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भाग I · स्था. 11.2025 
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अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के अर्थव्यवस्था भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 2,289 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे) (510) · उद्योग, निवेश एवं MSME (466) · पूंजी बाज़ार एवं SEBI (296) · मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग (295) · विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतक (276) · राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST) (189) · रोज़गार एवं समावेशी विकास (141) · बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDI (116)

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासप्रीलिम्स + मेन्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपचारिक रोजगार के विस्तार हेतु प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के अंतर्गत 70 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने की घोषणा की

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपचारिक रोजगार के विस्तार हेतु प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के अंतर्गत 70 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने की घोषणा की।

PM-VBRY योजना के अंतर्गत नए प्रवेशकर्ताओं को 15,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि और अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को 3,000 रुपये प्रति माह तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। घोषणा के समय तक, इस योजना के अंतर्गत लगभग 20 लाख प्रथम बार नियुक्त कर्मचारियों ने अपने पदों पर छह महीने की अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • योजनाPM-VBRY: केंद्र सरकार की एक पहल जो नियोक्ताओं को नए रोजगार सृजित करने और पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
  • तथ्यPM-VBRY प्रोत्साहन: नए प्रवेशकों के लिए ₹15,000 तक और नियोक्ताओं के लिए ₹3,000 प्रति माह तक।
  • तथ्यरोजगार सृजन का मील का पत्थर: हालिया घोषणा के अनुसार, इस योजना के तहत 70 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए गए हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-VBRY) जैसी प्रोत्साहन-आधारित योजनाओं के माध्यम से भारत के कार्यबल को अनौपचारिक से औपचारिक रोजगार की ओर स्थानांतरित करने और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को बढ़ाने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • इंसेंटिव स्ट्रक्चर: सब्सिडी पर राजकोषीय खर्च और लंबे समय में प्राइवेट सेक्टर में नौकरी पैदा करने के बीच संतुलन
  • फॉर्मलाइजेशन गैप: गिग और अनौपचारिक श्रमिकों को व्यवस्थित सोशल सिक्योरिटी फ्रेमवर्क में जोड़ने की चुनौतियां
  • डेमोग्राफिक डिविडेंड: इनोवेशन और वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए युवाओं को रोजगार से जोड़ना

मुख्य शब्द: श्रम का फॉर्मलाइजेशन · सोशल सिक्योरिटी कवरेज · डेमोग्राफिक डिविडेंड · इंसेंटिव-आधारित पॉलिसी · रोज़गार सृजन

GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)मेन्स

मुख्यमंत्री वी.डी

चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन द्वारा प्रस्तुत केरल के संशोधित बजट में 'सिल्वर इकोनॉमी' और 'ब्लू इकोनॉमी' जैसे नवीन विकासात्मक विषयों के साथ-साथ निरंतर वित्तीय बाधाओं और कल्याणकारी दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित किया गया है।

संशोधित केरल बजट एक समुद्री केंद्र और 'नॉलेज वैली' के निर्माण पर केंद्रित है, साथ ही इसमें वृद्धों के लिए 'सिल्वर इकोनॉमी' को प्राथमिकता दी गई है। यह बजट, केंद्र सरकार से प्राप्त हस्तांतरणों के अधिक यथार्थवादी मूल्यांकन के कारण, पिछले बजट की तुलना में कम राजकोषीय परिव्यय को दर्शाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यसिल्वर इकोनॉमी (Silver Economy): बुजुर्ग आबादी के लिए उत्पादों और सेवाओं पर केंद्रित एक आर्थिक अवधारणा।
  • तथ्यब्लू इकोनॉमी (Blue Economy): आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग।
  • तथ्यनॉलेज वैली (Knowledge Valley): केरल में अनुसंधान, नवाचार और उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए एक केंद्र विकसित करने हेतु प्रस्तावित एक पहल।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राजकोषीय बाधाओं के बीच महत्वाकांक्षी विकासात्मक लक्ष्यों और बढ़ती कल्याणकारी व्यय के बीच संतुलन स्थापित करने में उप-राष्ट्रीय सरकारों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय ट्रिलेमा: ज़्यादा खर्च करने वाले राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, सामाजिक कल्याण खर्च और कर्ज की स्थिरता के बीच संतुलन
  • राजस्व निर्भरता: केंद्र सरकार के ट्रांसफर और राजकोषीय हस्तांतरण में बदलाव से राज्य के बजट की संवेदनशीलता
  • डेमोग्राफिक ट्रांजिशन: बढ़ती उम्र की आबादी के आर्थिक प्रभाव और 'सिल्वर इकोनॉमी' मॉडल की ओर बदलाव की ज़रूरत

मुख्य शब्द: राजकोषीय संघवाद · ब्लू इकोनॉमी · सिल्वर इकोनॉमी · राजकोषीय बाधाएं · कल्याणकारी राज्य · उप-राष्ट्रीय योजना

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु स्थित संस्थाओं द्वारा अनधिकृत सीमा पार क्रिप्टोकरेंसी हस्तांतरण से संबंधित FEMA नियमों के उल्लंघन में ₹2,500 करोड़ की राशि का पता लगाया है

चर्चा में क्यों: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु स्थित संस्थाओं द्वारा अनधिकृत सीमा पार क्रिप्टोकरेंसी हस्तांतरण से संबंधित FEMA नियमों के उल्लंघन में ₹2,500 करोड़ की राशि का पता लगाया है।

ED ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) से संबंधित बेंगलुरु स्थित छह परिसरों पर छापेमारी की। जाँच में यह तथ्य प्रकाश में आया कि ये कंपनियाँ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अनिवार्य अनुमति प्राप्त किए बिना अंतर्राष्ट्रीय हस्तांतरण की सुविधा प्रदान कर रही थीं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाप्रवर्तन निदेशालय (ED): Foreign Exchange Management Act (FEMA) और Prevention of Money Laundering Act (PMLA) को लागू करने वाली प्राथमिक एजेंसी।
  • तथ्यED ने बेंगलुरु स्थित क्रिप्टो जांच में ₹2,500 करोड़ से अधिक के उल्लंघन का पता लगाया है।
  • विज्ञान-तकनीकVirtual Digital Assets (VDAs): इसमें क्रिप्टोकरेंसी और NFTs शामिल हैं, जो वर्तमान में PMLA के अंतर्गत विनियमित हैं और RBI द्वारा निगरानी में हैं।
  • संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI): भारत में विदेशी मुद्रा और मौद्रिक नीति को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार केंद्रीय बैंक।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) के विनियमन में आने वाली चुनौतियों और भारत की मौद्रिक स्थिरता एवं धन शोधन निवारण (AML) ढांचे पर अनधिकृत सीमा पार क्रिप्टो हस्तांतरण के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: FEMA कंप्लायंस से बचने के लिए डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस में अधिकार क्षेत्र की कमियों का फायदा उठाना
  • AML रिस्क: गुमनाम क्रिप्टो-वॉलेट्स के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग के 'लेयरिंग' और 'इंटीग्रेशन' चरणों को ट्रैक करने में मुश्किल
  • मौनेटरी सॉवरेन्टी: कैपिटल फ्लाइट की संभावना और क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो पर RBI की निगरानी में कमी

मुख्य शब्द: रेगुलेटरी आर्बिट्रेज · मनी लॉन्ड्रिंग · वर्चुअल डिजिटल एसेट्स · पूंजी का पलायन · FEMA कंप्लायंस

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

केरल सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास और भूमि आवंटन को सुगम बनाने के उद्देश्य से अपने संशोधित बजट में पर्यटन को आधिकारिक रूप से एक उद्योग के रूप में मान्यता प्रदान की है

चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास और भूमि आवंटन को सुगम बनाने के उद्देश्य से अपने संशोधित बजट में पर्यटन को आधिकारिक रूप से एक उद्योग के रूप में मान्यता प्रदान की है।

