GS2 · राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · 7
GS2राजव्यवस्था एवं संविधान › चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधारमेन्स चर्चा में क्यों: राज्य चुनाव आयोग ने मतदान बूथ स्तर का डेटा जारी किया है, जिसमें दिखाया गया है कि तमिलनाडु में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से पुरुषों की तुलना में 2.6 लाख अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए हैं।
तमिलनाडु में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) अभियान के परिणामस्वरूप मतदाता सूची से कुल मिलाकर लगभग 97.3 लाख नाम हटा दिए गए। आंकड़ों से पता चला है कि इसमें लैंगिक असमानता देखी गई, जहाँ पुरुषों की तुलना में 2.6 लाख अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए। यही रुझान बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में भी देखा गया, जहाँ पुरुषों की तुलना में सात लाख अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यSIR के बाद तमिलनाडु की मतदाता सूची से कुल विलोपन (deletions) लगभग 97.3 लाख है।
- तथ्यतमिलनाडु में जेंडर स्क्यू (Gender skew): SIR: पुरुषों की तुलना में 2.6 लाख अधिक महिलाओं को हटाया गया।
- तथ्यबिहार में जेंडर स्क्यू (Gender skew): SIR में पुरुषों की तुलना में सात लाख अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए।
- स्थानतमिलनाडु और बिहार: वे राज्य जहाँ Special Intensive Revision (SIR) अभ्यास आयोजित किए गए थे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मतदाता सूची के संशोधन में लैंगिक असमानता में योगदान देने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए और समावेशी मतदाता पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।
- डेमोग्राफिक शिफ्ट: शादी से जुड़े माइग्रेशन का महिला मतदाता रिटेंशन पर असर
- डेटा इंटीग्रिटी: आधिकारिक पता अपडेट किए बिना शिफ्ट होने वाले निवासियों की ट्रैकिंग में चुनौतियां
- जेंडर इक्विटी: यह सुनिश्चित करना कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं अनजाने में महिला मतदाताओं को अधिकार से वंचित न करें
मुख्य शब्द: मतदाता सूची · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे · लिंग असंतुलन · मतदाता सूची से नाम हटाना · जनसांख्यिकीय प्रवास
GS2अंतर्राष्ट्रीय संबंध › अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं एवं एजेंसियां (UN, WTO, IMF...)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विश्वास जताया है कि तेलंगाना की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करेगा। उन्होंने बिहार की SIR प्रक्रिया को एक सफल मॉडल के रूप में उद्धृत किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने चुनावी शुचिता बनाए रखने में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की भूमिका पर प्रकाश डाला। SIR प्रक्रिया का मुख्य ध्यान मतदाता सूची की शुद्धता पर केंद्रित है, ताकि शहरी मतदाताओं की उदासीनता जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सके।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- पदज्ञानेश कुमार: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त।
- तथ्यSIR: मतदाता सूची की शुद्धता के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) प्रक्रिया।
- संस्थाBLOs: बूथ लेवल ऑफिसर्स (Booth Level Officers) जमीनी स्तर के चुनावी डेटा के लिए जिम्मेदार होते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के महत्व की चर्चा कीजिए।
- डेटा की शुद्धता: डुप्लीकेट एंट्री और 'घोस्ट' वोटर्स का खतरा निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव को प्रभावित कर सकता है
- लॉजिस्टिक बॉटलनैक: उच्च-घनत्व वाले शहरी क्षेत्रों में BLO ट्रेनिंग और रियल-टाइम वेरिफिकेशन की चुनौतियां
- इनक्लूजन गैप: कठोर शुद्धिकरण और हाशिए पर मौजूद समूहों के मताधिकार के संवैधानिक अधिकार के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · लोकतंत्र · प्रशासनिक दक्षता · मतदाताओं की उदासीनता · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे
चर्चा में क्यों: कर्नाटक राज्य सरकार ने बेंगलुरु के शासन ढांचे को पांच कॉर्पोरेशनों में पुनर्गठित करने के लिए 'ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस एक्ट, 2024' (Greater Bengaluru Governance Act, 2024) लागू किया है, जिसे मई 2025 से प्रभावी किया जाएगा।
यह अधिनियम बेंगलुरु के शासन को पांच निगमों में पुनर्गठित करता है और सभी सार्वजनिक उपक्रमों (parastatals) को एक एकल प्लेटफॉर्म के तहत एकीकृत करता है। इस कदम का उद्देश्य शहर के शहरी परिदृश्य के प्रबंधन में समन्वय और दक्षता में सुधार करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- अधिनियम / विधेयकग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस एक्ट (Greater Bengaluru Governance Act), 2024: इसे कर्नाटक राज्य सरकार द्वारा मई 2025 में लागू किया गया।
- तथ्यशहर के शासन को पांच कॉर्पोरेशन (Corporations) में पुनर्गठित किया गया है।
- संस्थापरस्टेटल्स (Parastatals): नए एक्ट के तहत पहली बार एक ही प्लेटफॉर्म के तहत एकीकृत (Integrated) किए गए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बेंगलुरु जैसे विस्तृत महानगरीय क्षेत्रों में शहरी शासन की चुनौतियों और कुशल नगर प्रबंधन हेतु पर-सरकारी निकायों (parastatals) के एकीकरण के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
- प्रशासनिक टकराव: स्वतंत्र पैरास्टेटल्स और एकीकृत म्युनिसिपल बॉडीज के बीच तालमेल की कमी
