पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी करेंट अफेयर्स — यूपीएससी
यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 509 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: प्रजातियां, संरक्षित क्षेत्र एवं आर्द्रभूमि (201) · जलवायु परिवर्तन एवं अंतर्राष्ट्रीय समझौते (117) · प्रदूषण (वायु, जल, प्लास्टिक) (93) · जैव विविधता एवं संरक्षण (78) · पर्यावरण कानून, EIA एवं संस्थाएं (20)
चर्चा में क्यों: केरल उच्च न्यायालय ने कुज़िकंडम क्रीक की सफाई के लिए केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) द्वारा प्रस्तावित अगस्त 2027 की समय-सीमा को खारिज कर दिया है और इसे 31 दिसंबर, 2026 तक पूर्ण करने की मांग की है।
केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने PCB को एलोर स्थित कुज़िकंडम क्रीक के लिए अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (effluent treatment plant) सहित सुधारात्मक कार्य पूर्ण करने का आदेश दिया है। PCB ने अनुरोधित विलंब के कारण के रूप में ₹16 करोड़ की बजट की कमी का हवाला दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानकुझिकंडम क्रीक (Kuzhikandam Creek) केरल के एलूर (Eloor) में स्थित है।
संस्थाKerala State Pollution Control Board (PCB) पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य-स्तरीय नियामक निकाय है।
तथ्यन्यायालय ने उपचारात्मक परियोजना (remediation project) के लिए 31 दिसंबर, 2026 की पूर्णता समय-सीमा निर्धारित की।
तथ्यPCB ने क्रीक सफाई परियोजना के लिए ₹16 करोड़ की बजट कमी की रिपोर्ट दी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एलोर जैसे औद्योगिक समूहों में पर्यावरणीय उपचार परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली संस्थागत और वित्तीय बाधाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: जुलाई 2026 में मिट्टागनाहल्ली लैंडफिल से निकले लीचेट (Leachate) ने श्रीनिवासपुरा झील को दूषित कर दिया, जिससे पशुओं की मृत्यु हुई और झील के पुनरुद्धार के प्रयासों में बाधा उत्पन्न हुई।
बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) द्वारा संचालित मिट्टागन्हाल्ली लैंडफिल में 287 करोड़ लीटर लीचेट (अपशिष्ट जल) का संचय हो गया है। BSWML के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) करी गौड़ा ने ₹475 करोड़ की एक उपचार इकाई (ट्रीटमेंट प्लांट) की घोषणा की है, जिसे सितंबर 2026 तक कार्यात्मक बनाया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानश्रीनिवासपुरा झील (बैयाप्पनहल्ली झील) कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित है।
तथ्यजुलाई 2026 तक, मिट्टागनाहल्ली लैंडफिल में 287 करोड़ लीटर लीचेट (leachate) जमा हो गया है।
संस्थाBengaluru Solid Waste Management Limited (BSWML) वह संस्था है जो Mittaganahalli लैंडफिल के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
तथ्य₹475 करोड़ के लीचेट उपचार संयंत्र (leachate treatment plant) को सितंबर 2026 तक पूरा करने की योजना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बेंगलुरु जैसे तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते शहरों में अनुपयुक्त लैंडफिल प्रबंधन से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: वैज्ञानिक पश्चिम अंटार्कटिका में थ्वेट्स ग्लेशियर को पिघलने से बचाने के लिए 'सीबेड कर्टन प्रोजेक्ट' का एक भू-अभियांत्रिकी (geo-engineering) हस्तक्षेप के रूप में मूल्यांकन कर रहे हैं।
सीबेड कर्टन परियोजना के अंतर्गत गर्म समुद्री धाराओं को मोड़ने के लिए 80 किमी लंबी और 150 मीटर ऊंची एक जलमग्न बाधा (अंडरवाटर बैरियर) का प्रस्ताव है। एक दक्षिण कोरियाई अभियान द्वारा जनवरी और मार्च 2026 के मध्य समुद्री धाराओं के व्यवहार पर डेटा एकत्र करने हेतु समुद्री मूरिंग्स (ocean moorings) स्थापित किए गए।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
स्थानथ्वेट्स ग्लेशियर (Thwaites Glacier): यह पश्चिम अंटार्कटिका में स्थित है, जिसे अक्सर 'डूज़मडे ग्लेशियर' (Doomsday Glacier) के रूप में संदर्भित किया जाता है।
तथ्यसीबेड कर्टन प्रोजेक्ट (Seabed Curtain Project): प्रस्तावित अवरोध (barrier) के आयाम 80 किमी की लंबाई और 150 मीटर तक की ऊंचाई हैं।
तथ्यपरियोजना लागत: अनुमानित US $40 बिलियन और $80 बिलियन के बीच।
तथ्यसमयरेखा: जनवरी और मार्च 2026 के बीच समुद्री मूरिंग्स (moorings) से डेटा संग्रह किया जाएगा; Svalbard fjord परीक्षणों के परिणाम सितंबर 2026 तक अपेक्षित हैं।
विज्ञान-तकनीकGeo-engineering: इस परियोजना का उद्देश्य गर्म जल धाराओं को भौतिक रूप से बाधित करके समुद्र के जलस्तर में होने वाली वृद्धि को कम करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: समुद्र के बढ़ते जलस्तर की समस्या के समाधान हेतु 'सीबेड कर्टन प्रोजेक्ट' (Seabed Curtain Project) जैसे बड़े पैमाने पर भू-अभियांत्रिकी (geo-engineering) हस्तक्षेपों की व्यवहार्यता और उनके पारिस्थितिक जोखिमों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: 'नेचर' (Nature) में प्रकाशित एक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि मानव-जनित समुद्र के जलस्तर में वृद्धि के कारण 1900 के बाद से तटीय क्षेत्रों में समुद्र के जलस्तर की चरम स्थितियों की आवृत्ति चार गुना बढ़ गई है, जिससे बाढ़ का जोखिम भी बढ़ गया है।
इस अध्ययन में एक शताब्दी से अधिक के 'टाइड गेज' (tide gauge) आंकड़ों और जलवायु मॉडल सिमुलेशन का विश्लेषण किया गया है। इसमें पाया गया कि 1960 के दशक के बाद से मानव-जनित ताप वैश्विक स्तर पर बाढ़ के बढ़ते जोखिम का प्राथमिक कारक बन गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्य1900 के बाद से तटीय समुद्र-स्तर के चरम (extremes) की आवृत्ति चार गुना बढ़ गई है।
तथ्य1960 के दशक से मानव-प्रेरित वार्मिंग (Human-induced warming) बाढ़ के बढ़ते जोखिम के लिए प्राथमिक कारक बन गई है।
