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भाग I · स्था. 11.2025 
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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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जस्टिस रमेश ने तमिलनाडु सरकार को सड़कों से जाति के नाम हटाने का निर्देश दिया

GS1इतिहास · समाज · भूगोल· Communalism, regionalism & secularism· Mains·

चर्चा में क्यों

मद्रास उच्च न्यायालय ने सामाजिक भेदभाव को रोकने और गरिमा बनाए रखनेके उद्देश्य से तमिलनाडु सरकार को सड़कों से जाति-आधारित नाम हटाने का निर्देश दिया है।

पृष्ठभूमि

मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन. रमेश ने टिप्पणी की कि 1978 से जारी सरकारी आदेशों के बावजूद, सड़कों के नामकरण में जातिगत नाम निरंतर बने हुए हैं। न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार से इस विषय पर एक स्थिति रिपोर्ट मांगी है और ऐसे नामों को पूर्णतः हटाने के लिए स्वतः संज्ञान (suo motu) लेकर मामला दर्ज किया है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • स्थानमद्रास उच्च न्यायालय: चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित।
  • तथ्यतमिलनाडु में सड़कों के नामकरण के संबंध में सरकारी आदेश 1978 के हैं।
  • पदन्यायमूर्ति एन. रमेश: मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश।

मेन्स के लिए

Q. भारत के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में जाति-आधारित पहचानों की निरंतरता सामाजिक एकजुटता और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की गरिमा को किस प्रकार प्रभावित करती है, इसका विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • social stratification
  • constitutional morality
  • administrative accountability
  • way forward: inclusive urban planning

कीवर्ड: social stratification · constitutional morality · identity politics · administrative oversight · social justice

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: The Hindu ↗यह भी: GS2 · Judiciary & landmark judgments

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।