यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के कृषि भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 586 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: फसल पैटर्न एवं सिंचाई (237) · MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षा (107) · पशुपालन, मत्स्य पालन एवं संबद्ध क्षेत्र (101) · भूमि सुधार (76) · खाद्य प्रसंस्करण एवं आपूर्ति श्रृंखला (40) · कृषि सब्सिडी एवं सहायता (25)
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने पोषण स्तर में सुधार के लिए जनवरी 2026 से पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत ₹20 प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं का आटा बेचने की घोषणा की है।
आंध्र प्रदेश का उपभोक्ता मामले, खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग 'टाइड-ओवर' (Tide-Over) श्रेणी की गेहूं को आटे में परिवर्तित करेगा। ₹20 प्रति किलोग्राम की इस कीमत में पिसाई, पैकिंग, परिवहन, हैंडलिंग, प्रशासनिक खर्च और फेयर प्राइस शॉप (Fair Price Shop) डीलरों के लिए ₹1 प्रति किलोग्राम का कमीशन शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यआंध्र प्रदेश में गेहूं आटे की कीमत: जनवरी 2026 से ₹20 प्रति किलोग्राम प्रभावी।
संस्थाउपभोक्ता मामले, खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग: PDS और खाद्य आपूर्ति का प्रबंधन करने वाला राज्य निकाय।
अधिनियम / विधेयकNational Food Security Act, 2013: PDS और खाद्य सुरक्षा उपायों के लिए कानूनी ढांचा।
तथ्यफेयर प्राइस शॉप डीलर कमीशन: आटे की कीमत में ₹1 प्रति किलोग्राम शामिल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत कच्चे खाद्यान्न को प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में परिवर्तित करना किस प्रकार पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकता है और साथ ही राज्य सरकारों के लिए राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करने में कैसे सहायक हो सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
लॉजिस्टिक ओवरहेड्स: पिसाई और ट्रांसपोर्ट के खर्चों को सब्सिडी वाली प्राइस कैप के साथ संतुलित करना
पोषण संक्रमण: सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए कच्चे अनाज के वितरण से प्रोसेस्ड आटा की ओर बदलाव
राजकोषीय दबाव: प्रोसेस्ड फूड आइटम्स की सब्सिडी और कच्चे अनाज की खरीद के बीच तालमेल
मुख्य शब्द: सार्वजनिक वितरण प्रणाली · पोषण सुरक्षा · खाद्य प्रसंस्करण · राजकोषीय संघवाद · सब्सिडी वाली कीमतें
चर्चा में क्यों: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने टिकाऊ पर्यटन और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए भारत के सबसे पूर्वी गांव, डोंग में पहले 'सनराइज फेस्टिवल' (Sunrise Festival) की घोषणा की है।
डोंग को भारत के सबसे पूर्वी गाँव के रूप में पहचाना जाता है, जहाँ प्रतिदिन सूर्य की पहली किरणें भारतीय मिट्टी पर पड़ती हैं। यह उत्सव 29 दिसंबर, 2025 से 2 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया जाना निर्धारित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानडोंग (Dong): अरुणाचल प्रदेश में स्थित भारत का सबसे पूर्वी गाँव।
तथ्यसनराइज फेस्टिवल (Sunrise Festival): 29 दिसंबर, 2025 से 2 जनवरी, 2026 तक निर्धारित।
तथ्यफेस्टिवल गतिविधियाँ: इसमें स्वदेशी सनराइज सेरेमनी (sunrise ceremonies), सांस्कृतिक प्रदर्शन और गाइडेड ट्रेक्स (guided treks) शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में समुदाय-आधारित और संधारणीय पर्यटन को बढ़ावा देना किस प्रकार आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों में योगदान दे सकता है, चर्चा कीजिए।
आजीविका विविधीकरण: सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए स्वदेशी समुदायों के लिए गैर-कृषि आय पैदा करना
सांस्कृतिक संरक्षण: व्यावसायीकरण के खिलाफ लोक कला और कहानी सुनाने की परंपराओं को बचाना
इंफ्रास्ट्रक्चर बॉटलनैक: ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशंस की ज़रूरतों और इकोलॉजिकल सेंसिटिविटी के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सस्टेनेबल टूरिज्म · आजीविका सृजन · सांस्कृतिक संरक्षण · फ्रंटियर डेवलपमेंट · कम्युनिटी-लेड टूरिज्म
चर्चा में क्यों: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्पष्ट किया है कि भ्रामक लेबलिंग को रोकने के लिए केवल *कैमेलिया सिनेंसिस* (Camellia sinensis) पौधे से प्राप्त पेय को ही 'चाय' के रूप में बेचा जा सकता है।
FSSAI ने एक निर्देश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि 'Rooibos Tea', 'Herbal Tea' और 'Flower Tea' जैसे उत्पाद वर्तमान नियमों के तहत 'चाय' की श्रेणी में नहीं आते हैं। खाद्य व्यवसायों के लिए यह अनिवार्य है कि वे चाय की विशिष्ट वनस्पति संबंधी परिभाषा (botanical definition) का पालन करें।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यCamellia sinensis: वह विशिष्ट प्लांट स्पीशीज (plant species) जिसकी आवश्यकता FSSAI द्वारा किसी पेय को कानूनी रूप से 'tea' के रूप में बाजार में बेचने के लिए होती है।
संस्थाFSSAI: भारत में फूड लेबलिंग स्टैंडर्ड्स को स्पष्ट करने और फूड सेफ्टी को रेगुलेट करने के लिए जिम्मेदार संस्था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मानकीकृत खाद्य लेबलिंग और विनियामक निरीक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उपभोक्ता संरक्षण: सख्त बॉटैनिकल परिभाषाओं के ज़रिए भ्रामक मार्केटिंग प्रथाओं को रोकना
रेगुलेटरी एनफोर्समेंट: विविध और खंडित फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की निगरानी में चुनौतियां
मार्केट इंटीग्रिटी: 'टी' मार्केट सेगमेंट में गैर-टी उत्पादों को रोककर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: उपभोक्ता संरक्षण · रेगुलेटरी ओवरसाइट · मानकीकरण · बाज़ार में पारदर्शिता · खाद्य सुरक्षा
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करने के लिए पारंपरिक शिल्प और उत्पादों के लिए पांच नए भौगोलिक संकेत (Geographical Indication - GI) टैग प्राप्त करने के अंतिम चरण में है।
अंतिम अनुमोदन की प्रतीक्षा कर रहे पांचों मदों में नारायणपेट ज्वेलरी मेकिंग, हैदराबाद पर्ल्स और बंजारा ट्राइबल ज्वेलरी शामिल हैं। तेलंगाना ने टिकाऊ रोजगार पैदा करने की अपनी रणनीति के हिस्से के रूप में हाल के वर्षों में पहले ही दो GI टैग हासिल कर लिए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थाननारायणपेट ज्वेलरी मेकिंग और बंजारा ट्राइबल ज्वेलरी तेलंगाना से जुड़े उत्पाद हैं।
तथ्यहैदराबाद पर्ल्स (Hyderabad Pearls) उन पांच आइटम्स में से एक है जो वर्तमान में GI टैग अप्रूवल के अंतिम चरणों में हैं।
संस्थाGeographical Indication (GI) टैग्स का उपयोग पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और शिल्प (crafts) की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में भौगोलिक संकेत (GI) टैग किस प्रकार ग्रामीण आर्थिक विकास और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य कर सकते हैं, चर्चा कीजिए।
मार्केट डिफरेंशिएशन: ग्लोबल मार्केट्स में प्रीमियम प्राइसिंग के लिए अनोखी क्षेत्रीय पहचान का इस्तेमाल
ज्ञान का संरक्षण: औद्योगिक नकल और सांस्कृतिक विनियोग से स्वदेशी शिल्प कौशल की रक्षा
आजीविका सृजन: पारंपरिक शिल्प क्लस्टर्स को फॉर्मलाइज और ब्रांडिंग के जरिए स्थायी रोजगार पैदा करना
मुख्य शब्द: भौगोलिक संकेत · पारंपरिक ज्ञान · टिकाऊ रोज़गार · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · सांस्कृतिक विरासत
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कृषि और बागवानी विभागों को एक फसल कैलेंडर (Crop Calendar) तैयार करने का निर्देश दिया है। साथ ही, किसानों के हितों की रक्षा के लिए उन्होंने मिल मालिकों को धान की खरीद में अनियमितता न करने की चेतावनी दी है।
राज्य सरकार आम के किसानों को सब्सिडी और बोनस का भुगतान प्रदान करती है। साथ ही, किसानों की शिकायतों का निवारण करने के लिए 10 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यराज्य सरकार विशेष रूप से आम किसानों को सब्सिडी और बोनस भुगतान प्रदान करती है।
तथ्यमुख्यमंत्री ने कृषि और हॉर्टिकल्चर (Horticulture) विभागों को कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स यूटिलाइजेशन में सुधार करने का निर्देश दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आंध्र प्रदेश जैसी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्थाओं में किसानों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने में एकीकृत फसल कैलेंडर और कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के महत्व की चर्चा कीजिए।
