मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से बिना VC वाले 14 यूनिवर्सिटीज पर मांगा जवाब
चर्चा में क्यों: मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि 14 राज्य संचालित विश्वविद्यालय पिछले तीन से चार वर्षों से बिना वाइस-चांसलर या सिंडिकेट के कैसे चल रहे हैं।
न्यायमूर्ति एन. कोर्ट ने टिप्पणी की कि नेतृत्व के अभाव ने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों (Retirement benefits) की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थामद्रास हाई कोर्ट: तमिलनाडु राज्य की सर्वोच्च न्यायिक अथॉरिटी।
- तथ्यतमिलनाडु में 14 राज्य-संचालित विश्वविद्यालयों की पहचान की गई जो बिना Vice-Chancellors या Syndicates के काम कर रहे हैं।
- पदहायर एजुकेशन सेक्रेटरी: कोर्ट द्वारा सामान्य स्थिति की बहाली पर रिपोर्ट देने के लिए शामिल किया गया अधिकारी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति में निहित प्रशासनिक और व्यवस्थागत चुनौतियों तथा संस्थागत स्वायत्तता एवं कर्मचारियों के कल्याण पर इसके प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
- प्रशासनिक पंगुता: नेतृत्व की नियुक्तियों में देरी से रिटायरमेंट बेनिफिट प्रोसेसिंग जैसे नियमित काम रुके
- संस्थागत स्वायत्तता: राज्य सरकार के नियंत्रण और यूनिवर्सिटी के स्व-शासन के बीच टकराव
- गवर्नेंस गैप: राज्य के उच्च शिक्षा निकायों में जवाबदेही की कमी
मुख्य शब्द: प्रशासनिक विसंगति · संस्थागत स्वायत्तता · गवर्नेंस में कमी · सरकारी विश्वविद्यालय · न्यायिक निगरानी