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भाग I · स्था. 11.2025 
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,497 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (548) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (354) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (254) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (214) · रक्षा तकनीक (123) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)

केरल सरकार PM E-DRIVE योजना के तहत नेशनल हाईवे 66 पर एक मॉडल इलेक्ट्रिक ट्रक कॉरिडोर विकसित करने की योजना बना रही है

चर्चा में क्यों: केरल सरकार PM E-DRIVE योजना के तहत नेशनल हाईवे 66 पर एक मॉडल इलेक्ट्रिक ट्रक कॉरिडोर विकसित करने की योजना बना रही है, जिसका उद्देश्य भारी माल ढुलाई से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।

केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) और इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICTT) उच्च क्षमता वाले चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को स्थापित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इस पहल का लक्ष्य मध्यम और भारी-ड्यूटी वाले ट्रकों को लक्षित करना है, जिन्हें ईंधन की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला माना गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनाPM E-DRIVE: इलेक्ट्रिक व्हीकल (Electric Vehicle) को अपनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की एक योजना।
  • संस्थाKSEB: केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (Kerala State Electricity Board), राज्य की प्राथमिक बिजली उपयोगिता (power utility)।
  • स्थाननेशनल हाईवे 66: केरल में इलेक्ट्रिक ट्रक मॉडल के लिए चुना गया प्राथमिक कॉरिडोर।
  • तथ्ययह प्रोजेक्ट मीडियम और हैवी-ड्यूटी ट्रकों पर केंद्रित है क्योंकि इनका ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse gas emissions) में उच्च योगदान है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के तटीय गलियारों में भारी-भरकम माल ढुलाई परिवहन को इलेक्ट्रिक गतिशीलता (इलेक्ट्रिक मोबिलिटी) में परिवर्तित करने में आने वाली लॉजिस्टिक और बुनियादी ढाँचे संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • ग्रिड स्टेबिलिटी: तटीय हाईवे पर भारी-भरकम ट्रक चार्जिंग स्टेशनों से आने वाले हाई-कैपेसिटी पीक लोड को मैनेज करना
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: स्टैंडर्ड पैसेंजर व्हीकल पॉइंट्स के मुकाबले हाई-कैपेसिटी चार्जिंग स्टेशनों की ज़रूरत
  • पॉलिसी सिनर्जी: राज्य के ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को केंद्रीय PM E-DRIVE स्कीम के उद्देश्यों के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: डीकार्बोनाइजेशन · माल ढुलाई का विद्युतीकरण · ग्रीन लॉजिस्टिक्स · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · पीएम ई-ड्राइव

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने C-DAC द्वारा विकसित स्वदेशी 64-bit ड्यूल-कोर माइक्रोप्रोसेसर, DHRUV64 की लॉन्चिंग की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने C-DAC द्वारा विकसित स्वदेशी 64-bit ड्यूल-कोर माइक्रोप्रोसेसर, DHRUV64 की लॉन्चिंग की घोषणा की है।

DHRUV64 एक 64-bit, ड्यूल-कोर प्रोसेसर है जिसे 1 GHz की गति पर चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह दूरसंचार और ऑटोमोटिव सिस्टम के लिए RISC-V-आधारित माइक्रोप्रोसेसर का पोर्टफोलियो तैयार करनेकी एक सरकारी पहल का हिस्सा है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकDHRUV64: C-DAC द्वारा विकसित एक स्वदेशी 64-bit, dual-core माइक्रोप्रोसेसर।
  • विज्ञान-तकनीकRISC-V: DHRUV64 सहित माइक्रोप्रोसेसर के पोर्टफोलियो के लिए आर्किटेक्चर बेस।
  • पदC-DAC: सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (Centre for Development of Advanced Computing), वह संस्था जो DHRUV64 विकसित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यDHRUV64: इसे 1 GHz की क्लॉक स्पीड (clock speed) पर चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के अर्धचालक उद्योग में तकनीकी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वदेशी RISC-V आधारित माइक्रोप्रोसेसर विकसित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • सप्लाई चेन रेजिलिएंस: महत्वपूर्ण टेलीकम्युनिकेशन और ऑटोमोटिव इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी-डिजाइन आर्किटेक्चर पर निर्भरता कम करना
  • इकोसिस्टम बॉटलनैक: घरेलू सिलिकॉन के लिए फैब्रिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर सपोर्ट की कमी को दूर करना
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: महत्वपूर्ण राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर में हार्डवेयर-लेवल बैकडोर के जोखिमों को कम करना

मुख्य शब्द: तकनीकी संप्रभुता · RISC-V आर्किटेक्चर · सेमीकंडक्टर मिशन · स्वदेशी नवाचार · हार्डवेयर सिक्योरिटी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स + मेन्स

StrideAide ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) में एक डिजिटल पोडियाट्री क्लिनिक (Digital Podiatry Clinic) का उद्घाटन किया है

चर्चा में क्यों: StrideAide ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) में एक डिजिटल पोडियाट्री क्लिनिक (Digital Podiatry Clinic) का उद्घाटन किया है। इसका उद्देश्य AI की मदद से रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन (Risk Stratification) के जरिए डायबिटिक फुट की जटिलताओं का शुरुआती चरण में पता लगाना है।

D-PoC क्लिनिक मधुमेह (diabetes) से पीड़ित 10,000 से अधिक लोगों की वार्षिक स्क्रीनिंग के लिए डायग्नोस्टिक उपकरणों को AI के साथ एकीकृत करता है। IISc व्यक्तिगत फुटवियर डिजाइन के लिए व्यक्तिगत पैरों के डिजिटल ट्विन मॉडल बनाने हेतु स्मार्ट इंजीनियरिंग और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स (predictive analytics) में विशेषज्ञता प्रदान करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकD-PoC: डायबिटिक फुट कॉम्प्लिकेशंस (diabetic foot complications) के रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन (risk stratification) के लिए AI का उपयोग करने वाला एक डिजिटल पोडियाट्री क्लिनिक।
  • संस्थाIISc: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, जो स्मार्ट इंजीनियरिंग और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स (predictive analytics) में विशेषज्ञता प्रदान करता है।
  • तथ्यइस क्लिनिक का लक्ष्य सालाना 10,000 से अधिक लोगों की डायबिटीज (diabetes) की स्क्रीनिंग करना है।
  • विज्ञान-तकनीकडिजिटल ट्विन मॉडल्स (Digital Twin Models): इस संदर्भ में व्यक्तिगत फुट डेटा के आधार पर पर्सनलाइज्ड फुटवियर डिजाइन बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और 'डिजिटल ट्विन' (Digital Twin) तकनीक का एकीकरण किस प्रकार पुरानी बीमारियों (chronic diseases) के प्रबंधन में स्वास्थ्य सेवा को 'प्रतिक्रियात्मक उपचार' से 'निवारक प्रबंधन' की ओर स्थानांतरित कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा प्राइवेसी: AI-आधारित हेल्थ डेटा मॉडलिंग में मरीज की गोपनीयता सुनिश्चित करना
  • स्केलेबिलिटी की बाधाएं: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी के लिए भारी शुरुआती इंफ्रास्ट्रक्चर लागत
  • डायग्नोस्टिक एक्यूरेसी: विविध जनसांख्यिकी के लिए AI-आधारित रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन में एल्गोरिद्मिक बायस को संबोधित करना

मुख्य शब्द: निवारक स्वास्थ्य सेवा · प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स · डिजिटल ट्विन · जोखिम स्तरीकरण · स्मार्ट इंजीनियरिंग

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

ISRO ने आगामी अंतरिक्ष मिशनों के लिए शैक्षणिक संस्थानों से शोध प्रस्ताव आमंत्रित करने हेतु RESPOND Basket 2025 जारी किया है

चर्चा में क्यों: ISRO ने आगामी अंतरिक्ष मिशनों के लिए शैक्षणिक संस्थानों से शोध प्रस्ताव आमंत्रित करने हेतु RESPOND Basket 2025 जारी किया है।

RESPOND बास्केट 2025 क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित है। शैक्षणिक संस्थानों को 31 जनवरी, 2026 की समय सीमा तक अपने प्रस्ताव जमा करने होंगे।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकRESPOND Basket 2025: ISRO द्वारा जारी किए गए रिसर्च प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स (research problem statements) का एक संग्रह।
  • तथ्यअकादमिक प्रस्तावों (Academic proposals) के लिए डेडलाइन: 31 जनवरी, 2026।
  • विज्ञान-तकनीकRESPOND Basket 2025 के मुख्य फोकस क्षेत्र: Quantum computing और एडवांस सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षमताओं और आत्मनिर्भरता को गति देने में अकादमिक-उद्योग सहयोग के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • R&D की बाधा: थ्योरेटिकल एकेडमिक रिसर्च और प्रैक्टिकल एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की ज़रूरतों के बीच के अंतर को कम करना
  • ह्यूमन कैपिटल: क्वांटम और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के लिए कुशल वर्कफोर्स बनाने हेतु यूनिवर्सिटी इकोसिस्टम का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: स्पेस टेक्नोलॉजी · एकेडेमिया-इंडस्ट्री कोलैबोरेशन · क्वांटम कंप्यूटिंग · सैटेलाइट कम्युनिकेशन · स्वदेशी आरएंडडी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

NCLAT ने फैसला सुनाया है कि WhatsApp को डेटा संग्रह और साझा करने के लिए, जिसमें गैर-विज्ञापन उद्देश्य भी शामिल हैं

चर्चा में क्यों: NCLAT ने फैसला सुनाया है कि WhatsApp को डेटा संग्रह और साझा करने के लिए, जिसमें गैर-विज्ञापन उद्देश्य भी शामिल हैं, उपयोगकर्ताओं से स्पष्ट और वापस लेने योग्य सहमति (express and revocable consent) प्राप्त करनी होगी।

