पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी करेंट अफेयर्स — यूपीएससी
यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 525 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: प्रजातियां, संरक्षित क्षेत्र एवं आर्द्रभूमि (209) · जलवायु परिवर्तन एवं अंतर्राष्ट्रीय समझौते (117) · प्रदूषण (वायु, जल, प्लास्टिक) (96) · जैव विविधता एवं संरक्षण (83) · पर्यावरण कानून, EIA एवं संस्थाएं (20)
चर्चा में क्यों: वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर में दुनिया के सबसे बड़े ज्ञात व्हेल कब्रिस्तान की खोज की है, जो गहरे समुद्र की जैव विविधता में 'व्हेल फॉल्स' (whale falls) की भूमिका को रेखांकित करता है।
यह कब्रिस्तान हिंद महासागर के डायमंतिना क्षेत्र में 7,000 मीटर की गहराई तक फैले 1,200 किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित है। इसमें लगभग 500 कंकाल मौजूद हैं जो 5.3 मिलियन वर्ष पुराने हैं, जो अब विलुप्त हो चुकी व्हेल प्रजाति की उपस्थिति का संकेत देते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानडायमंतिना ज़ोन (Diamantina Zone): हिंद महासागर का एक गहरा समुद्री क्षेत्र जहाँ इस कब्रिस्तान की खोज की गई थी।
पर्यावरणव्हेल फॉल (Whale fall): एक ऐसी घटना जहाँ व्हेल का शव समुद्र के तल में डूब जाता है, जो गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (deep-sea ecosystems) के लिए पोषक तत्वों का एक विशाल स्रोत प्रदान करता है।
तथ्यइस खोज में लगभग 5.3 मिलियन वर्ष पुराने कंकाल शामिल हैं।
विज्ञान-तकनीकFendouzhe: चीनी अकादमी द्वारा अभियान के लिए उपयोग किया जाने वाला एक गहरे समुद्र का सबमर्सिबल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: गहरे समुद्र की जैव विविधता को बनाए रखने में 'व्हेल फॉल्स' (whale falls) के पारिस्थितिक महत्व और इन समुद्री कार्बन सिंकों के संरक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: सिक्किम में वन अधिकारियों ने 1999 के बाद पहली बार मिशमी ताकिन (Budorcas taxicolor) के एक झुंड को प्रलेखित किया है, जो हिमालयी क्षेत्र में जैव विविधता निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है।
मिशमी ताकिन एक दुर्लभ बकरी-एंटीलोप प्रजाति है, जिसे IUCN रेड लिस्ट में 'अतिसंवेदनशील' (Vulnerable) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है। सिक्किम में आठ सदस्यों के एक झुंड को दर्ज किया गया है, जो उस विशिष्ट क्षेत्र में अब तक प्रलेखित सबसे बड़े समूह का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणमिशमी ताकिन (Budorcas taxicolor) हिमालयी क्षेत्र की एक बकरी-एंटीलोप प्रजाति है।
पर्यावरणMishmi Takin को वर्तमान में IUCN Red List में 'Vulnerable' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
स्थानसिक्किम वह राज्य है जहाँ लगभग 3 दशकों के अंतराल के बाद यह दृश्य देखा गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बढ़ते आवास विखंडन और मानव-जनित दबावों के बीच मिशमी ताकिन जैसी दुर्लभ हिमालयी प्रजातियों के संरक्षण में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: UNICEF द्वारा जारी एक रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि विश्व स्तर पर लगभग सभी बच्चे कम से कम एक जलवायु जोखिम के संपर्क में हैं, जो हरित परिवर्तन (green transition) की तत्काल आवश्यकता पर बल देती है।
UNICEF की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर 50% बच्चे एक साथ तीन या अधिक जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं। यह रिपोर्ट पेरिस समझौते के अनुरूप वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°सी. तक सीमित करने की वकालत करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
अंतर्राष्ट्रीय संगठनUNICEF: United Nations International Children's Emergency Fund।
तथ्यविश्व स्तर पर लगभग 100% बच्चे कम से कम एक जलवायु जोखिम (climate hazard) के संपर्क में हैं।
तथ्यविश्व स्तर पर 50% बच्चे तीन या अधिक जलवायु खतरों (climate hazards) का सामना करते हैं।
विज्ञान-तकनीकपेरिस समझौता लक्ष्य: वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°सी. तक सीमित करना।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जलवायु परिवर्तन किस प्रकार बच्चों और संवेदनशील आबादी को असमान रूप से प्रभावित करता है, इस पर चर्चा कीजिए और इन जोखिमों को कम करने के लिए त्वरित हरित संक्रमण की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिए।
चर्चा में क्यों: वैज्ञानिकों ने खोज की है कि आर्कटिक महासागर में पिघलते हुए हिमखंड समुद्र के तल तक चट्टानों का परिवहन कर रहे हैं, जिससे 'ड्रॉपस्टोन्स' (dropstones) का निर्माण हो रहा है, जो कोरल और स्पंज के लिए नए गहरे समुद्री आवासों का निर्माण करते हैं।
अल्फ्रेड वेगेनर संस्थान और वुड्स होल ओशनोग्राफिक संस्थान के शोधकर्ताओं ने 2,500 मीटर की गहराई पर इन आवासों की पहचान की है। इस प्रक्रिया में मलबे से लदे हिमखंड समुद्र तल पर चट्टानों को जमा करते हैं, जिससे समुद्री जीवन के लिए समुद्र तल कठोर सतहों में परिवर्तित हो जाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणड्रॉपस्टोन्स (Dropstones): हिमखंडों द्वारा समुद्र तल तक पहुँचाए गए पत्थर, जो समुद्री जीवों के लिए कठोर आधार (substrates) निर्मित करते हैं।
स्थानआर्कटिक महासागर: जलवायु परिवर्तन के कारण हिमखंडों के पिघलने से तीव्र पारिस्थितिकी तंत्र परिवर्तन का अनुभव करने वाला क्षेत्र।
विज्ञान-तकनीकसमुद्री जीव: स्पंज और कोरल इन नव-निर्मित गहरे समुद्री आवासों में बसने वाली प्राथमिक प्रजातियां हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आर्कटिक क्रायोस्फेरिक गतिशीलता (cryospheric dynamics) में जलवायु-प्रेरित परिवर्तनों से गहरे समुद्र की जैव विविधता और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र किस प्रकार प्रभावित हो रहे हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: उपग्रह अवलोकनों से यह ज्ञात हुआ है कि औसत से 20°सी. अधिक तापमान के कारण बेलिंग्सहौसेन सागर में फ्रांस के आकार के क्षेत्र में शीतकालीन समुद्री बर्फ गायब हो गई है।
पश्चिम अंटार्कटिका के निकट स्थित बेलिंग्सहौसेन सागर में सामान्य शीतकालीन हिम आवरण का निर्माण नहीं हो सका। यह घटना अंटार्कटिक प्रायद्वीप पर रिकॉर्ड-तोड़ हीटवेव (ऊष्मीय लहर) के साथ मेल खाती है, जो थ्वाइट्स और पाइन आइलैंड ग्लेशियरों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानबेलिंग्सहौसेन सागर (Bellingshausen Sea): यह पश्चिम अंटार्कटिका के तट पर स्थित है।
पर्यावरणथ्वाइट्स और पाइन आइलैंड ग्लेशियर: वैश्विक समुद्र के जलस्तर में वृद्धि के प्रमुख कारक।
तथ्यअंटार्कटिक शीतकाल के तापमान में ऐतिहासिक औसत से 20°सी. अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
विज्ञान-तकनीकएल्बेडो प्रभाव (Albedo Effect): समुद्री बर्फ सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करती है; इसकी कमी से सौर ऊर्जा का अवशोषण बढ़ जाता है और तापमान में और अधिक वृद्धि होती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंटार्कटिक समुद्री बर्फ के कम होने से वैश्विक तापन में उत्पन्न होने वाले सकारात्मक फीडबैक लूप और तटीय भूगोल पर इसके प्रभावों की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: दिल्ली में वायु तापमान 43.5°सी. दर्ज किया गया, जबकि सतह का तापमान 64°सी. तक पहुँच गया, जो 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को रेखांकित करता है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली में अधिकतम 43.5°सी. तापमान दर्ज किया। ग्रीनपीस इंडिया ने शहरी क्षेत्रों में 64°सी. तक के सतही तापमान को मापने के लिए थर्मल कैमरों का उपयोग किया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यथर्मल कैमरों द्वारा मापे गए दिल्ली के सतही तापमान (Surface temperatures) 64°सी. तक पहुँच गए।
