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भाग I · स्था. 11.2025 
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सामाजिक न्याय करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के सामाजिक न्याय भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,321 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: शिक्षा नीति (441) · स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य (435) · कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे) (407) · गरीबी, भूख एवं पोषण (35) · मानव संसाधन एवं कौशल विकास (3)

वायनाड में बनेगा ट्राइबल यूनिवर्सिटी, केरलम सरकार ने 50 करोड़ का बजट दिया

चर्चा में क्यों: केरल सरकार 2026 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में किए गए वादे को पूरा करने के लिए वायनाड में एक ट्राइबल यूनिवर्सिटी (Tribal University) स्थापित करने के लिए एक विधेयक तैयार कर रही है।

इस परियोजना के लिए 2026-27 के संशोधित राज्य बजट में ₹50 करोड़ का आवंटन शामिल है। विश्वविद्यालय आदिवासी सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) को बढ़ाने के लिए स्वदेशी अध्ययन, अनुसंधान और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करेगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यट्राइबल यूनिवर्सिटी के लिए 2026-27 के संशोधित राज्य बजट (Revised State Budget) में ₹50 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
  • स्थानप्रस्तावित ट्राइबल यूनिवर्सिटी (Tribal University) को वायनाड में स्थापित किया जाना है।
  • पदमुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और मंत्री रोजी एम. जॉन इस प्रोजेक्ट में शामिल प्रमुख अधिकारी हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में जनजातीय समुदायों द्वारा सामना की जाने वाली सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों और शैक्षिक असमानताओं को दूर करने में विशिष्ट जनजातीय विश्वविद्यालय किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, चर्चा कीजिए।

  • नामांकन का अंतर: स्थानीय स्वदेशी अध्ययनों के ज़रिए कम आदिवासी ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो को संबोधित करना
  • सामाजिक-आर्थिक एकीकरण: पारंपरिक आदिवासी ज्ञान और आधुनिक रिसर्च और एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: कुल नामांकन अनुपात · सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन · स्वदेशी अध्ययन · जनजातीय कल्याण · शिक्षा की समानता

तेलंगाना में क्लास 6 और 9 के लिए बाहरी इवैल्यूएशन शुरू होगा

चर्चा में क्यों: तेलंगाना स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को कक्षा 6 और 9 के लिए पायलट बाहरी मूल्यांकन (pilot external evaluations) आयोजित करने का निर्देश दिया है, ताकि समेटिव असेसमेंट (summative assessments) का आकलन किया जा सके।

पायलट मूल्यांकन में 33 जिलों में आयोजित होने वाले समेटिव असेसमेंट 1 (1-10 अक्टूबर) और समेटिव असेसमेंट 2 को शामिल किया गया है। जहाँ कक्षा 9 के लिए पूरे राज्य में मूल्यांकन किया जाएगा, वहीं कक्षा 6 का मूल्यांकन केवल नौ जिलों तक सीमित है, जिसमें आदिलाबाद और हैदराबाद शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यपायलट इवैल्यूएशन (pilot evaluation) के लिए समेटिव असेसमेंट 1 (Summative Assessment 1) 1 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक निर्धारित है।
  • स्थानClass 6 पायलट इवैल्यूएशन (pilot evaluations) केवल नौ जिलों तक सीमित हैं, जिनमें आदिलाबाद और हैदराबाद शामिल हैं।
  • तथ्यपायलट इवैल्यूएशन (pilot evaluation) तेलंगाना के 33 जिलों को कवर करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए समय-समय पर होने वाले बाहरी मूल्यांकन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

GS2सामाजिक न्याय › स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्यप्रीलिम्स

अरसावल्ली सूर्य देव मंदिर के विकास के लिए 55.74 करोड़ मंजूर

चर्चा में क्यों: आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने 'स्वदेश दर्शन 2.0' योजना के तहत अरसावली सूर्य मंदिर के विकास के लिए ₹55.74 करोड़ स्वीकृत किए हैं।

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने अरसावली सूर्य देव मंदिर के लिए ₹55.74 करोड़ स्वीकृत किए हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के हिस्से के रूप में इस परियोजना में एक अनुभव केंद्र (Experience Centre), एक रेस्तरां और रिवरफ्रंट विकास शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • योजनास्वदेश दर्शन 2.0: थीम-आधारित टूरिस्ट सर्किट (tourist circuits) विकसित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की एक योजना।
  • तथ्य₹55.74 करोड़: अरसावली सूर्य देव मंदिर के विकास के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा स्वीकृत राशि।
  • स्थानअरसावली सूर्य देव मंदिर: Swadesh Darshan 2.0 स्कीम के तहत विकास के लिए चयनित स्थल।
मेन्स के लिए

प्रश्न: स्वदेश दर्शन 2.0 जैसी योजनाओं के अंतर्गत आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट के विकास से भारत में क्षेत्रीय आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में किस प्रकार योगदान दिया जा सकता है, चर्चा कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए रिवरफ्रंट डेवलपमेंट को धार्मिक स्थलों के साथ जोड़ना
  • इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: एक्सपीरियंस सेंटर्स और हॉस्पिटैलिटी सेवाओं के जरिए रोजगार और स्थानीय उद्यमिता
  • सांस्कृतिक संरक्षण: आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और विरासत स्थलों की पवित्रता के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: आध्यात्मिक पर्यटन · स्वदेश दर्शन 2.0 · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · क्षेत्रीय विकास · सांस्कृतिक विरासत

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केरल हाई कोर्ट ने 50 और 49 साल के कपल को IVF ट्रीटमेंट की इजाज़त दी

चर्चा में क्यों: केरल हाई कोर्ट ने Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के तहत निर्धारित आयु सीमा के बावजूद, 50 और 49 वर्षीय दंपति को IVF ट्रीटमेंट जारी रखने की अनुमति दी है।

केरल हाई कोर्ट ने मुवट्टुपुझा स्थित सेबिन हॉस्पिटल्स (Sabine Hospitals) में IVF उपचार की मांग करने वाले एक जोड़े के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस दौरान पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा दिए गए एक समान फैसले का हवाला दिया, जबकि केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि इस जोड़े ने वैधानिक आयु सीमा का उल्लंघन किया है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • अधिनियम / विधेयकAssisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021: भारत में IVF और रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (Reproductive Technologies) को नियंत्रित करने वाला कानून।
  • संस्थाकेरल स्टेट आर्ट एंड सरोगेसी बोर्ड (Kerala State Art and Surrogacy Board): वह संस्था जिसे जोड़े को नोटरीकृत वचनपत्र (notarised undertaking) देना होगा।
मेन्स के लिए

प्रश्न: प्रजनन प्रौद्योगिकियों में आयु-आधारित प्रतिबंधों के नैतिक और कानूनी निहितार्थों तथा प्रजनन स्वायत्तता के मौलिक अधिकार के मध्य अंतर्संबंधों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • जुडिशियल एक्टिविज्म: वैधानिक आयु सीमा और व्यक्तिगत प्रजनन अधिकारों के बीच संतुलन
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: मेडिकल अपवादों को शामिल करते हुए IVF में नैतिक मानकों को सुनिश्चित करना
  • विधायी मंशा: ART एक्ट, 2021 के उद्देश्य को संबोधित करना बनाम न्यायिक व्याख्याएं

मुख्य शब्द: प्रजनन स्वायत्तता · न्यायिक व्याख्या · सांख्यिकीय अनुपालन · बायोएथिक्स · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

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केरल हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 तक सर्वे रिपोर्ट मांगी

चर्चा में क्यों: केरल हाई कोर्ट ने पिछड़ा वर्ग विकास विभाग के सचिव को 5 नवंबर, 2026 तक सामाजिक-आर्थिक जाति सर्वेक्षण (Socio-economic Caste Survey) की प्रगति पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

