यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,510 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (552) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (357) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (256) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (215) · रक्षा तकनीक (126) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)
चर्चा में क्यों: हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वेस्टर्न ट्रैगोपैन (Western Tragopan) के लिए संचालित कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम (Captive Breeding Program) के तहत अब तक 40 से अधिक पक्षी तैयार किए गए हैं, हालांकि बजट और रिसर्च की कमी के कारण इन्हें वापस प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है।
वेस्टर्न ट्रैगोपैन (Western Tragopan) एक दुर्लभ हिमालयी तीतर है, जिसकी जनसंख्या IUCN के अनुसार अनुमानतः 3,000-9,500 है। हिमाचल प्रदेश स्थित सरहन फेजेंट्री (Sarahan Pheasantry) वर्तमान में इसके बंदी प्रजनन (captive breeding) पहल का केंद्र है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणवेस्टर्न ट्रैगोपन (Western tragopan): हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला एक दुर्लभ फाज़ेंट (pheasant) प्रजाति।
तथ्यIUCN के अनुमान के अनुसार, जंगली अवस्था में केवल 3,000-9,500 वेस्टर्न ट्रैगोपन्स (Western Tragopans) बचे हैं।
संस्थाIUCN (International Union for the Conservation of Nature), प्रजातियों के लिए जनसंख्या का अनुमान प्रदान करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पश्चिमी ट्रैगोपन जैसी लुप्तप्राय हिमालयी प्रजातियों के संरक्षण में 'कैप्टिव ब्रीडिंग' (परिरक्षित प्रजनन) और समुदाय-आधारित पर्यटन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
इकोलॉजिकल बॉटलनेक: स्थापित प्रोटोकॉल और रिसर्च की कमी के कारण रीइंट्रोडक्शन रुका हुआ
आर्थिक प्रोत्साहन: आवास में गड़बड़ी कम करने के लिए एक टूल के रूप में कम्युनिटी-आधारित टूरिज्म
राजकोषीय बाधा: बजट की सीमाएं कैप्टिव ब्रीडिंग से जंगली इलाकों में पुनर्वापसी की प्रक्रिया में रुकावट डाल रही हैं
मुख्य शब्द: एक्स-सिटु कंजर्वेशन · आवास विखंडन · कम्युनिटी-आधारित पर्यटन · जैव विविधता संरक्षण · प्रजातियों का पुन: परिचय
चर्चा में क्यों: कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि प्रवर्तन की कमी और विशिष्ट अदालती आदेशों के अभाव के कारण दिल्ली में 63 लाख से अधिक ओवर-एज्ड (over-aged) वाहन अभी भी चल रहे हैं।
CAQM की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 63 लाख से अधिक ऐसे वाहन सड़कों पर चल रहे हैं जो निर्धारित BS मानकों से अधिक हैं। आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 2026 तक डीजल ऑटो-रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाCAQM: Commission for Air Quality Management वह बॉडी है जो NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन (Air Quality Management) के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यदिल्ली में BS मानकों से अधिक उम्र के 63 लाख से ज्यादा वाहन वर्तमान में चल रहे हैं।
तथ्यCAQM ने NCR में डीजल ऑटो-रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए 2026 की डेडलाइन प्रस्तावित की है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पुराने वाहनों के उत्सर्जन मानकों को लागू करने में आने वाली संस्थागत और विनियामक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
एन्फोर्समेंट गैप: न्यायिक निगरानी के बावजूद राज्य अधिकारियों द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की कमी
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों की आजीविका और क्षेत्रीय एयर क्वालिटी लक्ष्यों के बीच संतुलन
स्टैंडर्डाइजेशन की बाधा: BS मानकों से अधिक वाले वाहनों की पहचान और उन्हें हटाने में कठिनाई
चर्चा में क्यों: स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (SIH) 2025 का ग्रैंड फिनाले बेलगावी स्थित विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) में संपन्न हुआ। इस आयोजन में छात्रों द्वारा ब्लॉकचेन, AI और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विकसित किए गए डिजिटल समाधानों का प्रदर्शन किया गया।
इस कार्यक्रम में कुल 120 छात्र प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 52 महिला प्रतिभागी शामिल थीं। विजेता समाधानों ने ब्लॉकचेन (Blockchain), साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security), AI-आधारित प्रदूषण स्रोत पहचान, टिकाऊ परिवहन और लॉजिस्टिक्स (Sustainable Transportation & Logistics) और क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी (Clean & Green Technology) पर ध्यान केंद्रित किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यSIH 2025 ग्रैंड फिनाले में 120 छात्रों ने भाग लिया, जिनमें से 52 महिला प्रतिभागी थीं।
स्थानविश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) बेलगावी में स्थित है।
विज्ञान-तकनीकSIH 2025 के विजेताओं ने Blockchain, Cyber Security, AI-आधारित Pollution Source Identification और Clean & Green Technology में समाधान प्रदर्शित किए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्मार्ट इंडिया हैकथॉन जैसी पहलें भारत में स्वदेशी नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे सुदृढ़ कर सकती हैं और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में लैंगिक अंतराल को पाटने में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं? चर्चा कीजिए।
स्किल डेवलपमेंट: एकेडमिक करिकुलम को ब्लॉकचेन और AI जैसी उभरती टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ना
जेंडर पैरिटी: हाई-टेक इंजीनियरिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना
इनोवेशन इकोसिस्टम: एकेडमिक प्रोटोटाइप से स्केलेबल और मार्केट-रेडी डिजिटल सॉल्यूशंस की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: STEM शिक्षा · डिजिटल इंडिया · स्वदेशी नवाचार · लैंगिक समानता · ब्लॉकचेन · साइबर सिक्योरिटी