- कानूनी अनिश्चितता: गवर्नेंस रीस्ट्रक्चरिंग की वैधता को चुनौती देने वाली हाई कोर्ट की लंबित याचिकाएं
- डेमोक्रेटिक डेफिसिट: 2026 के निर्धारित चुनावों में देरी से स्थानीय प्रतिनिधित्व और जवाबदेही प्रभावित
मुख्य शब्द: अर्बन गवर्नेंस · पराजैतिक संस्थाएं · प्रशासनिक दक्षता · विकेंद्रीकरण · न्यायिक समीक्षा
GS2सामाजिक न्याय › कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)प्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों के विस्तार) अधिनियम, 1996 की वर्षगांठ के अवसर पर विशाखापट्टनम में दो दिवसीय 'PESA महोत्सव' की घोषणा की है।
इस कार्यक्रम में PESA पोर्टल, संकेतक (Indicators), प्रशिक्षण मॉड्यूल और हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले पर आधारित एक ई-बुक लॉन्च की जाएगी। इसका उद्देश्य सभी 10 PESA राज्यों के लगभग 2,000 प्रतिनिधियों की मेजबानी करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- अधिनियम / विधेयकPESA Act: पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996।
- तथ्यइस महोत्सव में सभी 10 PESA राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- स्थानकिन्नौर जिला: हिमाचल प्रदेश में PESA ई-बुक के विषय का स्थान।
- संस्थायूनियन मिनिस्ट्री ऑफ पंचायती राज: PESA महोत्सव की आयोजन करने वाली संस्था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 किस प्रकार जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाता है और अनुसूचित क्षेत्रों में स्व-शासन सुनिश्चित करने में ग्राम सभाओं की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- संस्थागत स्वायत्तता: प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय रीति-रिवाजों पर ग्राम सभाओं की शक्ति को मजबूत करना
- क्षमता निर्माण: जनजातीय शासन को सुव्यवस्थित करने के लिए स्टैंडर्डाइज्ड ट्रेनिंग मॉड्यूल और डिजिटल पोर्टल्स की ज़रूरत
- संघीय समन्वय: 10 अलग-अलग राज्यों में PESA लागू करने में चुनौतियां
मुख्य शब्द: स्व-शासन · आदिवासी अधिकार · ग्राम सभा · विकेंद्रीकरण · अनुसूचित क्षेत्र
चर्चा में क्यों: नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) और कर्नाटक स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने मैसूरु जिले और तालुक कोर्टों में लंबित मामलों को सुलझाने के लिए 2 जनवरी, 2026 से शुरू होने वाला 90 दिनों का मध्यस्थता अभियान (Mediation Campaign) शुरू किया है।
यह अभियान आपराधिक, मोटर दुर्घटना, बैंक रिकवरी, श्रम और नागरिक मामलों में लंबित मामलों को लक्षित करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थाNALSA: National Legal Services Authority मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करने वाली सर्वोच्च संस्था (apex body) है।
- तथ्यमेडिएशन कैंपेन (Mediation campaign) की अवधि 90 दिनों की निर्धारित है, जो 2 जनवरी, 2026 से शुरू होगी।
- स्थानयह पहल कर्नाटक के मैसूर जिले और तालुका कोर्ट्स (taluk courts) में लागू की जा रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय न्यायपालिका में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- संस्थागत बाधा: सिविल और क्रिमिनल मुकदमों की भारी संख्या से पारंपरिक कोर्ट सिस्टम पर दबाव
- सामाजिक एकजुटता: सामुदायिक संबंधों को बनाए रखने और कम लागत वाली राहत प्रदान करने के लिए मध्यस्थता एक टूल के रूप में
- प्रक्रियात्मक दक्षता: श्रम और बैंक रिकवरी विवादों में कोर्ट के बाहर समझौते के जरिए न्यायिक बैकलॉग को कम करना
मुख्य शब्द: वैकल्पिक विवाद समाधान · न्यायिक लंबित मामले · मध्यस्थता · कानूनी सहायता · आपसी समझौता
GS2शासन › ई-गवर्नेंस एवं नागरिक सेवाएंप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: तेलंगाना राज्य सरकार ने किराए के खर्च को कम करने के उद्देश्य से सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया है कि वे 31 दिसंबर, 2025 तक निजी इमारतों को खाली कर सरकारी स्वामित्व वाले स्थानों में स्थानांतरित हो जाएं।
राज्य सरकार ने एक परिपत्र (Circular) जारी कर विभागों को परिश्रम भवन, गगन विहार कॉम्प्लेक्स, BRK भवन और एर्रम मंजिल सहित सरकारी स्वामित्व वाले खाली परिसरों में स्थानांतरित होने का निर्देश दिया है। स्थानांतरण की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2025 निर्धारित की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
- तथ्यनिजी इमारतों से सरकारी कार्यालयों को स्थानांतरित करने की डेडलाइन: 31 दिसंबर, 2025।
- स्थानपुनर्वास के लिए सरकारी स्वामित्व वाले कॉम्प्लेक्स: परिश्रम भवन, गगन विहार कॉम्प्लेक्स, BRK भवन और एर्रम मंजिल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्य शासन में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के अनुकूलन और आवर्ती किराये की लागत को कम करने के राजकोषीय एवं प्रशासनिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
- राजकोषीय अनुकूलन: मुख्य विकास परियोजनाओं के लिए फंड जुटाने हेतु प्राइवेट लीज पर होने वाले आवर्ती खर्च में कटौती
- एसेट यूटिलाइजेशन: सरकारी रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट के कम इस्तेमाल की चुनौती को हल करना
मुख्य शब्द: राजकोषीय विवेक · सार्वजनिक बुनियादी ढांचा · एसेट मैनेजमेंट · प्रशासनिक दक्षता
चर्चा में क्यों: शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुई सुरक्षा घटनाओं और तनाव के कारण, भारत ने बांग्लादेश के चटगाँव स्थित इंडियन वीजा एप्लीकेशन सेंटर में वीजा संचालन को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया है।
