महाराष्ट्र विधानसभा ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को औपचारिक रूप से मान्यता देने और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करनेके उद्देश्य से 'महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक' पारित किया है
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चर्चा में क्यों
महाराष्ट्र विधानसभा ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को औपचारिक रूप से मान्यता देने और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करनेके उद्देश्य से 'महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक' पारित किया है।
पृष्ठभूमि
यह विधेयक महिला किसानों का एक समर्पित डेटाबेस और उनके सशक्तिकरण हेतु एक विशिष्ट कोष के निर्माण को अनिवार्य बनाता है। यह प्रमाणपत्रों के निर्गम और संसाधनों तक पहुँच को सुगम बनाने के लिए जिला और तालुका स्तरों पर सहायता अधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रावधान करता है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यमहाराष्ट्र विधानसभा द्वारा महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक (Women Farmers’ Empowerment Bill) को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
- संस्थामहिला किसानों की सहायता के लिए जिला और तालुका दोनों स्तरों पर सहायता अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
- योजनायह विधेयक विशेष रूप से कृषि और संबद्ध गतिविधियों में महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं और अधिकारों तक पहुंच प्रदान करने का लक्ष्य रखता है।
मेन्स के लिए
Q. भारत में कृषि उत्पादकता और संस्थागत ऋण तक पहुंच में व्याप्त लैंगिक अंतराल को पाटने में महिला किसानों की औपचारिक मान्यता किस प्रकार सहायक हो सकती है, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Institutional exclusion: Historical lack of land titles and formal recognition preventing women from accessing credit and subsidies.
- Administrative bottleneck: Need for robust grassroots data collection to identify and verify women farmers at the taluka level.
- Gendered resource gap: Disparity in access to irrigation and machinery due to lack of formal ownership status.
कीवर्ड: Gender mainstreaming · Institutional recognition · Agrarian justice · Resource equity · Data-driven governance
कृषि पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।