विज्ञान-तकनीकबाढ़ की आवृत्ति में बदलाव की पहचान करने के लिए Tide gauge डेटा और जलवायु मॉडल सिमुलेशन का उपयोग किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मानव-जनित समुद्र के जलस्तर में वृद्धि किस प्रकार भारत के तटीय बुनियादी ढांचे और संवेदनशील तटीय आबादी की सामाजिक-आर्थिक स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न करती है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (NCF) और नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी (NBA) ने शैक्षणिक संस्थानों में वनस्पतियों और जीवों के दस्तावेजीकरण हेतु 'कैंपस बायोडायवर्सिटी रजिस्टर' बनाने के लिए एक परियोजना शुरू की है।
इस पहल का उद्देश्य जून 2027 तक दस्तावेजीकरण कार्य पूर्ण करना है, जिसके अंतर्गत पंजीकरण चरण नवंबर 2026 में समाप्त हो जाएगा। यह पहल 'पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर्स' (PBRs) की संरचना को प्रतिबिंबित करनेके लिए iNaturalist और eBird जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
संस्थाNational Biodiversity Authority (NBA): पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय।
तथ्यकैंपस जैव विविधता डेटा के पंजीकरण की अंतिम तिथि: नवंबर 2026।
तथ्यअंतिम दस्तावेजीकरण पूर्ण करने का लक्ष्य: जून 2027।
विज्ञान-तकनीकiNaturalist और eBird: जैव विविधता की निगरानी और प्रजातियों की पहचान के लिए उपयोग किए जाने वाले Citizen science प्लेटफॉर्म।
संस्थापीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR): सामुदायिक स्तर पर स्थानीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण के लिए एक उपकरण।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत भारत के संरक्षण लक्ष्यों को सुदृढ़ करने में समुदाय-आधारित जैव विविधता दस्तावेजीकरण, जैसे कि 'कैंपस जैव विविधता रजिस्टर', किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: UN जलवायु परिवर्तन कार्यकारी सचिव साइमन स्टिल ने भारत के डीकार्बोनाइजेशन और विद्युतीकरण के प्रयासों की सराहना की, साथ ही ग्रिड स्थिरता और वित्तपोषण को प्रमुख बाधाओं के रूप में रेखांकित किया।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव, साइमन स्टिल ने 21 जुलाई, 2026 को भारतीय मंत्रियों और व्यापारिक नेताओं के साथ एक बैठक की। भारत का लक्ष्य 2035 तक वैश्विक ऊर्जा का 35% हिस्सा विद्युत से प्राप्त करना है, जिसके अंतर्गत भारत ने वर्ष 2025 में जीवाश्म ईंधन की खरीद में 18 बिलियन डॉलर की बचत की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यभारत का लक्ष्य: 2035 तक वैश्विक ऊर्जा का 35% हिस्सा बिजली से प्राप्त करना।
तथ्यभारत ने 2025 में जीवाश्म ईंधन की खरीद में $18 बिलियन की बचत की।
पदसाइमन स्टिल: UN Climate Change के कार्यकारी सचिव।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रिड स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने में आने वाली तकनीकी और वित्तीय चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: वर्ष 2025 में लद्दाख में सामान्य से 342% अधिक मानसूनी वर्षा दर्ज की गई, जो उच्च-अक्षांश वाले क्षेत्रों में नमी वहन करने की क्षमता पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को रेखांकित करती है।
वर्ष 2025 में, लद्दाख में सामान्य से 342% अधिक मानसूनी वर्षा दर्ज की गई, जिसमें अगस्त माह में रिकॉर्ड 80.2 mm वर्षा दर्ज हुई। वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण वायुमंडल की नमी धारण करने की क्षमता में वृद्धि होने के परिणामस्वरूप, इस क्षेत्र को वर्ष 2021 से लगातार पांच वर्षों तक सामान्य से अधिक वर्षा का सामना करना पड़ा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यवर्ष 2025 में लद्दाख में सामान्य से 342% अधिक मानसून वर्षा दर्ज की गई।
तथ्यअगस्त 2025 में लद्दाख में 80.2 mm की रिकॉर्ड वर्षा दर्ज की गई।
विज्ञान-तकनीकगर्म हवा अधिक नमी धारण करती है, जिससे हिमालय के ऊपर वायु द्रव्यमानों की नमी वहन करने की क्षमता बढ़ जाती है।
स्थानलद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में एक उच्च-ऊंचाई वाला ठंडा मरुस्थल क्षेत्र है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लद्दाख जैसे उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ग्लोबल वार्मिंग किस प्रकार वर्षा के स्वरूप को परिवर्तित कर रही है और इसके बुनियादी ढांचे तथा पारिस्थितिक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित अरावली समिति ने पर्यावरणीय और औद्योगिक दृष्टिकोणों के बीच संतुलन सुनिश्चित करने हेतु अरावली पहाड़ी श्रृंखला के संबंध में केंद्र की रिपोर्ट पर हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।
इस समिति का गठन 25 मई, 2026 को किया गया था और इसका नेतृत्व भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की कंचन देवी कर रही हैं। इस समिति को अरावली पर्वतमाला पर केंद्र की रिपोर्ट की समीक्षा के पश्चात 31 अगस्त, 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाICFRE: Indian Council for Forestry Research and Education, वानिकी अनुसंधान और प्रबंधन से संबंधित एक निकाय।
स्थानअरावली पर्वतमाला: उत्तर और पश्चिमी भारत में स्थित एक महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला, जो हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में विस्तृत है।
तथ्यसमिति की अंतिम रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा 31 अगस्त, 2026 है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अरावली क्षेत्र में औद्योगिक विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के मध्य अंतर्द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए। पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के सतत प्रबंधन को सुनिश्चित करने में न्यायिक निगरानी किस प्रकार भूमिका निभा सकती है? चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने शहरी हरित क्षेत्र को बढ़ाने और समुदाय-आधारित वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 64,000 पौधे लगानेके लिए 'बेंगलुरु हसीरूरू' पहल शुरू की है।
इस पहल के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर 64,000 पौधे रोपित किए जाएंगे और 40,000 पौधे जनता में वितरित किए जाएंगे। अगस्त 2024 से शुरू होने वाली चार वर्ष की अवधि के लिए रखरखाव हेतु ₹9.64 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यबेंगलुरु हसीरोरू: बेंगलुरु के सार्वजनिक स्थानों में 64,000 पौधे लगाने की पहल।
