नस्लीय भेदभाव पर कार्रवाई न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को फटकारा
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चर्चा में क्यों
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के विरुद्ध नस्लीय भेदभाव से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई करने में विफल रहने के कारण न्यायालय द्वारा गठित निगरानी समिति की आलोचना की।
पृष्ठभूमि
जातीय हिंसा के विरुद्ध कार्यवाही हेतु 2014 में निडो तानिया की मृत्यु के पश्चात एक निगरानी समिति का गठन किया गया था। इस समिति में विभिन्न सरकारी विभागों और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं। उच्चतम न्यायालय ने एक विशिष्ट घटना पर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें ईमेल संचार के बावजूद शिकायतकर्ता की शिकायत का समाधान नहीं किया गया था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थानिगरानी समिति एक न्यायालय-आदेशित निकाय है जिसका कार्य पूर्वोत्तर भारतीय लोगों के विरुद्ध होने वाले नस्लीय भेदभाव को संबोधित करना है।
- तथ्यसमिति का अधिदेश (mandate) 2014 में निडो तानिया की मृत्यु के बाद उत्पन्न हुआ था।
- पदन्यायमूर्ति संजय कुमार ने समिति की प्रभावकारिता पर सवाल उठाने वाली कार्यवाही की अध्यक्षता की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में क्षेत्रीय भेदभाव को दूर करने और अल्पसंख्यक आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निहित संस्थागत चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
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