मणिपुर में अफीम की खेती वाली ज़मीन पर लगाए गए बांस के पेड़
चर्चा में क्यों: मणिपुर वन विभाग ने चंडेल, चुराचंदपुर और सेनापति जिलों में अफीम की खेती के लिए पूर्व में साफ किए गए 255 हेक्टेयर वन क्षेत्र में बांस के वृक्षारोपण की घोषणा की है।
मणिपुर वन विभाग ने वर्ष 2018 से अब तक अफीम की खेती के अंतर्गत आने वाले 307 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान की है। वर्ष 2023-24 और 2025-26 के मध्य, विभाग ने तस्करी पर अंकुश लगाने हेतु सुरक्षा बलों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जब्त किए गए उत्पादों से ₹115 करोड़ की आय अर्जित की।
Prelims pointers (4)
- Factमणिपुर में बांस के वृक्षारोपण के लिए 255 हेक्टेयर वन भूमि को लक्षित किया गया है।
- Factवर्ष 2018 से अब तक 307 हेक्टेयर वन भूमि को अफीम की खेती के अंतर्गत पहचाना गया है।
- Factमणिपुर वन विभाग ने 2023-24 और 2025-26 के बीच जब्त उत्पादों से ₹115 करोड़ की कमाई की।
- Placeमणिपुर के चन्देल, चुराचांदपुर और सेनापति जिले वे जिले हैं जहाँ बहाली (restoration) की प्रक्रिया चल रही है।
Mains angle
Q. भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की अवैध खेती से निपटने में वन पुनरुद्धार और अंतर-एजेंसी समन्वय की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- Economic incentive gap: High profitability of poppy cultivation vs. low immediate returns from bamboo plantation
- Inter-agency synergy: Coordination between Forest Department and security forces for seizure and smuggling prevention
- Ecological restoration: Reclaiming degraded forest land to prevent biodiversity loss and soil erosion
Keywords: Forest Restoration · Narcotics Control · Inter-agency Coordination · Land Degradation · Biodiversity Conservation