तथ्यबजट: अगस्त 2024 से शुरू होने वाली चार साल की अवधि के लिए रखरखाव हेतु ₹9.64 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
योजनानिजी-सार्वजनिक-वृक्षारोपण कार्यक्रम (Private-Public-Planting Programme): एक ऐसा मॉडल जो रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (Resident Welfare Associations) को वृक्षारोपण अभियानों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति देता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बेंगलुरु जैसे तेजी से विस्तारित होते महानगरों में 'अर्बन हीट आइलैंड' (शहरी ताप द्वीप) प्रभाव को कम करने और वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में समुदाय-आधारित शहरी वनीकरण के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता में सुधार हेतु दिल्ली-NCR क्षेत्र में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों एवं बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए केंद्र की PARIVARTAN योजना को स्वीकृति प्रदान की है।
PARIVARTAN योजना का मुख्य उद्देश्य BS-IV या उससे पुराने वाहनों को BS-VI मानकों के अनुरूप या इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रतिस्थापित करना है। यह योजना लगभग 207,000 वाहन स्वामियों को कर छूट, ब्याज उपदान, छूट और ईंधन वाउचर सहित विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाPARIVARTAN: दिल्ली सरकार द्वारा अनुमोदित एक केंद्रीय योजना, जिसका उद्देश्य NCR में पुराने ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है।
तथ्ययह योजना वाहन प्रतिस्थापन के लिए लगभग 207,000 वाहन स्वामियों को लक्षित करती है।
तथ्यप्रतिस्थापन के लिए लक्षित वाहनों में BS-IV मानकों वाले या उससे पुराने वाहन शामिल हैं।
तथ्यप्रोत्साहन में कर छूट, ब्याज में छूट (interest subventions), छूट और ईंधन वाउचर शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शहरी वायु प्रदूषण को कम करने में वाहन स्क्रैपेज योजनाओं की प्रभावशीलता का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों द्वारा 'चिपको आंदोलन' के पुनरुद्धार के पश्चात, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश-भानियावाला परियोजना हेतु 3,000 वृक्षों की कटाई पर रोक लगा दी है।
यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रबंधित 743 करोड़ रुपये की लागत वाली एक चार-लेन वाली सड़क है। शिवालिक वनों को होने वाली पारिस्थितिक क्षति से संबंधित चिंताओं के समाधान हेतु इस परियोजना को स्थगित किया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानशिवालिक श्रेणी: बाहरी हिमालय की एक पहाड़ी श्रृंखला, जो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में स्थित है।
संस्थाNHAI: National Highways Authority of India, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है।
तथ्यऋषिकेश-भानियावाला चार-लेन परियोजना की परियोजना लागत: Rs 743 करोड़।
पर्यावरणचिपको आंदोलन: 1970 के दशक का एक वन संरक्षण आंदोलन, जिसमें ग्रामीणों ने पेड़ों की कटाई रोकने के लिए उन्हें गले लगा लिया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हिमालयी क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे के विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के मध्य अंतर्निहित संघर्ष का विश्लेषण कीजिए। पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सतत विकास कैसे प्राप्त किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: WELL Labs ने प्रायद्वीपीय भारत में मीठे पानी की झीलों के पुनरुद्धार हेतु एक व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए 20 जुलाई, 2026 को 'Framework for Lake Rejuvenation' लॉन्च किया।
यह ढांचा पांच-चरणीय प्रक्रिया का अनुसरण करता है: निदान, अभिकल्पना, कार्यान्वयन, संचालन और निगरानी। यह विशेष रूप से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में छह मीटर तक गहरी मीठे पानी की झीलों को लक्षित करता है, जिसमें औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित झीलों को शामिल नहीं किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाWELL Labs: वह संगठन जो Lake Rejuvenation Framework को लॉन्च करने के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यगहराई सीमा: यह ढांचा 6 मीटर तक गहरी मीठे पानी की झीलों पर लागू होता है।
स्थानभौगोलिक क्षेत्र: प्रायद्वीपीय भारत (शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्र)।
तथ्यअपवर्जन मानदंड: औद्योगिक प्रदूषण वाले झीलों को इस विशिष्ट ढांचे से बाहर रखा गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तटीय भारत में शहरी जल संकट और पारिस्थितिक क्षरण की समस्याओं के समाधान में समुदाय-आधारित झील पुनरुद्धार के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: गुजरात वन विभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और मांसाहारी जीवों के लिए शिकार के आधार को सुदृढ़ करने हेतु सूरत में 50 चित्तीदार हिरणों का स्थानांतरण किया है।
यह स्थानांतरण मई और जून 2026 के मध्य तीन चरणों में संपन्न हुआ। हिरणों को सासन गिर वन्यजीव प्रभाग से सूरत जिले के मांडवी वन क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत अस्तित्व सुनिश्चित करने हेतु आवास मूल्यांकन और जल बिंदु विकास की प्रक्रिया सम्मिलित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानससान गिर वन्यजीव मंडल: गुजरात में स्थित, एशियाई शेरों के लिए प्रसिद्ध।
तथ्यSurat के Mandvi Forest Range में 50 spotted deer को translocate किया गया।
पर्यावरणस्पॉटेड डियर (Axis axis) भारतीय उपमहाद्वीप के मूल निवासी हैं और बड़े मांसाहारी जीवों के लिए प्रमुख शिकार हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन हेतु एक रणनीति के रूप में वन्यजीवों के स्थानांतरण (translocation) के पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: IIT खड़गपुर के एक अध्ययन से यह तथ्य सामने आया है कि पिछले दो दशकों में जम्मू और कश्मीर के उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों के तापमान में 1°सी. की वृद्धि हुई है, जो ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और जल संकट के बढ़ते जोखिम को रेखांकित करता है।
