यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,461 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (528) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (352) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (249) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (208) · रक्षा तकनीक (120) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)
चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' में गूगल के CEO सुंदर पिचाई से मुलाकात की। इस बैठक में भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए AI के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की गई।
नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' (India AI Impact Summit) में 60 से अधिक मंत्री और 500 वैश्विक एआई (AI) लीडर शामिल हुए। इस बैठक में एआई सेक्टर में भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के साथ गूगल (Google) के सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदसुंदर पिचाई Google और Alphabet Inc. के CEO हैं।
तथ्यIndia AI Impact Summit में 60 से अधिक मंत्री और 500 वैश्विक AI लीडर्स शामिल हैं।
स्थानIndia AI Impact Summit का आयोजन नई दिल्ली में किया जा रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में मानव संसाधन विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षमताओं को बढ़ावा देने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के महत्व की चर्चा कीजिए।
स्किल गैप: कॉर्पोरेट AI ट्रेनिंग मॉड्यूल को राष्ट्रीय शिक्षा लक्ष्यों के साथ जोड़ना
डेटा संप्रभुता: प्राइवेट टेक जायंट्स के साथ सहयोग और घरेलू डेटा सुरक्षा के बीच संतुलन
डिजिटल डिवाइड: एआई-आधारित प्रोफेशनल अवसरों को शहरी टेक हब्स से आगे तक पहुँचाना
मुख्य शब्द: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · मानव पूंजी विकास · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · कौशल विकास
चर्चा में क्यों: गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) के CEO डेमिस हैसबिस ने AI के सामाजिक जोखिमों को प्रबंधित करने और इसके वैज्ञानिक लाभों को अधिकतम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक सम्मेलनों की वकालत की है।
गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) के CEO डेमिस हैसबिस ने विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति लाने की AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI द्वारा उत्पन्न सामाजिक चुनौतियां तकनीकी बाधाओं की तुलना में अधिक जटिल हैं और उन्होंने वैश्विक सहयोग का आह्वान किया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदडेमिस हैसबिस: Google DeepMind के CEO।
तथ्यIndia AI Impact Summit: AI के सामाजिक प्रभाव और जोखिम कम करने (risk mitigation) पर चर्चा के लिए एक वैश्विक समिट प्लेटफॉर्म।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के एकीकरण के नैतिक और सामाजिक निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग इन जोखिमों को कम करने में किस प्रकार सहायक हो सकता है? विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी गैप: AI सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी के लिए एकीकृत वैश्विक मानकों की कमी
इक्विटी चिंताएं: देशों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में डिजिटल डिवाइड बढ़ने का जोखिम
अकाउंटेबिलिटी फ्रेमवर्क: AI-आधारित मेडिकल गलतियों के लिए लायबिलिटी तय करने की कानूनी जटिलताएं
मुख्य शब्द: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · नैतिक शासन · डिजिटल डिवाइड · तकनीकी संप्रभुता · जोखिम कम करना
चर्चा में क्यों: यह लेख उत्पादकता बढ़ाने के लिए भारतीय किसानों और शिक्षकों द्वारा AI टूल्स के व्यावहारिक उपयोग पर प्रकाश डालता है, साथ ही स्वदेशी बड़े पैमाने के AI मॉडल विकसित करने में भारत के सामने आने वाली चुनौतियों को भी रेखांकित करता है।
किसान वीर विर्क और शिक्षक श्वेतांक पांडे जैसे शुरुआती अपनाने वाले (early adopters) स्वचालित खेती और परीक्षा ग्रेडिंग के लिए AI का उपयोग कर रहे हैं। तकनीकी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और गूगल (Google) भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहे हैं, जबकि सरकार अनुसंधान और प्रशिक्षण में निवेश कर रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यभारत में AI के अनुप्रयोगों में ऑटोमेटेड फार्मिंग, एग्जाम पेपर ग्रेडिंग और स्टडी मटेरियल क्रिएशन शामिल हैं।
