यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,480 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (539) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (353) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (252) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (212) · रक्षा तकनीक (120) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)
चर्चा में क्यों: परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने घरेलू और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए मनुगुरु स्थित हैवी वाटर प्लांट (HWP) में ऑक्सीजन-18 (O-18) सुविधाओं के विस्तार का शिलान्यास किया।
इस परियोजना का उद्देश्य घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए समृद्ध ऑक्सीजन-18 (Oxygen-18) जल का उत्पादन करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानHeavy Water Plant (HWP) भद्राद्री कोठागुडेम जिले के मनुगुरु में स्थित है।
विज्ञान-तकनीकऑक्सीजन-18 (O-18) ऑक्सीजन का एक आइसोटोप है जिसका उपयोग एनरिच्ड वॉटर (enriched water) उत्पादन में किया जाता है।
पदअजीत कुमार मोहंती, डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (DAE) के सचिव के रूप में कार्यरत हैं।
पदएस. सत्यकुमार एटॉमिक एनर्जी कमीशन (Atomic Energy Commission) के चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के परमाणु ऊर्जा बुनियादी ढांचे में आइसोटोप उत्पादन के महत्व और वैश्विक चिकित्सा एवं औद्योगिक बाजारों में इसके योगदान की क्षमता पर चर्चा कीजिए।
मार्केट पोजीशनिंग: एन्रिच्ड आइसोटोप्स की वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन का लाभ उठाना
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: विशेष परमाणु और मेडिकल आइसोटोप के लिए आयात पर निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: आइसोटोप उत्पादन · परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर · परमाणु ऊर्जा विभाग · रणनीतिक स्वायत्तता · हैवी वाटर प्लांट
चर्चा में क्यों: कोइम्बाटोर स्थित एक उद्यम, MAK Controls and Systems ने DRDO के आकाश - न्यू जनरेशन (Akash - NG) मिसाइल प्रोग्राम में एक मिसाइल लॉन्चर को सफलतापूर्वक विकसित और शामिल किया है।
इस परियोजना की लागत ₹2.5 करोड़ थी और इसे MAK Controls and Systems द्वारा दो वर्षों में पूरा किया गया। कंपनी ने आकाश - NG मिसाइल कार्यक्रम (Akash - NG Missile Programme) की विकास प्रक्रिया में चार वर्षों के दौरान ₹10 करोड़ का निवेश किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकआकाश - NG: DRDO द्वारा प्रबंधित एक मिसाइल प्रोग्राम।
तथ्यMAK Controls and Systems: कोयंबटूर स्थित एक मध्यम स्तर का उद्यम (medium-scale enterprise)।
तथ्यआकाश - NG प्रोग्राम में लॉन्चर इंडक्शन के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट: ₹2.5 करोड़।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आकाश - एनजी (Akash - NG) मिसाइल कार्यक्रम जैसी उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को शामिल करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
सप्लाई चेन रेजिलिएंस: क्षेत्रीय मध्यम स्तर के उद्यमों को जोड़कर बड़े पैमाने के OEMs पर निर्भरता कम करना
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: प्राइवेट सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग में हाई-प्रिसिजन स्टैंडर्ड और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल बनाए रखने की चुनौतियां
मुख्य शब्द: स्वदेशी उत्पादन · DRDO · डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग · MSME एकीकरण · आकाश - एनजी
चर्चा में क्यों: ISRO के चेयरमैन वी. नारायण ने गगनयान कार्यक्रम के पहले मानव रहित मिशन (uncrewed mission) के लिए समयसीमा की घोषणा की है, जो 2027 के लिए निर्धारित है।
गगनयान कार्यक्रम के तहत चालक दल वाले मिशन से पहले तीन मानव रहित मिशन शामिल होंगे। ISRO वर्तमान में 12 जनवरी को लॉन्च हुए PSLV-C62/EOS N1 मिशन में आई एक विसंगति (anomaly) की जांच कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यगगनयान का पहला अनक्रूएड (uncrewed) मिशन 2027 के लिए प्लान किया गया है।
विज्ञान-तकनीकPSLV-C62/EOS N1: 12 जनवरी को लिफ्ट-ऑफ के बाद मिशन में एक विसंगति (anomaly) देखी गई।
पदवी. नरायनन: ISRO के चेयरमैन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के गगनयान मिशन में निहित तकनीकी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों तथा वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति के लिए इसके महत्व का विश्लेषण कीजिए।
सेफ्टी प्रोटोकॉल: मानव अंतरिक्ष उड़ान में जोखिम कम करने के लिए बार-बार बिना चालक वाले टेस्ट फ्लाइट्स की ज़रूरत
तकनीकी संप्रभुता: मानव मिशनों के लिए विदेशी लॉन्च व्हीकल पर निर्भरता कम करना
रणनीतिक स्वायत्तता: डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन और ऑर्बिटल लॉजिस्टिक्स में भारत की क्षमताओं को बढ़ाना
मुख्य शब्द: मानव अंतरिक्ष उड़ान · अंतरिक्ष अन्वेषण · तकनीकी संप्रभुता · जोखिम कम करना · एयरोस्पेस इंजीनियरिंग
चर्चा में क्यों: INCOIS ने तटीय प्रबंधन और शुरुआती चेतावनी के लिए रियल-टाइम वेव डेटा (wave data) प्रदान करने हेतु WAMAN बुय नेटवर्क विकसित किया है। इस सिस्टम की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए इसमें समुदाय के नेतृत्व वाले रखरखाव (community-led maintenance) पर जोर दिया गया है।
WAMAN (Wave Monitoring Along Nearshore) नेटवर्क में भारत के तटों के साथ तैनात 17 बॉयज़ (buoys) शामिल हैं। यह नेटवर्क पूर्वानुमान और टिकाऊ तटीय प्रबंधन के लिए रियल-टाइम वेव डेटा (wave data) प्रदान करता है। डेटा के प्रसार के लिए इसमें मोबाइल ऐप्स, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और WhatsApp का उपयोग किया जाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाINCOIS: इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज।
तथ्यWAMAN नेटवर्क में भारतीय तटरेखा के साथ तैनात 17 बुय (buoys) शामिल हैं।
विज्ञान-तकनीकWAMAN पूर्वानुमान और अर्ली वार्निंग (early warnings) के लिए रियल-टाइम वेव डेटा प्रदान करता है।
स्थानWAMAN को हिंद महासागर क्षेत्र के अन्य देशों द्वारा अपनाया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में आपदा प्रबंधन और तटीय संसाधन प्रबंधन की प्रभावकारिता को बढ़ाने में समुदाय-आधारित निगरानी प्रणालियाँ किस प्रकार सहायक हो सकती हैं, चर्चा कीजिए।
डेटा लोकतंत्रीकरण: सुलभ कम्युनिकेशन चैनल्स के जरिए वैज्ञानिक डेटा और स्थानीय कार्रवाई के बीच की दूरी को कम करना
कम्युनिटी ओनरशिप: लोकल स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी से इंफ्रास्ट्रक्चर की तोड़फोड़ और गिरावट को रोकना
क्षेत्रीय सहयोग: हिंद महासागर की समुद्री सुरक्षा के लिए स्वदेशी ओशन ऑब्जर्वेशन मॉडल का विस्तार
मुख्य शब्द: समुदाय आधारित मॉनिटरिंग · रियल-टाइम डेटा का प्रसार · तटीय प्रबंधन · अर्ली वार्निंग सिस्टम · स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट
चर्चा में क्यों: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'आकाश' मिसाइल सिस्टम पर आधारित एक पुस्तक जारी की। उन्होंने इसे भारत की पहली स्वदेशी सुपरसोनिक मल्टी-टारगेट सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम (Surface-to-air missile system) के रूप में इसकी सफलता पर प्रकाश डाला।
पुस्तक, 'द अनप्रिसिडेंटेड सक्सेस स्टोरी ऑफ द फर्स्ट इंडिजिनस सुपरसोनिक मल्टीटारगेट सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम - आकाश' (The Unprecedented success story of the first indigenous supersonic multitarget surface to air missile system - Akash) के लेखक जी. चंद्रमौली हैं। DRDO में आकाश कार्यक्रम के पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर चंद्रमौली को विज्ञान और इंजीनियरिंग श्रेणी में पद्म श्री पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकआकाश: भारत की पहली स्वदेशी सुपरसोनिक मल्टी-टारगेट सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम।
संस्थाDRDO: डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (Defence Research and Development Organisation) का मुख्यालय नई दिल्ली में है।
पदजी. चंद्रमौली: आकाश प्रोग्राम के पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर और पद्म श्री अवार्ड 2026 के प्राप्तकर्ता।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्वदेशी मिसाइल तकनीक के महत्व और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: महत्वपूर्ण सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना
R&D इकोसिस्टम: REC वारंगल जैसे शैक्षणिक संस्थानों और DRDO के तकनीकी आउटपुट के बीच संबंध को मजबूत करना
मुख्य शब्द: स्वदेशी तकनीक · रणनीतिक स्वायत्तता · डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग · R&D इकोसिस्टम · आत्मनिर्भर भारत
