यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के कृषि भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 507 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: फसल पैटर्न एवं सिंचाई (214) · पशुपालन, मत्स्य पालन एवं संबद्ध क्षेत्र (86) · MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षा (85) · भूमि सुधार (65) · खाद्य प्रसंस्करण एवं आपूर्ति श्रृंखला (36) · कृषि सब्सिडी एवं सहायता (21)
चर्चा में क्यों: केरल के राजस्व मंत्री ने पुराने भूमि कानूनों के आधुनिकीकरण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को लाभ पहुँचानेके लिए 'लैंड रिफॉर्म्स 2.0' लागू करने हेतु एक पैनल के गठन की घोषणा की है।
केरल सरकार का लक्ष्य संपूर्ण राज्य में भूमि मूल्यों का मानकीकरण करना और भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण करना है। 'रीबिल्ड केरल' (Rebuild Kerala) पहल के अंतर्गत 72.73 लाख भूखंडों में फैले 10.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का पुन: सर्वेक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया जा चुका है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यRebuild Kerala पहल के तहत 72.73 लाख भूमि पार्सलों में फैले 10.42 लाख हेक्टेयर का पुन: सर्वेक्षण (resurvey) पूरा किया गया।
पदए.पी. अनिल कुमार केरल में राजस्व मंत्री हैं।
योजनाLand Reforms 2.0 केरल सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य हाशिए पर रहने वाले वर्गों को लाभ पहुँचाना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में भूमि कानूनों के आधुनिकीकरण और भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण से समावेशी विकास को कैसे सुगम बनाया जा सकता है और भूमि स्वामित्व में ऐतिहासिक असमानताओं को कैसे दूर किया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: प्रोफेसर जोहान रॉकस्ट्रॉम के एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि आधुनिक चावल उत्पादन की पद्धतियाँ 'प्लैनेटरी बाउंड्रीज' (planetary boundaries) का उल्लंघन कर रही हैं, जिसके कारण वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु टिकाऊ कृषि तकनीकों की ओर संक्रमण आवश्यक है।
यह अध्ययन रेखांकित करता है कि वर्तमान चावल की खेती पृथ्वी की जलवायु, मीठे जल के संसाधनों और पोषक चक्रों पर दबाव डाल रही है। प्रस्तावित समाधानों में मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिए 'अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग' (AWD) और पोषक तत्वों के प्रदूषण को कम करने के लिए सटीक उर्वरक अनुप्रयोग शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकAlternate Wetting and Drying (AWD): धान की खेती के लिए जल-बचत वाली एक सिंचाई तकनीक, जो मिट्टी को समय-समय पर सुखाकर मीथेन उत्सर्जन को कम करती है।
तथ्यPlanetary Boundaries Framework: पृथ्वी की प्रणालियों के संबंध में मानवता के लिए सुरक्षित ऑपरेटिंग स्पेस की पहचान करने हेतु उपयोग किया जाने वाला एक वैज्ञानिक ढांचा।
पर्यावरणमीथेन (CH4): एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस, जो मुख्य रूप से जलमग्न धान के खेतों में अवायवीय अपघटन (anaerobic decomposition) के कारण उत्सर्जित होती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सतत चावल की खेती की तकनीकों की ओर संक्रमण वैश्विक खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन शमन के दोहरे अनिवार्य उद्देश्यों के बीच संतुलन कैसे स्थापित कर सकता है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावों के वैज्ञानिक मूल्यांकन के पश्चात, कर्नाटक सरकार ने बंदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी को पूर्णतः पुनः प्रारंभ कर दिया है।
यह पुन: उद्घाटन बाघ-मानव संघर्ष के कारण लगाए गए 7 महीने के प्रतिबंध की अवधि के पश्चात किया गया है। इस कदम से क्षेत्र के पर्यटन क्षेत्र के लिए प्रतिवर्ष 25-27 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न होने की संभावना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानबांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व कर्नाटक राज्य में स्थित हैं।
पर्यावरणTiger (Panthera tigris) एक प्रमुख प्रजाति है, जो Wildlife Protection Act, 1972 की Schedule I के तहत संरक्षित है।
तथ्यपुनः खुलने से प्रतिवर्ष 25-27 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न होने का अनुमान है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के बाघ अभयारण्यों में वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी-पर्यटन (इको-टूरिज्म) की आर्थिक अनिवार्यताओं के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने कोलार और चिकबल्लपुर जिलों में तोतापूरी आम के किसानों को सहायता प्रदान करने हेतु 'मार्केट इंटरवेंशन प्राइस' (MIP) योजना शुरू की है।
कर्नाटक राज्य आम विकास एवं विपणन निगम लिमिटेड इस योजना का कार्यान्वयन कर रहा है। सरकार ने 130,000 टन के लक्ष्य के साथ प्रति क्विंटल ₹1,750 की खरीद मूल्य निर्धारित की है। किसान अधिकतम 200 क्विंटल और पांच एकड़ तक के लिए मूल्य के अंतर का दावा कर सकते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाMIP (Market Intervention Price) योजना: Totapuri आम जैसी विशिष्ट फसलों की कीमतों को स्थिर करने के लिए एक राज्य-स्तरीय हस्तक्षेप।
तथ्ययोजना के लिए लक्षित खरीद: 130,000 टन।
तथ्यकर्नाटक सरकार द्वारा निर्धारित खरीद मूल्य: ₹1,750 प्रति क्विंटल।
स्थानइस योजना के लिए प्राथमिक आम उत्पादक जिले: Kolar और Chickballapur।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हॉर्टिकल्चरल फसलों के लिए बाजार हस्तक्षेप मूल्य (MIP) योजनाएं किस प्रकार मूल्य अस्थिरता को कम कर सकती हैं और लघु एवं सीमांत किसानों के लिए लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित कर सकती हैं, इस पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: तेलंगाना कैबिनेट उप-समिति, MGNREGA से प्रस्तावित VB-G राम जी अधिनियम की ओर संक्रमण हेतु कर्नाटक और केरल के साथ एक समन्वित कानूनी और नीतिगत दृष्टिकोण की संभावना तलाश रही है।
सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी के नेतृत्व में गठित तेलंगाना कैबिनेट उप-समिति, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के प्रतिस्थापन का मूल्यांकन कर रही है। यह समिति 2 जुलाई, 2024 को राज्य कैबिनेट के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाली है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकMGNREGA: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है।
स्थानतेलंगाना, कर्नाटक और केरल वर्तमान में प्रस्तावित विधायी परिवर्तन पर समन्वय कर रहे हैं।
तथ्यसमिति के निष्कर्ष 2 जुलाई, 2024 को राज्य कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) से एक नए ग्रामीण रोजगार ढांचे की ओर संक्रमण के ग्रामीण आजीविका और सामाजिक सुरक्षा के संघीय ढांचे पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: कर्नाटक कृषि विभाग तटीय जिलों के धान उत्पादकों से प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जोखिमों को कम करनेके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में पंजीकरण कराने का आग्रह कर रहा है।
कर्नाटक रैता सुरक्षा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कार्यान्वयन इंडस इंड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा किया जाता है। तटीय कर्नाटक के किसान मौसम संबंधी आपदाओं के कारण फसल की विफलता के विरुद्ध सुरक्षा हेतु ₹611.91 प्रति एकड़ का प्रीमियम भुगतान कर सकते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): फसल की विफलता के विरुद्ध किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करनेके लिए केंद्र सरकार की एक पहल।
तथ्यतटीय कर्नाटक में धान उत्पादकों के लिए प्रीमियम: ₹611.91 प्रति एकड़।
तथ्यप्रीमियम भुगतान की समय सीमा: 14 अगस्त, 2026।
स्थानतटीय कर्नाटक जिले: इसमें Dakshina Kannada और Udupi शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लघु और सीमांत किसानों के लिए जलवायु-प्रेरित जोखिमों के विरुद्ध कृषि लचीलेपन को सुनिश्चित करने में फसल बीमा योजनाओं की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री को नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) द्वारा संचालित एक वाणिज्यिक बागवानी सब्सिडी योजना के लाभार्थी के रूप में पहचाना गया है।
'वाणिज्यिक बागवानी का विकास' उप-योजना परियोजना लागत पर 50% तक की सब्सिडी प्रदान करती है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। आवेदकों के पास न्यूनतम 4,000 वर्ग मीटर भूमि पर कम से कम 10 वर्षों के भूमि रिकॉर्ड होने अनिवार्य हैं और परियोजनाओं को 18 महीनों के भीतर पूर्ण करना आवश्यक है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNational Horticulture Board (NHB): कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय।
तथ्यसब्सिडी सीमा: बागवानी उप-योजना (horticulture sub-scheme) के तहत प्रति परिवार अधिकतम 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाती है।
तथ्यपात्रता: कम से कम 10 वर्षों के लिए 4,000 sq m भूमि का स्वामित्व या पंजीकृत पट्टा अनिवार्य है।
तथ्यपरियोजना की समय-सीमा: परियोजना को अनुमोदन के 18 महीनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च-स्तरीय लाभार्थियों को कृषि सब्सिडी के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और हितों के टकराव को रोकने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्रों की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार से वित्त पोषण में विलंब के कारण जल जीवन मिशन (JJM) की गति को तीव्र करनेहेतु महाराष्ट्र कैबिनेट ने राज्य के कोष से अतिरिक्त 22,898 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है।
महाराष्ट्र सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) हेतु राज्य संसाधनों से 22,898 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इन निधियों का लक्ष्य रेट्रोफिटिंग, जल गुणवत्ता निगरानी और IoT प्रणालियों को सुदृढ़ करना है, जिसमें 75-99% पूर्णता स्तर वाले प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष रूप से 5,934 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाजल जीवन मिशन (JJM): प्रत्येक ग्रामीण घर को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) प्रदान करनेके लिए केंद्र सरकार की एक पहल।
तथ्यमहाराष्ट्र ने JJM परियोजना में तेजी लाने के लिए राज्य कोष से ₹22,898 करोड़ आवंटित किए।
विज्ञान-तकनीकJJM वास्तविक समय में जल गुणवत्ता की निगरानी और वितरण प्रबंधन के लिए IoT (Internet of Things) प्रणालियों का उपयोग करता है।
तथ्य75-99% पूर्णता स्तर वाले प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष रूप से Rs 5,934 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में 'जल जीवन मिशन' के महत्व पर चर्चा कीजिए। राज्यों द्वारा सर्वव्यापी पेयजल पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वित्तपोषण अंतराल को कैसे पाटा जा सकता है? विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' में परिवर्तन से पूर्व MGNREGA में डिजिटल उपस्थिति और वित्तपोषण संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु केंद्र सरकार से अनुरोध किया है।
कर्नाटक सरकार लंबित MGNREGA निधि में ₹700 करोड़ की राशि जारी करने की मांग कर रही है। राज्य सरकार ने DBT-SPARSH की तैयारियों को पूर्ण कर लिया है, जो लाभार्थियों को भुगतान में तेजी लाने हेतु निर्मित एक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) घटक है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाMGNREGA: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के गारंटीकृत मजदूरी रोजगार का प्रावधान प्रदान करता है।
