यूपीएससी सिविल सेवा GS1 (इतिहास · समाज · भूगोल) के भारतीय समाज भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 93 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: जनसंख्या, जनसांख्यिकी एवं प्रवास (37) · शहरीकरण (18) · सामाजिक विविधता, जाति एवं जनजातियां (15) · सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद एवं धर्मनिरपेक्षता (14) · महिलाएं एवं लैंगिक मुद्दे (8) · वैश्वीकरण एवं समाज (1)
चर्चा में क्यों: मिजोरम सरकार ने ₹19.19 करोड़ के केंद्रीय आवंटन का उपयोग करके जनगणना 2027 (Census 2027) को पूरा करने वाला पहला राज्य बनने की योजना की घोषणा की है।
मिजोरम केंद्र सरकार से ₹19.19 करोड़ के बजट के साथ जनगणना 2027 के दूसरे चरण की तैयारी कर रहा है। इस जनगणना में राज्य में रहने वाली सभी 16 अनुसूचित जातियाँ और शरणार्थी शामिल होंगे, हालांकि शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान नहीं की जाएगी।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यसेंट्रल सरकार द्वारा जनगणना 2027 (Census 2027) के लिए मिजोरम को ₹19.19 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
तथ्यमिजोरम जनगणना (census) प्रक्रिया में प्रत्येक enumerator से लगभग 800 लोगों को कवर करने की उम्मीद की जाती है।
तथ्यजनगणना में राज्य की सभी 16 अनुसूचित जातियाँ और शरणार्थी शामिल होंगे।
तथ्यजनगणना में शामिल शरणार्थियों (Refugees) को भारतीय नागरिकता नहीं दी जाएगी।
तथ्यजनगणना में भागीदारी के लिए Aadhaar नंबर अनिवार्य नहीं हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने और प्रभावी नीति निर्माण में सटीक एवं समावेशी जनगणना डेटा के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त ने आंध्र प्रदेश के अधिकारियों को पहले चरण के पूरा होने के बाद जनगणना 2027 के दूसरे चरण को पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 31 मई, 2026 तक 94,983 ब्लॉकों में आयोजित किया गया। इस चरण के लिए कुल 84,115 गणनाकार (enumerators) और 13,887 पर्यवेक्षक (supervisors) तैनात किए गए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यCensus 2027 का पहला चरण 94,983 ब्लॉक्स में आयोजित किया गया था।
तथ्यCensus 2027 के पहले चरण के लिए 84,115 enumerators और 13,887 supervisors तैनात किए गए।
पदमृत्युंजय कुमार नारायण रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Census Commissioner) के पद पर कार्यरत हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में जनसांख्यिकीय संक्रमण और सामाजिक-आर्थिक नियोजन हेतु साक्ष्य-आधारित नीतियां तैयार करने में एक व्यापक राष्ट्रीय जनगणना के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने घोषणा की है कि जनसंख्या जनगणना 2027 के लिए प्रारंभिक डेटा (provisional data) मार्च या अप्रैल 2027 तक उपलब्ध होगा।
लद्दाख स्वतंत्र भारत में जाति गणना को शामिल करने वाली पहली डिजिटल जनगणना पूरी करने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश/राज्य बन गया है। रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर ऑफ इंडिया (RG&CCI) ने जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बर्फ से ढके क्षेत्रों में जनगणना कार्यों के लिए ₹49.2 करोड़ जारी किए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यलद्दाख वह पहला क्षेत्र है जिसने फरवरी 2027 की राष्ट्रीय डेडलाइन से पहले पूरी जनगणना (Census) प्रक्रिया को पूरा कर लिया है।
विज्ञान-तकनीकCensus 2027 स्वतंत्र भारत में पहली डिजिटल Census है।
तथ्यCensus 2027 में पहली बार अनुसूचित जातियों और जनजातियों के अलावा अन्य जातियों की गणना (caste enumeration) भी शामिल की गई है।
तथ्यCensus 2027 के प्रश्नावली (questionnaire) में 40 प्रश्न शामिल हैं, जिसमें Census 2011 की तुलना में 13 नए फील्ड्स जोड़े गए हैं।
संस्थारजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर ऑफ इंडिया (RG&CCI) वह संस्था है जो जनगणना (Census) के लिए जिम्मेदार है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के सामाजिक-आर्थिक नियोजन के संदर्भ में डिजिटल जनगणना की ओर संक्रमण और 2027 की जनगणना में जातिगत गणना के समावेश के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र के नए कानून में जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के बाद, मुंबई के चर्चों ने अब श्रद्धालुओं से स्वैच्छिक प्रार्थना घोषणापत्र (voluntary prayer declarations) पर हस्ताक्षर कराना शुरू कर दिया है।
महाराष्ट्र सरकार ने जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने और स्वैच्छिक रूप से धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए अधिकारियों को सूचित करना अनिवार्य करने वाला एक कानून बनाया है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों को अधिकतम सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यमहाराष्ट्र कन्वर्जन लॉ (Maharashtra conversion law) के तहत उल्लंघन करने वालों के लिए सात साल तक की जेल का प्रावधान है।
