केरल के कुट्टानाड में मिट्टी की जांच में धान के खेतों में एल्युमीनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से 39 से 165 गुना अधिक पाई गई है
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चर्चा में क्यों
केरल के कुट्टानाड में मिट्टी की जांच में धान के खेतों में एल्युमीनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से 39 से 165 गुना अधिक पाई गई है, जिसके बाद सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
पृष्ठभूमि
केरल सेंटर फॉर पेस्ट मैनेजमेंट (KCPM) और विट्टिला स्थित राइस रिसर्च स्टेशन ने कुट्टानाड के 12 धान के खेतों का विश्लेषण किया। विश्लेषण में एल्युमीनियम का स्तर 77.51 ppm से 334.10 ppm के बीच पाया गया, जो निर्धारित सीमा से काफी अधिक है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यपरीक्षण किए गए क्षेत्रों में एल्युमिनियम की सांद्रता (concentration) 77.51 ppm से 334.10 ppm के बीच पाई गई।
- संस्थाकेरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी: यह संस्था विट्टिला (Vyttila) स्थित राइस रिसर्च स्टेशन की देखरेख करती है।
- तथ्यएल्युमिनियम का स्तर सुरक्षित सीमा से 39 से 165 गुना अधिक पाया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कुट्टानाड जैसे आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों में मृदा के भारी धातु संदूषण के कृषि स्थिरता और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- मिट्टी की विषाक्तता: एल्युमिनियम का जमाव फसल की पैदावार और मिट्टी की लंबी अवधि की उर्वरता को प्रभावित कर रहा है
- सुधार की बाधाएं: बड़े पैमाने पर वेटलैंड धान के खेतों से प्रदूषण हटाने में तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां
- आजीविका की संवेदनशीलता: मिट्टी की गुणवत्ता गिरने और खाद्य सुरक्षा की चिंताओं से छोटे किसानों को होने वाले आर्थिक जोखिम
मुख्य शब्द: मिट्टी का क्षरण · भारी धातु संदूषण · वेटलैंड एग्रीकल्चर · सुधारात्मक उपाय · खाद्य सुरक्षा
कृषि पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।