केरल हाई कोर्ट ने माइनॉरिटी इंडियंस प्लानिंग एंड विजिलेंस कमीशन ट्रस्ट (Minority Indians Planning and Vigilance Commission Trust) द्वारा दायर एक अवमानना याचिका के जवाब में दिशा-निर्देश जारी किए। रिट याचिकाओं में विशेष रूप से OBC सूची में संशोधन और मुस्लिमों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए लाभों की मांग की गई थी।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थापिछड़ा वर्ग विकास विभाग (Department of Backward Classes Development): केरल में OBC कल्याण के लिए जिम्मेदार राज्य विभाग।
  • स्थानकेरल हाई कोर्ट: 2019 के जजमेंट के अनुपालन की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
  • तथ्य5 नवंबर, 2026: कोर्ट द्वारा सर्वे रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा (Deadline) तय की गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच लाभों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करने में सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

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आंध्र प्रदेश में बुजुर्गों के लिए घर-घर पहुंचेगी हेल्थकेयर टीम

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण मंत्री ने अक्टूबर में बुजुर्गों के लिए घर पर आधारित स्वास्थ्य सेवा और जेरिएट्रिक असेसमेंट (Geriatric Assessment) प्रदान करने के लिए एक विशेष चिकित्सा कार्यक्रम की घोषणा की।

इस पहल के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा टीमें घरों पर जाकर चेक-अप, फिजियोथेरेपी और पुनर्वास (rehabilitation) की सुविधा प्रदान करेंगी। कार्यकर्ताओं को साप्ताहिक रूप से पांच बुजुर्गों के घर जाने का कार्य सौंपा गया है। इसके लिए कॉम्प्रिहेंसिव जेरियाट्रिक असेसमेंट (Comprehensive Geriatric Assessment - CGA) टूल का उपयोग किया जाएगा, जिसके माध्यम से प्रत्येक अस्पताल से कम से कम 1,000 लोगों का डेटा एकत्र किया जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनाआंध्र प्रदेश में हेल्थकेयर टीमें अक्टूबर से बुजुर्गों के लिए होम-बेस्ड फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन (rehabilitation) प्रदान करेंगी।
  • तथ्यइस प्रोग्राम के तहत वर्कर हर हफ्ते पांच बुजुर्गों से मिलने जाएंगे।
  • विज्ञान-तकनीकस्वास्थ्य संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए Comprehensive Geriatric Assessment (CGA) टूल का उपयोग किया जाएगा।
  • तथ्यलक्ष्य प्रत्येक अस्पताल से कम से कम 1,000 लोगों से जानकारी एकत्र करना है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में वृद्ध होती जनसंख्या की चुनौतियों के समाधान में समुदाय-आधारित जराचिकित्सा (geriatric care) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • संस्थागत बाधा: ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ जेरियाट्रिक हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और रिहैबिलिटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
  • डेटा-आधारित नीति: टारगेटेड जेरियाट्रिक इंटरवेंशन के लिए विशिष्ट मॉर्बिडिटी पैटर्न की पहचान करने हेतु CGA टूल्स का उपयोग

मुख्य शब्द: वृद्धों की देखभाल · कम्युनिटी-आधारित स्वास्थ्य सेवा · व्यापक जेरियाट्रिक असेसमेंट · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · बढ़ती उम्र की आबादी

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NSAIDs और एंटीबायोटिक्स के गलत इस्तेमाल से किडनी खराब होने का खतरा

चर्चा में क्यों: सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने किडनी से जुड़ी जटिलताओं और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (Antimicrobial Resistance) को रोकने के लिए NSAIDs और एंटीबायोटिक्स के अनियंत्रित उपयोग के खिलाफ एक सर्कुलर जारी कर चेतावनी दी है।

CDSCO द्वारा जारी 21 सितंबर, 2026 के सर्कुलर में इस बात पर जोर दिया गया है कि NSAIDs और एंटीबायोटिक्स के लिए शेड्यूल एच. और H1 के तहत प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य है। इन दवाओं के दुरुपयोग को एक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury) और क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से जोड़ा गया है, विशेष रूप से मधुमेह या उच्च रक्तचाप वाले रोगियों में।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाCDSCO: सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (Central Drugs Standard Control Organisation) भारत में फार्मास्यूटिकल्स के लिए राष्ट्रीय नियामक संस्था है।
  • अधिनियम / विधेयकSchedule H: वे दवाएं जिन्हें बेचने के लिए एक Registered Medical Practitioner के प्रिस्क्रिप्शन की आवश्यकता होती है।
  • अधिनियम / विधेयकSchedule H1: एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) की एक विशिष्ट श्रेणी जिसके लिए प्रिस्क्रिप्शन (Prescription) अनिवार्य है और जिसमें मेडिकल सलाह के लिए चेतावनी दी गई है।
  • तथ्यNSAIDs किडनी तक रक्त के प्रवाह को कम कर सकते हैं, जिससे एक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury) या क्रोनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease) की स्थिति गंभीर हो सकती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों और बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के दवाओं (OTC) के अनियंत्रित उपयोग को रोकने में नियामक निकायों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

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महाराष्ट्र में अब बच्चों के खाने पर कड़े नियम, कमर्शियल प्रमोशन पर बैन

चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने स्तनपान की प्रथाओं की रक्षा के लिए शिशु आहार और दूध के विकल्पों (Milk Substitutes) पर नियमों को कड़ा करते हुए एक अनुपालन आदेश (Compliance Order) जारी किया है।

यह आदेश कमिश्नर तुकाराम मुंडे द्वारा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 30 के तहत जारी किया गया था। यह शिशु आहार (infant foods) के व्यावसायिक प्रचार पर रोक लगाता है और उल्लंघन करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना निर्धारित करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • अधिनियम / विधेयकफूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006)।
  • तथ्यइन्फेंट फूड ऑर्डर (Infant Food Order) के उल्लंघन के लिए अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख है।
  • संस्थामहाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन।
  • तथ्ययह आदेश Food Safety and Standards Act की Section 30 के तहत जारी किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: शिशु आहार उद्योग के वाणिज्यिक हितों के विरुद्ध मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सुरक्षा में राज्य-स्तरीय विनियामक ढाँचों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन, कैंपस में सुरक्षा पर उठे सवाल

चर्चा में क्यों: पंजाब के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (Lovely Professional University) में एक गर्ल्स हॉस्टल में कथित बलात्कार के मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। यह घटना उच्च शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करती है।

UGC के आंकड़ों के अनुसार, विश्वविद्यालयों में यौन उत्पीड़न के मामलों की संख्या 2015-16 में 160 से बढ़कर 2022-23 में 425 हो गई है। भारत भर के छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं की संख्या 2015-16 और 2023-24 के बीच लगभग 36% बढ़ गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यUGC ने 2022-23 अवधि के दौरान यौन उत्पीड़न के मामलों में 99.5% डिस्पोजल रेट (disposal rate) की रिपोर्ट दी है।
  • तथ्यभारत में हॉस्टल्स में रहने वाली छात्राओं की संख्या 2015-16 और 2023-24 के बीच लगभग 36% बढ़ गई।
  • संस्थाUGC (University Grants Commission) वह संस्था है जो कॉलेजों में यौन उत्पीड़न के मामलों पर डेटा प्रदान करती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: उच्च शिक्षण संस्थानों में मौजूदा शिकायत निवारण तंत्रों के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निहित संस्थागत और प्रणालीगत चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • संस्थागत जवाबदेही: हाई केस डिस्पोजल रेट और कैंपस सुरक्षा घटनाओं के बने रहने के बीच का अंतर
  • इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव: महिला हॉस्टल में रहने वालों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी सुरक्षा और मॉनिटरिंग क्षमता से आगे निकल गई
  • रिपोर्टिंग का विरोधाभास: बढ़ते रिपोर्ट किए गए मामले बेहतर जागरूकता दर्शाते हैं बनाम लगातार बने रहने वाले सुरक्षा जोखिम