इंडियन वीजा एप्लीकेशन सेंटर (IVAC) ने 21 दिसंबर, 2025 से अगले आदेश तक वीजा से जुड़ी सभी सेवाओं को निलंबित कर दिया है। यह निलंबन चित्तगोंग स्थित भारतीय सहायक उच्चायुक्त कार्यालय में हुई सुरक्षा घटनाओं और 12 दिसंबर को युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मृत्यु के बाद लिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- स्थानचित्तगाँव बांग्लादेश का एक शहर है जहाँ वीजा ऑपरेशंस (visa operations) को निलंबित कर दिया गया है।
- संस्थाIVAC (Indian Visa Application Centre) भारतीय नागरिकों और विदेशियों के लिए वीजा से संबंधित सेवाओं का प्रबंधन करता है।
- तथ्यवीजा सेवाएं 21 दिसंबर, 2025 से निलंबित कर दी गई थीं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पड़ोसी देशों में बिगड़ते सुरक्षा परिवेश और राजनीतिक अस्थिरता भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय राजनयिक और प्रशासनिक सहयोग को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
- सुरक्षा-डिप्लोमेसी नेक्सस: प्रशासनिक सेवा वितरण और डिप्लोमैटिक कर्मियों व इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के बीच संतुलन
- भू-राजनीतिक तनाव: बांग्लादेश में घरेलू राजनीतिक अस्थिरता का भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के उद्देश्यों पर प्रभाव
मुख्य शब्द: द्विपक्षीय संबंध · डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी · वीज़ा पॉलिसी · पड़ोस पहले · भू-राजनीतिक स्थिरता
GS3 · अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा · 17
चर्चा में क्यों: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने SHANTI बिल को अपनी मंजूरी दे दी है, जो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी की अनुमति देने के लिए मौजूदा नागरिक परमाणु कानूनों को निरस्त करता है।
SHANTI बिल (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) निजी संस्थाओं को परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने, उनके स्वामित्व, संचालन और उन्हें बंद करने (decommission) की अनुमति देता है। यह अनिवार्य करता है कि यूरेनियम खनन, संवर्धन (enrichment) और अपशिष्ट प्रबंधन (waste management) की जिम्मेदारी सरकारी संस्थाओं के पास ही बनी रहे।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- अधिनियम / विधेयकSHANTI बिल: भारत के परिवर्तन के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और प्रगति।
- तथ्यन्यूक्लियर पावर प्लांट्स के निर्माण, स्वामित्व, संचालन और डीकमीशनिंग (decommissioning) में प्राइवेट पार्टिसिपेशन की अनुमति है।
- तथ्ययूरेनियम माइनिंग, एनरिचमेंट और वेस्ट मैनेजमेंट को संभालने के लिए सरकारी संस्थाएं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नागरिक परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी को खोलने के भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विनियामक तंत्र पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
- रेगुलेटरी ओवरसाइट: प्राइवेट ऑपरेशनल ऑटोनॉमी और सख्त सेफ्टी प्रोटोकॉल और न्यूक्लियर सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स के बीच संतुलन
- संसाधन एकाधिकार: पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने के लिए यूरेनियम खनन और वेस्ट मैनेजमेंट पर सरकार का केंद्रीकृत नियंत्रण
मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · निजी भागीदारी · परमाणु शासन · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · संसाधन प्रबंधन
GS3पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी › प्रजातियां, संरक्षित क्षेत्र एवं आर्द्रभूमिप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बाघ और हाथियों के संरक्षण की प्रगति और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों की समीक्षा के लिए NTCA और प्रोजेक्ट एलीफेंट स्टीयरिंग कमेटी की बैठकों की अध्यक्षता की।
ये बैठकें 21 दिसंबर, 2025 को सुंदरबन टाइगर रिज़र्व में आयोजित की गईं। मुख्य एजेंडा मदों में प्रोजेक्ट चीता का विस्तार, अखिल भारतीय बाघ गणना (All India Tiger Estimation) का छठा चक्र और प्रोजेक्ट चीता के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल थे।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- संस्थाNTCA: नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (National Tiger Conservation Authority)।
- स्थानसुंदरबन टाइगर रिज़र्व: उच्च-स्तरीय संरक्षण बैठकों का स्थान।
- तथ्यछठा चक्र: ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन (All India Tiger Estimation) का वर्तमान चक्र।
- विज्ञान-तकनीकप्रोजेक्ट चीता: इसमें विस्तार योजनाएं और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के अपडेट्स शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के बाघ और हाथी गलियारों में पारिस्थितिक अखंडता सुनिश्चित करते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आवश्यक रणनीतियों का विश्लेषण कीजिए।
- हैबिटेट फ्रैगमेंटेशन: प्रवासी गलियारों पर अतिक्रमण से जानवरों और इंसानों के बीच बढ़ती नजदीकी
- संस्थागत समन्वय: NTCA संरक्षण जनादेश और स्थानीय समुदाय की आजीविका सुरक्षा के बीच संतुलन
- सीमा पार सहयोग: प्रोजेक्ट चीता विस्तार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत
मुख्य शब्द: मानव-वन्यजीव संघर्ष · जैव विविधता संरक्षण · आवास विखंडन · पारिस्थितिक अखंडता · प्रोजेक्ट चीता
