals विभिन्न प्रजातियों में environmental sex determination को प्रभावित कर सकते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: रासायनिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के बीच का तालमेल वैश्विक प्रजनन स्वास्थ्य और जैव विविधता के लिए किस प्रकार एक महत्वपूर्ण खतरा उत्पन्न करता है, चर्चा कीजिए।

  • एंडोक्राइन डिसरप्शन: हार्मोनल पाथवे और रिप्रोडक्टिव सिस्टम में केमिकल इंटरफेरेंस
  • पर्यावरणीय लिंग निर्धारण: जलवायु के कारण प्रजातियों की प्रजनन क्षमता में बदलाव
  • रेगुलेटरी गैप: कंज्यूमर गुड्स में PFAS और थैलेट्स पर सख्त निगरानी की कमी

मुख्य शब्द: एंडोक्राइन डिसरप्टर्स · प्रजनन स्वास्थ्य · क्लाइमेट-हेल्थ नेक्सस · बायोएक्युमुलेशन · पर्यावरण टॉक्सिकोलॉजी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स

रेलवे बोर्ड ने सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने और तकनीकी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क में सिग्नलिंग सिस्टम का व्यापक ऑडिट (Audit) करने का आदेश दिया है

चर्चा में क्यों: रेलवे बोर्ड ने सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने और तकनीकी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क में सिग्नलिंग सिस्टम का व्यापक ऑडिट (Audit) करने का आदेश दिया है।

रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के जनरल मैनेजरों को सिग्नलिंग इंस्टॉलेशन (signalling installations) का ऑडिट करने के निर्देश देते हुए एक सुरक्षा परामर्श (safety advisory) जारी किया है। यह ऑडिट मुख्य रूप से इंस्टॉलेशन की गुणवत्ता, विनिर्देशों (specifications) के पालन और तकनीकी मानकों पर केंद्रित है। साथ ही, डिविजनल मैनेजरों को संपत्तियों की विफलता के मूल कारण के विश्लेषण (root cause analysis) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थारेलवे बोर्ड: भारतीय रेलवे के प्रबंधन और सुरक्षा निरीक्षण (safety oversight) के लिए जिम्मेदार प्राथमिक संस्था।
  • तथ्यऑडिट स्कोप: यह पूरे इंडियन रेलवे नेटवर्क को कवर करता है ताकि दोषपूर्ण सिस्टम की पहचान की जा सके और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
  • तथ्यरूट कॉज एनालिसिस (Root Cause Analysis): डिवीज़नल मैनेजर्स को एसेट फेलियर्स (asset failures) के लिए रूट कॉज एनालिसिस करने के विशेष निर्देश दिए गए हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय रेलवे जैसे बड़े पैमाने के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने में तकनीकी ऑडिटिंग और मूल कारण विश्लेषण (रूट कॉज एनालिसिस) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • सुरक्षा-विश्वसनीयता ट्रेड-ऑफ: बुनियादी ढांचे के तेज़ विस्तार और तकनीकी सिग्नलिंग स्पेसिफिकेशन के कड़े पालन के बीच संतुलन
  • संस्थागत जवाबदेही: सिस्टम की एसेट फेल्योर पहचानने में रेलवे बोर्ड के ओवरसाइट मैकेनिज्म को मजबूत करना

मुख्य शब्द: सेफ्टी ऑडिट · रूट कॉज़ एनालिसिस · इंफ्रास्ट्रक्चर रिलायबिलिटी · तकनीकी अनुपालन · सार्वजनिक सुरक्षा

द गार्जियन (The Guardian) ने चंद्रमा पर बेस स्थापित करने के लिए अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा पर रिपोर्ट दी है

चर्चा में क्यों: द गार्जियन (The Guardian) ने चंद्रमा पर बेस स्थापित करने के लिए अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा पर रिपोर्ट दी है। इस रिपोर्ट में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) बनाम राज्य-संचालित निरंतरता (State-driven consistency) की विपरीत रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया है।

अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम (NASA) बजट की सीमाओं से निपटने के लिए SpaceX और Blue Origin जैसी निजी संस्थाओं पर तेजी से निर्भर हो रहा है। चीन अपनी घरेलू महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित मिशन की समय-सीमाओं का पालन करने के निरंतर ट्रैक रिकॉर्ड के लिए जाना जाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकSpaceX और Blue Origin निजी कंपनियाँ हैं जो US के लूनर मिशन प्रयासों में शामिल हैं।
  • तथ्यचंद्रमा पर बेस स्थापित करने की वर्तमान दौड़ में US और China मुख्य प्रतिस्पर्धी हैं।
  • पदNASA अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए प्राथमिक US सरकारी एजेंसी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अमेरिका और चीन के बीच चंद्र अंतरिक्ष दौड़ के भू-राजनीतिक और आर्थिक निहितार्थों पर चर्चा कीजिए, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी बनाम राज्य-नेतृत्व वाले मॉडलों की भूमिका पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए।

  • रणनीतिक प्रतिस्पर्धा: दीर्घकालिक भू-राजनीतिक वर्चस्व के लिए चंद्र संसाधन अन्वेषण एक चालक
  • इकोनॉमिक मॉडल में अंतर: प्राइवेट एयरोस्पेस कॉन्ट्रैक्टर्स पर अमेरिका की निर्भरता बनाम चीन का स्टेट-सेंट्रिक टाइमलाइन पालन
  • रेगुलेटरी वैक्यूम: चंद्र संपत्ति अधिकारों और संसाधन निष्कर्षण के लिए बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क की कमी

मुख्य शब्द: स्पेस रेस · चंद्र अन्वेषण · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · भू-राजनीति · संसाधन निष्कर्षण

IREL (India) लिमिटेड ने कन्याकुमारी जिले में परमाणु खनिज खनन परियोजना के लिए कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन (CRZ) क्लीयरेंस की मांग करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को एक प्रस्ताव सौंपा है

चर्चा में क्यों: IREL (India) लिमिटेड ने कन्याकुमारी जिले में परमाणु खनिज खनन परियोजना के लिए कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन (CRZ) क्लीयरेंस की मांग करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को एक प्रस्ताव सौंपा है।

इस परियोजना का उद्देश्य कन्याकुमारी जिले में 1,144 हेक्टेयर क्षेत्र में मोनाजाइट और अन्य भारी खनिजों का निष्कर्षण करना है। इससे सालाना 1.5 मिलियन टन खनिज प्राप्त होने की उम्मीद है। इस परियोजना को परमाणु ऊर्जा अधिनियम (Atomic Energy Act), 1962 के तहत सार्वजनिक सुनवाई से छूट दी गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकएटॉमिक एनर्जी एक्ट (Atomic Energy Act), 1962: यह एटॉमिक एनर्जी के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है और विशिष्ट मामलों में पब्लिक हियरिंग से छूट की अनुमति देता है।
  • स्थानकन्नियाकुमरी जिला: 1,144 हेक्टेयर के परमाणु खनिज प्रोजेक्ट (atomic minerals project) के लिए प्रस्तावित साइट।
  • तथ्य1.5 मिलियन टन: प्रस्तावित प्रोजेक्ट से खनिजों की अपेक्षित वार्षिक पैदावार।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में परमाणु खनिज निष्कर्षण के संदर्भ में राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों और तटीय पर्यावरण संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोधों का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: एटॉमिक एनर्जी एक्ट की छूट और CRZ पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन
  • इकोलॉजिकल रिस्क: संवेदनशील तटीय इकोसिस्टम में रेडिएशन के संपर्क में आने और हैबिटेट डिग्रेडेशन का खतरा
  • संसाधन संप्रभुता: भारत के न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल के लिए मोनाज़ाइट का रणनीतिक महत्व बनाम स्थानीय पर्यावरणीय प्रभाव

मुख्य शब्द: कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन · एटॉमिक एनर्जी एक्ट · मोनाज़ाइट · पर्यावरण क्लीयरेंस · न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल

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विशेषज्ञों और एक UN सलाहकार ने एक शक्तिशाली AI मॉडल तक अनधिकृत पहुंच (unauthorized access) के सुरक्षा संबंधी प्रभावों और अंतरराष्ट्रीय विनियमन (regulation) की आवश्यकता पर चर्चा की

चर्चा में क्यों: विशेषज्ञों और एक UN सलाहकार ने एक शक्तिशाली AI मॉडल तक अनधिकृत पहुंच (unauthorized access) के सुरक्षा संबंधी प्रभावों और अंतरराष्ट्रीय विनियमन (regulation) की आवश्यकता पर चर्चा की।

रमेश श्रीनिवासन (UCLA) और मार्क आइंस्टीन (Counterpoint Research) ने एक प्रमुख AI मॉडल में हुई एक गैर-दुर्भावनापूर्ण उल्लंघन (non-malicious breach) की घटना पर प्रकाश डाला। संयुक्त राष्ट्र (UN) के वरिष्ठ सलाहकार एड्रियन मोंक ने AI विकास को विनियमित (regulate) करने के लिए किए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों पर चर्चा की।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • पदएड्रियन मॉन्क: संयुक्त राष्ट्र में AI और टेक्नोलॉजी के सीनियर एडवाइजर।
  • विज्ञान-तकनीकCounterpoint Research: वह संगठन जहाँ Marc Einstein रिसर्च डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के विकास और सुरक्षा को विनियमित करने के लिए एक बहुपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय रूपरेखा स्थापित करने की चुनौतियों और आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