योजनाDBT-SPARSH: ग्रामीण श्रमिकों को भुगतान को सुव्यवस्थित और त्वरित करने के उद्देश्य से एक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) घटक।
तथ्यकर्नाटक ने केंद्र सरकार से लंबित ₹700 करोड़ की धनराशि जारी करने का अनुरोध किया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मनरेगा (MGNREGA) से 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' की ओर संक्रमण के संदर्भ में डिजिटल बुनियादी ढांचे और राजकोषीय संघवाद से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध खनन पर अंकुश लगाने और कठोर दंड एवं वैज्ञानिक अन्वेषण के माध्यम से राज्य के राजस्व में वृद्धि करने हेतु अपने लघु खनिज नियमों (Minor Mineral Rules) में संशोधन किया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध उत्खनन के विरुद्ध 'शून्य-सहिष्णुता' (zero-tolerance) नीति को लागू करनेके उद्देश्य से लघु खनिज नियमों में संशोधन किए हैं। प्रमुख उपायों में वैज्ञानिक अन्वेषण हेतु एक नए ट्रस्ट का गठन और वैध खनन के लिए एक सरलीकृत अनुमति प्रक्रिया शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानछत्तीसगढ़: मध्य भारत का एक राज्य जो महत्वपूर्ण खनिज निक्षेपों के लिए जाना जाता है।
तथ्यलघु खनिज (Minor Minerals): इसमें रेत, बजरी और पत्थर जैसे खनिज शामिल हैं, जिनका विनियमन राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।
संस्थाMining Trust: छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए एक नया प्रस्तावित निकाय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लघु खनिजों के विनियमन में आने वाली चुनौतियों की चर्चा कीजिए और यह मूल्यांकन कीजिए कि कड़े कानूनी ढांचे और वैज्ञानिक अन्वेषण किस प्रकार सतत संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित कर सकते हैं।
चर्चा में क्यों: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बांधों में गाद के संचय से निपटने और जल भंडारण क्षमता को पुनर्जीवित करने के लिए एक राष्ट्रीय गाद निष्कासन (desilting) योजना की घोषणा की।
जल शक्ति मंत्रालय तकनीकी सहायता प्रदान करेगा, जबकि राज्य सरकारें गाद निकालने (desilting) के कार्यों को निष्पादित करेंगी। तुंगभद्रा जलाशय के लिए, सफल गाद निष्कासन से जल भंडारण क्षमता में 25% से 30% की वृद्धि होने का अनुमान है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतुंगभद्रा जलाशय की गाद निकालने (Desilting) से इसकी भंडारण क्षमता में 25% से 30% तक की वृद्धि होने की उम्मीद है।
संस्थाजल शक्ति मंत्रालय भारत में बांध प्रबंधन और जल संसाधनों के लिए नोडल मंत्रालय है।
स्थानतुंगभद्रा जलाशय कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच एक साझा जल संसाधन है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सिंचाई बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और अंतर-राज्यीय जल विवादों के प्रबंधन में गाद निकालने (desilting) के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: विकसित होता 'सुपर एल निनो' (super El Nino) और मानसून की वर्षा में विलंब भारत की 300 बिलियन डॉलर की कृषि अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर रहे हैं।
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का मूल्य लगभग $300 बिलियन है। वर्तमान मानसून में विलंब विशेष रूप से मध्य भारत और दक्कन क्षेत्र में चावल, कपास और दालों सहित प्रमुख फसलों को प्रभावित कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यभारत की कृषि अर्थव्यवस्था का मूल्य लगभग $300 बिलियन है।
स्थानदक्कन और मध्य भारत को वर्तमान में वर्षा की कमी का सामना करने वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।
विज्ञान-तकनीकEl Nino का तात्पर्य पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के गर्म होने से है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एल नीनो जैसी जलवायु-प्रेरित घटनाओं का भारत की खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और कृषि क्षेत्र में लचीलापन (resilience) विकसित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान जलवायु अनुकूलता और बढ़ती व्यावसायिक मांग के कारण मुख्य फसल के रूप में बाजरा अपना रहे हैं।
बाजरा अपनी अल्प विकास अवधि और न्यूनतम सिंचाई आवश्यकताओं के कारण लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। वर्तमान फसल वर्ष के लिए बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्रमशः ₹2,775/क्विंटल और ₹2,900/क्विंटल निर्धारित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यबाजरा MSP: वर्तमान फसल वर्ष के लिए ₹2,775/क्विंटल और ₹2,900/क्विंटल।
स्थानप्रमुख बाजरा उत्पादक राज्य: राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश।
पर्यावरणबाजरा एक सूखा-प्रतिरोधी अनाज की फसल है जो कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के जल-तनाव वाले क्षेत्रों में बाजरा जैसी जलवायु-अनुकूल फसलों द्वारा कृषि स्थिरता और खाद्य सुरक्षा को कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: केंद्रीय कृषि मंत्री ने एल निनो (El Niño) और मानसून में देरी के कारण प्रभावित होने वाले 315 संवेदनशील जिलों की स्थिति पर चर्चा करनेके लिए एक बैठक आयोजित की, जिसमें सिंचाई सुविधाओं के अभाव वाले 111 जिलों को प्राथमिकता दी गई।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी सप्ताह के लिए कम वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। सरकार ने 315 जिलों को संभावित रूप से संवेदनशील चिह्नित किया है, जिनमें से 111 जिलों को अपर्याप्त सिंचाई बुनियादी ढांचे के कारण उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यखराब सिंचाई सुविधाओं के कारण 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता के रूप में पहचाना गया है।
तथ्यकमजोर मानसून की स्थिति के प्रति संभावित रूप से संवेदनशील 315 जिलों की पहचान की गई है।
