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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के अर्थव्यवस्था भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 2,306 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे) (511) · उद्योग, निवेश एवं MSME (471) · मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग (298) · पूंजी बाज़ार एवं SEBI (298) · विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतक (278) · राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST) (189) · रोज़गार एवं समावेशी विकास (142) · बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDI (119)

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासप्रीलिम्स + मेन्स

अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोना मेन ने VB-G RAM जी

चर्चा में क्यों: अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोना मेन ने VB-G RAM जी. एक्ट को ग्रामीण सशक्तिकरण और समावेशी विकास के लिए एक दूरदर्शी सुधार बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित VB-G RAM G Act, ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है। यह जल प्रबंधन, कृषि सहायता और आपदा तैयारी में स्थायी परिसंपत्ति निर्माण (Sustainable Asset Creation) पर केंद्रित है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यVB-G RAM G Act: ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी देता है।
  • तथ्यमुख्य क्षेत्र: जल प्रबंधन (Water management), कृषि सहायता और आपदा तैयारी (Disaster preparedness)।
  • संस्थानिर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्राम सभाओं और पंचायतों के माध्यम से स्थानीय समुदायों को शामिल किया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विकेंद्रीकृत रोजगार योजनाएं, जैसे कि वी.बी.-जी.आर.ए.एम.जी. अधिनियम, भारत में सतत ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास और समावेशी विकास को किस प्रकार सुगम बना सकती हैं, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • विकेंद्रीकृत शासन: स्थानीय संपत्ति निर्माण की जरूरतों की पहचान और प्राथमिकता तय करने के लिए ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना
  • एसेट-सेंट्रिक एम्प्लॉयमेंट: केवल मज़दूरी से आपदा तैयारी के लिए टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की ओर बदलाव
  • समावेशी विकास: गारंटीड वर्क डेज़ के ज़रिए ग्रामीण-शहरी रोज़गार के अंतर को कम करना

मुख्य शब्द: समावेशी विकास · विकेंद्रीकृत शासन · ग्रामीण सशक्तिकरण · सस्टेनेबल एसेट क्रिएशन · ग्राम सभा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाउरा और गुवाहाटी के बीच भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाउरा और गुवाहाटी के बीच भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसका उद्देश्य यात्रियों को एयरलाइन जैसा अनुभव प्रदान करना और यात्रा के समय को कम करना है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन हावड़ा और गुवाहाटी को जोड़ती है, जो पूरी तरह से AC अनुभव प्रदान करती है। इसे यात्रा के समय में 2.5 घंटे की कमी लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यवंदे भारत स्लीपर ट्रेन के यात्रा समय में कमी: 2.5 घंटे।
  • तथ्यपश्चिम बंगाल के मालदा में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स: 3,250 करोड़ रुपये।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों जैसी उच्च गति वाली रेल बुनियादी संरचना का विस्तार पूर्वी भारत में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और धार्मिक पर्यटन को कैसे उत्प्रेरित कर सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक्स दक्षता: ट्रांजिट समय में कमी से सामान और यात्रियों की आवाजाही तेज़ हुई
  • टूरिज्म सिनर्जी: तीर्थ स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी से पूर्वोत्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक असमानता को दूर करना

मुख्य शब्द: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · लॉजिस्टिक्स दक्षता · पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर · मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट · आर्थिक एकीकरण

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अमेरिका के डॉलर की विश्वसनीयता और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions) को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण भारत

चर्चा में क्यों: अमेरिका के डॉलर की विश्वसनीयता और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions) को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण भारत, रूस और चीन सहित कई केंद्रीय बैंक तेजी से अपने सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं।

सर्बिया, वेनेजुएला, रूस, भारत, हंगरी और तुर्की जैसे देश सक्रिय रूप से अपने स्वर्ण भंडार (gold reserves) को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। चीन भी फिएट करेंसी (fiat currency) की अस्थिरता के खिलाफ एक विविधीकरण रणनीति (diversification strategy) के रूप में भारी मात्रा में बुलियन (bullion) जमा कर रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यसेंट्रल बैंक, US डॉलर से हटकर पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई (diversify) करने के लिए गोल्ड का उपयोग एक टूल के रूप में कर रहे हैं।
  • स्थानसर्बिया, वेनेजुएला, रूस, भारत, हंगरी और टर्की उन देशों में शामिल हैं जो गोल्ड रिज़र्व (gold reserves) को वापस ला रहे हैं।
  • तथ्यविशेषज्ञों का सुझाव है कि सोना, प्रमुख रिजर्व करेंसी के रूप में US डॉलर की जगह पूरी तरह से लेने की संभावना कम है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: केंद्रीय बैंकों द्वारा स्वर्ण को एक आरक्षित संपत्ति के रूप में प्राथमिकता देने के पीछे के कारकों और वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • मौनेटरी सॉवरेन्टी: सेंट्रल बैंक अमेरिकी राजकोषीय नीतियों के जोखिम कम करने की कोशिश में
  • जियोपॉलिटिकल हेजिंग: डॉलर-केंद्रित प्रतिबंधों और फाइनेंशियल सिस्टम से बचने के लिए सोने का इस्तेमाल
  • रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन: फिएट करेंसी की लिक्विडिटी और बुलियन की इंट्रिन्सिक वैल्यू के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: आरक्षण विविधीकरण · मौद्रिक स्थिरता · भू-राजनीतिक हेजिंग · फिएट करेंसी · सोने की वापसी

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासप्रीलिम्स + मेन्स

वित्त मंत्री के.एन

चर्चा में क्यों: वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने केरल में 'वर्क नियर होम' (Work Near Home - WNH) पहल की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले करियर के अवसर प्रदान करके 5 लाख रोजगार पैदा करना और ₹5,000 करोड़ का राजस्व उत्पन्न करना है।

केरल सरकार विश्व स्तरीय तकनीकी बुनियादी ढांचे के साथ एक IT पार्क जैसा वातावरण प्रदान करने के लिए WNH सुविधाएं स्थापित करने की योजना बना रही है। इस परियोजना को केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य रिमोट वर्कर्स, फ्रीलांसरों, स्टार्टअप्स और छात्रों को सहायता प्रदान करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यWNH इनिशिएटिव का लक्ष्य 5 लाख नौकरियां पैदा करना और ₹5,000 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू (revenue) जेनरेट करना है।
  • संस्थाकेरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB), WNH सुविधाओं के लिए फंडिंग बॉडी है।
  • स्थानपहला WNH फैसिलिटी कोट्टारकारा में उद्घाटन के लिए निर्धारित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: 'वर्क नियर होम' (Work Near Home) सुविधाओं की स्थापना किस प्रकार 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) की समस्या को कम कर सकती है और केरल जैसे राज्यों में विकेंद्रीकृत आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकती है, चर्चा कीजिए।

  • डेमोग्राफिक शिफ्ट: टियर-2 और टियर-3 शहरों में हाई-वैल्यू एम्प्लॉयमेंट हब बनाकर ग्रामीण से शहरी पलायन को रोकना
  • राजकोषीय रणनीति: स्थानीय राजस्व और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड का इस्तेमाल
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: रिमोट वर्क के लिए हाई-क्वालिटी टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए शहरी-ग्रामीण अंतर को कम करना

मुख्य शब्द: ब्रेन ड्रेन · विकेंद्रीकृत विकास · रिमोट वर्क इंफ्रास्ट्रक्चर · रोज़गार सृजन · राजकोषीय निवेश

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकमेन्स

IIM कोझिकोड (Kozhikode) के विशेषज्ञों ने IRDAI को एक रिपोर्ट सौंपी है

चर्चा में क्यों: IIM कोझिकोड (Kozhikode) के विशेषज्ञों ने IRDAI को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें '2047 तक सभी के लिए बीमा' (Insurance for All by 2047) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की गई है।

यह रिपोर्ट बीमा क्षेत्र के विकास के लिए चार स्तंभों की पहचान करती है: रेगुलेटरी स्पष्टता (Regulatory Clarity), तकनीकी प्रगति, पूंजी गहनता (Capital Deepening) और संस्थागत विश्वास। इसमें प्रस्ताव दिया गया है कि बीमा को भारत के आर्थिक लचीलेपन (Economic Resilience) के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाIRDAI: भारत में इंश्योरेंस सेक्टर के लिए रेगुलेटरी बॉडी।
  • तथ्य2047 तक सभी के लिए Insurance (बीमा): IIMK रिपोर्ट में प्रस्तावित लक्ष्य।
  • तथ्यIIM Kozhikode: वह संस्थान जिसने IRDAI को सौंपी गई रिपोर्ट तैयार की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बीस सौ अड़तालीस (2047) तक भारत की आर्थिक सुदृढ़ता और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में बीमा पैठ के प्रति एक 'राष्ट्रीय मिशन' दृष्टिकोण किस प्रकार सहायक हो सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • संस्थागत भरोसा: पारदर्शी क्लेम सेटलमेंट और शिकायत निवारण तंत्र के जरिए उपभोक्ताओं के संदेह को दूर करना
  • रेगुलेटरी क्लैरिटी: बीमा कंपनियों के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस और मज़बूत उपभोक्ता संरक्षण फ्रेमवर्क के बीच संतुलन
  • कैपिटल डीपनिंग: इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सिक्योरिटी के लिए घरेलू बचत को लॉन्ग-टर्म इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में लगाना

मुख्य शब्द: वित्तीय समावेशन · आर्थिक मजबूती · कैपिटल डीपनिंग · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · जोखिम कम करना