GS3पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी › प्रजातियां, संरक्षित क्षेत्र एवं आर्द्रभूमिप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: केंद्र ने स्पष्ट किया कि बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति देने के लिए अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्र ने यह भी कहा कि नई लीज (Lease) पर रोक लगाने वाला सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी भी लागू है।
यह विवाद विभिन्न राज्यों में पहाड़ियों को परिभाषित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले '100-मीटर' मानदंड से संबंधित है। केंद्र का तर्क है कि अरावली की पहाड़ियाँ नई खनन लीज (Mining Leases) के विरुद्ध मौजूदा न्यायिक आदेशों के तहत संरक्षित बनी हुई हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- स्थानअरावली हिल्स: भारत के कई राज्यों में फैली एक पर्वत श्रृंखला।
- तथ्य100-मीटर क्राइटेरियन (100-metre criterion): माइनिंग रेगुलेशंस (mining regulations) के संदर्भ में पहाड़ी सीमाओं को परिभाषित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला विशिष्ट माप।
- संस्थासुप्रीम कोर्ट: अरावली क्षेत्र में नए माइनिंग लीज़ (mining leases) जारी करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अरावली पहाड़ियों के पारिस्थितिक संरक्षण और औद्योगिक खनन आवश्यकताओं के मध्य संघर्ष पर चर्चा कीजिए तथा पर्यावरणीय शासन में न्यायिक निरीक्षण की भूमिका को रेखांकित कीजिए। चर्चा कीजिए।
- न्यायिक निगरानी: औद्योगिक विस्तार के खिलाफ पर्यावरणीय सुरक्षा लागू करने में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
- रेगुलेटरी अस्पष्टता: माइनिंग लीज़ पात्रता के लिए पहाड़ी परिभाषाओं को मानकीकृत करने में चुनौतियां
- पारिस्थितिक अखंडता: अरावली जैव विविधता और ग्राउंडवाटर रिचार्ज पर बड़े पैमाने पर माइनिंग का प्रभाव
मुख्य शब्द: पर्यावरण गवर्नेंस · न्यायिक सक्रियता · सतत विकास · पारिस्थितिक संरक्षण · नियामक ढांचा
स्रोत: द हिंदू ↗+1 और खबरें इस विषय पर GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने पहली बार पंजाब से कश्मीर के अनंतनाग गुड्स टर्मिनल तक एक फ्रेट ट्रेन के जरिए 1,384 टन खाद्यान्न की ढुलाई की।
FCI ने पंजाब से कश्मीर के अनंतनाग गुड्स टर्मिनल तक 1,384 टन खाद्यान्न की परिवहन सुविधा प्रदान की। रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स का यह महत्वपूर्ण मील का पत्थर दूरस्थ क्षेत्रों तक खाद्यान्न की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
- स्थानअनंतनाग गुड्स टर्मिनल: कश्मीर में अनाज की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला विशिष्ट रेल टर्मिनल।
- तथ्यक्षेत्र में पहली फ्रेट ट्रेन डिलीवरी में 1,384 टन अनाज transported किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कश्मीर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स के विस्तार से खाद्य सुरक्षा को कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को कैसे गति दी जा सकती है, इस पर चर्चा कीजिए।
- लॉजिस्टिक्स दक्षता: खराब होने वाली और गैर-खराब होने वाली खाद्य आपूर्ति के लिए ट्रांजिट समय और लागत में कमी
- मार्केट इंटीग्रेशन: स्थानीय कीमतों को स्थिर करने के लिए दूरदराज के कृषि क्षेत्रों को मेनस्ट्रीम सप्लाई चेन से जोड़ना
- इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: पहाड़ी इलाकों में रोड ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए रेल कनेक्टिविटी का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: खाद्य सुरक्षा · लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर · सप्लाई चेन मैनेजमेंट · क्षेत्रीय आर्थिक विकास · रेल कनेक्टिविटी
चर्चा में क्यों: उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बताया कि जनवरी 2024 तक 5.43 लाख से अधिक शिकायतें लंबित हैं, जो उपभोक्ता कोर्ट (Consumer Court) के फैसलों में होने वाली प्रणालीगत देरी को दर्शाता है।
जनवरी 2024 तक, 5.43 लाख से अधिक उपभोक्ता शिकायतें लंबित थीं। इन देरी के कारणों में कर्मचारियों की कमी और आधुनिक सुविधाओं के अभाव जैसी संरचनात्मक बाधाएं (structural bottlenecks) शामिल हैं। इसके साथ ही, समय सीमा बढ़ाने के बार-बार होने वाले अनुरोध जैसे प्रक्रियात्मक अवरोध भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यजनवरी 2024 तक 5.43 लाख से अधिक उपभोक्ता शिकायतें लंबित थीं।
- अधिनियम / विधेयकConsumer Protection Act, 2019 शिकायतों के निपटारे के लिए वैधानिक समय-सीमा (statutory timelines) प्रदान करता है।
- संस्थाकंज्यूमर कोर्ट के बैकलॉग (backlogs) पर रिपोर्टिंग करने वाली नोडल बॉडी उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय (Ministry of Consumer Affairs) है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में वैधानिक समय-सीमाओं के बावजूद उपभोक्ता विवाद निवारण तंत्र की प्रभावकारिता में बाधा डालने वाली संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
- संस्थागत बाधा: कंज्यूमर कमिशन्स में विशेषज्ञ स्टाफ और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
- प्रक्रियात्मक बाधा: समय विस्तार के बार-बार होने वाले अनुरोध और देरी से मिलने वाले नोटिस केस की प्रगति को रोक रहे
- एक्सपर्टीज़ गैप: जटिल तकनीकी और कमर्शियल उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए सब्जेक्ट-मैटर एक्सपर्ट्स की ज़रूरत
मुख्य शब्द: सिस्टमेटिक इनकंसिस्टेंसी · निवारण तंत्र · स्ट्रक्चरल बॉटलनैक्स · वैधानिक समय सीमा · प्रक्रियात्मक बाधाएं
GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकमेन्स चर्चा में क्यों: कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र के विधायकों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक याचिका सौंपी है। इसमें क्षेत्रीय आर्थिक असमानताओं को दूर करने के लिए एक समर्पित विकास बोर्ड और ₹5,000 करोड़ के वार्षिक अनुदान की मांग की गई है।
इस याचिका पर कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र के आठ मंत्रियों को छोड़कर अन्य सभी विधायकों ने हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित बोर्ड का उद्देश्य प्रति व्यक्ति आय और औद्योगिक विकास में हो रही कमी को दूर करना है, और यह कल्याण कर्नाटक क्षेत्र विकास बोर्ड (KKRDB) की तर्ज पर काम करेगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यकित्तूर कर्नाटक क्षेत्र के लिए प्रस्तावित वार्षिक ग्रांट: ₹5,000 करोड़।
- संस्थाकल्याण कर्नाटक रीजनल डेवलपमेंट बोर्ड (KKRDB): कर्नाटक में क्षेत्रीय विकास के लिए मौजूदा मॉडल।
- स्थानकित्तूर कर्नाटक: कर्नाटक का एक क्षेत्र जो समर्पित डेवलपमेंट बोर्ड (Development Board) की मांग कर रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत जैसी संघीय संरचना में सामाजिक-आर्थिक असंतुलन को दूर करने और न्यायसंगत विकास सुनिश्चित करने में क्षेत्रीय विकास बोर्डों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- राजकोषीय संघवाद: बजट की सीमाओं के साथ राज्य-स्तरीय क्षेत्रीय अनुदानों में संतुलन
- विकास की असमानता: प्रति व्यक्ति आय और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर में संरचनात्मक कमियों को दूर करना
- प्रशासनिक विकेंद्रीकरण: समर्पित बोर्ड बनाम जनरलिस्ट स्टेट प्लानिंग की प्रभावशीलता
मुख्य शब्द: क्षेत्रीय असंतुलन · समान विकास · राजकोषीय संघवाद · सामाजिक-आर्थिक असमानता · सब्सिडियारिटी
GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) ने PM E-DRIVE योजना के तहत सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए चार्ज पॉइंट ऑपरेटरों से अभिव्यक्ति की रुचि (Expressions of Interest - EoI) आमंत्रित की है।
KSEB श्रेणी सी. बुनियादी ढांचे (infrastructure) के विकास के लिए स्थापित संगठनों की तलाश कर रहा है, जिसमें शहर की सड़कें और हाईवे शामिल हैं। यह योजना अपस्ट्रीम लागत पर 80% की सब्सिडी प्रदान करती है, जिसमें प्रस्तावों का मूल्यांकन करने और सब्सिडी देने की जिम्मेदारी भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) की होगी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- योजनाPM E-DRIVE: EV को अपनाने की गति बढ़ाने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) की एक राष्ट्रीय पहल।
- तथ्यKSEB, Category सी. चार्जिंग स्टेशनों के लिए अपस्ट्रीम कॉस्ट (upstream costs) पर 80% सब्सिडी प्रदान करता है।
- तथ्यCategory सी. इन्फ्रास्ट्रक्चर में शहर की सड़कें और हाईवे जैसे स्थान शामिल हैं।
- संस्थाभारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries - MHI): PM E-DRIVE के तहत प्रस्तावों का मूल्यांकन करने और सब्सिडी प्रदान करने के लिए नोडल मंत्रालय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को व्यापक रूप से अपनाने में बाधा उत्पन्न करने वाली बुनियादी ढाँचे संबंधी चुनौतियों को दूर करने में पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना किस प्रकार प्रभावी सिद्ध हो सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
- पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप: सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से बढ़ाने के लिए प्राइवेट चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स का इस्तेमाल
- राजकोषीय व्यवहार्यता: भारी शुरुआती सब्सिडी लागत और लंबी अवधि की ग्रिड स्थिरता व डिमांड मैनेजमेंट के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · सब्सिडी · डिकार्बोनाइजेशन
GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकमेन्स चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'विकसित भारत' के लिए एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ाने के लिए AI के एकीकरण और नियामक पूर्वानुमेयता (Regulatory Predictability) पर जोर दिया गया है।
यह रोडमैप वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित एक उच्च-स्तरीय चिंतन शिविर के दौरान प्रस्तुत किया गया था। इसका मुख्य ध्यान तकनीक-आधारित प्रणालियों, भविष्य के लिए तैयार कर प्रशासनिक ढांचे और निरंतर विकास के लिए कुशल फंड फ्लो (fund flows) पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- पदनिर्मला सीतारमण: केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री।
- तथ्यचिंतन शिविर: वित्त मंत्रालय और कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय के अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक।
- विज्ञान-तकनीकAI इंटीग्रेशन: इसे गवर्नेंस में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक टूल के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का एकीकरण और विनियामक पूर्वानुमेयता (regulatory predictability) किस प्रकार 2047 तक 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकती है, चर्चा कीजिए।
- संस्थागत क्षमता: रियल-टाइम फंड फ्लो मॉनिटरिंग के लिए मैनुअल ओवरसाइट से टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड सिस्टम की ओर बदलाव
- रेगुलेटरी सर्टेन्टी: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस सुधारने और निवेश आकर्षित करने के लिए कंप्लायंस की बाधाएं कम करना