संस्थाभारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भारत में मानसून के पूर्वानुमान के लिए प्राथमिक एजेंसी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के वर्षा आधारित क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल कृषि के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और ग्रामीण आजीविका पर एल नीनो (El Niño) के प्रभाव को कम करने के लिए उपयुक्त उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत औसत से 43 प्रतिशत कम मानसून के प्रभाव को कम करने के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार कर रहा है, जो खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है।
मानसून सामान्यतः भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत प्रदान करता है। इस वर्ष केरल में वर्षा तीन दिन विलंबित हुई, जिससे 4 ट्रिलियन डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यवर्तमान मानसून वर्षा ऐतिहासिक औसत से 43 प्रतिशत कम है।
तथ्यमानसून की वर्षा भारत की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत योगदान देती है।
स्थानकेरल: वह राज्य जहाँ इस वर्ष मानसून की बारिश तीन दिन देरी से पहुँची।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अनियमित मानसून के प्रति भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता पर चर्चा कीजिए और कृषि क्षेत्र में जलवायु लचीलेपन को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
चर्चा में क्यों: नेस्ले इंडिया के पूर्व सीएमडी ने भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कच्चे कृषि उत्पादन और प्रसंस्कृत वस्तुओं के बीच के अंतर को पाटने के लिए मूल्य संवर्धन के एक विशाल अवसर के रूप में रेखांकित किया।
भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का वर्तमान मूल्य 300 बिलियन डॉलर से अधिक है और 2026 तक इसके 535 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। वर्तमान में, भारत अपने कृषि उत्पादन का केवल लगभग 10% प्रसंस्करण करता है, जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यभारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का अनुमानित मूल्य 2026 तक $535 बिलियन होगा।
तथ्यभारत में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण का वर्तमान प्रतिशत: लगभग 10%।
तथ्यकर्नाटक स्टेट एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस प्रोसेसिंग एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KAPPEC) सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों (micro food processing units) की देखरेख करता है।
तथ्यकर्नाटक में 10,500 से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ (micro food processing units) हैं, जो लगभग 1 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजित करती हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का विस्तार किस प्रकार ग्रामीण समृद्धि और रोजगार सृजन के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: BEST उपक्रम ने मुंबई में सार्वजनिक परिवहन के विस्तार हेतु PM E-Drive योजना के अंतर्गत 'वेट-लीज' मॉडल के माध्यम से 1,500 AC इलेक्ट्रिक मिडी बसों को शामिल करने की घोषणा की है।
BEST, 12 वर्षों की अवधि के लिए 60.25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से 1,500 इलेक्ट्रिक मिडी बसें पट्टे पर लेगा। इस खरीद प्रक्रिया में Greencell Mobility Pvt Ltd और Sai Green Projects Pvt Ltd सहित संयुक्त उद्यम शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाPM E-Drive योजना: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और सार्वजनिक परिवहन बेड़े का विस्तार करनेके लिए केंद्र सरकार की एक पहल।
तथ्यBEST का वर्तमान बेड़ा: 2,802 बसें, जिनमें से 46.7% वर्तमान में इलेक्ट्रिक हैं।
तथ्यवेट-लीज (Wet-lease) मॉडल: एक ऐसा अनुबंध जहाँ पट्टादाता (lessor) वाहन, चालक और रखरखाव प्रदान करता है, जबकि पट्टाधारक (lessee) प्रति किलोमीटर भुगतान करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से बढ़ते भारतीय महानगरों में शहरी सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के समाधान में 'वेट-लीज' (wet-lease) मॉडल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी योजनाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देनेके उद्देश्य से NAFED और NCCF को बिचौलियों को दरकिनार कर किसानों से सीधे दालें और तिलहनखरीदने का निर्देश दिया।
भारत वर्तमान में प्रतिवर्ष 6-7 मिलियन टन दालों और 15-16 मिलियन टन खाद्य तेलों का आयात करता है। यह पहल सहकारी समितियों द्वारा किसानों से प्रत्यक्ष खरीद और उन्हें तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने के लिए दो वर्ष की समय-सीमा निर्धारित करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNAFED: National Cooperative For Agriculture Production, सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक निकाय।
संस्थाNCCF: National Cooperative Consumers' Federation of India, जो खरीद और वितरण में शामिल है।
तथ्यभारत का वार्षिक दाल आयात 6-7 मिलियन टन के बीच रहता है।
तथ्यभारत का वार्षिक खाद्य तेल आयात 15-16 मिलियन टन के बीच रहता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सहकारियों द्वारा प्रत्यक्ष खरीद किस प्रकार बिचौलियों द्वारा किसानों के शोषण को कम कर सकती है और आवश्यक वस्तुओं में भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य में कैसे योगदान दे सकती है, इस पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: हथकरघा और वस्त्र मंत्री ने वैश्विक निर्यात को बढ़ावा देने और कारीगरों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लेपक्षी हस्तशिल्प के लिए अंतर्राष्ट्रीय शोरूम खोलने की घोषणा की।