केरल सरकार ने पर्यटन को एक आधिकारिक उद्योग के रूप में मान्यता देने की घोषणा की है। प्रमुख पहलों में अलापुझा में हाउसबोट कचरे के लिए एक अपशिष्ट उपचार संयंत्र की स्थापना और पथिरमानल द्वीप पारिस्थितिकी-पर्यटन केंद्र का विस्तार शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यकेरल सरकार ने संशोधित बजट में पर्यटन को आधिकारिक रूप से एक उद्योग के रूप में मान्यता दी।
  • स्थानअलाप्पुझा: प्रस्तावित हाउसकोट अपशिष्ट उपचार संयंत्र (waste treatment plant) का स्थान।
  • स्थानपथिरमानल द्वीप: इको-टूरिज्म सेंटर के विस्तार और रोपवे परियोजना के लिए स्थल।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पर्यटन को एक औपचारिक उद्योग के रूप में मान्यता देने से केरल जैसे राज्यों में बुनियादी ढांचे के विकास और सतत आर्थिक विकास को कैसे उत्प्रेरित किया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।

  • भूमि-उपयोग विवाद: पर्यटन विस्तार और प्लांटेशन क्षेत्रों व पारिस्थितिक क्षेत्रों के संरक्षण के बीच संतुलन
  • वेस्ट मैनेजमेंट की बाधा: बैकवाटर इकोसिस्टम में हाउसबोट कचरे के पर्यावरणीय प्रभाव को दूर करना
  • इंफ्रास्ट्रक्चर इंटीग्रेशन: राज्य के टूरिज्म पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए तीर्थ यात्रा सर्किट को इको-टूरिज्म से जोड़ना

मुख्य शब्द: औद्योगिक पहचान · इको-टूरिज्म · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · अपशिष्ट प्रबंधन · टूरिज्म सर्किट

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की वार्षिक ऋण योजना का अनावरण किया, जिसमें ₹8.10 लाख करोड़ के ऋण परिव्यय का अनुमान लगाया गया है और डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के विरुद्ध उपायों का प्रस्ताव दिया गया है।

वर्ष 2026-27 के लिए आंध्र प्रदेश की वार्षिक ऋण योजना ₹8.10 लाख करोड़ के ऋण परिव्यय का अनुमान प्रस्तुत करती है। यह योजना MSMEs को ऋण प्रवाह पर विशेष बल देती है और PM Vidyanidhi योजना के पूरक के रूप में शिक्षा ऋण पर 4% ब्याज सब्सिडी का प्रावधान शामिल करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यआंध्र प्रदेश वार्षिक क्रेडिट योजना 2026-27 का अनुमानित क्रेडिट परिव्यय: ₹8.10 लाख करोड़।
  • योजनाPM Vidyanidhi: केंद्र सरकार की एक योजना जो शिक्षा ऋण पर ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है।
  • संस्थासेंट्रल ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सेल्स: बैंकों द्वारा डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए प्रस्तावित तंत्र।
  • तथ्यशिक्षा ऋण पर आंध्र प्रदेश राज्य-स्तरीय ब्याज सब्सिडी: 4% अतिरिक्त सब्सिडी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय अर्थव्यवस्था में उद्यमिता को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को दिए जाने वाले ऋण प्रवाह के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • क्रेडिट एक्सेसिबिलिटी गैप: माइक्रो-एंटरप्राइजेज के लिए हाई कोलैटरल की ज़रूरत और फॉर्मल लेंडर्स का रिस्क-एवर्जन
  • डिजिटल सुरक्षा जोखिम: बढ़ता साइबर-फ्रॉड फॉर्मल बैंकिंग इकोसिस्टम में जनता के भरोसे को कम कर रहा है
  • राजकोषीय-मौद्रिक तालमेल: केंद्रीय शिक्षा पहलों को सहारा देने के लिए राज्य-स्तरीय ब्याज सब्सिडी एक टूल

मुख्य शब्द: क्रेडिट आउटले" · MSME फाइनेंसिंग · डिजिटल फाइनेंशियल फ्रॉड · ब्याज सब्सिडी · उद्यमिता

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स + मेन्स

केंद्रीय मंत्री जी

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तेलंगाना के लिए उच्च गति वाले रेल गलियारों (high-speed rail corridors) की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला और भूमि की बढ़ती कीमतों के कारण इसके अनुमानित लागत ₹10 लाख करोड़ होने का उल्लेख किया।

प्रस्तावित उच्च गति रेल गलियारे हैदराबाद को मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई से जोड़ेंगे। तेलंगाना में सात प्रस्तावित गलियारों में से तीन गलियारों की मेजबानी निर्धारित की गई है, जिसकी कुल अनुमानित परियोजना लागत लगभग ₹10 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यहाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए अनुमानित लागत: ₹10 लाख करोड़।
  • स्थानहैदराबाद को मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर।
  • तथ्यतेलंगाना प्रस्तावित 7 उच्च-गति वाले गलियारों (high-speed corridors) में से 3 की मेजबानी करेगा।
मेन्स के लिए

प्रश्न: दक्षिण भारत में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और औद्योगिक विकास के लिए उच्च गति वाली रेल बुनियादी ढांचा किस प्रकार एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है, चर्चा कीजिए।

  • भूमि अधिग्रहण की बाधा: रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतें और जटिल मुआवजा ढांचा प्रोजेक्ट की समयसीमा में देरी ला रहा है
  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी: 'हब-एंड-स्पोक' इंडस्ट्रियल मॉडल को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख केंद्रों के बीच ट्रांजिट समय को कम करना
  • राजकोषीय बोझ: ₹10 लाख करोड़ के भारी पूंजीगत खर्च और लंबे समय के ROI व कर्ज की स्थिरता के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: क्षेत्रीय एकीकरण · पूंजीगत व्यय · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी · इकोनॉमिक कॉरिडोर

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स + मेन्स

अमेरिका-ईरान समझौते ने भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (geopolitical risk premiums) को कम कर दिया है

चर्चा में क्यों: अमेरिका-ईरान समझौते ने भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (geopolitical risk premiums) को कम कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है और भारतीय रुपये में स्थिरता आई है।

समझौते के पश्चात, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से घटकर $75-$78 की सीमा में आ गईं। कीमतों में यह गिरावट सीधे तौर पर भारत के आयात बिल को कम करती है और घरेलू मुद्रास्फीति के दबावों को कम करने में सहायक है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यBrent crude की कीमतों में गिरावट: US-Iran समझौते के बाद $100 से अधिक से घटकर $75-$78 प्रति बैरल।
  • तथ्यभारत पर प्रभाव: आयात बिल में कमी और हेडलाइन मुद्रास्फीति (headline inflation) में गिरावट।
  • तथ्यबाजार की प्रतिक्रिया: भारतीय इक्विटी में तेजी और भारतीय रुपये का स्थिरीकरण।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भू-राजनीतिक बदलाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता और राजकोषीय स्थिति को किस प्रकार प्रभावित करते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • ट्रेड डेफिसिट का दबाव: कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति भारत के चालू खाता घाटा की उच्च संवेदनशीलता
  • मौनेटरी पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: तेल से होने वाली महंगाई को रोकने के लिए इंटरेस्ट रेट एडजस्टमेंट और औद्योगिक विकास को समर्थन के बीच संतुलन
  • कैपिटल फ्लो डायनेमिक्स: FPI और इन्वेस्टर सेंटीमेंट पर जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम का प्रभाव

मुख्य शब्द: भू-राजनीतिक रिस्क प्रीमियम · इंपोर्ट बिल · महंगाई का दबाव · चालू खाता घाटा · मार्केट सेंटीमेंट