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार 'T-Engine' स्थापित कर रही है, जो Deep Tech इनोवेशन के लिए लैब-टू-मार्केट (lab-to-market) अंतर को पाटने के उद्देश्य से MIT के 'The Engine' के मॉडल पर आधारित एक गैर-लाभकारी प्लेटफॉर्म है।
T-Engine उन्नत प्रयोगशालाएं, फैब्रिकेशन और टेस्टिंग सुविधाएं प्रदान करेगा, साथ ही वेंचर-बिल्डिंग सेवाएं भी देगा। इसका मुख्यालय हैदराबाद में होगा और वारंगल, करीमनगर और निजामाबाद में इसके क्षेत्रीय एक्सेस ऑफिस होंगे।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाT-Engine: डीप टेक (Deep Tech) इनोवेशन के लिए तेलंगाना सरकार द्वारा बनाया गया एक नॉन-प्रॉफिट प्लेटफॉर्म।
स्थानT-Engine के लिए रीजनल एक्सेस ऑफिस वारंगल, करीमनगर और निज़ामाबाद में स्थित हैं।
तथ्यT-Engine को MIT के The Engine के आधार पर बनाया गया है, जो हार्डवेयर और विज्ञान-आधारित इनोवेशन (innovation) के लिए एक प्लेटफॉर्म है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में डीप टेक (Deep Tech) पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने और प्रयोगशाला अनुसंधान एवं वाणिज्यिक बाजार व्यवहार्यता के बीच की खाई को पाटने में राज्य-नेतृत्व वाले बुनियादी ढांचे के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: हार्डवेयर-आधारित डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए हाई-एंड फैब्रिकेशन और टेस्टिंग सुविधाओं की कमी
कमर्शियलाइजेशन की बाधा: वेंचर-बिल्डिंग सपोर्ट के बिना एकेडमिक लैब्स से मार्केट-रेडी प्रोडक्ट्स तक आईपी को ले जाने में मुश्किल
मुख्य शब्द: डीप टेक · लैब-टू-मार्केट गैप · वेंचर-बिल्डिंग · साझा इंफ्रास्ट्रक्चर · IP मेंटरिंग
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने राज्य में 55 मौतों के बाद, तेंदुओं को मानव बस्तियों में प्रवेश करने से रोकने के लिए जंगलों में बकरियां छोड़ने का प्रस्ताव दिया है।
महाराष्ट्र सरकार ने नसबंदी की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए तेंदुओं को 'शेड्यूल-II' (Schedule-II) जानवरों की श्रेणी में शामिल करने की मांग की है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है, जिसके कारण अब तक 55 लोगों की जान जा चुकी है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यमहाराष्ट्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, तेंदुए के हमलों के कारण राज्य में 55 लोगों की मौत हुई।
पदगणेश नाइक महाराष्ट्र के वन मंत्री हैं।
तथ्यराज्य सरकार लेपर्ड्स (Leopards) को नसबंदी के लिए Schedule-II में शामिल करने की मांग कर रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वन-सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन हेतु पशुधन के उपयोग के पारिस्थितिक और सामाजिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
पारिस्थितिक जोखिम: पालतू पशुओं द्वारा तेंदुए के शिकार के पैटर्न को बदलने और प्राकृतिक शिकारी-शिकार के तालमेल को बिगाड़ने की संभावना
संरक्षण संघर्ष: वन्यजीवों के आवास और प्रजातियों की सुरक्षा के साथ मानवीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना
पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: पशुओं को रोकने की प्रभावशीलता बनाम नसबंदी कार्यक्रमों की लंबी अवधि की व्यवहार्यता
मुख्य शब्द: मानव-वन्यजीव संघर्ष · जैव विविधता संरक्षण · शिकारी-शिकार गतिशीलता · वन्यजीव प्रबंधन · शमन रणनीतियां
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार छात्रों को Industry 4.0 कौशल से लैस करने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी सेंटर्स (ATCs) में जापान द्वारा विकसित वेल्डिंग रोबोट और इमर्सिव टेक्नोलॉजी (AR/VR) तैनात कर रही है।
इस पहल के अंतर्गत लगभग ₹30 लाख की लागत वाली वेल्डिंग रोबोट्स का उपयोग किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य ATCs की संख्या बढ़ाकर 105 करना है, ताकि विनिर्माण (Manufacturing), ऑटोमोटिव और एयरोस्पेस क्षेत्रों के लिए छात्रों को इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग में प्रशिक्षित किया जा सके।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यATCs में तैनात वेल्डिंग रोबोट्स की लागत: ₹30 लाख प्रत्येक।
विज्ञान-तकनीकट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी: ऑगमेंटेड रियलिटी (Augmented Reality - AR) और वर्चुअल रियलिटी (Virtual Reality - VR)।
तथ्यतेलंगाना में एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज सेंटर्स (ATCs) की लक्षित संख्या: 105।
विज्ञान-तकनीकट्रेनिंग का मुख्य फोकस: इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के विनिर्माण और एयरोस्पेस क्षेत्रों में कौशल अंतराल को पाटने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण में 'उद्योग 4.0' (Industry 4.0) प्रौद्योगिकियों का एकीकरण किस प्रकार सहायक हो सकता है? चर्चा कीजिए।
स्किल मिसमैच: पारंपरिक वोकेशनल करिकुलम और हाई-टेक इंडस्ट्रियल जरूरतों के बीच अंतर
इंफ्रास्ट्रक्चर बॉटलनैक: ग्रामीण शिक्षा केंद्रों में रोबोटिक्स और VR हार्डवेयर के लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर
लेबर ट्रांजिशन: ऑटोमेटेड मैन्युफैक्चरिंग एनवायरनमेंट के लिए मौजूदा वर्कफोर्स को रिट्रेनिंग देने में चुनौतियां
मुख्य शब्द: इंडस्ट्री 4.0 · स्किल गैप · व्यावसायिक प्रशिक्षण · डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग · तकनीकी लीपफ्रॉगिंग
चर्चा में क्यों: कर्नाटक परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा में सुधार करने और डिजिटल चालान को स्वचालित करने के लिए 60 उच्च-जोखिम वाले स्थानों पर AI-आधारित स्मार्ट एनफोर्समेंट सिस्टम (Smart Enforcement System) तैनात कर रहा है।
यह प्रणाली उन्नत स्मार्ट कैमरों और एक इंटेलिजेंट कमांड सेंटर का उपयोग करती है, जिसे ICT-सक्षम WAN नेटवर्क द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। इन स्थानों की पहचान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (iRAD) से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकiRAD: Integrated Road Accident Database का उपयोग प्रवर्तन (enforcement) के लिए हाई-रिस्क लोकेशन्स की पहचान करने के लिए किया जाता है।
तथ्ययह सिस्टम शुरू में कर्नाटक के 60 हाई-रिस्क (high-risk) लोकेशन्स में तैनात किया जाएगा।