यह पहल 'टेक्सटाइल्स, अपैरल एंड गारमेंट्स पॉलिसी 2024-29' और विशाखापट्टनम में आयोजित CII शिखर सम्मेलन से प्राप्त ₹4,700 करोड़ के निवेश द्वारा समर्थित है। प्रमुख सहायता तंत्रों में 'नेथन्ना भरोसा' कल्याणकारी योजना और अमरावती में एक NIFT परिसर शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाNethanna Bharosa: आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा बुनकरों और कारीगरों के लिए एक कल्याणकारी योजना।
तथ्य₹4,700 करोड़: विशाखापट्टनम में आयोजित CII Summit से कपड़ा परियोजनाओं के लिए सुरक्षित निवेश राशि।
संस्थाNIFT: National Institute of Fashion Technology, वस्त्र विकास के लिए अमरावती में एक कैंपस स्थापित कर रहा है।
योजनाPMEGP: Prime Minister's Employment Generation Programme, जिसका उपयोग कारीगरों की आजीविका का समर्थन करने के लिए किया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में ग्रामीण शिल्पकारों के लिए सतत आजीविका सुनिश्चित करते हुए पारंपरिक हस्तशिल्प के संरक्षण में वैश्विक ब्रांडिंग और अंतर्राष्ट्रीय शोरूम के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: केरल सरकार के संशोधित बजट में इडुक्की में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों के समाधान हेतु इलायची की भूमि पर किए गए निर्माण के कानूनी पुनरावलोकन और नियमितीकरण का प्रस्ताव दिया गया है।
केरल सरकार की योजना इलायची की भूमि पर मौजूदा निर्माणों को बिना किसी शर्त के नियमित करने और निर्माण संबंधी प्रतिबंधों की समीक्षा करने की है। इस पहल का उद्देश्य स्वामित्व विलेख (टाइटल डीड) वितरण पर रोक के आदेशों को हल करना और इलायची हिल्स रिजर्व (CHR) के मुद्दे का समाधान करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानइडुक्की: केरल का एक जिला जो इलायची की खेती और कार्डमम हिल्स रिजर्व (CHR) के लिए जाना जाता है।
तथ्यकेरल संशोधित बजट में कार्डमम हिल्स में भूमि संबंधी निर्माणों के नियमितीकरण के लिए विशिष्ट प्रावधान शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: केरल में बागान-आधारित कृषि समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिरता को बढ़ाने में भूमि अधिकार सुरक्षा और कृषि भूमि उपयोग के नियमितीकरण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री मोदी ने PM-Kisan योजना के अंतर्गत ₹18,880 करोड़ की एक किस्त जारी की और वर्ष 2026-27 की अवधि के लिए पश्चिम बंगाल हेतु PMFBY कवरेज शुरू किया।
PM-Kisan योजना के अंतर्गत ₹18,880 करोड़ की किस्त देश भर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को लाभान्वित करती है। पश्चिम बंगाल में PMFBY का कवरेज 2026-27 की अवधि के लिए 14 लाख हेक्टेयर भूमि पर लगभग 50 लाख किसानों तक विस्तृत है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाPM-Kisan: एक केंद्रीय योजना जो पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान करती है।
योजनाPMFBY: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) गैर-प्राकृतिक और प्राकृतिक जोखिमों के विरुद्ध बीमा कवरेज प्रदान करती है।
योजनाPMGSY-III: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चरण III ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी पर केंद्रित है।
तथ्यपश्चिम बंगाल में PMFBY के अंतर्गत 2026-27 के लिए 14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को कवर किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और फसल बीमा योजनाओं किस प्रकार लघु एवं सीमांत किसानों की सुदृढ़ता (resilience) में योगदान देते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आर्थिक विकास हेतु ग्राम सभा के तालाबों और नदी प्रणालियों का लाभ उठाने के लिए एक व्यापक मत्स्य नीति शुरू की है।
यह नीतिगत ढांचा पारंपरिक मछुआरों, निजी क्षेत्र के अभिकर्ताओं और सहकारी समितियों को प्राकृतिक जल संसाधनों को पट्टे पर देने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य पारिस्थितिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना और ग्रामीण रोजगार सृजित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्ययह नीति मत्स्य विकास के लिए ग्राम सभा तालाबों, जलाशयों और नदीय प्रणालियों को लक्षित करती है।
संस्थाराज्य में मत्स्य विकास में पारंपरिक मछुआरे, निजी खिलाड़ी और सहकारी समितियाँ जैसे हितधारक शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देने से ग्रामीण समृद्धि और सतत आजीविका सृजन में किस प्रकार योगदान दिया जा सकता है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक जैविक बाजार में पूर्वोत्तर क्षेत्र की भूमिका को सुदृढ़ करने हेतु मेघालय में भारत की सबसे बड़ी जैविक मसाला-प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया।
यह सुविधा मेघालय के री-भोई जिले में स्थित है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रीमियम कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग को पूरा करनेके लिए लकाडोंग हल्दी, अदरक और काली मिर्च जैसे उच्च गुणवत्ता वाले जैविक निर्यात प्रसंस्करण पर ध्यान केंद्रित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानRi-Bhoi: भारत के मेघालय राज्य का एक जिला।
तथ्यलकाडोंग हल्दी: मेघालय से विशेष रूप से जुड़ी एक उच्च गुणवत्ता वाली जैविक मसाला किस्म।
तथ्यऑर्गेनिक स्पाइस प्रोसेसिंग: उद्घाटन की गई यह सुविधा भारत में अपने प्रकार की सबसे बड़ी इकाई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैविक खेती और मूल्य-वर्धन को बढ़ावा देना किस प्रकार समावेशी आर्थिक विकास और ग्रामीण आजीविका में सुधार के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने अपने वित्त वर्ष 2026-27 के संशोधित बजट में 'भूमि सुधार 2.0' पहल और रबर के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की घोषणा की है।