  • सुरक्षा जोखिम: हाई-कंप्यूट AI मॉडल्स का अनधिकृत एक्सेस और डेटा ब्रीच के प्रति संवेदनशील होना
  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: तेज़ तकनीकी इनोवेशन और ग्लोबल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स व एथिकल गार्डरेल्स के बीच संतुलन
  • भू-राजनीतिक असंतुलन: कुछ देशों और प्राइवेट संस्थाओं के पास AI क्षमताओं का जमावड़ा

मुख्य शब्द: बहुपक्षवाद · तकनीकी संप्रभुता · एल्गोरिद्मिक गवर्नेंस · साइबर सिक्योरिटी · नैतिक AI

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Meta ने भारतीय पुलिस द्वारा सहयोग (Sahyog) पोर्टल के माध्यम से भेजी गई सामग्री के लिए एक ऑटोमैटिक ब्लॉकिंग सिस्टम लागू किया है

चर्चा में क्यों: Meta ने भारतीय पुलिस द्वारा सहयोग (Sahyog) पोर्टल के माध्यम से भेजी गई सामग्री के लिए एक ऑटोमैटिक ब्लॉकिंग सिस्टम लागू किया है, जिससे 'सेंसरशिप के बुनियादी ढांचे' (infrastructure of censorship) के निर्माण को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा (Meta), भारतीय पुलिस से टेकडाउन रिक्वेस्ट (takedown requests) प्राप्त करने के लिए 'सहयोग' पोर्टल का उपयोग करती है। यह प्लेटफॉर्म बिना किसी औपचारिक कानूनी प्रक्रिया के सामग्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है, यहाँ तक कि उन मामलों में भी जहाँ टेकडाउन कानूनी रूप से अनुचित हो सकता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकसहयोग पोर्टल (Sahyog portal): भारतीय पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने (content takedown) का अनुरोध करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक मैकेनिज्म।
  • तथ्यMeta: Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी (Parent company)।
  • पदMeta की पॉलिसी: सहयोग पोर्टल के जरिए फ्लैग किए गए कंटेंट को स्वचालित रूप से हटाना, भले ही वह कानूनी रूप से गलत हो।
मेन्स के लिए

प्रश्न: निजी तकनीकी दिग्गजों द्वारा संचालित स्वचालित सामग्री मॉडरेशन (automated content moderation) के युग में, राज्य की सुरक्षा आवश्यकताओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के बीच उत्पन्न होने वाले तनाव का विश्लेषण कीजिए।

  • ड्यू प्रोसेस की कमी: न्यायिक निगरानी या औपचारिक कानूनी कार्यवाही के बिना तुरंत कंटेंट हटाना
  • प्राइवेट-पब्लिक मिलीभगत: टेक प्लेटफॉर्म्स राज्य के नेतृत्व वाले सेंसरशिप के लिए अर्ध-न्यायिक निकायों के रूप में काम कर रहे हैं
  • पारदर्शिता की कमी: टेकडाउन नोटिस की संख्या और कानूनी आधार के बारे में सार्वजनिक खुलासा नहीं

मुख्य शब्द: भाषण की स्वतंत्रता · कंटेंट मॉडरेशन · डिजिटल संप्रभुता · ड्यू प्रोसेस · एल्गोरिथमिक सेंसरशिप

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भारत मौसम विभाग ने उत्तर और मध्य भारत के लिए हीटवेव (heatwave) की चेतावनी जारी की है, क्योंकि तापमान 40°सी

चर्चा में क्यों: भारत मौसम विभाग ने उत्तर और मध्य भारत के लिए हीटवेव (heatwave) की चेतावनी जारी की है, क्योंकि तापमान 40°सी. से ऊपर निकल गया है। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' (The Lancet) की रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन ने 2024 में भारत में भीषण हीटवेव (heatwaves) को काफी हद तक बढ़ावा दिया। इन चरम मौसम की घटनाओं के कारण श्रम घंटों में कमी आने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यदिल्ली सहित उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में तापमान 40°सी. से अधिक हो गया।
  • संस्थाद लैंसेट (The Lancet) एक मेडिकल जर्नल है जिसने क्लाइमेट चेंज और हीटवेव्स के बीच संबंध की रिपोर्ट दी है।
  • तथ्य2024 में हीटवेव्स (Heatwaves) के कारण लेबर आवर्स (labor hours) में कमी आने से आर्थिक नुकसान हुआ।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में बढ़ती लू (heatwave) की आवृत्ति के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों की चर्चा कीजिए और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों एवं श्रम उत्पादकता में होने वाली हानि को कम करने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए।

  • लेबर प्रोडक्टिविटी: गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में कम काम के घंटों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर: शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों में हीट-एक्शन प्लान की ज़रूरत
  • क्लाइमेट-हेल्थ नेक्सस: बढ़ते वैश्विक तापमान और हीट से होने वाली बीमारियों के बीच संबंध

मुख्य शब्द: जलवायु परिवर्तन · हीटवेव से बचाव के उपाय · लेबर प्रोडक्टिविटी · सार्वजनिक स्वास्थ्य · अत्यधिक मौसम

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वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने मई 2026 से एक मजबूत एल निनो (El Nino) घटना शुरू होने की भविष्यवाणी की है

चर्चा में क्यों: वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने मई 2026 से एक मजबूत एल निनो (El Nino) घटना शुरू होने की भविष्यवाणी की है, और वैश्विक तापमान में संभावित वृद्धि की चेतावनी दी है।

WMO ने मई और जुलाई 2026 के बीच एल निनो (El Nino) की स्थिति की भविष्यवाणी की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि हालांकि जलवायु परिवर्तन एल निनो की आवृत्ति या तीव्रता को नहीं बढ़ाता है, लेकिन यह इससे जुड़े प्रभावों को और अधिक गंभीर बना सकता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकएल निनो (El Nino): इसकी विशेषता इक्वेटोरियल पैसिफिक (equatorial Pacific) में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि है।
  • तथ्यWMO भविष्यवाणी: मई और जुलाई 2026 के बीच एक मजबूत El Nino इवेंट की उम्मीद है।
  • विज्ञान-तकनीकक्लाइमेट चेंज इम्पैक्ट: यह El Nino घटनाओं की फ्रीक्वेंसी या इंटेंसिटी को बढ़ाने के बजाय उनके प्रभावों को और अधिक बढ़ा देता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मानवीय जलवायु परिवर्तन किस प्रकार एल निनो (El Nino) जैसे प्राकृतिक दोलनों के साथ परस्पर क्रिया करके वैश्विक चरम मौसमी घटनाओं को और अधिक गंभीर बनाता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • फीडबैक लूप्स: बढ़ते बेसलाइन ग्लोबल टेम्परेचर के कारण हीटवेव्स और सूखे का बढ़ना
  • प्रेडिक्टिव मॉडलिंग: तीव्र ENSO चक्रों के स्थानीय प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने में चुनौतियां

मुख्य शब्द: ENSO · क्लाइमेट रेजिलिएंस · मानवीय हस्तक्षेप · मौसम पूर्वानुमान

भारत ने विकास रणनीतियों में जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) और अनुकूलन (Adaptation) को प्राथमिकता देने के लिए अपने 2031-35 के नेशनली डिटरमिन्ड कॉन्ट्रिब्यूशंस (NDCs) को अपडेट किया है

चर्चा में क्यों: भारत ने विकास रणनीतियों में जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) और अनुकूलन (Adaptation) को प्राथमिकता देने के लिए अपने 2031-35 के नेशनली डिटरमिन्ड कॉन्ट्रिब्यूशंस (NDCs) को अपडेट किया है।

भारत जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील नौवां देश है, जहाँ 1995 से अब तक 430 चरम मौसम की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं के कारण 170 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ और इन्होंने 1.3 बिलियन लोगों को प्रभावित किया।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्यभारत जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील (climate-vulnerable) नौवां देश है।
  • तथ्य1995 से अब तक भारत में 430 extreme weather events दर्ज किए गए हैं, जिससे $170 billion का नुकसान हुआ है।
  • तथ्य2031–35 के लिए अपडेटेड NDCs तटीय लचीलेपन (coastal resilience), इंफ्रास्ट्रक्चर, आपदा तैयारी, हीट मिटिगेशन (heat mitigation) और जैव विविधता संरक्षण पर केंद्रित हैं।
  • तथ्यग्लोबल कमिटमेंट का लक्ष्य 2035 तक अडैप्टेशन फाइनेंस (adaptation finance) को तीन गुना करना है।
  • तथ्यCOP30 में Belém Adaptation Indicators को अपनाया जाएगा।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की जलवायु संवेदनशीलता को कम करने के लिए राष्ट्रीय नीति से लेकर जमीनी स्तर के कार्यान्वयन तक जलवायु अनुकूलन को संस्थागत बनाने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