संस्थाMoRTH: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Union Ministry of Road Transport and Highways) साइट की पहचान के लिए डेटा प्रदान करता है।
विज्ञान-तकनीकइस प्रोजेक्ट में भविष्य के स्मार्ट पार्किंग और इमरजेंसी रिस्पॉन्स (emergency response) के लिए एसेट्स और ऑपरेशंस को एकीकृत करने हेतु एक ICT-इनेबल्ड WAN नेटवर्क शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यातायात प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का एकीकरण सार्वजनिक सुरक्षा को कैसे सुदृढ़ कर सकता है और साथ ही डेटा गोपनीयता तथा एल्गोरिथम पारदर्शिता से संबंधित चिंताओं का समाधान कैसे किया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
प्राइवेसी-सिक्योरिटी ट्रेड-ऑफ: यात्रियों के लिए प्राइवेसी के अधिकार और ऑटोमेटेड सर्विलांस के बीच संतुलन
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण बनाम शहरी जिलों में ICT-इनेबल्ड WAN नेटवर्क के लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर
मुख्य शब्द: ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट · एल्गोरिद्मिक गवर्नेंस · स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर · डेटा-आधारित पुलिसिंग · सार्वजनिक सुरक्षा
चर्चा में क्यों: DPIIT के एक वर्किंग पेपर में एक समझौते का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें AI लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) को मुफ्त ऑनलाइन कंटेंट तक असीमित पहुंच दी जाएगी, बशर्ते कि कोई कॉपीराइट सोसाइटी रॉयल्टी वसूल करे।
DPIIT समिति ने AI डेवलपर्स की जरूरतों और कॉपीराइट धारकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए रेडियो स्टेशनों हेतु भारत की अनिवार्य लाइसेंसिंग (compulsory licensing) के समान एक फ्रेमवर्क का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव का Nasscom द्वारा विरोध किया गया है, जिसने जबरन रॉयल्टी (forced royalties) के खिलाफ तर्क दिया है। वहीं, डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन ने OpenAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाDPIIT: डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड।
तथ्यप्रस्तावित मॉडल AI डेटा माइनिंग के लिए रॉयल्टी इकट्ठा करने के लिए एक कॉपीराइट सोसाइटी का सुझाव देता है।
विज्ञान-तकनीकLLMs: ChatGPT जैसे Large Language Models कॉपीराइट एक्सेस (copyright access) की बहस का मुख्य केंद्र हैं।
विज्ञान-तकनीकअनिवार्य लाइसेंसिंग (Compulsory licensing): प्रस्तावित ढांचा भारत में रेडियो स्टेशनों के मौजूदा सिस्टम पर आधारित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में जनरेटिव एआई (Generative AI) और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (Large Language Models) की प्रगति के साथ बौद्धिक संपदा अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने से जुड़ी कानूनी और नैतिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी विवाद: ट्रेनिंग के लिए डेटा के 'फेयर यूज़' और कंटेंट क्रिएटर्स के मालिकाना अधिकारों के बीच संतुलन
इनोवेशन बनाम रेगुलेशन: घरेलू AI स्टार्टअप्स की ग्रोथ पर रॉयल्टी-आधारित 'टैक्स' के आर्थिक प्रभाव का आकलन
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: डिजिटल डेटा माइनिंग के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग मॉडल की व्यवहार्यता का मूल्यांकन
मुख्य शब्द: बौद्धिक संपदा अधिकार · जनरेटिव AI · अनिवार्य लाइसेंसिंग · डेटा माइनिंग · डिजिटल गवर्नेंस
चर्चा में क्यों: इंडिया पोस्ट ने लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने के उद्देश्य से डिजिटल लेबल का उपयोग करके भौतिक पतों को मानकीकृत करने के लिए DHRUVA फ्रेमवर्क का प्रस्ताव दिया है।
DHRUVA, इंडिया पोस्ट द्वारा प्रस्तावित एक डिजिटल एड्रेस सिस्टम है जो ईमेल एड्रेस के समान 'लेबल्स' का उपयोग करता है। इसे एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Public Infrastructure - DPI) के रूप में परिकल्पित किया गया है, ताकि लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए सहमति-आधारित डेटा शेयरिंग और स्वचालित एड्रेस रिट्रीवल की सुविधा प्रदान की जा सके।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकDHRUVA: भारत डाक द्वारा फिजिकल एड्रेस को स्टैंडर्डाइज करने के लिए प्रस्तावित एक डिजिटल एड्रेस फ्रेमवर्क।
तथ्यDHRUVA का लक्ष्य Aadhaar और UPI की तरह एक Digital Public Infrastructure (DPI) के रूप में कार्य करना है।
विज्ञान-तकनीकDHRUVA फ्रेमवर्क एड्रेस अपडेट और सर्विस डिस्कवरी के लिए सहमति-आधारित डेटा शेयरिंग की अनुमति देता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) के विकास, जैसे कि 'ध्रुव' (DHRUVA), भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को सुव्यवस्थित करने में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, तथा इस प्रक्रिया में डेटा गोपनीयता और शहरी शासन से संबंधित चिंताओं के समाधान के संदर्भ में इसका विश्लेषण कीजिए।
डेटा प्राइवेसी: सहमति आधारित शेयरिंग और बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत जानकारी जुटाने के जोखिमों के बीच संतुलन
लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी: स्टैंडर्डाइज्ड डिजिटल लेबल्स के जरिए मैनुअल इनपुट एरर्स को कम करना और लास्ट-माइल डिलीवरी को आसान बनाना
गवर्नेंस इंटीग्रेशन: सेंट्रलाइज्ड डिजिटल एड्रेस स्टैंडर्ड्स और लोकल अर्बन प्लानिंग के बीच टकराव की संभावना
चर्चा में क्यों: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (University of New South Wales) बेंगलुरु में एक कैंपस खोलेगी। यह भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली सातवीं ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी होगी।
यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (University of New South Wales) बेंगलुरु में एक कैंपस स्थापित करेगी। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित ऑस्ट्रेलिया-इंडिया एजुकेशन एंड स्किल्स काउंसिल की तीसरी बैठक के दौरान की गई। इस बैठक में AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजास्टर रेजिलिएंस (disaster resilience) के क्षेत्र में अनुसंधान पर आधारित समझौतों पर चर्चा हुई।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थायूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (University of New South Wales): ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी बेंगलुरु में कैंपस खोल रही है।
