SVIMS को संक्रामक रोगों के निदान और अनुसंधान के लिए अपने IRDL लैब को मजबूत करने हेतु PM-ABHIM योजना के तहत ICMR से ₹8.55 करोड़ का अनुदान प्राप्त हुआ है
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चर्चा में क्यों
SVIMS को संक्रामक रोगों के निदान और अनुसंधान के लिए अपने IRDL लैब को मजबूत करने हेतु PM-ABHIM योजना के तहत ICMR से ₹8.55 करोड़ का अनुदान प्राप्त हुआ है।
पृष्ठभूमि
श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SVIMS) को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) से ₹8.55 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है। यह फंड विशेष रूप से माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एक प्रोजेक्ट के पहले वर्ष (1 जनवरी, 2026 - 31 दिसंबर, 2026) के लिए आवंटित किया गया है, जिसका उद्देश्य इंफेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (IRDL) को उन्नत बनाना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाICMR: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च।
- योजनाPM-ABHIM: प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (Prime Minister’s Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission)।
- तथ्यप्रोजेक्ट के पहले वर्ष के लिए ग्रांट की राशि: ₹8.55 करोड़।
- स्थानSVIMS: श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पीएम-अभिम (PM-ABHIM) जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना उभरते संक्रामक रोगों के विरुद्ध भारत की तैयारियों को किस प्रकार उन्नत कर सकता है, चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- डायग्नोस्टिक क्षमता: संक्रामक बीमारियों की पहचान के लिए टर्नअराउंड समय कम करने हेतु लैब इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना
- पब्लिक-प्राइवेट सिनर्जी: केंद्र सरकार की फंडिंग और ICMR की निगरानी के जरिए संस्थागत रिसर्च क्षमताओं का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · संक्रामक बीमारी की पहचान · पब्लिक हेल्थ रिसर्च · पीएम-अभिम् · लैबोरेटरी की मजबूती
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
- बैट टैक्सोनॉमी, इकोलॉजी, कंजर्वेशन और फोटोग्राफी पर आयोजित चौथी राष्ट्रीय कार्यशाला के विशेषज्ञों ने ज़ूनोटिक बीमारियों (Zoonotic diseases) के प्रकोप को कम करने के लिए चमगादड़ों के साथ 'इनफॉर्म्ड को-एग्ज़िस्टेंस' (Informed coexistence) यानी सूचित सह-अस्तित्व का समर्थन किया है · 9 जनवरी 2026
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।