मुख्य शब्द: इंटरनल कंप्लेंट कमेटी · संस्थागत जवाबदेही · जेंडर-आधारित हिंसा · कैंपस सुरक्षा · निवारण तंत्र

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गृह लक्ष्मी स्कीम के लाभार्थियों के बैंक अकाउंट से पैसे नहीं काटेंगे बैंक

चर्चा में क्यों: कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने महिला लाभार्थियों की वित्तीय स्वायत्तता की रक्षा हेतु बैंकों को 'गृह लक्ष्मी' योजना के लाभ से ऋण की किश्तों की कटौती रोकने का निर्देश दिया है।

गृह लक्ष्मी योजना के अंतर्गत कर्नाटक में 1,24,48,000 महिला परिवार प्रमुखों को ₹2,000 की मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वाणिज्यिक बैंकों और निजी वित्त कंपनियों द्वारा पुराने बकाया या ब्याज के विरुद्ध इन निधियों को तत्काल काट लिए जाने के संबंध में शिकायतें दर्ज की गई हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • योजनागृह लक्ष्मी: कर्नाटक सरकार की एक योजना जो महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • तथ्ययह योजना लगभग 1.24 करोड़ महिला परिवार प्रमुखों को कवर करती है।
  • संस्थाDLRC (District Level Bankers Review Committee): जिला स्तर पर बैंकिंग गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार निकाय।
मेन्स के लिए

प्रश्न: महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और इन निधियों के विचलन को रोकने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

  • वित्तीय समावेशन की बाधाएं
  • अनियंत्रित ऋण देने की प्रथाएं
  • निगरानी तंत्र
  • महिलाओं का सशक्तिकरण

मुख्य शब्द: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर · वित्तीय समावेशन · अनियंत्रित ऋण देना · सोशल सेफ्टी नेट · महिला सशक्तिकरण

केरल में स्कूल काउंसलर्स के लिए गाइडलाइंस जारी करने के निर्देश

चर्चा में क्यों: केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (Kerala State Commission for Protection of Child Rights) ने 20 मनोसामाजिक (psychosocial) काउंसलर्स की मांग के बाद संबंधित विभागों को स्कूल काउंसलर्स के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है।

केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सामान्य शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों को दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। यह मांग कोझिकोड में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान लगभग 200 मनोसामाजिक परामर्शदाताओं (psychosocial counsellors) द्वारा उठाई गई थी।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाकेरल स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स: स्कूल काउंसलर गाइडलाइन्स जारी करने का निर्देश देने वाली संस्था।
  • तथ्यकोझिकोड ट्रेनिंग प्रोग्राम में लगभग 200 साइकोसोशल काउंसलर्स (psychosocial counsellors) ने भाग लिया।
  • स्थानकोझिकोड: चाइल्ड मेंटल हेल्थ सपोर्ट के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम का स्थान।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को संस्थागत बनाने के महत्व और बाल अधिकारों को सुनिश्चित करने में राज्य आयोगों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • संस्थागत बाधा: सरकारी स्कूलों में साइकोसोशल काउंसलर्स के लिए मानकीकृत गाइडलाइन्स की कमी
  • पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: एकेडमिक करिकुलम की ज़रूरतों और अनिवार्य मेंटल हेल्थ सपोर्ट घंटों के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: बाल अधिकार · मानसिक स्वास्थ्य · संस्थागत ढांचा · साइकोसोशल सपोर्ट · पॉलिसी स्टैंडर्डाइजेशन

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आंध्र प्रदेश के 246 ब्लड बैंकों का डेटा जुटाएगा इंडियन रेड क्रॉस

चर्चा में क्यों: इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS) आंध्र प्रदेश के 246 ब्लड बैंकों के लिए डेटा कलेक्शन अभियान शुरू कर रही है, ताकि उनके व्यावसायीकरण और बीमारियों के प्रसार को रोका जा सके।

IRCS अक्टूबर तक डेटा को ब्लड बैंक मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (BBMS) पर अपलोड कर देगा। स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेंटर गतिविधियों की निगरानी करेगा, जबकि जिला कलेक्टर मासिक समीक्षा करेंगे।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • संस्थाइंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS) वह संस्था है जिसे ब्लड बैंक डेटा कलेक्शन का कार्य सौंपा गया है।
  • तथ्यडेटा कलेक्शन के लिए आंध्र प्रदेश में 246 ब्लड बैंकों को टारगेट किया गया है।
  • विज्ञान-तकनीकब्लड बैंकों के लिए HIV और हेपेटाइटिस-B (Hepatitis-B) की अनिवार्य टेस्टिंग करना आवश्यक है।
  • तथ्यडोनर्स के पास आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) कार्ड होना अनिवार्य है।
  • संस्थाब्लड बैंक मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (Blood Banks Management Software - BBMS) डेटा अपलोडिंग के लिए प्लेटफॉर्म है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में रक्त बैंकिंग के व्यावसायीकरण को रोकने के साथ-साथ रोगियों के लिए रक्त की सुरक्षा और सुलभता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक नियामक उपायों पर चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: अवैध खून की बिक्री रोकने के लिए स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेंटर्स की निगरानी मजबूत करना
  • डिजिटल इंटीग्रेशन: पारदर्शी डोनर ट्रैकिंग और बीमारी की स्क्रीनिंग के लिए ABHA कार्ड और BBMS का इस्तेमाल
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा: HIV और हेपेटाइटिस-B जैसे ब्लड-बोर्न पैथोजन्स के लिए अनिवार्य स्क्रीनिंग को मानकीकृत करना

मुख्य शब्द: व्यावसायीकरण · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · पारदर्शिता · बीमारी निगरानी · डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स

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SNCU में आग से हुई मौत के बाद NCPCR की बड़ी मीटिंग

चर्चा में क्यों: NCPCR ने आदिलाबाद स्थित राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में लगी आग की घटना पर स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया है, जिसमें पांच नवजात बच्चों की मौत हो गई थी।

यह घटना आदिलाबाद स्थित राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में हुई। NCPCR ने अग्नि सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों (Emergency Response Systems) पर चर्चा करने के लिए तेलंगाना राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (TGSCPCR) के साथ बैठक की।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाNCPCR: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights)।
  • स्थानRIMS: राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (Rajiv Gandhi Institute of Medical Sciences), आदिलाबाद में स्थित है।
  • तथ्यSNCU में आग लगने की घटना में पांच नवजात बच्चों की मौत हो गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (SNCUs) जैसी विशिष्ट स्वास्थ्य इकाइयों में अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्रों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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एटा में बच्चों के आपत्तिजनक वीडियो पर NHRC सख्त, मेटा इंडिया से नोटिस

चर्चा में क्यों: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के एटा में आपत्तिजनक सोशल मीडिया वीडियो में नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल से जुड़ी एक शिकायत पर मेटा इंडिया (Meta India) और स्थानीय अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।

प्रियंक कानूंगो की अध्यक्षता में NHRC ने स्थानीय अधिकारियों को बच्चों की पहचान करने और उनकी सुरक्षा करने तथा इसमें शामिल वयस्कों की जांच करने का निर्देश दिया। Meta India से की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट देने और यह स्पष्ट करने को कहा गया कि क्या इस सामग्री से कोई व्यावसायिक लाभ हुआ।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाNHRC: National Human Rights Commission भारत में मानवाधिकार संरक्षण के लिए प्राथमिक statutory body है।
  • पदप्रियंक कानूगो: नोटिस के समय NHRC के प्रेसिडिंग मेंबर (Presiding member)।
  • तथ्यNHRC ने Meta India और स्थानीय अधिकारियों को रिपोर्ट जमा करने के लिए दो सप्ताह की डेडलाइन (deadline) दी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिगों के शोषण को रोकने के लिए विनियामक चुनौतियों और डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने में वैधानिक निकायों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी गैप: प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स पर शॉर्ट-फॉर्म वीडियो कंटेंट के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग मैकेनिज्म की कमी
  • अकाउंटेबिलिटी फ्रेमवर्क: थर्ड-पार्टी द्वारा बनाए गए कंटेंट के लिए टेक जायंट्स पर कानूनी जिम्मेदारी तय करने में कठिनाई
  • बाल संरक्षण: अभिव्यक्ति की आज़ादी और कमज़ोर नाबालिगों की सुरक्षा के बीच राज्य का कर्तव्य