तथ्यIMD ने दिल्ली में अधिकतम 43.5°सी. तापमान दर्ज किया।
विज्ञान-तकनीकअर्बन हीट आइलैंड (UHI) प्रभाव: मानवीय गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के कारण शहरी क्षेत्रों में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में उच्च तापमान का अनुभव होता है।
पर्यावरणतापीय विकिरण (Thermal radiation): डामर (asphalt) और कंक्रीट जैसी उच्च-तापमान वाली सतहों से मानव शरीर द्वारा अवशोषित ऊष्मा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय महानगरों में तीव्र शहरीकरण और 'अर्बन हीट आइलैंड' (शहरी ताप द्वीप) प्रभाव किस प्रकार सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और अधिक गंभीर बनाते हैं, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: केरल वन विभाग बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और विधायी संशोधनों के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक 100 दिवसीय कार्ययोजना शुरू कर रहा है।
केरल वन विभाग की योजना में सौर ऊर्जा संचालित फेंसिंग, सड़क सुरक्षा हेतु 'विस्टा क्लीयरेंस' परियोजना और उपग्रह आधारित त्वरित प्रतिक्रिया दल शामिल हैं। राज्य सरकार विशेष रूप से जंगली सूअर और बोनट मकाक के नियंत्रण को लक्षित करते हुए कानूनी संशोधनों का प्रस्ताव देने का इरादा रखती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकवन्यजीवों की गतिविधियों की वास्तविक समय (real-time) में निगरानी के लिए सैटेलाइट रैपिड रिस्पांस टीमों को तैनात किया जा रहा है।
तथ्यकार्य योजना के कार्यान्वयन की अवधि 100 दिनों के लिए निर्धारित है।
पर्यावरणकेरल क्षेत्र में संघर्ष के प्राथमिक प्रजातियों के रूप में जंगली सूअर और बोनट मकाक (bonnet macaques) की पहचान की गई है।
संस्थावन विभाग वन्यजीव प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन के लिए प्राथमिक नोडल एजेंसी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: केरल जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आवश्यक बहुआयामी दृष्टिकोण की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: मेघालय में नियांतसर सिकाडा (niangtaser cicada) का उद्भव एक दुर्लभ जैविक घटना के रूप में रेखांकित किया गया है, जो मानसून चक्र और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।
नियांगटासर सिकाडा (niangtaser cicada) मेघालय में पहचानी गई एक नवीन प्रजाति है, जो चार वर्ष के चक्र के लिए भूमिगत रहती है। इसका उद्भव वार्षिक मानसून के साथ मेल खाते विशिष्ट मृदा आर्द्रता और तापमान परिवर्तनों द्वारा प्रेरित होता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पर्यावरणNiangtaser cicada: भारत के मेघालय में पहचानी गई एक नई कीट प्रजाति।
तथ्यNiantaser cicada एक चार-वर्षीय भूमिगत उद्भव चक्र (underground emergence cycle) का पालन करता है।
स्थानसैडेन गाँव, मेघालय: नियांतसर (niangtaser) सिकाडा के उद्भव का प्राथमिक स्थल।
विज्ञान-तकनीकपर्यावरणीय कारक: मृदा की नमी और तापमान में परिवर्तन सिकाडा (cicada) के उद्भव चक्र को निर्धारित करते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्थानीय सांस्कृतिक पहचानों को आकार देने में स्वदेशी जैव विविधता के महत्व और पूर्वोत्तर भारत में ऐसे विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु में तापमान 40°सी. से अधिक होने के साथ ही भीषण ग्रीष्म लहर जून तक विस्तारित हो गई है, जिसके कारण संवेदनशील आबादी की सुरक्षा हेतु 'हीट एक्शन प्लान 2026' को लागू किया गया है।
तमिलनाडु सरकार ने अत्यधिक गर्मी के प्रभाव को कम करनेके लिए आधिकारिक रूप से 'हीट एक्शन प्लान 2026' लागू किया है। इस योजना में भेद्यता मानचित्रण (vulnerability mapping) और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ शामिल हैं, जो अत्यधिक गर्मी के तनाव का सामना करने वाले गिग श्रमिकों और वृद्ध निवासियों की सहायता करेंगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यविस्तारित ग्रीष्म अवधि के दौरान तमिलनाडु के कई जिलों में तापमान 40°सी. से अधिक हो गया।
योजनाHeat Action Plan 2026: हीट स्ट्रेस (heat stress) के शमन के लिए तमिलनाडु की एक राज्य-स्तरीय पहल।
विज्ञान-तकनीकएल निनो (El Nino): एक जलवायु पैटर्न जिसमें पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान बढ़ जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बढ़ते हीट स्ट्रेस (ऊष्मीय तनाव) के सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और संवेदनशील शहरी आबादी की सुरक्षा में राज्य-स्तरीय 'हीट एक्शन प्लान' की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।
चर्चा में क्यों: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान ने अपनी पहली वैज्ञानिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें विश्व स्तर पर संकटग्रस्त 'ग्रेटर हॉग बैजर' (Greater Hog Badger) की समृद्ध जनसंख्या की पुष्टि की गई है।
यह अध्ययन काजीरंगा के टाइगर सेल द्वारा 'वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट' और 'द फिशिंग कैट प्रोजेक्ट' के सहयोग से संपन्न किया गया था। इस अध्ययन में लगभग 1,100 वर्ग किमी के क्षेत्र के भीतर कम से कम 55 'ग्रेटर हॉग बैजर' (greater hog badger) के व्यक्तियों का अनुमान लगाया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणग्रेटर हॉग बैजर (Greater hog badger): एक वैश्विक रूप से संवेदनशील स्तनधारी प्रजाति जो वन्यजीवों में पाई जाती है।
स्थानकाजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व: भारत के असम राज्य में स्थित है।
तथ्यजनसंख्या अनुमान: 1,100 वर्ग किमी क्षेत्र में कम से कम 55 व्यक्तियों की पहचान की गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: काजीरंगा जैसे संरक्षित क्षेत्रों में दुर्लभ और वैश्विक रूप से संवेदनशील प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने में वैज्ञानिक निगरानी और आवास संरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत नदियों में शून्य निर्वहन (zero discharge) के लक्ष्य को प्राप्त करनेके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ड्रोन सर्वेक्षण और GIS-आधारित डैशबोर्ड का उपयोग कर रही है।
यह पहल कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज सहित विभिन्न जिलों में स्थित प्रमुख नदी प्रणालियों के 400 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर करती है। यह परियोजना जल निकासी बिंदुओं (drain discharge points) के मानचित्रण हेतु भू-स्थानिक तकनीक (geospatial technology) का उपयोग करती है और बेसिन-स्तरीय निगरानी के लिए डेटा को एक लाइव GIS-आधारित 'ड्रेन डैशबोर्ड' में फीड करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNational Mission for Clean Ganga (NMCG) भारत में नदी पुनरुद्धार के लिए नोडल एजेंसी है।
तथ्यड्रोन सर्वेक्षण पहल ने पहले ही 400 किलोमीटर से अधिक नदी प्रणालियों की मैपिंग पूरी कर ली है।
स्थानड्रोन सर्वेक्षण में शामिल प्रमुख जिले कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, हरदोई, बलिया, मेरठ और मिर्जापुर हैं।
विज्ञान-तकनीकGIS (Geographic Information System) का उपयोग वास्तविक समय में बेसिन-स्तरीय प्रदूषण की निगरानी और ड्रेन मैपिंग के लिए किया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और ड्रोन निगरानी के एकीकरण से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जैसे नदी पुनरुद्धार अभियानों की प्रभावकारिता को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: NOAA ने एक संभावित रिकॉर्ड-तोड़ एल नीनो (El Niño) की शुरुआत की घोषणा की है, जिसके वैश्विक मौसम के पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करने और ग्लोबल वार्मिंग को और अधिक गंभीर बनाने की संभावना है।
नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने आधिकारिक रूप से 'एल नीनो' की शुरुआत की घोषणा की है, जिसकी विशेषता पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में सामान्य से अधिक समुद्री सतह का तापमान है। इस विशिष्ट घटना के रिकॉर्डों में सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक होने का अनुमान है, जिससे इंडोनेशिया और साहेल क्षेत्र में गंभीर सूखे का जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकEl Niño: एक जलवायु पैटर्न जिसमें पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान बढ़ जाता है।
तथ्यNOAA: El Niño जैसी जलवायु घटनाओं की निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार प्राथमिक अमेरिकी एजेंसी।
पर्यावरणसाहेल क्षेत्र: अफ्रीका का एक संक्रमण क्षेत्र जो तीव्र El Niño वर्षों के दौरान गंभीर सूखे के प्रति संवेदनशील है।
विज्ञान-तकनीकपॉजिटिव फीडबैक लूप: तीव्र El Niño घटनाएं वैश्विक औसत तापमान में महत्वपूर्ण वृद्धि का कारण बन सकती हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्लोबल साउथ (Global South) की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्थाओं की संवेदनशीलता को बढ़ाने में एल नीनो (El Niño) जैसी चरम जलवायु घटनाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए और इसके शमन हेतु उपयुक्त रणनीतियों का सुझाव दीजिए।
चर्चा में क्यों: हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने यमुना प्रदूषण को कम करने के लिए सीवेज-उपचार और औद्योगिक-अपशिष्ट-प्रबंधन परियोजनाओं को पूरा करने की समय-सीमा दिसंबर 2027 निर्धारित की है।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सूचित किया है कि 425 MLD की अतिरिक्त सीवेज उपचार क्षमता और 150 MLD की औद्योगिक अपशिष्ट उपचार क्षमता हेतु परियोजनाएं वर्तमान में कार्यान्वित की जा रही हैं। इस पहल के अंतर्गत यमुना जलग्रहण क्षेत्र में STPs, CETPs, सूक्ष्म-STPs और अपशिष्ट-टैपिंग बुनियादी ढांचे का विकास सम्मिलित है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्य425 MLD: हरियाणा में वर्तमान में परियोजना कार्यान्वयन के तहत अतिरिक्त सीवेज उपचार क्षमता।
तथ्य150 MLD: हरियाणा में वर्तमान में परियोजना कार्यान्वयन के अधीन औद्योगिक अपशिष्ट उपचार क्षमता।
स्थानयमुना जलग्रहण क्षेत्र (Yamuna catchment): हरियाणा सरकार द्वारा प्रदूषण-नियंत्रण परियोजनाओं के लिए लक्षित भौगोलिक क्षेत्र।
संस्थाहरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: अपशिष्ट-निकासी और उपचार बुनियादी ढांचे पर प्रगति की रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार निकाय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सीमापारीय नदी प्रदूषण के प्रबंधन में आने वाली संस्थागत और तार्किक चुनौतियों का यमुना नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य के विशेष संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के ऊर्जा संसाधन मंत्री सी.टी.आर. निर्मलकुमार ने पवन, सौर और हरित हाइड्रोजन के माध्यम से राज्य के स्वच्छ ऊर्जा की ओर परिवर्तन को गति देने के लिए एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र दृष्टिकोण (ecosystem approach) की घोषणा की।
तमिलनाडु सरकार पवन, सौर, पंपयुक्त जलविद्युत और बैटरी भंडारण प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने की योजना बना रही है। इस पहल का उद्देश्य निवेश को आकर्षित करने के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे का लाभ उठाना और राज्य को अपतटीय पवन ऊर्जा एवं हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतमिलनाडु के स्वच्छ ऊर्जा पोर्टफोलियो में पवन, सौर, पंप्ड हाइड्रो और बैटरी स्टोरेज शामिल हैं।
विज्ञान-तकनीकऑफशोर विंड और ग्रीन हाइड्रोजन को राज्य के ऊर्जा संक्रमण के लिए प्रमुख फोकस क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।
पदसी.टी.आर. निर्मलकुमार तमिलनाडु में ऊर्जा संसाधन और कानून मंत्री हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्य-संचालित पहलों की भूमिका पर चर्चा कीजिए। तमिलनाडु द्वारा बैटरी भंडारण और हरित हाइड्रोजन के एकीकरण के मॉडल को इस दिशा में एक आधारभूत रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) के रूप में कैसे देखा जा सकता है? चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: दिल्ली उच्च न्यायालय ने जयपुर पोलो ग्राउंड के पुनर्विकास के लिए केंद्र सरकार की योजना पर चिंता व्यक्त की है और हरित क्षेत्रों के नुकसान तथा बेदखली के आदेश के पीछे के उद्देश्यों पर प्रश्न उठाए हैं।
केंद्र सरकार ने 'व्यापक सार्वजनिक उद्देश्य' हेतु जयपुर पोलो ग्राउंड के पुनर्विकास के लिए 'सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों का निष्कासन) अधिनियम' के अंतर्गत निष्कासन आदेश जारी किया था। उच्च न्यायालय ने इस आदेश के निष्पादन पर 12 जून, 2026 तक रोक लगा दी है, और साथ ही जिला न्यायालय को IPA द्वारा प्रस्तुत स्थगन आवेदन पर सुनवाई करने का निर्देश दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकPublic Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act: केंद्र सरकार द्वारा बेदखली का आदेश जारी करने के लिए उपयोग किया जाने वाला कानून।
स्थानजयपुर पोलो ग्राउंड: दिल्ली में प्रस्तावित पुनर्विकास और हरित क्षेत्र के नुकसान का स्थल।
संस्थादिल्ली उच्च न्यायालय: न्यायिक निकाय जिसने 12 जून तक बेदखली के आदेश पर रोक लगा दी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दिल्ली जैसे तेजी से विस्तार कर रहे महानगरीय शहरों में शहरी बुनियादी ढाँचे के विकास और शहरी हरित क्षेत्रों के संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: केंद्र द्वारा प्रस्तावित ₹91,000 करोड़ की ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्यों के अभाव और PPPAC द्वारा 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (Viability Gap Funding) से इनकार करने के कारण जांच के घेरे में है।
इस परियोजना के अंतर्गत ग्रेट निकोबार द्वीप पर एक बंदरगाह, हवाई अड्डा, बिजली संयंत्र और एक टाउनशिप का निर्माण प्रस्तावित है। वैज्ञानिकों ने प्राथमिक वर्षावनों के अपरिवर्तनीय ह्रास के प्रति चेतावनी दी है, वहीं जनजातीय परिषदों ने सहमति और पुनर्वास के संबंध में पूर्ण प्रकटीकरण के अभाव का आरोप लगाया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना की अनुमानित लागत ₹91,000 करोड़ है।
संस्थाPPPAC (Public-Private Partnership Advisory Council) ने परियोजना के लिए Viability Gap Funding से इनकार कर दिया।
स्थानग्रेट निकोबार द्वीप प्रस्तावित बंदरगाह, हवाई अड्डे और टाउनशिप विकास का स्थल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास और नाजुक द्वीप पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण तथा स्वदेशी अधिकारों के बीच उत्पन्न होने वाले संघर्ष का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व ने गुवाहाटी विश्वविद्यालय के सहयोग से एक सर्वेक्षण आयोजित किया, जिसमें 30 रैप्टर और छह सारस प्रजातियों की उपस्थिति का पता चला है।
फरवरी के अंत और मार्च के मध्य के दौरान आयोजित सर्वेक्षण में 30 प्रजातियों के अंतर्गत 217 व्यक्तिगत रैप्टर्स (raptors) और छह प्रजातियों के अंतर्गत 266 व्यक्तिगत स्टॉर्क (storks) दर्ज किए गए। इन प्रजातियों की सर्वाधिक संख्या पूर्वी असम वन्यजीव प्रभाग में दर्ज की गई।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पर्यावरणपल्लास फिश ईगल: इसे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में निवास करने वाली एक लुप्तप्राय पक्षी प्रजाति के रूप में पहचाना गया है।
