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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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ध्रुव स्पेस (Dhruva Space) ने 12 जनवरी, 2026 को अपने ‘पोलर एक्सेस-1’ (PA-1) मिशन के लॉन्च की घोषणा की है

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

ध्रुव स्पेस (Dhruva Space) ने 12 जनवरी, 2026 को अपने ‘पोलर एक्सेस-1’ (PA-1) मिशन के लॉन्च की घोषणा की है। इस मिशन के तहत विभिन्न राज्यों और देशों के कई सैटेलाइट्स को ले जाने के लिए ISRO के PSLV-C62 का उपयोग किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

PA-1 मिशन में नेपाल, ओडिशा, कर्नाटक और असम के लिए सैटेलाइट्स के साथ ध्रुव स्पेस (Dhruva Space) का THYBOLT-3 भी शामिल होगा। इस मिशन का उद्देश्य संचार, पर्यावरण निगरानी, शिक्षा और वाणिज्यिक पृथ्वी अवलोकन (Earth observation) को सहायता प्रदान करना है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • विज्ञान-तकनीकPSLV-C62: Polar Access-1 मिशन के लिए ISRO द्वारा नामित लॉन्च व्हीकल (launch vehicle)।
  • तथ्यPA-1 मिशन: इसका लॉन्च 12 जनवरी, 2026 के लिए शेड्यूल किया गया है।
  • तथ्यनेपाल का पहला सैटेलाइट PA-1 मिशन पेलोड में शामिल है।
  • तथ्यशामिल सैटेलाइट्स: ओडिशा CGUSAT-1, कर्नाटक DSAT-1, असम LACHIT-1, और THYBOLT-3।

मेन्स के लिए

प्रश्न: अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों को प्राप्त करने और क्षेत्रीय तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने में भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के महत्व पर चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • कमर्शियल व्यवहार्यता: सैटेलाइट लॉन्च के फ़िस्कल बोझ को कम करने के लिए ध्रुव स्पेस जैसे प्राइवेट प्लेयर्स का इस्तेमाल
  • क्षेत्रीय एकीकरण: कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के लिए सैटेलाइट-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा

मुख्य शब्द: स्पेस इकोनॉमी · प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी · सैटेलाइट कम्युनिकेशन · पृथ्वी अवलोकन · तकनीकी संप्रभुता

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।