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

Jio Platforms ने एक विशाल IPO के लिए ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस की घोषणा की है, जिससे संभावित रूप से $4 बिलियन जुटाए जा सकते हैं

चर्चा में क्यों: Jio Platforms ने एक विशाल IPO के लिए ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस की घोषणा की है, जिससे संभावित रूप से $4 बिलियन जुटाए जा सकते हैं, जो भारत के पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार इकाई, Jio Platforms, अपने IPO के माध्यम से लगभग $4 बिलियन जुटाने की योजना बना रही है। यह कदम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में अपनी पहली लिस्टिंग हेतु फाइलिंग के पश्चात उठाया गया है, जो भारतीय पूंजी बाजार के लिए गतिविधि का एक महत्वपूर्ण चरण है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यJio Platforms IPO लक्ष्य: लगभग $4 billion।
  • संस्थाNSE: National Stock Exchange of India, भारत में एक प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है।
  • तथ्य2006 के बाद Reliance Industries की पहली बड़ी सार्वजनिक पेशकश (public offering)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के पूंजी बाजारों को गहरा करने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों को बढ़ाने में बड़े पैमाने पर होने वाले आरंभिक सार्वजनिक प्रस्तावों (IPOs) की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • मार्केट लिक्विडिटी: रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर भागीदारी पर हाई-वैल्यू लिस्टिंग का असर
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: मेगा-IPOs के दौरान पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा सुनिश्चित करने में SEBI की भूमिका
  • पूंजी निर्माण: टेलीकॉम सेक्टर में इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विस्तार के लिए पब्लिक इक्विटी का उपयोग

मुख्य शब्द: पूंजी निर्माण · मार्केट लिक्विडिटी · कॉरपोरेट गवर्नेंस · IPO · निवेशकों की दिलचस्पी

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स

अग्रिम कर (advance tax) के भारी बहिर्वाह के कारण, 17 जून, 2024 तक बैंकिंग प्रणाली की तरलता गिरकर वित्त वर्ष के न्यूनतम स्तर ₹4,772 करोड़ पर पहुँच गई

चर्चा में क्यों: अग्रिम कर (advance tax) के भारी बहिर्वाह के कारण, 17 जून, 2024 तक बैंकिंग प्रणाली की तरलता गिरकर वित्त वर्ष के न्यूनतम स्तर ₹4,772 करोड़ पर पहुँच गई, जिसके परिणामस्वरूप RBI ने हस्तक्षेप किया।

त्रैमासिक अग्रिम कर बहिर्वाह के दौरान बैंकिंग प्रणाली से अनुमानतः ₹2 लाख करोड़ की निकासी दर्ज की गई। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इस तरलता की कमी को दूर करनेके लिए परिवर्तनीय दर रेपो (VRR) परिचालनों का उपयोग कर रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाRBI: भारत का केंद्रीय बैंक जो मौद्रिक नीति और तरलता प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है।
  • विज्ञान-तकनीकVariable Rate Repo (VRR): RBI का एक उपकरण जिसके अंतर्गत बैंक फ्लोटिंग ब्याज दर पर प्रतिभूतियों (securities) के बदले RBI से ऋण लेते हैं।
  • तथ्य₹2 लाख करोड़ के बहिर्वाह (outflow) के बाद, 17 जून, 2024 तक तरलता (Liquidity) घटकर ₹4,772 करोड़ रह गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मौसमी तरलता में होने वाले उतार-चढ़ाव और राजकोषीय बहिर्वाह (fiscal outflows) किस प्रकार मौद्रिक नीति के संचरण और भारतीय मुद्रा बाजार की स्थिरता को प्रभावित करते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • मौनेटरी ट्रांसमिशन में रुकावट: हाई मनी मार्केट रेट्स के कारण RBI के पॉलिसी रेट्स का कमर्शियल लेंडिंग तक प्रभावी प्रवाह बाधित
  • राजकोषीय-मौद्रिक संबंध: निजी क्षेत्र के निवेश के लिए क्रेडिट की उपलब्धता पर बड़े पैमाने पर टैक्स आउटफ्लो का प्रभाव
  • लिक्विडिटी मैनेजमेंट: शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव को स्थिर करने में VRR और अन्य ओपन मार्केट ऑपरेशंस की भूमिका

मुख्य शब्द: लिक्विडिटी मैनेजमेंट · मौनेटरी पॉलिसी ट्रांसमिशन · वैरिएबल रेट रेपो · मनी मार्केट · राजकोषीय बहिर्वाह

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

तमिलनाडु सरकार ने शहरी विकास को सुव्यवस्थित करनेके उद्देश्य से उच्च-स्तरीय भवनों के नियोजन संबंधी अनुमतियों को चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CMDA) को प्रत्यायोजित किया है

चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने शहरी विकास को सुव्यवस्थित करनेके उद्देश्य से उच्च-स्तरीय भवनों के नियोजन संबंधी अनुमतियों को चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CMDA) को प्रत्यायोजित किया है।

तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई महानगरीय क्षेत्र के भीतर उच्च-स्तरीय इमारतों के लिए नियोजन अनुमति का अधिकार CMDA को प्रत्यायोजित किया है। CREDAI तमिलनाडु ने इस प्रत्यायोजित अनुमोदन मॉडल को कोयंबटूर, मदुरै और तिरुचिरापल्ली तक विस्तारित करने की वकालत की है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाCMDA: Chennai Metropolitan Development Authority, चेन्नई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के लिए प्राथमिक नियोजन निकाय है।
  • स्थानकोइम्बाटोर, मदुरै और तिरुचिरापल्ली तमिलनाडु के प्रमुख शहरी केंद्र हैं।
  • तथ्यइस सुधार का उद्देश्य समीक्षा के कई चरणों को एक एकल प्रत्यायोजित ढांचे (delegated framework) में समेकित करके देरी को कम करना है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मेट्रोपॉलिटन विकास प्राधिकरणों को नियोजन अनुमति (planning permissions) का विकेंद्रीकरण किस प्रकार भारत में शहरी बुनियादी ढांचे के विकास और व्यापार सुगमता (ease of doing business) को बढ़ावा दे सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।

  • प्रशासनिक दक्षता: मल्टी-स्टेज रिव्यू को एक सिंगल डेलीगेटेड अथॉरिटी में मिलाकर ब्यूरोक्रेटिक बॉटलनैक्स को कम करना
  • अर्बन स्केलेबिलिटी: कोयंबटूर और मदुरै जैसे अलग-अलग टियर-2 शहरों में स्टैंडर्डाइज्ड हाई-राइज बिल्डिंग नॉर्म्स की संभावना
  • रेगुलेटरी क्लैरिटी: रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए समय की देरी कम करने वाले सुव्यवस्थित अप्रूवल फ्रेमवर्क

मुख्य शब्द: ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · अर्बन प्लानिंग · प्रत्यायोजित अधिकार · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · रेगुलेटरी रिफॉर्म

GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)प्रीलिम्स + मेन्स

CAG की 'स्टेट फाइनेंस 2024-25' रिपोर्ट रेखांकित करती है कि 18 भारतीय राज्यों ने GSDP की अनुशंसित 3% राजकोषीय घाटे की सीमा को पार कर लिया है