चर्चा में क्यों: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के शोधकर्ताओं ने खोज की है कि मंगल की मिट्टी में मौजूद एक जहरीला केमिकल, परक्लोरेट (perchlorate), तनावपूर्ण बैक्टीरिया द्वारा मजबूत ईंटों के निर्माण को बढ़ावा देता है।
PLOS One में प्रकाशित इस अध्ययन में बेंगलुरु की मिट्टी से प्राप्त एक स्थानीय बैक्टीरियल स्ट्रेन (Bacterial strain) का उपयोग सिंथेटिक मंगल या चंद्र मिट्टी से 'स्पेस ब्रिक्स' बनाने के लिए किया गया। ये बैक्टीरिया जब परक्लोरेट (Perchlorate) के संपर्क में आते हैं, तो अधिक प्रोटीन और कैल्शियम क्लोराइड जैसे अवक्षेप (Precipitates) पैदा करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकपरक्लोरेट (Perchlorate): मंगल की मिट्टी में पाया जाने वाला एक जहरीला केमिकल जो बैक्टीरिया की ग्रोथ को धीमा करता है लेकिन ईंटों की मजबूती को बढ़ाता है।
संस्थाइंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc): इसने बैक्टीरियल ब्रिक फॉर्मेशन (bacterial brick formation) पर रिसर्च किया।
तथ्यइस अध्ययन में बेंगलुरु की मिट्टी में खोजे गए बैक्टीरिया के एक नेटिव स्ट्रेन (native strain) का उपयोग किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष उपनिवेशीकरण के लिए सतत बुनियादी ढांचे के विकास में जैव-अभियांत्रिकी (bio-engineering) और स्वदेशी सूक्ष्मजीवी उपभेदों (indigenous microbial strains) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन: इन-सिटु रिसोर्स यूटिलाइजेशन (ISRU) के लिए मंगल की जहरीली मिट्टी के घटकों को स्ट्रक्चरल कैटालिस्ट के रूप में इस्तेमाल करना
बायोलॉजिकल रेज़िलिएंस: चरम वातावरण में मटेरियल की मजबूती बढ़ाने के लिए बैक्टीरियल स्ट्रेस रिस्पॉन्स का इस्तेमाल
चर्चा में क्यों: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में पुष्ट मामले सामने आने के बावजूद, भारत से बाहर निपाह वायरस (Nipah virus) के फैलने का जोखिम कम है।
WHO ने पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो पुष्ट मामले दर्ज किए हैं। इस संगठन ने निपाह को एक प्राथमिकता वाले रोगजनक (priority pathogen) के रूप में वर्गीकृत किया है, क्योंकि इसकी मृत्यु दर अधिक है और इसके लिए अभी तक कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या उपचार उपलब्ध नहीं है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाWHO: विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization)।
तथ्यपश्चिम बंगाल में निपाह वायरस (Nipah virus) के दो पुष्ट मामले सामने आए हैं।
विज्ञान-तकनीकनिपा वायरस (Nipah virus): उच्च मृत्यु दर और लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन/इलाज की कमी के कारण इसे एक प्रायोरिटी पैथोजन (priority pathogen) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में निपाह वायरस जैसी ज़ूनोटिक बीमारियों के प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों और ऐसी महामारियों को नियंत्रित करने में अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
पैथोजन मैनेजमेंट: हाई-फैटालिटी प्रायोरिटी पैथोजन्स के लिए लाइसेंस वाली वैक्सीन और विशिष्ट इलाज की कमी
ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी: व्यापार और यात्रा की गतिशीलता और तेज़ एपिडेमियोलॉजिकल सर्विलांस की ज़रूरत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: ज़ूनोटिक बीमारियाँ · सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी · पैथोजन प्राथमिकता · महामारी संबंधी जोखिम · ग्लोबल हेल्थ गवर्नेंस
चर्चा में क्यों: UIDAI ने व्यक्तिगत डेटा की अधिक जानकारी साझा किए बिना आयु सत्यापन (Age Verification) की सुविधा प्रदान करने के लिए एक नया आधार ऐप लॉन्च किया है, जो डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (Digital Personal Data Protection Act) के अनुरूप है।
UIDAI ऐप होटलों और ऑनलाइन फर्मों जैसी संस्थाओं को डिजिटल रूप से आयु सत्यापित करने की सुविधा प्रदान करता है। यह उपयोगकर्ताओं को अपना पता और मोबाइल नंबर अपडेट करने, संपर्क जानकारी साझा करने और पांच परिवार के सदस्यों तक के प्रोफाइल प्रबंधित करने की अनुमति देता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाUIDAI: आधार नंबर जारी करने और नए वेरिफिकेशन ऐप को मैनेज करने के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्ययह ऐप परिवार के सदस्यों के लिए अधिकतम पांच प्रोफाइल जोड़ने की सुविधा देता है।
विज्ञान-तकनीकयह ऐप निजी संस्थाओं द्वारा आधार की फिजिकल पेपर कॉपी के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में डिजिटल पहचान सत्यापन के साथ डेटा संरक्षण कानूनों के एकीकरण से गोपनीयता को सुदृढ़ करने और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
प्राइवेसी-यूटिलिटी ट्रेड-ऑफ: प्राइवेट संस्थाओं के लिए आसान एज वेरिफिकेशन और DPDP एक्ट के 'डेटा मिनिमाइजेशन' सिद्धांतों के बीच संतुलन
डिजिटल इन्क्लूजन: उन ग्रामीण आबादी के लिए एक्सेसिबिलिटी सुनिश्चित करना जिनके पास स्मार्टफोन या रियल-टाइम वेरिफिकेशन के लिए हाई-स्पीड इंटरनेट की कमी हो सकती है
मुख्य शब्द: डेटा मिनिमाइजेशन · डिजिटल पहचान · प्राइवेसी बाय डिज़ाइन · ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · डिजिटल गवर्नेंस
चर्चा में क्यों: दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता सलमान खान को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस चीन स्थित एक AI वॉयस जनरेशन प्लेटफॉर्म द्वारा उनके पर्सनैलिटी राइट्स (personality rights) की सुरक्षा के लिए लगाए गए अंतरिम स्थगन आदेश (interim injunction) को हटाने के आवेदन के संबंध में दिया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा है जिसमें चीन स्थित एक AI वॉयस जनरेशन प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी कंपनियों सहित 28 प्रतिवादी शामिल हैं। कोर्ट AI सिस्टम द्वारा किसी सार्वजनिक हस्ती की पहचान के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ व्यक्तित्व अधिकारों (personality rights) के संरक्षण की जांच कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थादिल्ली हाई कोर्ट: पर्सनालिटी राइट्स (personality rights) के संबंध में नोटिस जारी करने वाली न्यायिक संस्था।
विज्ञान-तकनीकAI voice generation: चीनी प्लेटफॉर्म द्वारा सेलिब्रिटी की पहचान को कॉपी करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी।
तथ्य28 प्रतिवादी (defendants): मूल सूट (suit) में नामित संस्थाओं की संख्या, जिसमें टेक कंपनियां और इंटरमीडियरीज (intermediaries) शामिल हैं।
स्थानचीन: AI वॉयस जनरेशन प्लेटफॉर्म की उत्पत्ति, जो इंजेक्शन (injunction) को हटाने की मांग कर रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सार्वजनिक हस्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों के संरक्षण में एआई-जनित डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग द्वारा उत्पन्न कानूनी और नैतिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी वैक्यूम: अनधिकृत AI-आधारित पहचान चोरी से निपटने के लिए विशिष्ट कानूनी ढांचे की कमी
आर्थिक उल्लंघन: तकनीकी नवाचार और व्यक्तिगत बौद्धिक संपदा और पहचान मूल्य के संरक्षण के बीच टकराव
क्षेत्राधिकार की बाधाएं: विदेशी आधारित AI प्लेटफॉर्म और इंटरमीडियरीज के खिलाफ रोक लागू करने में चुनौतियां
मुख्य शब्द: पर्सनैलिटी राइट्स · डीपफेक्स · बौद्धिक संपदा · AI गवर्नेंस · न्यायिक रोक
चर्चा में क्यों: आयुष मंत्रालय और ज़ेप्टो लिमिटेड (Zepto Limited) ने 28 जनवरी, 2026 को आयुष दवाओं और वेलनेस उत्पादों तक ऑनलाइन पहुंच को सुगम बनाने और गुणवत्ता अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक MoU (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए।
आयुष मंत्रालय ने पारंपरिक स्वास्थ्य उत्पादों के लिए डिजिटल खोज और लास्ट-माइल एक्सेस (last-mile access) में सुधार के लिए जेप्टो लिमिटेड (Zepto Limited) के साथ साझेदारी की है। यह पहल आयुष क्षेत्र में गुणवत्ता आश्वासन और उपभोक्ता विश्वास पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यZepto Limited: एक quick-commerce प्लेटफॉर्म जो प्रोडक्ट वितरण के लिए Ministry of Ayush के साथ पार्टनरशिप कर रहा है।
पदप्रतापराव जाधव: आयुष (Ayush) के केंद्रीय मंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों तक पहुंच के लोकतंत्रीकरण में त्वरित-वाणिज्य (क्विक-कॉमर्स) और डिजिटल प्लेटफार्मों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए, साथ ही गुणवत्ता के कड़े मानकों को सुनिश्चित करने से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: हर्बल दवाओं के लिए स्टैंडर्ड क्वालिटी एश्योरेंस के साथ तेज़ ई-कॉमर्स डिलीवरी को संतुलित करना
डिजिटल इनक्लूजन: ऑथेंटिक आयुष वेलनेस प्रोडक्ट्स तक पहुँचने के लिए ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करना