  • फंडिंग गैप: 2035 तक एडाप्टेशन फाइनेंस को तीन गुना करने के वैश्विक लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर फंडिंग की ज़रूरत
  • पॉलिसी और प्रैक्टिस में अंतर: हाई-लेवल NDC लक्ष्यों को स्थानीय आपदा तैयारी और हीट मिटिगेशन में बदलने की चुनौतियां
  • बायोडायवर्सिटी-डेवलपमेंट नेक्सस: इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और बायोडायवर्सिटी संरक्षण और टिकाऊ आजीविका के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: राष्ट्रीय रूप से निर्धारित योगदान · क्लाइमेट रेजिलिएंस · अनुकूलन फाइनेंस · जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन · जलवायु संवेदनशीलता

UNESCO ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के हर 1°सी

चर्चा में क्यों: UNESCO ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के हर 1°सी. तापमान को रोकने से इस सदी के अंत तक गंभीर संकट झेलने वाले वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स (World Heritage sites) की संख्या को आधा किया जा सकता है।

'People and nature in Unesco-designated sites: Global and local contributions' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट रेखांकित करती है कि ये स्थल 900 मिलियन से अधिक लोगों की आजीविका का समर्थन करते हैं। यह रिपोर्ट दीर्घकालिक लचीलापन (resilience) सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत प्रबंधन, बहाली और नीतिगत बदलावों पर जोर देती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनयूनेस्को (Unesco): यह वह संस्था है जो वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स को नामित करने और उनकी निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्य900 मिलियन से अधिक लोग अपनी आजीविका के लिए वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स (World Heritage sites) पर निर्भर हैं।
  • तथ्यग्लोबल वार्मिंग के हर 1°सी. के प्रभाव को रोकने से इस सदी के अंत तक बड़े व्यवधान (major disruption) का सामना करने वाली साइटों की संख्या को आधा किया जा सकता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जलवायु परिवर्तन शमन और वैश्विक सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण के बीच अंतर्संबंधों पर चर्चा कीजिए।

  • बायोडायवर्सिटी का नुकसान: 900 मिलियन लोगों को सहारा देने वाले इकोसिस्टम का अपरिवर्तनीय क्षरण
  • पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: तत्काल आर्थिक विकास और दीर्घकालिक विरासत संरक्षण के बीच संतुलन
  • संस्थागत अंतर: अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने और साइट-विशिष्ट बहाली में निवेश की ज़रूरत

मुख्य शब्द: जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करना · विरासत संरक्षण · जैव विविधता संरक्षण · एकीकृत प्रबंधन · लचीलापन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकप्रीलिम्स

परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पी.ए

चर्चा में क्यों: परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पी.ए. सुरेश बाबू ने भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के पद का कार्यभार संभाला है।

BHAVINI, कलपक्कम में 500MWe के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (Prototype Fast Breeder Reactor) के निर्माण, कमीशनिंग, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। यह संस्था भविष्य के फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों की देखरेख भी करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • संस्थाBHAVINI: भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (Bharatiya Nabhikiya Vidyut Nigam Limited)।
  • पदपी.ए. सुरेश बाबू: डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (Department of Atomic Energy) के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और NPCIL के पूर्व डायरेक्टर (HR)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सतत परमाणु ऊर्जा उत्पादन की खोज में 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों' के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन: न्यूक्लियर फ्यूल साइकल बढ़ाने के लिए प्लूटोनियम और यूरेनियम-238 का इस्तेमाल
  • सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर: हाई-टेंपरेचर और फास्ट-न्यूट्रॉन वातावरण को मैनेज करने के लिए इंजीनियरिंग ज़रूरतें
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: घरेलू ब्रीडर टेक्नोलॉजी के जरिए आयातित यूरेनियम पर निर्भरता कम करना

मुख्य शब्द: परमाणु ऊर्जा · फास्ट ब्रीडर रिएक्टर · ऊर्जा सुरक्षा · परमाणु ऊर्जा विभाग

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

चीन ने अपने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत चीन स्पेस स्टेशन (CSS) के मिशन में शामिल होने के लिए दो पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों

चर्चा में क्यों: चीन ने अपने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत चीन स्पेस स्टेशन (CSS) के मिशन में शामिल होने के लिए दो पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों, मुहम्मद जीशान अली और खुुर्रम दाउद को चुना है।

पाकिस्तान स्पेस एंड अपर एटमॉस्फियर रिसर्च कमीशन (Suparco) ने दो अंतरिक्ष यात्रियों के चयन की पुष्टि की है। वे 2026 के अंत में होने वाले नियोजित प्रक्षेपण से पहले एस्ट्रोनॉट सेंटर ऑफ चाइना (ACC) में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकसुपार्को (Suparco): पाकिस्तान की नेशनल स्पेस एजेंसी जो एस्ट्रोनॉट चयन के लिए जिम्मेदार है।
  • विज्ञान-तकनीकChina Space Station (CSS): वह ऑर्बिटल स्टेशन जिसके लिए पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों (astronauts) को ट्रेनिंग दी जा रही है।
  • स्थानAstronaut Centre of China (ACC): यह सुविधा उन्नत अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण (astronaut training) के लिए निर्धारित है।
  • तथ्यचीन स्पेस स्टेशन के लिए मिशन की योजना 2026 के अंत तक के लिए बनाई गई है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विकासशील देशों के बीच तकनीकी प्रगति और राजनयिक संबंधों को सुदृढ़ करने में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • तकनीकी लीपफ्रॉगिंग: द्विपक्षीय सहयोग के ज़रिए उन्नत मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच
  • भू-राजनीतिक तालमेल: ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में साझा भागीदारी के जरिए रणनीतिक संबंध मजबूत करना

मुख्य शब्द: अंतरिक्ष अन्वेषण · द्विपक्षीय सहयोग · मानव अंतरिक्ष उड़ान · तकनीकी प्रगति · रणनीतिक साझेदारी

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NASA ने रोमन स्पेस टेलीस्कोप (Roman Space Telescope) का अनावरण किया है

चर्चा में क्यों: NASA ने रोमन स्पेस टेलीस्कोप (Roman Space Telescope) का अनावरण किया है। यह 4 बिलियन डॉलर का एक प्रोजेक्ट है, जिसे ब्रह्मांड का मानचित्र तैयार करने और डार्क मैटर (dark matter) व डार्क एनर्जी (dark energy) का अध्ययन करने के लिए बनाया गया है।

रोमन स्पेस टेलीस्कोप (Roman Space Telescope) एक 12-मीटर का उपकरण है, जिसका नाम खगोलशास्त्री नेंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है। इसे सितंबर में जल्द से जल्द SpaceX रॉकेट के जरिए लॉन्च करने की योजना है, जो प्रतिदिन 11 टेराबाइट डेटा प्रसारित करेगा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकरोमन स्पेस टेलीस्कोप (Roman Space Telescope): डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया NASA का $4 बिलियन का प्रोजेक्ट।
  • तथ्यइस टेलीस्कोप से हजारों की संख्या में ग्रहों की खोज होने की उम्मीद है।
  • तथ्ययह टेलिस्कोप प्रतिदिन 11 terabytes डेटा पृथ्वी पर भेजेगा।
  • विज्ञान-तकनीकइस टेलिस्कोप का व्यास 12 मीटर है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: रोमन स्पेस टेलीस्कोप जैसी गहरी अंतरिक्ष अवलोकन प्रौद्योगिकियों में हो रही प्रगति किस प्रकार ब्रह्मांडीय रहस्यों और ब्रह्मांड के विकास को समझने में योगदान देती है, चर्चा कीजिए।

  • डेटा मैनेजमेंट: रोज़ाना 11 टेराबाइट हाई-रिज़ॉल्यूशन कॉस्मिक डेटा को प्रोसेस और आर्काइव करने में चुनौतियां
  • वैज्ञानिक फ्रंटियर: डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से बने ब्रह्मांड के 95% हिस्से को समझना

मुख्य शब्द: ब्रह्मांड विज्ञान · अंतरिक्ष अन्वेषण · डार्क मैटर · डेटा ट्रांसमिशन · एस्ट्रोफिजिक्स

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकप्रीलिम्स

थिंक टैंक Ember की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पहली बार कम-उत्सर्जन वाले ऊर्जा स्रोतों (low-emissions energy sources) ने पूरी वैश्विक बिजली की मांग को पूरा किया

चर्चा में क्यों: थिंक टैंक Ember की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पहली बार कम-उत्सर्जन वाले ऊर्जा स्रोतों (low-emissions energy sources) ने पूरी वैश्विक बिजली की मांग को पूरा किया, जिससे जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) के विकास पर प्रभावी रूप से रोक लगी।