लॉजिस्टिक्स की बाधा: कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से आम जैसे जल्दी खराब होने वाले फसलों की कटाई के बाद भारी बर्बादी
मार्केट इंटरवेंशन: राज्य के नेतृत्व वाले प्रोक्योरमेंट इंसेंटिव्स और मिलर-ड्रिवन अनियमितताओं को रोकने की ज़रूरत के बीच संतुलन
सूचना की कमी: फसल कैलेंडर का उपयोग करके कटाई चक्र को बाजार की मांग और लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता के साथ जोड़ना
मुख्य शब्द: कीमत की प्राप्ति · कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर · कटाई के बाद प्रबंधन · मार्केट इंटरवेंशन · लॉजिस्टिक्स ऑप्टिमाइजेशन
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे नवनिर्मित 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025' के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन करें।
विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025 का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को मजबूत करना और आजीविका के साधनों में विविधता लाना है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय विभिन्न राज्यों में जागरूकता अभियान की प्रगति की निगरानी करेगा।
संस्थामिशन की निगरानी के लिए ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय नोडल मंत्रालय है।
तथ्ययह योजना मजदूरी रोजगार (wage employment) और टिकाऊ आजीविका के अवसरों तक गारंटीड एक्सेस प्रदान करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025, भारत में ग्रामीण बेरोजगारी की समस्या के समाधान और आजीविका विविधीकरण को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक हो सकता है, चर्चा कीजिए।
इनक्लूजन गैप: ग्राम सभा की चर्चाओं में SC/ST और महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना
संस्थागत निगरानी: ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय की मॉनिटरिंग मैकेनिज्म
आजीविका विविधीकरण: मज़दूरी पर निर्भरता से टिकाऊ ग्रामीण आजीविका मॉडल की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: आजीविका विविधीकरण · ग्रामीण रोज़गार · ग्राम सभा · सामाजिक समावेश · सतत विकास
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश की DISCOMs ने नगर निगम के कचरे से बिजली बनाने के लिए चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी (waste-to-energy) प्लांट स्थापित करने हेतु निजी डेवलपर्स के साथ MoUs पर हस्ताक्षर किए हैं।
चार नए संयंत्रों के जुड़ने के बाद, राज्य में कुल छह वेस्ट-टू-एनर्जी (Waste-to-energy) प्लांट होंगे। जिंदल को काकीनाडा और नेल्लोर में संयंत्र विकसित करने के लिए नामित किया गया है, जबकि एंटनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (Antony Lara Renewable Energy Pvt. Ltd.) कडपा और कुरनूल में सुविधाएं विकसित करेगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानआंध्र प्रदेश में नए वेस्ट-टू-एनर्जी (waste-to-energy) प्लांट्स के लिए काकीनाडा, नेल्लोर, कडपा और कुरनूल स्थानों को चुना गया है।
तथ्यआंध्र प्रदेश में वेस्ट-टू-एनर्जी (waste-to-energy) प्लांट्स की कुल संख्या बढ़कर छह हो जाएगी।
तथ्यजिंदल और एंटोनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी Pvt. Ltd. नए प्लांट के डेवलपर्स हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में शहरी अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति में 'अपशिष्ट से ऊर्जा' (waste-to-energy) पहलों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
सर्कुलर इकोनॉमी: लैंडफिल पर निर्भरता कम करने के लिए म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट से बिजली बनाना
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: कचरा कलेक्शन के लिए स्थिर बिजली वितरण और लॉजिस्टिक सपोर्ट की ज़रूरत
पर्यावरण सुधार: थर्मल या बायोलॉजिकल कन्वर्जन के जरिए पुराने कचरे से मीथेन उत्सर्जन को कम करना
मुख्य शब्द: सर्कुलर इकोनॉमी · वेस्ट मैनेजमेंट · नवीकरणीय ऊर्जा · नगरपालिका ठोस अपशिष्ट · सतत विकास
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने मैसूर में पंजीकृत तंबाकू उत्पादकों को अतिरिक्त फ्लू क्युरड वर्जीनिया (Flue Cured Virginia - FCV) तंबाकू को अधिकृत नीलामी प्लेटफार्मों पर बेचने की अनुमति देते हुए एक अधिसूचना जारी की है।
यह अधिसूचना पंजीकृत और लाइसेंस प्राप्त तंबाकू उत्पादकों को अतिरिक्त FCV तंबाकू बेचने की अनुमति देती है। उत्पादकों को 2025-26 के सीजन के लिए तंबाकू फंड (Tobacco Fund) में ₹1 प्रति किलोग्राम और बिक्री से प्राप्त राशि का 5% योगदान देना होगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाTobacco Board: यह वह संस्था है जिसे तंबाकू नीलामी प्लेटफॉर्म और उत्पादक पंजीकरण (grower registrations) की निगरानी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
तथ्यTobacco Fund में योगदान: 2025-26 सीजन के लिए ₹1 प्रति किलोग्राम और बिक्री से प्राप्त आय का 5%।
तथ्यFCV: Flue Cured Virginia tobacco इस नोटिफिकेशन के तहत बिक्री के लिए अनुमत विशिष्ट किस्म है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में तंबाकू उत्पादकों की आजीविका को स्थिर करने में नीलामी-आधारित मंचों और निधि योगदान के महत्व की चर्चा कीजिए।
मार्केट लिक्विडिटी: ऑक्शन प्लेटफॉर्म्स सरप्लस फसलों के लिए तुरंत प्राइस डिस्कवरी दे रहे हैं
राजकोषीय तंत्र: उद्योग सहायता के लिए टोबैको फंड को बनाए रखने हेतु उत्पादकों के योगदान का उपयोग
मुख्य शब्द: कीमत की खोज · बाज़ार में हस्तक्षेप · आजीविका स्थिरीकरण · ऑक्शन प्लेटफॉर्म्स
चर्चा में क्यों: कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ने 2025-26 के मानसून सीजन के दौरान बाढ़ से प्रभावित बीदर जिले के किसानों को ₹261.43 करोड़ की मुआवजे की राशि जारी करने की घोषणा की है।
मुआवजा NDRF/SDRF के मानदंडों के आधार पर प्रति हेक्टेयर ₹8,500 से ₹22,500 के बीच जारी किया गया। कुल मुआवजे में विभिन्न फसलों के लिए ₹127.16 करोड़ और दो हेक्टेयर भूमि के लिए ₹134.27 करोड़ शामिल हैं। यह मुआवजा मन्जरा नदी से पानी छोड़े जाने के कारण हुए ₹143.60 करोड़ के अनुमानित नुकसान के बाद दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यबिदर के किसानों को जारी की गई कुल मुआवजा राशि: ₹261.43 करोड़।
तथ्यप्रति हेक्टेयर मुआवजे की रेंज: ₹8,500 से ₹22,500।
संस्थाNDRF/SDRF: बाढ़ मुआवजे (flood compensation) के निर्धारण के लिए उपयोग किए जाने वाले मानदंड।
योजनाPMFBY: जिले में 2,04,235 फसल बीमा प्रस्ताव (crop insurance proposals) पंजीकृत।
स्थानमंजरा नदी: बिदर में फसल को नुकसान पहुँचाने वाले अतिरिक्त पानी के रिहाई का स्रोत।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में चरम मौसमी घटनाओं के दौरान कृषि संबंधी नुकसान को कम करने में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) की प्रभावकारिता का मूल्यांकन कीजिए।
वेरिफिकेशन में रुकावट: राजस्व, कृषि और बागवानी विभागों द्वारा संयुक्त सर्वे में देरी
इंश्योरेंस कवरेज गैप: रजिस्टर्ड PMFBY प्रस्तावों और वास्तविक फसल नुकसान की गंभीरता के बीच अंतर
राजकोषीय निर्भरता: तत्काल राहत के लिए राज्य-स्तरीय आपदा फंड पर निर्भरता बनाम लंबी अवधि के क्लाइमेट-रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर
मुख्य शब्द: आपदा प्रबंधन · क्लाइमेट रेजिलिएंस · कृषि बीमा · राजकोषीय संघवाद · जोखिम कम करना
चर्चा में क्यों: केरल के कुट्टानाड में मिट्टी की जांच में धान के खेतों में एल्युमीनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से 39 से 165 गुना अधिक पाई गई है, जिसके बाद सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
केरल सेंटर फॉर पेस्ट मैनेजमेंट (KCPM) और विट्टिला स्थित राइस रिसर्च स्टेशन ने कुट्टानाड के 12 धान के खेतों का विश्लेषण किया। विश्लेषण में एल्युमीनियम का स्तर 77.51 ppm से 334.10 ppm के बीच पाया गया, जो निर्धारित सीमा से काफी अधिक है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यपरीक्षण किए गए क्षेत्रों में एल्युमिनियम की सांद्रता (concentration) 77.51 ppm से 334.10 ppm के बीच पाई गई।
संस्थाकेरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी: यह संस्था विट्टिला (Vyttila) स्थित राइस रिसर्च स्टेशन की देखरेख करती है।