शोधकर्ताओं ने जम्मू और कश्मीर में 'ऊंचाई-निर्भर तापन' (Elevation-Dependent Warming) की पहचानकरने के लिए 44 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि रात्रि के न्यूनतम तापमान में वृद्धि, दिन के अधिकतम तापमान की तुलना में अधिक तीव्र रही। इसके विपरीत, सिंचाई और हिम आच्छादन के अभाव के कारण जम्मू के मैदानी क्षेत्रों में मामूली शीतलन दर्ज किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकस्नो-अल्बेडो फीडबैक (Snow-albedo feedback): एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें पिघलती बर्फ गहरे रंग की सतहों को उजागर करती है, जिससे ऊष्मा अवशोषण बढ़ जाता है और पिघलने की गति तेज हो जाती है।
तथ्यदो दशकों की अवधि में J&K के उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों का तापमान लगभग 1°सी. बढ़ गया है।
स्थानजम्मू और कश्मीर: यह क्षेत्र Elevation-Dependent Warming (EDW) का अनुभव कर रहा है।
विज्ञान-तकनीकElevation-Dependent Warming (EDW): एक ऐसी घटना जहाँ उच्च अक्षांशों (altitudes) पर निचले क्षेत्रों की तुलना में तीव्र तापन दर (warming rates) अनुभव की जाती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हिमालयी क्षेत्र में हिम-अल्बेडो फीडबैक (snow-albedo feedback) तंत्र किस प्रकार उत्तर भारत की जल सुरक्षा और पारिस्थितिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा उत्पन्न करता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से पारिस्थितिक संरक्षण सुनिश्चित करनेके उद्देश्य से पल्लिकरनई रामसर स्थल के निकट निर्माण कार्य को रोकने का आदेश दिया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की दक्षिणी पीठ ने सितंबर 2025 में यह आदेश जारी किया। चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CMDA) इससे सर्वाधिक प्रभावित होने वाली प्राथमिक संस्था है, और यह आदेश पेरुमबक्कम एवं वेलाचेरी में होने वाले विकास कार्यों को प्रभावित करता है। तमिलनाडु राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण (TNSWA) राज्य-स्तरीय निकाय है जो आर्द्रभूमि की स्थिति की निगरानी करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNational Green Tribunal (NGT): पर्यावरणीय विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए एक विशिष्ट निकाय।
स्थानपल्लिकरनई मार्शलैंड: चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित एक Ramsar साइट।
तथ्यRamsar स्थल के 1-kilometre त्रिज्या के भीतर निर्माण कार्य पर रोक लागू होती है।
संस्थातमिलनाडु राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण (TNSWA): आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए उत्तरदायी राज्य निकाय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते शहरों में शहरी बुनियादी ढांचे के विस्तार और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील रामसर स्थलों के संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: जिला कलेक्टर ए. सिरी और नगर निगम आयुक्त चल्ला ओबुलुसु ने बड़ी संस्थाओं के लिए अपशिष्ट प्रबंधन को औपचारिक रूप देने हेतु 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026' के अंतर्गत 'बल्क वेस्ट जनरेटर' (Bulk Waste Generator) पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की।
यह पहल उन संस्थाओं के लिए अनिवार्य करती है जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं, कि वे CPCB पोर्टल पर 'बल्क वेस्ट जेनरेटर्स' के रूप में पंजीकरण कराएं। राज्य ने 'वेल्थ क्रिएशन सेंटर्स' का भी उद्घाटन किया है, जिसमें बेथमचर्ला में एक ऐसी इकाई शामिल है जो प्रतिदिन 10 टन शुष्क अपशिष्ट को संसाधित करने में सक्षम है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाCPCB: Central Pollution Control Board भारत में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्राथमिक नियामक निकाय है।
तथ्यबल्क वेस्ट जनरेटर (Bulk Waste Generator) थ्रेशोल्ड: वे इकाइयाँ जो प्रतिदिन 100 kg से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं।
अधिनियम / विधेयकठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026: वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण और पंजीकरण के लिए रूपरेखा।
स्थानबेथमचेरला नगर पंचायत: आंध्र प्रदेश में एक नए वेल्थ क्रिएशन सेंटर (Wealth Creation Centre) का स्थल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वच्छ सर्वेक्षण कार्यक्रम के लक्ष्यों और सतत शहरी अपशिष्ट प्रबंधन की प्राप्ति में थोक अपशिष्ट उत्पादकों (bulk waste generators) के लिए अनिवार्य पंजीकरण के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: WRI India ने शहरी निकायों और व्यवसायों को उत्सर्जन में कमी के लिए हस्तक्षेप बिंदुओं की पहचान करने में सहायता प्रदान करने हेतु खाद्य अपशिष्ट प्रबंधन से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का अनुमान लगाने के लिए एक उपकरण (tool) लॉन्च किया है।
'इंडिया फूड वेस्ट GHG एमिशन एस्टिमेशन टूल' का शुभारंभ 17 जुलाई, 2026 को किया गया। यह उपकरण परिवहन के लिए भारत-विशिष्ट उत्सर्जन कारकों और अन्य अपशिष्ट प्रबंधन विधियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कारकों का उपयोग करता है। वर्ष 2022-23 में भारत में लगभग 62 मिलियन टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट उत्पन्न हुआ।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यभारत ने 2022-23 में 62 मिलियन टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (municipal solid waste) उत्पन्न किया।
तथ्यभारत में खाद्य अपशिष्ट उत्सर्जन 2023 में 106.62 मिलियन टन CO2e अनुमानित था।