वर्ष 2025 में, सौर और पवन ऊर्जा ने ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व किया, जिसमें सौर ऊर्जा ने नई मांग का 75% हिस्सा पैदा किया और पवन ऊर्जा ने लगभग शेष पूरी मांग को पूरा किया। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने भी इसी अवधि के दौरान तेल और गैस की मांग में गिरावट दर्ज की।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्य2025 में वैश्विक बिजली की नई मांग का 75% हिस्सा सोलर पावर से उत्पन्न हुआ।
  • तथ्य2025 में विंड पावर ने लगभग पूरी बची हुई नई बिजली की मांग को पूरा किया।
  • संस्थाइंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (International Energy Agency - IEA) ने 2025 में तेल और गैस की मांग में गिरावट की रिपोर्ट दी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक ऊर्जा मांग में नवीकरणीय ऊर्जा की ओर हो रहे संरचनात्मक बदलावों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को समाप्त करने की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: इंटरमिटेंट सोलर और विंड पावर को जोड़ने के लिए ग्रिड मॉडर्नाइजेशन की भारी कैपिटल कॉस्ट
  • मार्केट में उतार-चढ़ाव: फॉसिल फ्यूल की कीमतों में झटके और रिन्यूएबल ट्रांजिशन की रफ्तार पर असर
  • पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: तात्कालिक ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: डीकार्बोनाइजेशन · रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांज़िशन · ऊर्जा सुरक्षा · कम उत्सर्जन वाले रास्ते · फॉसिल फ्यूल चरणबद्ध तरीके से खत्म करना

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

CSIR-IICT हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने Deep Eutectic Solvents (DES) का उपयोग करके गन्ने के अवशेषों (sugarcane residue) को बायो-ऑयल में बदलकर एक ग्रीन बायोफ्यूल रूट का प्रदर्शन किया है

चर्चा में क्यों: CSIR-IICT हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने Deep Eutectic Solvents (DES) का उपयोग करके गन्ने के अवशेषों (sugarcane residue) को बायो-ऑयल में बदलकर एक ग्रीन बायोफ्यूल रूट का प्रदर्शन किया है।

अल्का कुमारी के नेतृत्व वाली टीम ने एक उन्नत कैटालिटिक हाइड्रोथर्मल लिक्विफैक्शन (Catalytic Hydrothermal Liquefaction - HTL) प्रक्रिया विकसित की है। इस प्रक्रिया ने 52.8 wt% बायो-ऑयल यील्ड (bio-oil yield) हासिल की है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकDeep Eutectic Solvents (DES): नए बायोफ्यूल कन्वर्जन प्रोसेस में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स।
  • विज्ञान-तकनीकCatalytic Hydrothermal Liquefaction (HTL): वह विशिष्ट प्रक्रिया जिसका उपयोग गन्ने के अवशेषों (sugarcane residue) को बायो-ऑयल में बदलने के लिए किया जाता है।
  • तथ्यनई प्रक्रिया ने 52.8 wt% बायो-ऑयल यील्ड (bio-oil yield) हासिल किया।
  • संस्थाCSIR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (IICT): हैदराबाद में स्थित संस्था, जहाँ यह रिसर्च (research) किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विकेंद्रीकृत अपशिष्ट-से-ईंधन रूपांतरण प्रौद्योगिकियों का विकास भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों में किस प्रकार योगदान दे सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।

  • आर्थिक व्यवहार्यता: पारंपरिक अल्कलाइन रास्तों की तुलना में निवेश पर ज़्यादा रिटर्न
  • विकेंद्रीकृत मॉडल: स्थानीय कचरा प्रबंधन और ईंधन उत्पादन की संभावना
  • क्लाइमेट मिटिगेशन: पारंपरिक बायोफ्यूल तरीकों की तुलना में कम ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल

मुख्य शब्द: बायोफ्यूल · ऊर्जा सुरक्षा · वेस्ट-टू-फ्यूल · डीप यूटेक्टिक सॉल्वेंट्स · जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करना

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स + मेन्स

IISc स्थित सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च (CBR) ने AD Data Initiative और Microsoft Research India के साथ साझेदारी में ₹2 करोड़ की एक AI चुनौती शुरू की है

चर्चा में क्यों: IISc स्थित सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च (CBR) ने AD Data Initiative और Microsoft Research India के साथ साझेदारी में ₹2 करोड़ की एक AI चुनौती शुरू की है। इसका उद्देश्य संज्ञानात्मक गिरावट (Cognitive Decline) की शुरुआती पहचान के लिए प्रेडिक्टिव मॉडल विकसित करना है।

यह चुनौती एक छह महीने की पहल है, जिसमें शोधकर्ताओं को डिमेंशिया (Dementia) के लिए स्केलेबल समाधान तैयार करने हेतु बड़े पैमाने पर उपलब्ध ब्रेन एजिंग डेटासेट का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके लिए आवेदन 20 अप्रैल से 20 मई तक खुले हैं, जिसमें कुल पुरस्कार राशि और रिसर्च ग्रांट का मूल्य ₹2 करोड़ है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थासेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च (CBR), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) में स्थित एक रिसर्च सेंटर है।
  • तथ्यAI चैलेंज के तहत ₹2 करोड़ की रिसर्च ग्रांट्स और प्राइज़ दिए जाएंगे।
  • विज्ञान-तकनीकयह पहल संज्ञानात्मक गिरावट (cognitive decline) की शुरुआती पहचान के लिए AI और बड़े पैमाने के ब्रेन एजिंग डेटासेट (brain aging datasets) के उपयोग पर केंद्रित है।
  • संस्थायह चुनौती IISc, Alzheimer’s Disease Data Initiative और Microsoft Research India के बीच एक पार्टनरशिप (partnership) है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में डिमेंशिया जैसी बढ़ती हुई न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों की चुनौती से निपटने में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का एकीकरण किस प्रकार सहायक हो सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा प्राइवेसी: बड़े पैमाने पर ब्रेन एजिंग डेटासेट के इस्तेमाल और मरीज की गोपनीयता के बीच संतुलन
  • डायग्नोस्टिक इक्विटी: ग्रामीण और कम सेवा वाले इलाकों के लिए AI-आधारित शुरुआती पहचान टूल्स को सुलभ बनाना
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: प्रेडिक्टिव कॉग्निटिव मॉडल्स को ट्रेन और डिप्लॉय करने के लिए हाई-कंप्यूट एनवायरनमेंट की ज़रूरत

मुख्य शब्द: न्यूरोडिजेनेरेटिव बीमारियाँ · प्रेडिक्टिव मॉडलिंग · स्केलेबल हेल्थकेयर · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · संज्ञानात्मक गिरावट

विशेषज्ञों ने परमाणु कचरे के प्रबंधन और डीकमीशनिंग (Decommissioning) के लिए नए अधिनियमित शांति एक्ट (SHANTI Act

चर्चा में क्यों: विशेषज्ञों ने परमाणु कचरे के प्रबंधन और डीकमीशनिंग (Decommissioning) के लिए नए अधिनियमित शांति एक्ट (SHANTI Act, 2025) के तहत दीर्घकालिक वित्तीय और परिचालन प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता पर जोर दिया।

SHANTI एक्ट (2025) का उद्देश्य 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 8.7 GW से बढ़ाकर 100 GW करना है। यह कानून निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति देता है और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करने का प्रयास करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • अधिनियम / विधेयकSHANTI Act: परमाणु ऊर्जा क्षमता को विनियमित और विस्तारित करने के लिए 2025 में अधिनियमित।
  • तथ्यलक्ष्य: 2047 तक न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी को 8.7 GW से बढ़ाकर 100 GW करना।
मेन्स के लिए

प्रश्न: शांति (SHANTI) अधिनियम के अंतर्गत भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार में निजी क्षेत्र की भागीदारी से जुड़ी विनियामक और वित्तीय चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • लायबिलिटी फ्रेमवर्क: रेडिएशन एक्सपोजर क्लेम और लॉन्ग-टर्म वेस्ट मैनेजमेंट के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाना
  • वित्तीय स्थिरता: यह सुनिश्चित करना कि निजी संस्थाएं डीकमीशनिंग लागत के लिए 'लाइफटाइम कमिटमेंट' बनाए रखें
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: विदेशी निवेश प्रोत्साहन और कड़े परमाणु सुरक्षा मानकों के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: परमाणु डीकमीशनिंग · वेस्ट मैनेजमेंट · निजी भागीदारी · ऊर्जा सुरक्षा · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

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मंत्री जनार्दन रेड्डी ने SC और ST परिवारों को मुफ्त सौर ऊर्जा प्रदान करने के लिए आंध्र प्रदेश में 'PM Surya Ghar Utsav' का उद्घाटन किया

चर्चा में क्यों: मंत्री जनार्दन रेड्डी ने SC और ST परिवारों को मुफ्त सौर ऊर्जा प्रदान करने के लिए आंध्र प्रदेश में 'PM Surya Ghar Utsav' का उद्घाटन किया।