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

नीति आयोग के एक्सपोर्ट प्रेपेर्डनेस इंडेक्स (Export Preparedness Index

चर्चा में क्यों: नीति आयोग के एक्सपोर्ट प्रेपेर्डनेस इंडेक्स (Export Preparedness Index - EPI) 2024 में केरल ने अपनी रैंकिंग 19वें स्थान से सुधारकर 11वें स्थान पर हासिल की है।

केरल ने EPI 2024 में 44.03 का स्कोर हासिल किया है और इसे 'चैलेंजर' के रूप में वर्गीकृत किया गया है। वित्त वर्ष 2022-23 में इसके निर्यात में 86.9% की वृद्धि हुई, जो ₹68,375 करोड़ तक पहुंच गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से कोच्चि रिफाइनरी से होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों द्वारा संचालित थी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यवित्त वर्ष 2022-23 में केरल का एक्सपोर्ट ग्रोथ (export growth) 86.9% था।
  • तथ्यFY 2022-23 में केरल का एक्सपोर्ट वैल्यू ₹68,375 करोड़ तक पहुंच गया।
  • संस्थानीति आयोग का Export Preparedness Index (EPI) निर्यात नीतियों, बिजनेस एनवायरनमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर क्वालिटी और निर्यात परिणामों का मूल्यांकन करता है।
  • स्थानकोच्चि रिफाइनरी केरल के पेट्रोलियम प्रोडक्ट एक्सपोर्ट्स का मुख्य चालक है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के राज्य-स्तरीय निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद संरचनात्मक बाधाओं का विश्लेषण कीजिए और लॉजिस्टिक्स तथा कटाई के पश्चात के बुनियादी ढांचे (पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर) को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • लॉजिस्टिक्स की समस्या: कृषि क्षेत्रों में कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी के कारण फसल कटाई के बाद भारी नुकसान
  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: ज़मीन अधिग्रहण की जटिलताएँ बड़े पैमाने पर औद्योगिक और एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में बाधा

मुख्य शब्द: निर्यात तैयारी · लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर · कटाई के बाद होने वाला नुकसान · औद्योगिक विकास · ट्रेड कॉम्पिटिटिवनेस

प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप इंडिया (Startup India) योजना की 10वीं वर्षगांठ मनाई और बताया कि 2025 में 44,000 नए स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप इंडिया (Startup India) योजना की 10वीं वर्षगांठ मनाई और बताया कि 2025 में 44,000 नए स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।

वर्ष 2025 में लगभग 44,000 स्टार्टअप्स पंजीकृत किए गए, जो इस योजना के शुभारंभ के बाद से अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि है। भारत में स्टार्टअप्स की कुल संख्या 200,000 से अधिक हो गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यवर्ष 2025 में लगभग 44,000 स्टार्टअप्स (startups) पंजीकृत किए गए।
  • तथ्यभारत में स्टार्टअप्स की कुल संख्या 200,000 से अधिक हो गई है।
  • योजनाFund of Funds 2.0: यह AI, मशीन लर्निंग और डिफेंस सहित डीप टेक (deep tech) निवेश पर केंद्रित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: गहरी तकनीक (deep-tech) नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने में सरकार के नेतृत्व वाले निवेश कोषों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • कैपिटल एलोकेशन: महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी पर आयात निर्भरता कम करने के लिए डीप-टेक और डिफेंस को प्राथमिकता
  • इकोसिस्टम मैच्योरिटी: हाई-वॉल्यूम स्टार्टअप बनाने से हाई-वैल्यू यूनिकॉर्न डेवलपमेंट की ओर बदलाव
  • पॉलिसी सिनर्जी: स्टार्टअप इंडिया के उद्देश्यों को AI और मशीन लर्निंग में राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: डीप-टेक इन्वेस्टमेंट · स्टार्टअप इकोसिस्टम · यूनिकॉर्न · पूँजी निर्माण · इनोवेशन आधारित विकास

भारत सरकार ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए एक दुर्लभ मृदा चुंबक (Rare Earth Magnet) उद्योग विकसित करने हेतु ₹73 बिलियन की योजना को मंजूरी दी है

चर्चा में क्यों: भारत सरकार ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए एक दुर्लभ मृदा चुंबक (Rare Earth Magnet) उद्योग विकसित करने हेतु ₹73 बिलियन की योजना को मंजूरी दी है।

इस योजना का लक्ष्य सात साल की समय सीमा के भीतर सालाना 6,000 टन स्थायी चुंबक (permanent magnets) का उत्पादन करना है। भारत में मौजूदा दुर्लभ मृदा (rare earth) भंडार के बावजूद, यह योजना निर्माताओं को घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यरेयर अर्थ मैग्नेट (Rare earth magnet) इंडस्ट्री के लिए स्वीकृत प्लान की वैल्यू ₹73 बिलियन है।
  • तथ्यलक्ष्य उत्पादन क्षमता सालाना 6,000 टन परमानेंट मैग्नेट्स (permanent magnets) की है।
  • स्थानचीन को रेयर अर्थ मैग्नेट्स (rare earth magnets) के लिए निर्भरता के प्राथमिक स्रोत के रूप में पहचाना गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन के संदर्भ में घरेलू दुर्लभ मृदा चुंबक (rare earth magnet) उद्योग के विकास के रणनीतिक महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • सप्लाई चेन की कमजोरी: घरेलू कच्चे माल की उपलब्धता के बावजूद चीनी प्रोसेसिंग पर भारी निर्भरता
  • तकनीकी अंतर: बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उन्नत R&D और प्रोप्रायटरी मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी की ज़रूरत
  • मार्केट कॉम्पिटिटिवनेस: परमानेंट मैग्नेट्स के लिए स्थापित ग्लोबल प्राइसिंग के मुकाबले प्रोडक्शन कॉस्ट को संतुलित करना

मुख्य शब्द: सप्लाई चेन रेजिलिएंस · तकनीकी संप्रभुता · रणनीतिक स्वायत्तता · आयात प्रतिस्थापन · दुर्लभ अर्थ खनिज

सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने Meta, Amazon

चर्चा में क्यों: सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने Meta, Amazon, Flipkart और Meesho सहित आठ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिना उचित लाइसेंस के अनधिकृत वॉकी-टॉकी बेचने के लिए जुर्माना लगाया है।

CCPA ने लाइसेंस-मुक्त फ्रीक्वेंसी बैंड (frequency bands) के बाहर काम करने वाले उपकरणों को सूचीबद्ध करने के लिए आठ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कुल ₹44 लाख का जुर्माना लगाया है। CCPA ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें लिस्टिंग से पहले फ्रीक्वेंसी अनुपालन और ETA प्रमाणन (certification) का अनिवार्य सत्यापन आवश्यक कर दिया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाCCPA: सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (Central Consumer Protection Authority) वह रेगुलेटरी बॉडी है जिसने प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की।
  • तथ्यCCPA द्वारा आठ प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए कुल जुर्माने की राशि ₹44 लाख थी।
  • तथ्यइन प्लेटफॉर्म्स पर जुर्माना लगाया गया है जिनमें Meesho, Meta Platforms Inc. (Facebook Marketplace), Flipkart और Amazon शामिल हैं।
  • तथ्यनई गाइडलाइन्स के तहत अब वॉक-टॉकी (walkie-talkies) के लिए फ्रीक्वेंसी कंप्लायंस और ETA सर्टिफिकेशन का अनिवार्य वेरिफिकेशन आवश्यक है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बिक्री को रोकने के लिए विनियामक चुनौतियों और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: मल्टी-वेंडर मार्केटप्लेस पर रियल-टाइम लिस्टिंग की निगरानी में मुश्किल
  • अनुपालन में कमी: फ्रीक्वेंसी-स्पेसिफिक हार्डवेयर सर्टिफिकेशन के लिए ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन सिस्टम का अभाव
  • उपभोक्ता जोखिम: अनधिकृत डिवाइस द्वारा इमरजेंसी कम्युनिकेशन फ्रीक्वेंसी में हस्तक्षेप की संभावना

मुख्य शब्द: रेगुलेटरी कंप्लायंस · उपभोक्ता संरक्षण · ई-कॉमर्स गवर्नेंस · मार्केट ओवरसाइट · फ़्रीक्वेंसी लाइसेंसिंग

GS3अर्थव्यवस्था › बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDIप्रीलिम्स

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने घोषणा की कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद

चर्चा में क्यों: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने घोषणा की कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, दिसंबर 2025 में भारत का वस्तु निर्यात (merchandise exports) 1.87% बढ़कर 38.5 बिलियन डॉलर हो गया।

तथ्य बॉक्स दिसंबर 2025 में भारत का वस्तु निर्यात (merchandise exports) 38.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आयात बढ़कर 63.55 बिलियन डॉलर हो गया। इस महीने का व्यापार घाटा (trade deficit) 25 बिलियन डॉलर रहा। अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि के लिए कुल निर्यात 330.29 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्यदिसंबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (merchandise exports): $38.5 बिलियन।
  • तथ्यदिसंबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज इम्पोर्ट (merchandise imports): $63.55 बिलियन।
  • तथ्यदिसंबर 2025 के लिए ट्रेड डेफिसिट (Trade deficit): $25 बिलियन।
  • तथ्यकुल निर्यात (अप्रैल-दिसंबर 2025): $330.29 बिलियन।
  • पदराजेश अग्रवाल: भारत के कॉमर्स सेक्रेटरी (Commerce Secretary)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के बढ़ते व्यापार घाटे में योगदान देने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए और अस्थिर वैश्विक बाजार में भारतीय वस्तु निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • संरचनात्मक असंतुलन: आवश्यक वस्तुओं पर भारी आयात निर्भरता बनाम मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट
  • ग्लोबल वोलाटिलिटी: भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का एक्सपोर्ट डिमांड और सप्लाई चेन स्टेबिलिटी पर असर
  • राजकोषीय दबाव: विदेशी मुद्रा भंडार पर व्यापार घाटे के प्रभाव का प्रबंधन और चालू खाता