NCLAT ने Meta Platforms पर 2021 की नीति के उल्लंघन के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India - CCI) द्वारा लगाए गए ₹213 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा है। ट्रिब्यूनल ने यह अनिवार्य किया है कि उपयोगकर्ताओं के पास यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि उनका कौन सा डेटा एकत्र किया जा रहा है, किस उद्देश्य के लिए और कितने समय तक।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यCCI ने WhatsApp की 2021 की पॉलिसी ब्रीच (policy breach) के लिए Meta Platforms पर ₹213 करोड़ का जुर्माना लगाया।
  • विज्ञान-तकनीकNCLAT ने फैसला दिया कि गैर-जरूरी डेटा कलेक्शन या क्रॉस-यूज़ के लिए स्पष्ट और वापस लेने योग्य सहमति (express and revocable consent) की आवश्यकता होती है।
  • पदMeta Platforms, WhatsApp की पैरेंट कंपनी (parent company) है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में कॉर्पोरेट डेटा-माइनिंग के हितों और निजता के मौलिक अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए एक सुदृढ़ डेटा संरक्षण ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी गैप: प्राइवेट संस्थाओं के लिए 'गैर-जरूरी' डेटा कैटेगरी पर स्पष्ट वैधानिक स्पष्टता की कमी
  • सहमति की थकान: अपारदर्शी टर्म्स ऑफ सर्विस में 'एक्सप्रेस और रिवोकेबल' सहमति तंत्र की जटिलता
  • एन्फोर्समेंट एसिमेट्री: ग्लोबल टेक कोंगलोमरेट्स द्वारा रियल-टाइम डेटा क्रॉस-यूज़ की निगरानी में चुनौतियां

मुख्य शब्द: डेटा संप्रभुता · निजता का अधिकार · सूचित सहमति · डिजिटल गवर्नेंस · रेगुलेटरी ओवरसाइट

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकप्रीलिम्स

कर्नाटक रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट लिमिटेड (KREDL) ने स्टेट एनर्जी एफिशिएंसी परफॉरमेंस अवार्ड (SDA Group-1) कैटेगरी में नेशनल एनर्जी कंजर्वेशन अवार्ड्स 2025 जीता है

चर्चा में क्यों: कर्नाटक रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट लिमिटेड (KREDL) ने स्टेट एनर्जी एफिशिएंसी परफॉरमेंस अवार्ड (SDA Group-1) कैटेगरी में नेशनल एनर्जी कंजर्वेशन अवार्ड्स 2025 जीता है।

यह पुरस्कार 14 दिसंबर को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किया गया। ये पुरस्कार सतत ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई (Climate Action) में नेतृत्व को मान्यता देने के लिए ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (Bureau of Energy Efficiency) द्वारा आयोजित किए गए थे।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE): यह संस्था नेशनल एनर्जी कंजर्वेशन अवार्ड्स आयोजित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • पदके.जे. जॉर्ज: कर्नाटक के एनर्जी मिनिस्टर।
  • तथ्यKREDL: कर्नाटक की वह विशिष्ट इकाई जिसने स्टेट एनर्जी एफिशिएंसी परफॉरमेंस अवार्ड (SDA Group-1) जीता।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के राष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता लक्ष्यों को प्राप्त करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में राज्य-संचालित पहलों की भूमिका की चर्चा कीजिए।

  • संस्थागत तालमेल: KREDL जैसी राज्य एजेंसियों और BEE जैसे केंद्रीय निकायों के बीच समन्वय
  • पॉलिसी स्केलेबिलिटी: कर्नाटक के राज्य-स्तरीय एनर्जी एफिशिएंसी मॉडल्स को अलग-अलग इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स में लागू करना

मुख्य शब्द: ऊर्जा दक्षता · सतत विकास · क्लाइमेट एक्शन · विकेंद्रीकृत शासन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स + मेन्स

IISER कोलकाता के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन प्रकाशित किया है

चर्चा में क्यों: IISER कोलकाता के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें खुलासा किया गया है कि भारत के प्रमुख शहरों में रहने वाले लोग प्रतिदिन औसतन 132 माइक्रोग्राम माइक्रोप्लास्टिक्स (microplastics) अंदर लेते हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

अध्ययन में हवा में 11 प्रकार के प्लास्टिक की पहचान की गई है, जिसके टुकड़े मुख्य रूप से पैकेजिंग और टायरों के घिसने से उत्पन्न होते हैं। मुख्य शोधकर्ता डॉ. गोपाला कृष्ण दर्भा ने इन जोखिमों को कम करने के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (single-use plastics) पर प्रतिबंध लगाने और पुनर्चक्रित कपड़ों (recycled fabrics) को बढ़ावा देने की वकालत की है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यप्रमुख भारतीय शहरों में माइक्रोप्लास्टिक्स (microplastics) के औसत दैनिक इनहेलेशन (inhalation) की मात्रा: 132 माइक्रोग्राम।
  • तथ्यशहरी हवा में पहचाने गए प्लास्टिक के प्रकारों की संख्या: 11।
  • तथ्यइनहेलेबल माइक्रोप्लास्टिक्स (Inhalable microplastics) के प्राथमिक स्रोत: पैकेजिंग और टायर वियर (Tire wear)।
  • संस्थाIISER कोलकाता: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च कोलकाता।
मेन्स के लिए

प्रश्न: शहरी परिवेश में श्वास योग्य सूक्ष्म-प्लास्टिक (inhalable microplastics) के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए और भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए नीतिगत उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

  • स्वास्थ्य जोखिम: माइक्रोप्लास्टिक के सांस के ज़रिए अंदर जाने से पुरानी श्वसन संबंधी समस्याएं और सिस्टमिक टॉक्सिसिटी का खतरा
  • रेगुलेटरी गैप: शहरी एयर क्वालिटी इंडेक्स में एयरबोर्न माइक्रोप्लास्टिक्स की स्टैंडर्ड मॉनिटरिंग की ज़रूरत
  • वेस्ट मैनेजमेंट: रिसाइकिल किए गए कपड़ों के ज़रिए लीनियर प्लास्टिक यूज़ से सर्कुलर इकोनॉमी की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: माइक्रोप्लास्टिक्स · सार्वजनिक स्वास्थ्य · शहरी वायु गुणवत्ता · सर्कुलर इकोनॉमी · सिंगल-यूज़ प्लास्टिक

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

UNESCO एंबेसडर विशाल शर्मा ने एक समर्पित ओशन ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (ocean observation satellite) के विकास में सहायता करने और युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण का विस्तार करने के उद्देश्य से INCOIS का दौरा किया

चर्चा में क्यों: UNESCO एंबेसडर विशाल शर्मा ने एक समर्पित ओशन ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (ocean observation satellite) के विकास में सहायता करने और युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण का विस्तार करने के उद्देश्य से INCOIS का दौरा किया।

इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) सुनामी की पूर्व चेतावनी और समुद्री पूर्वानुमान के लिए SynOps लैब संचालित करता है। यूनेस्को इंटरगवर्नमेंटल ओशनोग्राफिक कमीशन (IOC) समुद्री ज्ञान को जीवन और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सेवाओं में बदलने हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाINCOIS: इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज।
  • संस्थाIOC: UNESCO इंटरगवर्नमेंटल ओशनोग्राफिक कमीशन (Intergovernmental Oceanographic Commission)।
  • विज्ञान-तकनीकSynOps Lab: सुनामी की शुरुआती चेतावनी और समुद्र के पूर्वानुमान (ocean forecasts) प्रदान करता है।
  • तथ्यएम्बेसडर विशाल शर्मा ने IOC हेड विदार हेलगेसेन के INCOIS दौरे का समन्वय किया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: तटीय देशों के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण और समुद्री संसाधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने में समर्पित उपग्रह-आधारित समुद्री अवलोकन प्रणालियों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • डेटा-आधारित आपदा न्यूनीकरण: रियल-टाइम सुनामी अर्ली वार्निंग सिस्टम से तटीय भेद्यता में कमी
  • वैज्ञानिक कूटनीति: समुद्री अनुसंधान में तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए IOC सहयोग का इस्तेमाल
  • क्षमता निर्माण: ओशनोग्राफ़िक डेटा इंटरप्रिटेशन में कुशल शोधकर्ताओं की कमी को दूर करना

मुख्य शब्द: आपदा जोखिम न्यूनीकरण · समुद्र विज्ञान · स्पेस टेक्नोलॉजी · वैज्ञानिक सहयोग · समुद्री पर्यावरण

केंद्र सरकार ने 15 दिसंबर, 2025 को लोकसभा में SHANTI बिल पेश किया

चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने 15 दिसंबर, 2025 को लोकसभा में SHANTI बिल पेश किया। इसका उद्देश्य न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Nuclear Power Corporation of India) के एकाधिकार को समाप्त करके परमाणु ऊर्जा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

SHANTI बिल के माध्यम से परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा देने का प्रस्ताव है। यह बिल परमाणु क्षति के लिए एक संशोधित नागरिक दायित्व (civil liability) ढांचे को भी पेश करता है। इसका उद्देश्य सुरक्षा और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के साथ-साथ दुर्घटना की स्थिति में ऑपरेटर की जिम्मेदारी को सीमित करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • अधिनियम / विधेयकSHANTI बिल: परमाणु ऊर्जा उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रस्तावित कानून।
  • संस्थाAtomic Energy Regulatory Board (AERB): SHANTI बिल के तहत इसे वैधानिक दर्जा (statutory status) देने का प्रस्ताव है।
  • संस्थान्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Nuclear Power Corporation of India): वर्तमान में इसके पास एकाधिकार (monopoly) है जिसे SHANTI बिल हटाने का प्रयास करता है।
  • तथ्यSHANTI बिल को 15 दिसंबर, 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के निहितार्थों पर चर्चा कीजिए, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता के साथ सुरक्षा और देयता संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है। चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: प्राइवेट सेक्टर की ऑपरेशनल ऑटोनॉमी और AERB के वैधानिक जनादेश के बीच संतुलन
  • लायबिलिटी ट्रेड-ऑफ: न्यूक्लियर एक्सीडेंट के लिए मजबूत मुआवजे के ढांचे और सीमित ऑपरेटर लायबिलिटी के बीच संतुलन
  • मार्केट डायनेमिक्स: राज्य के नेतृत्व वाली मोनोपॉली से प्रतिस्पर्धी प्राइवेट-पब्लिक न्यूक्लियर एनर्जी मॉडल की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: परमाणु ऊर्जा · निजी भागीदारी · सिविल लायबिलिटी · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · ऊर्जा सुरक्षा

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकप्रीलिम्स

Nature Climate Change में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाली ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) की वजह से यूरोपीय आल्प्स (European Alps) के 100 से अधिक ग्लेशियर 2033 तक गायब हो सकते हैं

चर्चा में क्यों: Nature Climate Change में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाली ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) की वजह से यूरोपीय आल्प्स (European Alps) के 100 से अधिक ग्लेशियर 2033 तक गायब हो सकते हैं।