चर्चा में क्यों: CAG की 'स्टेट फाइनेंस 2024-25' रिपोर्ट रेखांकित करती है कि 18 भारतीय राज्यों ने GSDP की अनुशंसित 3% राजकोषीय घाटे की सीमा को पार कर लिया है, जो ऋण पर अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने सूचित किया है कि 10 राज्यों ने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3% से कम का राजकोषीय घाटा बनाए रखा, जबकि 18 राज्यों में यह सीमा से अधिक रही। वर्ष 2024-25 की अवधि में गोवा ने 1.7% के साथ न्यूनतम घाटा दर्ज किया।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्य2024-25 की रिपोर्ट में गोवा ने 1.7% के साथ न्यूनतम राजकोषीय घाटा दर्ज किया।
  • तथ्यमेघालय, नगालैंड, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और मिजोरम ने GSDP के 5% से अधिक का राजकोषीय घाटा दर्ज किया।
  • संस्थाCAG भारत का सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थान है, जो राज्य के वित्त और व्यय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
  • तथ्यवित्त वर्ष 2024-25 की अवधि में 13 राज्यों ने राजस्व अधिशेष (revenue surplus) दर्ज किया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राज्यों द्वारा 3% की राजकोषीय घाटे की सीमा को पार करने के राजकोषीय निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए और एक संघीय संरचना में राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका की चर्चा कीजिए।

  • कर्ज की स्थिरता: इंफ्रास्ट्रक्चर और सब्सिडी के लिए राज्यों द्वारा भारी कर्ज लेने से प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कम होने का जोखिम
  • राजकोषीय संघवाद में टकराव: राज्य स्तर पर विकास खर्च की जरूरतों और केंद्र के राजकोषीय घाटा दिशा-निर्देशों के बीच तनाव
  • राजस्व असंतुलन: आवर्ती खर्च और राजस्व उत्पादन के बीच के अंतर को पाटने के लिए मार्केट बोरोइंग पर संरचनात्मक निर्भरता

मुख्य शब्द: राजकोषीय अनुशासन · ऋण स्थिरता · राजकोषीय संघवाद · CAG ऑडिट · जीएसडीपी · राजस्व सरप्लस

SEBI ने ब्रोकरों की जवाबदेही बढ़ाने और संपार्श्विक प्रबंधन (collateral management) को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) ढांचे में सुधार हेतु एक परामर्श पत्र जारी किया है

चर्चा में क्यों: SEBI ने ब्रोकरों की जवाबदेही बढ़ाने और संपार्श्विक प्रबंधन (collateral management) को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) ढांचे में सुधार हेतु एक परामर्श पत्र जारी किया है।

SEBI ने MTF की सुविधा प्रदान करने वाले ब्रोकर्स के लिए न्यूनतम शुद्ध संपत्ति (नेट वर्थ) आवश्यकताओं को बढ़ाने और सीमित देयता भागीदारी (LLPs) को यह सुविधा प्रदान करने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर्स के माध्यम से वित्तपोषण के साधनों का विस्तार करने और स्टॉक पुनर्वर्गीकरण की चुनौतियों के समाधान को भी शामिल किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाSEBI: भारत में प्रतिभूति (securities) और कमोडिटी बाजारों को विनियमित करने के लिए स्थापित एक वैधानिक निकाय।
  • तथ्यMargin Trading Facility (MTF): एक ऐसी व्यवस्था जहाँ ब्रोकर ट्रेडिंग के लिए ग्राहकों को कोलैटरल (collateral) के बदले फंडिंग प्रदान करते हैं।
  • तथ्यगैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (Non-convertible debentures): वे ऋण उपकरण जिन्हें जारी करने वाली कंपनी के इक्विटी शेयरों में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मार्जिन ट्रेडिंग के लिए विनियामक ढांचे को सुदृढ़ करने से भारतीय पूंजी बाजारों में प्रणालीगत जोखिमों को कम करने में किस प्रकार सहायता मिल सकती है, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • सिस्टमेटिक रिस्क मिटिगेशन: हाई मार्केट वोलाटिलिटी के दौरान अत्यधिक लीवरेज और कैस्केडिंग डिफॉल्ट्स को रोकना
  • संस्थागत ईमानदारी: क्लाइंट की देनदारियों के लिए पर्याप्त कैपिटल बफ़र सुनिश्चित करने हेतु ब्रोकर नेट वर्थ की शर्तों को मज़बूत करना
  • लिक्विडिटी मैनेजमेंट: ब्रोकर्स के लिए फंडिंग के रास्ते बढ़ाने के साथ कोलैटरल वैल्यूएशन पर सख्त निगरानी का संतुलन

मुख्य शब्द: सिस्टमैटिक रिस्क · कैपिटल एडिक्वेसी · बाज़ार की ईमानदारी · कोलेटरल मैनेजमेंट · नियामक निगरानी

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 30,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने के लिए IPO दस्तावेज़ दाखिल किए हैं

चर्चा में क्यों: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 30,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने के लिए IPO दस्तावेज़ दाखिल किए हैं, जो भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक पेशकश (public offering) बन सकती है।

NSE का लक्ष्य 'ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) के माध्यम से 30,000 करोड़ रुपये तक जुटाने का है। विश्लेषकों ने 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संभावित मूल्यांकन का अनुमान लगाया है, जो इसे भारत की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल कर देगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यNSE IPO लक्ष्य: ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) के माध्यम से ₹30,000 करोड़।
  • तथ्यNSE संभावित मूल्यांकन: Rs 5 लाख करोड़ से अधिक।
  • संस्थाNSE: भारत में एक प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज जो इक्विटी, करेंसी और डेरिवेटिव्स के व्यापार के लिए एक मंच प्रदान करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के पूंजी बाजारों की गहराई और तरलता पर विनिमय बुनियादी ढांचे (exchange infrastructures) के बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सूचीकरण के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • मार्केट कंसंट्रेशन: जब किसी प्रमुख एक्सचेंज के ओनरशिप स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव होते हैं, तो सिस्टम पर पड़ने वाले रिस्क
  • रिटेल भागीदारी: हाई-वैल्यूएशन लिस्टिंग का घरेलू रिटेल निवेशकों के सेंटिमेंट और एंट्री बैरियर्स पर प्रभाव
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: प्राइवेट से पब्लिक ओनरशिप में बदलाव के दौरान पारदर्शिता और फेयर-ट्रेड प्रैक्टिस सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: कैपिटल मार्केट लिक्विडिटी · बिक्री के लिए उपलब्ध · मार्केट वैल्यूएशन · सिस्टमैटिक रिस्क · रिटेल इन्वेस्टर बेस

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस ↗+2 और खबरें इस विषय पर
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NSE ने जून 2025 में Hyundai Motor India के ₹27,000 करोड़ के IPO की लिस्टिंग को सुगम बनानेके उद्देश्य से

चर्चा में क्यों: NSE ने जून 2025 में Hyundai Motor India के ₹27,000 करोड़ के IPO की लिस्टिंग को सुगम बनानेके उद्देश्य से, लंबे समय से लंबित को-लोकेशन (co-location) मामलों के समाधान हेतु SEBI के समक्ष मसौदा दस्तावेज प्रस्तुत किए।

हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,000 करोड़ के IPO में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड सहित सार्वजनिक एवं विदेशी संस्थानों द्वारा 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) शामिल है। विनिमय (एक्सचेंज) पर सह-स्थान (co-location) संबंधी नियामक चिंताओं के कारण लिस्टिंग में विलंब हुआ।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाNSE: National Stock Exchange of India, भारत में एक प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है।
  • तथ्यHyundai Motor India IPO का आकार: ₹27,000 करोड़।
  • संस्थाSEBI: Securities and Exchange Board of India, प्रतिभूति बाजार का प्राथमिक नियामक।
  • तथ्यNSE ने जून 2025 में को-लोकेशन (co-location) मामलों को निपटाने के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा सह-स्थान (co-location) के संबंध में सामना की जाने वाली विनियामक चुनौतियों और बाजार की अखंडता एवं निवेशक विश्वास पर इसके निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • मार्केट इंटीग्रिटी: हाई-फ़्रीक्वेंसी ट्रेडिंग के फायदे से रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए असमान अवसर का जोखिम
  • संस्थागत भरोसा: प्राइमरी मार्केट में IPO अप्रूवल में देरी का कैपिटल फॉर्मेशन और इन्वेस्टर सेंटीमेंट पर असर