पीएम सूर्य घर उत्सव पहल के तहत आंध्र प्रदेश में SC और ST परिवारों को मुफ्त सौर ऊर्जा बिजली प्रदान की जाती है। राज्य सरकार वित्तीय बोझ को कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए इस योजना पर 100% सब्सिडी दे रही है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • योजनाPM सूर्य घर उत्सव: SC और ST परिवारों को मुफ्त सोलर बिजली प्रदान करने वाली एक पहल।
  • तथ्यआंध्र प्रदेश PM Surya Ghar Utsav स्कीम के लिए 100% सब्सिडी प्रदान करता है।
  • स्थानबनागापल्ले, आंध्र प्रदेश: योजना के उद्घाटन का स्थान।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा योजनाएं किस प्रकार सामाजिक समानता को बढ़ावा दे सकती हैं और भारत के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक हो सकती हैं, चर्चा कीजिए।

  • इक्विटी गैप: ग्रामीण-शहरी ऊर्जा अंतर को कम करने के लिए SC/ST समुदायों के लिए लक्षित सब्सिडी
  • राजकोषीय स्थिरता: सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर के लंबे समय तक रखरखाव के साथ 100% राज्य सब्सिडी का संतुलन

मुख्य शब्द: नवीकरणीय ऊर्जा · सामाजिक समानता · विकेंद्रीकृत शक्ति · सब्सिडी · ऊर्जा तक पहुँच

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उत्तर प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण जल आपूर्ति मापदंडों की निगरानी के लिए IoT सेंसर का उपयोग करते हुए SCADA-सक्षम यूनिफाइड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (UCCS) शुरू किया है

चर्चा में क्यों: उत्तर प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण जल आपूर्ति मापदंडों की निगरानी के लिए IoT सेंसर का उपयोग करते हुए SCADA-सक्षम यूनिफाइड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (UCCS) शुरू किया है।

UCCS फ्रेमवर्क जल की गुणवत्ता, वितरण दक्षता और एसेट परफॉरमेंस (asset performance) की निगरानी के लिए लगभग 0.7 मिलियन IoT-इनेबल्ड सेंसर का उपयोग करता है। इसे राज्य की अनुमानित 17 करोड़ की आबादी की सेवा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यउत्तर प्रदेश में UCCS फ्रेमवर्क में लगभग 0.7 मिलियन IoT-इनेबल्ड सेंसर का उपयोग किया जाता है।
  • योजनाजल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission): केंद्र सरकार का एक मिशन जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर को कार्यात्मक नल कनेक्शन (functional tap connections) प्रदान करना है।
  • स्थानउत्तर प्रदेश: राज्यव्यापी SCADA-इनेबल्ड मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (monitoring framework) लागू करने वाला राज्य।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जल जीवन मिशन जैसी ग्रामीण जल प्रबंधन योजनाओं की प्रभावकारिता को बढ़ाने में 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स' (IoT) और 'स्कैडा' (SCADA) प्रौद्योगिकियों का एकीकरण किस प्रकार सहायक हो सकता है, चर्चा कीजिए।

  • डेटा-आधारित गवर्नेंस: लीकेज और बर्बादी कम करने के लिए वॉटर क्वालिटी पैरामीटर्स की रियल-टाइम मॉनिटरिंग
  • लास्ट-माइल जवाबदेही: ग्रामीण उपभोक्ताओं और राज्य अधिकारियों के बीच की दूरी कम करने के लिए ऑटोमेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म

मुख्य शब्द: SCADA · इंटरनेट ऑफ थिंग्स · जल जीवन मिशन · रियल-टाइम मॉनिटरिंग · स्मार्ट गवर्नेंस · ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर

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वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर बी

चर्चा में क्यों: वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर बी. खांडरे ने बेंगलुरु में दक्षिण अफ्रीका से चार चीता प्राप्त किए, जिन्हें बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क में रखा जाएगा।

दक्षिण अफ्रीका से चार चीते बेंगलुरु के केम्पेगौडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे हैं। सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले उनके स्वास्थ्य और अनुकूलन (acclimatization) की निगरानी के लिए उन्हें बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क में 30 दिनों के क्वारंटीन पीरियड (quarantine period) में रखा जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यचीतों को 30 दिनों की अवधि के लिए क्वारंटीन (quarantine) में रखा जाएगा।
  • पदईश्वर बी. खांडरे वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय वन्यजीवों में चीतों के पुनरुद्धार के पारिस्थितिक और संरक्षण संबंधी निहितार्थों पर चर्चा कीजिए, जिसमें आवास उपयुक्तता और शिकार आधार की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया गया है। चर्चा कीजिए।

  • इकोलॉजिकल निश: शिकारी-शिकार के बीच संतुलन बनाना और स्वदेशी बड़े मांसाहारी जीवों के साथ प्रतिस्पर्धा को रोकना
  • हैबिटेट उपयुक्तता: खंडित वन परिदृश्य में पर्याप्त क्षेत्र और जल संसाधन सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · प्रजातियों का पुन: परिचय · पारिस्थितिक संतुलन · वन्यजीव प्रबंधन

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पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज अभय एस

चर्चा में क्यों: पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज अभय एस. ओका ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम में 2023 के संशोधन की आलोचना की है, जिसमें कारावास के स्थान पर मौद्रिक दंड (monetary penalties) का प्रावधान किया गया है।

यह व्याख्यान चेन्नई में राकेश लॉ फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था। जज ओका ने तर्क दिया कि आपराधिक दायित्व (criminal liability) से मौद्रिक दंड (monetary penalties) की ओर बदलाव पर्यावरणीय संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकEnvironment (Protection) Act: उल्लंघन के लिए कारावास के स्थान पर मौद्रिक दंड (monetary penalties) लागू करने के लिए इसमें 2023 में संशोधन किया गया।
  • पदअभय एस. ओका: रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज।
  • स्थानराकेश लॉ फाउंडेशन: चेन्नई में लेक्चर आयोजित किया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पर्यावरण विधानों में आपराधिक दायित्व के स्थान पर मौद्रिक दंड की ओर बढ़ते झुकाव का 'प्रदूषणकर्ता भुगतान करे' (Polluter Pays) के सिद्धांत पर पड़ने वाले प्रभाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • डिटरेंस गैप: बड़ी कंपनियों के लिए मौद्रिक जुर्माना एक चेतावनी के बजाय 'बिजनेस की लागत' के रूप में देखा जा सकता है
  • रेगुलेटरी डाइल्यूशन: आपराधिक सजा में ढील से धार्मिक त्योहारों जैसे हाई-पॉल्यूशन ज़ोन में नियमों के पालन की गंभीरता कम हो सकती है

मुख्य शब्द: वैज्ञानिक दृष्टिकोण · पर्यावरण न्यायशास्त्र · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत · रेगुलेटरी कंप्लायंस · आपराधिक दायित्व

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स

IIT पलक्कड़ ने एक नया 'डिपार्टमेंट ऑफ मैटेरियल्स एंड मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग' शुरू किया है और C-DAC के सहयोग से 'माधवा सुपरकंप्यूटिंग फैसिलिटी' की स्थापना की है

चर्चा में क्यों: IIT पलक्कड़ ने एक नया 'डिपार्टमेंट ऑफ मैटेरियल्स एंड मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग' शुरू किया है और C-DAC के सहयोग से 'माधवा सुपरकंप्यूटिंग फैसिलिटी' की स्थापना की है।

IIT पलक्कड़ शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से 'मटेरियल्स इंजीनियरिंग' में BTech प्रोग्राम शुरू कर रहा है। C-DAC, पुणे के सहयोग से 'माधवा सुपरकंप्यूटिंग फैसिलिटी' की स्थापना की गई है, जिसमें 500 MHz का न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (NMR) स्पेक्ट्रोमीटर शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाC-DAC: सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (Centre for Development of Advanced Computing), जो पुणे में स्थित है।
  • विज्ञान-तकनीकमाधवा सुपरकंप्यूटिंग फैसिलिटी (Madhava Supercomputing Facility): एडवांस कंप्यूटेशनल रिसर्च के लिए IIT पलक्कड़ में स्थापित।
  • विज्ञान-तकनीकIIT Palakkad में 500 MHz का NMR Spectrometer (Nuclear Magnetic Resonance spectrometer) स्थापित किया गया है।
  • तथ्यMaterials Engineering में BTech प्रोग्राम: 2026-27 में शुरू होने वाला है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की स्वदेशी अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ करने में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाओं और विशिष्ट इंजीनियरिंग विभागों की स्थापना के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर: हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग के जरिए अकादमिक रिसर्च और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन के बीच की दूरी को कम करना
  • स्किल डेवलपमेंट: भारत के मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस सेक्टर में स्पेशलाइज्ड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग की मांग को पूरा करना

मुख्य शब्द: कंप्यूटेशनल रिसर्च · स्वदेशी तकनीक · एकेडमिक-इंडस्ट्री कोलैबोरेशन · रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने एंथ्रोपिक (Anthropic) द्वारा विकसित 'Mythos' AI मॉडल पर चिंता व्यक्त की है