तथ्ययूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (University of New South Wales) भारत में कैंपस खोलने वाली सातवीं ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी होगी।
स्थानबेंगलुरु: यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (University of New South Wales) के नए कैंपस की लोकेशन।
तथ्यरिसर्च कोलैबोरेशंस (Research collaborations) में AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजास्टर रेजिलिएंस (disaster resilience) शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक सहयोग और विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसरों की स्थापना किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत की अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ कर सकती है, चर्चा कीजिए।
स्किल गैप अलाइनमेंट: ऑस्ट्रेलियाई वोकेशनल ट्रेनिंग स्टैंडर्ड्स को भारतीय इंडस्ट्रियल रिक्वायरमेंट्स के साथ जोड़ना
रिसर्च सिनर्जी: क्वांटम कंप्यूटिंग में स्वदेशी इनोवेशन को तेज़ करने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता का लाभ उठाना
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: विदेशी नेतृत्व वाले रिसर्च में अकादमिक ऑटोनॉमी और राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: शैक्षिक सहयोग · कौशल विकास · रिसर्च इनोवेशन · क्वांटम कंप्यूटिंग · मानव संसाधन विकास
चर्चा में क्यों: भारत और वैश्विक स्तर के वैज्ञानिकों ने एक साझा तंत्र (mechanism) की पहचान की है, जहाँ जन्मजात इम्यून सिग्नलिंग पाथवे (innate immune signaling pathways), विशेष रूप से ऑटोफैगी (autophagy) और प्रोग्राम्ड सेल डेथ (programmed cell death), बीमारियों को प्रभावित करने के लिए आपस में जुड़े हुए तरीके से काम करते हैं।
CSIR-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के शोधकर्ताओं ने इस बात पर चर्चा की कि ये परस्पर जुड़ी प्रक्रियाएं संक्रमण, ऑटोइम्यून विकार (autoimmune disorders), कैंसर और न्यूरोडिजेनरेशन (neurodegeneration) को कैसे प्रभावित करती हैं। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि अब उपचार का झुकाव सीधे रोगजनकों (pathogens) के बजाय होस्ट डिफेंस (host defenses) को लक्षित करने की दिशा में बढ़ रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकAutophagy और programmed cell death को आपस में जुड़े हुए innate immune signaling pathways के रूप में पहचाना गया है।
संस्थाCSIR-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) ने रिसर्च डिस्कशन की मेजबानी की।
तथ्ययह रिसर्च इन्फेक्शन, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (autoimmune disorders), कैंसर और न्यूरोडिजनरेशन (neurodegeneration) पर सेलुलर डिफेंस मैकेनिज्म (cellular defense mechanisms) के प्रभाव को कवर करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ऑटोफैगी जैसे जन्मजात प्रतिरक्षा संकेतन मार्गों (innate immune signaling pathways) के अंतर्संबंधों को समझना किस प्रकार पुरानी और ऑटोइम्यून बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
थैरेप्यूटिक शिफ्ट: क्रोनिक बीमारियों के लिए पैथोजन-सेंट्रिक इलाज से होस्ट-डिफेंस मॉड्यूलेशन की ओर बदलाव
मैकेनिस्टिक सिनर्जी: सेलुलर डिफेंस में ऑटोफैगी और प्रोग्राम्ड सेल डेथ का एकीकरण
क्लिनिकल एप्लीकेशन: न्यूरोडिजनरेशन और कैंसर में टारगेटेड थेरेपी की संभावना
मुख्य शब्द: जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता · ऑटोफैगी · प्रोग्राम्ड सेल डेथ · होस्ट डिफेंस · मॉलिक्यूलर बायोलॉजी · थेराप्यूटिक इंटरवेंशन
चर्चा में क्यों: शिक्षा मंत्रालय, AICTE और इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल ने KITS गुंटूर में स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (SIH) 2025-सॉफ्टवेयर के 8वें संस्करण का ग्रैंड फिनाले आयोजित किया।
इस आयोजन में भारत भर के नोडल केंद्रों पर वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान करने वाली 1,360 युवा इनोवेटर्स की टीमों ने भाग लिया। इस हैकाथॉन (Hackathon) की मेजबानी गुंटूर स्थित KKR & KSR इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (KITS) द्वारा की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाAICTE: ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (All India Council for Technical Education), शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के तहत एक statutory body है।
संस्थाइंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल (Institute Innovation Council): उच्च शिक्षा संस्थानों में इनोवेशन (innovation) को बढ़ावा देने के लिए स्थापित एक निकाय।
तथ्यSIH 2025: स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (Smart India Hackathon) के 8वें संस्करण में 1,360 टीमों ने भाग लिया।
स्थानKITS: गुंटूर में स्थित KKR & KSR इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्मार्ट इंडिया हैकथॉन जैसी पहलें किस प्रकार भारत में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा दे सकती हैं और शैक्षणिक अनुसंधान एवं औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच के अंतराल को कम करने में सहायक हो सकती हैं, चर्चा कीजिए।
स्किल-गैप ब्रिज: अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग करिकुलम को रियल-वर्ल्ड प्रॉब्लम-सॉल्विंग और इंडस्ट्रियल रिक्वायरमेंट्स के साथ जोड़ना
स्टार्टअप इकोसिस्टम: संस्थागत सहयोग के जरिए एकेडमिक प्रोटोटाइप्स को स्केलेबल कमर्शियल वेंचर्स में बदलना
डिजिटल लीडरशिप: महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी सेक्टर में आत्मनिर्भरता पाने के लिए स्वदेशी सॉफ्टवेयर इनोवेशन का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: इनोवेशन इकोसिस्टम · कौशल विकास · तकनीकी संप्रभुता · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · प्रॉब्लम-सॉल्विंग पेडागोजी
