ISRO ने NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च किया, 18 मिनट में बहाल होंगी NavIC सेवाएं
चर्चा में क्यों: ISRO ने पिछले सैटेलाइट्स की विफलता के बाद NavIC सेवाओं को बहाल करने के लिए GSLV-F18 का उपयोग करके 2250 kg के NVS-03 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है।
NVS-03 सैटेलाइट का वजन 2250 किलोग्राम है और इसे GSLV-F18 वाहन के जरिए सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। इसमें एक स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक (Atomic Clock) शामिल है और यह 12 साल के मिशन जीवन के दौरान मौजूदा L5/S सिग्नल्स के साथ L1 सिग्नल भी प्रदान करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- विज्ञान-तकनीकGSLV-F18: वह लॉन्च व्हीकल जिसका उपयोग NVS-03 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (geosynchronous transfer orbit) में स्थापित करने के लिए किया गया।
- तथ्यNVS-03: एक 2250 kg का सैटेलाइट जिसे नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टलेशन (NavIC) के लिए निरंतरता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- विज्ञान-तकनीकNavIC कवरेज: यह भारतीय भूभाग और भारतीय भू-राजनीतिक सीमा से 1,500 किमी आगे तक के क्षेत्र में PNT सेवाएं प्रदान करता है।
- विज्ञान-तकनीकNVS-03 Signals: इसमें मौजूदा L5 और एस. सिग्नल्स के साथ L1 सिग्नल्स को भी शामिल किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने और घरेलू बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में 'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन' (NavIC) के महत्व की चर्चा कीजिए।
- स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए GPS या GLONASS जैसे विदेशी GNSS पर निर्भरता कम करना
- तकनीकी संप्रभुता: सुरक्षित PNT सेवाओं के लिए स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक और सिग्नल प्रोसेसिंग का विकास
- आर्थिक उपयोगिता: आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और कृषि मैपिंग के लिए सटीकता बढ़ाना
मुख्य शब्द: नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम · जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट · रणनीतिक स्वायत्तता · PNT सर्विसेज · स्वदेशी तकनीक