मुख्य शब्द: मार्केट इंटीग्रिटी · पूँजी निर्माण · रेगुलेटरी कंप्लायंस · को-लोकेशन · निवेशकों का भरोसा

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निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रतिबंधों को हटाने के नीतिगत बदलावों के परिणामस्वरूप

चर्चा में क्यों: निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रतिबंधों को हटाने के नीतिगत बदलावों के परिणामस्वरूप, जून 2024 में भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में FPI का प्रवाह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

FPIs ने G-Secs में रिकॉर्ड धनराशि निवेश करने के लिए 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का उपयोग किया। HDFC बैंक ने ऑफशोर बॉन्ड के माध्यम से सफलतापूर्वक $750 मिलियन जुटाए, जो भारतीय ऋण प्रतिभूतियों (debt securities) की बढ़ती वैश्विक मांग को प्रदर्शित करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यHDFC Bank ने भारतीय ऋण की आकर्षण क्षमता को रेखांकित करने के लिए offshore bonds के माध्यम से $750 million जुटाए।
  • संस्थाFAR (Fully Accessible Route): एक ऐसा तंत्र जो FPIs को विशिष्ट प्रतिबंधों के बिना सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने की अनुमति देता है।
  • तथ्यसरलीकृत निवेश प्रक्रियाओं के कारण जून 2024 में FPI इनफ्लो रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में बढ़ते प्रत्यक्ष विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के भारत के राजकोषीय प्रबंधन और पूंजी बाजार की गहराई के लिए महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • बाहरी भेद्यता: राजकोषीय घाटे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए अस्थिर FPI फ्लो पर भारी निर्भरता
  • मार्केट डेप्थ: जी-सेक में बढ़ी लिक्विडिटी से यील्ड कर्व में सुधार और सरकार के लिए उधार लेने की लागत कम हुई
  • ग्लोबल इंटीग्रेशन: ग्लोबल बॉन्ड गेज में भारतीय सॉवरेन डेट के शामिल होने से अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर होने की संभावना

मुख्य शब्द: कैपिटल अकाउंट लिबरलाइजेशन · राजकोषीय घाटा · लिक्विडिटी · यील्ड कर्व · पोर्टफोलियो निवेश

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NSE ने ₹30,000 करोड़ के रिकॉर्ड-तोड़ IPO के लिए आवेदन किया

चर्चा में क्यों: NSE ने ₹30,000 करोड़ के रिकॉर्ड-तोड़ IPO के लिए आवेदन किया, जबकि भारतीय बाजारों ने US Federal Reserve के 'हायर-फॉर-लॉन्गर' ब्याज दर रुख और गिरते तेल मूल्यों पर प्रतिक्रिया दी।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने ₹30,000 करोड़ मूल्य के IPO के लिए आवेदन किया, जो भारतीय इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, किंतु दीर्घकालिक उच्च-दर वाले परिवेश का संकेत दिया, जिसके परिणामस्वरूप सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यNSE IPO मूल्य: ₹30,000 करोड़ (भारत का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम)।
  • तथ्यNifty बेंचमार्क: 24,000 के स्तर से ऊपर बंद।
  • तथ्यBitcoin की कीमत: लगभग $64,000 के आसपास कारोबार।
  • संस्थाFederal Reserve: संयुक्त राज्य अमेरिका की केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 'उच्च ब्याज दरें लंबे समय तक' (higher-for-longer) की नीति भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी प्रवाह और बाजार की अस्थिरता को किस प्रकार प्रभावित करती है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • मौनेटरी ट्रांसमिशन: FPI आउटफ्लो और घरेलू लिक्विडिटी पर अमेरिकी ब्याज दरों का असर
  • कमोडिटी कोरिलेशन: वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक समझौता ज्ञापनों के प्रति भारतीय इक्विटी बेंचमार्क की संवेदनशीलता
  • मार्केट डेप्थ: घरेलू कैपिटल मार्केट लिक्विडिटी पर बड़े पैमाने पर पब्लिक लिस्टिंग (NSE IPO) के प्रभाव

मुख्य शब्द: मौनेटरी पॉलिसी · पूंजी प्रवाह · मार्केट में उतार-चढ़ाव · लिक्विडिटी · उभरते बाजार

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

भारत का बाजार पूंजीकरण (market capitalization) 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है

चर्चा में क्यों: भारत का बाजार पूंजीकरण (market capitalization) 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है, जिससे AI-केंद्रित अर्थव्यवस्थाओं की ओर बढ़ते निवेशक रुझान के बीच वैश्विक स्तर पर 6वें सबसे बड़े बाजार के रूप में इसकी स्थिति पुनः स्थापित हो गई है।

भारत का बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर की सीमा को पार कर गया है, जिससे यह दक्षिण कोरिया के बाजार आकार से आगे निकल गया है। इस परिवर्तन का मुख्य कारण ताइवान और दक्षिण कोरिया में AI से जुड़ी कंपनियों के प्रति निवेशकों की उच्च मांग है, जबकि भारतीय इक्विटी में मूल्यांकन संबंधी चिंताओं के कारण यह अंतर स्पष्ट होता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्य2024 में भारत का बाजार पूंजीकरण (market capitalization) $5 ट्रिलियन को पार कर गया।
  • तथ्य2024 तक, बाजार पूंजीकरण (market capitalization) में भारत विश्व स्तर पर छठे स्थान पर है।
  • तथ्यAI-लिंक्ड कंपनियों की मांग से दक्षिण कोरिया और ताइवान ने महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त किया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: एआई-केंद्रित (AI-centric) बाजारों की ओर प्रत्यक्ष विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के प्रवाह में होने वाले बदलाव को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए और भारत के पूंजी बाजार के विकास पर इसके निहितार्थों का मूल्यांकन कीजिए।

  • वैल्यूएशन गैप: घरेलू इक्विटी में हाई प्राइस-टू-अर्निग्स रेशियो बनाम ईस्ट एशियन मार्केट्स में हाई-ग्रोथ AI टेक प्रीमियम
  • सेक्टोरल इम्बैलेंस: क्षेत्रीय साथियों की तुलना में कोर AI इंफ्रास्ट्रक्चर और हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में सीमित घरेलू एक्सपोजर
  • इन्वेस्टर सेंटिमेंट: व्यापक इक्विटी ग्रोथ से स्पेशलाइज्ड टेक्नोलॉजी-लेड कैपिटल एप्रिसिएशन की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: मार्केट कैपिटलाइजेशन · फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट · AI से जुड़े कंपनियाँ · मूल्यांकन · कैपिटल मार्केट्स

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स + मेन्स

पश्चिम एशिया के संघर्ष ने प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से बिटुमेन के आयात को बाधित कर दिया है

चर्चा में क्यों: पश्चिम एशिया के संघर्ष ने प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से बिटुमेन के आयात को बाधित कर दिया है, जिससे भारतमाला और PMGSY जैसी प्रमुख सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति पर संकट उत्पन्न हो गया है।

भारत बिटुमेन के लिए इराक, UAE, ईरान, ओमान और बहरीन से होने वाले आयात पर निर्भर है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य एजेंसियां इन भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण आपूर्ति की कमी और कीमतों में वृद्धि की सूचना दे रही हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाNHAI: National Highways Authority of India, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के प्रबंधन और विकास के लिए उत्तरदायी है।
  • योजनाभारतमाला परियोजना: अपने राजमार्ग नेटवर्क के माध्यम से माल और यात्री आवाजाही की दक्षता को अनुकूलित करने के लिए एक प्रमुख परियोजना।
  • योजनाPMGSY: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, एक केंद्र प्रायोजित योजना जिसका उद्देश्य असंबद्ध बस्तियों को सभी मौसमों में सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
  • तथ्यभारत के प्रमुख बिटुमेन आपूर्तिकर्ता (suppliers) में इराक, UAE, ईरान, ओमान और बहरीन शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्षों का भारत के बुनियादी ढांचा विकास पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और बिटुमेन उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • सप्लाई चेन की कमजोरी: बिटुमेन जैसे महत्वपूर्ण निर्माण मटेरियल के लिए पश्चिम एशिया के आयात पर भारी निर्भरता
  • राजकोषीय दबाव: कच्चे माल की बढ़ती लागत से भारतमाला और PMGSY प्रोजेक्ट्स के बजट आवंटन पर असर
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: बाहरी झटकों से बचने के लिए आयात के स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू रिफाइनरी क्षमता बढ़ाने की ज़रूरत