चर्चा में क्यों: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लॉकहीड मार्टिन ने बेंगलुरु में एक C-130J सुपर हरक्यूलिस MRO (Maintenance, Repair and Overhaul) सुविधा का निर्माण शुरू करने की घोषणा की है। यह सुविधा डिपो-स्तरीय रखरखाव (Depot-level maintenance) और प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
यह सुविधा बेंगलुरु में केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित होगी और इसके 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह C-130J सुपर हरक्यूलिस, KC-130J और C-130 B-H लेगेसी विमानों को सहायता प्रदान करेगी, जिसमें पहला विमान 2027 में आने की उम्मीद है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
विज्ञान-तकनीकC-130J सुपर हरक्यूलिस: एक मल्टी-मिशन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट।
तथ्यMRO फैसिलिटी पूरा होने का लक्ष्य: 2026।
तथ्यइस फैसिलिटी में पहले विमान के आने की उम्मीद: 2027।
स्थानलोकेशन: बेंगलुरु में केम्पेगौडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Kempegowda International Airport) के पास।
पदपार्टनरशिप: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लॉकहीड मार्टिन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सैन्य विमानों के लिए स्वदेशी एमआरओ (MRO) सुविधाओं के विकास से एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायता मिलती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: महत्वपूर्ण हैवी मेंटेनेंस और स्पेयर पार्ट्स के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
स्किल डेवलपमेंट: हाई-एंड एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और डिपो-लेवल मेंटेनेंस के लिए एक स्पेशलाइज्ड वर्कफोर्स तैयार करना
इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करना
मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · एमआरओ · एयरोस्पेस इंजीनियरिंग · रणनीतिक स्वायत्तता · तकनीकी हस्तांतरण · डिपो-लेवल मेंटेनेंस
चर्चा में क्यों: इंडिगो द्वारा उड़ानों को रद्द किए जाने के बाद, नागरिक उड्डयन मंत्री ने DGCA द्वारा जारी किए गए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (FDTL) के आदेशों पर रोक लगा दी है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने चालक दल की थकान (crew fatigue) को नियंत्रित करने के लिए FDTL आदेश जारी किए। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन सीमाओं को स्थगित रखने के DGCA के पिछले फैसले को चुनौती दी है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाDGCA: Directorate General of Civil Aviation भारत में सिविल एविएशन के लिए रेगुलेटरी बॉडी है।
तथ्यFDTL: Flight Duty Time Limitations वे रेगुलेशंस (regulations) हैं जिन्हें क्रू की थकान (fatigue) को मैनेज और कम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
संस्थाICAO: इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (International Civil Aviation Organization) एविएशन सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक प्रदान करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र की लाभप्रदता और सुरक्षा नियमों के मध्य विद्यमान तनाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्रों में नियामक संस्थाएं जवाबदेही कैसे सुनिश्चित कर सकती हैं?
रेगुलेटरी कैप्चर: विमानन अधिकारियों द्वारा अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के बजाय एयरलाइंस की कमर्शियल व्यवहार्यता को प्राथमिकता देने का जोखिम
सेफ्टी-फटीग नेक्सस: ICAO द्वारा हाइलाइट किया गया क्रू ड्यूटी घंटों और एविएशन एक्सीडेंट रेट के बीच संबंध
न्यायिक निगरानी: सार्वजनिक सुरक्षा मानकों से जुड़े कार्यकारी फैसलों की समीक्षा में हाई कोर्ट की भूमिका
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी कैप्चर · एविएशन सुरक्षा · जवाबदेही · व्यावसायिक हित · सार्वजनिक सुरक्षा
चर्चा में क्यों: अक्टूबर में तीव्र सौर विकिरण (Solar Radiation) के कारण अचानक ऊंचाई में गिरावट आने के बाद, एयरबस ने 6,000 से अधिक विमानों को ग्राउंड कर दिया। इस घटना के बाद एक इमरजेंसी एयरवर्थिनेस डायरेक्टिव (EAD) जारी किया गया।
यूके सरकार के नेशनल रिस्क रजिस्टर (National Risk Register) में अंतरिक्ष के मौसम (space weather) को बिजली ग्रिड और सैटेलाइट्स के लिए एक खतरे के रूप में पहचाना गया है। यह लेख कैरिंगटन-क्लास घटनाओं (Carrington-class events) (सबसे तीव्र दर्ज की गई घटना) और संभावित रूप से उससे भी बड़ी मियाके घटनाओं (Miyake events) के बीच अंतर स्पष्ट करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यसोलर रेडिएशन इंटरफेरेंस (solar radiation interference) के कारण अक्टूबर में Airbus ने 6,000 से अधिक विमानों को ग्राउंड कर दिया।
संस्थाNational Risk Register: यह UK सरकार का एक पब्लिकेशन है जो स्पेस वेदर (space weather) को एक गंभीर खतरे के रूप में सूचीबद्ध करता है।
विज्ञान-तकनीकCarrington-class इवेंट: रिकॉर्ड किए गए इतिहास में सबसे तीव्र geomagnetic स्टॉर्म।
विज्ञान-तकनीकMiyake इवेंट्स: Carrington-क्लास इवेंट्स से बड़े संभावित भू-चुंबकीय (geomagnetic) इवेंट्स।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) पर अंतरिक्ष मौसम के प्रभावों से उत्पन्न होने वाली संवेदनशीलताओं की चर्चा कीजिए और चरम भू-चुंबकीय तूफानों से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का विश्लेषण कीजिए।
ग्रिड की संवेदनशीलता: हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क में कैस्केडिंग फेलियर की संभावना
सैटेलाइट इंटीग्रिटी: ऑर्बिटल हार्डवेयर को नुकसान और कम्युनिकेशन ब्लैकआउट का जोखिम जो GPS और टेलीकम्युनिकेशन को प्रभावित कर सकता है
एविएशन सुरक्षा: सोलर रेडिएशन इंटरफेरेंस के खिलाफ मजबूत शील्डिंग और सॉफ्टवेयर रिडंडेंसी की ज़रूरत
मुख्य शब्द: स्पेस वेदर · जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म्स · महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा · एयरवर्थिनेस डायरेक्टिव · सौर विकिरण