स्थानपूर्वी असम वन्यजीव मंडल (Eastern Assam Wildlife Division): सर्वेक्षण में रैप्टर (raptor) और स्टॉर्क (stork) की सर्वाधिक प्रजातियों को दर्ज किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पक्षियों की जैव विविधता के संरक्षण में काजीरंगा जैसे संरक्षित क्षेत्रों के महत्व और वन्यजीव निगरानी में शैक्षणिक-संस्थागत सहयोग की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: अवैध वन्यजीव तस्करी पर अंकुश लगानेके लिए, यूनाइटेड सांगटम लिखुम पुमजी (USLP) ने नगालैंड के किपहिरे जिले के 42 गाँवों में पैंगोलिन के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया है।
यूनाइटेड सांगटम लिखुम पुमजी (USLP) सांगटम नागा समुदाय की सर्वोच्च जनजातीय संस्था है। पेंगोलिन को शिकार और तस्करी से बचाने के उद्देश्य से, नागालैंड के किपहिरे जिले के 42 गाँवों में इस पर प्रतिबंध लागू किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणपेंगोलिन (Pangolins) स्तनधारी जीव हैं जिन्हें उनके शल्क (scales) और मांस के लिए तस्करी किया जाता है।
स्थानकिफिरे, नागालैंड राज्य का एक जिला है।
संस्थाUnited Sangtam Likhum Pumji (USLP) सांगटम नागा समुदाय की सर्वोच्च जनजातीय संस्था है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में अवैध वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए समुदाय-आधारित संरक्षण और पारंपरिक कानूनों को राज्य-आधारित वन्यजीव संरक्षण ढाँचों के साथ किस प्रकार एकीकृत किया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में दशकों बाद कैमरा ट्रैप फुटेज में एक 'काराकल' (Caracal) बिल्ली दर्ज की गई है, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने में 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता का परिणाम बताया है।
काराकल भारत की सबसे दुर्लभ जंगली बिल्लियों में से एक है। कुनो राष्ट्रीय उद्यान में इसकी उपस्थिति स्वस्थ शिकार आबादी और एक क्रियाशील पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख संकेतक के रूप में मानी जाती है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पर्यावरणकाराकल: कुनो नेशनल पार्क में दर्ज की गई भारत की दुर्लभ जंगली बिल्लियों में से एक।
तथ्ययह दृश्य दशकों के अंतराल के बाद देखा गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संरक्षित क्षेत्रों में शीर्ष शिकारियों (apex predators) के पुन: परिचय और पारिस्थितिक संतुलन की बहाली किस प्रकार जैव विविधता की दीर्घकालिक स्थिरता में योगदान देती है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु वन विभाग ने 2026 के अनुमान अभ्यास के दौरान नीलगिरी तहर (Nilgiri Tahr) की आबादी में 4.68% की वृद्धि दर्ज की है, जिससे इनकी संख्या बढ़कर 1,364 हो गई है।
जनसंख्या का आकलन 24-27 अप्रैल, 2026 के बीच 14 वन प्रभागों (forest divisions) में किया गया। पोलची वन प्रभाग में सर्वाधिक 438 व्यक्तियों की संख्या दर्ज की गई।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पर्यावरणनिलगिरी तहर: एक संकटग्रस्त प्रजाति (endangered species) जो विशेष रूप से दक्षिणी पश्चिमी घाट में पाई जाती है।
तथ्यतमिलनाडु में नीलगिरी तहर (Nilgiri Tahr) की आबादी: जून 2026 तक 1,364 व्यक्ति।
स्थानपोलच्ची फॉरेस्ट डिवीजन: अध्ययन में नीलगिरी तहर की सबसे अधिक आबादी (438) दर्ज की गई।
तथ्यजनसंख्या वृद्धि: पिछले वर्ष की तुलना में 4.68% की वृद्धि।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च-अक्षांश पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्रों में नीलगिरी तहर के पारिस्थितिक महत्व की चर्चा कीजिए और जैव विविधता संरक्षण में जनसंख्या निगरानी की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।
पारिस्थितिक भूमिका: ऊंचे पहाड़ों के इकोसिस्टम में न्यूट्रिएंट साइकिलिंग में महत्वपूर्ण योगदान
संरक्षण निगरानी: संकटग्रस्त प्रजातियों के प्रबंधन के लिए सिंक्रोनाइज्ड आबादी अनुमान का महत्व
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · लुप्तप्राय प्रजातियां · पोषक तत्व चक्र · आबादी की गतिशीलता · पश्चिमी घाट
चर्चा में क्यों: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 जून, 2026 को केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ ही कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी करते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए हैं।
IMD ने केरल के पांच जिलों के लिए रेड अलर्ट और अन्य राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। केरल और कर्नाटक के लिए 7-20 सेमी के बीच बारिश का अनुमान है, जबकि उत्तर-पूर्वी भारत में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाIMD: इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (India Meteorological Department) मौसम के पूर्वानुमान और मानसून की ट्रैकिंग के लिए आधिकारिक एजेंसी है।
तथ्यदक्षिण-पश्चिम मानसून: केरल और कर्नाटक में 7-20cm बारिश की उम्मीद।
तथ्यरेड अलर्ट: IMD द्वारा केरल के पांच जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के लिए जारी किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रभाव और तटीय राज्यों में मानसून से संबंधित बाढ़ की आपदाओं के प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
हाइड्रोलॉजिकल रिस्क: केरल और कर्नाटक में अत्यधिक बारिश की बढ़ती आवृत्ति से फ्लैश फ्लड्स का खतरा
कृषि निर्भरता: अनिश्चित बारिश और भारी वर्षा के कारण मानसून पर निर्भर फसलों की संवेदनशीलता
अर्ली वार्निंग सिस्टम: IMD के रेड अलर्ट प्रोटोकॉल के बावजूद रियल-टाइम डिजास्टर रिस्पॉन्स में सीमाएं
मुख्य शब्द: दक्षिण-पश्चिम मानसून · मौसम पूर्वानुमान · क्लाइमेट रेजिलिएंस · आपदा शमन · जल विज्ञान संबंधी खतरे
चर्चा में क्यों: एक अध्ययन में बताया गया है कि कानूनी सुरक्षा में बढ़ोतरी और बड़ी आपदाओं के बाद प्राकृतिक पुनरुद्धार (Natural Regeneration) के कारण, 2010 से वैश्विक मैंग्रोव वनों में शुद्ध सुधार (Net Recovery) देखा गया है।
वर्ष 2010 से, दुनिया में नष्ट हुए मैंग्रोव की तुलना में अधिक मैंग्रोव का विस्तार हुआ है। 2004 की हिंद महासागर सुनामी और चक्रवात नर्गिस के बाद इंडोनेशिया और म्यांमार में मैंग्रोव की महत्वपूर्ण रिकवरी और वनों की कटाई में कमी दर्ज की गई।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानइंडोनेशिया और म्यांमार को उन प्रमुख क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया जहाँ वनों की कटाई में कमी और सुरक्षा उपायों ने मैंग्रोव (mangrove) की रिकवरी को बढ़ावा दिया।
पर्यावरणमैंग्रोव (Mangroves) तटीय समुदायों की सुरक्षा करने और कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने में अपनी भूमिका के लिए जाने जाते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तटीय लचीलेपन (coastal resilience) में मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक महत्व तथा बड़े पैमाने पर किए जाने वाले पुनरुद्धार प्रयासों में निहित समझौतों (trade-offs) का विश्लेषण कीजिए।
इकोलॉजिकल ट्रेड-ऑफ: डाउनस्ट्रीम मैंग्रोव विस्तार से अपस्ट्रीम पर्यावरणीय गिरावट की संभावना
क्लाइमेट मिटिगेशन: कार्बन सिंक और तटीय कटाव के खिलाफ प्राकृतिक अवरोध के रूप में मैंग्रोव
पॉलिसी-आधारित रिकवरी: जैव विविधता संरक्षण पर आपदा के बाद के कानूनी सुरक्षा उपायों का प्रभाव
मुख्य शब्द: कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन · तटीय लचीलापन · प्राकृतिक पुनरुद्धार · जैव विविधता संरक्षण · पारिस्थितिक ट्रेड-ऑफ
चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की एक योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पुराने ट्रकों और बसों को BS-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 9,585 करोड़ रुपये है और इसे दो वर्षों के लिए संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका लक्ष्य दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों को लक्षित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यदिल्ली-NCR एयर पोल्यूशन स्कीम के लिए कुल वित्तीय परिव्यय (financial outlay) 9,585 करोड़ रुपये है।