मुख्य शब्द: सप्लाई चेन रेजिलिएंस · भू-राजनीतिक जोखिम · इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधाएं · आयात प्रतिस्थापन · रणनीतिक स्वायत्तता

स्वदेशी विनिर्माण में हुई तीव्र वृद्धि के कारण, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है

चर्चा में क्यों: स्वदेशी विनिर्माण में हुई तीव्र वृद्धि के कारण, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

रक्षा मंत्रालय ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में उत्पादन में 15.6% की वृद्धि दर्ज की है। इस रिकॉर्ड-तोड़ वृद्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) को प्राथमिक योगदानकर्ता के रूप में पहचाना गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यवित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.78-लख करोड़ तक पहुंच गया।
  • तथ्यपिछले वित्त वर्ष की तुलना में रक्षा उत्पादन में 15.6% की वृद्धि देखी गई।
  • संस्थारक्षा उत्पादन विभाग (DDP) रक्षा उपकरणों के निर्माण और खरीद की देखरेख करता है।
  • संस्थाDefence Public Sector Undertakings (DPSUs) रक्षा उत्पादन में शामिल राज्य के स्वामित्व वाले उद्यम हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: स्वदेशी रक्षा उत्पादन के विस्तार किस प्रकार भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक आत्मनिर्भरता में योगदान देता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • इंपोर्ट सब्स्टिट्यूशन: महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स और हाई-टेक वेपनिरी के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
  • इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग से व्यापक इंडस्ट्रियल सेक्टर तक नौकरियों का सृजन और टेक्नोलॉजी स्पिलओवर
  • स्ट्रेटेजिक लेवरेज: भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सप्लाई चेन की रुकावटों को कम करने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को बढ़ावा देना

मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · आयात प्रतिस्थापन · रणनीतिक स्वायत्तता · स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग · रक्षा उत्पादन

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकमेन्स

पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधान से उजागर हुए ऊर्जा सुरक्षा जोखिमों को कम करने के लिए भारत को व्यापक रणनीतिक तेल भंडार बनाने और आयात के स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता है

चर्चा में क्यों: पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधान से उजागर हुए ऊर्जा सुरक्षा जोखिमों को कम करने के लिए भारत को व्यापक रणनीतिक तेल भंडार बनाने और आयात के स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता है।

रघुराम राजन ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक महत्व के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा की संवेदनशीलता को रेखांकित किया। उन्होंने एक बहुआयामी रणनीति की सिफारिश की, जिसमें रणनीतिक तेल भंडार में वृद्धि, घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा देना और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में तेजी लाना शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यहॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait): एक महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट जिसके माध्यम से विश्व के तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है।
  • विज्ञान-तकनीकStrategic Petroleum Reserves (SPR): आपूर्ति में व्यवधान के दौरान ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कच्चे तेल के भंडारण हेतु उपयोग की जाने वाली भूमिगत सुविधाएँ।
  • पदरघुराम राजन: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की ऊर्जा सुरक्षा में निहित कमजोरियों का विश्लेषण कीजिए और अस्थिर समुद्री चोकपॉइंट्स (chokepoints) तथा बाहरी तेल आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • सप्लाई चेन की कमजोरी: होर्मुज जलडमरूमध्य पर अत्यधिक निर्भरता ऊर्जा आयात के लिए एक सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर पैदा करती है
  • राजकोषीय-ऊर्जा ट्रेड-ऑफ: कोयले के उत्पादन की तत्काल ज़रूरत और दीर्घकालिक डीकार्बोनाइजेशन और रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों के बीच संतुलन
  • करेंसी-ट्रेड लिंक: रुपये की स्थिरता पर FDI इनफ्लो का असर बनाम ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइस शॉक का सीधा प्रभाव

मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व · आयात विविधीकरण · मैरीटाइम चोकपॉइंट्स · मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

IFSCA ने GIFT City के माध्यम से सीमा पार निवेश की सुविधा प्रदान करने हेतु प्रमुख भारतीय ब्रोकर्स (Zerodha, Groww, Angel One, Upstox) को लाइसेंस प्रदान किए हैं

चर्चा में क्यों: IFSCA ने GIFT City के माध्यम से सीमा पार निवेश की सुविधा प्रदान करने हेतु प्रमुख भारतीय ब्रोकर्स (Zerodha, Groww, Angel One, Upstox) को लाइसेंस प्रदान किए हैं।

इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने Zerodha और Groww को ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) लाइसेंस प्रदान किए हैं। इसके अतिरिक्त, GIFT सिटी हब के माध्यम से अमेरिकी स्टॉक ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करनेके लिए Zerodha और Angel One को ब्रोकर-डीलर के रूप में भी मंजूरी दी गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाIFSCA: भारत में International Financial Services Centres (IFCs) के लिए नियामक निकाय।
  • स्थानGIFT City: यह गुजरात के गांधीनगर में स्थित है और भारत के प्राथमिक ऑफशोर वित्तीय केंद्र (offshore financial hub) के रूप में कार्य करता है।
  • तथ्यमार्च 2024 में भारतीय निवेशकों ने वैश्विक इक्विटी में $440 मिलियन का निवेश किया।
  • तथ्यवर्ष 2024 में एक एकल शुक्रवार सत्र के दौरान US स्टॉक ट्रेडिंग वॉल्यूम में 20% की वृद्धि देखी गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: गिफ्ट सिटी (GIFT City) जैसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFCs) का विकास भारत की एक वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में स्थिति को कैसे सुदृढ़ कर सकता है और पूंजी की गतिशीलता को किस प्रकार सुगम बना सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी आर्बिट्राज: निवेशक सुरक्षा और क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो की सुगमता के बीच संतुलन
  • कैपिटल फ्लाइट रिस्क: विदेशी इक्विटी मार्केट्स में घरेलू रिटेल कैपिटल के बाहर जाने की निगरानी
  • मार्केट इंटीग्रेशन: भारतीय रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए ग्लोबल पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन की बाधाएं कम करना

मुख्य शब्द: पूंजी की गतिशीलता · फाइनेंशियल हब · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन · सीमा पार निवेश

GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)मेन्स

तमिलनाडु सरकार ने एक श्वेत पत्र जारी किया है, जिसमें 'राजस्व में गिरावट' और इसके परिणामस्वरूप कल्याणकारी योजनाओं एवं बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण पर राज्य की क्षमता पर पड़ने वाले राजकोषीय दबाव को रेखांकित किया गया है

चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने एक श्वेत पत्र जारी किया है, जिसमें 'राजस्व में गिरावट' और इसके परिणामस्वरूप कल्याणकारी योजनाओं एवं बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण पर राज्य की क्षमता पर पड़ने वाले राजकोषीय दबाव को रेखांकित किया गया है।