मुख्य शब्द: बाल अधिकार · डिजिटल सुरक्षा · सांविधिक निगरानी · प्लेटफ़ॉर्म जवाबदेही · मानवाधिकार

NEET पेपर लीक विवाद के बाद NTA के नए ऑफिस में CISF तैनात

चर्चा में क्यों: 2026 NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद, जिसके कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपना कार्यालय नए स्थान पर स्थानांतरित कर दिया है और वहां CISF के जवानों की तैनाती की है।

NTA ने अपने ओखला स्थित कार्यालय से मिंटो रोड स्थित गवर्नमेंट ऑफ इंडिया प्रेस बिल्डिंग में 55,000 वर्ग फुट के स्थान पर अपना स्थानांतरण किया है। प्रधानमंत्री द्वारा एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स (Task Force) का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व नंदन निलेकणी कर रहे हैं। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को लीकप्रूफ बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाNTA: निष्पक्ष और मानकीकृत परीक्षाएं आयोजित करने के लिए 2017 में शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के तहत स्थापित।
  • तथ्यNTA के नए ऑफिस स्पेस में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया प्रेस बिल्डिंग में 55,000 स्क्वायर फीट क्षेत्र आता है।
  • पदनंदन नीलेकणी: परीक्षा प्रणाली के लिए सुधारों की सिफारिश करने के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के प्रमुख।
  • तथ्यNTA के नए परिसर में सुरक्षा और एक्सेस-कंट्रोल (access-control) प्रदान करने के लिए 39 CISF कर्मियों को तैनात किया गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के संचालन में निहित प्रणालीगत कमजोरियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और मूल्यांकन प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • संस्थागत निगरानी: गोपनीय क्षेत्रों में विषय विशेषज्ञों के लिए लाइव CCTV मॉनिटरिंग और फ्रिस्किंग प्रोटोकॉल की कमी
  • प्रशासनिक जवाबदेही: परीक्षा की अनियमितताओं और उच्च-स्तरीय मंत्री जवाबदेही के बीच संबंध
  • सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर: संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए स्टैंडर्ड ऑफिस सिक्योरिटी से पैरामिलिट्री (CISF) तैनाती की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: प्रशासनिक चूक · संस्थागत ईमानदारी · मानकीकृत परीक्षा · जवाबदेही · सुरक्षा प्रोटोकॉल

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भारत में दुर्लभ बीमारियों के लिए दवाओं के उत्पादन की बड़ी संभावनाएं

चर्चा में क्यों: यह लेख 1,004 रिपोर्ट किए गए दुर्लभ आनुवंशिक विकारों (rare genetic disorders) के समाधान के लिए भारत की ओर से 'ऑर्फन ड्रग' (orphan drug) निर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता पर प्रकाश डालता है और उच्च उपचार लागत की बाधाओं को दूर करने के लिए नीतिगत प्रोत्साहन का प्रस्ताव देता है।

भारत में 1,004 दुर्लभ आनुवंशिक विकार (genetic disorders) दर्ज किए गए हैं, जिनका वार्षिक उपचार खर्च $100,000 से अधिक है। वर्ष 1983 का 'ऑर्फन ड्रग एक्ट' (Orphan Drug Act) इन दवाओं के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स ब्रेक और मार्केट एक्सक्लूसिविटी (market exclusivity) प्रदान करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकऑर्फन ड्रग एक्ट (Orphan Drug Act): दुर्लभ बीमारियों की दवाओं के लिए टैक्स ब्रेक और मार्केट एक्सक्लूसिविटी प्रदान करने के लिए 1983 में लागू किया गया।
  • तथ्यभारत दुर्लभ बीमारियों (rare diseases) के मरीजों को 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी के साथ सहायता प्रदान करता है।
  • तथ्य2022 तक Act के लागू होने के बाद यू.एस. ने 1,122 orphan drugs को मंजूरी दी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के औषधि क्षेत्र में दुर्लभ आनुवंशिक विकारों के लिए सस्ती 'ऑर्फन दवाओं' (orphan drugs) के विकास में आने वाली संरचनात्मक और वित्तीय बाधाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • मार्केट फेल्योर: हाई R&D कॉस्ट और कम मरीजों की संख्या मजबूत सरकारी प्रोत्साहन के बिना प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को रोकती है
  • रेगुलेटरी बॉटलनैक: दुर्लभ बीमारियों के लिए क्लिनिकल ट्रायल और स्पेशलाइज्ड ड्रग्स बनाने में जटिलताएँ
  • किफायती अंतर: इलाज की भारी सालाना लागत $100,000 से अधिक होने के कारण सरकारी बीमा या सब्सिडी की ज़रूरत

मुख्य शब्द: ऑर्फन ड्रग्स · दुर्लभ बीमारियाँ · फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग · बाज़ार में विशिष्टता · क्लिनिकल ट्रायल · सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति

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महंगी दवाइयों पर भारी मुनाफा, कर्नाटक मंत्री ने केंद्र से की मांग

चर्चा में क्यों: कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि कैंसर, किडनी की बीमारियों और AIDS के लिए महंगी दवाएं खरीद मूल्य से 70 गुना तक अधिक MRP पर बेची जा रही हैं।

कर्नाटक सरकार ने डीलरों और स्टॉकिस्टों द्वारा बेची जाने वाली जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में विसंगतियों पर प्रकाश डाला है। राज्य सरकार ने मूल्य अंतर पर एक राष्ट्रीय अध्ययन और अधिग्रहण लागत (acquisition costs) तथा उचित मार्जिन के आधार पर मरीजों के लिए निर्धारित कीमतों पर एक सीमा (cap) लगाने का प्रस्ताव दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यकैंसर, किडनी की बीमारियों और AIDS के लिए महंगी दवाएं कथित तौर पर खरीद मूल्य (procurement prices) से 70 गुना तक अधिक MRP पर बेची जा रही हैं।
  • पदयू.टी. खदर कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री हैं।
  • पदजे.पी. नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जीवन रक्षक दवाओं की अत्यधिक खुदरा कीमतों के लिए उत्तरदायी औषधीय आपूर्ति श्रृंखला (pharmaceutical supply chain) की प्रणालीगत चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और सस्ती स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, CBSE को कक्षा 6 से थर्ड-लैंग्वेज में ढील देने को कहा

चर्चा में क्यों: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने CBSE को निर्देश दिया है कि वह तीसरी भाषा के मूल्यांकन में दी जाने वाली छूट को कक्षा 7 से घटाकर कक्षा 6 के छात्रों तक बढ़ा दे।

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को तीसरी भाषा सीखने वाले छात्रों पर पढ़ाई के दबाव और बुनियादी ढांचे (infrastructure) की कमी से जुड़ी चिंताओं को दूर करने का निर्देश दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस छूट का प्रभाव केवल 1.2% स्कूलों पर पड़ेगा।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • पदचीफ जस्टिस सूर्यकांत: CBSE मामले पर सुप्रीम कोर्ट बेंच के प्रेसिडिंग जज।
  • तथ्य1.2%: तीसरी भाषा (third-language) में छूट से प्रभावित होने वाले स्कूलों का प्रतिशत।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय स्कूली पाठ्यक्रम में भाषाई विविधता और शैक्षणिक दबाव के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) तृतीय भाषा सीखने वाले विद्यार्थियों के लिए समावेशी मूल्यांकन कैसे सुनिश्चित कर सकता है? चर्चा कीजिए।