चर्चा में क्यों: वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने एंथ्रोपिक (Anthropic) द्वारा विकसित 'Mythos' AI मॉडल पर चिंता व्यक्त की है। यह चिंता इसलिए जताई गई है क्योंकि यह मॉडल प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउज़र्स की कमियों (vulnerabilities) को उजागर करने में सक्षम है।

Anthropic द्वारा विकसित Mythos AI मॉडल ने IMF में संकटपूर्ण बैठकों (crisis meetings) को जन्म दिया है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली और बार्कलेज के CEO CS वेंकटकृष्ण इस मॉडल से जुड़े साइबर अपराध के संभावित जोखिमों पर चर्चा में शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकMythos: Anthropic द्वारा विकसित एक AI मॉडल, जो ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउज़र्स की कमियों (vulnerabilities) को उजागर करने के लिए जाना जाता है।
  • पदएंड्रयू बेली: बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर।
  • संस्थाIMF: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund), जहाँ Mythos की कमजोरियों (vulnerabilities) पर चर्चा हुई।
  • तथ्यBarclays के CEO CS Venkatakrishnan, Mythos मॉडल के खिलाफ सिस्टम टेस्टिंग की निगरानी कर रहे हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक वित्तीय साइबर सुरक्षा पर उन्नत एआई (AI) मॉडलों के निहितार्थों और प्रणालीगत साइबर जोखिमों को कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियामक ढाँचों की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

  • सिस्टमेटिक रिस्क: कोर बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में पुराने सॉफ्टवेयर की कमियों का AI के जरिए शोषण
  • रेगुलेटरी लैग: तेज़ी से विकसित होती जेनरेटिव AI क्षमताओं पर रियल-टाइम ओवरसाइट स्थापित करने में कठिनाई
  • सुरक्षा-इनोवेशन ट्रेड-ऑफ: ऑटोमेटेड साइबर-हमलों के खतरे के बीच AI टूल्स की तेज़ तैनाती में संतुलन

मुख्य शब्द: साइबर सिक्योरिटी · सिस्टमैटिक रिस्क · जेनरेटिव AI · वित्तीय स्थिरता · वल्नरेबिलिटी असेसमेंट

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकमेन्स

छत्तीसगढ़ के सक्ति में बॉयलर विस्फोट के बाद औद्योगिक सुरक्षा नियमों में मौजूद प्रणालीगत विफलताओं (systemic failures) पर 'द हिंदू' के संपादकीय में चर्चा की गई है

चर्चा में क्यों: छत्तीसगढ़ के सक्ति में बॉयलर विस्फोट के बाद औद्योगिक सुरक्षा नियमों में मौजूद प्रणालीगत विफलताओं (systemic failures) पर 'द हिंदू' के संपादकीय में चर्चा की गई है।

संपादकीय में औद्योगिक आपदाओं के उदाहरण के रूप में छत्तीसगढ़ के शक्ति, विशाखापट्टनम में गैस रिसाव और नेवेली विस्फोट का उल्लेख किया गया है। इसमें बॉयलर विस्फोट के प्राथमिक कारणों के रूप में ओवरप्रेशर (Overpressure) और स्केलिंग (Scaling) की पहचान की गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • स्थानसक्ति: छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए बॉयलर विस्फोट का स्थान।
  • तथ्यबॉयलर विस्फोट अक्सर ओवरप्रेशर (overpressure) और स्केलिंग (scaling) के धीरे-धीरे बढ़ने के कारण होते हैं।
  • तथ्यवर्तमान रेगुलेटरी फ्रेमवर्क निरंतर निगरानी के बजाय फैब्रिकेशन स्टैंडर्ड्स (fabrication standards) पर केंद्रित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में वर्तमान औद्योगिक सुरक्षा नियामक ढांचे की सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और 'व्यापार करने में सुगमता' (ease of doing business) तथा कठोर सुरक्षा निरीक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • रेगुलेटरी गैप: ट्रांजिएंट थर्मल और प्रेशर इम्बैलेंस की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के बजाय वन-टाइम फैब्रिकेशन स्टैंडर्ड्स पर फोकस
  • एन्फोर्समेंट की कमी: सरकारी निरीक्षणों की कमी और औद्योगिक इकाइयों में कॉन्ट्रैक्ट लेबर का शोषण

मुख्य शब्द: सिस्टम की विफलता · रेगुलेटरी ओवरसाइट · औद्योगिक सुरक्षा · ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · अस्थायी असंतुलन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

शोधकर्ताओं ने लैब में मंगल ग्रह जैसी स्थितियाँ (शॉकवेव्स और परक्लोरेट साल्ट्स) सफलतापूर्वक दोहराईं

चर्चा में क्यों: शोधकर्ताओं ने लैब में मंगल ग्रह जैसी स्थितियाँ (शॉकवेव्स और परक्लोरेट साल्ट्स) सफलतापूर्वक दोहराईं, जिसमें पाया गया कि यीस्ट सेल्स ने मॉलिक्यूलर शील्ड्स (molecular shields) बनाकर खुद को जीवित रखा।

इस प्रयोग में मंगल ग्रह पर पाए जाने वाले तीव्र शॉकवेव्स (shockwaves) और जहरीले परक्लोरेट साल्ट्स (perchlorate salts) का अनुकरण किया गया। यह देखा गया कि यीस्ट सेल्स (yeast cells) इन प्रतिकूल परिस्थितियों से महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए मॉलिक्यूलर शील्ड्स (molecular shields) का निर्माण करते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यYeast cells: इन्हें चरम वातावरण (extreme environments) में माइक्रोबियल रेजिलिएंस (microbial resilience) को प्रदर्शित करने के लिए एक मॉडल ऑर्गेनिज्म के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • विज्ञान-तकनीकमॉलिक्यूलर शील्ड्स (Molecular shields): महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को शॉकवेव्स (shockwaves) और केमिकल टॉक्सिसिटी (chemical toxicity) से बचाने के लिए पहचाने गए जैविक तंत्र (Biological mechanisms)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अत्यधिक प्रतिकूल वातावरण में सूक्ष्मजीवों की सहनशीलता की खोज किस प्रकार परग्रही जीवन की खोज और 'रहने योग्य क्षेत्रों' (habitable zones) की परिभाषा को प्रभावित करती है, इस पर चर्चा कीजिए।

  • एस्ट्रोबायोलॉजी में बदलाव: 'हैबिटेबल ज़ोन' की परिभाषा को पृथ्वी जैसे वायुमंडलीय हालातों से आगे बढ़ाया
  • तकनीकी प्रभाव: प्लैनेटरी प्रोटेक्शन और लाइफ-डिटेक्शन प्रोटोकॉल के लिए लैब सिमुलेशन तकनीकों को आगे बढ़ाना

मुख्य शब्द: एस्ट्रोबायोलॉजी · एक्सट्रीमोफाइल्स · प्लैनेटरी साइंस · मॉलिक्यूलर रेज़िलिएंस · रहने योग्य क्षेत्र

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (OIST) के शोधकर्ताओं ने भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनाने में मदद करने के लिए

चर्चा में क्यों: ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (OIST) के शोधकर्ताओं ने भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनाने में मदद करने के लिए, 13वीं शताब्दी के एक जापानी डायरी प्रविष्टि को एक विशाल सोलर पार्टिकल इवेंट (solar particle event) से जोड़ा है।

फुजीवाड़ा नो तेइका (Fujiwara no Teika) द्वारा 1204 CE में लिखी गई एक डायरी प्रविष्टि में 'लाल रोशनी' का उल्लेख किया गया था, जिसका संबंध प्राचीन सरू (cypress) के पेड़ों में कार्बन-14 के बढ़ते स्तर से पाया गया है। यह अध्ययन सौर चक्रों के छोटे और अनियमित होने की पहचान करता है, जो NASA के आर्टेमिस (Artemis) मिशनों के लिए स्पेस वेदर (space weather) डेटा को प्रभावित करते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकOIST: ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Okinawa Institute of Science and Technology) ने यह रिसर्च (research) आयोजित की।
  • तथ्यप्राचीन सरू (cypress) के पेड़ों में कार्बन-14 के स्तर का उपयोग सोलर पार्टिकल इवेंट्स (solar particle events) के संकेतक के रूप में किया गया था।
  • विज्ञान-तकनीकArtemis मिशन: NASA का चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम जो इस स्पेस वेदर (space weather) डेटा का उपयोग करता है।
  • तथ्यफूजीवारा नो तेइका (Fujiwara no Teika) की डायरी एंट्री 1204 CE की है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ऐतिहासिक आंकड़ों और पुरा-जलवायु विज्ञान (paleoclimatology) किस प्रकार अंतरिक्ष मौसम की हमारी समझ को समृद्ध कर सकते हैं और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण अभियानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक हो सकते हैं? चर्चा कीजिए।

  • डेटा इंटीग्रेशन: अनिश्चित सोलर साइकल को मॉडल करने के लिए आधुनिक सैटेलाइट टेलीमेट्री के साथ पेलियोक्लाइमेटोलॉजिकल रिकॉर्ड्स को जोड़ना
  • एस्ट्रोनॉट सुरक्षा: लंबी अवधि के लूनर और मार्शियन मिशन के दौरान एक्सट्रीम सोलर पार्टिकल इवेंट्स के जोखिमों को कम करना