श्वेत पत्र (White Paper) कर-से-GSDP अनुपात में गिरावट को राजकोषीय तनाव के प्राथमिक कारक के रूप में पहचानता है। यह तीन मुख्य प्रभावों को रेखांकित करता है: नवीन कार्यक्रमों के लिए ऋण लेने की अनिवार्यता, घटती राजकोषीय स्वायत्तता, और भावी पीढ़ियों पर बढ़ता ऋण भार।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यTax-to-GSDP अनुपात: किसी राज्य के राजकोषीय स्वास्थ्य और अत्यधिक ऋण लिए बिना सार्वजनिक सेवाओं को वित्तपोषित करने की क्षमता का एक प्रमुख संकेतक।
  • संस्थाश्वेत पत्र (White Paper): एक औपचारिक सरकारी दस्तावेज़ जो किसी विशिष्ट मुद्दे के लिए नीतिगत लक्ष्यों, समस्याओं और प्रस्तावित समाधानों को रेखांकित करता है।
  • तथ्यपूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): सड़कों और बिजली संयंत्रों जैसी भौतिक संपत्तियों पर किया जाने वाला व्यय, जिसे इस पत्र के अनुसार कल्याणकारी योजनाओं के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: घटते कर-से-GSDP अनुपात के बीच कल्याणकारी व्यय और पूंजीगत निवेश के बीच संतुलन बनाए रखने में भारतीय राज्यों के समक्ष आने वाली राजकोषीय चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय स्वायत्तता में गिरावट: इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के मुकाबले आवर्ती कल्याणकारी खर्चों के लिए मार्केट बोरोइंग पर बढ़ती निर्भरता
  • इंटरजनरेशनल इक्विटी: भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपलब्ध फिस्कल स्पेस पर मौजूदा कर्ज के जमा होने का दीर्घकालिक प्रभाव
  • राजस्व की चोरी: राज्य राजस्व विभागों में भ्रष्टाचार के कारण आंतरिक संसाधनों की वसूली में बाधा

मुख्य शब्द: राजकोषीय स्वायत्तता · टैक्स-टू-GSDP रेश्यो · पूंजीगत व्यय · ऋण स्थिरता · राजस्व की चोरी

स्रोत: द हिंदू ↗+3 और खबरें इस विषय पर
GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स + मेन्स

सरकार बुनियादी ढांचे के विकास और ऋण में कमी लाने के उद्देश्य से ADR लिस्टिंग या एक सॉवरेन वेल्थ फंड (अमृत काल फंड) के माध्यम से NHAI और ISRO जैसी सार्वजनिक संपत्तियों के मुद्रीकरण पर विचार कर रही है

चर्चा में क्यों: सरकार बुनियादी ढांचे के विकास और ऋण में कमी लाने के उद्देश्य से ADR लिस्टिंग या एक सॉवरेन वेल्थ फंड (अमृत काल फंड) के माध्यम से NHAI और ISRO जैसी सार्वजनिक संपत्तियों के मुद्रीकरण पर विचार कर रही है।

इस प्रस्ताव के अंतर्गत NHAI, AAI, CONCOR, ISRO और NABARD जैसी संस्थाओं को अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीप्ट्स (ADRs) के रूप में सूचीबद्ध करने का प्रावधान है। इसका मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास और ऋण प्रबंधन हेतु वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने के लिए एक 'अमृत काल फंड' का निर्माण करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यADR: American Depositary Receipts विदेशी निवेशकों को अमेरिकी बाजारों में भारतीय कंपनियों के शेयर खरीदने की अनुमति देते हैं।
  • संस्थाNHAI: National Highways Authority of India, जो राजमार्ग विकास के लिए उत्तरदायी है।
  • संस्थाCONCOR: Container Corporation of India Ltd, एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और कंटेनर फ्रेट कंपनी।
  • संस्थाNABARD: National Bank for Agriculture and Rural Development, एक प्रमुख विकास बैंक।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण और एक संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Fund) के निर्माण के माध्यम से राजकोषीय ऋण का प्रबंधन करते हुए भारत के बुनियादी ढांचा लक्ष्यों को कैसे सुगम बनाया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • फ़िस्कल स्पेस का विस्तार: डेट-टू-जीडीपी रेशियो बढ़ाए बिना हाई-कैपेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए नॉन-डेट कैपिटल का इस्तेमाल
  • PPP मॉडल का विकास: पारंपरिक PPP मॉडल से सरकारी उद्यमों के इक्विटी-आधारित मुद्रीकरण की ओर बदलाव
  • मार्केट वोलाटिलिटी रिस्क: ADR के रूप में लिस्टेड भारतीय पब्लिक एसेट्स की वैल्यूएशन पर ग्लोबल इंटरेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव का संभावित असर

मुख्य शब्द: मुद्रीकरण · सॉवरेन वेल्थ फंड · राजकोषीय सुदृढ़ीकरण · पूंजी जुटाना · इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

RBI ने विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में निवेश करने पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया है

चर्चा में क्यों: RBI ने विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में निवेश करने पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया है, ताकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) से इतर पूंजी के स्रोतों में विविधता लाई जा सके।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में विदेशी व्यक्तियों द्वारा प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने हेतु नीतिगत परिवर्तन की पहल की है। इस कदम का उद्देश्य ब्रोकर्स, एक्सचेंजों, डिपॉजिटरीज़ और कस्टोडियंस से जुड़े एक नए निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाRBI: भारत का केंद्रीय बैंक जो मौद्रिक नीति और वित्तीय प्रणाली के विनियमन के लिए उत्तरदायी है।
  • तथ्यFPI: Foreign Portfolio Investors वे संस्थाएं हैं जो स्टॉक, बॉन्ड और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय संपत्तियों में निवेश करती हैं।
  • तथ्यसूचीबद्ध कंपनियाँ (Listed Companies): वे कंपनियाँ जिनके शेयर NSE या BSE जैसे सार्वजनिक स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार करते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विदेशी पूंजी निवेश के स्रोतों में विविधता लाना वैश्विक अस्थिरता के विरुद्ध भारत के पूंजी बाजारों की सुदृढ़ता को किस प्रकार बढ़ा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: गैर-निवासी व्यक्तियों के लिए बैंक अकाउंट खोलने और टैक्स कंप्लायंस में जटिलता
  • मार्केट डेप्थ: ग्लोबल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स से लिक्विडिटी और रिटेल पार्टिसिपेशन बढ़ने की संभावना
  • अनुपालन का बोझ: क्रॉस-बॉर्डर रिटेल फ्लो के लिए स्पेशलाइज्ड टैक्स और रेगुलेटरी एडवाइजरी सेवाओं की भारी मांग

मुख्य शब्द: कैपिटल मार्केट लिक्विडिटी · रेगुलेटरी लिबरलाइजेशन · विदेशी प्रत्यक्ष निवेश · पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट · वित्तीय समावेशन

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स ↗+1 और खबरें इस विषय पर
GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स

RBI के आंकड़ों से वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में निजी गैर-वित्तीय कंपनियों की बिक्री में 13.9% की वृद्धि का पता चलता है

चर्चा में क्यों: RBI के आंकड़ों से वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में निजी गैर-वित्तीय कंपनियों की बिक्री में 13.9% की वृद्धि का पता चलता है, जो विनिर्माण और IT को प्राथमिक विकास इंजन के रूप में रेखांकित करता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जनवरी-मार्च 2025-26 की अवधि के लिए विनिर्माण क्षेत्र में वार्षिक आधार पर 14.5% की बिक्री वृद्धि दर्ज की है। यद्यपि IT क्षेत्र की बिक्री में 9.9% की वृद्धि हुई, तथापि विनिर्माताओं को कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण महत्वपूर्ण दबाव का सामना करना पड़ा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यविनिर्माण बिक्री वृद्धि: वित्त वर्ष 2025-26 की Q4 में साल-दर-साल 14.5%।
  • तथ्यIT कंपनी की बिक्री वृद्धि: FY 2025-26 की Q4 में 9.9%।
  • तथ्यवित्त वर्ष 2025-26 की Q4 में कुल निजी गैर-वित्तीय कंपनियों की बिक्री वृद्धि: 13.9%।
  • संस्थाRBI: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भारत का केंद्रीय बैंक और मौद्रिक प्रणाली का प्राथमिक नियामक है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मजबूत बिक्री वृद्धि के बावजूद, कच्चे माल की बढ़ती लागत और कर्मचारियों की अस्थिर लागत का भारत के विनिर्माण क्षेत्र की लाभप्रदता पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