इस अध्ययन में विभिन्न तापमान वृद्धि परिदृश्यों (scenarios) के तहत ग्लेशियरों के खत्म होने की दर का अनुमान लगाने के लिए सैटेलाइट डेटा और मॉडलों का विश्लेषण किया गया है। यह भविष्यवाणी करता है कि 2033 तक पश्चिमी अमेरिका और कनाडा में सालाना 800 से अधिक ग्लेशियर गायब हो जाएंगे।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्ययूरोपियन आल्प्स (European Alps) के 100 से अधिक ग्लेशियरों के 2033 तक गायब होने की संभावना है।
  • तथ्यअनुमान है कि 2033 तक पश्चिमी US और कनाडा में सालाना 800 से अधिक ग्लेशियर्स गायब हो जाएंगे।
  • स्थानयह अध्ययन विशेष रूप से यूरोपियन आल्प्स (European Alps), पश्चिमी US और कनाडा पर प्रकाश डालता है।
  • विज्ञान-तकनीकयह रिसर्च Nature Climate Change जर्नल में प्रकाशित हुई थी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्रों में ग्लेशियरों के तीव्र क्षरण के पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और जल-निर्भर समुदायों के लिए अनुकूलन रणनीतियों का सुझाव दीजिए।

  • हाइड्रोलॉजिकल अस्थिरता: पिघले हुए पानी की कमी से निचले इलाकों की सिंचाई और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर उत्पादन को खतरा
  • इकोसिस्टम में बदलाव: अल्पाइन जैव विविधता का नुकसान और पहाड़ों से निकलने वाली नदियों के आवास में बदलाव
  • सांस्कृतिक क्षरण: विरासत स्थलों का ह्रास और पारंपरिक पहाड़ी आजीविका का नुकसान

मुख्य शब्द: ग्लेशियर का पीछे हटना · जलवायु अनुकूलन · जल सुरक्षा · मानवीय कारणों से होने वाली वार्मिंग · इकोसिस्टम सेवाएँ

रघु वंशी एयरोस्पेस ग्रुप ने हैदराबाद में ₹100 करोड़ की एक DeepTech फैसिलिटी शुरू की है

चर्चा में क्यों: रघु वंशी एयरोस्पेस ग्रुप ने हैदराबाद में ₹100 करोड़ की एक DeepTech फैसिलिटी शुरू की है। यह फैसिलिटी उनकी सहायक कंपनी Arrobot के तहत स्वदेशी UAVs और ऑटोनॉमस डिफेंस प्रोडक्ट्स (autonomous defense products) बनाने के लिए स्थापित की गई है।

यह सुविधा हैदराबाद में स्थित है और अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAV), इंजन और उन्नत रक्षा प्रणालियों के लिए 'डिजाइन-टू-असेंबली' विनिर्माण पर केंद्रित है। इस लॉन्च में छह स्वदेशी UAV और स्वायत्त रक्षा उत्पाद शामिल थे।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यDeepTech फैसिलिटी निवेश का मूल्य ₹100 करोड़ है।
  • विज्ञान-तकनीकArrobot, UAV और ऑटोनॉमस डिफेंस प्रोडक्ट्स के लिए जिम्मेदार सब्सिडियरी है।
  • पदवाइस एडमिरल संजय वत्स्यायन ने वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ के रूप में इस लॉन्च में शिरकत की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्वदेशी डीपटेक (DeepTech) विनिर्माण के महत्व और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • सप्लाई चेन रेजिलिएंस: विदेशी OEMs से महत्वपूर्ण डिफेंस कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करना
  • तकनीकी संप्रभुता: बदलते एसिमेट्रिक खतरों का मुकाबला करने के लिए स्वदेशी ऑटोनॉमस सिस्टम्स का विकास
  • इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: हैदराबाद के एयरोस्पेस क्लस्टर में हाई-स्किल मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स और R&D हब्स का निर्माण

मुख्य शब्द: डीपटेक · आत्मनिर्भर भारत · रणनीतिक स्वायत्तता · स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग · अनमैन्ड एरियल व्हीकल

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स

इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स (ICTP) ने क्वांटम मेनी-बॉडी सिस्टम्स (quantum many-body systems) पर उनके शोध के लिए टिटास चंदा और स्थितिधि रॉय को अपना 2025 पुरस्कार प्रदान किया है

चर्चा में क्यों: इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स (ICTP) ने क्वांटम मेनी-बॉडी सिस्टम्स (quantum many-body systems) पर उनके शोध के लिए टिटास चंदा और स्थितिधि रॉय को अपना 2025 पुरस्कार प्रदान किया है।

यह पुरस्कार नॉन-इक्विलिब्रियम डायनेमिक्स (non-equilibrium dynamics), क्वांटम कोरिलेशंस (quantum correlations) और मेजरमेंट-ड्रिवन फेज ट्रांजिशन (measurement-driven phase transitions) पर किए गए कार्यों को मान्यता देता है। यह पुरस्कार विकासशील देशों के युवा वैज्ञानिकों के लिए एक वार्षिक सम्मान है, जिसमें एक प्रमाणपत्र और नकद राशि शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकICTP Prize: यह विकासशील देशों के युवा वैज्ञानिकों को सालाना दिया जाता है।
  • पदतितस चंदा: IIT-Madras से जुड़े हैं।
  • पदस्थितिधि रॉय: बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरिटिकल साइंसेज (International Centre for Theoretical Sciences) से जुड़ी हुई हैं।
  • तथ्यरिसर्च फोकस: Quantum many-body systems, non-equilibrium dynamics, और measurement-driven phase transitions।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विकासशील देशों के लिए तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने में क्वांटम मेनी-बॉडी सिस्टम (quantum many-body systems) अनुसंधान को आगे बढ़ाने के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर: क्वांटम डायनेमिक्स के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और स्पेशलाइज्ड लैब्स की ज़रूरत
  • ह्यूमन कैपिटल: घरेलू वैज्ञानिक प्रतिभा को बढ़ावा देने में अंतरराष्ट्रीय पहचान का महत्व
  • टेक्नोलॉजिकल लीपफ्रॉगिंग: अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग और मैटेरियल्स साइंस में क्वांटम कोरिलेशंस की क्षमता

मुख्य शब्द: क्वांटम मेनी-बॉडी सिस्टम्स · नॉन-इक्विलिब्रियम डायनेमिक्स · वैज्ञानिक मान्यता · तकनीकी संप्रभुता · विकासशील देश

भारत सरकार और कीस्टोन फाउंडेशन (Keystone Foundation) तमिलनाडु में एक सामुदायिक-आधारित पर्यावरणीय निगरानी (CbMRV) पहल लागू कर रहे हैं

चर्चा में क्यों: भारत सरकार और कीस्टोन फाउंडेशन (Keystone Foundation) तमिलनाडु में एक सामुदायिक-आधारित पर्यावरणीय निगरानी (CbMRV) पहल लागू कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक डेटा के साथ जोड़ना है।

CbMRV पहल के तहत पर्यावरणीय डेटा को इकट्ठा करने और उसकी व्याख्या करने के लिए 35 प्रमुख सामुदायिक हितधारकों (stakeholders) को प्रशिक्षित किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम और राज्य स्तर पर शासन को जानकारी प्रदान करके भेद्यता आकलन (vulnerability assessments) को मजबूत करना और जलवायु लचीलेपन (climate resilience) को समर्थन देना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यतमिलनाडु में पर्यावरण डेटा को इकट्ठा करने और उसकी व्याख्या करने के लिए 35 कम्युनिटी स्टेकहोल्डर्स (community stakeholders) को प्रशिक्षित किया गया।
  • स्थानCbMRV पहल को तमिलनाडु राज्य में लागू किया जा रहा है।
  • संस्थाकीस्टोन फाउंडेशन (Keystone Foundation) CbMRV पहल के लिए भारत सरकार के साथ साझेदारी कर रहा है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान को वैज्ञानिक आंकड़ों के साथ एकीकृत करने से जलवायु लचीलेपन और समुदाय-आधारित जलवायु बुद्धिमत्ता को किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है, चर्चा कीजिए।

  • डेटा लोकतंत्रीकरण: गवर्नेंस के लिए स्थानीय समुदायों को सबूतों पर आधारित क्लाइमेट इंटेलिजेंस तैयार करने के लिए सशक्त बनाना
  • नॉलेज सिंथेसिस: स्वदेशी पारिस्थितिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क के बीच की दूरी को कम करना

मुख्य शब्द: क्लाइमेट इंटेलिजेंस · कम्युनिटी-आधारित मॉनिटरिंग · पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान · क्लाइमेट रेजिलिएंस · वल्नरेबिलिटी असेसमेंट

भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने के लिए गोवा स्थित INS हंसा में अपने दूसरे MH-60R हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन

चर्चा में क्यों: भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री उपस्थिति को मजबूत करने के लिए गोवा स्थित INS हंसा में अपने दूसरे MH-60R हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन, INAS 335 (Ospreys) को कमीशन करने के लिए तैयार है।

भारतीय नौसेना 17 दिसंबर को दूसरे MH-60R हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन, INAS 335 (ओसप्रिस) को कमीशन करेगी। यह समारोह गोवा में INS हंसा में नौसेना स्टाफ के प्रमुख, एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी द्वारा आयोजित किया जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • पदएडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी: चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ।
  • तथ्यINAS 335 (Ospreys): भारतीय नौसेना का दूसरा MH-60R हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन।
  • स्थानINS हंसा: गोवा में स्थित एक नेवल बेस (Naval base)।
  • विज्ञान-तकनीकMH-60R: पारंपरिक और एसिमेट्रिक (asymmetric) खतरों, दोनों से निपटने में सक्षम हेलीकॉप्टर।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय क्षेत्र में MH-60R जैसे उन्नत समुद्री परिसंपत्तियों के समावेश से हिंद महासागर क्षेत्र में एक 'नेट सुरक्षा प्रदाता' (net security provider) के रूप में भारत की भूमिका किस प्रकार सुदृढ़ होती है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • ऑपरेशनल रीच: एसिमेट्रिक खतरों और मैरीटाइम सर्विलांस की कमियों से निपटने की बढ़ी हुई क्षमता
  • रणनीतिक प्रतिरोध: हिंद महासागर में नेविगेशन की आज़ादी सुनिश्चित करने के लिए समुद्री उपस्थिति को मज़बूत करना

मुख्य शब्द: मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस · नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर · असिमेट्रिक वॉरफेयर · ऑपरेशनल रेडीनेस