स्टार्टअप इकोसिस्टम: पारंपरिक दवाओं की लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए प्राइवेट सेक्टर लॉजिस्टिक्स का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: डिजिटल डिस्कवरी · लास्ट-माइल एक्सेस · क्वालिटी कंप्लायंस · पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा · क्विक-कॉमर्स
चर्चा में क्यों: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने दवा विकास को सुव्यवस्थित करने और फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए नियामक बोझ (Regulatory Burdens) को कम करने के लिए नए ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स (NDCT) रूल्स, 2019 में संशोधन किया है।
ये संशोधन लघु स्तर पर दवाओं के उत्पादन के लिए टेस्ट लाइसेंस की आवश्यकता को पूर्व-सूचना तंत्र (prior-intimation mechanism) से बदल देते हैं। ये नियम कुछ कम जोखिम वाले बायोअवेलेबिलिटी/बायोइक्विवेलेंस (Bioavailability/Bioequivalence) अध्ययनों के लिए पूर्व अनुमति को भी समाप्त करते हैं। इन्हें नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और SUGAM पोर्टल के माध्यम से लागू किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाSUGAM: फार्मास्युटिकल सेक्टर में विभिन्न रेगुलेटरी अप्रूवल्स (regulatory approvals) के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल।
तथ्यये संशोधन छोटे पैमाने पर ड्रग उत्पादन के लिए टेस्ट लाइसेंस की आवश्यकताओं को पूर्व-सूचना तंत्र (prior-intimation mechanism) से बदल देते हैं।
तथ्यसंशोधित नियमों के तहत, लो-रिस्क बायोअवेलेबिलिटी (Bioavailability) / बायोइक्विवेलेंस (Bioequivalence) स्टडीज के लिए अब पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
संस्थानेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (National Single Window System - NSWS): वह प्लेटफॉर्म जिसके माध्यम से इन नियमों में बदलाव को लागू किया जाएगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नैदानिक परीक्षणों (clinical trials) और औषधि विकास के लिए विनियामक ढाँचों को सुव्यवस्थित करना किस प्रकार भारत की वैश्विक दवा निर्माण केंद्र के रूप में स्थिति को सुदृढ़ कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी एफिशिएंसी: ड्रग डेवलपमेंट लाइफ साइकिल को तेज़ करने के लिए प्रोसेसिंग टाइमलाइन कम करना
ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस: कम जोखिम वाले अध्ययनों के लिए पूर्व अनुमति के बजाय पूर्व-सूचना की ओर बदलाव
डिजिटल इंटीग्रेशन: फार्मास्युटिकल R&D में नौकरशाही की बाधाओं को कम करने के लिए NSWS और SUGAM का इस्तेमाल
चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा में असुरक्षित पीने के पानी से जुड़ी मौतों की खबरों के बाद, वहां पानी के दूषित होने की जांच के लिए जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक कमीशन का गठन किया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रदूषण के कारणों और मृत्यु दर की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है। इस आयोग को प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षित पेयजल के लिए तत्काल और दीर्घकालिक समाधान सुझाने का कार्य सौंपा गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानभगीरथपुरा, मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित एक इलाका है।
पदजस्टिस सुशील कुमार गुप्ता कोर्ट द्वारा नियुक्त कमीशन के प्रमुख हैं।
तथ्यकमिश्नन विशेष रूप से दूषित पानी से जुड़ी मौतों की संख्या की जांच करेगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय शहरों में जल प्रदूषण जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों के लिए उत्तरदायी शहरी जल प्रबंधन में निहित संस्थागत और विनियामक विफलताओं का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: शहरी क्लस्टर्स में स्थानीय जल स्रोतों और इंडस्ट्रियल रनऑफ की अपर्याप्त निगरानी
सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर: दूषित क्षेत्रों के लिए रियल-टाइम वॉटर क्वालिटी टेस्टिंग और रैपिड रिस्पॉन्स मैकेनिज्म की कमी
मुख्य शब्द: सार्वजनिक स्वास्थ्य · अर्बन गवर्नेंस · पानी की गुणवत्ता · न्यायिक सक्रियता · पर्यावरण नियमन
चर्चा में क्यों: नगालैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नगालैंड के उच्च-ऊंचाई वाले सामुदायिक-संरक्षित वनों में एक नई पौधों की प्रजाति, होया नगाएन्सिस (Hoya nagaensis) की खोज की है।
नई प्रजाति, होया नगाएन्सिस (Hoya nagaensis), की पहचान नगालैंड के उच्च-ऊंचाई वाले समशीतोष्ण वनों में की गई। यह खोज स्थानीय समुदायों द्वारा प्रबंधित दूरदराज के क्षेत्रों में किए गए वनस्पति सर्वेक्षणों के दौरान हुई।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणहोया नगाएन्सिस (Hoya nagaensis): नगालैंड में खोजी गई एक नई पौधों की प्रजाति।
स्थाननगालैंड: उच्च-ऊंचाई वाले टेम्परेट फॉरेस्ट (temperate forests) का स्थान जहां यह खोज हुई।
संस्थानगालैंड यूनिवर्सिटी: वह संस्थान जिसके शोधकर्ताओं ने नई प्रजाति की पहचान की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जैव विविधता संरक्षण में समुदाय-प्रबंधित वनों की भूमिका और पूर्वी हिमालय के अनछुए पारिस्थितिक क्षेत्रों के दस्तावेजीकरण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
संरक्षण तालमेल: पारंपरिक सामुदायिक प्रबंधन और वैज्ञानिक वनस्पति दस्तावेज़ीकरण का एकीकरण
पारिस्थितिक महत्व: कम खोजे गए टेम्परेट फॉरेस्ट बायोडायवर्सिटी के लिए एक महत्वपूर्ण रिज़र्व के रूप में पूर्वी हिमालय
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · समुदाय-संरक्षित वन · स्थानिक प्रजातियां · पूर्वी हिमालय · पारिस्थितिक दस्तावेज़ीकरण
चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डिज़ाइन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (Design-Linked Incentive Scheme) के दूसरे चरण की घोषणा की है। इसका लक्ष्य 2032 तक 3-नैनोमीटर चिप निर्माण और 2029 तक 70-75% घरेलू तकनीकी डिज़ाइन हासिल करना है।
सरकार का लक्ष्य 'डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम' (Design-Linked Incentive Scheme) के दूसरे चरण के तहत 2032 तक 3-नैनोमीटर चिप्स का निर्माण करना है। इस पहल का लक्ष्य छह चिप श्रेणियों: कंप्यूट (compute), RF, नेटवर्किंग, पावर, सेंसर और मेमोरी पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीक3-नैनोमीटर (nanometer) चिप्स: 2032 तक भारत के लिए लक्ष्य निर्धारित विनिर्माण (manufacturing) लक्ष्य।
योजनाDesign-Linked Incentive Scheme: सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम (ecosystem) विकसित करने के लिए सरकारी पहल।
तथ्यलक्ष्य: 2029 तक 70-75% टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स को घरेलू स्तर पर डिजाइन और manufacture किया जाना है।
तथ्यछह प्रमुख चिप कैटेगरी: कंप्यूट (compute), RF, नेटवर्किंग (networking), पावर (power), सेंसर (sensor) और मेमोरी (memory)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता और औद्योगिक विकास के संदर्भ में एक घरेलू सेमीकंडक्टर डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंसेंटिव स्ट्रक्चर: विशिष्ट चिप कैटेगरी में प्राइवेट सेक्टर के R&D निवेश और फिस्कल सब्सिडी के बीच संतुलन
चर्चा में क्यों: भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए NLC India Limited (NLCIL) ने राजस्थान के बर्सिंगर में 300 MW का सोलर पावर प्रोजेक्ट शुरू किया है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अधीन एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (CPSU) NLCIL ने 300 MW की बरिसिंगर सोलर परियोजना शुरू की है। इस परियोजना से NLCIL की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 1,766 MW हो गई है, जिसकी पूरी बिजली राजस्थान राज्य को आपूर्ति की जाएगी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNLCIL: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy - MNRE) के अधीन एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (Central Public Sector Undertaking - CPSU) है।
तथ्यबर्सिंगर सोलर प्रोजेक्ट की क्षमता: 300 MW।
तथ्यकमीशनिंग के बाद NLCIL की कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी (Installed Capacity): 1,766 MW।
स्थानबर्सिंगर सोलर प्रोजेक्ट (Barsingar Solar project) का स्थान: राजस्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के महत्वाकांयी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: शुष्क क्षेत्रों में बड़े पैमाने के सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए ग्रिड इंटीग्रेशन की चुनौतियां
राजकोषीय ट्रेड-ऑफ: रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर और पब्लिक डेट मैनेजमेंट के बीच संतुलन
राज्य-केंद्र तालमेल: CPSU बिजली उत्पादन और राज्य स्तर की वितरण जरूरतों के बीच समन्वय