स्थानमुंबई के चर्चों ने अगस्त के अंत में स्वैच्छिक प्रार्थना घोषणाओं (voluntary prayer declarations) को लागू करना शुरू कर दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए राज्य के हस्तक्षेप और धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी के बीच उत्पन्न तनाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को नियुक्त किया है, जो छह महीने के भीतर एक रूपरेखा तैयार करने में सहायता करेंगे।
इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना देसाई कर रही हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने UCC (यूनिफॉर्म सिविल कोड) के ड्राफ्ट को पूरा करने के लिए छह महीने की समय-सीमा निर्धारित की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदरंजना देसाई: महाराष्ट्र UCC कमेटी की प्रमुख, जो सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज हैं।
तथ्यसमिति का लक्ष्य छह महीने की समय सीमा के भीतर UCC ड्राफ्ट को पूरा करना है।
स्थानमहाराष्ट्र: राज्य सरकार UCC फ्रेमवर्क की शुरुआत कर रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत जैसे बहुलवादी समाज में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली संवैधानिक चुनौतियों और सामाजिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: यह लेख सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए संघर्ष पर प्रकाश डालता है। इसमें लेडी श्री राम कॉलेज के बंद होने और आस्था कुंज पार्क में हुए गैंग-रेप (gang-rape) की घटनाओं को बुनियादी ढांचे (infrastructure) पर केंद्रित वकालत के लिए उत्प्रेरक के रूप में उद्धृत किया गया है।
अजमेर में 'सिटीज फॉर यूथ प्रोग्राम' (Cities for Youth Programme) की पांच महिलाओं ने 'अपनो थियो' पॉप-अप चाय स्टॉप्स शुरू किए। दिल्ली में, आस्था कुंज पार्क में खराब रखरखाव और सीसीटीवी (CCTV) के काम न करने के कारण हुए गैंगरेप के बाद लेडी श्री राम कॉलेज को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यअपनो थियो: अजमेर में Cities for Youth Programme के तहत महिलाओं द्वारा पॉप-अप चाय स्टॉप्स (Pop-up chai stops) की शुरुआत की गई।
स्थानआस्था कुंज पार्क: दिल्ली में वह स्थान जहाँ गैंग-रेप हुआ था, जिसके कारण कॉलेज बंद हो गया था।
तथ्यWhy Loiter?: सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने वाली एक पहल।
तथ्यकर्नाटक: राज्य द्वारा मुफ्त परिवहन की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे महिलाओं के लिए रोजगार में वृद्धि देखी गई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यह चर्चा कीजिए कि सार्वजनिक स्थानों में महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए शहरी बुनियादी ढांचे और स्थानिक नियोजन (spatial planning) का किस प्रकार लाभ उठाया जा सकता है।
चर्चा में क्यों: भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनगणना 2027 के लिए प्रारंभिक जनसंख्या गणना के प्रारंभ की घोषणा की है।
निर्दिष्ट राज्यों में गणना की समय-सारणी 1 दिसंबर, 2026 से 4 जनवरी, 2027 तक निर्धारित की गई है। स्व-गणना की सुविधा 16 नवंबर से 30 नवंबर, 2026 तक उपलब्ध होगी, जबकि लद्दाख के हिम-बद्ध क्षेत्रों में गणना की प्रक्रिया 1 सितंबर, 2026 से प्रारंभ हो गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पदRegistrar General of India: जनगणना के आंकड़ों की घोषणा और गणना की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी।
तथ्यCensus 2027: आगामी राष्ट्रीय जनसंख्या गणना चक्र।
तथ्यस्व-गणना (Self-enumeration): 16 नवंबर से 30 नवंबर, 2026 तक उपलब्ध जनगणना पद्धति।
स्थानलद्दाख: बर्फबारी के कारण, गणना 1 सितंबर, 2026 से शुरू हुई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण और बुनियादी ढाँचे के नियोजन में आवधिक जनगणना के आंकड़ों के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में तमिलनाडु में जन्म दर में 5.3% की गिरावट दर्ज की गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर (replacement levels) से नीचे गिरती दीर्घकालिक प्रजनन दर को रेखांकित करती है।
तमिलनाडु में जन्मों की संख्या वर्ष 2024 में 8.47 लाख से घटकर वर्ष 2025 में 8.02 लाख रह गई। विशेषज्ञों टी. सुंदररामन और एस. इरुदया राजन ने उल्लेख किया कि कुल प्रजनन दर लगभग दो दशक पहले ही प्रतिस्थापन स्तर (replacement level) से नीचे गिर गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यवर्ष 2025 में तमिलनाडु में जन्म: 8.02 लाख।
तथ्यवर्ष 2024 में तमिलनाडु में जन्म: 8.47 लाख।
तथ्यतमिलनाडु में जन्म दर में गिरावट का प्रतिशत (2024-2025): 5.3%।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तमिलनाडु जैसे भारतीय राज्यों में प्रतिस्थापन स्तर से कम प्रजनन दर (sub-replacement fertility rates) के सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को संबोधित करने के लिए नीतिगत उपायों का सुझाव दीजिए।
चर्चा में क्यों: NCBS द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह रेखांकित किया गया है कि शहरी अपशिष्ट और जानबूझकर खिलाया जाने वाला भोजन किस प्रकार आवारा कुत्तों की समस्या को बढ़ावा देता है, जिसके कारण बहु-प्रजाति सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने हेतु अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी नियोजन में परिवर्तन आवश्यक है।