ISRO ने मार्च 2026 तक सात लॉन्च मिशनों का शेड्यूल घोषित किया है

चर्चा में क्यों: ISRO ने मार्च 2026 तक सात लॉन्च मिशनों का शेड्यूल घोषित किया है, जिसमें पहला बिना चालक दल वाला Gaganyaan मिशन और AST Spacemobile के लिए एक कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च शामिल है।

ISRO की योजना LVM3 रॉकेट का उपयोग AST Spacemobile के लिए एक संचार उपग्रह (communication satellite) और 'व्योममित्र' रोबोट वाले एक मानव रहित मिशन के लिए करने की है। PSLV रॉकेट से ओशनसैट (Oceansat) उपग्रह और घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय क्लाइंट्स के लिए विभिन्न उपग्रहों को लॉन्च किया जाना निर्धारित है।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • विज्ञान-तकनीकLVM3: Gaganyaan और कमर्शियल सैटेलाइट मिशन के लिए इस्तेमाल होने वाला ISRO का सबसे भारी रॉकेट।
  • विज्ञान-तकनीकव्योममित्र: अनक्रूएड (uncrewed) गगनयान मिशन के लिए डिज़ाइन किया गया एक रोबोट।
  • विज्ञान-तकनीकOceansat: PSLV रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाने वाला एक सैटेलाइट।
  • तथ्यISRO ने मार्च 2026 तक पूरे किए जाने वाले 7 लॉन्च मिशनों की योजना बनाई है।
  • विज्ञान-तकनीकप्रदर्शन की जा रही तकनीकें: इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम (electric propulsion systems) और स्वदेशी TWT एम्पलीफायर (TWT amplifiers)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मानव अंतरिक्ष उड़ान और वाणिज्यिक अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भारत को एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करने में 'गगनयान' मिशन के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • कमर्शियल व्यवहार्यता: सरकारी फंड वाले रिसर्च से आत्मनिर्भर कमर्शियल लॉन्च मार्केट की ओर बदलाव
  • तकनीकी संप्रभुता: आयात पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी TWT एम्पलीफायर और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन का विकास

मुख्य शब्द: अंतरिक्ष अन्वेषण · स्वदेशी तकनीक · व्यावसायीकरण · मानव अंतरिक्ष उड़ान · रणनीतिक स्वायत्तता

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स + मेन्स

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल न्यूट्रिशन एंड फिजियोलॉजी (NIANP) के वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक मुर्गियों को जेनेटिकली मॉडिफाई (genetically modified) किया है

चर्चा में क्यों: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल न्यूट्रिशन एंड फिजियोलॉजी (NIANP) के वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक मुर्गियों को जेनेटिकली मॉडिफाई (genetically modified) किया है, ताकि वे अपने अंडों के भीतर ल्यूकेमिया इनहिबिटरी फैक्टर (Leukemia Inhibitory Factor - LIF) जैसे मानव प्रोटीन पैदा कर सकें।

बेंगलुरु स्थित NIANP ने मुर्गियों में प्राथमिक जर्म कोशिकाओं (primordial germ cells) को बदलकर मानव प्रोटीन उत्पादन की एक विधि विकसित की है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का उद्देश्य स्टेम सेल रिसर्च और उन्नत उपचारों (advanced therapies) के लिए आवश्यक चिकित्सीय प्रोटीन की उत्पादन लागत को कम करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाNIANP: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल न्यूट्रिशन एंड फिजियोलॉजी (National Institute of Animal Nutrition and Physiology), जो बेंगलुरु में स्थित है।
  • विज्ञान-तकनीकLeukemia Inhibitory Factor (LIF): स्टेम सेल रिसर्च और एडवांस्ड थेरेपीज के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोटीन।
  • विज्ञान-तकनीकमेथडोलॉजी: प्रोटीन प्रोडक्शन को पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए प्राइमोर्डियल जर्म सेल्स (primordial germ cells) में बदलाव करना।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में उन्नत जैव-चिकित्सीय उपचारों (biomedical therapies) को अधिक सुलभ और किफायती बनाने में जैव-विनिर्माण (bio-manufacturing) और आनुवंशिक इंजीनियरिंग (genetic engineering) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • लागत-दक्षता: एवियन-आधारित प्रोडक्शन सिस्टम के जरिए रिकॉम्बिनेंट प्रोटीन्स के भारी मैन्युफैक्चरिंग ओवरहेड्स को कम करना
  • नैतिक-नियामक: पशुधन में जेनेटिक मॉडिफिकेशन की प्रगति को बायोसेफ्टी और खाद्य सुरक्षा चिंताओं के साथ संतुलित करना

मुख्य शब्द: बायोमैन्युफैक्चरिंग · जेनेटिक इंजीनियरिंग · थेराप्यूटिक प्रोटीन्स · स्टेम सेल रिसर्च · बायो-इनोवेशन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकप्रीलिम्स

NPCIL और उत्तर कन्नड़ जिले के डिप्टी कमिश्नर ने कैगा परमाणु ऊर्जा केंद्र (Kaiga atomic power generation station) में रेडिएशन लीक की तैयारी से संबंधित एक ड्रिल आयोजित की

चर्चा में क्यों: NPCIL और उत्तर कन्नड़ जिले के डिप्टी कमिश्नर ने कैगा परमाणु ऊर्जा केंद्र (Kaiga atomic power generation station) में रेडिएशन लीक की तैयारी से संबंधित एक ड्रिल आयोजित की। इसका उद्देश्य आपातकालीन प्रतिक्रिया और सार्वजनिक सुरक्षा उपायों का परीक्षण करना था।

इस अभ्यास (drill) के अंतर्गत इम्पैक्ट ज़ोन (impact zones) बनाना, प्रभावित गाँवों को बैरिकेड करना और सार्वजनिक अलर्ट जारी करना शामिल था। यह अभ्यास उत्तर कन्नड़ जिले के कैगा परमाणु ऊर्जा उत्पादन केंद्र में आयोजित किया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • संस्थाNPCIL: न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया।
  • तथ्यड्रिल में इम्पैक्ट ज़ोन (impact zones) बनाना और प्रभावित गाँवों की बैरिकेडिंग करना शामिल था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के परमाणु ऊर्जा बुनियादी ढांचे के प्रबंधन में आपदा तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल के महत्व की चर्चा कीजिए।

  • सार्वजनिक सुरक्षा: परमाणु ऊर्जा के तेज़ी से विस्तार और कड़े रेडिएशन कंट्रोल प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
  • संस्थागत समन्वय: केंद्रीय पावर कॉर्पोरेशन और जिला स्तर की प्रशासनिक निकायों के बीच तालमेल
  • कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी: रेडियोलॉजिकल इमरजेंसी के दौरान जनता की धारणा और घबराहट को मैनेज करना

मुख्य शब्द: परमाणु सुरक्षा · आपातकालीन तैयारी · रेडिएशन कंटेनमेंट · आपदा प्रबंधन · सार्वजनिक सुरक्षा

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकप्रीलिम्स

आंध्र प्रदेश ने अपने स्टेट एनर्जी एफिशिएंसी इंडेक्स (SEEI) स्कोर के आधार पर लगातार चौथे वर्ष नेशनल एनर्जी कंजर्वेशन अवार्ड्स के ग्रुप-II में शीर्ष स्थान हासिल किया है

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश ने अपने स्टेट एनर्जी एफिशिएंसी इंडेक्स (SEEI) स्कोर के आधार पर लगातार चौथे वर्ष नेशनल एनर्जी कंजर्वेशन अवार्ड्स के ग्रुप-II में शीर्ष स्थान हासिल किया है।

आंध्र प्रदेश ने स्टेट एनर्जी एफिशिएंसी इंडेक्स (SEEI) में 89.25 अंक प्राप्त कर यह पुरस्कार जीता। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा AP स्टेट एनर्जी कंजर्वेशन मिशन (AP-SECM) को प्रदान किया गया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यआंध्र प्रदेश ने स्टेट एनर्जी एफिशिएंसी इंडेक्स (SEEI) में 89.25 अंक प्राप्त किए।
  • स्थानआंध्र प्रदेश ने नेशनल एनर्जी कंजर्वेशन अवार्ड्स के ग्रुप-II में पुरस्कार जीता।
  • योजनाराज्य ने Integrated Clean Energy Policy और MSMEs, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड प्रोसेसिंग के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक (sector-specific) नीतियां लागू कीं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति और सतत औद्योगिक विकास के संदर्भ में राज्य-आधारित ऊर्जा दक्षता नीतियों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • पॉलिसी इंटीग्रेशन: इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी और सेक्टर-स्पेसिफिक MSME/फूड प्रोसेसिंग गाइडलाइन्स के बीच तालमेल
  • संस्थागत ढांचा: विकेंद्रीकृत ऊर्जा दक्षता मैट्रिक्स की निगरानी में स्टेट एनर्जी कंजर्वेशन मिशन्स की भूमिका

मुख्य शब्द: ऊर्जा दक्षता · सतत विकास · विकेंद्रीकृत शासन · औद्योगिक नीति · जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करना

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नासिक के तपोवन में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है

चर्चा में क्यों: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नासिक के तपोवन में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। यह फैसला तब आया जब एक आवेदक ने आरोप लगाया कि नासिक प्रशासन ने बिना उचित एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (Environmental Impact Assessment - EIA) के इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

नाशिक के तपोवन में पेड़ों की कटाई पर NGT द्वारा लगाया गया स्थगन (stay) 15 जनवरी, 2026 तक वैध है। ट्रिब्यूनल ने एक संयुक्त समिति को पेड़ों के सर्वेक्षण की कमी और सिंहस्थ कुंभ मेला के लिए प्रस्तावित साधुग्राम और MICE हब के कारण स्थानीय पेड़ों को होने वाले संभावित नुकसान की जांच करने का आदेश दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थानेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT): पर्यावरणीय विवादों के न्यायनिर्णयन (adjudication) के लिए एक विशेष निकाय।
  • स्थानतपोवन, नासिक: सिंहस्थ कुंभ मेला के लिए प्रस्तावित साधुग्राम और MICE हब की साइट।
  • तथ्यपेड़ काटने पर NGT का स्टे 15 जनवरी, 2026 तक प्रभावी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में धार्मिक पर्यटन के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास और पर्यावरण संरक्षण के मध्य उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए। पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की प्रक्रिया को किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।