मुख्य शब्द: रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांज़िशन · CPSU की भूमिका · ऊर्जा सुरक्षा · डीकार्बोनाइजेशन · ग्रिड इंटीग्रेशन
चर्चा में क्यों: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभंशु शुक्ला को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय के रूप में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया।
ग्रुप कैप्टन शुभंशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के तहत 18 दिवसीय मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया। यह मिशन ISRO, NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (European Space Agency) के बीच एक साझा प्रयास था।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पदग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय।
तथ्यAxiom-4 मिशन की अवधि: 18 दिन।
संस्थाISRO, NASA और European Space Agency ने Axiom-4 मिशन पर सहयोग किया।
तथ्यशुभंशु शुक्ला के पास 2,000 से अधिक घंटों का फ्लाइट एक्सपीरियंस (flight experience) है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अक्सिओम-4 (Axiom-4) जैसे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं और तकनीकी संप्रभुता को बढ़ाने में किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं, चर्चा कीजिए।
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: सहयोगी स्पेस मिशन और स्वदेशी तकनीकी विकास के बीच संतुलन
मानव अंतरिक्ष उड़ान: लंबी अवधि के ऑर्बिटल मिशन और चंद्र अन्वेषण के लिए भारत की क्षमताओं को बढ़ाना
मुख्य शब्द: अंतरिक्ष अन्वेषण · अंतरराष्ट्रीय सहयोग · मानव अंतरिक्ष उड़ान · तकनीकी संप्रभुता · एक्सियम-4 मिशन
चर्चा में क्यों: भारत की लिक्विड प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी (Liquid Propulsion Technology) के क्षेत्र में अग्रणी डॉ. ए.ई. मुथुनायगम को विज्ञान और इंजीनियरिंग में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
डॉ. ए.ई. मुथुनायगम ISRO के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (Liquid Propulsion Systems Centre) के पूर्व निदेशक हैं। उन्होंने अपना करियर 1966 में विक्रम साराभाई के नेतृत्व में अंतरिक्ष कार्यक्रम में शुरू किया था। उन्होंने स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (SSTC) में प्रोपल्शन और मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिवीजनों के प्रमुख के रूप में भी अपनी सेवाएँ दी हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पदडॉ. ए.ई. मुथुनायगम: ISRO के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (Liquid Propulsion Systems Centre) के पूर्व डायरेक्टर।
विज्ञान-तकनीकलिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के तहत एक प्रमुख केंद्र।
तथ्यडॉ. मुथुनायगम 1966 में स्पेस प्रोग्राम (space program) में शामिल हुए।
विज्ञान-तकनीकस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (SSTC): वह डिवीज़न जिसका नेतृत्व मुथुनायगम ने प्रोपल्शन और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए किया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने में स्वदेशी प्रणोदन तकनीक के महत्व पर चर्चा कीजिए।
तकनीकी संप्रभुता: हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल्स के लिए विदेशी प्रोपल्शन सिस्टम पर निर्भरता कम करना
इंस्टीट्यूशनल मेमोरी: हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग सेक्टर में अनुभवी विशेषज्ञता को बनाए रखने का महत्व
मुख्य शब्द: स्वदेशी तकनीक · अंतरिक्ष अन्वेषण · प्रोपल्शन सिस्टम · वैज्ञानिक मान्यता
चर्चा में क्यों: इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) ने एक बजट विश लिस्ट (budget wish list) सौंपी है, जिसमें अंतरिक्ष क्षेत्र को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (critical infrastructure) के रूप में मान्यता देने की सिफारिश की गई है और निजी संस्थाओं से 50% सरकारी खरीद (government procurement) का प्रस्ताव दिया गया है।
इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) ने अंतरिक्ष आधारित सेवाओं, हार्डवेयर और मिशनों के लिए भारतीय निजी संस्थाओं से 50% सरकारी खरीद (government procurement) का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए टैक्स हॉलिडे (tax holidays), R&D टैक्स क्रेडिट और अंतरिक्ष संपत्तियों पर त्वरित मूल्यह्रास (accelerated depreciation) शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यISpA ने स्पेस-आधारित सेवाओं और हार्डवेयर के लिए भारतीय प्राइवेट संस्थाओं से 50% सरकारी प्रोक्योरमेंट (procurement) मैंडेट का प्रस्ताव दिया है।
तथ्यISpA ने सैटेलाइट इमेजरी और जियोस्पेशियल डेटा (geospatial data) के लिए केवल एम्पैनल्ड (empanelled) भारतीय कंपनियों का उपयोग करने की सिफारिश की है।
तथ्यप्रस्तावित राजकोषीय उपायों में R&D टैक्स क्रेडिट, कैपिटल इन्वेस्टमेंट टैक्स क्रेडिट और स्पेस एसेट्स पर एक्सीलरेटेड डेप्रिसिएशन (Accelerated Depreciation) शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष क्षेत्र को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में नामित करने के महत्व और भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
राजकोषीय प्रोत्साहन: PLI योजनाओं को लंबी अवधि के R&D सस्टेनेबिलिटी के साथ संतुलित करना
मार्केट प्रोटेक्शन: जियोस्पेशियल डेटा में ग्लोबल कॉम्पिटिशन के साथ एम्पैनल्ड भारतीय कंपनियों के इस्तेमाल का संतुलन
इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस: स्पेस को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर घोषित करने के कानूनी और सुरक्षा निहितार्थ
मुख्य शब्द: महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव · स्पेस इकोनॉमी · राजकोषीय प्रोत्साहन
चर्चा में क्यों: PSG इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में गर्भनाल के रक्त (cord blood) में BPA का उच्च स्तर पाया गया है। इसके बाद, तमिलनाडु सरकार ने IIT-मैड्रास से मानव स्वास्थ्य पर माइक्रोप्लास्टिक के प्रभावों का अध्ययन करने का अनुरोध किया है।
PSG इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च ने गर्भनाल रक्त (cord blood) के नमूनों में बिस्फेनॉल ए (BPA) की मात्रा पाई है, जो अनुशंसित दैनिक सेवन की सीमा से अधिक है। तमिलनाडु सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राज्य स्वास्थ्य विभाग को नीतिगत निर्णय लेने से पहले इस संबंध में अध्ययन करने का निर्देश दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकBPA: एक केमिकल कंपाउंड जिसका उपयोग आमतौर पर प्लास्टिक के उत्पादन में किया जाता है।
संस्थाIIT-M: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी - मद्रास।
तथ्यPSG इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च ने कॉर्ड ब्लड सैंपल्स में BPA के स्तर को रिकमेंडेड डेली इनटेक से अधिक पाया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: खाद्य श्रृंखला में माइक्रोप्लास्टिक संदूषण के सार्वजनिक स्वास्थ्य निहितार्थों पर चर्चा कीजिए और इन जोखिमों को कम करने के लिए एक बहु-क्षेत्रीय विनियामक ढांचे का सुझाव दीजिए।
रेगुलेटरी गैप: खाद्य उत्पादों में माइक्रोप्लास्टिक्स के लिए मानक राष्ट्रीय सीमा की कमी
स्वास्थ्य जोखिम: मानव ऊतकों में BPA जैसे एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स का बायोएक्युमुलेशन
पॉलिसी कोऑर्डिनेशन: स्वास्थ्य, पर्यावरण और उद्योग मंत्रालयों के बीच इंटर-मिनिस्ट्रियल सिनर्जी की ज़रूरत
मुख्य शब्द: बायोएक्युमुलेशन · एंडोक्राइन डिसरप्टर्स · सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति · माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण · एहतियाती सिद्धांत
चर्चा में क्यों: केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने माइक्रोबायोम रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए प्रोबायोटिक बैक्टीरिया, 'बैसिलस सबटाइलिस' (Bacillus subtilis) को राज्य का आधिकारिक 'स्टेट माइक्रोब' घोषित किया है।
यह घोषणा केरल में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन माइक्रोबायोम' (CoEM) के एक समारोह के दौरान की गई। CoEM की स्थापना स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में सूक्ष्मजीवों (microorganisms) के अध्ययन के लिए की गई थी और इसका उद्देश्य शोध को व्यावहारिक सामाजिक अनुप्रयोगों में बदलना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकबैसिलस सबटिलिस (Bacillus subtilis): एक प्रकार का प्रोबायोटिक बैक्टीरिया जिसे केरल का स्टेट माइक्रोब (State Microbe) घोषित किया गया है।
संस्थाCoEM: केरल सरकार द्वारा स्थापित माइक्रोबायोम (Microbiome) का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centre of Excellence)।