तथ्यएल्युमिनियम का स्तर सुरक्षित सीमा से 39 से 165 गुना अधिक पाया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कुट्टानाड जैसे आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों में मृदा के भारी धातु संदूषण के कृषि स्थिरता और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
मिट्टी की विषाक्तता: एल्युमिनियम का जमाव फसल की पैदावार और मिट्टी की लंबी अवधि की उर्वरता को प्रभावित कर रहा है
सुधार की बाधाएं: बड़े पैमाने पर वेटलैंड धान के खेतों से प्रदूषण हटाने में तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां
आजीविका की संवेदनशीलता: मिट्टी की गुणवत्ता गिरने और खाद्य सुरक्षा की चिंताओं से छोटे किसानों को होने वाले आर्थिक जोखिम
मुख्य शब्द: मिट्टी का क्षरण · भारी धातु संदूषण · वेटलैंड एग्रीकल्चर · सुधारात्मक उपाय · खाद्य सुरक्षा
चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय उर्वरक उत्पादन को बढ़ाने के लिए असम के डिब्रूगढ़ में ₹10,601 करोड़ के ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया प्लांट का शिलान्यास किया।
यह परियोजना असम सरकार, ऑयल इंडिया, नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL), हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) और ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉर्प लिमिटेड (BVFCL) का एक संयुक्त उद्यम है। इसका लक्ष्य 2030 तक वार्षिक 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन क्षमता हासिल करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यप्रोजेक्ट की लागत: ₹10,601 करोड़।
तथ्यवार्षिक यूरिया उत्पादन क्षमता: 12.7 लाख metric tonnes।
स्थानस्थान: डिब्रूगढ़, असम।
तथ्यलक्ष्य परिचालन वर्ष: 2030।
संस्थाAVFCCL: असम वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पूर्वोत्तर भारत में उर्वरक उत्पादन केंद्रों की स्थापना कृषि आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के संदर्भ में किस प्रकार महत्वपूर्ण है, चर्चा कीजिए।
लॉजिस्टिक सिनर्जी: स्थानीय उत्पादन के जरिए पूर्वोत्तर में यूरिया के परिवहन खर्च में कमी
पूर्वोत्तर के किसानों के लिए सप्लाई चेन की बाधाओं को कम करना ताकि फसलों की स्थिर पैदावार सुनिश्चित हो सके
इंडस्ट्रियल इंटीग्रेशन: ब्राउनफील्ड विस्तार के लिए असम में मौजूदा ऑयल और केमिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट · उर्वरक सुरक्षा · क्षेत्रीय विकास · कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर · संयुक्त उद्यम
चर्चा में क्यों: श्री केंटीरवा स्टूडियोज लिमिटेड के चेयरमैन ने कलबुर्गी और हुब्बल्ली में फिल्म सिटी स्थापित करने और कर्नाटक द्वारा राज्य समर्थित OTT प्लेटफॉर्म शुरू करने की योजनाओं की घोषणा की है।
श्री कँतीरवा स्टूडियोज लिमिटेड (Sri Kanteerava Studios Limited) का कलबुरगी और हुब्बल्ली में छोटे स्तर के फिल्म सिटी स्थापित करने की योजना है। कर्नाटक सरकार कन्नड़ सिनेमा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए जनवरी के अंत या फरवरी 2026 की शुरुआत तक अपना खुद का OTT प्लेटफॉर्म शुरू करने का लक्ष्य रखती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानकर्नाटक में नए फिल्म सिटीज के लिए कलबुरगी और हुब्बल्ली को प्रस्तावित स्थानों के रूप में चुना गया है।
तथ्यकर्नाटक सरकार समर्थित OTT प्लेटफॉर्म चलाने वाला यह तीसरा भारतीय राज्य होगा।
तथ्यराज्य द्वारा समर्थित OTT प्लेटफॉर्म के 2026 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्य-समर्थित डिजिटल बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय फिल्म शहरों के माध्यम से सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ रचनात्मक अर्थव्यवस्था के विकास को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए।
सांस्कृतिक संरक्षण: मुख्यधारा के कंटेंट के प्रभुत्व के खिलाफ क्षेत्रीय साहित्य और सिनेमा को बढ़ावा देना
आर्थिक विकेंद्रीकरण: कलबुर्गी और हुब्बल्ली जैसे टियर-II शहरों में क्रिएटिव हब बनाना
डिजिटल संप्रभुता: भाषाई विविधता और लोकल कंटेंट वितरण के लिए राज्य-संचालित OTT प्लेटफॉर्म्स एक जरिया
मुख्य शब्द: क्रिएटिव इकोनॉमी · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर · सांस्कृतिक संरक्षण · क्षेत्रीय सिनेमा · भाषाई विविधता
चर्चा में क्यों: बर्ड फ्लू के प्रकोप के बाद खेती को पुनर्जीवित करने के लिए, DHAT इंस्टीट्यूट कुट्टनड वेटलैंड्स में तीन स्वदेशी बत्तख की किस्मों को पुनर्जीवित कर रहा है।
मंजदी स्थित DHAT संस्थान केरल के किसानों को साप्ताहिक रूप से 2,000 एक दिन पुराने बत्तख के बच्चे उपलब्ध कराता है। यह संस्थान सख्त बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स (biosecurity protocols) के तहत विगोवा (Vigova), कुट्टनदान चेमबल्ली (Kuttanadan Chembally) और स्नो व्हाइट (Snow White) बत्तखों के पैरेंट स्टॉक का रखरखाव करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यDHAT Institute किसानों को साप्ताहिक रूप से 2,000 एक दिन के बत्तख के बच्चे (ducklings) सप्लाई करता है।
पर्यावरणस्वदेशी बत्तख की किस्मों को पुनर्जीवित किया जा रहा है: विगोवा (Vigova), कुट्टनदान चेमबल्ली (Kuttanadan Chembally) और स्नो व्हाइट (Snow White)।
संस्थाDHAT इंस्टीट्यूट: यह मनजादी में स्थित है और बत्तख हैचरी (duck hatchery) और ट्रेनिंग के लिए जिम्मेदार है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में जैव विविधता के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका की स्थिरता सुनिश्चित करने में स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
बायोसिक्योरिटी गैप: ओपन-सिस्टम डक फार्मिंग में एवियन इन्फ्लुएंजा के प्रकोप का खतरा
जेनेटिक इरोजन: कमर्शियल वैरायटी के कारण कुट्टनदान चेमबल्ली जैसी स्वदेशी नस्लों के खत्म होने का खतरा
आजीविका लचीलापन: पारंपरिक वेटलैंड खेती और आधुनिक बीमारी-रोकथाम प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · बायोसिक्योरिटी उपाय · स्वदेशी नस्लें · टिकाऊ खेती · आजीविका बहाली
चर्चा में क्यों: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ई-खाता (e-Khata) योजना शुरू की है, ताकि नागरिक घर बैठे खाता सेवाओं का लाभ उठा सकें और शहरी संपत्ति के दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके।
ई-खाता योजना की शुरुआत 18 दिसंबर को बेलगावी स्थित सुवर्णा सौध में की गई। राज्य ने गृह भाग्य योजना के तहत 6,119 लाभार्थियों की पहचान की है, जिसमें 4,159 घरों के निर्माण को पूरा करने के लिए ₹326 करोड़ जारी किए गए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाe-Khata: कर्नाटक सरकार की एक पहल जो घर से रिमोटली (remotely) खाता सेवाएं प्रदान करती है।
तथ्यगृह भाग्य योजना: 4,159 पूरे हो चुके घरों के लिए ₹326 करोड़ जारी किए गए।
स्थानसुवर्ण सौध: कर्नाटक के बेलगावी में स्थित वह स्थान जहाँ इस योजना का शुभारंभ हुआ।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भूमि अभिलेखों और खाता सेवाओं के डिजिटलीकरण से शहरी शासन में पारदर्शिता और जीवन की सुगमता (ईज़ ऑफ लिविंग) को किस प्रकार बढ़ावा दिया जा सकता है, चर्चा कीजिए।
डेटा इंटीग्रिटी: मज़बूत वेरिफिकेशन के बिना डिजिटाइज़्ड लैंड रिकॉर्ड्स में धोखाधड़ी वाले एंट्रीज़ के जोखिम
प्रशासनिक दक्षता: प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं में फिजिकल फुटफॉल और भ्रष्टाचार को कम करना
इनक्लूजन गैप: कम डिजिटल साक्षरता वाली ग्रामीण आबादी के लिए डिजिटल खाता सेवाओं तक पहुँचने में चुनौतियाँ
मुख्य शब्द: जीवन जीने में आसानी · डिजिटल गवर्नेंस · पारदर्शिता · भूमि रिकॉर्ड · अर्बन प्लानिंग
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने पारंपरिक बैल-तमीज (bull-taming) आयोजन को विनियमित करने के लिए 2026 में होने वाले 'जल्लीकट्टू' के आयोजन हेतु एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है।
इस SOP में पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा निदेशालय (Directorate of Animal Husbandry and Veterinary Services) और पुलिस सहित कई विभाग शामिल हैं। इसके मुख्य निर्देशों में कम से कम आठ फीट ऊँचा बैरिकेड, अनिवार्य वीडियो रिकॉर्डिंग और ट्रेनर्स (tamers) की आयु 18 वर्ष से अधिक होना शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यजल्लीकट्टू आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि टैमर (tamers) की आयु 18 वर्ष से अधिक हो।
तथ्यSOP के अनुसार, बुल लीपिंग (bull leaping) को रोकने के लिए कम से कम आठ फीट ऊंचे बैरिकेड की अनिवार्यता है।