मुख्य शब्द: व्यापार घाटा · मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स · करेंट अकाउंट · वैश्विक अनिश्चितताएं · व्यापार संतुलन

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फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए दिशा-निर्देशों को अपडेट किया है

चर्चा में क्यों: फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए दिशा-निर्देशों को अपडेट किया है, जिसमें सख्त नो योर कस्टमर (KYC) प्रक्रियाओं और रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाया गया है।

FIU-IND अब एक्सचेंजों से व्यक्तिगत पहचान, व्यवसाय, आय, सेल्फी वेरिफिकेशन और लोकेशन डेटा एकत्र करने की मांग करता है। ये दिशा-निर्देश इनिशियल कॉइन ऑफरिंग्स (Initial Coin Offerings - ICOs) और इनिशियल टोकन ऑफरिंग्स (Initial Token Offerings - ITOs) को हतोत्साहित करते हैं, साथ ही गुमनामी बढ़ाने वाले टोकन और मिक्सर्स पर रोक लगाते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाFIU-IND: वह संस्था जो क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के KYC गाइडलाइन्स को अपडेट करने के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यअनिवार्य डेटा पॉइंट्स: व्यक्तिगत पहचान, व्यवसाय, आय, सेल्फी वेरिफिकेशन और लोकेशन डेटा।
  • तथ्यप्रतिबंधित वस्तुएं: anonymity-enhancing क्रिप्टो टोकन और मिक्सर।
  • तथ्यनिषिद्ध गतिविधियाँ: Initial Coin Offerings (ICOs) और Initial Token Offerings (ITOs)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में क्रिप्टोकरेंसी पारिस्थितिकी तंत्र के शासन में निहित विनियामक चुनौतियों और निवेशक संरक्षण पर केवाईसी (KYC) शासनों के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी अस्पष्टता: व्यापक कानूनी ढांचे की कमी से निवेशक हैक्स और स्कैम्स के लिए असुरक्षित हैं
  • AML/CFT कंप्लायंस: हाई-रिस्क ट्रांजेक्शन और अवैध प्रवाह पर नज़र रखने की ज़रूरत और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन
  • मार्केट इंटीग्रिटी: फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम के लिए एनोनिमिटी-एन्हांसिंग टोकन्स से जुड़े जोखिम

मुख्य शब्द: अपने ग्राहक को जानें (KYC) · एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) · रेगुलेटरी ओवरसाइट · वित्तीय ईमानदारी · क्रिप्टोकरेंसी गवर्नेंस

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आंध्र प्रदेश सरकार विजाग इकोनॉमिक रीजन (VER) के विकास के लिए मुंबई के स्व-वित्तपोषित और निवेश-आधारित शहरी विकास मॉडल को अपना रही है

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार विजाग इकोनॉमिक रीजन (VER) के विकास के लिए मुंबई के स्व-वित्तपोषित और निवेश-आधारित शहरी विकास मॉडल को अपना रही है।

नगर प्रशासन और शहरी विकास (MA&UD) विभाग के एक प्रतिनिधिमंडल ने CIDCO, MMRDA और स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) द्वारा अपनाए गए मॉडलों का अध्ययन करने के लिए मुंबई का दौरा किया। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के लिए भूमि मुद्रीकरण (Land Monetization), FSI प्रीमियम और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पर ध्यान केंद्रित करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाMMRDA: मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी।
  • संस्थाSRA: Slum Rehabilitation Authority, मुंबई में स्लम रिडेवलपमेंट (slum redevelopment) पर ध्यान केंद्रित करती है।
  • तथ्यविजाग इकोनॉमिक रीजन (VER): आंध्र प्रदेश का वह विशिष्ट क्षेत्र जिसे इस अर्बन ग्रोथ मॉडल (urban growth model) के लिए लक्षित किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के उभरते आर्थिक क्षेत्रों में शहरी विकास के लिए मुंबई के भूमि-मुद्रीकरण (land-monetization) और पारगमन-उन्मुख विकास (transit-oriented development) मॉडलों को अपनाने की व्यवहार्यता का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय स्वायत्तता: लैंड-बेस्ड फाइनेंसिंग और FSI प्रीमियम के जरिए राज्य के बजट पर निर्भरता कम करना
  • अर्बन प्लानिंग: क्षेत्रीय विकास को मैनेज करने के लिए बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) को जोड़ना
  • सामाजिक समानता: समावेशी शहरी विस्तार सुनिश्चित करने के लिए झुग्गी पुनर्विकास और कमर्शियल लैंड मोनेटाइजेशन के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: भूमि मुद्रीकरण · ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट · FSI प्रीमियम · सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल · शहरी शासन

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

NLC India Ltd

चर्चा में क्यों: NLC India Ltd. (NLCIL) ने भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों को समर्थन देने के लिए बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) प्रोजेक्ट्स विकसित करने हेतु गुजरात सरकार के साथ एक गैर-बाध्यकारी MoU (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए हैं।

NLCIL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, NLC India Renewables Limited, इन परियोजनाओं को क्रियान्वित करेगी। इस सहयोग के तहत सोलर, विंड, हाइब्रिड और बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं में लगभग ₹25,000 करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यNLCIL-गुजरात रिन्यूएबल एनर्जी MoU के लिए इन्वेस्टमेंट वैल्यू लगभग ₹25,000 करोड़ है।
  • संस्थाNLC India Renewables Limited, NLC India Ltd. (NLCIL) की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (wholly owned subsidiary) है।
  • विज्ञान-तकनीकप्रोजेक्ट के दायरे में सोलर, विंड, हाइब्रिड और बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के माध्यम से भारत की 'नेट-जीरो' अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण को गति देने में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • कैपिटल मोबिलाइजेशन: बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड सिस्टम की भारी शुरुआती लागत को कम करने के लिए PSU बैलेंस शीट का इस्तेमाल
  • राज्य-केंद्र तालमेल: राज्य के औद्योगिक लक्ष्यों और राष्ट्रीय डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों व ग्रिड स्थिरता के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: नेट ज़ीरो · नवीकरणीय ऊर्जा · पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग · ऊर्जा ट्रांज़िशन · बैटरी स्टोरेज

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स + मेन्स

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026 में साइबर सुरक्षा और आय/संपत्ति की असमानता को भारत के लिए प्राथमिक जोखिमों के रूप में पहचाना गया है

चर्चा में क्यों: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026 में साइबर सुरक्षा और आय/संपत्ति की असमानता को भारत के लिए प्राथमिक जोखिमों के रूप में पहचाना गया है, जबकि भू-आर्थिक टकराव (geoeconomic confrontation) को शीर्ष वैश्विक जोखिम बताया गया है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026 में भू-आर्थिक टकराव (geoeconomic confrontation) को सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम बताया गया है, जो सशस्त्र संघर्षों और चरम मौसम से भी अधिक है। भारत के संदर्भ में, यह रिपोर्ट विशेष रूप से साइबर सुरक्षा और आय/संपत्ति की असमानता को सबसे महत्वपूर्ण घरेलू जोखिमों के रूप में रेखांकित करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • रिपोर्ट / सूचकांकग्लोबल रिस्क रिपोर्ट (Global Risks Report) 2026: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) द्वारा प्रकाशित।
  • तथ्यजियो-इकोनॉमिक कन्फ्रंटेशन (Geoeconomic confrontation): इसे 2026 के लिए सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम (global risk) के रूप में पहचाना गया है।
  • तथ्यभारत के प्रमुख जोखिम: साइबर सिक्योरिटी (Cybersecurity) और आय एवं धन की असमानता।
  • विज्ञान-तकनीकतकनीकी जोखिम (Technological risks): इसमें मिसइन्फॉर्मेशन (misinformation), डिसइन्फॉर्मेशन (disinformation) और AI टेक्नोलॉजी के प्रतिकूल परिणाम शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: आगामी दशक में बढ़ती आय की असमानता और साइबर सुरक्षा के खतरे किस प्रकार भारत की आर्थिक स्थिरता और डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए प्रणालीगत जोखिम उत्पन्न करते हैं, चर्चा कीजिए।

  • डिजिटल भेद्यता: तेज़ी से बढ़ते डिजिटलीकरण से राज्य-प्रायोजित और आपराधिक साइबर-हमलों का खतरा बढ़ रहा है
  • संरचनात्मक असमानता: धन का संकेंद्रण समावेशी विकास में बाधा और सामाजिक टकराव पैदा कर रहा है
  • भू-आर्थिक अस्थिरता: सप्लाई चेन में रुकावट और ट्रेड बैरियर्स भारत की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित कर रहे हैं

मुख्य शब्द: भू-आर्थिक टकराव · आयनी असमानता · साइबर सिक्योरिटी · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर · सिस्टमैटिक रिस्क

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

केंद्रीय मंत्री जी

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificates) जमा करने के बाद, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तेलंगाना ग्राम पंचायतों को पहली ₹260 करोड़ की किस्त जारी करने की घोषणा की।

केंद्र सरकार तेलंगाना ग्राम पंचायतों के लिए कुल ₹2,500 करोड़ की राशि में से पहली किस्त के रूप में ₹260 करोड़ जारी कर रही है। वर्ष 2015-16 से अब तक, सरकार ने ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों के लिए ₹11,000 करोड़ से अधिक की राशि आवंटित की है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यतेलंगाना ग्राम पंचायतों को ₹260 करोड़ की पहली किस्त जारी की गई।
  • तथ्यतेलंगाना ग्राम पंचायत सुदृढ़ीकरण (strengthening) के लिए कुल आवंटन ₹2,500 करोड़ है।
  • तथ्य2015–16 से अब तक ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों (local bodies) को कुल आवंटन ₹11,000 करोड़ से अधिक है।
  • संस्थाफंड्स की चरणबद्ध रिलीज (phased release) के लिए यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स (UCs) की आवश्यकता होती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में विकेंद्रीकृत नियोजन और ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के महत्व की चर्चा कीजिए।