तथ्यCoEM ने केरल स्टार्टअप मिशन और अमृता स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के साथ MoUs के जरिए सहयोग किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में कृषि उत्पादकता और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बढ़ाने में माइक्रोबायोम अनुसंधान और प्रोबायोटिक बैक्टीरिया की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
रिसर्च ट्रांसलेशन: लैबोरेटरी माइक्रोबायोम स्टडीज और स्केलेबल एग्रीकल्चरल एप्लीकेशन्स के बीच की दूरी को कम करना
आर्थिक एकीकरण: बायोटेक्नोलॉजी और प्रोबायोटिक उत्पादों के व्यावसायीकरण के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: माइक्रोबायोम · प्रोबायोटिक्स · बायोटेक्नोलॉजी · ट्रांसलेशनल रिसर्च · कृषि नवाचार
चर्चा में क्यों: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने घोषणा की है कि वह विंग्स इंडिया 2026 में सुपर जेट 100 रीजनल एयरक्राफ्ट और नागरिक उड्डयन से जुड़े अन्य एसेट्स (assets) प्रदर्शित करेगा।
HAL विंग्स इंडिया 2026 में H-228 कम्यूटर विमान, ध्रुव न्यू जनरेशन (NG) हेलीकॉप्टर और सुपर जेट 100 रीजनल विमान प्रदर्शित करेगा। इस प्रदर्शनी में SJ 100 औरस बिजनेस जेट का स्टैटिक डिस्प्ले और ग्राहकों के लिए डेमो फ्लाइट्स शामिल होंगी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पदहिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) विमानों के पोर्टफोलियो को प्रदर्शित करने वाली प्राथमिक इकाई है।
विज्ञान-तकनीकसुपर जेट 100 (SJ 100) एक रीजनल एयरक्राफ्ट है और SJ 100 औरस (Aurus) एक बिजनेस जेट है।
विज्ञान-तकनीकDhruv New Generation (NG) HAL के सिविल एविएशन पोर्टफोलियो में एक हेलीकॉप्टर मॉडल है।
तथ्ययह विमान Wings India 2026 में Hall A, स्टॉल नंबर 27 पर प्रदर्शित किया जाएगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नागरिक उड्डयन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने में स्वदेशी विमान निर्माण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
सप्लाई चेन इंटीग्रेशन: क्षेत्रीय विमानों के पुर्जों के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में जॉब क्रिएशन और टेक्नोलॉजी स्पिलओवर
मुख्य शब्द: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · आत्मनिर्भर भारत · एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग · स्वदेशी तकनीक · सिविल एविएशन
चर्चा में क्यों: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने सतत उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए केरल में युवाओं को वॉटर हयासिंथ (water hyacinth) उद्यमिता में प्रशिक्षित करने हेतु ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम (GSDP) को मंजूरी दी है।
यह कोर्स KSCSTE - मालाबार बॉटैनिकल गार्डन एंड इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट साइंसेज द्वारा पेश किया गया है। इसे EIACP केंद्र के सहयोग से प्रोफेसर जी. नागेंद्र प्रभु के नेतृत्व वाली एक बहुविषयक (multidisciplinary) टीम द्वारा विकसित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाGSDP: Green Skill Development Programme को MoEFCC द्वारा मंजूरी दी गई।
स्थानमालाबार बॉटैनिकल गार्डन एंड इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट साइंसेज केरल में स्थित है।
तथ्ययह कोर्स 'Water Hyacinth (Value Added Products)' उद्यमिता पर केंद्रित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उद्यमिता के माध्यम से आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन को बढ़ावा देना पारिस्थितिक बहाली और ग्रामीण आजीविका सृजन, दोनों में किस प्रकार योगदान दे सकता है? चर्चा कीजिए।
इकोनॉमिक सर्कुलेरिटी: कचरे को कम करने के लिए इनवेसिव बायोमास को वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स में बदलना
आजीविका विविधीकरण: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में युवाओं के लिए ग्रीन जॉब्स बनाना
इकोलॉजिकल मैनेजमेंट: जलीय जैव विविधता सुधारने के लिए जलकुंभी का घनत्व कम करना
चर्चा में क्यों: अर्कम वेंचर्स (Arkam Ventures) ने 'इंडिया स्पेसटेक-2026' रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अनुमान लगाया गया है कि निजी स्टार्टअप्स के नवाचार और ISRO के इकोसिस्टम सपोर्ट के कारण भारत की स्पेस इकोनॉमी 2030 तक 40 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
यह रिपोर्ट अनुमान लगाती है कि भारत की स्पेस इकोनॉमी (Space Economy) वैश्विक दर से दोगुनी गति से बढ़ेगी और 2030 तक 40 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। इसमें 300 से अधिक स्पेस-टेक स्टार्टअप्स (Space-tech startups) की पहचान की गई है और अगले कुछ वर्षों में 3-5 बिलियन डॉलर के प्राइवेट कैपिटल फ्लो (Private capital flows) की उम्मीद जताई गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यभारत की स्पेस इकोनॉमी (Space Economy) का अनुमान: 2030 तक $40 बिलियन।
तथ्यउभरते हुए space-tech स्टार्टअप्स की संख्या: 300 से अधिक।
तथ्यअगले कुछ वर्षों में अपेक्षित प्राइवेट कैपिटल फ्लो (Private capital flows): $3-$5 बिलियन।
संस्थाISRO: प्राइवेट इनोवेशन के लिए इकोसिस्टम को बढ़ावा देने में भूमिका।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण और निजी स्टार्टअप्स के उद्भव से भारत किस प्रकार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और विनिर्माण के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी के रूप में उभर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
इकोसिस्टम सिनर्जी: स्टेट-लेड से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल में बदलाव में ISRO की भूमिका
मैन्युफैक्चरिंग एज: व्हीकल लॉन्च और अर्थ ऑब्जर्वेशन में ग्लोबल मार्केट शेयर पाने के लिए कॉस्ट-इफेक्टिव इंजीनियरिंग का इस्तेमाल
कैपिटल इनफ्लक्स: हाई-रिस्क स्पेस-टेक R&D पर प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल का असर
मुख्य शब्द: स्पेस-टेक इकोनॉमी · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · किफायती इंजीनियरिंग · स्टार्टअप इकोसिस्टम · पृथ्वी अवलोकन
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्व वाले स्थलों पर टिकाऊ बुनियादी ढांचे (Sustainable Infrastructure) के लिए मास्टर प्लान तैयार करने हेतु एक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (Special Area Development Authority) स्थापित करने के लिए एक विधेयक पेश किया है।
प्रस्तावित विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (Special Area Development Authority) महाबलिपुरम और कन्याकुमारी जैसे क्षेत्रों की देखरेख करेगा। इसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिकीकरण और पर्यटन विस्तार के कारण नागरिक बुनियादी ढांचे (Civic Infrastructure) पर पड़ने वाले दबाव को प्रबंधित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानतमिलनाडु बिल में महाबलीपुरम और कन्याकुमारी को ऐतिहासिक और पारिस्थितिक (ecological) महत्व वाले स्थलों के रूप में पहचाना गया है।
तथ्यस्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (Special Area Development Authority) को सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्पेशल एरिया मास्टर प्लान (Special Area Master Plan) तैयार करने का काम सौंपा गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में तीव्र पर्यटन विस्तार और विरासत एवं पारिस्थितिक अखंडता के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में विशिष्ट शहरी नियोजन ढाँचों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव: पर्यटन से होने वाली तेज़ बढ़ोतरी मौजूदा नागरिक सेवाओं और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की क्षमता से आगे निकल रही है
संरक्षण और विकास का तालमेल: आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों और पुरातात्विक व पारिस्थितिक स्थलों की अखंडता के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर · अर्बन प्लानिंग · विरासत का संरक्षण · मास्टर प्लान · सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर
चर्चा में क्यों: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने AI और साइबर रेजिलिएंस (cyber resilience) में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए चौथी औद्योगिक क्रांति के पांच नए केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है, जिनमें से एक केंद्र भारत के आंध्र प्रदेश में बनाया जाएगा।
WEF, आंध्र प्रदेश सरकार के साथ मिलकर 'सेंटर फॉर एनर्जी एंड साइबर रेजिलिएंस' (Centre for Energy and Cyber Resilience) स्थापित करने के लिए साझेदारी कर रहा है। इन केंद्रों का उद्देश्य व्यावहारिक नीतिगत ढांचे (policy frameworks) और पायलट प्रोजेक्ट्स विकसित करना तथा फ्रंटियर टेक्नोलॉजी (frontier technologies) से संबंधित क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थावर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum - WEF): एक अंतरराष्ट्रीय संगठन जो फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन (Fourth Industrial Revolution) के लिए सेंटर्स स्थापित कर रहा है।