संस्थानेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) इस योजना के लिए कार्यान्वयन निकाय (implementing body) है।
तथ्यइस योजना का लक्ष्य लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों को लाभ पहुँचाना है।
तथ्ययह स्कीम दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों को कवर करती है।
तथ्यइनसेटिव्स (Incentives) में BS-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) पर स्विच करना और फ्यूल वाउचर्स (Fuel Vouchers) प्रदान करना शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में क्षेत्रीय वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने में राजकोषीय प्रोत्साहन और विनियामक ढाँचों की प्रभावशीलता का विश्लेषण कीजिए।
अंतर-राज्य समन्वय: दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में परिवहन नीतियों को एक समान बनाने में चुनौतियां
राजकोषीय स्थिरता: वाहन सब्सिडी के लिए भारी पूंजीगत खर्च और दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ के बीच संतुलन
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: इलेक्ट्रिक हैवी-ड्यूटी वाहनों के ट्रांजिशन को सपोर्ट करने के लिए चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार की ज़रूरत
मुख्य शब्द: वायु गुणवत्ता प्रबंधन · राजकोषीय प्रोत्साहन · BS-VI स्टैंडर्ड्स · इलेक्ट्रिक मोबिलिटी · क्षेत्रीय सहयोग
चर्चा में क्यों: IPEN की डॉ. थेरेस एम. कार्लसन और जोसेफ हूवर ने गरीब देशों में निर्यात किए गए प्लास्टिक कचरे को खुले में जलाने से होने वाले पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरों पर प्रकाश डाला।
विकसित देश प्लास्टिक कचरे का निर्यात गरीब देशों को करते हैं, जहाँ अक्सर प्रदूषण के कारण कचरे का उचित रीसाइक्लिंग (Recycling) करना मुश्किल हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप कचरे को खुले में जलाया जाता है, जिससे हानिकारक प्रदूषक वायुमंडल में फैल जाते हैं और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystems) को नुकसान पहुँचता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणप्लास्टिक वेस्ट को खुले में जलाने से वायुमंडल में हानिकारक प्रदूषक (pollutants) निकलते हैं।
तथ्यप्लास्टिक वेस्ट को अक्सर प्रोसेसिंग के लिए विकसित देशों से गरीब देशों में एक्सपोर्ट किया जाता है।
संस्थाInternational Pollutants Elimination Network (IPEN) एक संगठन है जो प्लास्टिक प्रदूषण की निगरानी (monitoring) में शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक प्लास्टिक अपशिष्ट व्यापार के पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी निहितार्थों की चर्चा कीजिए और विकासशील देशों में खुले में दहन से उत्पन्न होने वाले खतरों को कम करने के उपाय सुझाइए। विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी गैप: अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक वेस्ट ट्रेड समझौतों में पारदर्शिता और प्रवर्तन की कमी
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: विकासशील देशों में दूषित प्लास्टिक से निपटने के लिए अपर्याप्त वेस्ट मैनेजमेंट सुविधाएं
स्वास्थ्य एक्सटर्नैलिटी: वायुमंडलीय प्रदूषकों के कारण स्थानीय समुदायों के लिए श्वसन और सिस्टमिक स्वास्थ्य जोखिम
मुख्य शब्द: पर्यावरणीय एक्सटर्नैलिटी · वेस्ट मैनेजमेंट · प्रदूषण कम करना · सर्कुलर इकोनॉमी · सीमा पार कचरा
चर्चा में क्यों: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी ने घोषणा की है कि महाराष्ट्र के तडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व से 2025 में स्थानांतरित की गई बाघिन ज़ीनत ने सिमलीपाल टाइगर रिज़र्व में सफलतापूर्वक चार शावकों को जन्म दिया है।
tigress ज़ीनत (Zeenat) को 2025 में ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व (महाराष्ट्र) से सिमिलिपाल टाइगर रिज़र्व (ओडिशा) में स्थानांतरित किया गया। सतकोसिया टाइगर रिज़र्व में पिछले असफल प्रयासों के बाद, इस स्थानांतरण को नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) द्वारा समर्थन दिया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानसिमिलिपल टाइगर रिज़र्व ओडिशा में स्थित है।
स्थानताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व महाराष्ट्र में स्थित है।
संस्थानेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) टाइगर ट्रांसलोकेशन और कंजर्वेशन का समर्थन करती है।
तथ्यसिमिलिपल टाइगर रिज़र्व में बाघिन ज़ीनत ने चार शावकों को जन्म दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बाघों की आनुवंशिक विविधता और जनसंख्या स्थिरता सुनिश्चित करने में बाघों के स्थानांतरण और आवास प्रबंधन के महत्व की चर्चा कीजिए।
जेनेटिक विविधता: अलग-थलग टाइगर आबादी में इनब्रीडिंग डिप्रेशन को कम करना
हैबिटेट उपयुक्तता: ट्रांसलोकेशन की सफलता में एक्लिमैटाइजेशन पीरियड और शिकार घनत्व का महत्व
संस्थागत समन्वय: अंतर-राज्यीय वन्यजीव आवाजाही और निगरानी में NTCA की भूमिका
मुख्य शब्द: वन्यजीव संरक्षण · स्थानांतरण · आनुवंशिक विविधता · आवास संरक्षण · बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट
चर्चा में क्यों: वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने चेतावनी जारी की है कि जून-अगस्त के दौरान 80% संभावना के साथ एल नीनो (El Niño) के विकसित होने से वैश्विक तापमान और वर्षा के पैटर्न में भारी बदलाव आ सकते हैं।
WMO ने बताया कि ENSO चरण वर्तमान में न्यूट्रल है, लेकिन यह एल नीनो (El Niño) की स्थिति की ओर बढ़ने के संकेत दिखा रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एल नीनो को गर्म होती दुनिया के लिए एक 'जलवायु चेतावनी' के रूप में वर्णित किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यWMO ने जून-अगस्त की अवधि के दौरान El Niño के विकसित होने की 80% निश्चितता (certainty) की रिपोर्ट दी है।
विज्ञान-तकनीकRelative Oceanic Niño Index (ONI) का उपयोग ENSO के फेज (phase) को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
संस्थावर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (World Meteorological Organization - WMO) वैश्विक मौसम के पैटर्न की निगरानी के लिए जिम्मेदार UN एजेंसी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एल नीनो घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता वैश्विक जलवायु स्थिरता और खाद्य सुरक्षा के लिए किस प्रकार खतरा उत्पन्न करती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
हाइड्रोलॉजिकल वोलाटिलिटी: मानसून के अनिश्चित पैटर्न और भारी बारिश से स्थानीय बाढ़ और सूखा
कृषि संवेदनशीलता: एल नीनो से प्रभावित क्षेत्रों में हीट स्ट्रेस और मॉइस्चर स्ट्रेस का फसल पैदावार पर असर
मुख्य शब्द: ENSO · क्लाइमेट रेजिलिएंस · मौसम की निगरानी · अत्यधिक मौसम की घटनाएँ
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र सरकार की आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उसने गढ़चिरोली में एक लौह अयस्क खनन परियोजना (Iron Ore Mining Project) को वन्यजीव क्लीयरेंस से छूट दी, जबकि यह साइट तडोबा-इंद्रावती टाइगर कॉरिडोर के भीतर स्थित है।
यह परियोजना महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में स्थित है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) यह निर्देश देती है कि स्वीकृत टाइगर कंजर्वेशन प्लान (TCPs) में पहचाने गए कॉरिडोर की जांच वाइल्डलाइफ एक्ट के तहत की जानी चाहिए। मुख्य वन्यजीव वार्डन ने शुरू में इस परियोजना को छूट दी थी, लेकिन समीक्षा के बाद उन्होंने वह पत्र वापस ले लिया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानगडचिरोली: महाराष्ट्र का वह जिला जहाँ आयरन ओर माइनिंग प्रोजेक्ट स्थित है।