संस्थाडायरेक्टोरेट ऑफ एनिमल हसबेंड्री एंड वेटरनरी सर्विसेज (Directorate of Animal Husbandry and Veterinary Services) SOP में शामिल एक प्रमुख संस्था है।
तथ्यSOP के अनुसार, इस घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग और डॉक्यूमेंटेशन (documentation) अनिवार्य है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जल्लीकट्टु जैसे पारंपरिक आयोजनों में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पशु कल्याण एवं सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच संतुलन के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: सांस्कृतिक संरक्षण, पशु अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
प्रशासनिक समन्वय: बड़े पैमाने के पारंपरिक आयोजनों के प्रबंधन में मल्टी-डिपार्टमेंटल भूमिकाएं
कानूनी जवाबदेही: स्थापित सुरक्षा और कल्याण प्रोटोकॉल से विचलन के लिए आपराधिक दायित्व
मुख्य शब्द: सांस्कृतिक विरासत · पशु कल्याण · स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर · सार्वजनिक सुरक्षा · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने महाराष्ट्र द्वारा अपने आवंटित हिस्से से अधिक और भीमा जल के कथित दुरुपयोग और डायवर्जन (diversion) की जांच की घोषणा की है।
बचवत आयोग ने महाराष्ट्र को 95 tmcft और कर्नाटक को 15 tmcft भीमा जल आवंटित किया है। यह आरोप है कि महाराष्ट्र लगभग 200 tmcft जल एक टनल के माध्यम से सीना नदी की ओर मोड़ देता है, जिससे विजयपुरा, यादगीर और कलबुर्गी जिले प्रभावित होते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यबचवत कमीशन द्वारा महाराष्ट्र के लिए आवंटन: 95 TMCFT।
तथ्यबचवत कमीशन द्वारा कर्नाटक के लिए आवंटन: 15 TMCFT।
स्थानसिना नदी: भिमा नदी से डायवर्ट किए गए पानी का गंतव्य।
स्थानविजयपुरा, यादगीर और कलबुर्गी: कर्नाटक के वे जिले जो जल संकट (water scarcity) का सामना कर रहे हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में अंतर-राज्यीय जल-साझाकरण की चुनौतियों और नदी तटीय संघर्षों के समाधान में आयोगों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
अंतर-राज्यीय तनाव: राज्य स्तरीय सिंचाई परियोजनाओं और बेसिन-व्यापी जल सुरक्षा के बीच टकराव
रेगुलेटरी ओवरसाइट: टनल-आधारित जल डायवर्जन के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग की कमी
केंद्र-राज्य समीकरण: क्षेत्रीय जल मांगों और समान वितरण के आदेशों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: अंतर-राज्यीय जल विवाद · तटीय अधिकार · बचवत कमीशन · पानी की कमी · संघीय टकराव
चर्चा में क्यों: रबर रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (RRII) ने पारंपरिक इमल्शन पेंट के विकल्प के रूप में प्राकृतिक रबर लेटेक्स से बना एक टिकाऊ और VOC-मुक्त पेंट विकसित किया है।
रबर बोर्ड के अंतर्गत आने वाले RRII ने इस जल-आधारित फॉर्मूले को विकसित करने में 18 महीने का समय लगाया। इस उत्पाद को केरल पेंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 'केरल पेंट्स – भद्रम' ब्रांड के तहत बाजार में उतारा जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थारबर रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (RRII), रबर बोर्ड के अंतर्गत कार्य करता है।
तथ्यनया पेंट फॉर्मूला VOC-free और water-based है।
स्थानकेरल पेंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (Kerala Paint Industries Pvt. Ltd.) इस प्रोडक्ट की मार्केटिंग इकाई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जैव-आधारित औद्योगिक उत्पादों का विकास भारत के चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) और सतत विनिर्माण की ओर संक्रमण में किस प्रकार योगदान दे सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
मार्केट व्यवहार्यता: नेचुरल रबर लेटेक्स की अधिक उत्पादन लागत और पारंपरिक सिंथेटिक इमल्शन पेंट्स के बीच संतुलन
पर्यावरण सुधार: निर्माण सामग्री में वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स को खत्म करके इनडोर एयर पॉल्यूशन कम करना
मुख्य शब्द: सर्कुलर इकोनॉमी · सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग · बायो-आधारित मैटेरियल्स · VOC में कमी · वैल्यू एडिशन
चर्चा में क्यों: टर्मेरिक वैल्यू चेन समिट (Turmeric Value Chain Summit) के दौरान नेशनल टरमेरिक बोर्ड ने भारत के हल्दी उत्पादन, गुणवत्ता (करक्यूमिन कंटेंट) और निर्यात हिस्सेदारी को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड (National Turmeric Board) की स्थापना उत्पादन और निर्यात की गुणवत्ता में सुधार करके किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए की गई थी। शिखर सम्मेलन में वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए करक्यूमिन (curcumin) की मात्रा और नमी के स्तर में सुधार करने पर जोर दिया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थानेशनल टरमेरिक बोर्ड (National Turmeric Board): हल्दी किसानों की सहायता करने और निर्यात की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए स्थापित निकाय।
तथ्यहल्दी के निर्यात के लिए मुख्य क्वालिटी पैरामीटर्स: करक्यूमिन (Curcumin) कंटेंट और मॉइस्चर लेवल्स।
स्थानतेलंगाना: राज्य सरकार ने समिट के दौरान हल्दी किसानों को समर्थन देने का वादा किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मूल्य श्रृंखला हस्तक्षेपों के माध्यम से हल्दी जैसे भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।
क्वालिटी स्टैंडर्डाइजेशन: इंटरनेशनल एक्सपोर्ट नॉर्म्स को पूरा करने के लिए करक्यूमिन कंटेंट और मॉइस्चर लेवल में बदलाव को दूर करना
स्टेकहोल्डर सिनर्जी: प्राथमिक उत्पादकों और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड प्रोसेसिंग यूनिट्स के बीच की दूरी को कम करना
मार्केट शेयर में विस्तार: हाई-वैल्यू प्रोसेस्ड हल्दी उत्पादों को बढ़ावा देकर कच्चे निर्यात पर निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: वैल्यू चेन · निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता · क्वालिटी स्टैंडर्डाइजेशन · करक्यूमिन की मात्रा · स्टेकहोल्डर सहयोग
चर्चा में क्यों: भारतीय रिज़र्व बैंक ने बताया कि द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों द्वारा संचालित समग्र आर्थिक विकास के बावजूद, तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र में लगातार दो वर्षों से नकारात्मक विकास (negative growth) देखा गया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पिछले दो वर्षों के लिए तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र में नकारात्मक विकास दर्ज किया है। जहाँ चावल, मोटे अनाज और दालों का उत्पादन स्थिर बना हुआ है, वहीं कपास, गन्ना और तिलहन के उत्पादन में महत्वपूर्ण गिरावट आई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यRBI के अनुसार, तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र में लगातार दो वर्षों तक नकारात्मक विकास (negative growth) दर्ज किया गया।
तथ्यहाल के वर्षों में तमिलनाडु में कपास, गन्ना और तिलहन का उत्पादन काफी कम हो गया है।
तथ्यतमिलनाडु में चावल, मोटे अनाज (coarse cereals) और दालों का उत्पादन तुलनात्मक रूप से स्थिर बना हुआ है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तमिलनाडु में विशिष्ट फसलों के घटते प्रदर्शन में योगदान देने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए और राज्य के कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए एक बहु-हितधारक ढांचे का सुझाव दीजिए। विश्लेषण कीजिए।
सेक्टोरल इम्बैलेंस: सेकेंडरी और टर्शियरी सेक्टर में ग्रोथ प्राइमरी कृषि उत्पादन में ठहराव या गिरावट को छिपा रही है
फसल-विशिष्ट गिरावट: कपास, गन्ना और तिलहन के उत्पादन में भारी कमी, लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप की ज़रूरत
सहयोगात्मक शासन: उत्पादकता की कमियों को दूर करने के लिए पॉलिसी मेकर्स, कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच समन्वित प्रयासों की ज़रूरत
मुख्य शब्द: सेक्टोरल ग्रोथ · कृषि उत्पादकता · मल्टी-स्टेकहोल्डर अप्रोच · फसल विविधीकरण · आर्थिक संकेतक
चर्चा में क्यों: संकेत: केंद्र सरकार से संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बदलने के लिए GRAMG बिल पेश करने की उम्मीद है।