  • राजकोषीय जवाबदेही: स्थानीय निकायों तक पारदर्शी फंड फ्लो सुनिश्चित करने के लिए यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट की ज़रूरत
  • विकेंद्रीकृत विकास: स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने के लिए पंचायतों को डायरेक्ट फंडिंग के जरिए सशक्त बनाना
  • फंडिंग में असमानता: केंद्र के आवंटन और ज़मीनी स्तर की बुनियादी ढाँचे की ज़रूरतों के बीच के अंतर को दूर करना

मुख्य शब्द: विकेंद्रीकृत योजना · राजकोषीय संघवाद · ग्राम पंचायत · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · उपयोगिता प्रमाणपत्र

GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)प्रीलिम्स

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट की प्रस्तुति की तारीखों और शेड्यूल की पुष्टि की है

चर्चा में क्यों: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट की प्रस्तुति की तारीखों और शेड्यूल की पुष्टि की है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी, 2026 को सुबह 11 बजे पेश किया जाएगा। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त होने के लिए निर्धारित है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्ययूनियन बजट 2026-27 की प्रस्तुति की तारीख: 1 फरवरी, 2026, सुबह 11 बजे।
  • तथ्यबजट सेशन की अवधि: 28 जनवरी से 2 अप्रैल, 2026।
  • पदनिर्मला सीतारमण: भारत की Finance Minister।
  • पदकिरेन रिजिजू: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राजकोषीय नीति के एक प्राथमिक साधन के रूप में केंद्रीय बजट के महत्व और भारत में सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • फ़िसकल मल्टीप्लायर: इंफ्रास्ट्रक्चर और नौकरी सृजन पर कैपिटल एक्सपेंडिचर का असर
  • राजस्व जुटाना: प्रोग्रेसिव टैक्सेशन और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के बीच संतुलन
  • एलोकेटिव एफिशिएंसी: फिस्कल फ्रेमवर्क में पब्लिक गुड्स बनाम सब्सिडी को प्राथमिकता देना

मुख्य शब्द: राजकोषीय नीति · बजटीय आवंटन · राजस्व व्यय · पूंजीगत व्यय · संसदीय प्रक्रिया

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकमेन्स

द हिंदू विश्लेषण भारत के शहरी परिदृश्य में एक संरचनात्मक बदलाव (structural shift) को रेखांकित करता है

चर्चा में क्यों: द हिंदू विश्लेषण भारत के शहरी परिदृश्य में एक संरचनात्मक बदलाव (structural shift) को रेखांकित करता है, जहाँ छोटे शहर प्रवासी श्रमिकों और कृषि-प्रसंस्करण (agro-processing) के प्राथमिक केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं।

भारत के छोटे शहर वर्तमान में लॉजिस्टिक्स नोड्स, कृषि-प्रसंस्करण केंद्रों और सेवा केंद्रों के रूप में कार्य कर रहे हैं। ग्रामीण गरीबी का यह शहरीकरण अनौपचारिक श्रम प्रथाओं और महानगरों पर केंद्रित नीतिगत फोकस के कारण बुनियादी ढांचे में अपर्याप्त निवेश की विशेषता रखता है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यछोटे शहर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों और ग्रामीण युवाओं को समाहित कर रहे हैं।
  • तथ्यभारत के कैपिटलिस्ट डेवलपमेंट मॉडल (capitalist development model) में छोटे शहर लॉजिस्टिक्स नोड्स और एग्रो-प्रोसेसिंग हब्स (agro-processing hubs) के रूप में कार्य करते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में छोटे शहरों के तीव्र शहरीकरण से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और यह स्पष्ट कीजिए कि यह महानगरों के विकास की तुलना में बुनियादी ढांचा नियोजन और श्रम विनियमन के लिए किस प्रकार एक विशिष्ट चुनौती प्रस्तुत करता है। चर्चा कीजिए।

  • गवर्नेंस गैप: अनौपचारिक श्रम को विनियमित करने और बुनियादी शहरी सुविधाएं प्रदान करने में स्थानीय सरकार की कमजोर क्षमता
  • प्लानिंग में असंतुलन: मेट्रोपॉलिटन कॉरिडोर की ओर पॉलिसी झुकाव से उभरते एग्रो-प्रोसेसिंग हब में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
  • सामाजिक-आर्थिक जोखिम: पर्याप्त सोशल सेफ्टी नेट या औपचारिक रोजगार के बिना ग्रामीण गरीबी का शहरीकरण

मुख्य शब्द: संरचनात्मक बदलाव · एग्रो-प्रोसेसिंग हब · ग्रामीण गरीबी का शहरीकरण · मेट्रोपॉलिटन-सेंट्रिक प्लानिंग · अनौपचारिक श्रम · समान विकास

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तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने सुरक्षा चिंताओं के कारण 10 मिनट की डिलीवरी प्रणाली को रोकने के लिए केंद्रीय श्रम मंत्री के हस्तक्षेप का स्वागत किया है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने सुरक्षा चिंताओं के कारण 10 मिनट की डिलीवरी प्रणाली को रोकने के लिए केंद्रीय श्रम मंत्री के हस्तक्षेप का स्वागत किया है।

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने अध्यक्ष सलाउद्दीन के नेतृत्व में त्वरित डिलीवरी की समय-सीमा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हस्तक्षेप किया और 10 मिनट की डिलीवरी प्रणाली को रोकने का निर्णय लिया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पदमनसुख मांडविया: भारत के केंद्रीय श्रम मंत्री।
  • तथ्य10-मिनट डिलीवरी सिस्टम को गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए असुरक्षित कार्य स्थितियों के स्रोत के रूप में पहचाना गया है।
  • संस्थाTGPWU: तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (Telangana Gig and Platform Workers’ Union)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था (platform economy) में गिग श्रमिकों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी गैप: औपचारिक रोजगार स्थिति की कमी से मानक श्रम सुरक्षा तक पहुँच में बाधा
  • सुरक्षा और कुशलता के बीच तालमेल: तेज़ डिलीवरी के लिए एल्गोरिथमिक दबाव बनाम डिलीवरी कर्मियों की शारीरिक सुरक्षा
  • कलेक्टिव बारगेनिंग: विकेंद्रीकृत वर्क मॉडल के तहत प्लेटफॉर्म वर्कर्स के यूनियन बनाने में चुनौतियां

मुख्य शब्द: गिग इकोनॉमी · व्यावसायिक सुरक्षा · प्लेटफ़ॉर्म लेबर · सामाजिक सुरक्षा · एल्गोरिद्मिक मैनेजमेंट

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकमेन्स

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक चुनौतियों और नीतिगत गलतियों के कारण विकासशील देशों में से एक चौथाई देशों की आय 2019 की तुलना में कम हो गई है

चर्चा में क्यों: वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक चुनौतियों और नीतिगत गलतियों के कारण विकासशील देशों में से एक चौथाई देशों की आय 2019 की तुलना में कम हो गई है।

वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने अगले वर्ष के लिए उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान 4% लगाया है। मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमित गिल ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान विकास दर बढ़ती युवा आबादी के लिए रोजगार पैदा करने के लिए अपर्याप्त है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यवर्ल्ड बैंक ने अगले साल उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए 4% की ग्रोथ का अनुमान लगाया है।
  • पदइन्दर्मित गिल वर्ल्ड बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट हैं।
  • तथ्यविकासशील देशों में से एक-चौथाई देशों में 2019 की तुलना में कम आय दर्ज की जा रही है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विकासशील देशों में आर्थिक स्थिरता (stagnation) के लिए उत्तरदायी कारकों का विश्लेषण कीजिए और युवा आबादी के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित करने हेतु नीतिगत उपायों का सुझाव दीजिए।

  • स्ट्रक्चरल बॉटलनैक: बढ़ती युवा श्रम शक्ति को सोखने के लिए वैश्विक ग्रोथ रेट्स अपर्याप्त
  • पॉलिसी-आधारित ठहराव: फ़िस्कल मिसमैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी और एजुकेशन में निवेश की कमी का असर
  • एक्सटर्नल शॉक: विकासशील अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर क्षेत्रीय युद्धों और अतों के बढ़ते प्रभाव

मुख्य शब्द: आर्थिक सुस्ती · समावेशी विकास · राजकोषीय अनुशासन · ह्यूमन कैपिटल इन्वेस्टमेंट · उभरते बाजार

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए

चर्चा में क्यों: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी दावोस में आयोजित होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इसका उद्देश्य राज्य के निवेशक-अनुकूल इकोसिस्टम (ecosystem) को प्रदर्शित करना और लाइफ साइंसेज पॉलिसी 2026-30 लॉन्च करना है।

प्रतिनिधिमंडल 19 से 23 जनवरी, 2026 तक स्विट्जरलैंड के दावोस (Davos) का दौरा करेगा। राज्य का लक्ष्य AI हब और लाइफ साइंसेज पॉलिसी 2026-30 शुरू करने के साथ-साथ IT, लाइफ साइंसेज, रिन्यूएबल एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश आकर्षित करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • स्थानडैवोस, स्विट्जरलैंड: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 की होस्ट सिटी।
  • तथ्यतेलंगाना की लाइफ साइंसेज पॉलिसी 2026-30: WEF 2026 में लॉन्च की गई एक राज्य-विशिष्ट नीति।
  • तथ्यनिवेश के लिए लक्षित क्षेत्र: IT, life sciences, renewable energy और manufacturing।
  • तथ्यVision 2047: तेलंगाना के इनोवेशन-आधारित विकास (innovation-led development) को निर्देशित करने वाला दीर्घकालिक विकास विजन।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राज्य-संचालित औद्योगिक नीतियों और विश्व आर्थिक मंच (WEF) जैसे वैश्विक मंचों में भागीदारी किस प्रकार वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को सुदृढ़ कर सकती है, चर्चा कीजिए।