चर्चा में क्यों: मुंबई हाई कोर्ट ने निर्माण कार्य से होने वाली धूल के कारण मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुओ मोटो (suo motu) संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मौजूदा दिशा-निर्देशों के पालन में हो रही विसंगतियों पर भी ध्यान आकर्षित किया है।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के एक अध्ययन में पाया गया है कि निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल मुंबई में PM10 प्रदूषण में 30% का योगदान देती है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) वर्तमान में इस समस्या के समाधान के लिए मिस्ट स्प्रेइंग (mist spraying) और काम रोकने के नोटिस (stop-work notices) जैसे उपायों का उपयोग कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यMPCB के अनुसार, मुंबई में PM10 प्रदूषण में कंस्ट्रक्शन डस्ट (Construction dust) का योगदान 30% है।
संस्थामहाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाली राज्य स्तरीय संस्था है।
तथ्यPM10 एक विशिष्ट पार्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) प्रदूषक है जिसे कंस्ट्रक्शन डस्ट (construction dust) से प्रभावित होने वाला माना गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मुंबई जैसे तेजी से विकसित होते महानगरों में निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को विनियमित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और इस दिशा में आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
डेटा की कमी: सड़क आवाजाही और निर्माण गतिविधियों पर बारीक डेटा न होने से सबूतों पर आधारित नीति लागू करने में बाधा आ रही है
रेगुलेटरी गैप: स्टॉप-वर्क नोटिस और मिस्ट स्प्रेइंग के बावजूद हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन में विसंगति
मिटिगेशन की सीमाएं: स्ट्रक्चरल अर्बन प्लानिंग और डस्ट-सप्रेशन टेक्नोलॉजी के बजाय मिस्ट स्प्रे जैसी अस्थायी उपायों पर निर्भरता
मुख्य शब्द: सुओ मोटो संज्ञान · PM10 प्रदूषण · विस्तृत डेटा · रेगुलेटरी कंप्लायंस · शहरी वायु गुणवत्ता
चर्चा में क्यों: भारतीय सेना ने सिक्किम और अग्रिम क्षेत्रों में मजबूत रक्षा संरचनाओं का तेजी से निर्माण करने के लिए स्वदेशी ऑन-साइट 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक (3D concrete printing technology) का उपयोग किया है।
यह तकनीक प्रोजेक्ट PRABAL के तहत IIT-हैदराबाद के सहयोग से विकसित की गई है। यह रोबोटिक प्रिंटर चुनौतीपूर्ण इलाकों में बंकर और सेंट्री पोस्ट बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसने सफलतापूर्वक लाइव बैलिस्टिक परीक्षण (live ballistic trials) पूरे कर लिए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकप्रोजेक्ट PRABAL: वह पहल जिसके तहत स्वदेशी 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक (3D concrete printing technology) विकसित की गई।
पदIIT-Hyderabad: इस शैक्षणिक संस्थान ने रोबोटिक प्रिंटर के विकास के लिए भारतीय सेना के साथ सहयोग किया।
तथ्ययह तकनीक विशेष रूप से फॉरवर्ड एरिया (forward areas) में बंकर और सेंट्री पोस्ट के तेजी से निर्माण के लिए डिजाइन की गई है।
स्थानसिक्किम: यह उन प्रमुख स्थानों में से एक है जहाँ 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक (3D concrete printing technology) का इस्तेमाल किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रक्षा बुनियादी ढांचे में स्वदेशी 3D प्रिंटिंग तकनीक के एकीकरण से उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारत की सीमा प्रबंधन और रसद क्षमताओं को किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: दुर्गम हाई-एल्टीट्यूड ज़ोन में महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के कंस्ट्रक्शन लीड-टाइम में कमी
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: स्वदेशी रोबोटिक सिस्टम और स्थानीय सामग्रियों का उपयोग करके सप्लाई चेन की कमियों को दूर करना
स्ट्रक्चरल रेज़िलिएंस: प्रिसिजन-इंजीनियर्ड 3D कंक्रीट प्रिंटिंग के जरिए बेहतर ब्लास्ट और बैलिस्टिक रेजिस्टेंस
मुख्य शब्द: रक्षा आधुनिकीकरण · स्वदेशी तकनीक · प्रोजेक्ट प्रबल · लॉजिस्टिक कुशलता · रणनीतिक स्वायत्तता
चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भारत के एक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र (Renewable Energy Hub) के रूप में उभरने पर जोर दिया और बताया कि इस वित्त वर्ष में पावर ग्रिड में 31.25 GW की वृद्धि हुई है।
भारत ने चालू वित्त वर्ष में अपनी पावर ग्रिड में 31.25 गीगावाट बिजली जोड़ी है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा सौर क्षमता से प्राप्त हुआ है। ओडिशा राज्य का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन और कोल गैसीफिकेशन (Coal Gasification) में निवेश करने के साथ-साथ 200 GW सौर ऊर्जा उत्पादन करने का है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यभारत ने चालू वित्त वर्ष में अपने पावर ग्रिड में 31.25 GW रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) जोड़ी है।
तथ्यभारत वर्तमान में वैश्विक सोलर एडिशन (solar additions) में तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
तथ्यओडिशा का सोलर पावर जनरेशन का लक्ष्य 200 GW है।
तथ्यओडिशा ग्रीन हाइड्रोजन और कोल गैसीफिकेशन (coal gasification) प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र के रूप में भारत के परिवर्तन के महत्व और राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में राज्य-नेतृत्व वाली पहलों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
ग्रिड इंटीग्रेशन: इंटरमिटेंट सोलर और विंड पावर लोड को मैनेज करने की तकनीकी चुनौतियां
डिकार्बोनाइजेशन रणनीति: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोल गसीफिकेशन और ग्रीन हाइड्रोजन निवेश के बीच संतुलन
राज्य-नेतृत्व वाली ग्रोथ: पीक डिमांड को पूरा करने में डिसेंट्रलाइज्ड रूफटॉप सोलर प्रोग्राम की भूमिका
मुख्य शब्द: रिन्यूएबल एनर्जी हब · डीकार्बोनाइजेशन · ग्रीन हाइड्रोजन · ऊर्जा सुरक्षा · सोलर क्षमता
चर्चा में क्यों: DRDO ने स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के तहत विकसित की गई सात तकनीकों को सशस्त्र बलों को सौंपा है।
DRDO की एम्पॉवर्ड कमेटी ने 2 दिसंबर को नई दिल्ली में सात तकनीकों के हस्तांतरण को मंजूरी दी। प्रमुख तकनीकों में एयरबोर्न जैमर्स (airborne jammers) के लिए हाई-वोल्टेज पावर सप्लाई, नौसेना के जेटी (jetties) के लिए टाइड-एफिशिएंट गैंगवे (tide-efficient gangway) और फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट के लिए वॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम शामिल हैं।