GRAMG बिल को मौजूदा MGNREGA कार्यक्रम के विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का बचाव किया और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाMGNREGA: मौजूदा ग्रामीण रोजगार गारंटी प्रोग्राम जिसे प्रस्तावित GRAMG बिल द्वारा बदला जा रहा है।
तथ्यGRAMG बिल: संसद के विंटर सेशन (Winter Session) के दौरान लोकसभा में पेश किया जाएगा।
स्थानराज्यसभा: वह स्थान जहाँ केंद्र सरकार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) का बचाव किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में ग्रामीण रोजगार और गरीबी उन्मूलन पर मनरेगा (MGNREGA) के स्थान पर ग्राम अधिनियम (GRAMG Bill) लागू करने के संभावित निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
स्ट्रक्चरल शिफ्ट: डिमांड-ड्रिवन एम्प्लॉयमेंट गारंटी से नए लेजिस्लेटिव फ्रेमवर्क की ओर बदलाव
इम्प्लीमेंटेशन रिस्क: यदि GRAMG के पास MGNREGA जैसा कानूनी जनादेश नहीं हुआ तो ग्रामीण श्रम की मांग कम होने की संभावना
चुनावी अखंडता: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तकनीकी आवश्यकताओं के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: ग्रामीण रोज़गार · विधायी सुधार · सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार · गरीबी उन्मूलन · मतदाता सूची पुनरीक्षण
चर्चा में क्यों: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा को सूचित किया कि अच्छे मानसून और अतिरिक्त फसल की संभावना के कारण यूरिया की मांग बढ़ गई है, जिसके लिए ₹1.32 लाख करोड़ के अतिरिक्त खर्च का अनुरोध आवश्यक है।
सरकार पर्याप्त घरेलू उत्पादन और आयात सुनिश्चित करने के लिए उर्वरकों पर ₹18,525.1 करोड़ खर्च करने की योजना बना रही है। वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि वर्तमान में यूरिया की कोई कमी नहीं है और खरीफ एवं रबी दोनों सत्रों के लिए बफर स्टॉक उपलब्ध है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यसरकार द्वारा उर्वरकों (Fertilizers) पर नियोजित व्यय ₹18,525.1 करोड़ है।
तथ्यसरकार ने यूरिया की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए ₹1.32 लाख करोड़ के अतिरिक्त खर्च का अनुरोध किया।
तथ्यKharif और Rabi दोनों सीजन के लिए Urea buffer बनाए रखा जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में आने वाली चुनौतियों और कृषि की बढ़ती मांग को पूरा करने के राजकोषीय निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय दबाव: राजकोषीय घाटा लक्ष्यों के साथ उच्च उर्वरक सब्सिडी को संतुलित करना
सप्लाई चेन डायनेमिक्स: यूरिया के लिए आयात पर निर्भरता के मुकाबले घरेलू उत्पादन क्षमता को संतुलित करना
क्लाइमेट से जुड़ी मांग: अनिश्चित मानसून पैटर्न के बीच उर्वरक की जरूरतों का प्रबंधन
मुख्य शब्द: राजकोषीय घाटा · फर्टिलाइज़र सब्सिडी · कृषि मांग · बफर स्टॉक · घरेलू उत्पादन
चर्चा में क्यों: पर्यावरण मंत्रालय ने रिपोर्ट दी है कि 2022 के स्तर की तुलना में 2025 में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 90% की कमी आई है।
पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि पंजाब और हरियाणा ने 2022 की तुलना में 2025 में पराली जलाने की घटनाओं में 90% की कमी की है। इस प्रक्रिया में गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार करने हेतु धान के अवशेषों को जलाया जाता है, जिससे ऐतिहासिक रूप से अक्टूबर-नवंबर के दौरान दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि देखी गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्य2022 की तुलना में 2025 में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने (stubble burning) की घटनाओं में 90% की कमी आई।
स्थानपराली जलाने (stubble burning) को कम करने के लिए पंजाब और हरियाणा को मुख्य राज्यों के रूप में उद्धृत किया गया है।
तथ्यअक्टूबर-नवंबर के दौरान दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण (air pollution) के स्तर में वृद्धि का संबंध पराली जलाने (stubble burning) से है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की समस्या को नियंत्रित करने के लिए वर्तमान उपायों की प्रभावकारिता का विश्लेषण कीजिए और कृषि उत्पादकता एवं वायु गुणवत्ता लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु नीतिगत हस्तक्षेपों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
इंसेंटिव मिसअलाइनमेंट: पारंपरिक जलाने की कम लागत बनाम मशीनीकृत अवशेष प्रबंधन की भारी लागत
लॉजिस्टिक बाधाएं: धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय इन-सिटु मैनेजमेंट को सीमित कर रहा है
इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन: पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के बीच सिंक्रोनाइज्ड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल्स की ज़रूरत
मुख्य शब्द: वायु गुणवत्ता प्रबंधन · कृषि अवशेष · इन-सिटू मैनेजमेंट · पर्यावरण गवर्नेंस · सतत कृषि
चर्चा में क्यों: कर्नाटक में छात्र और पशु कल्याण समूहों ने राज्य सरकार से आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने और रेबीज के खतरे को कम करने के लिए पूरे राज्य में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) मॉडल अपनाने का आग्रह किया है।
'स्टूडेंट्स फॉर स्ट्रीटिस' और 'सिटिजन्स फॉर एनिमल बर्थ कंट्रोल' जैसे समूहों ने शेल्टर-आधारित प्रबंधन के बजाय ABC नियमों के कार्यान्वयन की मांग की। उन्होंने बेंगलुरु के मॉडल को एक सफल उदाहरण के रूप में रेखांकित किया और शेल्टर में कथित रूप से अवैध रूप से रखे गए 200 से अधिक कुत्तों को छोड़ने की मांग की।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकर्नाटक में ABC शेल्टर में कथित तौर पर 200 से अधिक कुत्तों को अवैध रूप से रखा जा रहा है।
संस्थाAnimal Birth Control (ABC) Rules आवारा कुत्तों की आबादी के प्रबंधन के लिए प्राथमिक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (regulatory framework) हैं।
स्थानबेंगलुरु को कर्नाटक में ABC प्रोग्राम के लिए एक सफल मॉडल के रूप में उद्धृत किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और पशु कल्याण मानकों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, शहरी आवारा कुत्तों की आबादी के प्रबंधन में 'पशु जन्म नियंत्रण' (ABC) मॉडल की प्रभावकारिता का विश्लेषण कीजिए।
पब्लिक हेल्थ ट्रेड-ऑफ: रेबीज रोकथाम और आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण के नैतिक पहलुओं के बीच संतुलन
रेगुलेटरी एनफोर्समेंट: शेल्टर में जानवरों को अवैध रूप से कैद करने और स्टैंडर्डाइज्ड ABC लागू करने की कमी पर कार्रवाई
अर्बन प्लानिंग में टकराव: तेज़ी से बढ़ते शहरी केंद्रों में सामुदायिक सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संघर्ष
मुख्य शब्द: एनिमल बर्थ कंट्रोल · सार्वजनिक स्वास्थ्य · रेबीज नियंत्रण · पशु कल्याण · अर्बन मैनेजमेंट
चर्चा में क्यों: नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन ने एग्रो टेक्सटाइल्स और अनुसंधान के विकास को प्रदर्शित करने के लिए गुजरात और बिहार में प्रदर्शन फार्म (demonstration farms) स्थापित करने की घोषणा की है।
नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन (National Technical Textiles Mission) की शुरुआत 2019-2020 में की गई थी। इसके लिए ₹1,480 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें से अब तक ₹720 करोड़ का उपयोग किया जा चुका है। यह मिशन टेक्निकल टेक्सटाइल्स में अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए इनक्यूबेशन सेंटर्स से जुड़े स्टार्टअप्स को ₹50 लाख की ग्रांट प्रदान करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानगुजरात के नवसारी और बिहार के पूसा एग्रो टेक्सटाइल डेमोंस्ट्रेशन फार्म्स (agro textile demonstration farms) के लिए साइट्स हैं।
तथ्यनेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन (National Technical Textiles Mission) के लिए ₹1,480 करोड़ आवंटित किए गए।
तथ्यटेक्निकल टेक्सटाइल्स R&D के लिए स्टार्टअप्स को ₹50 लाख की ग्रांट प्रदान की गई।
तथ्यमिशन ने टेक्निकल टेक्सटाइल्स शिक्षा के लिए 45 शैक्षणिक संस्थानों के साथ MoUs पर हस्ताक्षर किए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तकनीकी वस्त्रों (technical textiles) को बढ़ावा देने से कृषि उत्पादकता में किस प्रकार वृद्धि हो सकती है और यह भारत के औद्योगिक विविधीकरण में किस प्रकार योगदान दे सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
R&D की बाधा: लैब-स्केल रिसर्च और कमर्शियल एग्रो-टेक्सटाइल प्रोडक्शन के बीच के अंतर को कम करने के लिए स्पेशलाइज्ड इनक्यूबेशन सेंटर्स की ज़रूरत