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गृह मंत्रालय की कमेटी ने राज्यों से मांगा 15 साल का धर्म आधारित डेटा

चर्चा में क्यों: हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेस (HLCDC) ने राज्यों से 15 साल का धर्म-आधारित डेटा मांगा है, जिससे इस तरह का डेटा इकट्ठा करने पर संवैधानिक रोक को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

HLCDC का गठन गृह मंत्रालय द्वारा जनसांख्यिकीय रुझानों (demographic trends) का विश्लेषण करने के लिए किया गया था। इसने अनुसूचित जनजातियों के बीच जन्म/वाहन पंजीकरण, स्कूल नामांकन, संपत्ति के लेनदेन और धार्मिक परिवर्तन से संबंधित डेटा का अनुरोध किया था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाHLCDC: गृह मंत्रालय द्वारा गठित जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Demographic Changes)।
  • तथ्यHLCDC ने 15 साल की अवधि का धर्म-वार डेटा (religion-wise data) मांगा।
  • तथ्यHLCDC ने अनुसूचित जनजातियों के बीच धार्मिक धर्मांतरण पर इंटेलिजेंस असेसमेंट्स और कमीशन रिपोर्ट्स की मांग की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में धर्म-आधारित जनसांख्यिकीय डेटा के संग्रहण से जुड़ी संवैधानिक और कानूनी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

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सोशल मीडिया पर बच्चों के अकाउंट पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों द्वारा सोशल मीडिया अकाउंट रखने की वैधता पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नाबालिग कानूनी रूप से अनुबंध (Contracts) करने के लिए सक्षम नहीं होते हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 18 वर्ष की आयु की सीमा लागू करने का निर्देश दिया है।

न्यायालय ने टिप्पणी की कि नाबालिगों द्वारा किए गए अनुबंध शुरू से ही शून्य (void ab initio) होते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थासुप्रीम कोर्ट: सितंबर 2026 तक मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व में।
  • तथ्यकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मेंबरशिप के लिए 18 वर्ष की आयु की सीमा (age threshold) अपनाने का निर्देश दिया।
  • तथ्यबच्चों के लिए डिजिटल सुरक्षा से संबंधित नए नियम 2027 में लागू होने की उम्मीद है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पहुंच को विनियमित करने में कानूनी और नैतिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए, विशेष रूप से नाबालिगों की वर्तमान संविदात्मक अक्षमता (contractual incompetence) को ध्यान में रखते हुए।

  • कानूनी शून्य: मौजूदा कॉन्ट्रैक्टुअल कानून नाबालिगों द्वारा किए गए डिजिटल सर्विस एग्रीमेंट को कवर नहीं करते
  • रेगुलेटरी लैग: मौजूदा कानूनों और डिजिटल सुरक्षा के लिए 2027 के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के बीच का अंतर

मुख्य शब्द: शुरू से ही शून्य · डिजिटल सुरक्षा उपाय · कॉन्ट्रैक्टुअल अक्षमता · अल्प अधिकार · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

445 स्कूलों के लिए 5 करोड़ की 'स्पेशल एनरिचमेंट' स्कीम शुरू

चर्चा में क्यों: शिक्षा मंत्री एन. समसूद्दीन ने वायनाड में 'स्पेशल एनरिचमेंट' (Special Enrichment) कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य भौगोलिक और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना कर रहे छात्रों की सहायता करना है।

यह ₹5 करोड़ की पहल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार की 100-दिवसीय कार्ययोजना (Action Plan) का हिस्सा है। यह पहल स्कूलों की संख्या को 50 से बढ़ाकर 445 कर देती है, जिसमें विशेष रूप से आदिवासी, तटीय और प्लांटेशन क्षेत्रों को लक्षित किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनास्पेशल एनरिचमेंट (Special Enrichment): एक प्रोग्राम जो संघर्ष कर रहे छात्रों के लिए एक्सपर्ट-लेड क्लासेस, स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप और एजुकेशनल ट्रिप्स प्रदान करता है।
  • तथ्यSpecial Enrichment प्रोग्राम वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में 445 स्कूलों को कवर करता है।
  • तथ्य6,000 स्कूलों में Digital Squares स्थापित किए गए हैं।
  • योजनाARISE: AI और रोबोटिक्स शिक्षा के लिए एक नियोजित कार्यक्रम।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में भौगोलिक रूप से पृथक और हाशिए पर स्थित समुदायों के छात्रों के लिए लक्षित शैक्षिक हस्तक्षेप किस प्रकार सीखने के अंतराल को कम कर सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • भौगोलिक असमानता: आदिवासी और प्लांटेशन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर और पहुंच के अंतर को दूर करना
  • होलिस्टिक पेडागोजी: ग्रामीण स्कूली शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और स्किल डेवलपमेंट को जोड़ना
  • डिजिटल डिवाइड: ARISE प्रोग्राम और डिजिटल स्क्वायर्स के जरिए AI और रोबोटिक्स साक्षरता को बढ़ाना

मुख्य शब्द: शिक्षा में समानता · पिछड़ा वर्ग · कौशल विकास · डिजिटल साक्षरता · समग्र शिक्षा

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी

चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सरकारी अस्पतालों में नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी प्रदान करने के लिए 'थैयमान थंगा मोथिराम थिट्टम' (Thaimaaman Thanga MothiramThittam) योजना शुरू की।

यह योजना 22 जून को या उसके बाद सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले नवजात शिशुओं को एक ग्राम सोने की अंगूठी प्रदान करती है। इसे मदुरै के गवर्नमेंट राजाजी हॉस्पिटल में शुरू किया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • योजनाथैमामान थंगा मोथिराम थिट्टम (Thaimaaman Thanga Mothiram Thittam): तमिलनाडु सरकार की एक योजना जिसके तहत सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी दी जाती है।
  • तथ्यमदुरै अंडरग्राउंड ड्रेनेज प्रोजेक्ट: इसका मूल्य ₹2,000 करोड़ है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लक्षित राज्य-संचालित कल्याणकारी योजनाओं के सामाजिक समता और स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता में योगदान का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय स्थिरता: उच्च-लागत वाले प्रतीकात्मक कल्याण और आवश्यक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे व प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन
  • सामाजिक समावेश: विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच लाभों का समावेशी वितरण करके सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देना

मुख्य शब्द: सामाजिक कल्याण · मातृ स्वास्थ्य · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · समावेशी विकास · राज्य-नेतृत्व वाली पहलें

भारत में 50 मिलियन स्कूली बच्चों के पास नहीं है सैनिटेशन सुविधा

चर्चा में क्यों: WHO/UNICEF द्वारा 23 सितंबर, 2026 को जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में भारत में 50 मिलियन स्कूली बच्चे ऐसे थे जिनके पास स्वच्छता सेवाओं की सुविधा नहीं थी।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में स्वच्छता सुविधाओं के बिना पढ़ने वाले स्कूली बच्चों की संख्या में भारत सबसे ऊपर था। वैश्विक स्तर पर कुल 244 मिलियन बच्चों में से 50 मिलियन बच्चे ऐसे थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2014 में स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) शुरू होने के बाद से ऐसी सुविधाओं से वंचित स्कूलों की संख्या में 14% की कमी आई है।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्यवर्ष 2025 में भारत में 50 मिलियन स्कूली बच्चे ऐसे थे जिनके पास स्वच्छता सेवाएं (sanitation services) नहीं थीं।
  • तथ्यविश्व स्तर पर, 362 मिलियन बच्चों के पास स्कूल में स्वच्छता सेवाओं (hygiene services) की कमी थी, जिसमें भारत के 20 मिलियन बच्चे शामिल हैं।
  • तथ्यभारत में केवल 12 मिलियन बच्चों के पास बुनियादी पीने के पानी की सुविधा नहीं थी।
  • योजनास्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2014 में हुई थी।
  • संस्थाWHO और UNICEF ने 23 सितंबर, 2026 को यह रिपोर्ट प्रकाशित की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत हुई प्रगति के बावजूद, भारत में स्कूली स्वच्छता और स्वच्छता बुनियादी ढांचे में व्याप्त निरंतर ग्रामीण-शहरी असमानताओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