  • विकास के ट्रेड-ऑफ: धार्मिक पर्यटन केंद्रों के सामाजिक-आर्थिक लाभ और स्थानीय जैव विविधता व इकोसिस्टम के संरक्षण के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: पर्यावरण प्रभाव आकलन · सतत विकास · जैव विविधता संरक्षण · न्यायिक सक्रियता · पारिस्थितिक अखंडता

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)मेन्स

गगनयान मिशन के ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर ने राष्ट्रीय प्रगति के लिए अंतरग्रहीय मिशनों (interplanetary missions) और मानव-केंद्रित अंतरिक्ष तकनीक की आवश्यकता पर जोर दिया

चर्चा में क्यों: गगनयान मिशन के ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर ने राष्ट्रीय प्रगति के लिए अंतरग्रहीय मिशनों (interplanetary missions) और मानव-केंद्रित अंतरिक्ष तकनीक की आवश्यकता पर जोर दिया।

गगनयान मिशन से जुड़े भारतीय वायुसेना (IAF) के ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर ने NASA में भारतीय मूल के पेशेवरों के माध्यम से अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्टार्टअप्स से मानव-केंद्रित अंतरिक्ष समाधानों के लिए स्वतंत्र नवाचारों (innovations) पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पदग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्ण नायर IAF के सदस्य हैं जो Gaganyaan मिशन में शामिल हैं।
  • विज्ञान-तकनीकगगनयान भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है।
  • तथ्यसीमित वित्तीय संसाधनों के बावजूद, भारत की अंतरिक्ष संबंधी सफलता का श्रेय विशेषज्ञता (expertise) को दिया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मानव-केंद्रित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अंतरग्रहीय मिशनों के माध्यम में एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के महत्व की चर्चा कीजिए।

  • इनोवेशन इकोसिस्टम: विदेशी स्पेस टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करने के लिए स्वतंत्र स्टार्टअप-आधारित समाधानों की ज़रूरत
  • ह्यूमन-सेंट्रिक फोकस: लंबे समय तक चलने वाले स्पेस मिशनों की शारीरिक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का समाधान
  • रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन: स्पेस एक्सप्लोरेशन में वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए हाई-एक्सपर्टाइज ह्यूमन कैपिटल का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: मानव-केंद्रित समाधान · इंटरप्लेनेटरी मिशन · स्पेस टेक्नोलॉजी · स्वदेशी नवाचार · गगनयान

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

नोवो नोर्डिक (Novo Nordisk) ने टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए भारत में ओजेम्पिक (Ozempic) लॉन्च किया है, जो एक GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (receptor agonist) है

चर्चा में क्यों: नोवो नोर्डिक (Novo Nordisk) ने टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए भारत में ओजेम्पिक (Ozempic) लॉन्च किया है, जो एक GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (receptor agonist) है।

ओज़ेम्पिक (Ozempic) एक साप्ताहिक इंजेक्शन है, जो FlexTouch पेन के माध्यम से 0.25 mg, 0.5 mg और 1 mg की खुराक में उपलब्ध है। इसे आहार और व्यायाम के साथ टाइप 2 डायबिटीज वाले वयस्कों के लिए प्रथम-पंक्ति उपचार (first-line treatment) के रूप में मंजूरी दी गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकOzempic एक GLP-1 receptor agonist (RA) है जिसका उपयोग टाइप 2 डायबिटीज के लिए किया जाता है।
  • संस्थाविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सेमाग्लूटाइड (semaglutide) को अपनी मॉडल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (Model List of Essential Medicines) में शामिल किया है।
  • तथ्यOzempic को हफ्ते में एक बार इंजेक्शन के रूप में 0.25 mg, 0.5 mg और 1 mg की खुराक में दिया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पुरानी चयापचय संबंधी विकारों के प्रबंधन में GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट के महत्व और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा सुलभता पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आवश्यक दवाओं की मॉडल सूची के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य समानता: ब्रांडेड GLP-1 RAs की भारी लागत और किफायती डायबिटीज मैनेजमेंट की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: भारतीय फार्मा मार्केट में इंजेक्टेबल दवाओं के लिए सुरक्षा और प्रभावकारिता मानकों को सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट · टाइप 2 डायबिटीज · आवश्यक दवाओं की मॉडल लिस्ट · मेटाबॉलिक हेल्थ · फार्माकोलॉजी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) ने गैर-संचारी रोगों (non-communicable diseases) के लिए स्केलेबल AI समाधान विकसित करने हेतु एक AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में 'ट्रांसलेशनल AI फॉर नेटवर्क्ड यूनिवर्सल हेल्थकेयर' (TANUH) फाउंडेशन की स्थापना की है

चर्चा में क्यों: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) ने गैर-संचारी रोगों (non-communicable diseases) के लिए स्केलेबल AI समाधान विकसित करने हेतु एक AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में 'ट्रांसलेशनल AI फॉर नेटवर्क्ड यूनिवर्सल हेल्थकेयर' (TANUH) फाउंडेशन की स्थापना की है।

TANUH फाउंडेशन बेंगलुरु स्थित IISc में स्थित है और यह 'Make AI in India' विजन के अनुरूप कार्य करता है। यह संस्था स्वास्थ्य-AI (Health-AI) तकनीकों को प्रयोगशाला के परिवेश से निकालकर व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचाने पर ध्यान केंद्रित करती है, ताकि ओरल कैंसर, डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य जैसी स्थितियों का उपचार किया जा सके।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकTANUH: नेटवर्क वाले यूनिवर्सल हेल्थकेयर फाउंडेशन के लिए ट्रांसलेशनल AI।
  • स्थानIISc बेंगलुरु: AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centre of Excellence) के लिए होस्ट संस्थान।
  • तथ्यलक्षित बीमारियाँ: ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, रेटिनल बीमारियाँ, डायबिटीज और मेंटल हेल्थ।
  • विज्ञान-तकनीकउद्देश्य: पॉइंट ऑफ केयर (Point of care) पर शुरुआती पहचान, जोखिम की भविष्यवाणी और निगरानी के लिए AI टूल्स विकसित करना।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में गैर-संचारी रोगों (NCDs) के प्रबंधन की चुनौतियों के समाधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का एकीकरण किस प्रकार सहायक हो सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा प्राइवेसी: बड़े पैमाने पर हेल्थ डेटा कलेक्शन और मरीज की गोपनीयता व सुरक्षित डेटा स्टोरेज के बीच संतुलन
  • डिजिटल डिवाइड: सीमित कनेक्टिविटी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में AI-आधारित डायग्नोस्टिक्स तक समान पहुंच सुनिश्चित करना
  • क्लीनिकल वैलिडेशन: AI-आधारित रिस्क प्रेडिक्शन और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल बनाना

मुख्य शब्द: ट्रांसलेशनल AI · गैर-संचारी रोग · पॉइंट ऑफ केयर · स्केलेबल सॉल्यूशंस · डिजिटल हेल्थ

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (Social Media Intermediaries) को निर्देश दिया है कि वे सुनील गावस्कर द्वारा दायर किए गए मुकदमे पर सात दिनों के भीतर कार्रवाई करें, जिसमें उन्होंने अपने पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) की सुरक्षा की मांग की है

चर्चा में क्यों: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (Social Media Intermediaries) को निर्देश दिया है कि वे सुनील गावस्कर द्वारा दायर किए गए मुकदमे पर सात दिनों के भीतर कार्रवाई करें, जिसमें उन्होंने अपने पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) की सुरक्षा की मांग की है।

जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की अध्यक्षता में दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया कि वे इस वाद (suit) को इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरीज गाइडलाइन्स एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के तहत एक शिकायत के रूप में मानें। कोर्ट ने वादी से 24 घंटों के भीतर अनधिकृत रूप से उपयोग की गई छवियों के विशिष्ट URL प्रदान करने की मांग की।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थादिल्ली हाई कोर्ट: पर्सनैलिटी राइट्स (personality rights) केस की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
  • अधिनियम / विधेयकInformation and Technology (Intermediaries Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021: सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (social media intermediaries) को नियंत्रित करने वाला रेगुलेटरी फ्रेमवर्क।
  • तथ्य7-दिन की डेडलाइन: शिकायतों के निवारण के लिए मध्यस्थों (intermediaries) को दिया गया समय।
मेन्स के लिए

प्रश्न: डिजिटल युग में 'व्यक्तित्व अधिकारों' (personality rights) के संरक्षण में आने वाली कानूनी चुनौतियों और अनधिकृत सामग्री पर अंकुश लगाने में मध्यस्थों (intermediaries) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की आज़ादी और व्यक्तिगत पर्सनैलिटी राइट्स के बीच संतुलन
  • एन्फोर्समेंट गैप: ग्लोबल सोशल मीडिया नेटवर्क पर विकेंद्रीकृत अनधिकृत कंटेंट की पहचान और उसे हटाने में मुश्किल

मुख्य शब्द: पर्सनैलिटी राइट्स · इंटरमीडियरी लायबिलिटी · डिजिटल एथिक्स · न्यायिक निगरानी · इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

DPIIT ने LLM डेटा के उपयोग से जुड़े AI संबंधी कॉपीराइट विवादों को सुलझाने के लिए 'ब्लैकेट लाइसेंसिंग' (blanket licensing) फ्रेमवर्क का प्रस्ताव देते हुए कॉपीराइट एक्ट, 1957 में संशोधन की योजना की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: DPIIT ने LLM डेटा के उपयोग से जुड़े AI संबंधी कॉपीराइट विवादों को सुलझाने के लिए 'ब्लैकेट लाइसेंसिंग' (blanket licensing) फ्रेमवर्क का प्रस्ताव देते हुए कॉपीराइट एक्ट, 1957 में संशोधन की योजना की घोषणा की है।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने एक ऐसे ढांचे का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत उन वेबसाइटों को कॉपीराइट सोसाइटी से रॉयल्टी भुगतान प्राप्त होगा जिनके डेटा का उपयोग लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (Large Language Models - LLMs) द्वारा किया जाता है। इस प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि AI डेवलपर्स केवल अपने मॉडल्स के व्यावसायीकरण (commercialization) के बाद ही कंटेंट पब्लिशर्स को भुगतान करेंगे।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाDPIIT: डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) इन प्रस्तावित संशोधनों के लिए नोडल बॉडी है।
  • तथ्यब्लैंकेट लाइसेंसिंग (Blanket Licensing): एक प्रस्तावित ढांचा जहां रॉयल्टी भुगतान एक कॉपीराइट सोसाइटी से कंटेंट पब्लिशर्स को वितरित किया जाता है।
  • पदNasscom: AI और कॉपीराइट कानून (copyright law) के संबंध में परामर्श में शामिल एक प्रमुख स्टेकहोल्डर (stakeholder)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जनरेटिव एआई (Generative AI) द्वारा मौजूदा बौद्धिक संपदा ढांचे के समक्ष उत्पन्न होने वाली कानूनी और नैतिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और एक संतुलित विनियामक दृष्टिकोण का सुझाव दीजिए।

  • इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी विवाद: कंटेंट क्रिएटर्स के अधिकारों और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स की ट्रेनिंग की जरूरतों के बीच संतुलन
  • रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: रॉयल्टी वितरण सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत लाइसेंसिंग से 'ब्लैंकेट लाइसेंसिंग' मॉडल की ओर बदलाव
  • कमर्शियलाइजेशन थ्रेशोल्ड: AI मॉडल्स के कमर्शियल रूप से व्यवहार्य होने तक रॉयल्टी भुगतान में देरी का पॉलिसी ट्रेड-ऑफ

मुख्य शब्द: बौद्धिक संपदा · जेनरेटिव AI · ब्लैंकेट लाइसेंसिंग · रॉयल्टी भुगतान · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) ने अब तक के सबसे पुराने सुपरनोवा (Supernova) को रिकॉर्ड किया है

चर्चा में क्यों: जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) ने अब तक के सबसे पुराने सुपरनोवा (Supernova) को रिकॉर्ड किया है, जो पहले सितारों के कम जीवनकाल और आकाशगंगाओं के निर्माण में उनकी भूमिका पर महत्वपूर्ण प्रमाण प्रदान करता है।

यह सुपरनोवा बिग बैंग के बाद के पहले एक अरब वर्षों के दौरान एक युवा आकाशगंगा (galaxy) में हुआ था। इसे समय के साथ प्रकाश में आए सूक्ष्म बदलावों के माध्यम से पहचाना गया, जिससे ग्रहों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण भारी तत्वों के बनने का पता चला।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकजेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (James Webb Space Telescope - JWST): एक इन्फ्रारेड स्पेस टेलिस्कोप जिसे शुरुआती ब्रह्मांड (early universe) के अवलोकन के लिए डिजाइन किया गया है।
  • तथ्ययह सुपरनोवा बिग बैंग (Big Bang) के बाद पहले एक अरब वर्षों के भीतर हुआ था।
  • विज्ञान-तकनीकसुपरनोवा (Supernovae): तारों की विस्फोटक मृत्यु, जो इंटरस्टेलर मीडियम (interstellar medium) और भारी तत्वों के निर्माण में योगदान देती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) जैसे उन्नत अंतरिक्ष दूरबीनों द्वारा प्रारंभिक सुपरनोवा के अवलोकनों से ब्रह्मांड के रासायनिक विकास की हमारी समझ किस प्रकार परिष्कृत होती है? विश्लेषण कीजिए।

  • केमिकल इवोल्यूशन: प्लैनेटरी सिस्टम्स के लिए भारी तत्वों के प्राथमिक स्रोत के रूप में सुपरनोवा
  • कॉस्मोलॉजिकल मॉडलिंग: गैलेक्सी फॉर्मेशन और इंटरस्टेलर मीडियम के विकास की टाइमलाइन को बेहतर बनाना

मुख्य शब्द: इंटरस्टेलर मीडियम · ब्रह्मांडीय विकास · भारी तत्व · गैलेक्सी का निर्माण · इन्फ्रारेड एस्ट्रोनॉमी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स

BITS पिलानी-हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने सूरज की रोशनी का उपयोग करके कम बिजली वाले IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) उपकरणों को ऊर्जा देने के लिए एक पोर्टेबल

चर्चा में क्यों: BITS पिलानी-हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने सूरज की रोशनी का उपयोग करके कम बिजली वाले IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) उपकरणों को ऊर्जा देने के लिए एक पोर्टेबल, मेम्ब्रेन-लेस फोटोकैटलिटिक फ्यूल सेल विकसित किया है।

यह उपकरण सूर्य के प्रकाश को बिजली में बदलने के लिए 3D-प्रिंटेड चैम्बर और TiO₂-कोटेड कार्बन क्लॉथ इलेक्ट्रोड का उपयोग करता है। इसे कम मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट के उपयोग के साथ सेंसर और LEDs जैसे कम बिजली वाले इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकफोटोकैटलिटिक फ्यूल सेल (Photocatalytic fuel cell): एक ऐसा उपकरण जो एक फोटोकैटलिस्ट (photocatalyst) का उपयोग करके प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
  • तथ्यविकसित फ्यूल सेल को सेंसर और LEDs जैसे लो-पावर इलेक्ट्रॉनिक्स को पावर देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • विज्ञान-तकनीकTiO₂ (Titanium Dioxide): इसका उपयोग फ्यूल सेल में कार्बन क्लॉथ इलेक्ट्रोड पर कोटिंग के रूप में किया जाता है।
  • स्थानMEMS, Microfluidics और Nanoelectronics (MMNE) लैब: यह BITS पिलानी-हैदराबाद में स्थित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: फोटोकैटलिटिक ईंधन सेल (photocatalytic fuel cells) में होने वाली प्रगति किस प्रकार सतत कृषि और पर्यावरणीय निगरानी में 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स' (IoT) के विस्तार को सुगम बना सकती है, चर्चा कीजिए।

  • ऊर्जा स्वायत्तता: दूरस्थ पर्यावरण सेंसर के लिए बाहरी पावर ग्रिड पर निर्भरता कम करना
  • मटेरियल एफिशिएंसी: इलेक्ट्रोलाइट वेस्ट को कम करने के लिए 3D-प्रिंटेड चैम्बर्स और टाइटेनियम डाइऑक्साइड कोटिंग का इस्तेमाल
  • स्केलेबिलिटी: वियरेबल टेक्नोलॉजी में सेल्फ-पावर्ड सेंसर्स और बड़े पैमाने पर एग्री-टेक को जोड़ने की क्षमता

मुख्य शब्द: फोटोकैटालिसिस · इंटरनेट ऑफ थिंग्स · नवीकरणीय ऊर्जा · नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स · सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

UIDAI एक नया आधार ऐप लॉन्च कर रहा है, जिसे सार्वजनिक स्थानों पर डेटा के जोखिम को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है

चर्चा में क्यों: UIDAI एक नया आधार ऐप लॉन्च कर रहा है, जिसे सार्वजनिक स्थानों पर डेटा के जोखिम को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ऐप प्रमाणित रिकॉर्ड साझा करने के लिए डिजिटली साइन किए गए QR कोड का उपयोग करेगा।

UIDAI ऐप में एक विस्तृत QR कोड होता है जिसमें उपयोगकर्ता की जानकारी और फोटो शामिल होती है, जिसे जालसाजी रोकने के लिए डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित (digitally signed) किया जाता है। यह होटल जैसे संस्थानों को प्रमाणित रिकॉर्ड प्राप्त करने की सुविधा देता है और साथ ही आयु सत्यापन के लिए चुनिंदा डेटा साझा करने की अनुमति भी प्रदान करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाUIDAI: Unique Identification Authority of India
  • विज्ञान-तकनीकनया Aadhaar ऐप यूजर की जानकारी की जालसाजी (forgery) को रोकने के लिए डिजिटली साइन किए गए QR कोड का उपयोग करता है।
  • तथ्ययह ऐप विशेष रूप से आयु सत्यापन (Age Verification) और अन्य उद्देश्यों के लिए चुनिंदा डेटा शेयरिंग की अनुमति देता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के लिए डेटा गोपनीयता और सुरक्षा को सुदृढ़ करने में भौतिक आधार प्रतियों से डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित क्यूआर (QR) कोडों की ओर संक्रमण के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • प्राइवेसी-सिक्योरिटी ट्रेड-ऑफ: सार्वजनिक सुरक्षा सत्यापन की ज़रूरत और डेटा मिनिमाइजेशन के सिद्धांत के बीच संतुलन
  • डिजिटल साक्षरता का अंतर: स्मार्टफोन या तकनीकी जानकारी की कमी वाले लोगों के लिए क्यूआर-आधारित ऑथेंटिकेशन से बाहर होने का खतरा
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: प्राइवेट संस्थानों द्वारा QR स्कैनिंग और डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम को व्यापक रूप से अपनाने की ज़रूरत

मुख्य शब्द: डेटा मिनिमाइजेशन · डिजिटल ऑथेंटिकेशन · प्राइवेसी बाय डिज़ाइन · ई-गवर्नेंस · साइबर सिक्योरिटी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

JSS AHER, इंडिया बायोइमेजिंग (India BioImaging - IBI) और IISER पुणे ने हाई-एंड माइक्रोस्कोपी तक पहुंच और प्रशिक्षण के मानकीकरण पर चर्चा करने के लिए मैसूरु में पहले वार्षिक इंडिया बायोइमेजिंग मीटिंग (IBIAM 2025) की मेजबानी की

चर्चा में क्यों: JSS AHER, इंडिया बायोइमेजिंग (India BioImaging - IBI) और IISER पुणे ने हाई-एंड माइक्रोस्कोपी तक पहुंच और प्रशिक्षण के मानकीकरण पर चर्चा करने के लिए मैसूरु में पहले वार्षिक इंडिया बायोइमेजिंग मीटिंग (IBIAM 2025) की मेजबानी की।

IBIAM 2025 की बैठक में भारत भर के 22 प्रमुख इमेजिंग केंद्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इमेजिंग अनुसंधान में भारत-यूरोप सहयोग को बढ़ावा देने के लिए Euro-BioImaging और India BioImaging के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाIBI: इंडिया बायोइमेजिंग (India BioImaging) इमेजिंग रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा एक कोलैबोरेटिव बॉडी है।
  • तथ्यइस बैठक में भारत भर के 22 प्रमुख इमेजिंग कोर्स (imaging cores) के प्रतिनिधि शामिल थे।
  • विज्ञान-तकनीकबैठक में हाई-एंड माइक्रोस्कोपी और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के मानकीकरण (standardizing) पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के जैव प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान अनुसंधान को आगे बढ़ाने में मानकीकृत इमेजिंग बुनियादी ढांचे और सहयोगात्मक अनुसंधान ढांचे की स्थापना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: क्षेत्रीय रिसर्च हब में हाई-एंड माइक्रोस्कोपी सुविधाओं का असमान वितरण
  • स्टैंडर्डाइजेशन में बाधा: अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों में इमेजिंग एक्सपर्ट्स के लिए ट्रेनिंग प्रोटोकॉल की कमी
  • अंतरराष्ट्रीय तालमेल: बायो-इमेजिंग में तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए यूरोपीय निकायों के साथ समझौता ज्ञापनों का लाभ उठाना