केरल सरकार ने 'मिशन समुद्र' परियोजनाओं के लिए ₹400 करोड़ और 'रेयर अर्थ एंड क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर' हेतु ₹100 करोड़ आवंटित किए हैं। बजट में 'इंदिरा गारंटी निःशुल्क यात्रा योजना' के लिए ₹600 करोड़ का प्रावधान शामिल है, साथ ही वायनाड में एक जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना की योजना भी सम्मिलित है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यकेरल के 2026-27 संशोधित बजट में Mission Samudra परियोजनाओं के लिए ₹400 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
तथ्यRare Earth and Critical Minerals Corridor के लिए ₹100 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
तथ्यइन्दिरा गारंटी मुफ्त यात्रा योजना के लिए ₹600 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
स्थानवायनाड: एक नए जनजातीय विश्वविद्यालय के लिए प्रस्तावित स्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: केरल में भूमि सुधार और लक्षित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) हस्तक्षेप किस प्रकार हाशिए पर स्थित समुदायों और कृषि श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: मार्गरेट मासम के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने मिट्टी में DNA-bound phosphorus (DNA-P) को मापने की एक विधि विकसित की है, जिसमें इसे मृदा उर्वरता के लिए एक गतिशील जैविक पूल के रूप में पहचाना गया है।
'जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल एंड मरीन साइंसेज' में प्रकाशित यह शोध, DNA-P को जीवित सूक्ष्मजीवों के DNA के भीतर पाए जाने वाले फास्फोरस के रूप में पहचान करता है। स्थिर भंडारों के विपरीत, DNA-P एक गतिशील पूल है जो सूक्ष्मजीवी गतिविधि और पोषक चक्र से जुड़ा होता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकDNA-P: मृदा में जीवित सूक्ष्मजीवों के DNA के भीतर बंधा हुआ फास्फोरस।
तथ्यDNA-P एक स्थिर दीर्घकालिक फास्फोरस भंडार के बजाय एक गतिशील जैविक पूल है।
विज्ञान-तकनीकसूक्ष्मजीवी गतिविधि DNA-P चक्रण और मृदा उर्वरता का प्राथमिक चालक है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में कृषि के सतत गहनता (sustainable intensification) और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में सूक्ष्मजीवी फास्फोरस गतिशीलता (microbial phosphorus dynamics) की समझ किस प्रकार योगदान दे सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के झींगा किसान एक्वा फीड की बढ़ती लागत और US निर्यात शुल्कों के दोहरे संकट का सामना कर रहे हैं, जो लघु और मध्यम स्तर के उत्पादकों की आजीविका के लिए खतरा पैदा कर रहा है।
ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण आंध्र प्रदेश में एक्वा फीड की कीमतों में ₹12-16 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है। वर्तमान में, यह क्षेत्र 2023 में झींगा निर्यात पर लगाए गए अमेरिकी शुल्कों के प्रभाव से प्रभावित हो रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यएक्वा फीड की कीमतों में वृद्धि: आंध्र प्रदेश में ₹12-16 प्रति किलोग्राम।
स्थानआंध्र प्रदेश: भारत में झींगा और एक्वाकल्चर उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र।
तथ्यप्राथमिक पीड़ित: ऋण संकट का सामना कर रहे लघु और मध्यम स्तर के झींगा किसान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक व्यापार बाधाओं और बढ़ती इनपुट लागतों के बीच भारत में लघु-स्तरीय जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) किसानों के संरचनात्मक भेद्यताओं का विश्लेषण कीजिए और उनकी आर्थिक सुदृढ़ता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: चिलियाँ एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने चीन और अन्य वैश्विक बाजारों द्वारा निर्यात अस्वीकृत होने की स्थिति को रोकनेके लिए आंध्र प्रदेश सरकार से उच्च-जोखिम वाले कीटनाशक अणुओं (pesticide molecules) पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है।
वेलागपुडी संबसीवा राव और थोटा रामकृष्ण के नेतृत्व में 'चिली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन' ने कीटनाशक अवशेषों के उल्लंघन को भारत की अंतर्राष्ट्रीय बाजार स्थिति के लिए एक प्राथमिक खतरे के रूप में चिन्हित किया। इस समूह ने आंध्र प्रदेश की मिर्च की प्रतिष्ठा की रक्षाकरनेके लिए अवशेष-अनुपालन उत्पादन प्रोटोकॉल और ग्राम-स्तरीय जागरूकता अभियानों का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यआंध्र प्रदेश भारत में निर्यात-उन्मुख मिर्च की खेती का एक प्रमुख केंद्र है।
विज्ञान-तकनीकअंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार में कीटनाशक अवशेष (Pesticide residue) संबंधी उल्लंघन एक प्राथमिक नियामक बाधा हैं।
स्थानचीन भारतीय मिर्च निर्यात के लिए एक प्रमुख गंतव्य बाजार है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को पूरा करने में भारतीय कृषि निर्यातकों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 16 जून तक 35% मानसून वर्षा की कमी दर्ज की है, जिसके कारण केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों को सूखा आकस्मिक योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया है।
16 जून तक, भारत में मानसून की 35% कमी दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र में केंद्रित थी। IMD ने इस विलंब का कारण प्रतिचक्रवातीय परिसंचरण (anticyclonic circulation) और पश्चिमी मौसम प्रणालियों को बताया है, जबकि इस दौरान एल नीनो (El Niño) की स्थितियाँ तीव्र हो रही थीं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाIMD: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department) भारत में मानसून के पैटर्न की निगरानी और पूर्वानुमान के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार एजेंसी है।
तथ्यमानसून घाटा: 16 जून तक 35% दर्ज किया गया।
विज्ञान-तकनीकEl Niño: एक जलवायु पैटर्न जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के गर्म होने की विशेषता है।