  • लेबर डायनेमिक्स: मैन्युफैक्चरिंग में स्टाफ लागत कम होने और नॉन-आईटी सर्विस सेक्टर में बढ़ती लागत के बीच अंतर
  • सेक्टोरल इम्बैलेंस: हाई-ग्रोथ मैन्युफैक्चरिंग/IT सेक्टर्स और नॉन-फाइनेंशियल प्राइवेट फर्म्स पर बढ़ते कॉस्ट प्रेशर के बीच अंतर

मुख्य शब्द: मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट · कॉस्ट-पुश महंगाई · प्रॉफिटेबिलिटी एनालिसिस · क्षेत्रीय विकास · मौद्रिक संकेतक

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रॉन ने फ्रांस में 'Bharat Innovates 2026' का उद्घाटन किया

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रॉन ने फ्रांस में 'Bharat Innovates 2026' का उद्घाटन किया, जिसमें वैश्विक निवेशकों के समक्ष 120 भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स का प्रदर्शन किया गया।

इस आयोजन में अंतरिक्ष, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा क्षेत्रों से संबंधित 120 डीप-टेक स्टार्टअप्स ने भाग लिया। चयन प्रक्रिया में भारत के नवाचार परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम उद्यमों की पहचानकरने हेतु बहु-स्तरीय स्क्रीनिंग और परामर्श (mentoring) शामिल था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यBharat Innovates 2026 में भारत के 120 deep-tech startups को प्रदर्शित किया गया।
  • विज्ञान-तकनीकप्रमुख रूप से Space, Defence, Healthcare और Energy जैसे Deep-tech क्षेत्रों को रेखांकित किया गया है।
  • स्थानयह आयोजन फ्रांस के निस (Nice) में आयोजित किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक नवाचार अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने में डीप-टेक स्टार्टअप्स के महत्व और इन उद्यमों के विस्तार में द्विपक्षीय भागीदारी की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • कैपिटल एक्सेस: हाई-रिस्क और लॉन्ग-जेस्टेशन डीप-टेक R&D प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग गैप को कम करना
  • ग्लोबल इंटीग्रेशन: भारतीय स्टार्टअप्स को ग्लोबल वैल्यू चेन में स्थापित करने के लिए द्विपक्षीय प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल
  • इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी: अंतरराष्ट्रीय निवेश और सहयोग की तलाश के साथ स्वदेशी डीप-टेक इनोवेशन की सुरक्षा

मुख्य शब्द: डीप-टेक · इनोवेशन इकोसिस्टम · द्विपक्षीय सहयोग · वेंचर कैपिटल · ग्लोबल वैल्यू चेन

GS3अर्थव्यवस्था › बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDIप्रीलिम्स

मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत की व्यापार गतिशीलता में परिवर्तन हो रहा है

चर्चा में क्यों: मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत की व्यापार गतिशीलता में परिवर्तन हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप ओमान के साथ व्यापार में वृद्धि हुई है और सिंगापुर तथा तंजानिया को होने वाले निर्यात की हिस्सेदारी में बढ़ोत्तरी देखी गई है।

ओमान से भारत का आयात 3.8 गुना बढ़कर 3.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसका मुख्य कारण ऊर्जा शिपमेंट है। सिंगापुर, चीन और नीदरलैंड को पीछे छोड़ते हुए भारत के तीसरे सबसे बड़े निर्यात गंतव्य के रूप में उभरा है, जबकि तंजानिया भारत का आठवां सबसे बड़ा निर्यात बाजार बन गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यओमान से भारत का आयात $3.4 बिलियन तक पहुंच गया, जो कि 3.8 गुना की वृद्धि है।
  • तथ्यसिंगापुर वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है।
  • तथ्यटैंजानिया तेल उत्पादों और रत्न एवं आभूषणों के कारण भारत का आठवां सबसे बड़ा निर्यात बाजार है।
  • तथ्यभारत ने पेरू और ब्राजील से महत्वपूर्ण आयात वृद्धि देखी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक बदलावों का भारत के समुद्री व्यापार मार्गों के पुनर्गठन और इसके वैश्विक निर्यात गंतव्यों के विविधीकरण पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

  • सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन: जियोपॉलिटिकल रिस्क कम करने के लिए चीन जैसे पारंपरिक ट्रेड हब्स पर निर्भरता घटाना
  • एनर्जी सिक्योरिटी पिवट: ऊर्जा आयात को स्थिर करने के लिए ओमान और दक्षिण अमेरिकी पार्टनर्स (पेरू, ब्राजील) की ओर रणनीतिक बदलाव
  • मार्केट विस्तार: जेम्स और ज्वेलरी जैसे हाई-वैल्यू एक्सपोर्ट के लिए अफ्रीकी महाद्वीप (तंजानिया) का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: व्यापार विविधीकरण · भू-राजनीतिक पुनर्गठन · ऊर्जा सुरक्षा · समुद्री व्यापार · निर्यात विस्तार

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स + मेन्स

माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (MFIN) ने रिपोर्ट दी है कि सूक्ष्म वित्त (microfinance) क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है

चर्चा में क्यों: माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (MFIN) ने रिपोर्ट दी है कि सूक्ष्म वित्त (microfinance) क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, जिसमें मार्च 2026 तक सात तिमाहियों के बाद पहली बार तिमाही पोर्टफोलियो वृद्धि दर्ज की गई है।

जनवरी-मार्च 2026 की अवधि में ऋणों का वितरण 77,524 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। जोखिम वाले पोर्टफोलियो (PAR) में उल्लेखनीय गिरावट आई और यह पिछले वर्ष के 6% से घटकर मार्च 2026 तक 2% रह गया। वर्तमान में, बिहार भारत में सूक्ष्म वित्त (microfinance) का सबसे बड़ा बाजार है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यजनवरी-मार्च 2026 की अवधि में माइक्रोफाइनेंस ऋण वितरण (loan disbursements) ₹77,524 करोड़ तक पहुंच गया।
  • तथ्यमाइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में पोर्टफोलियो एट रिस्क (PAR) मार्च 2026 तक घटकर 2% हो गया।
  • स्थानबिहार भारत में सूक्ष्म वित्त (microfinance) का सबसे बड़ा बाजार है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान आता है।
  • योजनाCGSMFI 2.0 सूक्ष्म वित्त (microfinance) क्षेत्र की रिकवरी का समर्थन करने वाली एक सरकारी योजना है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन में सूक्ष्म वित्त (माइक्रोफाइनेंस) क्षेत्र के योगदान और 'पोर्टफोलियो एट रिस्क' (PAR) के प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • क्रेडिट एक्सेसिबिलिटी: बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कम आय वाले उधारकर्ताओं के लिए फॉर्मल बैंकिंग गैप को कम करना
  • रिस्क मैनेजमेंट: कम पोर्टफोलियो एट रिस्क (PAR) लेवल बनाए रखने की ज़रूरत के साथ हाई-वॉल्यूम छोटे लोन डिस्बर्समेंट के बीच संतुलन बनाना
  • पॉलिसी सपोर्ट: उधारकर्ताओं का भरोसा बढ़ाने और रिपेमेंट व्यवहार सुधारने में CGSMFI 2.0 जैसी सरकारी योजनाओं की भूमिका

मुख्य शब्द: वित्तीय समावेशन · जोखिम वाले पोर्टफोलियो · माइक्रोफाइनेंस · क्रेडिट की सुलभता · ऋणदाता का भरोसा

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