'द इंडियन स्ट्रीट डॉग क्राइसिस एंड मल्टी-स्पीशीज को-एग्ज़िस्टेंस इन ट्रॉपिकल अर्बन फ्यूचर्स' नामक अध्ययन 'नेचर सिटीज' में प्रकाशित किया गया है। यह अध्ययन कचरे से प्राप्त खाद्य सब्सिडी और जानबूझकर खिलाए जाने वाले भोजन को शहरी कुत्तों की जनसंख्या में वृद्धि और मानव-पशु संघर्ष के प्राथमिक कारकों के रूप में पहचानता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकNational Centre for Biological Sciences (NCBS) भारत में एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।
तथ्ययह अध्ययन 'खाद्य सब्सिडी' (कचरा और जानबूझकर खिलाया गया भोजन) को शहरी कुत्तों की जनसंख्या की गतिशीलता के प्रमुख कारकों के रूप में पहचानता है।
स्थानयह अध्ययन भारत के उष्णकटिबंधीय शहरी परिवेश (tropical urban environments) पर केंद्रित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में आवारा कुत्तों की आबादी के प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी नियोजन किस प्रकार बहु-प्रजाति सह-अस्तित्व में योगदान दे सकते हैं? विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: दिल्ली सरकार ने मास्टर प्लान 2047 अधिसूचित किया है, जो बढ़ती जनसंख्या को समायोजित करने के लिए ऊर्ध्वाधर विकास (vertical growth) और किफायती आवास पर केंद्रित एक दीर्घकालिक शहरी विकास रूपरेखा है।
इस योजना का उद्देश्य 18 लाख आवासों सहित कुल 40 लाख से अधिक नए आवास जोड़ना है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में 18 मीटर की ऊंचाई सीमा को हटाना, नरेला और द्वारका में नए केंद्रों की स्थापना करना, तथा यमुना के बाढ़ क्षेत्र का पारिस्थितिक पुनरुद्धार शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यMaster Plan 2047 का लक्ष्य दिल्ली में 40 लाख से अधिक नए घर जोड़ना है।
तथ्यTransit-Oriented Development (TOD) के माध्यम से ट्रांजिट कॉरिडोर के पास 18 लाख घरों की योजना बनाई गई है।
तथ्ययह योजना निर्माण के लिए मौजूदा 18-मीटर की ऊंचाई सीमा को हटा देती है।
स्थाननरेला और द्वारका को नए शिक्षा और निवेश केंद्रों के रूप में पहचाना गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दिल्ली जैसे महानगरों में तीव्र शहरीकरण की चुनौतियों के समाधान में 'ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) और ऊर्ध्वाधर विकास (vertical growth) के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: एक रिपोर्ट दिल्ली में अग्नि सुरक्षा बुनियादी ढांचे की गंभीर कमी को रेखांकित करती है, जहाँ केवल 5% इमारतों को प्रमाणित किया गया है, जो तृतीय-पक्ष प्रमाणन (third-party certification) और बुनियादी ढांचे के विस्तार की ओर बदलाव की आवश्यकता को दर्शाती है।
वर्तमान में दिल्ली में 120 की आवश्यकता के विरुद्ध केवल 71 फायर स्टेशन कार्यरत हैं। केवल 5% इमारतों के पास अधिभोग प्रमाण पत्र (Occupancy Certificates) उपलब्ध हैं, और शहर को 1,000 अनधिकृत कॉलोनियों तथा संकीर्ण गलियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में बाधा उत्पन्न करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यवर्तमान में दिल्ली में केवल 5% इमारतों के पास Occupancy Certificates हैं।
तथ्यदिल्ली को 120 फायर स्टेशनों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में यह 71 के साथ संचालित हो रहा है।
विज्ञान-तकनीकप्रस्तावित सुरक्षा उपायों में उच्च-जोखिम वाली इमारतों में अनिवार्य स्प्रिंकलर और स्मोक डिटेक्टर शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: महानगरीय शहरों में शहरी अग्नि सुरक्षा प्रबंधन के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और बुनियादी ढांचे एवं विनियामक अनुपालन में सुधार के लिए उचित उपाय सुझाइए। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में गैर-मराठी भाषी टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है, जिससे सांस्कृतिक संरक्षण बनाम महानगरीय पहचान पर बहस छिड़ गई है।
महाराष्ट्र राज्य सरकार ने गैर-मराठी भाषी चालकों के लिए औपचारिक भाषा प्रशिक्षण प्राप्त करने का अधिदेश जारी किया है। इस नीति का उद्देश्य चालकों को मुंबई जैसे प्रमुख महानगरीय केंद्र के स्थानीय भाषाई परिवेश में एकीकृत करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानमुंबई भारत की वित्तीय राजधानी और महाराष्ट्र का एक प्रमुख महानगरीय केंद्र है।
तथ्ययह अधिदेश विशेष रूप से मुंबई महानगरीय क्षेत्र के कैब और ऑटो-रिक्शा चालकों को लक्षित करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भाषाई शासनों के संदर्भ में, भारतीय महानगरों की महानगरीय पहचान और क्षेत्रीय सांस्कृतिक संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोधों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: असम सरकार ने उन सरकारी कर्मचारियों से उनके वेतन में से 20% तक की कटौती करने की नीति की घोषणा की है, जो अपनी पहली पत्नी से तलाक लिए बिना पुनर्विवाह करते हैं, ताकि परित्यक्ता पत्नियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।