मुख्य शब्द: स्पेस वेदर · सोलर पार्टिकल इवेंट्स · पेलियोक्लाइमेटोलॉजी · आर्टेमिस मिशन · कार्बन-14 डेटिंग

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

गुजरात हाई कोर्ट ने डीपफेक कंटेंट बनाने और प्रसारित करने में AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक रेगुलेटरी मैकेनिज्म (Regulatory Mechanism) की मांग करने वाली एक PIL के बाद मेटा (Meta), X, गूगल (Google), रेडिट (Reddit) और स्क्रिबड (Scribd) को नोटिस जारी किए हैं

चर्चा में क्यों: गुजरात हाई कोर्ट ने डीपफेक कंटेंट बनाने और प्रसारित करने में AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक रेगुलेटरी मैकेनिज्म (Regulatory Mechanism) की मांग करने वाली एक PIL के बाद मेटा (Meta), X, गूगल (Google), रेडिट (Reddit) और स्क्रिबड (Scribd) को नोटिस जारी किए हैं।

मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. राय की एक खंडपीठ ने नोटिस जारी किए। कोर्ट ने इंटरमीडियरीज (intermediaries) को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act), 2000 के अनुपालन में अवैध सामग्री को समन्वित रूप से हटाने के लिए सहयोग पोर्टल से जुड़ने का निर्देश दिया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थासहयोग पोर्टल: इंटरमीडियरीज (Intermediaries) द्वारा अवैध कंटेंट को समन्वित रूप से हटाने के लिए एक प्लेटफॉर्म।
  • तथ्यप्रतिवादी: Meta India, Google, X, Reddit और Scribd।
  • स्थानगुजरात हाई कोर्ट: नोटिस जारी करने वाली न्यायिक संस्था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में एआई-जनित डीपफेक (deepfakes) को विनियमित करने में आने वाली चुनौतियों और डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मध्यस्थ उत्तरदायित्व (intermediary liability) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी लैग: तेज़ी से बदलती जनरेटिव AI टेक्नोलॉजी के लिए रियल-टाइम कानूनी ढांचा बनाने में कठिनाई
  • इंटरमीडियरी जवाबदेही: कंटेंट को मॉडरेट करने की प्लेटफॉर्म्स की ज़िम्मेदारी और अभिव्यक्ति की आज़ादी के बीच संतुलन
  • तकनीकी प्रवर्तन: डिसेंट्रलाइज्ड और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स से जटिल डीपफेक्स की पहचान और उन्हें हटाने में चुनौतियां

मुख्य शब्द: डीपफेक्स · इंटरमीडियरी लायबिलिटी · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · डिजिटल गवर्नेंस · इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट

रक्षा मंत्रालय की इकाई, MIDHANI ने डॉ

चर्चा में क्यों: रक्षा मंत्रालय की इकाई, MIDHANI ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर उनकी दुनिया की पहली टाइटेनियम अलॉय कास्टिंग (Titanium alloy casting) का अनावरण किया।

MIDHANI रक्षा मंत्रालय के अधीन एक इकाई है। टाइटेनियम अलॉय कास्टिंग (titanium alloy casting) अपनी उच्च मजबूती और संक्षारण प्रतिरोध (corrosion resistance) के लिए जानी जाती है, जो उन्नत मिश्र धातुओं (advanced alloys) में भारत की सटीक कास्टिंग विशेषज्ञता को प्रदर्शित करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाMIDHANI: रक्षा मंत्रालय के अधीन एक यूनिट।
  • विज्ञान-तकनीकटाइटेनियम अलॉय (Titanium alloy): यह अपनी उच्च मजबूती और संक्षारण प्रतिरोध (corrosion resistance) के लिए जाना जाता है।
  • तथ्यडॉ. बी. आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती 2026 में मनाई जाएगी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और औद्योगिक विकास के संदर्भ में उन्नत सामग्रियों और मिश्र धातुओं के स्वदेशी विनिर्माण के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • मटेरियल सोवरेन्टी: एयरोस्पेस और डिफेंस के लिए हाई-स्ट्रेंथ टाइटेनियम अलॉय पर आयात निर्भरता कम करना
  • तकनीकी छलांग: बेसिक मैन्युफैक्चरिंग से एडवांस अलॉय की हाई-प्रिसिजन कास्टिंग की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: रणनीतिक स्वायत्तता · स्वदेशी निर्माण · एडवांस्ड मैटेरियल्स · प्रिसिजन कास्टिंग · डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग

GE Aerospace और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए भारत में F414 जेट इंजन का सह-उत्पादन (co-produce) करने के लिए तकनीकी मामलों पर एक समझौता किया है

चर्चा में क्यों: GE Aerospace और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए भारत में F414 जेट इंजन का सह-उत्पादन (co-produce) करने के लिए तकनीकी मामलों पर एक समझौता किया है।

इस साझेदारी का उद्देश्य भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए F414 जेट इंजन का सह-उत्पादन करना है। दोनों कंपनियों ने इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगभग तीन वर्षों से चर्चा की है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकF414: भविष्य के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (combat aircraft) में उपयोग के लिए बनाया गया जेट इंजन।
  • संस्थाHAL: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, एक भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग।
  • तथ्यGE Aerospace और HAL पिछले लगभग तीन वर्षों से को-प्रोडक्शन डील (co-production deal) के संबंध में चर्चा कर रहे हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: F414 जैसे उन्नत जेट इंजनों के सह-उत्पादन से एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' लक्ष्यों को किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन और स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के बीच संतुलन
  • सप्लाई चेन इंटीग्रेशन: भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए आयातित प्रोपल्शन सिस्टम पर निर्भरता कम करना
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: डिफेंस प्रोक्योरमेंट में निर्भरता कम करने के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करना

मुख्य शब्द: को-प्रोडक्शन · तकनीकी हस्तांतरण · रणनीतिक स्वायत्तता · डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग · आत्मनिर्भर भारत

रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने तुमकुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की एक नई इकाई का उद्घाटन किया

चर्चा में क्यों: रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने तुमकुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की एक नई इकाई का उद्घाटन किया, जहाँ प्रचंड LCH और लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर्स का उत्पादन किया जाएगा।

तुमकुरु में स्थित यह नई सुविधा लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) और प्रचंड LCH के उत्पादन के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) और डेक-आधारित मल्टी रोल हेलीकॉप्टर (DBMRH) सहित भविष्य के कार्यक्रमों को समर्थन देना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाहिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इस फैसिलिटी का ऑपरेटर है।
  • स्थाननई प्रोडक्शन लाइन तुमकुरु में स्थित है।
  • तथ्ययह सुविधा Indian Multi Role Helicopter (IMRH) और Deck-based Multi Role Helicopter (DBMRH) प्रोग्राम्स को सपोर्ट करती है।
  • तथ्ययह फैसिलिटी प्रचंड LCH और लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (Light Utility Helicopter - LUH) उत्पादन के लिए समर्पित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में स्वदेशी एयरोस्पेस विनिर्माण के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • सप्लाई चेन इंटीग्रेशन: महत्वपूर्ण एयरोस्पेस कंपोनेंट्स के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
  • तकनीकी छलांग: यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों से मल्टी-रोल और डेक-आधारित प्लेटफॉर्म की ओर बदलाव
  • इंडस्ट्रियल सिनर्जी: आत्मनिर्भर भारत पहल को समर्थन देने के लिए HAL के मैन्युफैक्चरिंग बेस का लाभ उठाना

मुख्य शब्द: रणनीतिक स्वायत्तता · स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग · रक्षा उत्पादन · एयरोस्पेस इंजीनियरिंग · आत्मनिर्भरता

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एल निनो (El Nino) की चिंताओं के कारण जून-सितंबर 2026 की अवधि के लिए सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसून की चेतावनी जारी की है

चर्चा में क्यों: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एल निनो (El Nino) की चिंताओं के कारण जून-सितंबर 2026 की अवधि के लिए सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसून की चेतावनी जारी की है।

IMD के अनुसार, इस वर्ष वर्षा का अनुमान दीर्घकालिक औसत (Long Period Average - LPA) के 92% के बराबर रहने की संभावना है, जो कि 87 cm है। वर्ष 2023 में 'सामान्य के करीब' (near normal) और वर्ष 2015 में सूखे के बाद, यह पिछले ग्यारह वर्षों में पहली बार है जब वर्षा का अनुमान सामान्य से कम रहने का है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यIMD ने 2026 के लिए अनुमानित वर्षा को लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 92% बताया है।
  • तथ्यदक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 87 cm है।
  • स्थानयह पूर्वानुमान जून से सितंबर तक की दक्षिण-पश्चिम मानसून अवधि (Southwest monsoon period) को कवर करता है।
  • विज्ञान-तकनीकएल निनो (El Nino) को 2026 के मानसून पूर्वानुमान के लिए एक प्राथमिक जलवायु संबंधी चिंता के रूप में उद्धृत किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: एल नीनो और जलवायु परिवर्तनशीलता का भारत के मानसून पैटर्न पर पड़ने वाले प्रभाव और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • कृषि संवेदनशीलता: अनियमित बारिश का वर्षा आधारित फसल प्रणालियों और MSP से जुड़े खरीद पर प्रभाव
  • हाइड्रोलॉजिकल स्ट्रेस: सिंचाई और पीने के पानी के लिए कम होता ग्राउंडवाटर रिचार्ज और सतही जल की उपलब्धता
  • आर्थिक अस्थिरता: मानसून की कमी और ग्रामीण मांग के बीच संबंध और महंगाई का दबाव