स्किल गैप: ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा करने के लिए टेक्निकल टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग में स्पेशलाइज्ड वोकेशनल ट्रेनिंग की ज़रूरत
मुख्य शब्द: टेक्निकल टेक्सटाइल्स · एग्रो-टेक्सटाइल्स · R&D प्रोत्साहन · औद्योगिक विविधीकरण · स्टार्टअप इकोसिस्टम
चर्चा में क्यों: पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क एशिया पैसिफिक (PANAP) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों (Highly Hazardous Pesticides - HHPs) के व्यापक उपयोग पर प्रकाश डाला गया है।
PANAP रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उपयोग किए जाने वाले 41 कीटनाशकों में से 29 को अत्यधिक खतरनाक (highly hazardous) श्रेणी में रखा गया है। अध्ययन में यह पाया गया कि लगभग एक-तिहाई उत्तरदाताओं ने अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों (HHPs) के उपयोग की बात कही है। उन्होंने छिड़काव के बाद खेतों में दोबारा प्रवेश करने और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) के अनुचित उपयोग जैसी असुरक्षित कार्यप्रणालियों का उल्लेख किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यभारत में HHP का अनुपात: उपयोग किए जाने वाले 41 कीटनाशकों (pesticides) में से 29 को अत्यधिक खतरनाक (highly hazardous) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
संस्थाPesticide Action Network Asia Pacific (PANAP) वह संस्था है जिसने यह सर्वे जारी किया।
स्थानइस सर्वे में बांग्लादेश, भारत, लाओस और वियतनाम में कीटनाशकों (pesticides) के उपयोग और उनके संपर्क (exposure) को कवर किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय कृषि में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय निहितार्थों की चर्चा कीजिए और कृषि-पारिस्थितिक विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
स्वास्थ्य जोखिम: PPE की कमी और असुरक्षित फील्ड री-एंट्री के कारण किसानों का HHPs के संपर्क में रहना
रेगुलेटरी गैप: अवैध कीटनाशकों पर बैन लागू करने और केमिकल रनऑफ की निगरानी में मुश्किल
पॉलिसी में बदलाव: मिट्टी की सेहत लंबे समय तक बनाए रखने के लिए केमिकल-इंटेंसिव खेती से एग्रो-इकोलॉजिकल विकल्पों की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: एग्रोइकोलॉजी · अत्यधिक खतरनाक कीटनाशक · व्यावसायिक स्वास्थ्य · सतत कृषि · नियामक प्रवर्तन
चर्चा में क्यों: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश की 'पोंडुरु खादी' को भौगोलिक संकेत (Geographical Indication - GI) टैग प्रदान किया है, ताकि इसकी विशिष्ट उत्पत्ति की रक्षा की जा सके और इसकी मांग को बढ़ावा दिया जा सके।
भारत सरकार ने शुक्रवार को पोंडुरु खादी के लिए आधिकारिक रूप से GI टैग की घोषणा की। यह मान्यता इन हाथ से कते और हाथ से बुने हुए सूती कपड़ों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय मंत्री के. राममोहन नायडू द्वारा किए गए प्रयासों के बाद मिली है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानपोंडुरु खादी आंध्र प्रदेश का एक हाथ से काता और हाथ से बुना हुआ सूती कपड़ा है।
संस्थाGI टैग यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा प्रदान किया गया था।
तथ्यGI tag का उद्देश्य कपड़े की विशिष्ट उत्पत्ति की रक्षा करना और मार्केट डिमांड को बढ़ावा देना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में भौगोलिक संकेत (GI) टैग किस प्रकार ग्रामीण आर्थिक विकास और पारंपरिक शिल्प कौशल के संरक्षण के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में कार्य कर सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।
मार्केट डिफरेंशियल: मास-प्रोड्यूस्ड इंडस्ट्रियल टेक्सटाइल्स के मुकाबले अनोखी क्षेत्रीय कारीगरी की सुरक्षा
आजीविका सुरक्षा: ब्रांड एक्सक्लूसिविटी के जरिए स्थानीय बुनकरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार
संस्थागत समर्थन: पारंपरिक ज्ञान को औपचारिक रूप देने में वाणिज्य मंत्रालय की भूमिका
मुख्य शब्द: भौगोलिक संकेत · कारीगरी आधारित अर्थव्यवस्था · ग्रामीण विकास · बौद्धिक संपदा अधिकार · हथकरघा उद्योग
चर्चा में क्यों: कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए 2026 के बाजार सीजन के लिए कोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) बढ़ा दिया है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की नई दरें मिलिंग कोपरा के लिए ₹12,027 प्रति क्विंटल और बॉल कोपरा के लिए ₹12,500 प्रति क्विंटल निर्धारित की गई हैं। ये कीमतें पिछले वर्ष की दरों की तुलना में क्रमशः ₹445 और ₹400 की वृद्धि दर्शाती हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्य2026 सीजन के लिए मिलिंग कोपरा (Milling copra) का MSP: ₹12,027 प्रति क्विंटल।
तथ्य2026 सीजन के लिए बॉल कोपरा MSP: ₹12,500 प्रति क्विंटल।
संस्थाकैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (Cabinet Committee on Economic Affairs): MSP संशोधनों को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार निकाय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में कोपरा जैसे वाणिज्यिक फसलों के उत्पादन प्रतिरूप और मूल्य स्थिरता पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तंत्र के प्रभाव की चर्चा कीजिए।
बाज़ार में गड़बड़ी: विशिष्ट फसलों के अधिक उत्पादन से सप्लाई में भारी बढ़ोतरी की संभावना
प्राइस फ्लोर का असर: अस्थिर अंतरराष्ट्रीय नारियल मांग के बीच किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित करना
राजकोषीय बोझ: सरकारी खरीद लागत बनाम प्राइवेट सेक्टर के मार्केट डायनेमिक्स का विश्लेषण
मुख्य शब्द: न्यूनतम समर्थन मूल्य · कोपरा उत्पादन · न्यूनतम मूल्य · कृषि प्रोत्साहन · बाज़ार की स्थिरता
चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' करने और गारंटीकृत रोजगार के दिनों में वृद्धि करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य गारंटीकृत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करना है। इस विधेयक का लक्ष्य अंतर-राज्यीय व्यय में भिन्नता को दूर करना और राज्य के आर्थिक सूचकांकों (economic indices) के आधार पर अपवर्जन खंड (exclusionary clauses) शामिल करना भी है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनापवित्र बापू ग्रामीण रोजगार योजना: MGNREGA योजना के लिए प्रस्तावित नाम।
तथ्यप्रस्तावित संशोधन गारंटीड एम्प्लॉयमेंट के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 कर देता है।
तथ्यबिल में राज्य के आर्थिक इंडेक्स (economic indices) पर आधारित एक्सक्लूजनरी क्लॉज (exclusionary clauses) शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण गरीबी उन्मूलन में मनरेगा (MGNREGA) के महत्व की चर्चा कीजिए और इस योजना की पात्रता के लिए राज्य-विशिष्ट आर्थिक सूचकांकों को शामिल करने के निहितार्थों का मूल्यांकन कीजिए।
राजकोषीय संघवाद: केंद्र की फंडिंग पैटर्न और राज्यों के खर्च के अंतर के बीच संतुलन
योग्यता के मानदंड: इंडेक्स-आधारित बहिष्करण क्लॉज से संभावित सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार के जोखिम
मुख्य शब्द: ग्रामीण रोज़गार · गरीबी उन्मूलन · राजकोषीय संघवाद · आर्थिक सूचकांक · सोशल सेफ्टी नेट
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कृष्णा नदी से पानी भरने की सुविधा के लिए पुला सुब्बाैया वेलिगोंडा जलाशय परियोजना (Pula Subbaiah Veligonda Reservoir Project) की जुड़वां सुरंगों को 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
पुला सुब्बैया वेलिगोडा जलाशय परियोजना (Pula Subbaiah Veligonda Reservoir Project) आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में स्थित है। इस परियोजना के शेष कार्यों, जिसमें वितरिका नहरें (distributary canals) भी शामिल हैं, को पूरा करने के लिए ₹4,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि की आवश्यकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानपुला सुब्बाैया वेलिगोडा रिज़र्वॉयर प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में स्थित है।
तथ्यशेष कार्यों और डिस्ट्रीब्यूटरी नहरों (distributary canals) को पूरा करने के लिए अतिरिक्त ₹4,000 करोड़ की आवश्यकता है।
तथ्यट्विन टनल (Twin tunnel) कार्यों को पूरा करने की लक्षित तिथि 2026 है।