  • निवेश आकर्षण: लाइफ साइंसेज और AI जैसे हाई-टेक सेक्टर्स में FDI सुरक्षित करने के लिए राज्य-विशिष्ट नीतियों का लाभ उठाना
  • ग्लोबल ब्रांडिंग: क्षेत्रीय इनोवेशन-आधारित विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को दिखाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: FDI · इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम · इनोवेशन-आधारित विकास · लाइफ साइंसेज पॉलिसी · वैल्यू चेन

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कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC) प्रोजेक्ट को रद्द करने का निर्देश दिया है

चर्चा में क्यों: कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC) प्रोजेक्ट को रद्द करने का निर्देश दिया है, क्योंकि यह परियोजना पिछले 25 वर्षों में शहर की भीड़ कम करने में विफल रही है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि 1995 में परियोजना की शुरुआत से अब तक, नियोजित 111 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे में से केवल 1 किलोमीटर का निर्माण किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाBMIC: बेंगलुरु-मैसूरु इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट की शुरुआत 1995 में हुई थी।
  • तथ्यBMIC एक्सप्रेसवे की कुल नियोजित लंबाई 111 किलोमीटर है।
  • पदकर्नाटक हाई कोर्ट: प्रोजेक्ट की विफलता और निर्देश की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में दीर्घकालिक नियोजन के बावजूद बड़े पैमाने की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के ठप होने के लिए उत्तरदायी संस्थागत और प्रशासनिक बाधाओं का विश्लेषण कीजिए।

  • प्लानिंग-एग्जीक्यूशन गैप: प्रोजेक्ट्स के अधूरे रहने के पीछे निरंतर राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धता की कमी
  • कानूनी अड़चनें: भारी मुकदमेबाजी और कॉन्ट्रैक्ट की जटिलताएं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में बाधा
  • अर्बन प्लानिंग की विफलता: रुके हुए कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स पर निर्भरता के कारण भीड़ कम करने की रणनीतियां बेअसर

मुख्य शब्द: इंफ्रास्ट्रक्चर में ठहराव · न्यायिक निगरानी · शहरी भीड़भाड़ कम करना · प्रशासनिक जवाबदेही · फ्रेमवर्क एग्रीमेंट

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केरल के कुडुम्बश्री (Kudumbashree) मिशन द्वारा अपने खाद्य सेवा क्षेत्र का विस्तार करने और लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 'मीट पॉइंट' टेकअवे काउंटर शुरू किए जा रहे हैं

चर्चा में क्यों: केरल के कुडुम्बश्री (Kudumbashree) मिशन द्वारा अपने खाद्य सेवा क्षेत्र का विस्तार करने और लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 'मीट पॉइंट' टेकअवे काउंटर शुरू किए जा रहे हैं।

कुदुम्बश्री (Kudumbashree) केरल में एक सामाजिक सशक्तिकरण कार्यक्रम है। इस पहल के तहत, पहले चरण में 'मीट प्रोडक्ट्स ऑफ इंडिया' (MPI) के साथ साझेदारी में 50 टेकअवे काउंटर शुरू करने की योजना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • योजनाकुदुम्बश्री (Kudumbashree): केरल राज्य में विशेष रूप से सक्रिय एक सामाजिक सशक्तिकरण कार्यक्रम।
  • तथ्यमुख्य बिंदु (Meat Point): पहले चरण में 50 टेकअवे काउंटर (takeaway counters) शुरू करने की योजना।
  • तथ्यMeat Products of India (MPI): इस प्रोजेक्ट के लिए चिकन और शाकाहारी व्यंजन (vegetarian dishes) प्रदान करने वाला प्राइवेट पार्टनर।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कुदुम्बश्री जैसे समुदाय-आधारित सशक्तिकरण मॉडल ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में समावेशी आर्थिक विकास और महिला उद्यमिता को किस प्रकार सुगम बना सकते हैं, चर्चा कीजिए।

  • संस्थागत तालमेल: सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के लिए मार्केट एक्सेस देने हेतु पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) का लाभ उठाना
  • आजीविका विविधीकरण: पारंपरिक माइक्रो-क्रेडिट से वैल्यू-ऐडेड फूड प्रोसेसिंग और रिटेल की ओर बदलाव
  • सोशल कैपिटल: लोकल फ़ूड सर्विस चेन को बढ़ाने के लिए कम्युनिटी ट्रस्ट का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: सामाजिक सशक्तिकरण · स्वयं सहायता समूह · समावेशी विकास · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · आजीविका सृजन

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEमेन्स

CREDAI ने मांग की है कि सरकार आगामी यूनियन बजट 2026 में मांग को पुनर्जीवित करने और रुके हुए प्रोजेक्ट्स (projects) को पूरा करने के लिए किफायती आवास (affordable housing) की मूल्य सीमा को ₹45 लाख से बढ़ाकर ₹80-90 लाख कर दे

चर्चा में क्यों: CREDAI ने मांग की है कि सरकार आगामी यूनियन बजट 2026 में मांग को पुनर्जीवित करने और रुके हुए प्रोजेक्ट्स (projects) को पूरा करने के लिए किफायती आवास (affordable housing) की मूल्य सीमा को ₹45 लाख से बढ़ाकर ₹80-90 लाख कर दे।

रियल एस्टेट इंडस्ट्री की संस्था CREDAI ने किफायती आवास (Affordable Housing) के लिए अधिकतम मूल्य सीमा (Price Ceiling) को बढ़ाकर ₹80-90 लाख करने की मांग की है। इस समूह ने वर्क कॉन्ट्रैक्ट्स पर GST कम करने और सेक्शन 80EEA के तहत अतिरिक्त ब्याज कटौती (Additional Interest Deduction) को बहाल करने का भी प्रस्ताव दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यवर्तमान किफायती आवास (Affordable Housing) की मूल्य सीमा: ₹45 लाख।
  • तथ्यप्रस्तावित किफायती आवास (Affordable Housing) के लिए मूल्य सीमा: ₹80-90 लाख।
  • अधिनियम / विधेयकSection 80EEA: होम लोन के लिए अतिरिक्त ब्याज कटौती (interest deduction) प्रदान करता है।
  • संस्थाCREDAI: भारत की एक प्रमुख रियल एस्टेट इंडस्ट्री बॉडी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बढ़ती मध्यम आय वाली जनसंख्या की आवास संबंधी मांगों को पूरा करने के लिए रियल एस्टेट क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में राजकोषीय नीति और बुनियादी ढाँचे की स्थिति की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय टकराव: राजस्व लक्ष्य बनाए रखते हुए वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर GST कटौती को संतुलित करना
  • क्रेडिट एक्सेसिबिलिटी: पहली बार घर खरीदने वालों के लिए EMI कम करने हेतु डेवलपर लिक्विडिटी की बाधाओं को दूर करना
  • अर्बन प्लानिंग: विशाखापट्टनम जैसे टियर 1 और टियर 2 शहरों में सप्लाई-डिमांड के अंतर को कम करना

मुख्य शब्द: राजकोषीय नीति · किफायती आवास · क्रेडिट फ्लो · इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति · डिमांड-सप्लाई गैप

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आंध्र प्रदेश सरकार ने नायडूपेटा में 8 GW का एकीकृत सोलर मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स स्थापित करने के लिए वेबसोल रिन्यूएबल प्राइवेट लिमिटेड (Websol Renewable Private Limited

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने नायडूपेटा में 8 GW का एकीकृत सोलर मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स स्थापित करने के लिए वेबसोल रिन्यूएबल प्राइवेट लिमिटेड (Websol Renewable Private Limited - WRPL) द्वारा ₹3,538 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है।

वेब्सोल रिन्यूएबल प्राइवेट लिमिटेड (WRPL) दो चरणों में 120 एकड़ से अधिक क्षेत्र में इस सुविधा का विकास करेगी। इसका व्यावसायिक उत्पादन जुलाई 2027 और जुलाई 2028 के बीच शुरू होने की संभावना है। प्रीमियर एनर्जीज, टाटा पावर और वोल्टसन जैसी अन्य कंपनियाँ भी इसी क्षेत्र में अपनी इकाइयाँ स्थापित कर रही हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यWebsol द्वारा 8 GW सोलर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए ₹3,538 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
  • स्थानआंध्र प्रदेश के नायडूपेटा में प्रस्तावित सोलर मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स (solar manufacturing complex) के लिए साइट चुनी गई है।
  • तथ्यइस प्रोजेक्ट को दो चरणों में 120 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है।
  • तथ्यकमर्शियल प्रोडक्शन (Commercial production) जुलाई 2027 और जुलाई 2028 के बीच शुरू होने की उम्मीद है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और फोटोवोल्टिक घटकों पर आयात निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से भारत में एकीकृत सौर विनिर्माण केंद्र स्थापित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • सप्लाई चेन रेज़िलिएंस: घरेलू ऊर्जा लागत को स्थिर करने के लिए आयातित सोलर सेल्स और मॉड्यूल्स पर निर्भरता कम करना
  • क्लस्टर इफ़ेक्ट: क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग के लिए लॉजिस्टिक्स और साझा इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने हेतु रीजनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का लाभ उठाना

मुख्य शब्द: नवीकरणीय ऊर्जा · मैन्युफैक्चरिंग हब · ऊर्जा सुरक्षा · निवेश का माहौल · सोलर फोटोवोल्टिक्स