- गवर्नेंस में पारदर्शिता: प्रशासनिक अपारदर्शिता को कम करने और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: विकसित भारत · रेगुलेटरी प्रेडिक्टिबिलिटी · ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड गवर्नेंस · राजकोषीय पारदर्शिता
GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: भारतीय रेलवे ने दूर-दराज के इलाकों से आने वाले यात्रियों को उनकी स्थिति की जानकारी देने के लिए, निर्धारित प्रस्थान से कम से कम 10 घंटे पहले आरक्षण चार्ट (Reservation Chart) तैयार करने की एक नई नीति लागू की है।
यह नीति चार्टिंग स्टेशनों से चलने वाली सभी ट्रेनों पर लागू होती है। सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच चलने वाली ट्रेनों के लिए, चार्ट पिछले दिन रात 8 बजे तक तैयार कर लिए जाते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यरिजर्वेशन चार्ट्स निर्धारित प्रस्थान से 10 घंटे पहले तैयार किए जाने चाहिए।
- तथ्यसुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच चलने वाली ट्रेनों के लिए, चार्ट पिछले दिन रात 8 बजे तक तैयार कर लिए जाते हैं।
- संस्थासाउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) ने इस पॉलिसी के संबंध में आधिकारिक रिलीज़ जारी की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रेलवे क्षेत्र में सक्रिय सूचना प्रसार और लॉजिस्टिक सुधार किस प्रकार यात्री अनुभव को बेहतर बना सकते/सकती हैं और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (लास्ट-माइल कनेक्टिविटी) में सुधार कर सकते हैं, चर्चा कीजिए।
- सूचना की कमी: सीट की उपलब्धता की जल्दी पुष्टि करके यात्रियों की चिंता कम करना
- लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लंबी दूरी के यात्रियों के लिए चार्ट तैयार करने की प्रक्रिया को आसान बनाना
मुख्य शब्द: यात्री अनुभव · लॉजिस्टिक दक्षता · सूचना का प्रसार · लास्ट-माइल कनेक्टिविटी
GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स चर्चा में क्यों: रेलवे मंत्रालय ने यात्री किराए के युक्तिकरण (Rationalization) की घोषणा की है, जो 26 दिसंबर से प्रभावी होगा। इसका उद्देश्य बढ़ती परिचालन लागत और यात्रियों की वहनीयता (Affordability) के बीच संतुलन बनाना है।
रेलवे मंत्रालय किराया संशोधन के लिए नोडल निकाय है। परिचालन लागत के दबाव को देखते हुए, यह बदलाव 26 दिसंबर, 2025 से प्रभावी होने वाला है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
- तथ्यफेयर रेशनलाइजेशन (Fare rationalization) प्रभावी होने की तारीख: 26 दिसंबर, 2025।
- संस्थारेलवे मंत्रालय: रेलवे के किराया स्ट्रक्चर (fare structure) और ऑपरेशनल कॉस्ट (operational costs) के लिए जिम्मेदार।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय रेलवे में किफायती सार्वजनिक परिवहन के सामाजिक दायित्व और राजकोषीय स्थिरता की आवश्यकता के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
- राजकोषीय स्थिरता: भारी ऑपरेशनल खर्च और किफायती मास ट्रांजिट प्रदान करने के जनादेश के बीच संतुलन
- सब्सिडी बनाम रेवेन्यू: सरकारी राजकोषीय घाटा और कम लागत वाली रेल यात्रा की सामाजिक-आर्थिक ज़रूरत के बीच का तालमेल
मुख्य शब्द: राजकोषीय स्थिरता · ऑपरेशनल कॉस्ट · सार्वजनिक बुनियादी ढांचा · किराया तर्कसंगत बनाना · सामाजिक ज़िम्मेदारी
स्रोत: द हिंदू ↗+1 और खबरें इस विषय पर GS3कृषि › फसल पैटर्न एवं सिंचाईप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: केरल के कुट्टानाड में मिट्टी की जांच में धान के खेतों में एल्युमीनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से 39 से 165 गुना अधिक पाई गई है, जिसके बाद सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
केरल सेंटर फॉर पेस्ट मैनेजमेंट (KCPM) और विट्टिला स्थित राइस रिसर्च स्टेशन ने कुट्टानाड के 12 धान के खेतों का विश्लेषण किया। विश्लेषण में एल्युमीनियम का स्तर 77.51 ppm से 334.10 ppm के बीच पाया गया, जो निर्धारित सीमा से काफी अधिक है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- तथ्यपरीक्षण किए गए क्षेत्रों में एल्युमिनियम की सांद्रता (concentration) 77.51 ppm से 334.10 ppm के बीच पाई गई।
- संस्थाकेरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी: यह संस्था विट्टिला (Vyttila) स्थित राइस रिसर्च स्टेशन की देखरेख करती है।
- तथ्यएल्युमिनियम का स्तर सुरक्षित सीमा से 39 से 165 गुना अधिक पाया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कुट्टानाड जैसे आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों में मृदा के भारी धातु संदूषण के कृषि स्थिरता और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
- मिट्टी की विषाक्तता: एल्युमिनियम का जमाव फसल की पैदावार और मिट्टी की लंबी अवधि की उर्वरता को प्रभावित कर रहा है
- सुधार की बाधाएं: बड़े पैमाने पर वेटलैंड धान के खेतों से प्रदूषण हटाने में तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां
- आजीविका की संवेदनशीलता: मिट्टी की गुणवत्ता गिरने और खाद्य सुरक्षा की चिंताओं से छोटे किसानों को होने वाले आर्थिक जोखिम
मुख्य शब्द: मिट्टी का क्षरण · भारी धातु संदूषण · वेटलैंड एग्रीकल्चर · सुधारात्मक उपाय · खाद्य सुरक्षा
GS3पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी › प्रजातियां, संरक्षित क्षेत्र एवं आर्द्रभूमिप्रीलिम्स + मेन्स चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने असम के होजई जिले में ट्रेन दुर्घटना के बाद आठ हाथियों की मौत पर रिपोर्ट मांगी है। इस दुर्घटना में ट्रेन के पांच कोच और इंजन पटरी से उतर गए थे।