तथ्यचीन के निर्यात प्रतिबंध: डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) उर्वरक की आपूर्ति को प्रभावित कर रहे हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मानसून की परिवर्तनशीलता भारत की खाद्य सुरक्षा को किस प्रकार प्रभावित करती है, इसका विश्लेषण कीजिए और जलवायु-प्रेरित कृषि झटकों के जोखिमों को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
चर्चा में क्यों: नागालैंड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन ने अंगामी समुदाय की सीढ़ीनुमा खेती (terrace farming) की स्थिरता को 'झूम खेती' (slash-and-burn agriculture) के एक लचीले विकल्प के रूप में रेखांकित किया है।
Sage पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन, धान की खेती के लिए तीव्र ढलानों पर अंगामी समुदाय द्वारा निर्मित बेंच टेरेस (सीढ़ीनुमा खेत) पर केंद्रित है। यह अध्ययन पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान और सामुदायिक जीवन के मध्य समन्वय को वर्षा के बदलते स्वरूपों के विरुद्ध स्थिरता सुनिश्चित करने वाले प्राथमिक कारक के रूप में पहचानता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थाननागालैंड: भारत का एक उत्तर-पूर्वी राज्य जो विविध स्वदेशी कृषि पद्धतियों के लिए जाना जाता है।
तथ्यसीढ़ीदार खेती (Terrace farming): मृदा अपरदन को रोकने और जल प्रबंधन के लिए पहाड़ियों की ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेत बनाकर फसल उगाने की एक विधि।
पर्यावरणझूम खेती (Slash-and-burn): वनस्पति को जलाकर भूमि साफ करने की एक पारंपरिक कृषि पद्धति, जिसकी अक्सर पारिस्थितिक क्षरण के लिए आलोचना की जाती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में सतत खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान को आधुनिक कृषि नीतियों के साथ एकीकृत करने की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: त्रिपुरा सरकार राज्य के अनानास को एक वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने और निर्यात संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 'मिशन क्वीन अनानास' के अगले चरण का शुभारंभ कर रही है।
त्रिपुरा अपनी विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों के कारण अनानास का एक प्रमुख उत्पादक है। राज्य ने 'मिशन क्वीन पाइनएप्पल' पहल के माध्यम से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बांग्लादेश, जर्मनी और रूस के लिए निर्यात मार्ग पहले ही स्थापित कर लिए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानविशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों के कारण त्रिपुरा भारत में अनानास का एक प्रमुख उत्पादक राज्य है।
तथ्य'Mission Queen Pineapple' पहल का मुख्य केंद्र मूल्यवर्धित उत्पाद (value-added products) और बाजार लिंकेज को मजबूत करना है।
तथ्यत्रिपुरा के अनानास के निर्यात गंतव्यों में UAE, बांग्लादेश, जर्मनी और रूस शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: 'भौगोलिक संकेत' (Geographical Indications) को बढ़ावा देने और राज्य-विशिष्ट ब्रांडिंग से वैश्विक बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: HMWS&SB की रिपोर्ट के अनुसार, मई और जून 2024 के दौरान हैदराबाद में 12,000 बोरवेल सूख गए, जो एक गंभीर भूजल संकट को रेखांकित करता है।
हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (HMWS&SB) ने सूचित किया है कि वर्ष 2024 में लगभग 12,000 अपार्टमेंट परिसरों में बोरवेल सूख गए हैं। बोर्ड ने गोदावरी चरण-II और चरण-III परियोजनाओं के पूर्ण होने की प्रतीक्षा के दौरान निवासियों से वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) को अपनाने का आग्रह किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यमई और जून 2024 के दौरान हैदराबाद के अपार्टमेंट परिसरों में स्थित 12,000 बोरवेल सूख गए।
संस्थाHMWS&SB: Hyderabad Metropolitan Water Supply & Sewerage Board शहर में जल प्रबंधन के लिए प्राथमिक निकाय है।
स्थानगोदावरी Phase-II और Phase-III: हैदराबाद की जल क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रमुख जल आपूर्ति परियोजनाएं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय शहरों में तीव्र शहरीकरण के कारण भूजल की स्थिरता के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और इस समस्या के समाधान हेतु वर्षा जल संचयन की प्रभावकारिता का मूल्यांकन कीजिए।
चर्चा में क्यों: कृषि मंत्रालय ने वैश्विक कीमतों में हो रही वृद्धि और आयात लागत का मुकाबला करनेके लिए वित्त मंत्रालय से उर्वरक सब्सिडी आवंटन को बढ़ाकर 1.71 लाख करोड़ रुपये करने का अनुरोध किया है।
पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न व्यवधानों के कारण कृषि मंत्रालय ने 1.71 लाख करोड़ रुपये के सब्सिडी आवंटन का प्रस्ताव दिया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक आपूर्ति पूल में संकुचन निरंतर बना रहता है, तो इस वित्त वर्ष में सब्सिडी बिल 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यप्रस्तावित उर्वरक सब्सिडी आवंटन: Rs 1.71 लाख करोड़।
तथ्यसंभावित उर्वरक सब्सिडी बिल: Rs 3 लाख करोड़ से अधिक।
संस्थाकृषि मंत्रालय: उर्वरक सब्सिडी आवंटन के लिए अनुरोध करने हेतु जिम्मेदार निकाय।
तथ्यFACT और Chambal Fertilisers & Chemicals: सब्सिडी को लेकर सकारात्मकता के कारण इन कंपनियों के शेयरों की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के बजटीय ढांचे पर बढ़ती उर्वरक सब्सिडी के राजकोषीय निहितार्थों की चर्चा कीजिए और आयात निर्भरता को कम करने के लिए उपयुक्त उपायों का सुझाव दीजिए।
चर्चा में क्यों: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर ₹92,000 करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजना के निर्माण की सुविधा हेतु पुनर्वास और पुनर्व्यवस्था (R&R) जनगणना शुरू करने की घोषणा की है।