तथ्यनल्लामाला सागर में कृष्णा नदी से पानी भरा जाएगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के सूखा-प्रवण क्षेत्रों में जल सुरक्षा और कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने में बड़े पैमाने पर जलाशय परियोजनाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
अंतर-राज्यीय जल साझाकरण: कृष्णा नदी के पानी के आवंटन पर टकराव की संभावना
राजकोषीय दबाव: सिंचाई इंफ्रास्ट्रक्चर और नहर नेटवर्क के लिए भारी पूंजीगत व्यय की ज़रूरत
पारिस्थितिक प्रभाव: स्थानीय नदी पारिस्थितिकी तंत्र पर बड़े पैमाने पर जलाशय निर्माण के परिणाम
मुख्य शब्द: जल सुरक्षा · सिंचाई इंफ्रास्ट्रक्चर · अंतर-राज्यीय जल विवाद · पूंजीगत व्यय · कृषि स्थिरता
चर्चा में क्यों: सिविल सप्लाइज़ मंत्री नडेंडला मनोहर ने बताया कि राज्य सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए धान की खरीद में एक रिकॉर्ड बनाया है, जिसके तहत उन्होंने 15 दिनों में 1.46 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की।
सरकार ने 3.24 मिलियन किसानों से 3.24 मिलियन मीट्रिक टन धान खरीदा। लॉरियों, ट्रैक्टरों और विशेष ट्रेनों जैसे संसाधनों का उपयोग करते हुए कुल ₹4.609 बिलियन की राशि सीधे किसानों के खातों में वितरित की गई।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्य2025-26 सीजन के लिए धान की खरीद 15 दिनों में 1.46 मिलियन metric tons से अधिक पहुंच गई है।
तथ्य3.24 मिलियन किसानों द्वारा आपूर्ति किए गए धान की कुल मात्रा 3.24 मिलियन मीट्रिक टन थी।
तथ्य₹4.609 बिलियन सीधे किसानों के खातों में वितरित किए गए।
तथ्यखरीद (procurement) के लिए लॉजिस्टिक्स में लॉरियों, ट्रैक्टरों, मिनी-ट्रैक्टरों और स्पेशल ट्रेनों को शामिल किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में प्रभावी कृषि खरीद और किसान कल्याण सुनिश्चित करने में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और रसद गतिशीलता (logistical mobilization) के महत्व की चर्चा कीजिए।
लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट (स्पेशल ट्रेन, ट्रैक्टर) का इस्तेमाल
वित्तीय समावेशन: लीकेज और मध्यस्थ लागत को कम करने के लिए किसानों के खातों में सीधा भुगतान
मुख्य शब्द: खरीद दक्षता · डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर · लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट · कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर · किसान कल्याण
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु फेडरेशन ऑफ पावरलूम एसोसिएशंस ने पावरलूम के विकास और अपग्रेडेशन (Upgradation) के लिए 30 करोड़ रुपये की सब्सिडी आवंटित करने के राज्य सरकार के फैसले का स्वागत किया है।
तमिलनाडु सरकार ने पावरलूम विकास के लिए ₹30 करोड़ आवंटित किए हैं, जिसके तहत 3,000 करघों को ₹1 लाख प्रति करघा प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, बुनकरों को नए रैपियर लूम (Rapier looms) खरीदने में सहायता देने के लिए ₹15 करोड़ की अतिरिक्त राशि की पुष्टि की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यतमिलनाडु में पावरलूम (powerloom) के विकास और अपग्रेडेशन के लिए ₹30 करोड़ की कुल सब्सिडी आवंटित की गई है।
तथ्य3,000 लूम्स (looms) के लिए प्रति लूम ₹1 लाख की सब्सिडी प्रदान की गई।
तथ्यनए रैपियर लूम (Rapier looms) खरीदने वाले बुनकरों के लिए ₹15 करोड़ की अतिरिक्त सहायता।
स्थानतमिलनाडु फेडरेशन ऑफ पावरलूम एसोसिएशंस।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक पारंपरिक बुनाई क्षेत्र के आधुनिकीकरण और भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में राज्य-आधारित सब्सिडी के महत्व पर चर्चा कीजिए।
तकनीकी छलांग: उत्पादन दक्षता सुधारने के लिए पारंपरिक करघों से रैपियर करघों की ओर बदलाव
क्रेडिट एक्सेसिबिलिटी: पावरलूम बुनकरों के सामने लिक्विडिटी की कमी और बकाया वेतन के मुद्दों का समाधान
मुख्य शब्द: औद्योगिक आधुनिकीकरण · सब्सिडी ढांचा · टेक्सटाइल वैल्यू चेन · आजीविका सहायता · तकनीकी अपग्रेडेशन
चर्चा में क्यों: वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंडरे ने कर्नाटक में 'डीम्ड फॉरेस्ट' (deemed forest) के दायरे की समीक्षा के लिए एक समिति की घोषणा की है, ताकि भूमि वर्गीकरण से संबंधित किसानों की शिकायतों का समाधान किया जा सके।
समीक्षा समिति पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 'डीम्ड फॉरेस्ट' (deemed forest) के रूप में घोषित 3.3 मिलियन हेक्टेयर भूमि का आकलन करेगी। समिति को अपनी रिपोर्ट छह महीने के भीतर सौंपने का आदेश दिया गया है, और संयुक्त भूमि सर्वेक्षण के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया जा रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यपिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान कर्नाटक में 3.3 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को डीम्ड फॉरेस्ट (deemed forest) घोषित किया गया था।
पदईश्वर खंडरे कर्नाटक में वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री हैं।
तथ्यरिव्यू कमेटी को अपनी रिपोर्ट छह महीने के भीतर जमा करनी होगी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: 'मानित वन' (deemed forest) वर्गीकरण के कृषि भूमि अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों और ग्रामीण शासन में पारदर्शी भूमि-उपयोग मानचित्रण के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी अस्पष्टता: वन संरक्षण जनादेश और निजी कृषि भूमि अधिकारों के दावों में टकराव
डेटा इंटीग्रिटी: गैर-वन क्षेत्र के मनमाने वर्गीकरण को रोकने के लिए डिजिटाइज़्ड और वेरिफायबल लैंड रिकॉर्ड की ज़रूरत
किसान शिकायत निवारण: ऐतिहासिक भूमि-उपयोग वर्गीकरण को सुधारने में प्रक्रियात्मक बाधाएं
चर्चा में क्यों: कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कर्नाटक लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1964 में संशोधन की घोषणा की है। इसका उद्देश्य मास्टर प्लान के अनुरूप परियोजनाओं के लिए भूमि परिवर्तन (Land Conversion) की प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
इस संशोधन का उद्देश्य मास्टर प्लान के अनुरूप निर्माण योजनाओं के होने पर भूमि परिवर्तन (Land Conversion) की आवश्यकता को समाप्त करना है। ड्राफ्ट नियमों में सारांश और औपचारिक जांच को परिभाषित करके राजस्व न्यायालय की प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया गया है।
तथ्यभूमि रूपांतरण सरलीकरण (Land conversion simplification) के लिए ड्राफ्ट नियम 29 पेज के हैं।
पदकृष्णा बायरे गौड़ा कर्नाटक के रेवेन्यू मिनिस्टर (Revenue Minister) हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भूमि रूपांतरण प्रक्रियाओं को सरल बनाना बुनियादी ढांचा विकास को कैसे सुगम बना सकता है, जबकि साथ ही शहरी मास्टर प्लान और पर्यावरणीय नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, इस पर चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी स्ट्रीमलाइनिंग: पहले से मंजूर मास्टर प्लान के साथ जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए नौकरशाही की बाधाएं कम करना
न्यायिक दक्षता: रेवेन्यू कोर्ट की कार्यवाही तेज़ करने के लिए समरी और फॉर्मल इंक्वायरी को परिभाषित करना
प्लानिंग इंटीग्रिटी: भूमि उपयोग की सुगमता और निर्धारित ज़ोन के संरक्षण के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: भूमि उपयोग नीति · रेगुलेटरी सरलीकरण · मास्टर प्लानिंग · राजस्व प्रशासन · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सिंचाई और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए पुरोदया योजना (Purvodaya Scheme) के प्रोजेक्ट प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
पूर्वोदय योजना के तहत कुल ₹40,000 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव है। इसमें से ₹20,000 करोड़ सिंचाई के लिए और ₹20,000 करोड़ नई ग्रामीण सड़कों सहित बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के लिए आवंटित किए गए हैं। पोलावरम-नल्लामाला सागर लिंकेज परियोजना का लक्ष्य 7 लाख एकड़ क्षेत्र को सिंचाई प्रदान करना और 60 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यपुरोदया स्कीम (Purvodaya Scheme): प्रस्तावित कुल निवेश ₹40,000 करोड़।
तथ्यपुरोदया स्कीम (Purvodaya Scheme): सिंचाई के लिए ₹20,000 करोड़ और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित।