स्थानआंध्र प्रदेश: भारत का वह राज्य जहाँ WEF के पांच नए केंद्रों में से एक स्थित है।
विज्ञान-तकनीकफोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन (4IR) के मुख्य फोकस एरिया: AI इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन, साइबर रेजिलिएंस और फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज।
मेन्स के लिए
प्रश्न: चौथी औद्योगिक क्रांति (4IR) प्रौद्योगिकियों में अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी किस प्रकार भारत के ऊर्जा संक्रमण और साइबर सुरक्षा बुनियादी ढांचे को सुगम बना सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
पॉलिसी-इनोवेशन गैप: फ्रंटियर टेक्नोलॉजी पायलट को स्केलेबल नेशनल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में बदलने की ज़रूरत
साइबर-एनर्जी नेक्सस: ट्रांजिशन के दौरान महत्वपूर्ण ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर की सोफिस्टिकेटेड साइबर-हमलों के प्रति संवेदनशीलता को संबोधित करना
ग्लोबल-लोकल अलाइनमेंट: अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों और भारत की क्षेत्रीय औद्योगिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन
चर्चा में क्यों: द हिंदू (The Hindu) ने नेल्बो नुसिफेरा (Nelumbo nucifera) यानी पवित्र कमल के थर्मोजेनिक गुणों (thermogenic properties) के बारे में रिपोर्ट दी है, जो परागणकों (pollinators) को आकर्षित करने और आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) सुनिश्चित करने के लिए गर्मी पैदा करता है।
पवित्र कमल (*Nelumbo nucifera*) अपनी पंखुड़ियों के सिरों के गुलाबी होने से शुरू होने वाली थर्मोजेनेसिस (thermogenesis) प्रक्रिया के माध्यम से गर्मी पैदा करता है। इस प्रक्रिया में कैल्शियम आयनों की वृद्धि शामिल होती है, जो माइटोकॉन्ड्रिया को ATP उत्पादन के लिए संकेत देती है ताकि मधुमक्खियों और भृंगों (beetles) को आकर्षित किया जा सके।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणNelumbo nucifera: भारत का मूल निवासी एक पवित्र कमल का पौधा।
विज्ञान-तकनीकथर्मोजेनेसिस (Thermogenesis): एक जैविक प्रक्रिया जिसमें पौधे पोलिनेटर्स (pollinators) को आकर्षित करने के लिए गर्मी पैदा करते हैं।
विज्ञान-तकनीकमैकेनिज्म: कैल्शियम आयन (Calcium ions) कमल के फूलों में गर्मी पैदा करने के लिए mitochondria को ATP उत्पादन का सिग्नल देते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र में स्थानीय वनस्पतियों में होने वाली थर्मोजेनेसिस (thermogenesis) जैसी जैविक प्रक्रियाओं के जैव विविधता संरक्षण और आनुवंशिक विविधता के रखरखाव में योगदान की चर्चा कीजिए।
पॉलिनेशन डायनेमिक्स: क्रॉस-पॉलिनेशन और जेनेटिक वैरायटी सुनिश्चित करने के लिए हीट जनरेशन एक मैकेनिज्म के रूप में
इकोलॉजिकल निश: मधुमक्खियों और बीटल्स जैसे पॉलिनेटर्स के लिए रात में शेल्टर प्रदान करना
स्थानीय जैव विविधता में नेल्लोम्बो नुसिफेरा जैसी स्वदेशी प्रजातियों का महत्व
मुख्य शब्द: थर्मोजेनेसिस · आनुवंशिक विविधता · पॉलिनेशन डायनेमिक्स · माइटोकॉन्ड्रियल ATP · स्वदेशी वनस्पति
चर्चा में क्यों: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) के वैज्ञानिकों ने हानले ऑब्जर्वेटरी में G4-लेवल के भू-चुंबकीय तूफान (geomagnetic storm) के कारण तीव्र लाल औरोरा (auroral) गतिविधि को कैद किया।
यह अरोरा सूर्य के केंद्र के पास स्थित एक्टिव रीजन 14341 से निकले कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के कारण उत्पन्न हुआ था। NASA ने पुष्टि की है कि 18 जनवरी को उत्पन्न होने के लगभग 28 घंटे बाद यह CME पृथ्वी तक पहुँचा, जिसके परिणामस्वरूप S4 रेडिएशन लेवल दर्ज किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकहनले ऑब्जर्वेटरी (Hanle observatory) का उपयोग इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (Indian Institute of Astrophysics - IIA) द्वारा औरोरल एक्टिविटी (auroral activity) के अवलोकन के लिए किया जाता है।
तथ्यजियोमैग्नेटिक स्टॉर्म (geomagnetic storm) को S4 रेडिएशन लेवल के साथ G4-लेवल के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
विज्ञान-तकनीकएक्टिव रीजन्स (Active Regions) से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal Mass Ejections - CMEs) जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म्स (geomagnetic storms) के मुख्य कारक हैं।
तथ्यहनले में कैद किया गया अरोरा (Aurora) वर्तमान सोलर साइकिल (Solar Cycle) के दौरान छठा अवसर था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तीव्र भू-चुंबकीय तूफानों के उपग्रह संचार और विद्युत ग्रिडों पर पड़ने वाले प्रभावों तथा भारत के लिए अंतरिक्ष मौसम की निगरानी के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर की भेद्यता: हाई-वोल्टेज पावर ग्रिड और अंडरसी केबल्स को नुकसान पहुँचाने के लिए इंड्यूस्ड करंट की संभावना
कम्युनिकेशन में रुकावट: आयनोस्फेरिक गड़बड़ी से GPS की सटीकता और HF रेडियो प्रोपेगेशन प्रभावित
स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस: ऑर्बिटल एसेट्स के जोखिमों को कम करने के लिए मजबूत अर्ली वार्निंग सिस्टम की ज़रूरत
चर्चा में क्यों: कर्नाटक राज्य कैबिनेट ने AI के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए NASSCOM के साथ साझेदारी में 'सेंटर फॉर एप्लाइड AI फॉर टेक सॉल्यूशंस' (Centre for Applied AI for Tech Solutions) स्थापित करने के लिए ₹20 करोड़ की पहल को मंजूरी दी है।
यह केंद्र बेंगलुरु के HSR लेआउट स्थित KEONICS सुविधा में स्थित होगा। यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), औद्योगिक भागीदारों और राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित एक सहयोगात्मक पहल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यइस पहल के तहत Centre for Applied AI for Tech Solutions के लिए ₹20 करोड़ का निवेश शामिल है।
संस्थाNASSCOM इस सेंटर की स्थापना के लिए प्राथमिक इंडस्ट्री पार्टनर है।
स्थानइसका सेंटर बेंगलुरु के HSR लेआउट (Layout) स्थित KEONICS फैसिलिटी में होगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विशिष्ट एआई (AI) केंद्रों की स्थापना किस प्रकार डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे सकती है और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन को गति प्रदान कर सकती है, इस पर चर्चा कीजिए।
कमर्शियलाइजेशन गैप: लैब-स्केल AI रिसर्च और मार्केट-रेडी इंडस्ट्रियल एप्लिकेशंस के बीच की दूरी को कम करना
इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: डीप-टेक वैलिडेशन के लिए हाई-कंप्यूट लैबोरेटरीज और मान्यता प्राप्त टेस्टिंग फैसिलिटी की ज़रूरत
पब्लिक-प्राइवेट सिनर्जी: स्केलेबल टेक इकोसिस्टम बनाने के लिए स्टेट फंडिंग के साथ NASSCOM की इंडस्ट्री एक्सपर्टाइज का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन · डीप टेक · AI को अपनाना · तकनीक का व्यावसायीकरण · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
चर्चा में क्यों: DRDO ने घोषणा की है कि वह रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करने के लिए 77वें गणतंत्र दिवस परेड में लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (Long Range Anti-Ship Hypersonic Missile - LR-AShM) और उन्नत पनडुब्बी तकनीक का प्रदर्शन करेगा।
DRDO भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के लिए डिज़ाइन किए गए LR-AShM और कॉम्बैट सबमरीन टेक्नोलॉजी (combat submarine technologies) के लिए एक टैब्लू प्रदर्शित करेगा। प्रदर्शित किए जाने वाले अन्य सिस्टमों में अर्जुन मेन बैटल टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम शामिल होंगे।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
विज्ञान-तकनीकLR-AShM: भारतीय नौसेना के लिए डिज़ाइन किया गया लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (Long Range Anti-Ship Hypersonic Missile)।
विज्ञान-तकनीकब्रह्मोस (BrahMos): DRDO द्वारा प्रदर्शित एक क्रूज मिसाइल सिस्टम।
विज्ञान-तकनीकआकाश: DRDO द्वारा प्रदर्शित एक एयर डिफेंस सिस्टम।
विज्ञान-तकनीकअर्जुन: DRDO द्वारा प्रदर्शित एक मुख्य बैटल टैंक।
पदDRDO: डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक और पनडुब्बी विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: हाई-एंड मिसाइल और सबमरीन प्रोपल्शन सिस्टम के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
तकनीकी छलांग: हाइपरसोनिक फ्लाइट में आने वाली एयरोडायनमिक और थर्मल चुनौतियों पर जीत
मैरिटाइम सिक्योरिटी: हिंद महासागर में पीयर-कंपटीटर नौसेना खतरों के खिलाफ रैपिड रिस्पॉन्स क्षमताओं को बढ़ाना
मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी · रणनीतिक स्वायत्तता · रक्षा स्वदेशीकरण · समुद्री सुरक्षा
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के अधिकारियों को PM2.5 के स्तर के संबंध में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की सिफारिशों के आधार पर वायु प्रदूषण नियंत्रण की दीर्घकालिक योजनाएं प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
CAQM ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बुनियादी ढांचे के विस्तार की सिफारिश की है। CAQM द्वारा उद्धृत एक अध्ययन ने दिल्ली के PM2.5 स्तरों को नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के भीतर प्राथमिक उत्सर्जन और माध्यमिक पार्टिकुलेट फॉर्मेशन (secondary particulate formation) दोनों से जोड़ा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाCAQM: यह NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन (Air Quality Management) के लिए जिम्मेदार कमीशन है।
तथ्यPM2.5: दिल्ली-NCR में प्राइमरी एमिशन (primary emissions) और सेकेंडरी पार्टिकुलेट फॉर्मेशन (secondary particulate formation) दोनों से जुड़ा पार्टिकुलेट मैटर।
पदसुप्रीम कोर्ट: दिल्ली सरकार और अधिकारियों को लॉन्ग-टर्म पोल्यूशन कंट्रोल प्लान (long-term pollution control plans) जमा करने का निर्देश।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पार्टिकुलेट मैटर (PM) प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहन बुनियादी ढांचे की ओर संक्रमण में निहित संस्थागत और रसद संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: तेज़ी से बढ़ते EV अपनाने के लिए चार्जिंग स्टेशन और ग्रिड क्षमता की कमी
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर दिल्ली सरकार और NCR अधिकारियों के बीच तालमेल की चुनौतियां
तकनीकी जटिलता: सेकेंडरी पार्टिकुलेट फॉर्मेशन से निपटने के लिए मल्टी-सेक्टरल इंडस्ट्रियल एमिशन कंट्रोल की ज़रूरत
मुख्य शब्द: पार्टिकुलेट मैटर · सेकेंडरी पार्टिकुलेट फॉर्मेशन · इलेक्ट्रिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर · अंतर-राज्य समन्वय · प्रदूषण कम करना
चर्चा में क्यों: श्रीनिवस आर. कुलकर्णी को टाइम-डोमेन एस्ट्रोनॉमी (time-domain astronomy) और एस्ट्रोनॉमिकल इंस्ट्रुमेंटेशन (astronomical instrumentation) में उनके अग्रणी कार्य के लिए रॉयल एस्ट्रोनॉॉमिकल सोसाइटी गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है।
भारतीय मूल के खगोलशास्त्री (Astrophysicist) श्रीनिवास आर. कुलकर्णी को 'रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी गोल्ड मेडल' से सम्मानित किया गया है। उनके करियर में पहले 'मिलीसेकंड पल्सर' की सह-खोज और पहले 'ब्राउन ड्वार्फ' की पहचान करना शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकश्रीनिवास आर. कुलकर्णी: टाइम-डोमेन एस्ट्रोनॉमी (time-domain astronomy) के लिए रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी गोल्ड मेडल से सम्मानित।
विज्ञान-तकनीकPalomar Transient Factory (PTF) और Zwicky Transient Facility (ZTF): खगोलीय अवलोकन (astronomical observation) के लिए कुलकर्णी द्वारा विकसित उपकरण।
तथ्यकुलकर्णी की खोजों में पहला मिलिसेकंड पल्सर (millisecond pulsar) और पहला ब्राउन ड्वार्फ (brown dwarf) शामिल हैं।
पदकुलकर्णी की शिक्षा: IIT दिल्ली और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ब्रह्मांडीय घटनाओं और गुरुत्वाकर्षण तरंगों के प्रति हमारी समझ में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में समय-डोमेन खगोल विज्ञान (time-domain astronomy) और उन्नत उपकरणों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
तकनीकी छलांग: स्थिर अवलोकन से रियल-टाइम ट्रांजिएंट इवेंट डिटेक्शन की ओर बदलाव
डेटा प्रोसेसिंग: ज़्विकी ट्रांजिएंट फैसिलिटी जैसी सुविधाओं से हाई-कैडेंस डेटा को मैनेज करना
ग्लोबल कोलैबोरेशन: स्पेस साइंस को आगे बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका
चर्चा में क्यों: CDAC ने ICE-Cloud लॉन्च किया है, जो एक स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह भारत में जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान (scientific research) में सहायता के लिए सुपरकंप्यूटिंग और AI टूल्स तक मुफ्त पहुंच प्रदान करता है।
ICE-Cloud, CDAC (इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था) द्वारा विकसित एक स्वदेशी प्लेटफॉर्म है। इसकी शुरुआत पांच साल पहले DBT (डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी) द्वारा वित्तपोषित एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाCDAC: इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त वैज्ञानिक सोसाइटी (Autonomous scientific society)।
तथ्यICE-Cloud के पास वर्तमान में 500 यूजर्स हैं।
तथ्यICE-Cloud सुपरकंप्यूटर, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टूल्स और AI विज़ुअलाइज़ेशन तक मुफ्त एक्सेस प्रदान करता है।
पदसंदीप सुरेंद्र मालविया: CDAC वैज्ञानिक।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वदेशी उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्लेटफॉर्म किस प्रकार जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को गति प्रदान कर सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
डेटा संप्रभुता: संवेदनशील राष्ट्रीय वैज्ञानिक डेटा के लिए विदेशी क्लाउड प्रोवाइडर्स के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को कम करना
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: छोटे रिसर्च संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए सुपरकंप्यूटिंग की भारी लागत को कम करना
कोलेबोरेटिव सिनर्जी: साझा संसाधनों के जरिए एकेडमिक रिसर्च और इंडस्ट्रियल AI एप्लीकेशन के बीच की दूरी को कम करना
मुख्य शब्द: हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग · डेटा संप्रभुता · स्वदेशी तकनीक · वैज्ञानिक अनुसंधान · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
चर्चा में क्यों: IQ Capital और Green House Enviro ने तेलंगाना में 600 मिलियन EUR के निवेश के साथ 300 MW का स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया है।
इस परियोजना का प्रस्ताव दावोस में 'तेलंगाना राइजिंग' (Telangana Rising) प्रतिनिधिमंडल को दिए गए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (Expression of Interest) के माध्यम से प्रस्तावित किया गया था। इसके अतिरिक्त, अमेरिका स्थित ऑपरेटर 'सरगद' (Sargad) ने तेलंगाना में MRO सुविधा के लिए तीन से पांच वर्षों में ₹1,000 करोड़ निवेश करने की इच्छा व्यक्त की है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यप्रस्तावित SMR प्रोजेक्ट की क्षमता: 300 MW।
तथ्यSMR प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित निवेश: EUR 600 मिलियन।
तथ्यSargad इन्वेस्टमेंट टारगेट: MRO फैसिलिटी के लिए तीन से पांच वर्षों में ₹1,000 करोड़।
स्थानतेलंगाना के वारंगल और आदिलाबाद जिलों को इंडस्ट्रियलाइजेशन इंसेंटिव्स (industrialization incentives) के लिए पहचाना गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने और परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों के समाधान में लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
सुरक्षा और स्केलेबिलिटी: मॉड्यूलर डिज़ाइन बड़े पैमाने के रिएक्टरों की तुलना में दूरदराज के इलाकों में आसान डिप्लॉयमेंट की सुविधा देता है
रेगुलेटरी बाधाएं: विकेंद्रीकृत परमाणु इंस्टॉलेशन के लिए सुव्यवस्थित सुरक्षा प्रोटोकॉल और लायबिलिटी फ्रेमवर्क की ज़रूरत
आर्थिक व्यवहार्यता: शुरुआती भारी पूंजीगत खर्च और लंबे समय के कार्बन-न्यूट्रल ऊर्जा लाभ के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: स्मॉल मॉडुलर रिएक्टर्स · क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन · परमाणु ऊर्जा नीति · औद्योगिक प्रोत्साहन · ऊर्जा सुरक्षा
चर्चा में क्यों: IEEE द्वारा वित्तपोषित NITK कर्नाटक ने पश्चिमी घाट के एक दूरस्थ क्षेत्र में डिजिटल अंतर (Digital Divide) को कम करने के लिए अगुम्बे में 130 से अधिक फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट कनेक्शन तैनात किए हैं।
इस परियोजना का नेतृत्व NITK के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहित पी. ताहिलियानी ने किया और इसे IEEE Communication Society और IEEE Tech4Good द्वारा वित्तपोषित किया गया। इसमें अगुम्बे में 130 से अधिक फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन स्थापित किए गए, जिन्हें अत्यधिक मौसम को सहने और पारिस्थितिक प्रभाव को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानअगुम्बे: पश्चिमी घाट में स्थित एक दूरस्थ गाँव जो भारी वर्षा के लिए जाना जाता है।
विज्ञान-तकनीकAgumbe प्रोजेक्ट में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन (Fiber optic connections) का उपयोग किया जाता है।