संस्थानेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (National Tiger Conservation Authority - NTCA): टाइगर कंजर्वेशन और कॉरिडोर की पहचान के लिए जिम्मेदार संस्था।
पर्यावरणतडोबा-इंद्रावती: वन्यजीव संरक्षण के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में टाइगर कॉरिडोर की पहचान की गई।
तथ्यWildlife Act: वन्यजीवों की मंजूरी और प्रोजेक्ट की जांच (scrutiny) को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कानून।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बाघ गलियारों (टाइगर कॉरिडोर) में औद्योगिक विकास और वन्यजीव संरक्षण के मध्य होने वाले द्वंद्व की चर्चा कीजिए। भारत खनिज निष्कर्षण और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के बीच संतुलन कैसे स्थापित कर सकता है? विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: राज्य स्तर के वन्यजीव क्लीयरेंस और NTCA द्वारा पहचाने गए टाइगर कॉरिडोर के बीच अंतर
पारिस्थितिक विखंडन: खनन गतिविधियों का बाघों के प्रवासी रास्तों और आनुवंशिक विविधता पर प्रभाव
संस्थागत जवाबदेही: माइनिंग छूट देने से पहले फॉरेस्ट कम्पार्टमेंट डेटा के मानकीकृत वेरिफिकेशन की ज़रूरत
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · टाइगर कॉरिडोर · रेगुलेटरी ओवरसाइट · सतत विकास · वन्यजीव अधिनियम
चर्चा में क्यों: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भारत के रात के तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की है, जिसमें वर्ष 2024 में साल 2000 के बाद से अब तक का सबसे अधिक वार्षिक औसत न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया है।
IMD के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2000 के बाद न्यूनतम तापमान में स्पष्ट रूप से वृद्धि (warming trend) देखी गई है। यह रुझान सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बढ़ते हीट स्ट्रेस (heat stress) और राष्ट्रीय बिजली की मांग में आए उछाल से जुड़ा हुआ है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यवर्ष 2024 में भारत में वर्ष 2000 के बाद से अब तक का उच्चतम वार्षिक औसत न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।
स्थानभारत के पूरे राष्ट्रीय क्षेत्र में वार्मिंग ट्रेंड (warming trend) देखा गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बढ़ते रात्रि के तापमान के सामाजिक-आर्थिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी निहितार्थों की चर्चा कीजिए और राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम: खराब वेंटिलेशन वाले घरों में रहने वाले संवेदनशील लोगों के लिए बढ़ता हीट स्ट्रेस और नींद में खलल
ग्रिड अस्थिरता: कूलिंग के लिए बिजली की बढ़ती मांग से संभावित पावर आउटेज और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव
मुख्य शब्द: हीट स्ट्रेस · नेशनल ग्रिड पर दबाव · कमज़ोर आबादी · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · न्यूनतम तापमान के रुझान
चर्चा में क्यों: UN क्लाइमेट चीफ साइमन स्टिल ने चेतावनी दी है कि जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) से प्रेरित जलवायु परिवर्तन भारत की भीषण गर्मी की स्थिति को और गंभीर बना रहा है। इस दावे का समर्थन PLOS क्लाइमेट में प्रकाशित एक अध्ययन द्वारा किया गया है।
PLOS Climate में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में भविष्य में अधिक खतरनाक हीटवेव (heatwaves), अनियमित मानसून और अधिक शक्तिशाली चक्रवातों का खतरा बढ़ेगा। यह रिपोर्ट ग्लेशियरों के पिघलने, पानी की कमी और तटीय शहरों के लिए बढ़ते समुद्री जलस्तर जैसे खतरों पर प्रकाश डालती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकPLOS Climate: जलवायु प्रभावों और जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) के परिणामों पर रिपोर्ट करने वाली एक वैज्ञानिक पत्रिका।
तथ्यभारत में जलवायु प्रभावों (Climate impacts) में ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र के स्तर में वृद्धि और अनिश्चित वर्षा शामिल है।
पदसाइमन स्टिल: संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट चीफ।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जीवाश्म ईंधन आधारित जलवायु परिवर्तन का भारत की जल विज्ञान और तटीय प्रणालियों पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए तथा स्वच्छ ऊर्जा की ओर तीव्र संक्रमण हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
हाइड्रोलॉजिकल स्ट्रेस: अनियमित मानसून और पिघलते ग्लेशियरों से पानी की भारी कमी और बाढ़ का खतरा
तटीय संवेदनशीलता: बढ़ता समुद्री जलस्तर शहरी बुनियादी ढांचे और तटीय इकोसिस्टम के लिए खतरा
पॉलिसी फ्रिक्शन: औद्योगिक ऊर्जा की तत्काल मांग और सख्त पर्यावरण कानूनों की ज़रूरत के बीच संतुलन
चर्चा में क्यों: *Science Advances* में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि समुद्री हीटवेव्स (Marine heatwaves) उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical cyclones) को और अधिक शक्तिशाली बना देते हैं, जिससे उनके तेजी से तीव्र होने की संभावना बढ़ जाती है और इससे होने वाले नुकसान में 60% की वृद्धि होती है।
अलाबामा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चक्रवातों की तीव्रता और समुद्री हीटवेव (Marine Heatwaves) के बीच संबंध स्थापित करने के लिए 40 से अधिक वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में ईस्ट पैसिफिक, नॉर्थ अटलांटिक और नॉर्थ इंडियन ओशन बेसिन में हीटवेव की बढ़ती आवृत्ति की पहचान की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यमैरीन हीटवेव्स (Marine heatwaves) अरबों डॉलर के चक्रवात आपदाओं की संभावना को 60% तक बढ़ा देते हैं।
स्थानबढ़ती हीटवेव्स (heatwaves) के साथ सक्रिय ट्रॉपिकल साइक्लोन बेसिन (tropical cyclone basins) की पहचान की गई है: ईस्ट पैसिफिक, नॉर्थ अटलांटिक और नॉर्थ इंडियन ओशन।
विज्ञान-तकनीकयूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा के शोधकर्ताओं द्वारा साइंस एडवांसेज (Science Advances) में प्रकाशित अध्ययन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: समुद्री ताप-लहरें (marine heatwaves) किस प्रकार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तीव्रता को बढ़ाती हैं और उत्तर भारतीय महासागर में तटीय आपदा प्रबंधन के लिए इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
मेटियोरोलॉजिकल फीडबैक: समुद्री हीटवेव्स से मिलने वाली थर्मल एनर्जी से चक्रवात तेज़ी से मज़बूत हो रहे हैं
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमज़ोरी: अरबों डॉलर वाले आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति से तटीय डिजास्टर-रेज़िलिएंस बजट पर दबाव
मुख्य शब्द: समुद्री हीटवेव · तेजी से तीव्र होना · ट्रॉपिकल साइक्लोन · क्लाइमेट फीडबैक · आपदा जोखिम में कमी
चर्चा में क्यों: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली-NCR में गरज-चमक के साथ होने वाले तूफान के लिए सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम के जरिए 'एक्सट्रीमली सीवियर अलर्ट' (Extremely Severe Alert) जारी किया है। इस कदम ने मध्यम मौसम की स्थिति के लिए अलर्ट स्तरों की गंभीरता पर बहस छेड़ दी है।
IMD ने 100 किमी प्रति घंटा (kmph) तक की तेज हवाओं के साथ गरज के साथ होने वाले तूफान के लिए जिला-वार नाउकास्ट (nowcast) चेतावनी जारी की। चक्रवात और भारी वर्षा जैसी जानलेवा आपदाओं के प्रति सचेत करने के लिए सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का उपयोग करके यह अलर्ट प्रसारित किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (1)