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स + मेन्स

बैंक ऑफ बड़ौदा, RBL बैंक, यस बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (CIC) में RBI के उस फैसले के खिलाफ अपील की है

चर्चा में क्यों: बैंक ऑफ बड़ौदा, RBL बैंक, यस बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (CIC) में RBI के उस फैसले के खिलाफ अपील की है, जिसमें डिफॉल्टर की सूची और निरीक्षण रिपोर्ट (inspection reports) को सार्वजनिक करने की अनुमति दी गई है।

चार बैंकों (बैंक ऑफ बड़ौदा, RBL बैंक, यस बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) ने नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) और डिफॉल्टर लिस्ट (डिफॉल्टर सूचियाँ) के खुलासे पर RBI के रुख को चुनौती दी है। CIC ने इस मामले को निर्णय के लिए एक बड़ी बेंच (Larger Bench) के पास भेज दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाCIC: सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (Central Information Commission) वह संस्था है जो RBI के डिस्क्लोजर डिटरमिनेशन (disclosure determination) के खिलाफ अपील का फैसला करती है।
  • तथ्यबैंकों ने तर्क दिया कि रेगुलेटरी जानकारी (regulatory information) का खुलासा उनके कमर्शियल इंटरेस्ट (commercial interests) को नुकसान पहुँचाएगा।
  • संस्थाRBI: वह रेगुलेटर जिसने यह निर्धारित किया कि डिफॉल्टर (defaulters) और इंस्पेक्शन रिपोर्ट्स (inspection reports) से संबंधित जानकारी का खुलासा किया जा सकता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बैंकिंग क्षेत्र में चूककर्ताओं (defaulters) की सूची के प्रकटीकरण के संबंध में सूचना के अधिकार और वाणिज्यिक हितों के संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।

  • कमर्शियल कॉन्फिडेंशियलिटी: बैंक की कॉम्पिटिटिव पोजीशन को नुकसान पहुँचाने के जोखिम के मुकाबले NPA डेटा की पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाना
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: इंस्पेक्शन रिपोर्ट और डिफॉल्टर लिस्ट की सार्वजनिक प्रकृति तय करने में RBI की भूमिका

मुख्य शब्द: व्यावसायिक हित · पारदर्शिता · नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स · रेगुलेटरी डिस्क्लोजर · निर्णय

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEमेन्स

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSEs) के निजीकरण के लिए सरकार-संचालित दृष्टिकोण के बजाय मांग-आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए चार-सूत्रीय रणनीति का प्रस्ताव दिया है

चर्चा में क्यों: कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSEs) के निजीकरण के लिए सरकार-संचालित दृष्टिकोण के बजाय मांग-आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए चार-सूत्रीय रणनीति का प्रस्ताव दिया है।

CII ने लिस्टेड PSEs में सरकार की हिस्सेदारी को चरणबद्ध तरीके से घटाकर शुरू में 51% करने का सुझाव दिया है, जिससे लगभग ₹10 लाख करोड़ की राशि मुक्त हो सके। इस प्रस्ताव में रणनीतिक मार्गदर्शन के लिए एक समर्पित निकाय और उद्योग एवं कानूनी विशेषज्ञों के एक सलाहकार बोर्ड के साथ एक संस्थागत ढांचा (Institutional Framework) स्थापित करना शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यCII ने अनुमान लगाया है कि हिस्सेदारी को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 51% करने से ₹10 लाख करोड़ की पूंजी (capital) मुक्त हो सकती है।
  • संस्थाCII (Confederation of Indian Industry) वह संस्था है जो निजीकरण का रोडमैप (privatization roadmap) प्रस्तावित कर रही है।
  • तथ्यलिस्टेड PSEs में सरकारी हिस्सेदारी कम करने का प्रस्तावित शुरुआती लक्ष्य 51% है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSEs) के लिए सरकार-आधारित मॉडल से मांग-आधारित निजीकरण मॉडल की ओर संक्रमण के आर्थिक और राजकोषीय निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय सुदृढ़ीकरण: इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए उपलब्ध कैपिटल का इस्तेमाल और राजकोषीय घाटा कम करना
  • मार्केट-ड्रिवन वैल्यूएशन: प्रशासनिक प्राथमिकताओं के बजाय निवेशकों की दिलचस्पी और वैल्यूएशन की उम्मीदों के साथ निजीकरण के लक्ष्यों को जोड़ना
  • संस्थागत निगरानी: विनिवेश की प्रक्रियाओं को अनुमानित बनाने के लिए एक प्रोफेशनल मैनेजमेंट टीम और एडवाइजरी बोर्ड की स्थापना

मुख्य शब्द: विनिवेश · राजकोषीय सुदृढ़ीकरण · सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम · पूंजी जुटाना · डिमांड-लेड अप्रोच

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

भारतीय रेलवे ने प्रीमियम प्राइसिंग मॉडल और सभी बर्थ के लिए सख्त 'नो-वेटलिस्ट' (no-waitlist) नीति के साथ वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू की हैं

चर्चा में क्यों: भारतीय रेलवे ने प्रीमियम प्राइसिंग मॉडल और सभी बर्थ के लिए सख्त 'नो-वेटलिस्ट' (no-waitlist) नीति के साथ वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू की हैं।

वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के किराए ₹960 (400 किमी तक के लिए 3AC) से लेकर ₹1.33 लाख (3,500 किमी के लिए 1AC) तक हैं। रेलवे बोर्ड ने यह अनिवार्य किया है कि अग्रिम आरक्षण अवधि (advance reservation period) के पहले दिन से ही सभी बर्थ उपलब्ध होंगे और इसमें RAC या वेटलिस्ट की सुविधा नहीं होगी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यवंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस 1AC टिकट का पीक फेयर: 3,500 किलोमीटर के लिए ₹1.33 लाख।
  • तथ्यवंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस 3AC टिकट का शुरुआती किराया: 400 km तक की यात्रा के लिए ₹960।
  • तथ्यबुकिंग पॉलिसी: वंदे भारत स्लीपर के लिए कोई भी RAC या वेटलिस्टेड टिकट स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
  • तथ्यटिकटिंग: सभी टिकट डिजिटल रूप से खरीदे जाने चाहिए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वंदे भारत स्लीपर जैसी प्रीमियम रेल सेवाओं की शुरुआत, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की आवश्यकता और किफायती सार्वजनिक परिवहन प्रदान करने के उद्देश्य के बीच संतुलन को किस प्रकार स्थापित करती है? चर्चा कीजिए।

  • सेवा का स्तरीकरण: सामाजिक समावेश को प्रभावित करने वाला दो-स्तरीय रेल सिस्टम बनाने का जोखिम
  • रेवेन्यू मॉडल: हाई-मार्जिन प्रीमियम फेयर और किफायती पब्लिक मोबिलिटी के जनादेश के बीच संतुलन
  • डिजिटल डिवाइड: अनिवार्य टिकट खरीदने के लिए डिजिटल एक्सेस न होने वाले यात्रियों के बाहर होने की संभावना

मुख्य शब्द: सार्वजनिक बुनियादी ढांचा · सेवा का स्तरीकरण · डिजिटल इन्क्लूजन · प्रीमियमिज़ेशन · लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स + मेन्स

केरल के वित्त मंत्री के.एन

चर्चा में क्यों: केरल के वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने केंद्र सरकार से आपदा से जुड़े वित्तीय जोखिमों को कम करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में 'कैटास्ट्रोफी बॉन्ड्स' (catastrophe bonds) को शामिल करने का अनुरोध किया है।

कैटास्ट्रोफी बॉन्ड्स (Catastrophe bonds) ऐसे वित्तीय उपकरण हैं जो प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े जोखिम को पूंजी बाजारों (capital markets) में स्थानांतरित करते हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य के बजट पर दबाव कम करना और आपदा राहत कार्यों को गति देना है। इसी तरह के तंत्र को मेक्सिको और फिलीपींस में लागू किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यCatastrophe bonds: ऐसे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स (Financial instruments) जो प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कैपिटल मार्केट्स (Capital markets) में ट्रांसफर करते हैं।
  • स्थानमेक्सिको और फिलीपींस: वे देश जिन्होंने पहले कैटास्ट्रोफ बॉन्ड्स (catastrophe bonds) लागू किए हैं।
  • तथ्ययूनियन बजट 2026-27: केरल ने इन बॉन्ड्स को शामिल करने के लिए विशेष रूप से इसी बजट साइकिल की मांग की थी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: केरल जैसे आपदा-प्रवण राज्यों में आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए 'कैटास्ट्रोफी बॉन्ड्स' (आपदा बॉन्ड) किस प्रकार एक व्यवहार्य राजकोषीय तंत्र के रूप में कार्य कर सकते हैं, चर्चा कीजिए।

  • राजकोषीय स्थिरता: बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राज्य के खजाने पर दबाव कम करना
  • मार्केट इंटीग्रेशन: ग्लोबल इन्वेस्टर्स के बीच भौगोलिक रिस्क को बांटने और डाइवर्सिफाई करने के लिए कैपिटल मार्केट्स का इस्तेमाल
  • संस्थागत समन्वय: रिस्क असेसमेंट और बॉन्ड इश्यूएंस फ्रेमवर्क पर केंद्र-राज्य तालमेल की ज़रूरत

मुख्य शब्द: रिस्क ट्रांसफर · राजकोषीय संघवाद · डिजास्टर रिस्क फाइनेंसिंग · कैपिटल मार्केट्स · क्लाइमेट रेजिलिएंस

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासमेन्स

कर्नाटक में ट्रेड यूनियन राज्य सरकार द्वारा संशोधित न्यूनतम मजदूरी लागू करने में हो रही देरी को चुनौती दे रहे हैं