पदMicrosoft और Google को भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली प्रमुख टेक जायंट्स (tech giants) के रूप में पहचाना गया है।
तथ्यसंसाधनों और डेटा तक सीमित पहुंच के कारण भारत को बड़े पैमाने पर AI मॉडल विकसित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में कृषि उत्पादकता और शैक्षिक परिणामों को बढ़ाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए, साथ ही डेटा संप्रभुता और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए।
डेटा बॉटलनेक: हाई-क्वालिटी डेटासेट तक सीमित पहुंच स्वदेशी बड़े पैमाने के AI मॉडल के विकास में बाधा डाल रही है
डिजिटल डिवाइड: शुरुआती अपनाने वालों और पिछड़े ग्रामीण/शैक्षणिक क्षेत्रों के बीच AI टूल अपनाने में असमानता
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: बुनियादी AI इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटिंग पावर के लिए विदेशी टेक जायंट्स पर निर्भरता
मुख्य शब्द: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर · उत्पादकता में वृद्धि · डेटा संप्रभुता · तकनीकी अपनाना
चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सख्त कंटेंट-टेकडाउन (content-takedown) नियमों के लागू होने के बाद ग्लोबल टेक प्लेटफॉर्म्स (Google, Meta, X, Netflix) से भारत के संवैधानिक ढांचे के अनुरूप काम करने का आग्रह किया है।
भारत ने सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है, जिसके तहत उन्हें तीन घंटे की समय सीमा के भीतर अवैध सामग्री को हटाना अनिवार्य होगा। यह निर्देश दिल्ली में आयोजित एक AI समिट के दौरान जारी किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये प्लेटफॉर्म सांस्कृतिक संदर्भ और संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान करें।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकंटेंट-टेकडाउन रूल (Content-takedown rule): सोशल मीडिया कंपनियों को तीन घंटे के भीतर गैरकानूनी कंटेंट हटाना होगा।
पदअश्विनी वैष्णव: सूचना और प्रसारण मंत्री।
संस्थाउल्लिखित प्लेटफॉर्म्स: Google, Meta, X, और Netflix।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में वैश्विक तकनीकी मंचों पर डिजिटल सामग्री को विनियमित करने की आवश्यकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: ग्लोबल प्लेटफॉर्म मॉडरेशन पॉलिसी और घरेलू संवैधानिक जनादेश के बीच टकराव
एन्फोर्समेंट में रुकावट: तीन घंटे के भीतर कंटेंट हटाने के लक्ष्य में तकनीकी और लॉजिस्टिकल बाधाएं
सांस्कृतिक संप्रभुता: ग्लोबल कंटेंट एल्गोरिदम और स्थानीय सांस्कृतिक व कानूनी संवेदनशीलता के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: संवैधानिक ढांचा · कंटेंट मॉडरेशन · डिजिटल संप्रभुता · रेगुलेटरी कंप्लायंस · भाषण की स्वतंत्रता
चर्चा में क्यों: IISc के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज (Centre for Ecological Sciences) द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि वन्यजीवों की डर की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि मनुष्यों के साथ उनका संपर्क घातक (शिकार/मछली पकड़ना) है या गैर-घातक (पर्यटन/अनुसंधान)।
यह मेटा-एनालिसिस (meta-analysis) 'इकोलॉजी लेटर्स' (Ecology Letters) जर्नल में प्रकाशित किया गया था। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि मनुष्यों द्वारा होने वाली घातक गतिविधियाँ जानवरों में अधिक सतर्कता और भोजन की तलाश (foraging) में कमी का कारण बनती हैं। इसके विपरीत, गैर-घातक उपस्थिति के परिणामस्वरूप व्यवहार में कम और परिवर्तनशील बदलाव देखने को मिलते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थासेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज (Centre for Ecological Sciences), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की एक रिसर्च बॉडी है।
तथ्यघातक मानवीय गतिविधियाँ (शिकार, मछली पकड़ना) वन्यजीवों में तीव्र भय की प्रतिक्रिया और बढ़ी हुई सतर्कता पैदा करती हैं।
तथ्यगैर-घातक मानवीय उपस्थिति (पर्यटन, अनुसंधान) के परिणामस्वरूप व्यवहार में कम और अधिक परिवर्तनशील बदलाव आते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मानव-वन्यजीव अंतःक्रिया की गतिशीलता, विशेष रूप से घातक और गैर-घातक गतिविधियों के बीच का अंतर, जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों को किस प्रकार प्रभावित करता है? चर्चा कीजिए।