संस्थाWRI India (World Resources Institute) ने Excel-आधारित अनुमान उपकरण (estimation tool) विकसित किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: खाद्य अपशिष्ट उत्सर्जन का परिमाणीकरण किस प्रकार भारत के चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) की ओर संक्रमण और पेरिस समझौते के तहत उसके राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) की प्राप्ति में सहायक हो सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: दिल्ली के जल मंत्री ने राजधानी में भूजल के गंभीर स्तर पर गिरते स्तर को संबोधित करने के लिए सभी नए बोरवेल अनुमतियों हेतु वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव दिया है।
वर्ष 2024 में दिल्ली में जल निष्कर्षण की दर पुनर्भरण स्तर से अधिक हो गई थी। यह प्रस्ताव भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित करनेके लिए बोरवेल अनुमति को वर्षा जल संचयन प्रणाली की अनिवार्य स्थापना से जोड़ने का प्रावधान करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यवर्ष 2024 में दिल्ली में भूजल निष्कर्षण (groundwater extraction) पुनर्भरण स्तर (recharge levels) से अधिक हो गया।
विज्ञान-तकनीकवर्षा जल संचयन (Rainwater harvesting): वर्षा जल को बाद में उपयोग के लिए एकत्र और संग्रहीत करने या भूजल एक्विफर्स (groundwater aquifers) को रिचार्ज करने की एक तकनीक।
स्थानदिल्ली: उच्च निष्कर्षण दरों के कारण गंभीर भूजल तनाव (groundwater stress) का सामना कर रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दिल्ली जैसे तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में भूजल की कमी को कम करने की रणनीति के रूप में अनिवार्य वर्षा जल संचयन की प्रभावकारिता का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: Wullar-Manasbal Development Authority (WMDA) द्वारा किए गए पुनरुद्धार प्रयासों के परिणामस्वरूप कश्मीर की मानसबल झील में 46 प्रवासी पक्षी प्रजातियों की वापसी, वहां के पारिस्थितिक सुधार का प्रमाण है।
मानसबल झील कश्मीर की सबसे गहरी मीठे पानी की झील है। जल की गुणवत्ता में सुधार हेतु 'वुलर-मानसबल विकास प्राधिकरण' (WMDA) द्वारा खरपतवार हटाने और गाद निकालने (ड्रेजिंग) का कार्य कार्यान्वित किया गया। इस पुनरुद्धार प्रक्रिया को दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान दर्ज किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानमानसबल झील: जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में स्थित सबसे गहरी मीठे पानी की झील।
संस्थाWMDA: Wullar-Manasbal Development Authority झील संरक्षण और विकास के लिए जिम्मेदार संस्था है।
तथ्यवर्ष 2025-2026 की अवधि में झील में लौटने वाले 46 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों को दर्ज किया गया।
विज्ञान-तकनीकझील की गहराई (bathymetry) और जल की गुणवत्ता को बहाल करने के लिए ड्रेजिंग (Dredging) और खरपतवार हटाना प्राथमिक भौतिक हस्तक्षेप हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: क्षेत्रीय जैव विविधता के संरक्षण में झील पुनरुद्धार के महत्व और पारिस्थितिक स्वास्थ्य एवं क्षेत्रीय विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में स्थानीय विकास प्राधिकरणों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: डेजर्ट रेन फ्रॉग (Breviceps macrops) को हाल ही में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका में इसकी संरक्षण स्थिति और आवास के संदर्भ में एक प्रश्नोत्तरी (quiz) में रेखांकित किया गया।
डेजर्ट रेन फ्रॉग (Breviceps macrops) नाम का मेंढक नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के तटीय टीलों की एक संकीर्ण पट्टी के लिए स्थानिक है। यह अपने जीवन का अधिकांश समय रेत के नीचे बिल बनाकर व्यतीत करता है और वर्तमान में IUCN रेड लिस्ट में इसे 'अतिसंवेदनशील' (Vulnerable) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पर्यावरणडेजर्ट रेन फ्रॉग (Breviceps macrops) नामबिया और दक्षिण अफ्रीका के तटीय रेत के टीलों (coastal dunes) के लिए स्थानिक (endemic) है।
पर्यावरणडेजर्ट रेन फ्रॉग (Desert rain frog) को IUCN रेड लिस्ट में 'Vulnerable' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है (न कि Critically Endangered)।
तथ्यअगले दो दशकों में डेजर्ट रेन फ्रॉग (desert rain frog) की जनसंख्या में लगभग 20% की गिरावट का अनुमान है।
पर्यावरणडेजर्ट रेन फ्रॉग (desert rain frog) के लिए प्राथमिक खतरों में डायमंड माइनिंग के कारण होने वाला आवास का नुकसान शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तटीय टीला पारिस्थितिकी तंत्र (coastal dune ecosystems) की जैव विविधता पर हीरा खनन जैसी निष्कर्षण उद्योगों के प्रभावों की चर्चा कीजिए और उनके संरक्षण के लिए उचित उपाय सुझाइए।
चर्चा में क्यों: शोधकर्ताओं ने चीन-म्यांमार सीमा पर पाए गए शल्कों के DNA विश्लेषण के आधार पर, हिमालयी पैंगोलिन (*Manis aurita*) को 2024 में एक विशिष्ट नई प्रजाति के रूप में पुष्टि की है।
इस प्रजाति का प्रथम अवलोकन 1836 में ब्रायन हौटन हॉजसन द्वारा नेपाल की काठमांडू घाटी में किया गया था। काई हे और नारायण प्रसाद कोजू द्वारा किए गए हालिया आनुवंशिक अध्ययनों ने अन्य पैंगोलिन प्रजातियों से इसकी विशिष्टता की पुष्टि की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणहिमालयन पैंगोलिन (Manis aurita) को 2024 तक एक नई पुष्टि की गई विशिष्ट प्रजाति के रूप में मान्यता दी गई है।
स्थानइस प्रजाति को पहली बार नेपाल की काठमांडू घाटी में दर्ज किया गया था।
तथ्यDNA विश्लेषण और रूपात्मक अध्ययनों का उपयोग अन्य Manis प्रजातियों से इस प्रजाति के बीच अंतर करने के लिए किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हिमालयी क्षेत्र में हिमालयी पैंगोलिन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण हेतु आनुवंशिक जैव विविधता मानचित्रण (जेनेटिक बायोडायवर्सिटी मैपिंग) के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: मेघालय सरकार ने विकिरण संबंधी खतरों और पारिस्थितिक क्षति को कम करने के उद्देश्य से यूरेनियम खनन पर औपचारिक रूप से प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री कोनराड के. सांग्मा के नेतृत्व वाली मेघालय सरकार, यूरेनियम खनन पर प्रतिबंध लगाने हेतु राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव प्रस्तुत कर रही है। यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों और पर्यावरणीय क्षरण के संबंध में नागरिक समाज द्वारा लंबे समय से व्यक्त किए जा रहे विरोध के प्रत्युत्तर में उठाया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानमेघालय: भारत का एक उत्तर-पूर्वी राज्य जो अपनी जैव विविधता और खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता है।