असम सरकार ने बहुविवाह (bigamy) में संलिप्त कर्मचारियों के वेतन से 20% तक की कटौती का प्रस्ताव दिया है। कटौती की गई राशि प्रथम पत्नी के आवेदन पर सीधे उन्हें भुगतान कर दी जाएगी, जो कि न्यायालय में लंबित कार्यवाही के दौरान भी लागू होगा।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यअसम सरकार ने बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 20% की कटौती का प्रस्ताव दिया है।
तथ्यइस नीति का उद्देश्य परित्यक्त पहली पत्नियों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बहुविवाह के कारण परित्यक्त महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक अधिकारों के संरक्षण में राज्य-आधारित विधायी उपायों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (RG&CCI) ने विशिष्ट पहाड़ी और हिम-बद्ध क्षेत्रों में जनगणना 2027 के गणना हेतु डिजिटल साक्षरता और जीवनसाथी के नाम सहित 13 नए डेटा क्षेत्र शामिल किए हैं।
RG&CCI ने लद्दाख, J&K, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जनगणना 2027 के जनसंख्या गणना हेतु 40 प्रश्नों को अधिसूचित किया है। इस प्रक्रिया में एक स्व-गणना पोर्टल (www.se/snowbound.census.gov.in) शामिल है, जिसके पश्चात सितंबर से घर-घर जाकर गणना की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाRG&CCI: Registrar General and Census Commissioner of India राष्ट्रीय जनगणना आयोजित करने वाली नोडल संस्था है।
तथ्यCensus 2027: भारत की आगामी दशकीय जनगणना।
विज्ञान-तकनीकडिजिटल साक्षरता: जनगणना प्रश्नावली में जोड़े गए 13 नए डेटा क्षेत्रों में से एक।
स्थानहिम-बद्ध क्षेत्र: इस गणना के लिए Ladakh, J&K, Himachal Pradesh और Uttarakhand के विशिष्ट क्षेत्रों को लक्षित किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्रभावी नीति निर्माण और सुशासन के लिए राष्ट्रीय जनगणना में डिजिटल साक्षरता और पहचान दस्तावेजों को शामिल करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: जनगणना 2027 अपने प्रश्नावली का विस्तार कर 40 प्रश्नों तक करेगी, जिसमें पिछले 29 श्रेणियों के अतिरिक्त अब सभी उत्तरदाताओं से जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने का प्रावधान शामिल है।
जनगणना 2027 में जाति, डिजिटल साक्षरता और जनसांख्यिकीय विवरणों से संबंधित 40 प्रश्न शामिल किए जाएंगे। यह जनगणना सभी उत्तरदाताओं के जातिगत डेटा को दर्ज करने के लिए एक 'ओपन-कॉलम' दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो पिछले डेटा संग्रहण विधियों की तुलना में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यCensus 2027 प्रश्नावली का विस्तार कर 40 प्रश्नों तक कर दिया गया है।
तथ्यस्वतंत्रता के बाद पहली बार सभी उत्तरदाताओं से जाति संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी।
तथ्यनई प्रणाली पिछले 29 जाति श्रेणियों से आगे बढ़कर एक ओपन-कॉलम दृष्टिकोण (open-column approach) अपनाती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में समावेशी नीति-निर्माण और सामाजिक न्याय के संदर्भ में जनगणना में व्यापक जातिगत डेटा संग्रह के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: जनगणना 2027 महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्वतंत्र भारत में पहली डिजिटल और जाति-आधारित जनगणना होगी।
जनगणना का कार्य 1 अप्रैल, 2026 को प्रारंभ हुआ, जिसके अंतर्गत आवास सूचीकरण अभियान (HLO) 30 सितंबर, 2026 को संपन्न हुआ। फरवरी 2027 से शुरू होने वाले जनसंख्या गणना (PE) चरण के अंतर्गत 34 विस्तृत प्रश्नों के माध्यम से जातिगत पहचान का विवरण दर्ज किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यजनगणना 2027 स्वतंत्र भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
तथ्यHousing Listing Operations (HLO) का समापन 30 सितंबर, 2026 को हुआ।
तथ्यजनगणना के लिए स्व-गणना (Self-enumeration) 17 अगस्त से 31 अगस्त, 2026 तक उपलब्ध है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना बनाने में डिजिटल जनगणना गणना और जातिगत डेटा के समावेश के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य सरकार की नौकरियों के लिए 80:20 आरक्षण प्रणाली को समाप्त कर दिया है और इसके स्थान पर स्वदेशी भाषा में दक्षता सहित समान पात्रता मानदंड लागू किए हैं।
अरुणाचल प्रदेश सरकार ने उच्च शक्ति समिति (HPC) की सिफारिशों को स्वीकृति प्रदान की है, जिसके अंतर्गत स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) और APST स्थिति को अनिवार्य बनाया गया है। राज्य सरकार की नौकरियों के लिए उम्मीदवारों को अब एक स्वदेशी जनजातीय भाषा में दक्षता प्रदर्शित करना आवश्यक होगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाAPPSC: Arunachal Pradesh Public Service Commission राज्य सिविल सेवाओं के लिए उत्तरदायी निकाय है।
तथ्यपिछली आरक्षण प्रणाली में राज्य सरकार की नौकरियों के लिए 80:20 का अनुपात अपनाया गया था।