संस्थाNITK: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कर्नाटक (National Institute of Technology Karnataka), इस प्रोजेक्ट के लिए लीड संस्थान।
तथ्यइस प्रोजेक्ट में 130 से अधिक फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट कनेक्शन लगाए गए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण विकास के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी को एक आवश्यक बुनियादी ढांचे के रूप में मान्यता देने और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में डिजिटल विभाजन को पाटने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: भारी बारिश वाले इलाकों में भरोसेमंद कम्युनिकेशन की कमी से स्वास्थ्य और शिक्षा प्रभावित
इकोलॉजिकल ट्रेड-ऑफ: पश्चिमी घाट में फाइबर ऑप्टिक बिछाने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की ज़रूरत के बीच संतुलन
नीतिगत आवश्यकता: दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट को बुनियादी सुविधा मानने के लिए औपचारिक फ्रेमवर्क की ज़रूरत
मुख्य शब्द: डिजिटल डिवाइड · आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर · ग्रामीण कनेक्टिविटी · पारिस्थितिक संवेदनशीलता · दूरसंचार
चर्चा में क्यों: IT सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि भारत सरकार गलत सूचनाओं को रोकने के लिए AI द्वारा तैयार की गई सामग्री पर लेबलिंग अनिवार्य करने वाले नियमों को अंतिम रूप देने के करीब है।
प्रस्तावित नियम AI टूल प्रदाताओं (जैसे ChatGPT) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, दोनों को लक्षित करते हैं। इन नियमों के तहत इन संस्थाओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे सिंथेटिक आउटपुट (synthetic output) और वास्तविक मीडिया के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए प्रमुख मार्कर और पहचानकर्ताओं (identifiers) का उपयोग करें।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकAI labeling rules का उद्देश्य सिंथेटिक आउटपुट (synthetic output) को ऑथेंटिक मीडिया (authentic media) से अलग पहचानना है।
तथ्यप्रस्तावित नियम AI टूल प्रोवाइडर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स दोनों को टारगेट करते हैं।
पदएस. कृष्णन भारत के IT Secretary हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को भ्रामक सूचनाओं और सिंथेटिक मीडिया हेरफेर से सुरक्षित रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित सामग्री हेतु विनियामक ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
सूचना की सत्यता: जनमत और चुनावी प्रक्रियाओं में हेरफेर के लिए डीपफेक और सिंथेटिक मीडिया के खतरे
रेगुलेटरी स्कोप: AI टूल प्रदाताओं की जवाबदेही और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की आज़ादी के बीच संतुलन
विधायी पर्याप्तता: क्या मौजूदा कानून बिना किसी समर्पित AI एक्ट के सिंथेटिक जानकारी से निपटने के लिए काफी हैं
मुख्य शब्द: सिंथेटिक मीडिया · सूचना की सत्यता · एल्गोरिद्मिक जवाबदेही · गलत सूचना · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: रोस्टेक स्टेट कॉर्पोरेशन (Rostec State Corporation) की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने घोषणा की है कि वह हैदराबाद में आयोजित होने वाले विंग्स इंडिया 2026 (Wings India 2026) में इल्यूशिन IL-114-300 और सुपरजेट SJ-100 विमानों को प्रदर्शित करेगी।
सुपरजेट 100 में आयात-प्रतिस्थापन (Import-substitution) आधारित डिज़ाइन और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के तत्वों वाला एक विशेष लिवरी (Livery) शामिल होगा। भारतीय क्षेत्रीय बाजार को लक्षित करने के लिए, IL-114-300 को इसके यात्री इंटीरियर (Passenger interior) के साथ प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकIlyushin IL-114-300 और Superjet SJ-100 क्षेत्रीय विमान (regional aircraft) मॉडल हैं जिन्हें Wings India 2026 में प्रदर्शित किया जाएगा।
स्थानWings India 2026 एग्जीबिशन (exhibition) का आयोजन हैदराबाद में होने वाला है।
तथ्यसुपरजेट 100 (Superjet 100) को रोस्टेक स्टेट कॉर्पोरेशन (Rostec State Corporation) द्वारा आयात-प्रतिस्थापन (import-substituted) विमान के रूप में वर्णित किया गया है।
योजनाUDAN प्रोग्राम क्षेत्रीय हवाई यात्रा की पहुंच (accessibility) बढ़ाने के उद्देश्य से भारत की एक पहल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में ग्रामीण कनेक्टिविटी और आर्थिक समावेश को बढ़ाने में क्षेत्रीय विमानन विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: टियर-3 शहरों को बड़े हब्स से जोड़ने के लिए फीडर एयरक्राफ्ट की ज़रूरत
मार्केट डायनेमिक्स: घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स और विदेशी रीजनल एयरक्राफ्ट की खरीद के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · उड़ान स्कीम · एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर · आयात प्रतिस्थापन · एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के मंत्रियों ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 97 सरकारी स्कूलों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन (Rooftop Solar Installations) के कारण प्रति स्कूल ग्रिड बिजली की खपत में 46% की कमी आई है।
इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स (IIHS) के साथ किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि प्रति स्कूल औसतन सालाना 3,572 यूनिट बिजली और ₹26,000 की लागत की बचत होती है। राज्य के 'ग्रीन स्कूल' कार्यक्रम का लक्ष्य बिजली की खपत में 91% तक की कटौती करने के लिए इसे 25 पायलट स्कूलों से बढ़ाकर 300 स्कूलों तक ले जाना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्य97 तमिलनाडु सरकारी स्कूलों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन (Rooftop solar installations) से ग्रिड बिजली की खपत में 46% की कमी आई।
तथ्यप्रति स्कूल औसत वार्षिक बिजली की बचत 3,572 यूनिट तक पहुंच गई।
संस्थाइंडियन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स (Indian Institute for Human Settlements - IIHS) ने इस स्टडी में सहयोग किया।
योजना'Green School' प्रोग्राम का लक्ष्य वर्तमान बिजली की खपत को 91% तक कम करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: छत पर सौर ऊर्जा (रूफटॉप सोलर) जैसे विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा मॉडल किस प्रकार सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए भारत के जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान दे सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय स्थिरता: राज्य के सार्वजनिक संस्थानों के लिए आवर्ती बिजली खर्च में कमी
विकेंद्रीकृत ऊर्जा: ग्रामीण और शहरी स्कूलों में स्थानीय सोलर जनरेशन के जरिए ग्रिड प्रेशर को कम करना
व्यवहारगत बदलाव: पर्यावरण साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे में बदलाव के साथ जलवायु जागरूकता अभियानों का एकीकरण
मुख्य शब्द: विकेंद्रीकृत ऊर्जा · नवीकरणीय ऊर्जा · राजकोषीय स्थिरता · जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करना · सार्वजनिक बुनियादी ढांचा
चर्चा में क्यों: कर्नाटक के मुख्य चुनाव आयुक्त ने घोषणा की है कि 25 मई के बाद ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के लिए होने वाले नागरिक चुनावों में EVMs के बजाय बैलेट पेपर का उपयोग किया जाएगा।
राज्य चुनाव आयोग ने 19 जनवरी को 88.91 लाख मतदाताओं के साथ मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया। GBA चुनावों के लिए मतपत्रों (ballot papers) में बदलाव कानूनी रूप से अनुमत है, लेकिन इसके लिए कोई विशिष्ट कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के ड्राफ्ट रोल्स के लिए कुल मतदाता संख्या: 88.91 लाख मतदाता।
स्थानग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (Greater Bengaluru Authority) के चुनाव 25 मई के बाद आयोजित किए जाएंगे।
तथ्यकर्नाटक सरकार ने Beyond बेंगलुरु मिशन के तहत मंगलूरु में Vertex Managed Workspace को ₹1.93 करोड़ का अनुदान दिया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्थानीय निकाय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से वापस मतपत्र (ballot papers) की ओर संक्रमण के चुनावी अखंडता और तार्किक व्यवहार्यता पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
लॉजिस्टिक ओवरहेड: बड़े शहरी मतदाता समूहों के लिए बढ़ी हुई लागत और मैनुअल काउंटिंग की जटिलताएँ
सुरक्षा चिंताएं: बैलट टेंपरिंग की संभावना बनाम EVM हैकिंग की कमियां
प्रशासनिक पारदर्शिता: वोटिंग के तरीके बदलने के लिए मानक मानदंडों की कमी
मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · स्थानीय शासन · प्रशासनिक विवेक · लॉजिस्टिक व्यवहार्यता · लोकतांत्रिक पारदर्शिता