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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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केरल में लैंडस्लाइड से 12 की मौत, क्लाइमेट चेंज से बढ़ी तबाही

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· जलवायु परिवर्तन एवं अंतर्राष्ट्रीय समझौते· प्रीलिम्स + मेन्स·

चर्चा में क्यों

अत्यधिक मानसूनी वर्षा के कारण केरल के वायनाड, इडुक्की और कोट्टायम में घातक भूस्खलन की घटनाएँ हुईं, जो जलवायु परिवर्तन और आपदा संवेदनशीलता के मध्य अंतर्संबंध को रेखांकित करती हैं।

पृष्ठभूमि

केरल में वार्षिक रूप से लगभग 3,000 मिमी वर्षा होती है, जो प्रायः उच्च-तीव्रता वाले दौर में होती है। भूस्खलन की घटनाएँ पश्चिमी घाट की तलहटी में घटित हुईं, जिससे विशेष रूप से वायनाड, इडुक्की और कोट्टायम जिले प्रभावित हुए।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • स्थानवायनाड, इडुक्की और कोट्टायम केरल के वे जिले हैं जो भूस्खलन के प्रति संवेदनशील हैं।
  • तथ्यकेरल में औसत वार्षिक वर्षा 3,000 mm होती है।
  • पर्यावरणपश्चिमी घाट एक जैव विविधता हॉटस्पॉट और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: जलवायु परिवर्तन किस प्रकार पश्चिमी घाटों में भूस्खलन की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा रहा है, इस पर चर्चा कीजिए और आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे (disaster-resilient infrastructure) के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · प्राकृतिक आपदाएं एवं राहतयह भी: GS1 · भौतिक भूगोल (भू-आकृतियां, महासागर, जलवायु)

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।