तथ्ययूरेनियम खनन: यूरेनियम अयस्क के निष्कर्षण की एक प्रक्रिया, जो आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण विकिरण जोखिम उत्पन्न करती है।
संस्थाराज्य विधानसभा: मेघालया की वह विधायी संस्था जो राज्य-स्तरीय प्रस्तावों और कानूनों को पारित करने के लिए उत्तरदायी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ऊर्जा सुरक्षा के लिए खनिज निष्कर्षण और पारिस्थितिक रूपally संवेदनशील क्षेत्रों में पारिस्थितिक अखंडता एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के संरक्षण के मध्य होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: गुजरात में एशियाई शेरों की जनसंख्या बढ़कर 891 हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप उनके क्षेत्र में 430% का विस्तार हुआ है और मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हुई है।
गुजरात में एशियाई शेरों की जनसंख्या बढ़कर 891 हो गई है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप, उनके निवास क्षेत्र में पारंपरिक अभयारण्य की सीमाओं से परे कृषि और तटीय क्षेत्रों में 430% का विस्तार हुआ है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यनवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में एशियाई शेरों (Asiatic lions) की जनसंख्या 891 तक पहुँच गई है।
तथ्यगुजरात में एशियाई शेरों के क्षेत्रीय विस्तार में 430% की वृद्धि दर्ज की गई है।
स्थानग्रेटर गिर परिदृश्य गुजरात में एशियाई शेरों का प्राथमिक आवास है।
पर्यावरणएशियाई शेर (Panthera leo leo) को Wildlife Protection Act, 1972 की Schedule I के तहत संरक्षित किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बढ़ते आवासों में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और स्थानीय समुदायों एवं संरक्षित प्रजातियों के बीच सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने नेशनल डैम सेफ्टी एक्ट, 2021 के अंतर्गत सुरक्षा और डिजाइन अनुपालन के आधार पर 86 बांधों का मूल्यांकन करने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनलों के गठन को मंजूरी दी है।
राज्य सरकार मथुर और भवानीसागर जैसे प्रमुख बांधों सहित कुल 86 बांधों और जलाशयों का मूल्यांकन करेगी। यह मूल्यांकन राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के द्वारा अनिवार्य है, जिसे 30 दिसंबर, 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
अधिनियम / विधेयकNational Dam Safety Act, 2021: यह भारत में बांधों और जलाशयों की सुरक्षा के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।
तथ्यतमिलनाडु सुरक्षा और डिजाइन के लिए 86 बांधों और जलाशयों का ऑडिट कर रहा है।
स्थानमेत्तूर, भवानीसागर और अमरावती: तमिलनाडु में स्थित प्रमुख बांध।
तथ्यप्रथम व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन (dam safety assessment) को 30 दिसंबर, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जल-तनाव वाले क्षेत्रों में आपदा जोखिमों को कम करने और संरचनात्मक अखंडता सुनिश्चित करने के लिए बांध प्रबंधन में स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: NHEV पहल के अंतर्गत, केंद्र सरकार ने लंबी दूरी के डीजल मालवाहक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करके दिल्ली में शीतकालीन प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पांच मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब के नेटवर्क का प्रस्ताव दिया है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए ईवी (NHEV) पहल के अंतर्गत सोनीपत, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और गुड़गांव में पांच केंद्रों की स्थापना का प्रस्ताव है। इस योजना का उद्देश्य दिल्ली में प्रवेश करने वाले लगभग 50% दीर्घ-दूरी के माल परिवहन को शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों के माध्यम से 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल में परिवर्तित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाNHEV: National Highways for EV पहल का उद्देश्य माल ढुलाई परिवहन को डीकार्बोनाइज करना है।
तथ्यHub-and-spoke मॉडल का उद्देश्य दिल्ली में प्रवेश करने वाले लगभग 50% लंबी दूरी के माल (long-haul freight) को स्थानांतरित करना है।
स्थानप्रस्तावित हब Sonipat, Faridabad, Ghaziabad, Greater Noida और Gurgaon में स्थित हैं।
संस्थाGRAP: Graded Response Action Plan दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक आपातकालीन उपाय है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता के आवर्ती संकट को कम करने में 'हब-एंड-स्पोक' लॉजिस्टिक्स मॉडल और इलेक्ट्रिक माल परिवहन की ओर संक्रमण की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: अरुणाचल प्रदेश में भारी वर्षा के कारण भीषण बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे 1 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए और इसने चरम मौसम के प्रति हिमालयी बुनियादी ढांचे की संवेदनशीलता को रेखांकित किया है।
अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी कामेंग, ऊपरी सुबनसिरी, ऊपरी सियांग, कामले और क्रा दादी जिलों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गईं। इस आपदा के परिणामस्वरूप 7 व्यक्तियों की मृत्यु हुई, 29 लोग घायल हुए और सड़कों, पुलों तथा सिंचाई परियोजनाओं को व्यापक क्षति पहुँची।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानअरुणाचल प्रदेश: हिमालयी भू-भाग के कारण भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ (flash floods) के प्रति संवेदनशील पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य।
संस्थाIMD: India Meteorological Department, वर्षा और चरम मौसम की घटनाओं के पूर्वानुमान के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय एजेंसी।