स्थानअरुणाचल प्रदेश: भारत का एक उत्तर-पूर्वी राज्य।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सांस्कृतिक रूप से विविध राज्यों में सार्वजनिक सेवा भर्ती की समावेशिता पर भाषाई दक्षता और निवास संबंधी आवश्यकताओं के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने आगामी जनसंख्या गणना के लिए 40 जनगणना प्रश्नों को अधिसूचित किया है, जिसमें विशेष रूप से पहली बार स्व-रिपोर्टिंग के माध्यम से जाति का विवरण शामिल किया गया है।
हिमखंडित क्षेत्रों (लद्दाख सहित) में जनगणना की गणना 1 सितंबर से प्रारंभ होगी, जिसमें 17-31 अगस्त तक स्व-गणना का चरण आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना संचालन हेतु कुल 11,718 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यजनगणना के लिए आवंटित कुल बजट: Rs 11,718 करोड़।
तथ्यस्व-गणना अवधि: 17 अगस्त से 31 अगस्त।
संस्थाभारत के रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General of India): भारत में जनगणना आयोजित करने के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार प्राधिकरण।
तथ्यपहली बार स्व-रिपोर्टिंग के आधार पर जाति का विवरण एकत्र किया जाएगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सामाजिक-आर्थिक नीतियां तैयार करने में जनगणना के महत्व और भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय डेटा एकत्र करने से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने वर्ष 2047 तक 40 लाख आवास इकाइयों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से 'मास्टर प्लान 2047' को स्वीकृति प्रदान की है, जो वर्तमान में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अनुमोदन हेतु लंबित है।
मास्टर प्लान 2047 छोटे आकार के आवास (25-60 वर्ग मीटर कार्पेट क्षेत्र), किराये के आवास और पारगमन केंद्रों (ट्रांजिट हब) के निकट भूमि पूलिंग का प्रस्ताव करता है। इसका लक्ष्य पुराने DDA आवासों के पुनर्विकास और नए विकास केंद्रों के माध्यम से वर्ष 2047 तक 40 लाख अतिरिक्त आवासों को समायोजित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाDDA: Delhi Development Authority दिल्ली में भूमि और बुनियादी ढांचे की योजना के लिए प्राथमिक एजेंसी है।
तथ्यMaster Plan 2047 के अनुसार, 2047 तक 40 लाख अतिरिक्त घरों की आवश्यकता का लक्ष्य रखा गया है।
तथ्यप्रस्तावित छोटे घरों का कालीन क्षेत्र (carpet area) 25 से 60 वर्ग मीटर के बीच है।
संस्थाआवास और शहरी मामलों का मंत्रालय: दिल्ली मास्टर प्लान की अंतिम स्वीकृति के लिए जिम्मेदार केंद्रीय निकाय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दिल्ली जैसे तेजी से बढ़ते महानगरीय शहरों में शहरी आवास की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और इन समस्याओं के समाधान में 'परिवहन-उन्मुख विकास' (Transit-Oriented Development) और 'भूमि पूलिंग' (Land Pooling) की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।
चर्चा में क्यों: मद्रास उच्च न्यायालय ने सामाजिक भेदभाव को रोकने और गरिमा बनाए रखनेके उद्देश्य से तमिलनाडु सरकार को सड़कों से जाति-आधारित नाम हटाने का निर्देश दिया है।
मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन. रमेश ने टिप्पणी की कि 1978 से जारी सरकारी आदेशों के बावजूद, सड़कों के नामकरण में जातिगत नाम निरंतर बने हुए हैं। न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार से इस विषय पर एक स्थिति रिपोर्ट मांगी है और ऐसे नामों को पूर्णतः हटाने के लिए स्वतः संज्ञान (suo motu) लेकर मामला दर्ज किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानमद्रास उच्च न्यायालय: चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित।
तथ्यतमिलनाडु में सड़कों के नामकरण के संबंध में सरकारी आदेश 1978 के हैं।
पदन्यायमूर्ति एन. रमेश: मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में जाति-आधारित पहचानों की निरंतरता सामाजिक एकजुटता और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की गरिमा को किस प्रकार प्रभावित करती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु विधानसभा ने 'वन्दे मातरम' के पक्ष में केंद्र सरकार के निर्देशों के विरुद्ध सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करनेके उद्देश्य से सार्वजनिक संस्थानों में 'तमिल थाई वझ्थु' को प्राथमिकता देने हेतु एक प्रस्ताव पारित किया है।
10 अगस्त, 2026 को, तमिलनाडु विधानसभा ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। यह प्रस्ताव तमिल सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखनेके उद्देश्य से शैक्षणिक और सार्वजनिक संस्थानों में सर्वप्रथम 'तमिल थाई वझ्थु' गाने का अधिदेश प्रदान करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानतमिल थाई वळ्ठु: तमिलनाडु का राज्य गान।
तथ्ययह प्रस्ताव 10 अगस्त, 2026 को तमिलनाडु विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