मुख्य शब्द: एल नीनो · लॉन्ग पीरियड एवरेज · मानसून की अनिश्चितता · क्लाइमेट रेजिलिएंस · जल चक्र

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ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) ने चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव निवास की संभावनाओं को देखते हुए

चर्चा में क्यों: ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) ने चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव निवास की संभावनाओं को देखते हुए, पिघले हुए रेगोलिथ इलेक्ट्रोलाइसिस (molten regolith electrolysis) के जरिए चंद्रमा जैसी मिट्टी से ऑक्सीजन निकालने का सफल प्रदर्शन किया।

जेफ बेजोस द्वारा स्थापित ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) ने प्रयोगशाला के वातावरण में चंद्र मिट्टी से ऑक्सीजन निकालने के लिए 'मोल्टन रेगोलिथ इलेक्ट्रोलाइसिस' (molten regolith electrolysis) नामक तकनीक का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में मिट्टी को उच्च तापमान तक गर्म किया जाता है और खनिजों में मौजूद रासायनिक बंधों को तोड़ने के लिए विद्युत प्रवाह (electric current) लगाया जाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकMolten regolith electrolysis: चंद्रमा की मिट्टी (lunar soil) से ऑक्सीजन, धातु और सोलर पैनल के लिए आवश्यक सामग्री निकालने की एक प्रक्रिया।
  • पदBlue Origin: जेफ बेजोस द्वारा स्थापित एक प्राइवेट स्पेस एक्सप्लोरेशन कंपनी।
  • तथ्यइस तकनीक का उद्देश्य लूनर मिशन (lunar missions) के लिए पृथ्वी पर आधारित आपूर्ति पर निर्भरता को कम करना है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अंतरिक्ष में मानव की दीर्घकालिक उपस्थिति की निरंतरता के लिए रेगोलिथ इलेक्ट्रोलिसिस जैसी 'इन-सिटु संसाधन उपयोग' (ISRU) प्रौद्योगिकियों के विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: पृथ्वी पर निर्भर लाइफ सपोर्ट सप्लाई को कम करके ऑर्बिट तक जाने वाले मास की लागत घटाना
  • तकनीकी छलांग: खनिज निष्कर्षण के जरिए अन्वेषण से स्थायी निवास की ओर बदलाव
  • संसाधन स्वायत्तता: चंद्र सामग्री से सीधे धातु और सोलर पैनल बनाने की क्षमता

मुख्य शब्द: इन-सिटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन · लूनर हैबिटेशन · रेगोलिथ इलेक्ट्रोलाइसिस · अंतरिक्ष अन्वेषण · सतत विकास

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रमन रिसर्च लैब के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर कार्तिक रमन, हैदराबाद में चिप लेवल से तैयार किए जा रहे भारत के पहले क्वांटम कंप्यूटर के विकास का नेतृत्व कर रहे हैं

चर्चा में क्यों: रमन रिसर्च लैब के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर कार्तिक रमन, हैदराबाद में चिप लेवल से तैयार किए जा रहे भारत के पहले क्वांटम कंप्यूटर के विकास का नेतृत्व कर रहे हैं।

यह परियोजना हैदराबाद स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की रमन रिसर्च लैब में संचालित की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मौजूदा घटकों को जोड़ने के बजाय, बुनियादी चिप्स और भौतिकी (physics) के आधार पर कंप्यूटर का निर्माण करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकरमन रिसर्च लैब (Raman Research Lab) हैदराबाद स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (Tata Institute of Fundamental Research - TIFR) की एक फैसिलिटी है।
  • पदकार्तिक रमन भारत के पहले क्वांटम कंप्यूटर के विकास का नेतृत्व कर रहे प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (Principal Investigator) हैं।
  • तथ्ययह प्रोजेक्ट चिप और फिजिक्स लेवल से क्वांटम कंप्यूटिंग हार्डवेयर विकसित करने से संबंधित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता के लिए स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग विकास के महत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • हार्डवेयर बॉटलनैक: डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए आयातित क्वांटम प्रोसेसर पर निर्भरता कम करना
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: साइबर खतरों से महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित करने के लिए स्वदेशी चिप-लेवल फिजिक्स का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: क्वांटम कंप्यूटिंग · तकनीकी संप्रभुता · स्वदेशी इनोवेशन · रणनीतिक स्वायत्तता · अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

आर्टेमिस II (Artemis II) चालक दल एक रिकॉर्ड-तोड़ गहरे अंतरिक्ष मिशन के बाद पृथ्वी पर वापस लौट आया है

चर्चा में क्यों: आर्टेमिस II (Artemis II) चालक दल एक रिकॉर्ड-तोड़ गहरे अंतरिक्ष मिशन के बाद पृथ्वी पर वापस लौट आया है, जो NASA के मानव अंतरिक्ष अन्वेषण लक्ष्यों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

इस दल में कमांडर रीड विज़मैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल थे। इस मिशन ने अपोलो 13 (Apollo 13) द्वारा स्थापित दूरी के रिकॉर्ड को पार कर लिया और चंद्रमा के वे दृश्य भी कैद किए जो पहले कभी नहीं देखे गए थे।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकआर्टेमिस II (Artemis II): चंद्रमा की कक्षा में और अंततः उसकी सतह पर इंसानों को वापस भेजने के लिए NASA का मिशन।
  • तथ्यArtemis II मिशन ने Apollo 13 मिशन द्वारा बनाए गए पिछले दूरी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
  • पदजेरेड इसाकमान: NASA के एडमिनिस्ट्रेटर।
  • स्थानएलिन्गटन फील्ड (Ellington Field): NASA के जॉनसन स्पेस सेंटर के पास स्थित स्थान जहाँ क्रू का स्वागत किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मानव ज्ञान को आगे बढ़ाने में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष अन्वेषण के महत्व और वैश्विक अंतरिक्ष शासन के लिए 'आर्टेमिस कार्यक्रम' के तकनीकी निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • तकनीकी छलांग: डीप स्पेस लाइफ सपोर्ट और लूनर ऑर्बिटल नेविगेशन क्षमताओं को आगे बढ़ाना
  • भू-राजनीतिक समीकरण: चंद्र अन्वेषण और संसाधन प्रबंधन में प्रतिस्पर्धा और सहयोग
  • वैज्ञानिक फ्रंटियर: लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) से आगे चंद्रमा के करीब इंसानी मौजूदगी का विस्तार

मुख्य शब्द: डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन · चंद्र अन्वेषण · स्पेस टेक्नोलॉजी · मानव अंतरिक्ष उड़ान · NASA

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स

आंध्र प्रदेश सरकार 'अमरावती क्वांटम वैली' प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में अमरावती में भारत की पहली क्वांटम टेस्ट और रेफरेंस फैसिलिटीज (Quantum Test and Reference Facilities) शुरू करने जा रही है

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार 'अमरावती क्वांटम वैली' प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में अमरावती में भारत की पहली क्वांटम टेस्ट और रेफरेंस फैसिलिटीज (Quantum Test and Reference Facilities) शुरू करने जा रही है।

इस पहल में 1S और 1Q नाम के दो उन्नत क्वांटम कंप्यूटर टेस्ट बेड शामिल हैं। ये सुविधाएं आंध्र प्रदेश के अमरावती में SRM यूनिवर्सिटी और मेधा टावर्स में स्थित होंगी।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • स्थानअमरावती, आंध्र प्रदेश: भारत की पहली क्वांटम टेस्ट फैसिलिटी (Quantum test facilities) का स्थल।
  • विज्ञान-तकनीक1S और 1Q: दो एडवांस क्वांटम कंप्यूटर टेस्ट बेड (test beds) के नाम जिन्हें अनवेइल (unveil) किया जा रहा है।
  • तथ्य14 अप्रैल: Quantum Test और Reference Facilities के उद्घाटन की तारीख।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता और आर्थिक सुरक्षा के संदर्भ में स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे के विकास के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: विदेशी सेमीकंडक्टर और क्वांटम हार्डवेयर सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: स्टेबल क्यूबिट ऑपरेशंस के लिए स्पेशलाइज्ड क्रायोजेनिक और वैक्यूम एनवायरनमेंट की ज़रूरत

मुख्य शब्द: क्वांटम कंप्यूटिंग · तकनीकी संप्रभुता · अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट

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