तथ्यप्रभावित जिलों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 1,03,860 से अधिक लोगों के फंसे होने की सूचना मिली।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बढ़ती चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति के बीच हिमालयी क्षेत्र में आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे के विकास में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना हेतु पालघर जिले में मैंग्रोव वनों की कटाई पर चिंता व्यक्त की है, और मुंबई के हरित क्षेत्र (green cover) को होने वाले पारिस्थितिक जोखिम को रेखांकित किया है।
महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड (MSETCL) ने पालघर जिले में एक विद्युत पारेषण लाइन के निर्माण हेतु 847 मैंग्रोव वृक्षों को काटने की अनुमति मांगी थी। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने दूरस्थ क्षेत्रों में प्रतिपूरक वनीकरण (compensatory afforestation) के अभ्यास की आलोचना की और स्थानीय, निगरानी आधारित पर्यावरणीय मॉडलों की मांग की।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानपालघर जिला महाराष्ट्र राज्य में स्थित है।
संस्थाMSETCL (Maharashtra State Electricity Transmission Company Limited) एक राज्य के स्वामित्व वाली बिजली पारेषण उपयोगिता (power transmission utility) है।
पर्यावरणमैंग्रोव तटीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो तूफान की लहरों और तटीय क्षरण के विरुद्ध प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के शहरी गलियारों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास और मैंग्रोव जैसे तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: *Nature* पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 2024-25 के सत्र में ग्रीनलैंड ने 105 बिलियन टन बर्फ खो दी है। यह स्थिति एक ऐसे फीडबैक लूप के कारण उत्पन्न हुई है, जिसमें गहरे रंग की बर्फ पिघलने की प्रक्रिया को तीव्र कर देती है।
वर्ष 2024-25 के सत्र के दौरान ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर से लगभग 105 बिलियन टन बर्फ का क्षरण हुआ है। धूल, कालिख और जंगल की आग से निकलने वाले धुएं के अवशेषों के कारण उत्पन्न होने वाली 'गहरी बर्फ' इस पिघलने की प्रक्रिया को और अधिक तीव्र कर देती है, क्योंकि यह सौर ऊर्जा के अवशोषण को बढ़ा देती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यग्रीनलैंड बर्फ का नुकसान: 2024–25 के सीजन में 105 बिलियन टन।
विज्ञान-तकनीकएल्बेडो प्रभाव (Albedo effect): गहरे रंग की बर्फ (कालिख/धूल) ताजी बर्फ की तुलना में अधिक सौर विकिरण को अवशोषित करती है, जिससे पिघलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
पर्यावरणफीडबैक तंत्र: पिघलने की प्रक्रिया से अधिक गहरे रंग की सतहें उजागर होती हैं, जिससे ऊष्मा अवशोषण और बढ़ जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ की चादरों के पिघलने से उत्पन्न होने वाला फीडबैक लूप वैश्विक महासागरीय परिसंचरण और समुद्र के जलस्तर में वृद्धि के लिए किस प्रकार एक महत्वपूर्ण खतरा उत्पन्न करता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: MCD और NDDB ने यमुना नदी में प्रदूषण को रोकने और पशु अपशिष्ट के उपचार हेतु 80 बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं।
दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने गोबर का उपयोग करके कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के अंतर्गत किसानों को प्रति किलोग्राम गोबर पर 1 रुपये का भुगतान किया जाएगा और इसका मुख्य उद्देश्य यमुना नदी में अपशिष्ट के प्रवाह को रोकना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNDDB: National Dairy Development Board, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
तथ्ययह MoU दिल्ली में 80 बायोगैस उपचार संयंत्रों (biogas treatment plants) की स्थापना का लक्ष्य रखता है।
तथ्यसंग्रहित किए गए प्रति किलोग्राम गाय के गोबर पर किसानों को ₹1 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
तथ्ययमुना में शून्य गंदे पानी के प्रवेश के लिए निर्धारित लक्ष्य तिथि दिसंबर 2028 है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी अपशिष्ट प्रबंधन में चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हुए 'नमामि गंगे' और 'यमुना एक्शन प्लान' के उद्देश्यों की प्राप्ति में 'अपशिष्ट से ऊर्जा' (waste-to-energy) पहलों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: NOAA ने 'एल नीनो' (El Niño) की तीव्र वृद्धि की पुष्टि की है, जिसके परिणामस्वरूप जून के दौरान भारत में मानसून में 40% की कमी आई है, जिससे धान की फसल के उत्पादन पर संकट उत्पन्न हो गया है।
NOAA के अनुसार, वर्ष 2026 के अंत तक 'निनो 3.4' विसंगति (anomaly) 3.6 डिग्री सेल्सियस के उच्चतम स्तर पर पहुँचने का अनुमान है। जून माह में भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा में औसत से लगभग 40% की कमी दर्ज की गई, जो भारतीय महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) की तटस्थ स्थिति के कारण और अधिक गंभीर हो गई।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकNino 3.4 anomaly: मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान को मापने वाला El Niño की निगरानी के लिए एक प्रमुख मानक।
तथ्यजून में भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा में औसत से लगभग 40% की कमी दर्ज की गई।
विज्ञान-तकनीकइंडियन ओशन डायपोल (IOD): एक जलवायु संबंधी घटना जिसमें हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच समुद्र की सतह के तापमान में अंतर शामिल होता है।
विज्ञान-तकनीकEl Niño: इसकी विशेषता पूर्वी प्रशांत महासागर में सतह के जल का गर्म होना है, जिससे अक्सर भारत में अनियमित मानसून पैटर्न उत्पन्न होता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एल नीनो घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए किस प्रकार एक प्रणालीगत खतरा उत्पन्न करती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: हार्वर्ड फॉरेस्ट में किए गए 37 वर्षों के एक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि मृदा के तापमान में 5°सी. की वृद्धि गहरी मिट्टी में स्थित स्थिर कार्बन के अपघटन को सक्रिय कर देती है, जिससे जलवायु में सकारात्मक फीडबैक लूप (positive climate feedback loop) उत्पन्न होता है।
