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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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IISc के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज (Centre for Ecological Sciences) द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि वन्यजीवों की डर की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि मनुष्यों के साथ उनका संपर्क घातक (शिकार/मछली पकड़ना) है या गैर-घातक (पर्यटन/अनुसंधान)

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चर्चा में क्यों

IISc के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज (Centre for Ecological Sciences) द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि वन्यजीवों की डर की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि मनुष्यों के साथ उनका संपर्क घातक (शिकार/मछली पकड़ना) है या गैर-घातक (पर्यटन/अनुसंधान)।

पृष्ठभूमि

यह मेटा-एनालिसिस (meta-analysis) 'इकोलॉजी लेटर्स' (Ecology Letters) जर्नल में प्रकाशित किया गया था। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि मनुष्यों द्वारा होने वाली घातक गतिविधियाँ जानवरों में अधिक सतर्कता और भोजन की तलाश (foraging) में कमी का कारण बनती हैं। इसके विपरीत, गैर-घातक उपस्थिति के परिणामस्वरूप व्यवहार में कम और परिवर्तनशील बदलाव देखने को मिलते हैं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थासेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज (Centre for Ecological Sciences), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की एक रिसर्च बॉडी है।
  • तथ्यघातक मानवीय गतिविधियाँ (शिकार, मछली पकड़ना) वन्यजीवों में तीव्र भय की प्रतिक्रिया और बढ़ी हुई सतर्कता पैदा करती हैं।
  • तथ्यगैर-घातक मानवीय उपस्थिति (पर्यटन, अनुसंधान) के परिणामस्वरूप व्यवहार में कम और अधिक परिवर्तनशील बदलाव आते हैं।

मेन्स के लिए

प्रश्न: मानव-वन्यजीव अंतःक्रिया की गतिशीलता, विशेष रूप से घातक और गैर-घातक गतिविधियों के बीच का अंतर, जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों को किस प्रकार प्रभावित करता है? चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • व्यवहार संबंधी अनुकूलन: जानवर इंसानों द्वारा पैदा किए गए जोखिम की भविष्यवाणी और तीव्रता के आधार पर भोजन की तलाश और सतर्कता को बदलते हैं
  • संरक्षण के ट्रेड-ऑफ: नॉन-लीथल टूरिज्म के पारिस्थितिक प्रभाव और एक्सट्रैक्टिव गतिविधियों से होने वाले गंभीर नुकसान के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: मानव-वन्यजीव संघर्ष · बिहेवियरल इकोलॉजी · जैव विविधता संरक्षण · मानवीय प्रभाव · पारिस्थितिक सतर्कता

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · जैव विविधता एवं संरक्षण

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।