योजनाTechnology Development Fund (TDF): स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए एक स्कीम।
विज्ञान-तकनीकवॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम (Waterjet propulsion system): इसे फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (fast interceptor craft) के लिए विकसित किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रौद्योगिकी विकास कोष (TDF) के महत्व और इसकी अंत-से-अंत (end-to-end) प्रसंस्करण प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
प्रोक्योरमेंट बॉटलनेक: TDF प्रोजेक्ट्स की एंड-टू-एंड प्रोसेसिंग में देरी से समय पर तैनाती प्रभावित
स्वदेशीकरण रणनीति: विशेष नौसेना और हवाई घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: स्वदेशीकरण · डिफेंस R&D · तकनीकी हस्तांतरण · आत्मनिर्भर भारत · रणनीतिक स्वायत्तता
चर्चा में क्यों: कर्नाटक 'सौर स्वास्थ्य' योजना के तहत बिजली की लागत कम करने और 24/7 बिजली सुनिश्चित करने के लिए 3,600 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को सौर ऊर्जा से संचालित करने वाला पहला राज्य बन गया है।
यह पहल, SELCO फाउंडेशन के साथ साझेदारी में कार्यान्वित की गई है, जिसका उद्देश्य तीन करोड़ से अधिक ग्रामीण निवासियों को लाभान्वित करना है। इसने स्वास्थ्य केंद्रों के बिजली बिलों में अनुमानित 80% से 85% तक की कमी हासिल की है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यकर्नाटक में 3,600 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को सोलर (solarised) कर दिया गया है।
योजनासौर स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सुविधाओं को सोलर करने के लिए कर्नाटक राज्य की योजना।
संस्थाSELCO फाउंडेशन: सोलर पावर के कार्यान्वयन के लिए राज्य के साथ साझेदारी।
तथ्यइस प्रोजेक्ट का लक्ष्य बिजली के बिलों में 80% से 85% तक की कमी लाना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण भारत में आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के वितरण को सुदृढ़ करने में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय दक्षता: CSR से फंडेड कैपिटल इन्वेस्टमेंट के जरिए बिजली के आवर्ती खर्चों में कमी
सेवा की विश्वसनीयता: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में बिजली कटौती कम करना ताकि 24/7 इमरजेंसी सेवाएं सुनिश्चित हो सकें
डिकार्बोनाइजेशन: सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में डीजल जनरेटर से सोलर पावर की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: विकेंद्रीकृत ऊर्जा · रिन्यूएबल ट्रांज़िशन · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · CSR-आधारित विकास · ऊर्जा सुरक्षा
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार और ऑस्ट्रेलिया की डीकिन यूनिवर्सिटी (Deakin University) ने भारत फ्यूचर सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centre of Excellence) स्थापित करने के लिए एक समझौता किया है।
CoE (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) का निर्माण हैदराबाद के पास भारत फ्यूचर सिटी में बनने वाली आगामी AI यूनिवर्सिटी के भीतर किया जाएगा। यह उन्नत AI कौशल विकसित करने के लिए तेलंगाना सरकार के सहयोग से डीकिन एप्लाइड AI इंस्टीट्यूट (Deakin Applied AI Institute) द्वारा संचालित किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानभारत फ्यूचर सिटी तेलंगाना के हैदराबाद के पास स्थित है।
विज्ञान-तकनीकDeakin Applied AI Institute वह ऑस्ट्रेलियाई संस्था है जो CoE के लिए पार्टनर है।
तथ्ययह पहल विभिन्न क्षेत्रों में एडवांस AI स्किल्स विकसित करने पर केंद्रित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उभरती प्रौद्योगिकियों, जैसे कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में भारत की मानव संसाधन क्षमताओं को बढ़ाने में सार्वजनिक-निजी-अंतरराष्ट्रीय भागीदारी (PPP-I) किस प्रकार सहायक हो सकती है, चर्चा कीजिए।
स्किल गैप: क्षेत्रीय इंडस्ट्रियल हब्स में हाई-एंड AI एक्सपर्ट की कमी को दूर करना
नॉलेज ट्रांसफर: स्वदेशी AI रिसर्च क्षमताएं बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विशेषज्ञता का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: मानव पूंजी विकास · नॉलेज ट्रांसफर · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · कौशल विकास · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
चर्चा में क्यों: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के जूस (Juice) अंतरिक्ष यान ने नवंबर 2025 में धूमकेतु 3I/ATLAS की तस्वीरें लीं, जिसमें इसके कोमा (coma) और दोहरी पूंछ (dual tails) दिखाई दीं।
जुपिटर आइसी मून्स एक्सप्लोरर (Juice) अंतरिक्ष यान ने धूमकेतु 3I/ATLAS के अवलोकन के लिए अपने नेविगेशन कैमरे और पांच वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग किया। इन अवलोकनों में गैस का एक चमकता हुआ घेरा (coma) और दो स्पष्ट पूंछों की पहचान की गई, जिससे आंतरिक सौर मंडल में धूमकेतु के व्यवहार पर महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त हुआ।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकJuice: Jupiter Icy Moons Explorer, European Space Agency (ESA) द्वारा भेजा गया एक स्पेसक्राफ्ट मिशन है।
तथ्यComet 3I/ATLAS को नवंबर 2025 में Juice स्पेसक्राफ्ट द्वारा देखा गया था।
विज्ञान-तकनीककोमा (Coma): धूमकेतु के न्यूक्लियस (nucleus) के चारों ओर गैस का एक चमकता हुआ घेरा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के 'ज्यूस' (Juice) जैसे गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण मिशन सौरमंडल के रासायनिक विकास और निर्माण की हमारी समझ में किस प्रकार योगदान देते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
डेटा एक्विजिशन: धूमकेतु न्यूक्लियस में होने वाले सब्लिमेशन को मैप करने के लिए मल्टी-इंस्ट्रूमेंट नेविगेशन कैमरों का इस्तेमाल
वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि: सोलर सिस्टम के विकास को मॉडल करने के लिए प्लाज्मा और डस्ट टेल डायनेमिक्स का विश्लेषण