तथ्यअबकास्ट (nowcast) चेतावनियों ने कई राज्यों में 100 किलोमीटर प्रति घंटा (kmph) तक की तेज़ हवाओं की भविष्यवाणी की थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में चरम मौसमी घटनाओं के विरुद्ध आपदा लचीलेपन को बढ़ाने में पूर्व चेतावनी प्रणालियों और सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
कम्युनिकेशन गैप: जानलेवा घटनाओं के लिए समय पर चेतावनी सुनिश्चित करते हुए 'अलार्म फटीग' से बचने के लिए अलर्ट की गंभीरता को संतुलित करना
तकनीकी एकीकरण: तेज़ी से आने वाली आपदाओं के दौरान ग्रामीण और शहरी आबादी तक एक साथ पहुँचने के लिए सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: अर्ली वार्निंग सिस्टम · आपदा लचीलापन · सेल ब्रॉडकास्ट · क्लाइमेट एडैप्टेशन · सार्वजनिक सुरक्षा
चर्चा में क्यों: छरी ढांड वेटलैंड कंजर्वेशन रिज़र्व में NTPC रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (Renewable Energy Limited) के प्रस्तावित सोलर प्रोजेक्ट ने पारिस्थितिक और आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर मालधारी चरवाहों और संरक्षणवादियों के विरोध को जन्म दिया है।
यह परियोजना गुजरात में छारी ढांड वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व के लिए नियोजित है। स्थानीय मल्डारी चरवाहे चराई और आजीविका के लिए आसपास के घास के मैदानों पर निर्भर हैं। यह स्थल प्रवासी पक्षियों की आबादी और किरो हिल के निकट होने के लिए जाना जाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानछारी ढांड: गुजरात में स्थित एक वेटलैंड कंजर्वेशन रिज़र्व (Wetland Conservation Reserve)।
तथ्यमालधारी: गुजरात का एक पशुपालक समुदाय जिसकी आजीविका घास के मैदानों में चराई पर निर्भर करती है।
पर्यावरणछारी ढांड प्रवासी पक्षियों की आबादी के लिए एक साइट है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास और पारंपरिक पशुपालक आजीविका तथा जैव विविधता के संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।
आजीविका विस्थापन: मल्डारी चरवाहों के लिए चरागाह भूमि का नुकसान पारंपरिक सामाजिक-आर्थिक संरचनाओं को प्रभावित कर रहा है
पारिस्थितिक गिरावट: सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रवासी पक्षियों के आवास और वेटलैंड जैव विविधता पर संभावित प्रभाव
रेगुलेटरी ओवरसाइट: कंजर्वेशन रिज़र्व में कड़े एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) की ज़रूरत
मुख्य शब्द: पारिस्थितिक संवेदनशीलता · आजीविका सुरक्षा · रिन्यूएबल एनर्जी के ट्रेड-ऑफ्स · जैव विविधता संरक्षण · सामाजिक-पारिस्थितिक संघर्ष
चर्चा में क्यों: संरक्षणवादी परवीन शेख और बरखा सुब्बा को भारतीय स्किमर (Indian skimmer) और हिमालयन सलामैंडर (Himalayan salamander) के संरक्षण में उनके संबंधित कार्यों के लिए व्हिटल अवार्ड्स 2026 (Whitley Awards 2026) से सम्मानित किया गया है।
परवीन शेख के हस्तक्षेप से भारतीय स्किमर (Skimmer) के घोंसले में जीवित रहने की दर 14% से बढ़कर 27% हो गई है। बरखा सुब्बा का कार्य आवास बहाली (habitat restoration) और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से हिमालयी सैलामैंडर पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पर्यावरणइंडियन स्किमर (Indian skimmer): भारत में एक लुप्तप्राय (endangered) पक्षी प्रजाति।
पर्यावरणहिमालयन सालामैंडर (Himalayan salamander): हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली एक लुप्तप्राय (endangered) उभयचर (amphibian) प्रजाति।
संस्थाWhitley Awards: इन्हें 'Green Oscars' के रूप में जाना जाता है, ये पुरस्कार Global South के ग्रासरूट कंजर्वेशन लीडर्स (grassroots conservation leaders) को सम्मानित करते हैं।
तथ्यशेख के प्रयासों से इंडियन स्किमर (Indian Skimmer) की नेस्ट सर्वाइवल रेट 14% से बढ़कर 27% हो गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की जैव विविधता के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में समुदाय-आधारित संरक्षण मॉडलों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
कम्युनिटी-सेंट्रिक मॉडल: लंबे समय तक आवास बहाली सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय ज्ञान और जुड़ाव का लाभ उठाना
बायोडायवर्सिटी लॉस मिटिगेशन: हिमालयन सलामैंडर जैसी स्थानिक प्रजातियों के लिए विशिष्ट खतरों को दूर करना
फंडिंग मैकेनिज्म: जमीनी स्तर पर संरक्षण प्रयासों को बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड्स की भूमिका
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · जमीनी स्तर का नेतृत्व · आवास बहाली · लुप्तप्राय प्रजातियां · सामुदायिक सहभागिता
चर्चा में क्यों: वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक औसत तापमान 2026-2030 के दौरान रिकॉर्ड स्तर पर या उसके करीब रहने की संभावना है, और इसके 1.5°सी. की सीमा (threshold) को पार करने की उच्च संभावना है।
WMO का अनुमान है कि पांच साल के औसत तापमान (2026-2030) के पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°सी. से अधिक होने की 75% संभावना है। रिपोर्ट इस रुझान के लिए 2026 के अंत में होने वाले अनुमानित एल निनो (El Nino) प्रभाव को जिम्मेदार ठहराती है और अगले पांच उत्तरी गोलार्ध के शीतकाल के दौरान आर्कटिक तापमान में महत्वपूर्ण वृद्धि पर प्रकाश डालती है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्य2026-2030 के पांच साल के औसत तापमान के 1.5°सी. की सीमा (threshold) को पार करने की 75% संभावना है।
तथ्य2026 और 2030 के बीच कम से कम एक बार 1.5°सी. से अधिक होने की 91% संभावना है।
तथ्य2026-2030 के लिए अनुमानित तापमान रेंज प्री-इंडस्ट्रियल (pre-industrial) स्तरों से 1.3 से 1.9°सी. अधिक है।
विज्ञान-तकनीक2026 के अंत के लिए एल निनो (El Nino) प्रभाव की भविष्यवाणी रिकॉर्ड तोड़ तापमान का प्राथमिक कारण है।
संस्थावर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (World Meteorological Organisation - WMO) ने चेतावनी जारी की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निरंतर बढ़ते वैश्विक तापमान के रिकॉर्डों का पेरिस समझौते के लक्ष्यों की प्राप्ति पर पड़ने वाले प्रभावों और जलवायु अस्थिरता को और अधिक गंभीर बनाने में अल नीनो (El Nino) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
फीडबैक लूप्स: आर्कटिक के तेज़ी से गर्म होने से प्लैनेटरी अल्बेडो में और कमी आना
पॉलिसी फ्रिक्शन: अंतरराष्ट्रीय डीकार्बोनाइजेशन कमिटमेंट्स के बावजूद 1.5°सी. लक्ष्य हासिल करने में मुश्किल
मौसम की अस्थिरता: एल निनो-सदर्न ऑसिलेशन के कारण चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति
मुख्य शब्द: जलवायु परिवर्तन · एल नीनो · पेरिस समझौता · ग्लोबल वार्मिंग · आर्कटिक एम्प्लीफिकेशन
चर्चा में क्यों: ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 को लागू करने के लिए बल्क वेस्ट जेनरेटर्स (BWGs) के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (Solid Waste Management Rules), 2026 केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए थे और 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो गए। GCC के अनुसार, BWGs को जोनल अधिकारियों से नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर एक समर्पित पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यSolid Waste Management Rules, 2026 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो गए।
संस्थाग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (Greater Chennai Corporation - GCC) वह स्थानीय निकाय है जो रजिस्ट्रेशन को लागू करता है।
तथ्यBWGs को जोनल ऑफिसर्स से नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से शहरीकरण की ओर अग्रसर भारतीय शहरों में थोक अपशिष्ट उत्पादकों (bulk generators) के लिए विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
रेगुलेटरी बॉटलनेक: अलग-अलग कमर्शियल और रेजिडेंशियल बल्क जेनरेटर्स से निकलने वाले विकेंद्रीकृत वेस्ट स्ट्रीम की निगरानी में मुश्किल