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कैंसर पीड़ित महिला की मौत के बाद केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

चर्चा में क्यों: केरल हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि केंद्र सरकार पेटेंट्स एक्ट, 1970 के तहत जरूरतमंद मरीजों के लिए पेटेंट दवाओं का निर्माण कर सकती है या उनके उत्पादन को गैर-व्यावसायिक दरों (non-commercial rates) पर अधिकृत कर सकती है।

केरल हाई कोर्ट ने 16 सितंबर, 2022 को रिबोसिक्लिब (Ribociclib) जैसी पेटेंट दवाओं के उत्पादन के संबंध में फैसला सुनाया। यह फैसला जीवन रक्षक दवाओं के लिए गैर-व्यावसायिक दरों की अनुमति देने हेतु पेटेंट्स एक्ट, 1970 की धारा 100 का आह्वान करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकपेटेंट्स एक्ट (Patents Act), 1970 की धारा (Section) 100: सरकार को जरूरतमंद मरीजों के लिए गैर-व्यावसायिक दरों पर पेटेंटेड दवाओं के उत्पादन को अधिकृत करने की शक्ति देती है।
  • स्थानकेरल हाई कोर्ट: वह न्यायिक संस्था जिसने Ribociclib तक किफायती पहुंच पर फैसला सुनाया।
  • तथ्यरिबोसिक्लिब (Ribociclib): कोर्ट की कार्यवाही में ब्रेस्ट कैंसर के लिए एक जीवन रक्षक दवा के रूप में उल्लेखित।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के बीच संतुलन के नैतिक और नीतिगत निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • IPR बनाम स्वास्थ्य का अधिकार: फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए पेटेंट सुरक्षा और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के संवैधानिक आदेशों के बीच टकराव
  • रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: सेक्शन 100 के तहत 'जरूरतमंद मरीजों' की पहचान करने और 'नॉन-कमर्शियल रेट्स' को परिभाषित करने के लिए एक व्यवस्थित मैकेनिज्म की जरूरत
  • मैन्युफैक्चरिंग लॉजिस्टिक्स: जटिल पेटेंटेड जीवन रक्षक दवाओं के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता स्थापित करने में चुनौतियां

मुख्य शब्द: बौद्धिक संपदा अधिकार · स्वास्थ्य का अधिकार · पेटेंट्स एक्ट 1970 · किफायती होना · जनहित याचिका

PISA 2025 रिपोर्ट: कोविड के बाद छात्रों के मैथ्स और साइंस स्कोर में भारी गिरावट

चर्चा में क्यों: PISA 2025 रिपोर्ट गणित, विज्ञान और पढ़ने के कौशल में वैश्विक स्तर पर छात्रों के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण गिरावट को दर्शाती है, विशेष रूप से COVID-19 के बाद।

प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (PISA) 2025 की रिपोर्ट 23 देशों को कवर करती है। यह दर्शाती है कि 2006 के बाद से गणित के स्कोर 501 से गिरकर 469, पढ़ने (reading) के स्कोर 495 से गिरकर 466 और विज्ञान के स्कोर 503 से गिरकर 486 हो गए हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • रिपोर्ट / सूचकांकPISA: Programme for International Student Assessment.
  • तथ्यरिपोर्ट किए गए समय में मैथमेटिक्स स्कोर 501 से गिरकर 469 हो गया।
  • तथ्यसाइंस स्कोर 503 से गिरकर 486 हो गया।
  • तथ्यप्रतिदिन 2 घंटे से अधिक स्क्रीन टाइम वाले छात्रों का विज्ञान में औसत स्कोर 482 था, जबकि डिवाइस का उपयोग न करने वाले छात्रों का औसत स्कोर 499 था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कोविड-19 महामारी और डिजिटल स्क्रीन टाइम के वैश्विक शैक्षिक परिणामों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और सीखने के नुकसान (learning losses) को कम करने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए।

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केरल हाई कोर्ट का निर्देश, POCSO कोर्ट में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करें

चर्चा में क्यों: केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि POCSO एक्ट, 2012 के तहत स्थापित विशेष अदालतें बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन करें।

जयकुमार ने मौजूदा POCSO कोर्ट में पर्याप्त सुविधाओं की कमी पर ध्यान दिलाया। कोर्ट ने यह नोट किया कि इन विशेष कोर्ट के लिए प्रेसिडिंग ऑफिसर्स (Presiding Officers), लोक अभियोजकों और कर्मचारियों के वित्तपोषण के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकPOCSO Act: प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act), 2012।
  • तथ्यPOCSO कोर्ट के प्रेसिडिंग ऑफिसर्स, पब्लिक प्रोसिक्यूटर्स और स्टाफ के फंडिग के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है।
  • संस्थाजुडिशियल एकेडमी (Judicial Academy): POCSO कोर्ट के प्रॉसिक्यूटर (prosecutors) के लिए कानून, चाइल्ड साइकोलॉजी (child psychology), व्यवहार और स्वास्थ्य को कवर करने वाले विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम विकसित करने का कार्य सौंपा गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में पोक्सो (POCSO) अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत और बुनियादी ढांचागत आवश्यकताओं का विश्लेषण कीजिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि किसी मृत यात्री से भौतिक ट्रेन टिकट की वसूली न होने के आधार पर किसी घातक दुर्घटना के लिए मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि किसी मृत यात्री से भौतिक ट्रेन टिकट की वसूली न होने के आधार पर किसी घातक दुर्घटना के लिए मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।

जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस ए.एस. चंदरकर की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने महेशभाई के माता-पिता को ₹8 लाख के मुआवजे और ब्याज के आदेश को बहाल कर दिया है। कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें मृतक का टिकट गायब होने के कारण दावे को खारिज कर दिया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यसुप्रीम कोर्ट ने 2017 में हुई एक यात्री की मृत्यु के लिए ₹8 लाख के मुआवजे और ब्याज के फैसले को बहाल कर दिया।
  • स्थानयह घटना गुजरात में हुई जहाँ एक यात्री ट्रेन से गिर गया।
  • संस्थासुप्रीम कोर्ट के फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि पिता का शपथ पत्र (sworn statement) और अस्पताल में भर्ती होने के रिकॉर्ड एक यात्री की स्थिति को मान्य कर सकते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय रेलवे के सार्वजनिक सेवा ढांचे के भीतर सामाजिक न्याय और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में न्यायिक सक्रियता के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • सबूत का मानक: औपचारिक दस्तावेज़ों और शपथ पत्र व मेडिकल रिकॉर्ड जैसे परिस्थितिजन्य सबूतों के बीच संतुलन
  • लायबिलिटी फ्रेमवर्क: यात्रियों की मौत के मामलों में रेलवे की जिम्मेदारी और भौतिक सबूतों की कमी का निर्धारण

मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · सामाजिक न्याय · सार्वजनिक दायित्व · नेक नीयत · मुआवज़ा फ्रेमवर्क

कैबिनेट की नियुक्तियों वाली समिति ने 2001 बैच के IAS अधिकारी मनदीप भंडारी को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) का अध्यक्ष नियुक्त किया है

चर्चा में क्यों: कैबिनेट की नियुक्तियों वाली समिति ने 2001 बैच के IAS अधिकारी मनदीप भंडारी को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) का अध्यक्ष नियुक्त किया है।