पदC. Joseph Vijay: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री (लेख के अनुसार)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत जैसी संघीय संरचना में क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचानों के संवर्धन और राष्ट्रीय एकीकरण के संरक्षण के बीच संतुलन के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार शहरी पुलिसिंग और प्रशासनिक दक्षता में सुधार हेतु बेंगलुरु शहर पुलिस को पांच पुलिस आयुक्तालयों में पुनर्गठित करने का प्रस्ताव दे रही है।
प्रस्ताव में 6,000 नए पदों के सृजन और ₹700 करोड़ के आवंटन का प्रावधान शामिल है। क्षेत्राधिकार संबंधी अतिव्याप्ति को रोकनेके लिए पांच नए आयुक्तालयों के मध्य समन्वय की निगरानी हेतु एक मुख्य आयुक्त की नियुक्ति की जाएगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यBCP के पुनर्गठन के लिए प्रस्तावित वित्तपोषण ₹700 करोड़ है।
तथ्यपुनर्गठन के अंतर्गत 6,000 नए पुलिस पदों का सृजन शामिल है।
संस्थामुख्य आयुक्त पांच आयुक्तालयों के लिए केंद्रीय समन्वय प्राधिकरण के रूप में कार्य करेंगे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से विस्तारित होते महानगरों में सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने में शहरी पुलिस बलों को कई पुलिस आयुक्तालयों (commissionerates) में पुनर्गठित करने की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: 'अर्बन इंडिया' (Urban India) की एक रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि शहरी जल संकटों के समाधान के लिए केवल संकट प्रबंधन में सुधार के बजाय प्रणालीगत पुनर्रचना और शासन में बदलाव की आवश्यकता है।
07 अगस्त, 2026 को प्रकाशित यह रिपोर्ट तर्क देती है कि बढ़ती शहरी जनसंख्या जल की मांग में तीव्र वृद्धि का मुख्य कारक है। यह चेतावनी देती है कि जल प्रणालियों के वित्तपोषण और शासन हेतु नवीन रणनीतियों के अभाव में, शहरों को जल की कमी, बाढ़ और संदूषण के चक्र का सामना करना पड़ सकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यशहरी जनसंख्या वृद्धि जल की बढ़ती मांग का एक प्राथमिक चालक है।
विज्ञान-तकनीकखराब शहरी जल शासन के द्वितीयक परिणामों के रूप में जल प्रदूषण और बाढ़ की पहचान की गई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते भारतीय शहरों में जल की कमी के प्रबंधन की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। सतत जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक संकट प्रबंधन से परे प्रणालीगत सुधारों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: लैंगिक न्याय को बढ़ावा देनेउद्देश्य से, कर्नाटक सरकार ने उच्च न्यायालय की एक महिला पीठ के समक्ष राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक पूर्णतः महिला कानूनी टीम नियुक्त की है।
कर्नाटक के महाधिवक्ता, शशि किरण शेट्टी ने धारवाड़ पीठ के लिए आदेश जारी किया। धारवाड़ एडवोकेट्स एसोसिएशन के अनुरोध के पश्चात, इस पहल के अंतर्गत तीन खंडपीठों और चार एकल न्यायाधीशों वाली पीठों सहित कुल सात पीठों को शामिल किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानधारवाड़ कर्नाटक राज्य का एक शहर है।
पदअधिवक्ता सामान्य (Advocate-General) राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है।
तथ्यविशेष बैठक में सात पीठ (3 खंडपीठ और 4 एकल-न्यायाधीश) शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय कानूनी प्रणाली में लैंगिक न्याय और महिला सशक्तिकरण की प्राप्ति में संस्थागत प्रतिनिधित्व के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: अस्पतालों और बहुमंजिला इमारतों में हाल ही में हुई शहरी अग्नि घटनाओं ने तेजी से विकसित होते भारतीय शहरों में पुराने अग्नि सुरक्षा नियमों और खंडित प्रवर्तन तंत्र से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को रेखांकित किया है।
राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) अग्नि सुरक्षा हेतु तकनीकी मानक प्रदान करती है, किंतु इसमें एक एकीकृत राष्ट्रीय प्रवर्तन तंत्र का अभाव है। वर्तमान में, इसका निरीक्षण स्थानीय निकायों, विद्युत निरीक्षकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच खंडित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाNational Building Code (NBC): भारत में भवन सुरक्षा और अग्नि रोकथाम के लिए तकनीकी मानक प्रदान करता है।
तथ्यतेजी से विस्तारित होते महानगरीय क्षेत्रों में मिश्रित भूमि उपयोग और संकीर्ण सड़कें शहरी अग्नि जोखिमों को बढ़ाती हैं।
विज्ञान-तकनीकप्रस्तावित सुधारों में वास्तविक समय की आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए माइक्रो-फायर स्टेशन और स्मार्ट टेक्नोलॉजी एकीकरण शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में तीव्र शहरीकरण और खंडित विनियामक निरीक्षण किस प्रकार शहरी अग्नि जोखिमों में योगदान देते हैं? अग्नि सुरक्षा प्रवर्तन को सुव्यवस्थित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 2027 की जनगणना के स्व-गणना (self-enumeration) चरण का शुभारंभ किया और इसके लिए एक डिजिटल पंजीकरण तंत्र पेश किया।
2027 की जनगणना का स्व-गणना (self-enumeration) चरण 31 जुलाई, 2026 तक सक्रिय रहेगा। सुरक्षित और सटीक डेटा संग्रहण सुनिश्चित करनेके लिए, नागरिक पहली बार एक ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्य2027 की जनगणना का स्व-गणना (self-enumeration) चरण 31 जुलाई, 2026 को समाप्त होने वाला है।