मुख्य शब्द: बायो-इमेजिंग · रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर · मानकीकरण · भारत-यूरोप सहयोग · माइक्रोस्कोपी तकनीकें

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने UDAN योजना के दस्तावेज़ में कासरगोड वॉटर एयरोडोम (water aerodrome) को शामिल करने की पुष्टि की है और इसे मंगलुरु और कन्नूर से जोड़ने वाले सीप्लेन संचालन के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (Letter of Intent) जारी किया है

चर्चा में क्यों: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने UDAN योजना के दस्तावेज़ में कासरगोड वॉटर एयरोडोम (water aerodrome) को शामिल करने की पुष्टि की है और इसे मंगलुरु और कन्नूर से जोड़ने वाले सीप्लेन संचालन के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (Letter of Intent) जारी किया है।

केरल सरकार, कासरगोड वॉटर एयरोडोम (water aerodrome) की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए गठित संयुक्त उद्यम KIIFCON-RITES से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report - DPR) की प्रतीक्षा कर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य कासरगोड और मंगलूरु एवं कन्नूर के हवाई अड्डों के बीच सीप्लेन कनेक्टिविटी स्थापित करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनाUDAN Scheme: कम सेवा वाले एयरपोर्ट्स और एयरोड्रोम्स (aerodromes) के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी विकसित करने सरकार की एक पहल।
  • स्थानकसारगोड: केरल का एक तटीय जिला जिसके लिए वॉटर एयरोड्रोम (water aerodrome) का प्रस्ताव दिया गया है।
  • तथ्यसीप्लेन कनेक्टिविटी: कासरगोड, मंगलूरु और कन्नूर के बीच प्रस्तावित लिंक।
  • संस्थाKIIFCON-RITES: यह एक जॉइंट वेंचर (Joint Venture) है जो प्रोजेक्ट के लिए Detailed Project Report (DPR) तैयार करने के लिए जिम्मेदार है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: उड़ान (UDAN) योजना के अंतर्गत जल एयरोड्रोम (water aerodromes) का विकास तटीय भारत में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को कैसे सुदृढ़ कर सकता है और 'ब्लू इकोनॉमी' (नीली अर्थव्यवस्था) को कैसे बढ़ावा दे सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक सिनर्जी: तटीय क्षेत्रों में यात्रा का समय कम करने के लिए मौजूदा एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सीप्लेन ऑपरेशंस को जोड़ना
  • आर्थिक उत्प्रेरक: मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से कम सेवा वाले तटीय जिलों में पर्यटन और व्यापार बढ़ने की संभावना

मुख्य शब्द: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · ब्लू इकोनॉमी · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट · उड़ान स्कीम

नयी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने संसद में टोयोटा मिराई फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (FCEV) का प्रदर्शन किया

चर्चा में क्यों: नयी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने संसद में टोयोटा मिराई फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (FCEV) का प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य हाइड्रोजन-आधारित मोबिलिटी (Hydrogen-based mobility) की ओर भारत के बढ़ते कदम को रेखांकित करना है।

NISE विभिन्न परिस्थितियों में प्रदर्शन का आकलन करने के लिए Toyota Mirai FCEV का वास्तविक दुनिया में परीक्षण (real-world testing) करेगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकToyota Mirai: एक Fuel Cell Electric Vehicle (FCEV) जो बिजली पैदा करने के लिए हाइड्रोजन का उपयोग करता है।
  • संस्थानेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE): हाइड्रोजन मोबिलिटी परफॉरमेंस (hydrogen mobility performance) की टेस्टिंग के लिए जिम्मेदार एक भारतीय संस्था।
  • तथ्यहाइड्रोजन मोबिलिटी (Hydrogen mobility) को भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन (clean energy transition) के एक प्रमुख घटक के रूप में पेश किया जा रहा है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के परिवहन क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने में हरित हाइड्रोजन की क्षमता और इसके व्यापक स्तर पर अपनाए जाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे की आवश्यकताओं का विश्लेषण कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: हाई-प्रेशर हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशनों और स्पेशलाइज्ड स्टोरेज लॉजिस्टिक्स की ज़रूरत
  • तकनीकी बाधा: फ्यूल सेल स्टैक्स की भारी लागत और किफायती मास-मार्केट EVs की ज़रूरत के बीच संतुलन बनाना
  • सप्लाई चेन निर्भरता: फ्यूल सेल कंपोनेंट्स के लिए ग्रीन हाइड्रोजन और कच्चे माल की सोर्सिंग को मैनेज करना

मुख्य शब्द: ग्रीन हाइड्रोजन · फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल · डीकार्बोनाइजेशन · रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांज़िशन · हाइड्रोजन मोबिलिटी

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माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला ने भारतीय आईटी कंपनियों (कॉग्निजेंट, इंफोसिस, TCS, विप्रो) के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला ने भारतीय आईटी कंपनियों (कॉग्निजेंट, इंफोसिस, TCS, विप्रो) के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इसका उद्देश्य एजेंटिक AI (Agentic AI) को अपनाने की गति को तेज करने के लिए 2,00,000 से अधिक माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट (Microsoft Copilot) लाइसेंस तैनात करना है।

माइक्रोसॉफ्ट भारत में क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में चार साल की अवधि के दौरान $17.5 बिलियन का निवेश कर रहा है। चार भारतीय IT कंपनियों (Cognizant, इंफोसिस, TCS, विप्रो) में से प्रत्येक व्यक्तिगत रूप से 50,000 से अधिक लाइसेंस तैनात करेगी।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकमाइक्रोसॉफ्ट Copilot: एक AI टूल जिसे मुख्य व्यावसायिक कार्यों (core business operations) में मानव-एजेंट सहयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • तथ्यमाइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) द्वारा भारत के क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का मूल्य चार वर्षों में $17.5 बिलियन है।
  • तथ्यचार भारतीय IT कंपनियों द्वारा तैनात किए जाने वाले Microsoft Copilot लाइसेंसों की कुल संख्या 200,000 से अधिक है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: 'एजेंटिक एआई' (Agentic AI) और 'डीप एआई फैक्ट्रियों' (Deep AI Factories) का एकीकरण भारत के आईटी सेवा क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को किस प्रकार पुनर्गठित कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • लेबर मार्केट में बदलाव: मैनुअल कोडिंग और टेस्टिंग से ह्यूमन-एजेंट कोलैबोरेशन ओवरसाइट की ओर बदलाव
  • इंफ्रास्ट्रक्चर निर्भरता: घरेलू AI डिप्लॉयमेंट के लिए विदेशी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निर्भरता
  • डेटा संप्रभुता: ग्लोबल AI लाइसेंस का इस्तेमाल करते समय डेटा प्राइवेसी बनाए रखने की चुनौतियां

मुख्य शब्द: एजेंटिक AI · डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन · ह्यूमन-एजेंट कोलैबोरेशन · क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर · डीप AI फैक्ट्रियां

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माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न ने भारत में 50 बिलियन डॉलर से अधिक के संयुक्त निवेश की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न ने भारत में 50 बिलियन डॉलर से अधिक के संयुक्त निवेश की घोषणा की है। यह निवेश वैश्विक स्तर पर AI बबल (AI bubble) को लेकर चल रही चिंताओं के बीच, भारत के AI-फर्स्ट भविष्य को समर्थन देने के उद्देश्य से किया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर में 50 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश कर रहे हैं। हालांकि भारत में AI टैलेंट पूल मजबूत है और कंज्यूमर ऐप्स बढ़ रहे हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा इकोसिस्टम की चुनौतियों के कारण भारत को 'सोवरेन AI' (Sovereign AI) मॉडल विकसित करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यMicrosoft और Amazon का कुल निवेश: $50 बिलियन से अधिक।
  • तथ्यभारत का AI परिदृश्य: उपभोक्ता ऐप्स और रियल-वर्ल्ड सॉल्यूशंस (real-world solutions) के तेजी से बढ़ते उपयोग द्वारा परिभाषित।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में विशाल प्रतिभा पूल और एआई-संचालित उपभोक्ता अनुप्रयोगों के तीव्र प्रसार के बावजूद, संप्रभु एआई (Sovereign AI) मॉडल विकसित करने में भारत के समक्ष मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: कंप्यूट पावर और स्पेशलाइज्ड डेटा सेंटर्स के लिए भारी कैपिटल की ज़रूरत
  • डेटा संप्रभुता: ओपन-सोर्स इनोवेशन और घरेलू डेटा प्राइवेसी और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
  • टैलेंट रिटेंशन: हाई-एंड AI रिसर्च और डेवलपमेंट रोल्स के लिए ग्लोबल टेक जायंट्स के साथ मुकाबला

मुख्य शब्द: सॉवरेन AI · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर · डेटा इकोसिस्टम · AI को अपनाना · पूंजीगत निवेश

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के शोधकर्ताओं ने श्रीनिवास रामानुजन के पाई (pi) के लिए बने सदी पुराने गणितीय सूत्रों को टर्बुलेंट फ्लूइड्स (turbulent fluids) और ब्रह्मांडीय विस्तार (cosmic expansion) की भौतिकी से जोड़ा है

चर्चा में क्यों: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के शोधकर्ताओं ने श्रीनिवास रामानुजन के पाई (pi) के लिए बने सदी पुराने गणितीय सूत्रों को टर्बुलेंट फ्लूइड्स (turbulent fluids) और ब्रह्मांडीय विस्तार (cosmic expansion) की भौतिकी से जोड़ा है।