तथ्यपोलावरम-नल्लामाला सागर लिंकेज प्रोजेक्ट: इसका लक्ष्य 7 लाख एकड़ में सिंचाई और 60 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में एकीकृत सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं किस प्रकार ग्रामीण आर्थिक विकास और कृषि उत्पादकता को गति प्रदान कर सकती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: कटाई के बाद लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए सिंचाई विस्तार को ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ना
जल सुरक्षा: कृषि सिंचाई और घरेलू पीने के पानी की जरूरतों के लिए बहुउद्देशीय जल उपयोग में संतुलन
मुख्य शब्द: ग्रामीण बुनियादी ढांचा · सिंचाई परियोजनाएं · हॉर्टिकल्चर का विस्तार · प्रोजेक्ट प्रस्ताव · जल सुरक्षा
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश नगर प्रशासन और शहरी विकास विभाग और SPA विजयवाड़ा, ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) और तटीय शहरों में बाढ़ की योजना से संबंधित नीतिगत सुधारों की समीक्षा कर रहे हैं।
इस समीक्षा में दो प्रमुख पहलें शामिल हैं: TDR नीति के लिए एक वैकल्पिक ढांचा और तटीय शहरों के लिए एक व्यापक जल निकासी और बाढ़-निवारण योजना। प्रधान सचिव एस. सुरेश कुमार ने इन सुधारों में तकनीकी व्यवहार्यता और वित्तीय व्यवहार्यता पर जोर दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाSPA विजयवाड़ा: स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर शहरी सुधारों की समीक्षा में शामिल।
तथ्यTDR: वैकल्पिक फ्रेमवर्क के लिए Transferable Development Rights पॉलिसी की समीक्षा की जा रही है।
स्थानआंध्र प्रदेश: राज्य तटीय शहरों के लिए बाढ़-निवारण (flood-mitigation) योजनाओं की समीक्षा कर रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से विकसित होते तटीय क्षेत्रों में शहरी विस्तार और सतत भूमि-उपयोग नियोजन के बीच संतुलन स्थापित करने में हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) के कार्यान्वयन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय व्यवहार्यता: TDR मैकेनिज्म के ज़रिए इंफ्रास्ट्रक्चर लागत और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के बीच संतुलन
क्लाइमेट रेजिलिएंस: तटीय बाढ़ को कम करने के लिए शहरी विस्तार के साथ ड्रेनेज प्लानिंग को जोड़ना
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: हाई-डेंसिटी कोस्टल ज़ोन में लैंड-यूज़ पॉलिसी की तकनीकी व्यवहार्यता सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: अर्बन प्लानिंग · ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स · बाढ़ नियंत्रण · सतत विकास · भूमि उपयोग नीति
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने सांस्कृतिक जागरूकता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए, पर्यटकों के लिए विशेष अनुभवों (curated visitor experiences) के माध्यम से 10 एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म क्लस्टर्स (experiential tourism clusters) के विकास की घोषणा की है।
तेलंगाना टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (TGTDC) 10 क्लस्टर्स विकसित करेगा, जिनमें से प्रत्येक 100 किलोमीटर के दायरे में 10 से 15 अनूठी गतिविधियाँ प्रदान करेगा। इस पहल में अगले 10 से 15 वर्षों के लिए मास्टर प्लान शामिल हैं और इसमें नंदीपेट, तडवाई और पाकल जैसे इकोटूरिज्म (ecotourism) स्थलों की पहचान की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थाननंदीपेट, तडवाई और पाकल को तेलंगाना में इकोटूरिज्म (ecotourism) डेस्टिनेशन के रूप में पहचाना गया है।
संस्थाTGTDC (Telangana Tourism Development Corporation) वह संस्था है जो टूरिज्म क्लस्टर डेवलपमेंट के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यप्रत्येक टूरिज्म क्लस्टर 100 किलोमीटर के रेडियस (radius) के भीतर 10 से 15 यूनिक एक्टिविटीज (unique activities) प्रदान करेगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में अनुभवजन्य पर्यटन (experiential tourism) और क्षेत्रीय क्लस्टर के विकास से ग्रामीण आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में किस प्रकार योगदान दिया जा सकता है, चर्चा कीजिए।
आर्थिक विविधीकरण: ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को प्राथमिक क्षेत्रों से सेवा-आधारित पर्यटन मॉडल की ओर ले जाना
सांस्कृतिक संरक्षण: स्थानीय विरासत और परंपराओं की अखंडता के साथ बढ़ते पर्यटन का संतुलन
इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: दूरदराज के इकोटूरिज्म ज़ोन में हाई-क्वालिटी कनेक्टिविटी और वेस्ट मैनेजमेंट की ज़रूरत
मुख्य शब्द: अनुभवात्मक पर्यटन · ग्रामीण विकास · इकोटूरिज्म · आर्थिक विविधीकरण · सांस्कृतिक जागरूकता
चर्चा में क्यों: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कीटों और बीमारियों से निपटने के लिए पोलची में नारियल की खेती हेतु एक क्लीन प्लांट प्रोग्राम (Clean Plant Program) के विस्तार की योजना की घोषणा की।
सरकार पोलची में नारियल के बागानों को प्रभावित करने वाले राइनोसेरोस बीटल (Rhinoceros beetle) और रेड पाम वीविल (Red palm weevils) को लक्षित कर रही है। नारियल विकास बोर्ड (Coconut Development Board) को स्वच्छ पौधों की उपलब्धता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती (Natural farming) की पद्धतियों को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानपोलच्ची भारत का एक स्थान है जहाँ नारियल की खेती में कीटों (pests) की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
तथ्यनारियल के बागानों के लिए राइनोकोरस बीटल (Rhinoceros beetle) और रेड पाम वीविल्स (red palm weevils) को विशिष्ट कीटों के रूप में पहचाना गया है।
संस्थाकोकोनट डेवलपमेंट बोर्ड (Coconut Development Board) वह संस्था है जो क्लीन प्लांट की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।
विज्ञान-तकनीकयह प्रोग्राम रेज़िलिएंट सीड्स (resilient seeds) पर ध्यान केंद्रित करता है और केमिकल फर्टिलाइजर्स (chemical fertilizers) पर निर्भरता को कम करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की बागवानी फसलों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में प्राकृतिक खेती और लचीली बीज किस्मों को बढ़ावा देने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इकोलॉजिकल ट्रांज़िशन: मिट्टी की सेहत और जैव विविधता को बहाल करने के लिए केमिकल फर्टिलाइजर पर निर्भरता कम करना
क्लाइमेट अडैप्टेशन: बदलते मौसम के बीच पैदावार की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कीट-प्रतिरोधी बीज की किस्में विकसित करना
मुख्य शब्द: प्राकृतिक खेती · क्लाइमेट रेजिलिएंस · पेस्ट मैनेजमेंट · सतत कृषि · सीड सिक्योरिटी
चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कालाबाजारी, जमाखोरी और घटिया सामग्री के वितरण के कारण 5,371 उर्वरक कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की घोषणा की।
सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) 1955 और उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertiliser Control Order) के तहत 5,371 लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इन कार्रवाइयों के अंतर्गत अत्यधिक कीमतों और स्टॉक के डायवर्जन (diversion) को रोकने के लिए कारण बताओ नोटिस और FIR जारी की गई हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकEssential Commodities Act, 1955: इसका उपयोग उर्वरक (fertiliser) की जमाखोरी और कालाबाजारी को नियंत्रित और रोकने के लिए किया जाता है।
संस्थाइंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मॉनिटरिंग सिस्टम (Integrated Fertiliser Monitoring System): राज्यों को समय पर उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक सरकारी सिस्टम।
तथ्यअप्रैल और नवंबर के बीच गलत गतिविधियों (malpractices) के कारण 5,371 उर्वरक फर्म लाइसेंस रद्द किए गए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उर्वरक वितरण के विनियामक ढांचे और खाद्य सुरक्षा तथा मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने में आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की भूमिका की चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: लाइसेंसिंग और स्टॉक डायवर्जन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के बीच के अंतर को दूर करना
बाजार में गड़बड़ी: ग्रामीण इनपुट लागत और कृषि उत्पादकता पर जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग का असर
मुख्य शब्द: आवश्यक वस्तु अधिनियम · कालाबाज़ारी · फर्टिलाइज़र कंट्रोल ऑर्डर · बाज़ार में गड़बड़ी · रेगुलेटरी कंप्लायंस