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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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केरल परिवहन विभाग ने खारिज किए गए सिल्वरलाइन हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के विकल्प के रूप में 583 किमी लंबे रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है

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चर्चा में क्यों

केरल परिवहन विभाग ने खारिज किए गए सिल्वरलाइन हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के विकल्प के रूप में 583 किमी लंबे रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।

पृष्ठभूमि

यह परियोजना तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक 583 किमी तक फैली हुई है। इसका पहला चरण, 284 किमी लंबी त्रावणकोर लाइन, 2027 से 2033 के बीच कार्यान्वित होने वाली है, जिसकी अनुमानित लागत ₹1,92,780 करोड़ है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यRRTS प्रोजेक्ट की लंबाई: तिरुवनंतपुरम से कसरगोड तक 583 किमी।
  • तथ्यप्रथम चरण (Travancore line) की लंबाई: 284 किलोमीटर।
  • तथ्यपहले चरण के लिए अनुमानित लागत: ₹1,92,780 करोड़।
  • तथ्यपहले चरण के लिए एग्जीक्यूशन टाइमलाइन (Execution timeline): 2027 से 2033।
  • संस्थाकेरल ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट इस प्रस्ताव के लिए नोडल बॉडी है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में शहरी भीड़भाड़ को कम करने और सतत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने में बहु-आयामी पारगमन प्रणालियों (multimodal transit systems) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • अंतर-सरकारी समन्वय: राज्य और केंद्र सरकारों के बीच तकनीकी आपत्तियों और क्लीयरेंस की बाधाओं को दूर करना
  • मोडल शिफ्ट डायनेमिक्स: प्राइवेट व्हीकल पर निर्भरता से इंटीग्रेटेड रेल-मेट्रो नेटवर्क की ओर बदलाव
  • राजकोषीय व्यवहार्यता: राज्यों में क्षेत्रीय रेल बुनियादी ढांचे के लिए उच्च पूंजीगत व्यय का प्रबंधन

मुख्य शब्द: मल्टीमॉडल ट्रांजिट · क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · सस्टेनेबल मोबिलिटी · पूंजीगत व्यय

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।