माइक्रोसॉफ्ट और इंफोसिस समेत 8 कंपनियों पर US ने लगाया बैन
चर्चा में क्यों: अमेरिकी सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट, इंफोसिस, TCS, विप्रो और HCL टेक्नोलॉजीज सहित आठ कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' (Permanent Labor Certification Program) के जरिए अंतरराष्ट्रीय श्रमिकों को नियुक्त करने से निलंबित कर दिया है।
यह निलंबन अंतरराष्ट्रीय श्रमिकों के लिए 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' (Permanent Labor Certification Program) को प्रभावित करता है। नस्कॉम (Nasscom) ने इस कदम के बाद H-1B वीजा पर निर्भरता में कमी दर्ज की है, जबकि NFAP ने बताया कि वर्तमान में लगभग 10 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
- तथ्यNFAP की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में लगभग 10 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड के लिए इंतजार कर रहे हैं।
- तथ्ययह सस्पेंशन इंटरनेशनल वर्कर्स को हायर करने के लिए Permanent Labor Certification Program को प्रभावित करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अमेरिकी वीजा नियमों को कड़ा करने के भारत के आईटी सेवा निर्यात मॉडल और एच-1बी (H-1B) वीजा ढांचे पर बढ़ती निर्भरता के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
- लेबर मार्केट फ्रिक्शन: अमेरिकी घरेलू लेबर प्रोटेक्शनिज्म और भारत की सर्विस-आधारित एक्सपोर्ट ग्रोथ के बीच टकराव
- पॉलिसी शिफ्ट: भारतीय आईटी फर्मों में H-1B पर निर्भरता कम कर घरेलू टैलेंट डेवलपमेंट और ऑटोमेशन पर ज़ोर
मुख्य शब्द: लेबर सर्टिफिकेशन · H-1B वीज़ा · सेवा निर्यात · व्यापार नीति · मानव पूंजी