मनदीप भंडारी AGMUT कैडर की 2001 बैच की एक IAS अधिकारी हैं, जिनके पास MBBS की डिग्री है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत संयुक्त सचिव (ड्रग्स) के रूप में कार्य किया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • पदमंदीप भंडारी को CBSE का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।
  • तथ्यमंदीप भंडारी 2001 बैच की एक IAS अधिकारी हैं।
  • तथ्यमंदीप भंडारी AGMUT कैडर से संबंधित हैं।
  • संस्थाCBSE के चेयरपर्सन की नियुक्ति के लिए इसे कैबिनेट की अपॉइंटमेंट्स कमेटी (Appointments Committee of the Cabinet) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में माध्यमिक शिक्षा के समान मानक सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) जैसे राष्ट्रीय शैक्षिक बोर्डों के शासन में प्रशासनिक विशेषज्ञता की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

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दिल्ली कैबिनेट ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वरोजगार प्रदान करने के लिए 1,300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो पेश करने हेतु DURGA योजना को मंजूरी दी

चर्चा में क्यों: दिल्ली कैबिनेट ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वरोजगार प्रदान करने के लिए 1,300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो पेश करने हेतु DURGA योजना को मंजूरी दी।

DURGA योजना के तहत दिल्ली के 13 राजस्व जिलों में 1,300 पिंक ई-ऑटो आवंटित किए गए हैं। इसके पहले चरण में प्रत्येक जिले में महिलाओं के लिए 90 और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए 10 ई-ऑटो का लक्ष्य रखा गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनाDURGA स्कीम: महिलाओं और ट्रांसजेंडर ड्राइवरों के लिए पिंक e-autos हेतु दिल्ली सरकार की पहल।
  • तथ्यप्रथम चरण का आवंटन: प्रत्येक रेवेन्यू डिस्ट्रिक्ट (revenue district) के लिए महिलाओं हेतु 90 e-autos और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए 10 e-autos।
  • तथ्यDURGA स्कीम के तहत स्वीकृत कुल e-autos: 1,300।
  • स्थानदिल्ली: यह स्कीम सभी 13 रेवेन्यू डिस्ट्रिक्ट्स (revenue districts) को कवर करती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: हाशिए पर स्थित लिंगों (marginalized genders) के लिए लक्षित स्वरोजगार योजनाओं किस प्रकार महानगरीय शहरों में समावेशी शहरी गतिशीलता और आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान दे सकती हैं, चर्चा कीजिए।

  • जेंडर-विशिष्ट मोबिलिटी: महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए सुरक्षा चिंताओं और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को संबोधित करना
  • आर्थिक समावेश: सब्सिडी वाली इलेक्ट्रिक वाहन ओनरशिप के जरिए पिछड़े समूहों के लिए औपचारिक रोजगार के अंतर को कम करना

मुख्य शब्द: समावेशी विकास · लास्ट-माइल कनेक्टिविटी · जेंडर-न्यूट्रल मोबिलिटी · स्व-रोज़गार · शहरी परिवहन

शिक्षाविदों ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को पत्र लिखकर 'यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस (एडमिनिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' का विरोध किया है

चर्चा में क्यों: शिक्षाविदों ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को पत्र लिखकर 'यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस (एडमिनिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' का विरोध किया है। यह बिल विश्वविद्यालयों के बीच कर्मचारियों के तबादले (Staff Transfers) की अनुमति देता है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा ने 10 सितंबर को 'यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेज (एडमिनिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' पारित किया। इस विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण को केंद्रीकृत करना और विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीच कर्मचारियों के स्थानांतरण की अनुमति देना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकयूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस (एडमिनिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026।
  • स्थानपश्चिम बंगाल।
  • तथ्ययह बिल इंटर-यूनिवर्सिटी (inter-university) स्टाफ ट्रांसफर की अनुमति देता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में विश्वविद्यालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण के केंद्रीकरण के शैक्षणिक स्वायत्तता और अनुसंधान की गुणवत्ता पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

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केरल हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण (PWDV) अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करने में देरी

चर्चा में क्यों: केरल हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण (PWDV) अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करने में देरी, आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।

केरल हाई कोर्ट ने एक पति और सास द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने त्रिशूर के ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सामाजिक परिस्थितियाँ घरेलू हिंसा की तत्काल रिपोर्टिंग में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकप्रोटेक्शन ऑफ विमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट (PWDV Act) घरेलू हिंसा के खिलाफ महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
  • स्थानयह कार्यवाही केरल के त्रिसूर में स्थित ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट (Judicial First Class Magistrate Court) में लंबित है।
  • तथ्यकोर्ट ने फैसला दिया कि सबूतों के मूल्यांकन (assessment) के लिए देरी प्रासंगिक है, लेकिन यह स्वतः ही यह साबित नहीं करती कि आरोप झूठे हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (PWDV Act) की न्यायिक व्याख्याओं ने घरेलू हिंसा की पीड़ितों द्वारा सामना की जाने वाली सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं और समयबद्ध रिपोर्टिंग की प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं के बीच संतुलन को किस प्रकार स्थापित किया है, चर्चा कीजिए।

  • सबूत की बाधा: हाशिए पर रहने वाले पीड़ितों के लिए तुरंत रिपोर्टिंग की सिस्टमिक बाधाओं के सामने 'लेचेस' सिद्धांत का संतुलन
  • न्यायिक व्याख्या: यह सुनिश्चित करना कि प्रक्रियात्मक तकनीकी बातें महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के मुख्य उद्देश्य को कमज़ोर न करें

मुख्य शब्द: न्यायिक व्याख्या · घरेलू हिंसा · प्रक्रियात्मक तकनीकीता · ठोस न्याय · सामाजिक बाधाएं

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को एक लिव-इन रिलेशनशिप (live-in relationship) में रह रहे अंतर-धार्मिक समलैंगिक जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है

चर्चा में क्यों: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को एक लिव-इन रिलेशनशिप (live-in relationship) में रह रहे अंतर-धार्मिक समलैंगिक जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वयस्कों को बिना किसी हस्तक्षेप के एक साथ रहने का अधिकार है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने 14 सितंबर को यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि दंपति को परिवार के सदस्यों या अन्य लोगों से कोई खतरा प्राप्त होता है, तो उन्हें तत्काल पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यकोर्ट का आदेश विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप (live-in relationship) में रह रहे एक इंटर-फेथ (inter-faith) समलैंगिक जोड़े को कवर करता है।
  • तथ्यकोर्ट ने सामाजिक आपत्तियों के बावजूद मौलिक अधिकारों के तहत सुरक्षा पर जोर दिया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में व्यक्तिगत निजता के मौलिक अधिकारों और लिव-इन संबंधों से संबंधित सामाजिक मानदंडों के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।

  • न्यायिक व्याख्या: पारंपरिक सामाजिक और पारिवारिक ढांचों के मुकाबले आर्टिकल 21 के प्राइवेसी अधिकारों में संतुलन
  • कानून प्रवर्तन की भूमिका: प्राइवेट को-हबिटेशन और सार्वजनिक व्यवस्था की चिंताओं के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: मौलिक अधिकार · निजता का अधिकार · लिव-इन रिलेशनशिप · न्यायिक सक्रियता · सामाजिक मानदंड

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मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐसे जातिगत हिंदू (Caste Hindu) को टर्मिनल बेनिफिट्स (terminal benefits) जारी करने का आदेश देने से इनकार कर दिया

चर्चा में क्यों: मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐसे जातिगत हिंदू (Caste Hindu) को टर्मिनल बेनिफिट्स (terminal benefits) जारी करने का आदेश देने से इनकार कर दिया, जिसने चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट में आरक्षित पद प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी से अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) का प्रमाण पत्र हासिल किया था।