इस परियोजना के अंतर्गत ग्रेट निकोबार द्वीप पर एक कंटेनर बंदरगाह, एक हवाई अड्डा और एक पर्यटन टाउनशिप का निर्माण सम्मिलित है। पुनर्वास एवं पुनर्वस्थापन (R&R) जनगणना और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया 10 जून, 2026 को कमल बस्ती स्थित मनोरंजन हॉल में प्रारंभ होने निर्धारित है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यग्रेट निकोबार परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹92,000 करोड़ है।
स्थानKamal Basti, R&R जनगणना और दस्तावेज़ सत्यापन का स्थान है।
स्थानयह परियोजना अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित है।
तथ्यजनगणना और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया 10 जून, 2026 से शुरू होने वाली है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील द्वीप क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान जम्मू और कश्मीर के भदरवाह के परिवर्तन पर प्रकाश डाला, जो पूर्व में आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना था और अब लैवेंडर खेती के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है।
भदरवाह जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले में स्थित है। लैवेंडर की खेती ने किसानों के लिए आय के नए स्रोत सृजित किए हैं और घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों को आकर्षित किया है, जिससे क्षेत्रीय पर्यटन को प्रोत्साहन मिला है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानभदरवाह जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले में स्थित एक शहर है।
तथ्यभदरवाह में लैवेंडर की खेती ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों खरीदारों को आकर्षित किया है।
पदडॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पहल को क्षेत्र में उद्यमिता की सफलता के रूप में रेखांकित किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के संघर्ष-प्रवण क्षेत्रों में उच्च-मूल्य वाली बागवानी और उद्यमिता को बढ़ावा देना किस प्रकार आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में कार्य कर सकता है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी (SERP), जनजातीय महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने हेतु तेलंगाना के मुलुगु में अपने महुआ और कनुगा तेल प्रसंस्करण परियोजना का विस्तार कर रही है।
इस परियोजना के अंतर्गत महुआ और कनुगा तेल निष्कर्षण एवं लड्डू उत्पादन हेतु तीन कोल्ड-प्रेस्ड प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी। यह परियोजना तेलंगाना समावेशी आजीविका कार्यक्रम (TGILP) द्वारा वित्तपोषित है और मुख्य रूप से मुलुगु जिले पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाSERP: Society for Elimination of Rural Poverty।
तथ्यइस परियोजना में महुआ और कनुगा तेल के लिए तीन कोल्ड-प्रेस्ड प्रोसेसिंग इकाइयाँ शामिल हैं।
स्थानतेलंगाना का मुलुगु जिला।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में गैर-वन्य उत्पाद (NTFP) के मूल्य-वर्धन से जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण गरीबी के निवारण में किस प्रकार सहायता मिल सकती है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: गुजरात सरकार ने अपने ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्यों को ₹1 लाख से अधिक की वार्षिक घरेलू आय प्राप्त करने में सहायता प्रदान करने हेतु 5.96 लाख महिलाओं को 'लखपति दीदी' के रूप में चिन्हित किया है।
गुजरात आजीविका संवर्धन कंपनी ने कृषि सखियों, पशु सखियों और बैंक सखियों सहित 10,000 से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया है। यह कार्यक्रम ग्रामीण महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, ऋण सहायता और बाजार तक पहुंच प्रदान करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यगुजरात ने ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के तहत 5.96 लाख महिलाओं को 'Lakhpati Didis' के रूप में पहचाना है।
तथ्यइस कार्यक्रम का लक्ष्य लाभार्थियों के वार्षिक घरेलू आय को ₹1 लाख से अधिक तक पहुँचाना है।
संस्थागुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कंपनी (Gujarat Livelihood Promotion Company) सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (community resource persons) को प्रशिक्षित करने के लिए जिम्मेदार निकाय है।
तथ्यKrishi Sakhis, Pashu Sakhis और Bank Sakhis सहित 10,000 से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (community resource persons) को प्रशिक्षित किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण भारत में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (community resource persons) को बढ़ावा देना किस प्रकार ग्रामीण-शहरी आय की खाई को पाटने और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत सरकार ने लिन उत्पादकता में वृद्धि के उद्देश्य से 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन' (Cotton Productivity Mission) शुरू किया है, क्योंकि अतीत की मूल्य-नियंत्रण नीतियों ने बीज प्रौद्योगिकी में नवाचार को बाधित किया था।
कपास उत्पादकता मिशन का लक्ष्य वर्ष 2031 तक कपास की लिंट उत्पादकता को 441 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किग्रा/हेक्टेयर करना है। इस मिशन का उद्देश्य उन पूर्ववर्ती मूल्य-नियंत्रण नीतियों के कारण उत्पादन में हो रही गिरावट का मुकाबला करना है, जिन्होंने बीज प्रौद्योगिकी नवाचार को बाधित किया था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यवर्तमान लिनट उत्पादकता: 441 kg/ha।
तथ्य2031 तक लिनट उत्पादकता का लक्ष्य: 755 kg/ha।
योजनाकॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन: कपास की पैदावार बढ़ाने के लिए सरकारी पहल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कृषि क्षेत्र में मूल्य-नियंत्रण तंत्र किस प्रकार तकनीकी नवाचार और भारतीय फसलों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।