विज्ञान-तकनीक2027 की जनगणना सुरक्षित नागरिक पंजीकरण के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप पेश करती है।
पदलॉन्च के दौरान, राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर राज्य के राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जनगणना में डिजिटल स्व-गणना (digital self-enumeration) की ओर संक्रमण किस प्रकार डेटा की सटीकता को बढ़ा सकता है, तथा इस प्रक्रिया में डेटा गोपनीयता और डिजिटल विभाजन से संबंधित चिंताओं के समाधान के उपायों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि केवल भूमि रिकॉर्ड भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं होते हैं, जिससे संपत्ति के स्वामित्व बनाम राष्ट्रीयता की कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस दावे को खारिज कर दिया है कि विदेशी नागरिक भारत में संपत्ति खरीदकर स्वतः नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं। यह निर्णय नासिर मौल्ला, जो एक कथित बांग्लादेशी घुसपैठिये हैं, की हिरासत से संबंधित एक याचिका के दौरान दिया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यभारत में भूमि स्वामित्व गैर-नागरिकों को स्वचालित रूप से नागरिकता अधिकार प्रदान नहीं करता है।
स्थानकलकत्ता उच्च न्यायालय: पश्चिम बंगाल राज्य का एक उच्च न्यायालय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सीमा पार प्रवास के प्रबंधन के संदर्भ में, संपत्ति के स्वामित्व और नागरिकता के अधिकारों के बीच अंतर करने के कानूनी और सुरक्षा निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के विरुद्ध नस्लीय भेदभाव से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई करने में विफल रहने के कारण न्यायालय द्वारा गठित निगरानी समिति की आलोचना की।
जातीय हिंसा के विरुद्ध कार्यवाही हेतु 2014 में निडो तानिया की मृत्यु के पश्चात एक निगरानी समिति का गठन किया गया था। इस समिति में विभिन्न सरकारी विभागों और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं। उच्चतम न्यायालय ने एक विशिष्ट घटना पर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें ईमेल संचार के बावजूद शिकायतकर्ता की शिकायत का समाधान नहीं किया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थानिगरानी समिति एक न्यायालय-आदेशित निकाय है जिसका कार्य पूर्वोत्तर भारतीय लोगों के विरुद्ध होने वाले नस्लीय भेदभाव को संबोधित करना है।
तथ्यसमिति का अधिदेश (mandate) 2014 में निडो तानिया की मृत्यु के बाद उत्पन्न हुआ था।
पदन्यायमूर्ति संजय कुमार ने समिति की प्रभावकारिता पर सवाल उठाने वाली कार्यवाही की अध्यक्षता की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में क्षेत्रीय भेदभाव को दूर करने और अल्पसंख्यक आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निहित संस्थागत चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने भारतीय शहरों में महिला श्रम शक्ति भागीदारी में वृद्धि दर्ज की है, जो शहरी कार्यबल में लैंगिक समानता के मार्ग में मौजूद निरंतर संरचनात्मक बाधाओं को रेखांकित करती है।
भारत के दस लाख से अधिक की जनसंख्या वाले शहरों में महिला श्रम बल भागीदारी 2017-18 में 19.8% से बढ़कर 2025 में 27.2% हो गई है। इस वृद्धि के बावजूद, पुरुष भागीदारी दर की तुलना में लैंगिक अंतराल अभी भी महत्वपूर्ण रूप से बना हुआ है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यमिलियन-प्लस शहरों में महिला श्रम बल भागीदारी: 2025 तक 27.2%।
तथ्यमिलियन-प्लस शहरों में महिला श्रम बल भागीदारी: 2017-18 में 19.8%।
संस्थाNational Statistics Office (NSO) इन श्रम आंकड़ों की रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार निकाय है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में श्रम बाजार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के रुझानों के बावजूद, शहरी श्रम बाजारों में उनकी पूर्ण भागीदारी को बाधित करने वाले संरचनात्मक और सामाजिक-आर्थिक अवरोधों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: NFHS-5 के आंकड़े दर्शाते हैं कि 84% विवाहित महिलाएं दैनिक भोजन के लिए प्राथमिक निर्णयकर्ता बनी हुई हैं, जो बदलते शहरी परिवेश के बावजूद पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं की निरंतरता को रेखांकित करता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) यह दर्शाता है कि यदि खाना पकाने के कार्य को अपर्याप्त माना जाता है, तो विवाहित महिलाओं को संभावित शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ सकता है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की 2024 की एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सामाजिक मानदंडों के बावजूद, जो उन्हें प्राथमिक रसोइया के रूप में प्राथमिकता देते हैं, महिलाएं पुरुषों की तुलना में अवैतनिक घरेलू श्रम पर कम समय व्यतीत करती हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यNFHS-5 (2019-21) के अनुसार, 84% विवाहित महिलाएँ दैनिक भोजन का निर्णय लेती हैं।