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ट्रांसपोर्ट से होने वाले कार्बन उत्सर्जन और लैंडफिल के दबाव को रोकने के लिए लोकल प्रोसेसिंग यूनिट्स की ज़रूरत
मुख्य शब्द: ठोस कचरा प्रबंधन · बल्क वेस्ट जेनरेटर्स · अर्बन गवर्नेंस · कचरे का पृथक्करण · रेगुलेटरी कंप्लायंस
चर्चा में क्यों: भारत की नदियों और पहाड़ों की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय कानूनी ढांचे और संसदीय बिल की वकालत करने के लिए संरक्षणवादी और शैक्षणिक संस्थाएं जमशेदपुर में एकत्रित हुए।
इस शिखर सम्मेलन में तरुण भारत संघ, IIT धनबाद और जल बिरादरी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह प्रस्ताव प्राकृतिक संसाधनों के रूप में नदियों और पहाड़ों के अधिकारों को विनियमित करने और उन्हें सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र (institutional mechanisms) की वकालत करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानजमशेदपुर: नदी और पर्वत संरक्षण फ्रेमवर्क (framework) तैयार करने के लिए शिखर सम्मेलन का स्थान।
पदराजेंद्र सिंह: जल संरक्षणवादी जिन्होंने भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की वकालत की।
संस्थाIIT धनबाद: कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए आयोजित समिट में शामिल शैक्षणिक संस्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में पारिस्थितिक स्थिरता और अंतर-पीढ़ीगत समानता सुनिश्चित करने के लिए नदियों और पर्वतों के संरक्षण हेतु एक समर्पित कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत अंतर: पहाड़ी और नदी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एकीकृत राष्ट्रीय कानूनी ढांचे की कमी
अधिकार-आधारित दृष्टिकोण: संसाधन दोहन से प्राकृतिक निकायों के अंतर्निहित अधिकारों को पहचानने की ओर बदलाव
इंटरजनरेशनल इक्विटी: भविष्य की पीढ़ियों के लिए पारिस्थितिक संरक्षण सुनिश्चित करने के कानूनी तंत्र
मुख्य शब्द: पीढ़ियों के बीच समानता · संस्थागत तंत्र · पारिस्थितिक स्थिरता · कानूनी ढांचा · प्राकृतिक संसाधन गवर्नेंस
चर्चा में क्यों: लद्दाख में स्पितुक के पास बंजर भूमि के 800 एकड़ हिस्से को पुनर्जीवित करने के लिए उप-राज्यपाल विनाय कुमार सक्सेना ने एक पारिस्थितिक बहाली (Ecological Restoration) परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के लिए इगू-फेय सिंचाई नहर से अतिरिक्त पानी का उपयोग किया जाएगा।
इस परियोजना का उद्देश्य लद्दाख के स्पितुक के पास 800 एकड़ बंजर भूमि को पुनर्जीवित करना है। यह परियोजना पुनर्जीवित इगू-फेय (Igoo-Phey) सिंचाई नहर से प्राप्त अतिरिक्त जल का उपयोग भूजल स्तर को बढ़ाने और प्राकृतिक वनस्पति की वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानस्पितुक लद्दाख में एक स्थान है जहाँ इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन (ecological restoration) प्रोजेक्ट को लागू किया जा रहा है।
तथ्यइस प्रोजेक्ट का लक्ष्य लगभग 800 एकड़ बंजर भूमि को पुनर्जीवित (reclaim) करना है।
तथ्ययह प्रोजेक्ट 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर खराब हुई जमीन (degraded land) को बहाल करने के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप है।
विज्ञान-तकनीकयह प्रोजेक्ट Igoo-Phey सिंचाई नहर से अतिरिक्त पानी का उपयोग करके कम हो चुके एक्विफर्स (aquifers) को फिर से भरने का काम करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लद्दाख जैसे उच्च-ऊंचाई वाले मरुस्थलीय क्षेत्रों में दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता और कृषि व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए पारिस्थितिक बहाली परियोजनाओं के महत्व की चर्चा कीजिए।
हाइड्रोलॉजिकल सिनर्जी: शुष्क क्षेत्रों में कम होते एक्विफर्स को रिचार्ज करने के लिए सिंचाई नहरों के अतिरिक्त पानी का उपयोग
मिट्टी की सेहत में सुधार: बंजर ज़मीन को टिकाऊ खेती और अफ़ॉरेस्टेशन ज़ोन में बदलना
पॉलिसी अलाइनमेंट: खराब हुई 26 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को बहाल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य में स्थानीय इकोलॉजिकल पहल का योगदान
मुख्य शब्द: पारिस्थितिक बहाली · एक्विफर पुनर्भरण · टिकाऊ कृषि · वनीकरण · खराब ज़मीन
चर्चा में क्यों: बेंगलुरु लेक्स फेडरेशन और स्थानीय समुदायों ने सोल्केरे और हुलिमावु झीलों के तल पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) बनाने की BWSSB की योजना पर चिंता जताई है।
बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (BWSSB) की योजना सोउलकरे और हुलिमवू झील के तल पर एसटीपी (STPs) बनाने की है। फेडरेशन ऑफ बेंगलुरु लेक्स का तर्क है कि यह संरक्षित क्षेत्र और वेटलैंड (wetland) नियमों का उल्लंघन है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानसोलकरे और हुलिमवु झीलें बेंगलुरु में स्थित हैं।
संस्थाBWSSB: बैंगलोर वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (Bangalore Water Supply and Sewerage Board)।
संस्थाकर्नाटक टैंक कंजर्वेशन एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (Karnataka Tank Conservation and Development Authority): वह संस्था जिसने BWSSB प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी आर्द्रभूमि (wetlands) पर औद्योगिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के पारिस्थितिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और शहरी अपशिष्ट प्रबंधन तथा जैव विविधता संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए।
पारिस्थितिक गिरावट: संरक्षित वेटलैंड ज़ोन में प्राकृतिक बाढ़ नियंत्रण और जैव विविधता का नुकसान
रेगुलेटरी ओवरसाइट: राज्य स्तर के विकास संबंधी अप्रूवल और पर्यावरण संरक्षण मानदंडों के बीच टकराव
अर्बन प्लानिंग के ट्रेड-ऑफ: तत्काल सीवेज ट्रीटमेंट की ज़रूरतों और लॉन्ग-टर्म हाइड्रोलॉजिकल हेल्थ के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: वेटलैंड संरक्षण · शहरी बाढ़ से बचाव · जैव विविधता का नुकसान · रेगुलेटरी कंप्लायंस · सस्टेनेबल अर्बन प्लानिंग
चर्चा में क्यों: 49 संगठनों और 553 व्यक्तियों ने CJI सूर्यकांत को एक पत्र भेजकर 11 मई को की गई उनकी मौखिक टिप्पणियों को वापस लेने की मांग की है।
यह पत्र 49 संगठनों, समूहों और 553 पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों और नागरिकों द्वारा मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को संबोधित किया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं का तर्क है कि पर्यावरण संबंधी जांच में नागरिकों की भूमिका के संबंध में ये टिप्पणियाँ तथ्यात्मक रूप से गलत और संवैधानिक रूप से चिंताजनक हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदसूर्यकांत: मई 2026 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)।
तथ्य553 पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों और नागरिकों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए।
तथ्य49 संगठनों और समूहों ने वापसी की मांग में शामिल हुए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में पर्यावरणीय न्याय सुनिश्चित करने में जनहित याचिका (PIL) की भूमिका और पर्यावरणीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में नागरिक भागीदारी के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
न्यायिक निगरानी: पर्यावरण अधिकारों के रक्षक के रूप में न्यायपालिका की भूमिका बनाम प्रशासनिक जांच में इसकी भूमिका के बीच संतुलन
सिटिजन एजेंसी: पर्यावरण शासन में 'बाधाओं' से 'अधिकारों वाले प्रतिभागियों' तक का सफर
कानूनी वैधता: यह सुनिश्चित करना कि PIL कानूनी जांच का जरिया बना रहे न कि मनमाने अवरोध का साधन
मुख्य शब्द: जनहित याचिका · पर्यावरण गवर्नेंस · न्यायिक सक्रियता · नागरिक भागीदारी · संवैधानिक अधिकार