चर्चा में क्यों: कर्नाटक में ट्रेड यूनियन राज्य सरकार द्वारा संशोधित न्यूनतम मजदूरी लागू करने में हो रही देरी को चुनौती दे रहे हैं। उनका तर्क है कि नए लेबर कोड्स (Labour Codes) कानूनी रूप से ऐसे संशोधनों पर रोक नहीं लगाते हैं।

कर्नाटक श्रम विभाग ने ₹19,000 से ₹31,000 प्रति माह तक के न्यूनतम वेतन संशोधन का मसौदा अधिसूचित किया है। 11 यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने वाली ट्रेड यूनियनों की संयुक्त समिति, संशोधन प्रक्रिया में नौ साल की देरी के बावजूद, इसे लागू करने की वकालत कर रही है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यकर्नाटक में न्यूनतम वेतन (minimum wage) के प्रस्तावित संशोधनों की रेंज ₹19,000 से ₹31,000 प्रति माह के बीच है।
  • संस्थाट्रेड यूनियंस की जॉइंट कमेटी (Joint Committee of Trade Unions): कर्नाटक में 11 ट्रेड यूनियंस का प्रतिनिधित्व करने वाला एक अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन (umbrella organization)।
  • पदकर्नाटक में संशोधित वेतन लागू करने पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पास है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने में न्यूनतम मजदूरी संशोधनों के महत्व और श्रम एवं पूंजी के मध्य मध्यस्थता करने में ट्रेड यूनियनों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: नियोक्ता की कानूनी चुनौतियों और वैधानिक वेतन संशोधन आदेशों के बीच टकराव
  • लेबर प्रोटेक्शन: औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और श्रमिकों के लिए उचित वेतन की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • संस्थागत देरी: अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर के सामाजिक-आर्थिक कल्याण पर प्रशासनिक सुस्ती का असर

मुख्य शब्द: न्यूनतम वेतन · लेबर कोड · ट्रेड यूनियन · औद्योगिक संबंध · निर्वाह मजदूरी · सामाजिक-आर्थिक कल्याण

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक कार्यक्षेत्र (Global Workspace) प्रदान करने के लिए कोट्टारक्कारा में केरल की पहली वर्क नियर होम (Work Near Home

चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक कार्यक्षेत्र (Global Workspace) प्रदान करने के लिए कोट्टारक्कारा में केरल की पहली वर्क नियर होम (Work Near Home - WNH) सुविधा का उद्घाटन करने वाले हैं।

कोट्टारक्कारा में इस सुविधा को 6 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ विकसित किया गया है। इसका लक्ष्य कम से कम 5,000 रोजगार के अवसर पैदा करना है और इसके शुरू होने से पहले ही इसे 60 आरक्षण प्राप्त हो चुके हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यकेरल की पहली Work Near Home सुविधा में ₹6 करोड़ से अधिक का निवेश।
  • तथ्यWNH फैसिलिटी द्वारा सृजित किए जाने वाले टारगेट जॉब ऑपरच्युनिटीज: कम से कम 5,000।
  • स्थानपहले Work Near Home फैसिलिटी की लोकेशन: कोट्टारक्करा, केरल।
मेन्स के लिए

प्रश्न: केरल में बुनियादी ढांचे और डिजिटल कनेक्टिविटी की चुनौतियों का समाधान करते हुए, 'वर्क नियर होम' (Work Near Home) मॉडल किस प्रकार ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार को सुगम बना सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण हब्स में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और भरोसेमंद बिजली की ज़रूरत
  • आर्थिक विकेंद्रीकरण: लोकल लेवल पर ग्लोबल-स्टैंडर्ड वर्कस्पेस बनाकर शहरी पलायन को कम करना
  • स्किल-मैचिंग: राज्य-स्तरीय पहलों के जरिए स्थानीय टैलेंट को ग्लोबल रिमोट-वर्क डिमांड से जोड़ना

मुख्य शब्द: आर्थिक विकेंद्रीकरण · रिमोट वर्क इंफ्रास्ट्रक्चर · रोज़गार सृजन · डिजिटल कनेक्टिविटी · वर्क-फ्रॉम-होम मॉडल

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स + मेन्स

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoS&PI) ने 2022-23 और 2023-24 के लिए घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (Household Consumption Expenditure Survey - HCES) के परिणाम जारी किए हैं, जिससे भारत के मासिक प्रति व्यक्ति व्यय (Monthly Per Capita Expenditure

चर्चा में क्यों: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoS&PI) ने 2022-23 और 2023-24 के लिए घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (Household Consumption Expenditure Survey - HCES) के परिणाम जारी किए हैं, जिससे भारत के मासिक प्रति व्यक्ति व्यय (Monthly Per Capita Expenditure - MPCE) के आंकड़ों को अपडेट किया गया है।

HCES के परिणाम दर्शाते हैं कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खाद्य व्यय में कमी आई है, जबकि फलों, अंडों, मछली और प्रोसेस्ड फूड (processed foods) पर होने वाले खर्च में वृद्धि हुई है। यह डेटा शहरी आवास के किराए के हिस्से में महत्वपूर्ण वृद्धि को भी रेखांकित करता है, जो बदलते उपभोग पैटर्न (consumption patterns) को दर्शाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाMoS&PI: Ministry of Statistics and Programme Implementation वह संस्था है जो HCES के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यHCES 2022-23 और 2023-24 का डेटा बुनियादी खाद्य जरूरतों से हटकर आकांक्षात्मक (aspirational) और सेवा-उन्मुख खर्च की ओर बदलाव दर्शाता है।
  • तथ्यनवीनतम सर्वे के परिणामों में अर्बन हाउसिंग रेंट शेयर (Urban housing rent share) में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: घरेलू उपभोग के प्रतिमानों में बुनियादी आवश्यकताओं से महत्वाकांक्षी व्यय की ओर होने वाला बदलाव भारत के विकसित होते आर्थिक संक्रमण और शहरीकरण को किस प्रकार प्रतिबिंबित करता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • उपभोग में बदलाव: बुनियादी भोजन से हटकर हाई-वैल्यू प्रोसेस्ड फूड और सर्विसेज की ओर बदलाव
  • शहरीकरण का प्रभाव: बढ़ते हाउसिंग रेंट शेयर शहरी केंद्रों की माइग्रेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड को दर्शाते हैं
  • एंगेल का नियम: बढ़ती प्रति व्यक्ति आय और घटते खाद्य व्यय के अनुपात के बीच संबंध

मुख्य शब्द: हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे · मासिक प्रति व्यक्ति खर्च · एंगेल का नियम · आकांक्षी खर्च · आर्थिक बदलाव · शहरीकरण के रुझान

केंद्रीय मंत्री सर्बानंदा सोनोवाल ने विशाखापट्टनम में एक शिप बिल्डिंग क्लस्टर (Ship building cluster) विकसित करने की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री सर्बानंदा सोनोवाल ने विशाखापट्टनम में एक शिप बिल्डिंग क्लस्टर (Ship building cluster) विकसित करने की घोषणा की है, ताकि इसे जहाज डिजाइन और अनुसंधान के लिए एक राष्ट्रीय हब के रूप में स्थापित किया जा सके।

विशाखापट्टनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) और ए.पी. मैरिटाइम बोर्ड के बीच एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह परियोजना भारत के 'ब्लू इकोनॉमी' विजन और भारत को शीर्ष पांच समुद्री देशों में शामिल करने के 'अमृत काल' लक्ष्य के अनुरूप है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • स्थानविशाखापट्टनम: प्रस्तावित शिप बिल्डिंग क्लस्टर और शिप डिजाइन के लिए नेशनल हब का स्थान।
  • संस्थाविशाखापट्टनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA): स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक।
  • तथ्यअमृत काल: भारत को शीर्ष पांच समुद्री देशों (maritime nations) में शामिल करने का प्रधानमंत्री का लक्ष्य।
  • तथ्यब्लू इकोनॉमी (Blue Economy): समुद्री विकास पहल के लिए व्यापक विजन।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विशाखापट्टनम जैसे विशिष्ट समुद्री समूहों (maritime clusters) का विकास किस प्रकार भारत की 'ब्लू इकोनॉमी' और वैश्विक समुद्री व्यापार में उसकी स्थिति को सुदृढ़ कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: SPV मॉडल के जरिए पोर्ट अथॉरिटी और स्टेट मैरीटाइम बोर्ड के सहयोग का लाभ उठाना
  • स्ट्रेटेजिक पोजीशनिंग: सर्विस-आधारित पोर्ट से हाई-वैल्यू शिप डिज़ाइन और रिसर्च हब में बदलाव

मुख्य शब्द: ब्लू इकोनॉमी · स्पेशल पर्पस व्हीकल · मैरिटाइम क्लस्टर · शिप डिज़ाइन · अमृत काल

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने MSMEs को साझा बुनियादी ढांचा और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए ₹200 करोड़ के ए.पी

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने MSMEs को साझा बुनियादी ढांचा और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए ₹200 करोड़ के ए.पी. क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (AP-CDP) को मंजूरी दी है।

AP-CDP आंध्र प्रदेश में 45 कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स (CFCs) स्थापित करनेकरनेकी एक पांच वर्षीय पहल है। इसका लक्ष्य प्रिंटिंग, कृषि आधारित उद्योगों, सोने और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को लक्षित करना है, जिसका उद्देश्य 1,840 से अधिक MSMEs को लाभ पहुँचाना है।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्यAP-CDP बजट: ₹200 करोड़।
  • तथ्यस्थापित किए जाने वाले Common Facility Centres (CFCs) की संख्या: 45।
  • तथ्यलक्षित रोजगार: 7,500 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां।
  • तथ्यटारगेटेड MSMEs: 1,840 से अधिक।
  • स्थानराज्य: आंध्र प्रदेश।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विनिर्माण और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में सामान्य सुविधा केंद्रों (Common Facility Centres) की स्थापना किस प्रकार सहायक हो सकती है, चर्चा कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: साझा टेक्नोलॉजी एसेट्स के जरिए छोटी इकाइयों के लिए हाई कैपिटल एक्सपेंडिचर कम करना
  • रोज़गार सृजन: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को सीधे नौकरी के अवसर से जोड़ना