मुख्य शब्द: डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन · धूमकेतु की गतिशीलता · अंतरिक्ष उपकरण · सौर मंडल का विकास
चर्चा में क्यों: इक्वेटर जियो (Equator Geo) ने अपने 'जल संरक्षण के लिए वॉटर क्रेडिट' (water credit for water conservation) के कॉन्सेप्ट के लिए केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ पायलट प्रोजेक्ट के लिए 'AMRUT इंडिया पिच पायलट स्टार्टअप चैलेंज' जीता है।
इक्वेटर जियो (Equator Geo) एक जलवायु परिवर्तन, जल-तकनीक और भू-स्थानिक (geospatial) स्टार्टअप है। इस स्टार्टअप को एक बाजार-आधारित प्रणाली लागू करने के लिए ₹20 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ है। इस प्रणाली के माध्यम से शहरी स्थानीय निकाय सत्यापित जल-बचत प्रथाओं के जरिए 'वॉटर क्रेडिट' (water credits) अर्जित करेंगे और उनका मुद्रीकरण (monetization) करेंगे।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाAMRUT India Pitch Pilot Startup Challenge: इनोवेटिव वॉटर-टेक और जियोस्पेशियल स्टार्टअप्स को फंड करने के लिए एक प्लेटफॉर्म।
तथ्यइक्वेटर जियो (Equator Geo) को इसके पायलट प्रोग्राम के लिए ₹20 लाख का अनुदान मिला।
संस्थाकेंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (Union Ministry of Housing and Urban Affairs): AMRUT India पायलट प्रोजेक्ट के लिए नोडल मंत्रालय।
तथ्यवॉटर क्रेडिट्स (Water credits): एक मार्केट-आधारित सिस्टम जो अर्बन लोकल बॉडीज (Urban Local Bodies) को सत्यापित जल-बचत प्रथाओं से पैसा कमाने (monetize) की अनुमति देता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय शहरों में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सतत जल प्रबंधन को प्रोत्साहित करने में जल क्रेडिट (water credits) जैसे बाजार-आधारित तंत्र किस प्रकार प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
इंसेंटिव अलाइनमेंट: पब्लिक-फंडेड इंफ्रास्ट्रक्चर से मार्केट-ड्रिवन कंजर्वेशन इंसेंटिव की ओर बदलाव
वेरिफिकेशन में रुकावट: स्थानीय निकायों द्वारा जल-बचत प्रथाओं की मजबूत और पारदर्शी ऑडिटिंग की ज़रूरत
राजकोषीय विकेंद्रीकरण: स्थानीय बुनियादी ढांचे के लिए संरक्षण प्रयासों से कमाई करने हेतु शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना
मुख्य शब्द: बाज़ार-आधारित मैकेनिज्म · शहरी जल प्रबंधन · वॉटर क्रेडिट्स · सतत संरक्षण · विकेंद्रीकृत शासन
चर्चा में क्यों: सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) ने घोषणा की है कि वह 2030 तक अंतरिक्ष यात्रियों, एथलीटों और बुजुर्गों के लिए उन्नत खाद्य तकनीकें (Advanced food technologies) विकसित करने की दिशा में काम करेगा।
मैसूर स्थित CFTRI, विशेष खाद्य प्रौद्योगिकियों (food technologies) को विकसित करने के लिए CSIR प्रयोगशालाओं के साथ सहयोग कर रही है। संस्थान ने पहले ही केरल सरकार को 94 प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं, जिससे ₹50 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाCFTRI: सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (Central Food Technological Research Institute) मैसूरु में स्थित है।
तथ्यCFTRI ने केरल सरकार को 94 टेक्नोलॉजीज ट्रांसफर की हैं।
तथ्यकेरल को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) से प्राप्त राजस्व ₹50 लाख है।
विज्ञान-तकनीकCFTRI फूड प्रोसेसिंग के तरीकों में Artificial Intelligence के उपयोग की संभावनाओं की जांच कर रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: खाद्य प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में हो रहे विकास किस प्रकार भारत में अंतरिक्ष यात्रियों और वृद्धों जैसे विशिष्ट जनसांख्यिकीय समूहों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
पोषण की सटीकता: कठिन वातावरण और बुजुर्गों की मेटाबॉलिक जरूरतों के लिए मैक्रोन्यूट्रिएंट प्रोफाइल तैयार करना
तकनीकी एकीकरण: स्पेस-ग्रेड लॉजिस्टिक्स में फूड प्रिजर्वेशन और शेल्फ-लाइफ को बेहतर बनाने के लिए AI का इस्तेमाल
कमर्शियल व्यवहार्यता: R&D से राजस्व पैदा करने वाली टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तक का सफर राज्य सरकारों के लिए
मुख्य शब्द: फ़ूड टेक्नोलॉजी · स्पेस न्यूट्रिशन · बुजुर्गों के लिए पोषण · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · तकनीकी हस्तांतरण
चर्चा में क्यों: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission) के तहत शोध करने के लिए अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के तीन फैकल्टी सदस्यों को ₹3.4 करोड़ का अनुदान प्रदान किया है।
यह वित्त पोषण तीन विशिष्ट परियोजनाओं का समर्थन करता है: गहरे समुद्र के पॉलीकीट्स (polychaetes) पर टैक्सोनोमिक अध्ययन, माइक्रोबियल मेटाबोलाइट्स लाइब्रेरी का विकास, और तटीय जल में पैथोजेनिक वायरस और माइक्रोस्पोरिडियन पर शोध। यह अनुदान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) द्वारा अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों को प्रदान किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यअनुदान राशि: ₹3.4 करोड़।
संस्थाEarth Sciences मंत्रालय: रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग प्रदान करना।
विज्ञान-तकनीकDeep Ocean Mission: वह केंद्रीय पहल जिसके तहत रिसर्च प्रोजेक्ट्स को फंड किया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: गहरे समुद्र की जैव विविधता अनुसंधान में आने वाली चुनौतियों का समाधान करते हुए, भारत के वैज्ञानिक विकास और 'ब्लू इकोनॉमी' (नीली अर्थव्यवस्था) के लक्ष्यों में 'डीप ओशन मिशन' के योगदान का विश्लेषण कीजिए।
रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर: माइक्रोबियल मेटाबोलाइट लाइब्रेरीज के लिए स्पेशलाइज्ड लैब सुविधाओं की ज़रूरत
बायोडायवर्सिटी संरक्षण: गहरे समुद्र की खोज और अनोखे समुद्री इकोसिस्टम की सुरक्षा के बीच संतुलन
वैज्ञानिक संप्रभुता: गहरे समुद्र के टैक्सोनॉमिक और पैथोजेनिक रिसर्च के लिए विदेशी डेटा पर निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: डीप ओशन मिशन · ब्लू इकोनॉमी · समुद्री जैव विविधता · माइक्रोबियल मेटाबोलाइट्स · वैज्ञानिक अनुसंधान