हार्वर्ड फॉरेस्ट (मैसाचुसेट्स) में आयोजित यह अध्ययन 37 वर्षों की अवधि तक चला। इस शोध ने यह स्पष्ट किया कि वन मृदा के तापमान में 5°सी. की वृद्धि होने से पूर्व स्थिर गहरी मृदा कार्बन का अपघटन होता है, जिससे वायुमंडल में CO2 का उत्सर्जन होता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीककार्बन फीडबैक लूप: सकारात्मक फीडबैक तब होता है जब एक चर (तापमान) में परिवर्तन एक ऐसी प्रक्रिया को सक्रिय करता है जो उस परिवर्तन को और अधिक बढ़ा देती है (CO2 उत्सर्जन)।
तथ्यअध्ययन ने विशेष रूप से गहरे मृदा कार्बन स्थिरता (deep-soil carbon stability) पर 5°सी. तापमान वृद्धि के प्रभाव को मापा।
स्थानHarvard Forest, USA के Massachusetts राज्य में स्थित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: गहरी मृदा कार्बन फीडबैक लूप (deep-soil carbon feedback loops) वैश्विक जलवायु शमन रणनीतियों को किस प्रकार जटिल बनाते हैं? वर्तमान जलवायु मॉडलिंग में मृदा कार्बन गतिशीलता को एकीकृत करने की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: प्राधिकारियों ने त्सो मोरीरी आर्द्रभूमि (wetland) में अवैध ऑफ-रोडिंग के लिए 12 बाइक सवारों पर 1.2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जो पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रवर्तन को रेखांकित करता है।
यह घटना लद्दाख स्थित चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आने वाले त्सो मोरीरी आर्द्रभूमि (wetland) में घटित हुई। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अंतर्गत बाइक सवारों पर दंड अधिरोपित किया गया, जिसके तहत प्रत्येक व्यक्ति पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकWildlife (Protection) Act, 1972: भारत में वन्य जीवों और पौधों के संरक्षण के लिए प्राथमिक विधान।
स्थानत्सो मोरिरी: लद्दाख के चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य में स्थित एक उच्च-अल्टीट्यूड आर्द्रभूमि और झील।
तथ्य4 जुलाई, 2024 को WanderOn Experiences Pvt Ltd के 12 बाइकर्स पर कुल 1.2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लद्दाख के चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: बीवर ट्रस्ट ने 28 फरवरी 2025 को डॉर्सेट के लिटिल सी लेक में बीवर के दो जोड़े छोड़े, जो पिछले 400 वर्षों में ब्रिटेन में इस प्रजाति के वन्य जीवन में पुन: प्रवेश का प्रथम अवसर है।
डॉर्टसेट के स्टडलैंड स्थित लिटिल सी लेक में बीवर के दो जोड़े छोड़े गए हैं। आर्द्रभूमि और प्राकृतिक जलमार्गों के पुनरुद्धार हेतु बीवर ट्रस्ट द्वारा इन जानवरों को स्कॉटलैंड के टे catchment (टै कैचमेंट) से परिवहन किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पर्यावरणबीवर (Beavers) को बांध बनाने और जलमार्गों को परिवर्तित करने की उनकी क्षमता के कारण 'ecosystem engineers' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
स्थानLittle Sea Lake, UK के Dorset स्थित Isle of Purbeck के Studland में स्थित है।
तथ्यऐतिहासिक रूप से फर, मांस और castoreum के लिए शिकार के कारण, Beaver लगभग 400 वर्षों तक Britain से अनुपस्थित रहे।
संस्थाBeaver Trust वह संरक्षण संगठन है जो पुनरुद्धार परियोजना (reintroduction project) के लिए उत्तरदायी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक परिदृश्यों में विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को पुन: स्थापित करने में निहित पारिस्थितिक समझौतों (ecological trade-offs) और आर्द्रभूमि बहाली में बीवर जैसी 'पारिस्थितिकी तंत्र इंजीनियरों' (ecosystem engineers) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: जुलाई 2026 में हुई भारी मानसूनी वर्षा के कारण महाराष्ट्र, गुजरात और पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके परिणामस्वरूप IMD द्वारा फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) की चेतावनी जारी की गई।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने असम, मेघालय और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों के लिए अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के जोखिमों के संबंध में चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से, असम में आई बाढ़ ने घुंसुती जैसे क्षेत्रों को जलमग्न कर दिया, जिससे व्यापक संपत्ति की क्षति हुई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाIMD: वर्षा और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की निगरानी और पूर्वानुमान के लिए भारत की प्राथमिक एजेंसी।
तथ्यजुलाई 2026 में पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत में बाढ़ की घटनाएँ हुईं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पूर्वोत्तर भारत में अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड्स) की बढ़ती आवृत्ति में योगदान देने वाले भौगोलिक और जलवायु कारकों का विश्लेषण कीजिए और इसके शमन हेतु रणनीतियों का सुझाव दीजिए।
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरणीय क्षरण से निपटनेके लिए 35 करोड़ पौधे लगाने हेतु गोरखपुर में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का शुभारंभ किया।
यह अभियान 12 जुलाई, 2026 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शुरू किया गया था। इसका मुख्य लक्ष्य अनिश्चित मौसम के पैटर्न और कार्बन उत्सर्जन के दुष्प्रभावों को कम करने के उद्देश्य से 35 करोड़ पौधे लगाना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्य'Ek Pedh Maa Ke Naam' अभियान का लक्ष्य: 35 करोड़ पौधे।
स्थानप्रक्षेपण स्थल: गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
तथ्यअभियान शुरू होने की तिथि: July 12, 2026।
मेन्स के लिए
प्रश्न: 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसी व्यापक स्तर की वनीकरण पहलों के माध्यम से भारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।