मुख्य शब्द: MSME विकास · कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स · इंडस्ट्रियल क्लस्टरिंग · इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट · रोजगार सृजन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर नोड्स में निवेश ₹34,000 करोड़ से अधिक हो गया है

चर्चा में क्यों: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर नोड्स में निवेश ₹34,000 करोड़ से अधिक हो गया है।

यह निवेश उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के भीतर छह नोड्स (nodes) को कवर करता है। प्रमुख विनिर्माण इकाइयों में अशोक लेलैंड और एक ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) फैक्ट्री शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यUP डिफेंस कॉरिडोर नोड्स में कुल निवेश ₹34,000 करोड़ से अधिक हो गया है।
  • पदराजनाथ सिंह वर्तमान में भारत के Defence Minister हैं।
  • तथ्यBrahMos Aerospace और Ashok Leyland को इस कॉरिडोर में प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग एंटिटीज (manufacturing entities) के रूप में उद्धृत किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विशिष्ट रक्षा गलियारों (defence corridors) के विकास का एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्रों में भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल में योगदान का विश्लेषण कीजिए।

  • सप्लाई चेन इंटीग्रेशन: महत्वपूर्ण हथियारों और गोला-बारूद के पुर्जों पर आयात निर्भरता कम करना
  • रोजगार सृजन: स्थानीय युवाओं के लिए हाई-स्किल मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स बनाने के लिए राज्य-विशिष्ट नीतियों का लाभ उठाना
  • क्लस्टर इफ़ेक्ट: प्रोडक्शन कॉस्ट कम करने के लिए एयरोस्पेस यूनिट्स और हैवी व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स के बीच तालमेल

मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · डिफेंस कॉरिडोर · मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर · आयात प्रतिस्थापन · औद्योगिक नीति

GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)प्रीलिम्स + मेन्स

केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक PIL का विरोध किया है

चर्चा में क्यों: केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक PIL का विरोध किया है, जिसमें एयर प्यूरीफायर को 'मेडिकल डिवाइसेस' के रूप में पुन: वर्गीकृत करने की मांग की गई है ताकि उनके GST रेट को 18% से घटाकर 5% किया जा सके।

केंद्र ने तर्क दिया कि कर वर्गीकरण (tax classification) से जुड़े निर्णय विशेष रूप से GST काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से अनुमेय है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यएयर प्यूरीफायर पर वर्तमान GST रेट: 18%।
  • तथ्यमेडिकल डिवाइसेस के लिए GST रेट: 5%।
  • संस्थाGST काउंसिल: टैक्स रेट और क्लासिफिकेशन (classification) पर निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार संस्था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जीएसटी (GST) व्यवस्था के अंतर्गत कर संरचनाओं और वर्गीकरणों के निर्धारण में न्यायिक पुनरावलोकन और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र के बीच संवैधानिक सीमाओं का विश्लेषण कीजिए।

  • ज्यूरिसडिक्शनल कॉन्फ्लिक्ट: GST काउंसिल की स्वायत्त टैक्स-सेटिंग शक्तियों पर न्यायिक ओवरसाइट की सीमा का निर्धारण
  • राजकोषीय नीति स्वायत्तता: सार्वजनिक स्वास्थ्य आधारित टैक्स रियायत की ज़रूरत और समान टैक्स वर्गीकरण के सिद्धांत के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · GST काउंसिल · राजकोषीय संघवाद · टैक्स क्लासिफिकेशन · जनहित याचिका

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बढ़ते GCC इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए बेंगलुरु में अपना पहला ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (Global Capability Centre

चर्चा में क्यों: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बढ़ते GCC इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए बेंगलुरु में अपना पहला ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (Global Capability Centre - GCC) शुरू किया है।

SBI के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने बेंगलुरु में GCC और 11 नई शाखाओं का उद्घाटन किया। बैंक ने विशेष रूप से GCC की जरूरतों के लिए एक समर्पित रिलेशनशिप मैनेजमेंट टीम भी स्थापित की है और कर्नाटक में सामुदायिक विकास के लिए CSR योगदान की घोषणा की है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थास्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने वाला पहला भारतीय बैंक है।
  • स्थानGCC और 11 नई शाखाओं का उद्घाटन कर्नाटक के बेंगलुरु में किया गया।
  • तथ्यSBI ने GCC की जरूरतों को पूरा करने के लिए बेंगलुरु में एक समर्पित रिलेशनशिप मैनेजमेंट टीम (Relationship Management Team) स्थापित की है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के उद्भव से वैश्विक सेवा मूल्य श्रृंखला (Global Services Value Chain) में देश की स्थिति पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: ग्लोबल फर्म्स के लिए हाई-एंड बैक-एंड सेवाएँ देने हेतु बेंगलुरु के टेक इकोसिस्टम का लाभ उठाना
  • रोज़गार में बदलाव: पारंपरिक BPO से हाई-स्किल GCC मॉडल की ओर बदलाव जिसमें उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता की ज़रूरत है

मुख्य शब्द: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर · सेवा निर्यात · वैल्यू चेन · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

तेलंगाना के परिवहन विभाग ने गैर-परिवहन मोटरसाइकिलों और मोटर कारों के लिए डीलर-पॉइंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना के परिवहन विभाग ने गैर-परिवहन मोटरसाइकिलों और मोटर कारों के लिए डीलर-पॉइंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया है, ताकि RTO में वाहनों को भौतिक रूप से पेश करने की आवश्यकता को समाप्त किया जा सके।

अधिकृत वाहन डीलर अब इनवॉइस, बिक्री प्रमाणपत्र, रोड-वर्थिनेस सर्टिफिकेट (road-worthiness certificates) और बीमा विवरण सहित ऑनलाइन आवेदन जमा करेंगे। यह सिस्टम विशेष रूप से अधिकृत डीलरों द्वारा बेची जाने वाली पूरी तरह से निर्मित नॉन-ट्रांसपोर्ट मोटरसाइकिलों और मोटर कारों पर लागू होता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्ययह सिस्टम पूरी तरह से बनी हुई नॉन-ट्रांसपोर्ट मोटरसाइकिलों और मोटर कारों पर लागू होता है।
  • संस्थातेलंगाना में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट (Transport Department) कार्यान्वयन निकाय (implementing body) है।
  • तथ्यऑनलाइन सबमिशन के लिए आवश्यक दस्तावेजों में इनवॉइस (invoices), सेल सर्टिफिकेट (sale certificates), रोड-वर्थिनेस सर्टिफिकेट (road-worthiness certificates) और इंश्योरेंस डिटेल्स (insurance details) शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: परिवहन क्षेत्र में डीलर-पॉइंट पंजीकरण प्रणाली की ओर बढ़ते रुझान किस प्रकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार करने में सुगमता) को बढ़ा सकते हैं और प्रशासनिक दक्षता में सुधार कर सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।

  • प्रशासनिक दक्षता: सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया तेज़ करने के लिए RTO में लोगों की भीड़ कम करना
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: डीलर-आधारित वेरिफिकेशन और मजबूत एंटी-फ्रॉड मैकेनिज्म की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस: व्यक्तिगत उपभोक्ताओं के लिए वाहन स्वामित्व लाइफसाइकिल को आसान बनाना

मुख्य शब्द: ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · प्रशासनिक दक्षता · डिजिटल गवर्नेंस · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · सार्वजनिक सेवा वितरण

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के

चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हाई-टेक विकास की ओर बदलाव की घोषणा की और GCCs और AI रिसर्च को आकर्षित करने के लिए 'तमिलनाडु डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-26' लॉन्च की।

राज्य ने उमैजिनटीएन (UmagineTN) के चौथे संस्करण के दौरान 'तमिलनाडु डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-26' लॉन्च की। यह नीति उन समझौता ज्ञापनों (MoUs) द्वारा समर्थित है, जिनमें बेटर कंप्यूट वर्क्स इंक (Better Compute Works Inc.) से ₹5,000 करोड़ का निवेश और इरोस जेन एआई (EROS Gen AI) से ₹4,500 करोड़ का निवेश शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यBetter Compute Works Inc. द्वारा तमिलनाडु में ₹5,000 करोड़ का निवेश।
  • तथ्यEROS Gen AI (Immerso Innovation Venture Pvt Ltd) में निवेश: ₹4,500 करोड़।
  • योजनातमिलनाडु डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी (Deep Tech Startup Policy) 2025-26।
  • स्थानUmagineTN: इसका चौथा एडिशन तमिलनाडु में आयोजित किया गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में डीप-टेक (deep-tech) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर केंद्रित राज्य-संचालित औद्योगिक नीतियां किस प्रकार समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक उत्थान को गति दे सकती हैं, चर्चा कीजिए।

  • इंसेंटिव स्ट्रक्चर: लो-एंड IT सेवाओं से हाई-वैल्यू R&D की ओर बढ़ने के लिए PLI-स्टाइल राज्य इंसेंटिव का लाभ उठाना
  • ह्यूमन कैपिटल अलाइनमेंट: पारंपरिक IT लेबर और स्पेशलाइज्ड AI/डीप टेक जरूरतों के बीच स्किल गैप को कम करना

मुख्य शब्द: डीप टेक · ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स · R&D इकोसिस्टम · सामाजिक उत्थान · स्टार्टअप पॉलिसी

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