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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) टोल से जुड़ी भीड़ को कम करने के लिए 117 किलोमीटर लंबे बेंगलुरु-मैसूर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (NH-275) पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग पायलट प्रोजेक्ट की संभावना तलाश रहा है

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) टोल से जुड़ी भीड़ को कम करने के लिए 117 किलोमीटर लंबे बेंगलुरु-मैसूर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (NH-275) पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग पायलट प्रोजेक्ट की संभावना तलाश रहा है।

पृष्ठभूमि

MLFF सिस्टम पारंपरिक टोल बूथों के स्थान पर सैटेलाइट-आधारित GPS तकनीक और हाई-परफॉर्मेंस RFID रीडर्स से लैस ओवरहेड गैन्ट्रीज (overhead gantries) का उपयोग करेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट को 117 किलोमीटर लंबे बेंगलुरु-मैसूर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (NH-275) पर लागू किया जाएगा।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाNHAI: नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया।
  • तथ्यMLFF पायलट प्रोजेक्ट की लोकेशन: 117-किमी बेंगलुरु-मैसूर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (NH-275)।
  • विज्ञान-तकनीकMLFF तकनीक के घटक: ओवरहेड गैन्ट्रीज़ (overhead gantries), सैटेलाइट-आधारित GPS और हाई-परफॉरमेंस RFID रीडर्स।
  • तथ्यMLFF मैकेनिज्म: वाहनों के चलते रहने के दौरान ऑटोमैटिक टोल डिडक्शन (automatic toll deduction)।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के तेजी से विस्तारित होते राजमार्ग नेटवर्क में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग प्रणाली को अपनाने से लॉजिस्टिक दक्षता और बुनियादी ढांचा प्रबंधन को कैसे सुधारा जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: फ्रेट टर्नअराउंड समय सुधारने के लिए 'स्टॉप-एंड-गो' देरी में कमी
  • तकनीकी एकीकरण: अलग-अलग इलाकों में हाई-फ़्रीक्वेंसी RFID और GPS सिंक्रोनाइज़ेशन बनाए रखने की चुनौतियां
  • राजस्व की चोरी: तकनीकी बाईपास के जोखिम और मजबूत रियल-टाइम ऑडिटिंग फ्रेमवर्क की ज़रूरत

मुख्य शब्द: लॉजिस्टिक कुशलता · इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट · स्मार्ट मोबिलिटी · राजस्व की चोरी · तकनीकी एकीकरण

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।