यह घटना असम के होजई में हुई, जिसमें आठ हाथियों की मौत हो गई और पांच कोचों के साथ इंजन के पट होने से ट्रेन के डिब्बे पट गए। केंद्रीय मंत्री ने भारत भर में 1,100 ऐसे हाथी दुर्घटना क्षेत्रों (elephant accident zones) की पहचान की है, जहाँ निवारक उपायों की आवश्यकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- तथ्यअसम के होजई में ट्रेन दुर्घटना में आठ हाथी मारे गए।
- तथ्यइस टक्कर के परिणामस्वरूप पांच कोच और ट्रेन का इंजन पटरी से उतर गए।
- तथ्यभारत में 1,100 हाथी दुर्घटना क्षेत्र (elephant accident zones) चिन्हित किए गए हैं।
- पदभूपेंद्र यादव केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के रेलवे गलियारों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और बुनियादी ढांचे एवं जैव विविधता के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
- इंफ्रास्ट्रक्चर-इकोलॉजी संघर्ष: हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी और मेगाफ़ॉना के माइग्रेटरी कॉरिडोर के बीच संतुलन
- फंडिंग की बाधा: फिजिकल बैरियर्स और मॉनिटरिंग के लिए आवंटित वन्यजीव संरक्षण फंड का कम इस्तेमाल
- इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन: रेलवे ऑपरेटर्स और वन विभाग के अधिकारियों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की ज़रूरत
मुख्य शब्द: मानव-वन्यजीव संघर्ष · जैव विविधता संरक्षण · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · आवास विखंडन · सह-अस्तित्व
GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: JNCASR के शोधकर्ताओं ने 'एक्सोसिस्ट प्रोटीन कॉम्प्लेक्स' (exocyst protein complex) को ऑटोफैगी (autophagy) के एक प्रमुख नियामक के रूप में पहचाना है। यह खोज न्यूरोडिजेनेरेटिव बीमारियों और कैंसर के इलाज के लिए एक संभावित मार्ग प्रदान करती है।
जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) द्वारा किए गए अध्ययन में ऑटोफैगोसोम्स (autophagosomes) के निर्माण का अवलोकन करने के लिए यीस्ट सेल्स (yeast cells) का उपयोग किया गया। यह शोध ऑटोफैगी (autophagy) के रूप में जानी जाने वाली कोशिकीय 'स्व-भक्षण' प्रक्रिया में एक्सोसिस्ट (exocyst) की भूमिका पर प्रकाश डालता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- विज्ञान-तकनीकExocyst: एक प्रोटीन कॉम्प्लेक्स जिसे ऑटोफैगी (autophagy) प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण रेगुलेटर के रूप में पहचाना गया है।
- विज्ञान-तकनीकऑटोफैगी (Autophagy): एक सेलुलर 'सेल्फ-ईटिंग' प्रोसेस जिसमें ऑटोफैगोसोम्स (autophagosomes) का निर्माण शामिल होता है।
- संस्थाJNCASR: जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (Jawaharlal Nehru Centre for Advanced Scientific Research)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कोशिकीय ऑटोफैगी (cellular autophagy) की क्रियाविधि को समझने में हुई प्रगति किस प्रकार तंत्रिका संबंधी रोगों (neurodegenerative diseases) और ऑन्कोलॉजी (oncology) के उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
- मैकेनिस्टिक ब्रेकथ्रू: सेलुलर वेस्ट क्लीयरेंस को रेगुलेट करने के लिए एक्सोसिस्ट प्रोटीन कॉम्प्लेक्स की पहचान की गई
- ट्रांसलेशनल पोटेंशियल: अल्जाइमर और पार्किंसन के लिए यीस्ट सेल मॉडल से थेराप्यूटिक इंटरवेंशन की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: ऑटोफैगी · एक्सोसिस्ट प्रोटीन · न्यूरोडिजेनरेटिव बीमारियाँ · सेलुलर होमियोस्टैसिस · बायोटेक्नोलॉजी
GS3कृषि › MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षाप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय उर्वरक उत्पादन को बढ़ाने के लिए असम के डिब्रूगढ़ में ₹10,601 करोड़ के ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया प्लांट का शिलान्यास किया।
यह परियोजना असम सरकार, ऑयल इंडिया, नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL), हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) और ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉर्प लिमिटेड (BVFCL) का एक संयुक्त उद्यम है। इसका लक्ष्य 2030 तक वार्षिक 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन क्षमता हासिल करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
- तथ्यप्रोजेक्ट की लागत: ₹10,601 करोड़।
- तथ्यवार्षिक यूरिया उत्पादन क्षमता: 12.7 लाख metric tonnes।
- स्थानस्थान: डिब्रूगढ़, असम।
- तथ्यलक्ष्य परिचालन वर्ष: 2030।
- संस्थाAVFCCL: असम वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पूर्वोत्तर भारत में उर्वरक उत्पादन केंद्रों की स्थापना कृषि आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के संदर्भ में किस प्रकार महत्वपूर्ण है, चर्चा कीजिए।
- लॉजिस्टिक सिनर्जी: स्थानीय उत्पादन के जरिए पूर्वोत्तर में यूरिया के परिवहन खर्च में कमी
- पूर्वोत्तर के किसानों के लिए सप्लाई चेन की बाधाओं को कम करना ताकि फसलों की स्थिर पैदावार सुनिश्चित हो सके
- इंडस्ट्रियल इंटीग्रेशन: ब्राउनफील्ड विस्तार के लिए असम में मौजूदा ऑयल और केमिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट · उर्वरक सुरक्षा · क्षेत्रीय विकास · कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर · संयुक्त उद्यम
GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स चर्चा में क्यों: नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (NUPPL) ने अपने घाटमपुर थर्मल पावर स्टेशन के लिए झारखंड के पचवाड़ा साउथ कोल ब्लॉक में खनन कार्य शुरू कर दिया है।