प्रोफेसर अनिंदा सिन्हा और फैजान भट्ट ने 'फिजिकल रिव्यू लेटर्स' में एक शोध प्रकाशित किया है। यह शोध रामानुजन के ट्रांसेंडेंटल नंबर (transcendental number) रिप्रेजेंटेशन को फ्लूइड डायनेमिक्स और ब्रह्मांड के विस्तार से जोड़ता है। यह अध्ययन इस बात की जांच करता है कि कैसे पाई (pi) और अन्य ट्रांसेंडेंटल नंबर भौतिक सिद्धांतों पर आधारित कुशल रिप्रेजेंटेशन रख सकते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकPhysical Review Letters: वह जर्नल जहाँ रामानुजन के फॉर्मूले (formulae) को कॉस्मोलॉजी (cosmology) से जोड़ने वाले शोध को प्रकाशित किया गया था।
  • पदअनिंदा सिन्हा: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु में प्रोफेसर।
  • तथ्ययह रिसर्च pi के गणितीय सिद्धांतों को टर्बुलेंट फ्लूइड्स (turbulent fluids) और ब्रह्मांड के विस्तार से जोड़ता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ब्रह्मांड के मूलभूत नियमों को समझने के लिए उन्नत गणितीय सिद्धांतों को ब्रह्मांडीय भौतिकी के साथ एकीकृत करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • इंटरडिसिप्लिनरी सिनर्जी: कॉस्मिक एक्सपेंशन को मॉडल करने के लिए प्योर मैथमेटिक्स और थ्योरेटिकल फिजिक्स को जोड़ना
  • कंप्यूटेशनल एफिशिएंसी: जटिल फ्लूइड डायनेमिक्स सिमुलेशन को आसान बनाने के लिए रामानुजन के ट्रांसेंडेंटल रिप्रेजेंटेशन का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: ट्रांसेंडेंटल नंबर्स · ब्रह्मांड विज्ञान · फ्लुइड डायनामिक्स · गणितीय भौतिकी · श्रीनिवास रामानुजन

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA) की रिपोर्ट के अनुसार, मानवीय कारणों से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग ने साइक्लोन सेनयार (Cyclone Senyar) प्रभावित क्षेत्र में भारी बारिश की तीव्रता को 28-160% तक बढ़ा दिया है

चर्चा में क्यों: वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA) की रिपोर्ट के अनुसार, मानवीय कारणों से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग ने साइक्लोन सेनयार (Cyclone Senyar) प्रभावित क्षेत्र में भारी बारिश की तीव्रता को 28-160% तक बढ़ा दिया है।

WWA के अध्ययन में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण श्रीलंका में भारी बारिश की अवधि अब 9% से 50% तक अधिक तीव्र हो गई है। चक्रवात डिटवाह (Cyclone Ditwah) और चक्रवात सेनयार (Cyclone Senyar) सहित इन चरम मौसमी घटनाओं के परिणामस्वरूप 1,750 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यWorld Weather Attribution (WWA) मौसम के रिकॉर्ड का विश्लेषण करने वाले जलवायु वैज्ञानिकों का एक कंसोर्टियम (consortium) है।
  • तथ्यसाइक्लोन Senyar और साइक्लोन Ditwah को 1,750 से अधिक मौतें होने वाली चरम मौसम की घटनाओं (extreme weather events) के रूप में पहचाना गया।
  • तथ्यमानव-जनित ग्लोबल हीटिंग (Global Heating) के कारण साइक्लोन Senyar प्रभावित क्षेत्र में भारी बारिश की तीव्रता में 28-160% की वृद्धि हुई।
  • तथ्यश्रीलंका में भारी बारिश की अवधि वर्तमान में 9% से 50% तक अधिक तीव्र है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मानवजनित जलवायु परिवर्तन किस प्रकार दक्षिण एशिया में चरम मौसमी घटनाओं को तीव्र कर रहा है, इस पर चर्चा कीजिए और इन जोखिमों को कम करने के लिए जीवाश्म ईंधन से परिवर्तन की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिए।

  • एट्रिब्यूशन साइंस: विशिष्ट चरम मौसम की घटनाओं को मानव-जनित ग्लोबल वार्मिंग पैटर्न से जोड़ना
  • मिटिगेशन की ज़रूरत: भारी बारिश की घटनाओं को कम करने के लिए फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटाना

मुख्य शब्द: मानवीय जलवायु परिवर्तन · अत्यधिक मौसम की घटनाएँ · एट्रिब्यूशन साइंस · फॉसिल फ्यूल ट्रांज़िशन · क्लाइमेट रेजिलिएंस

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हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वेस्टर्न ट्रैगोपैन (Western Tragopan) के लिए संचालित कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम (Captive Breeding Program) के तहत अब तक 40 से अधिक पक्षी तैयार किए गए हैं, हालांकि बजट और रिसर्च की कमी के कारण इन्हें वापस प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है

चर्चा में क्यों: हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वेस्टर्न ट्रैगोपैन (Western Tragopan) के लिए संचालित कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम (Captive Breeding Program) के तहत अब तक 40 से अधिक पक्षी तैयार किए गए हैं, हालांकि बजट और रिसर्च की कमी के कारण इन्हें वापस प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है।

वेस्टर्न ट्रैगोपैन (Western Tragopan) एक दुर्लभ हिमालयी तीतर है, जिसकी जनसंख्या IUCN के अनुसार अनुमानतः 3,000-9,500 है। हिमाचल प्रदेश स्थित सरहन फेजेंट्री (Sarahan Pheasantry) वर्तमान में इसके बंदी प्रजनन (captive breeding) पहल का केंद्र है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पर्यावरणवेस्टर्न ट्रैगोपन (Western tragopan): हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला एक दुर्लभ फाज़ेंट (pheasant) प्रजाति।
  • तथ्यIUCN के अनुमान के अनुसार, जंगली अवस्था में केवल 3,000-9,500 वेस्टर्न ट्रैगोपन्स (Western Tragopans) बचे हैं।
  • संस्थाIUCN (International Union for the Conservation of Nature), प्रजातियों के लिए जनसंख्या का अनुमान प्रदान करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पश्चिमी ट्रैगोपन जैसी लुप्तप्राय हिमालयी प्रजातियों के संरक्षण में 'कैप्टिव ब्रीडिंग' (परिरक्षित प्रजनन) और समुदाय-आधारित पर्यटन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • इकोलॉजिकल बॉटलनेक: स्थापित प्रोटोकॉल और रिसर्च की कमी के कारण रीइंट्रोडक्शन रुका हुआ
  • आर्थिक प्रोत्साहन: आवास में गड़बड़ी कम करने के लिए एक टूल के रूप में कम्युनिटी-आधारित टूरिज्म
  • राजकोषीय बाधा: बजट की सीमाएं कैप्टिव ब्रीडिंग से जंगली इलाकों में पुनर्वापसी की प्रक्रिया में रुकावट डाल रही हैं

मुख्य शब्द: एक्स-सिटु कंजर्वेशन · आवास विखंडन · कम्युनिटी-आधारित पर्यटन · जैव विविधता संरक्षण · प्रजातियों का पुन: परिचय

कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि प्रवर्तन की कमी और विशिष्ट अदालती आदेशों के अभाव के कारण दिल्ली में 63 लाख से अधिक ओवर-एज्ड (over-aged) वाहन अभी भी चल रहे हैं

चर्चा में क्यों: कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि प्रवर्तन की कमी और विशिष्ट अदालती आदेशों के अभाव के कारण दिल्ली में 63 लाख से अधिक ओवर-एज्ड (over-aged) वाहन अभी भी चल रहे हैं।

CAQM की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 63 लाख से अधिक ऐसे वाहन सड़कों पर चल रहे हैं जो निर्धारित BS मानकों से अधिक हैं। आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 2026 तक डीजल ऑटो-रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाCAQM: Commission for Air Quality Management वह बॉडी है जो NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन (Air Quality Management) के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यदिल्ली में BS मानकों से अधिक उम्र के 63 लाख से ज्यादा वाहन वर्तमान में चल रहे हैं।
  • तथ्यCAQM ने NCR में डीजल ऑटो-रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए 2026 की डेडलाइन प्रस्तावित की है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पुराने वाहनों के उत्सर्जन मानकों को लागू करने में आने वाली संस्थागत और विनियामक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • एन्फोर्समेंट गैप: न्यायिक निगरानी के बावजूद राज्य अधिकारियों द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की कमी
  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों की आजीविका और क्षेत्रीय एयर क्वालिटी लक्ष्यों के बीच संतुलन
  • स्टैंडर्डाइजेशन की बाधा: BS मानकों से अधिक वाले वाहनों की पहचान और उन्हें हटाने में कठिनाई

मुख्य शब्द: वायु गुणवत्ता प्रबंधन · उत्सर्जन मानक · नियामक प्रवर्तन · NCR प्रदूषण · BS स्टैंडर्ड्स

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स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (SIH) 2025 का ग्रैंड फिनाले बेलगावी स्थित विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) में संपन्न हुआ

चर्चा में क्यों: स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (SIH) 2025 का ग्रैंड फिनाले बेलगावी स्थित विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) में संपन्न हुआ। इस आयोजन में छात्रों द्वारा ब्लॉकचेन, AI और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विकसित किए गए डिजिटल समाधानों का प्रदर्शन किया गया।

इस कार्यक्रम में कुल 120 छात्र प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 52 महिला प्रतिभागी शामिल थीं। विजेता समाधानों ने ब्लॉकचेन (Blockchain), साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security), AI-आधारित प्रदूषण स्रोत पहचान, टिकाऊ परिवहन और लॉजिस्टिक्स (Sustainable Transportation & Logistics) और क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी (Clean & Green Technology) पर ध्यान केंद्रित किया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यSIH 2025 ग्रैंड फिनाले में 120 छात्रों ने भाग लिया, जिनमें से 52 महिला प्रतिभागी थीं।
  • स्थानविश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) बेलगावी में स्थित है।
  • विज्ञान-तकनीकSIH 2025 के विजेताओं ने Blockchain, Cyber Security, AI-आधारित Pollution Source Identification और Clean & Green Technology में समाधान प्रदर्शित किए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: स्मार्ट इंडिया हैकथॉन जैसी पहलें भारत में स्वदेशी नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे सुदृढ़ कर सकती हैं और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में लैंगिक अंतराल को पाटने में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं? चर्चा कीजिए।

  • स्किल डेवलपमेंट: एकेडमिक करिकुलम को ब्लॉकचेन और AI जैसी उभरती टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ना
  • जेंडर पैरिटी: हाई-टेक इंजीनियरिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना
  • इनोवेशन इकोसिस्टम: एकेडमिक प्रोटोटाइप से स्केलेबल और मार्केट-रेडी डिजिटल सॉल्यूशंस की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: STEM शिक्षा · डिजिटल इंडिया · स्वदेशी नवाचार · लैंगिक समानता · ब्लॉकचेन · साइबर सिक्योरिटी

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