मद्रास हाई कोर्ट ने ए. जेगननाथन द्वारा दायर रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। जेगननाथन ने 1982 में चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित पद पर जॉइन किया था। कोर्ट ने 2021 की राज्य स्तरीय जांच समिति (State Level Scrutiny Committee) के उस निष्कर्ष को बरकरार रखा, जिसमें पाया गया था कि उम्मीदवार ने धोखाधड़ी से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थास्टेट लेवल स्क्रूटिनी कमेटी (State Level Scrutiny Committee): यह बॉडी आरक्षित श्रेणियों (reserved categories) के लिए कम्युनिटी सर्टिफिकेट की वैधता की जांच करने के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यए. जेगननाथन ने 2013 में सुपरएनुएशन (superannuation) से पहले एक रिजर्व्ड पोस्ट में 32 साल तक सेवा दी।
  • स्थानचेन्नई पोर्ट ट्रस्ट (CPT): वह संगठन जहाँ धोखाधड़ी से नियुक्ति हुई थी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: आरक्षण प्रणाली की अखंडता सुनिश्चित करने और अपात्र उम्मीदवारों द्वारा लाभ के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्रों का विश्लेषण कीजिए।

  • वेरिफिकेशन गैप: भर्ती के समय जाति प्रमाण पत्रों की मजबूत, डिजिटाइज्ड और मल्टी-लेयर्ड जांच की जरूरत
  • सामाजिक समानता: सार्वजनिक रोजगार में वास्तविक रूप से पिछड़े अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व पर फर्जी दावों का प्रभाव
  • न्यायिक निगरानी: आरक्षण की अखंडता के सिद्धांतों के मुकाबले लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों को संतुलित करने में कोर्ट की भूमिका

मुख्य शब्द: आरक्षण की अखंडता · सामाजिक न्याय · धोखाधड़ी वाला सर्टिफिकेट · सार्वजनिक रोजगार · संस्थागत जवाबदेही

GS2सामाजिक न्याय › स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्यप्रीलिम्स + मेन्स

डॉ

चर्चा में क्यों: डॉ. मोहन डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर के चेयरमैन वी. मोहन के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में, कम और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) के लिए महंगी डायबिटीज दवाओं को किफायती बनाने हेतु भारत के मॉडल की जांच की गई।

'Diabetes Care' में 19 सितंबर, 2026 को प्रकाशित यह अध्ययन रेखांकित करता है कि दुनिया भर में मधुमेह (diabetes) से पीड़ित 589 मिलियन वयस्कों में से 80% निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में रहते हैं। यह अध्ययन उच्च लागत के बावजूद GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists), SGLT2i और एनालॉग इंसुलिन जैसी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को सुलभ बनाने पर केंद्रित है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकGLP-1 receptor agonists और SGLT2i को डायबिटीज के लिए आधुनिक थेरेपी (therapies) के रूप में पहचाना गया है।
  • तथ्यदुनिया भर में डायबिटीज वाले 589 मिलियन वयस्कों में से 80% कम और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में रहते हैं।
  • पदवी. मोहन, चेन्नई स्थित डॉ. मोहन डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर (Dr. Mohan’s Diabetes Specialities Centre) के चेयरमैन हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत द्वारा मधुमेह के किफायती उपचार के लिए अपनाए गए फार्मास्युटिकल मॉडल के विश्लेषण कीजिए और चर्चा कीजिए कि यह मॉडल निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता के लिए एक आधारभूत रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) के रूप में कैसे कार्य कर सकता है।

GS2सामाजिक न्याय › कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)प्रीलिम्स + मेन्स

बिहार सरकार ने बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने और रिपोर्ट दर्ज करने के लिए एक सुरक्षित स्थान प्रदान करने हेतु 2 अक्टूबर तक सभी 1,377 पुलिस स्टेशनों में चाइल्ड हेल्प डेस्क (Child Help Desks) स्थापित करने का निर्देश दिया है

चर्चा में क्यों: बिहार सरकार ने बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने और रिपोर्ट दर्ज करने के लिए एक सुरक्षित स्थान प्रदान करने हेतु 2 अक्टूबर तक सभी 1,377 पुलिस स्टेशनों में चाइल्ड हेल्प डेस्क (Child Help Desks) स्थापित करने का निर्देश दिया है।

यह पहल बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 8(5) के तहत अनिवार्य है। प्रत्येक डेस्क का प्रबंधन एक चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर (CWPO) द्वारा किया जाएगा, जिसमें लड़कियों से जुड़े मुद्दों को संभालने के लिए विशेष रूप से महिला कर्मियों को तैनात किया जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • अधिनियम / विधेयकबिहार पुलिस एक्ट, 2007: पुलिस कार्यों को नियंत्रित करने वाला राज्य विधान और चाइल्ड हेल्प डेस्क (Child Help Desks) के लिए जनादेश।
  • तथ्यबिहार में कुल 1,377 पुलिस स्टेशनों में 2 अक्टूबर तक चाइल्ड हेल्प डेस्क (Child Help Desk) होना आवश्यक है।
  • पदचाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर (CWPO): हेल्प डेस्क चलाने के लिए जिम्मेदार नामित अधिकारी।
  • तथ्य5 अक्टूबर: DSPs के लिए डेस्क एस्टैब्लिशमेंट (desk establishment) के अनुपालन की निगरानी करने और रिकॉर्ड बनाए रखने की डेडलाइन।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रिपोर्टिंग तंत्र में सुधार लाने में विशेष पुलिस डेस्क की महत्ता पर चर्चा कीजिए।

NCERT ने बनाई 11वीं और 12वीं के लिए इकोनॉमिक्स और इंग्लिश की किताबें तैयार करने वाली कमेटियां

चर्चा में क्यों: NCERT ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों (Indian Knowledge Systems) को शामिल करने के लिए कक्षा 11 और 12 के लिए अर्थशास्त्र और अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकें विकसित करने हेतु दो समितियां गठित की हैं।

NCERT ने सीनियर सेकेंडरी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में संशोधन के लिए 8 सितंबर, 2026 को समितियां गठित कीं। इन समितियों में साकेत बहगुणा और संजीव सान्याल जैसे सदस्य शामिल हैं, और इनके प्रकाशन की समय-सीमा 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत निर्धारित की गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यकक्षा 11 और 12 की पाठ्यपुस्तकों के लिए 8 सितंबर, 2026 को गठित समितियाँ।
  • तथ्यरिव्यू और पब्लिकेशन के लिए डेडलाइन्स क्रमशः 30 नवंबर, 2026, 30 सितंबर, 2027 और 28 फरवरी, 2027 तय की गई हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राष्ट्रीय स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) को एकीकृत करने के महत्व और छात्रों के समग्र विकास पर इसके संभावित निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

GS2सामाजिक न्याय › स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्यप्रीलिम्स

त्रिपुरा में 19 अवैध रिहैब सेंटर बंद होने की कगार पर, हिंसा के बाद एक्शन

चर्चा में क्यों: त्रिपुरा सरकार ने अगरतला स्थित एक केंद्र में हिंसा की खबरों के बाद 19 अवैध नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्रों (mental health rehabilitation centers) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (State Mental Health Authority) ने त्रिपुरा में बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों से संबंधित कथित नियमों के उल्लंघन के कारण 19 अनरजिस्टर्ड (unregistered) केंद्रों की पहचान की है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (Mental Health Care Act) के तहत, संचालकों को एक सप्ताह के भीतर कारण बताओ नोटिस (show-cause notices) का जवाब देना अनिवार्य है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थास्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी (State Mental Health Authority): त्रिपुरा में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी के लिए जिम्मेदार संस्था।
  • अधिनियम / विधेयकमेंटल हेल्थ केयर एक्ट (Mental Health Care Act): यह कानून रिहैबिलिटेशन सेंटर्स (rehabilitation centers) के संचालन और मानकों को नियंत्रित करता है।
  • तथ्यत्रिपुरा में 19 अवैध नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्र (mental health rehabilitation centers) पहचाने गए।
  • स्थानअगतला: वह केंद्र जहाँ हाल ही में हिंसा हुई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में निजी मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी में आने वाली विनियामक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

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