NUPPL, NLC India Ltd. और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) के बीच एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है। पचवारा साउथ ओपन कास्ट प्रोजेक्ट की स्वीकृत क्षमता 9.0 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है, जिसमें 264.84 मिलियन टन कोयले का भंडार निकाला जा सकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
- तथ्यपचवारा साउथ ओपन कास्ट प्रोजेक्ट की स्वीकृत क्षमता: 9.0 MTPA।
- तथ्यपचवारा साउथ में एक्सट्रैक्टेबल कोल रिज़र्व (Extractable coal reserve): 264.84 मिलियन टन।
- तथ्यNLCIL का लक्ष्य 2030 तक 100 MTPA से अधिक की माइनिंग कैपेसिटी (mining capacity) हासिल करना है।
- स्थानपचवारा साउथ कोल ब्लॉक झारखंड में स्थित है।
- संस्थाNUPPL, NLC India Ltd. और UPRVUNL के बीच एक जॉइंट वेंचर (Joint Venture) है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की ऊर्जा सुरक्षा की मांगों को पूरा करने में घरेलू कोयला खनन क्षमता के विस्तार के महत्व और इसके साथ जुड़ी पर्यावरणीय चिंताओं के बीच संतुलन की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
- ऊर्जा सुरक्षा: थर्मल पावर उत्पादन के लिए आयातित कोयले पर निर्भरता कम करना
- लॉजिस्टिकल सिनर्जी: माइनिंग आउटपुट को राज्य के स्वामित्व वाले थर्मल पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ना
- कैपेसिटी एक्सपेंशन: 2030 के इंडस्ट्रियल टारगेट पूरे करने के लिए NLCIL माइनिंग आउटपुट को बढ़ाना
मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · जॉइंट वेंचर · थर्मल पावर · माइनिंग कैपेसिटी · संसाधन निष्कर्षण
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने म्यांमार के KK पार्क स्कैम सेंटर से 'साइबर स्लेवरी' (cyber slavery) में फंसे सात भारतीय नागरिकों को बचाया।
म्यांमार के KK पार्क से सात व्यक्तियों को बचाया गया है, जिन्हें परिचितों द्वारा बैंकॉक में फर्जी नौकरी का झांसा देकर वहां ले जाया गया था। पीड़ितों को हिंसा की धमकी देकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय धोखाधड़ी (International Financial Fraud) करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। मानव तस्करी और फिरौती के लिए अपहरण के मामले में भारत में चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- संस्थाI4C: Indian Cyber Crime Coordination Centre साइबर क्राइम समन्वय के लिए नोडल एजेंसी है।
- तथ्यKK Park: म्यांमार में स्थित एक कुख्यात स्कैम सेंटर (scam center) जिसका उपयोग साइबर स्लेवरी (cyber slavery) और फाइनेंशियल फ्रॉड (financial fraud) के लिए किया जाता है।
- तथ्यपीड़ितों को बैंकॉक में फर्जी जॉब ऑफर के जरिए लालच देकर म्यांमार ले जाया गया।
- तथ्यजांच में पासपोर्ट नंबर, IP एड्रेस और मोबाइल डेटा का विश्लेषण शामिल था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पार-राष्ट्रीय साइबर दासता और मानव तस्करी के बढ़ते खतरों पर चर्चा कीजिए। भारत सीमा पार साइबर-धोखाधड़ी से निपटने के लिए अपने बहु-एजेंसी ढांचे को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकता है? का विश्लेषण कीजिए।
- क्षेत्राधिकार की बाधाएं: उन ज़ोन से काम करने वाले साइबर-अपराधियों पर मुकदमा चलाने में मुश्किल जहां से प्रत्यर्पण संभव नहीं है
- डेटा-शेयरिंग में कमियां: भारतीय और म्यांमार अधिकारियों के बीच रियल-टाइम IP और मोबाइल डेटा शेयरिंग की ज़रूरत
- पीड़ितों की संवेदनशीलता: दक्षिण-पूर्व एशिया में फर्जी भर्ती नेटवर्क के जरिए नौकरी चाहने वालों का शोषण
मुख्य शब्द: साइबर स्लेवरी · मानव तस्करी · ट्रांसनेशनल क्राइम · I4C · वित्तीय धोखाधड़ी · वापसी
चर्चा में क्यों: चोरी की रिपोर्ट में गड़बड़ी के आरोपों के बाद, मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु वन विभाग को निर्देश दिया है कि जब्त किए गए हाथी दांत (Ivory) के स्टॉक को नष्ट करने से पहले DNA टेस्टिंग और दस्तावेजीकरण (Documentation) की प्रक्रिया पूरी की जाए।
कोर्ट ने आदेश दिया है कि हाथी दांत (ivory) को नष्ट करने से पहले उसके वजन, ऊंचाई और घेरे (circumference) का दस्तावेजीकरण किया जाए। इस प्रक्रिया की निगरानी स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों, राजस्व विभाग के अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञ सहित एक समिति द्वारा की जाएगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थामद्रास हाई कोर्ट: तमिलनाडु में एक न्यायिक संस्था।
- तथ्यDNA टेस्टिंग: हाथी दांत (ivory) के नमूनों को नष्ट करने से पहले आवश्यक।
- तथ्यसमिति की संरचना: स्थानीय निकाय (Local bodies), राजस्व विभाग (Revenue department) और वन्यजीव विशेषज्ञ।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वन्यजीवों के अवैध व्यापार से निपटने और वन विभाग के संचालन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए फॉरेंसिक साक्ष्य और पारदर्शी निरीक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- फोरेंसिक इंटीग्रिटी: उत्पत्ति की पुष्टि और अवैध हाथी दांत की तस्करीरोकने के लिए DNA प्रोफाइलिंग का उपयोग
- संस्थागत निगरानी: कार्यकारी वन प्रबंधन और मल्टी-स्टेकहोल्डर कमेटी की पारदर्शिता के बीच संतुलन
- डेटा सटीकता: विश्वसनीय वन्यजीव अपराध आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए चोरी की रिपोर्ट की गई मात्रा में विसंगतियों को दूर करना
मुख्य शब्द: फॉरेंसिक सबूत · वन्यजीव अपराध · पारदर्शिता · जवाबदेही · जैव विविधता संरक्षण
ये सत्यधीश के अपने यूपीएससी नोट्स हैं, जो द हिंदू में छपी खबरों के आधार पर लिखे गए हैं। सत्यधीश का द हिंदू से कोई संबंध नहीं है। हर नोट में मूल खबर का लिंक है; पूरी खबर द हिंदू की वेबसाइट पर पढ़ें। नोट्स कैसे बनते हैं