महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ड्राइवरों की थकान की पहचान करने के लिए रियल टाइम में काम करने वाला एक AI-आधारित 'ड्रॉजीनेस डिटेक्शन सिस्टम' (Drowsiness Detection System) विकसित किया है, जिसे सरकारी पेटेंट प्राप्त हुआ है
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चर्चा में क्यों
महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ड्राइवरों की थकान की पहचान करने के लिए रियल टाइम में काम करने वाला एक AI-आधारित 'ड्रॉजीनेस डिटेक्शन सिस्टम' (Drowsiness Detection System) विकसित किया है, जिसे सरकारी पेटेंट प्राप्त हुआ है।
पृष्ठभूमि
यह सिस्टम चेहरे के भावों और आंखों की गतिविधियों का विश्लेषण करने के लिए एक 'मेट्रिक-लर्निंग आर्किटेक्चर' (metric-learning architecture) का उपयोग करता है। इसे थकान के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ड्राइवरों को रियल-टाइम अलर्ट भेजने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकDrowsiness Detection System: महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित AI-आधारित सिस्टम।
- तथ्यMetric-learning architecture: चेहरे के भावों (facial expressions) और आंखों की गतिविधियों (eye movements) का विश्लेषण करने के लिए उपयोग किया जाने वाला विशिष्ट AI आर्किटेक्चर।
- पदभारतीय सरकार: वह संस्था जिसने ड्रॉजीनेस डिटेक्शन (drowsiness detection) इनोवेशन के लिए पेटेंट प्रदान किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के परिवहन क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वास्तविक समय की निगरानी प्रणाली किस प्रकार सड़क सुरक्षा को बढ़ाने और मानवीय त्रुटियों से संबंधित दुर्घटनाओं को कम करने में सहायक हो सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- डेटा प्राइवेसी: रियल-टाइम फेशियल एक्सप्रेशन मॉनिटरिंग और व्यक्तिगत प्राइवेसी अधिकारों के बीच संतुलन
- इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: कमर्शियल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट फ्लीट में AI सेंसर रेट्रोफिटिंग की भारी लागत
- लायबिलिटी फ्रेमवर्क: ड्राइवरों द्वारा AI अलर्ट को नज़रअंदाज़ करने पर जवाबदेही तय करने की कानूनी जटिलताएँ
मुख्य शब्द: मेट्रिक-लर्निंग · रियल-टाइम मॉनिटरिंग · सड़क सुरक्षा · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · पेटेंट · मानवीय त्रुटि कम करना
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।