RBI ने प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग के बैंक वित्तपोषण के लिए 100% संपार्श्विक (collateral) की आवश्यकता वाला एक नया ढांचा पेश किया है
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चर्चा में क्यों
RBI ने प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग के बैंक वित्तपोषण के लिए 100% संपार्श्विक (collateral) की आवश्यकता वाला एक नया ढांचा पेश किया है, जो ट्रेडिंग फर्मों के लिए वित्तपोषण लागत को प्रभावित करेगा।
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का नया ढांचा यह अनिवार्य करता है कि प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक वित्तपोषण को 100% संपार्श्विक (collateral) द्वारा समर्थित होना चाहिए। यह नियम 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी हो गया है, और इससे व्यापार लागत में 300-500 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि होने की संभावना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाRBI: भारतीय रिज़र्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है जो मौद्रिक नीति और बैंकिंग विनियमन के लिए उत्तरदायी है।
- तथ्यसंपार्श्विक आवश्यकता: प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के बैंक वित्तपोषण के लिए अब 100% संपार्श्विक (collateral) अनिवार्य है।
- तथ्यलागत प्रभाव: उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि ट्रेडिंग लागत में 300-500 basis points की वृद्धि होगी।
- संस्थाSEBI: Securities and Exchange Board of India प्रतिभूति बाजार (securities market) का प्राथमिक नियामक है।
मेन्स के लिए
Q. स्वामित्व व्यापार (proprietary trading) पर कठोर संपार्श्विक आवश्यकताओं के निहितार्थों और भारत में बाजार तरलता एवं पूंजी निर्माण पर उनके संभावित प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Liquidity contraction: Higher funding costs may reduce trading volumes and discourage high-frequency market participation.
- Regulatory arbitrage: Firms may shift activities to less regulated platforms to bypass high collateral costs.
- Systemic risk mitigation: Reducing leverage in proprietary trading protects the banking system from speculative losses.
कीवर्ड: Proprietary Trading · Collateralization · Monetary Policy · Market Liquidity · Capital Adequacy
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।