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भाग I · स्था. 11.2025 
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कर्नाटक में सूखे से 46,000 करोड़ का फसल नुकसान, 217 तालुकों पर असर

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· फसल पैटर्न एवं सिंचाई· प्रीलिम्स + मेन्स·

मानसून की अनिश्चितता और कृषि संकट: जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) और आपदा प्रबंधन पर आधारित GS3 का एक महत्वपूर्ण विषय।

चर्चा में क्यों

कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार को दो ज्ञापन (memoranda) सौंपे हैं, जिसमें 217 तालुकों में भीषण सूखे के कारण हुए लगभग ₹46,000 करोड़ के फसल नुकसान के लिए सहायता मांगी गई है।

पृष्ठभूमि

कर्नाटक में दक्षिण-पश्चिम मानसून (SWM) के दौरान 551 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य 852 मिमी से 35% कम है। राज्य में 19.52 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसलों को ₹18,748.23 करोड़ का नुकसान हुआ है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्य2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कर्नाटक में 551 mm बारिश दर्ज की गई, जो 852 mm के सामान्य स्तर से 35% कम है।
  • तथ्यकर्नाटक में कैलेंडर वर्ष की लगभग 74% वर्षा SWM (Southwest Monsoon) से होती है, जबकि उत्तर-पूर्वी मानसून (NEM) का योगदान 16% है।
  • स्थानराजस्थान के बाद कर्नाटक भारत का दूसरा सबसे सूखा-प्रवण (drought-prone) राज्य है, जिसका 80% भौगोलिक क्षेत्र सूखे की चपेट में आता है।
  • तथ्यSWM के दौरान संचयी वर्षा की कमी (Cumulative rainfall deficit): दक्षिण आंतरिक कर्नाटक (South Interior Karnataka) के लिए 41%, उत्तर आंतरिक कर्नाटक (North Interior Karnataka) के लिए 42%, मालनद (Malnad) के लिए 38% और तटीय क्षेत्र (coastal region) के लिए 28% रही।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

कर्नाटक में वर्षा के पैटर्न (rainfall patterns) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. दक्षिण-पश्चिम मानसून में 551 mm वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 35% कम है।
  2. कर्नाटक भारत का सबसे सूखा-प्रवण (drought-prone) राज्य है, जिसका 80% भौगोलिक क्षेत्र इससे प्रभावित है।
  3. दक्षिण-पश्चिम मानसून राज्य में कैलेंडर वर्ष की लगभग 74% वर्षा के लिए जिम्मेदार है।
  1. (a)केवल 3
  2. (b)केवल 1 और 3
  3. (c)केवल 2 और 3
  4. (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: (b) केवल 1 और 3 — कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है: राजस्थान के बाद कर्नाटक दूसरा सबसे सूखा-प्रवण (drought-prone) राज्य है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: कर्नाटक जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की कृषि अर्थव्यवस्था पर मानसून की परिवर्तनशीलता के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए और जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · जलवायु परिवर्तन एवं अंतर्राष्ट्रीय समझौतेयह भी: GS1 · भौतिक भूगोल (भू-आकृतियां, महासागर, जलवायु)

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।