संस्थासांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने घरेलू श्रम पर 2024 की रिपोर्ट जारी की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: समकालीन भारत में गहरी पैठी पितृसत्तात्मक मानदंडों और घरेलू श्रम के 'दोहरे बोझ' के महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: जनगणना कार्यालय 2027 की जनगणना के जनसंख्या गणना चरण के लिए एक पूर्व-परीक्षण (pre-test) आयोजित कर रहा है, जिसमें निवासियों के लिए अपनी जाति दर्ज करने हेतु एक 'ओपन कॉलम' शामिल है, जो 1931 के बाद पहली बार है।
जनगणना कार्यालय फरवरी 2027 से शुरू होने वाले जनसंख्या गणना (PE) चरण के लिए एक पूर्व-परीक्षण (pre-test) आयोजित कर रहा है। जाति पंजीकरण हेतु एक खुले कॉलम वाले इस पूर्व-परीक्षण के जुलाई 20, 2024 तक संपन्न होने का लक्ष्य रखा गया है। यह कार्यप्रणाली 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) के अनुरूप है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यजनगणना का अगला जनसंख्या गणना (PE) चरण फरवरी 2027 में शुरू होने वाला है।
तथ्यव्यापक जातिगत डेटा को शामिल करने वाली अंतिम जनगणना 1931 में आयोजित की गई थी।
संस्थाभारत की जनगणना (Census of India) राष्ट्रीय जनसंख्या गणना आयोजित करने के लिए प्राथमिक एजेंसी है।
तथ्यजाति पंजीकरण के लिए 'ओपन कॉलम' पद्धति का उपयोग पूर्व में 2011 की Socio-Economic Caste Census (SECC) में किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आगामी जनगणना में जातिगत डेटा को शामिल करने के सामाजिक-राजनीतिक निहितार्थों और समावेशी कल्याणकारी नीतियां तैयार करने में इसकी भूमिका पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: गृह मंत्रालय ने 2011 की जनगणना के बाद से जनसंख्या परिवर्तनों और अवैध आप्रवासन का अध्ययन करने के लिए उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकीय परिवर्तन समिति (HLCDC) का गठन किया है।
HLCDC की अध्यक्षता सेवानिवृत्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर द्वारा की जाती है। इस निकाय को वर्तमान जनसांख्यिकीय आंकड़ों की तुलना 2011 की जनगणना से करने तथा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से प्राप्त मतदाता सूची के आंकड़ों का विश्लेषण करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाHLCDC: गृह मंत्रालय द्वारा जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए गठित एक समिति।
पदन्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर: सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और HLCDC के अध्यक्ष।
तथ्यतुलना के लिए समिति का आधार 2011 की जनगणना का डेटा है।
संस्थाभारतीय निर्वाचन आयोग (ECI): वह निकाय जिससे समिति मतदाता सूची का डेटा मांग करेगी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में अवैध प्रवास के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की निगरानी और प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
चर्चा में क्यों: जनसांख्यिकीय और संरचनात्मक डेटा एकत्र करने हेतु केरल के एर्णाकुलम में जनगणना 2027 का गृह-सूचीकरण और आवास जनगणना चरण प्रारंभ हो गया है।
घर-सूचीकरण चरण के लिए केरल में लगभग 6,500 गणनाकार तैनात किए गए हैं। डेटा संग्रहण की इस प्रक्रिया में सांख्यिकीय उपयोग हेतु भवन संख्या, निवासियों के विवरण और आवास की विशेषताओं को दर्ज करना शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यCensus 2027: भारत की आगामी दशकीय जनगणना, जिसे 2027 तक पूरा होने की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
स्थानएर्नाकुलम: केरल राज्य का एक जिला जहाँ हाउस-लिस्टिंग फील्डवर्क शुरू हो गया है।
तथ्यहाउस-लिस्टिंग चरण: जनगणना का एक विशिष्ट चरण जिसका उद्देश्य आवासीय संरचनाओं और अधिभोग का मानचित्रण करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सामाजिक-आर्थिक नीतियों और बुनियादी ढाँचे के नियोजन के निर्धारण में सटीक जनगणना आंकड़ों के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच निरंतर जारी सांप्रदायिक हिंसा के कारण दैनिक जीवन और आंतरिक गतिशीलता के संरचनात्मक पुनर्गठन की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
इस संघर्ष के परिणामस्वरूप अनौपचारिक 'आंतरिक सीमाओं' का निर्माण हुआ है, जहाँ विभिन्न समुदायों के निवासी एक-दूसरे के साथ संवाद करने से बचते हैं। इसके कारण स्थानीय स्तर पर आर्थिक संकुचन हुआ है, जहाँ व्यापारियों को सीमित नेटवर्क तक ही सीमित कर दिया गया है और छात्रों को स्थानीय स्कूली शिक्षा तक ही बाध्य होना पड़ रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानमणिपुर: भारत का एक उत्तर-पूर्वी राज्य जहाँ महत्वपूर्ण जातीय और सांप्रदायिक तनाव का अनुभव हो रहा है।
तथ्ययह संघर्ष मुख्य रूप से नागा और कुकी समुदायों के बीच है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मणिपुर जैसे विविधतापूर्ण क्षेत्रों में लंबे समय तक चलने वाला सांप्रदायिक संघर्ष किस प्रकार समाज के 'स्थानिक पृथक्करण' (spatial segregation) और सामाजिक एकजुटता के क्षरण का कारण बन सकता है, चर्चा कीजिए।