व्यवहार संबंधी अनुकूलन: जानवर इंसानों द्वारा पैदा किए गए जोखिम की भविष्यवाणी और तीव्रता के आधार पर भोजन की तलाश और सतर्कता को बदलते हैं
संरक्षण के ट्रेड-ऑफ: नॉन-लीथल टूरिज्म के पारिस्थितिक प्रभाव और एक्सट्रैक्टिव गतिविधियों से होने वाले गंभीर नुकसान के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: मानव-वन्यजीव संघर्ष · बिहेवियरल इकोलॉजी · जैव विविधता संरक्षण · मानवीय प्रभाव · पारिस्थितिक सतर्कता
चर्चा में क्यों: भारतीय सेना ने इंडिया AI समिट में रक्षा तैयारियों और नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) दोनों को बेहतर बनाने के लिए स्वदेशी 'डुअल-यूज़' (Dual-use) AI सिस्टम का प्रदर्शन किया।
भारतीय सेना ने चार विशिष्ट स्वदेशी AI प्लेटफॉर्म्स का अनावरण किया है: AI Examiner (शिक्षा/प्रशिक्षण), SAM-UN (स्थितिजन्य जागरूकता), EKAM (सुरक्षित डेटा प्रोसेसिंग) और PRAKSHEPAN (आपदा भविष्यवाणी)। इस प्रदर्शन में फेशियल रिकग्निशन (facial recognition), ड्राइवर थकान पहचान (driver fatigue detection) और वाहन ट्रैकिंग सिस्टम भी शामिल थे।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
विज्ञान-तकनीकAI Examiner: शिक्षा और प्रशिक्षण आधुनिकीकरण के लिए एक स्वदेशी (Indigenous) प्लेटफॉर्म।
विज्ञान-तकनीकSAM-UN: सिचुएशनल अवेयरनेस (situational awareness) के लिए डिज़ाइन किया गया AI सिस्टम।
विज्ञान-तकनीकEKAM: सुरक्षित डेटा प्रोसेसिंग के लिए एक स्वदेशी सिस्टम (Indigenous system)।
विज्ञान-तकनीकPRAKSHEPAN: आपदा की भविष्यवाणी (disaster prediction) के लिए एक AI प्लेटफॉर्म।
तथ्यDual-use AI: ऐसे सिस्टम जिन्हें डिफेंस और सिविलियन (civilian) दोनों अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के रक्षा और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के संदर्भ में स्वदेशी 'दोहरे उपयोग' (dual-use) वाले एआई (AI) प्रणालियों के विकास के रणनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए।
डेटा संप्रभुता: EKAM जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म के जरिए सुरक्षित डेटा प्रोसेसिंग सुनिश्चित करना
डुअल-यूज़ सिनर्जी: नागरिक आपदा प्रबंधन और शिक्षा के लिए डिफेंस-ग्रेड AI का इस्तेमाल
तकनीकी स्वायत्तता: महत्वपूर्ण स्थितिजन्य जागरूकता और ट्रैकिंग के लिए विदेशी AI पर निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: दोहरे उपयोग वाली तकनीक · तकनीकी संप्रभुता · स्थिति के प्रति जागरूकता · स्वदेशी नवाचार · AI-पावर्ड इकोसिस्टम
चर्चा में क्यों: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव, एम. रविचंद्रन ने 'मिशन मौसम' (Mission Mausam) पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य रियल-टाइम डेटा एसिमिलेशन (real-time data assimilation) के माध्यम से भारत की मौसम संबंधी तैयारी और क्लाइमेट-स्मार्ट क्षमताओं को बढ़ाना है।
मिशन मौसम केंद्र सरकार की एक पहल है, जो पृथ्वी विज्ञान (Earth Sciences) को आर्थिक विकास और आपदा शमन (disaster mitigation) के साथ जोड़ने पर केंद्रित है। यह मौसम के पूर्वानुमान को बेहतर बनाने के लिए रियल-टाइम डेटा एसिमिलेशन (real-time data assimilation) और एन्सेम्बल फोरकास्टिंग (ensemble forecasting) के उपयोग पर जोर देता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थामिशन मौसम (Mission Mausam) के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences - MoES) नोडल मंत्रालय है।
विज्ञान-तकनीकमिशन मौसम (Mission Mausam) एन्सेम्बल फोरकास्टिंग (ensemble forecasting) और रियल-टाइम डेटा एसिमिलेशन (real-time data assimilation) का उपयोग करता है।
तथ्यइस मिशन का उद्देश्य अर्थ साइंस (Earth Sciences) को आर्थिक विकास और आपदा न्यूनीकरण (disaster mitigation) से जोड़ना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वास्तविक समय के डेटा आत्मसातीकरण (real-time data assimilation) और एन्सेम्बल पूर्वानुमान (ensemble forecasting) का एकीकरण भारत की जलवायु लचीलापन और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकता है, चर्चा कीजिए।
डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर: रियल-टाइम डेटा एसिमिलेशन मॉडल के लिए हाई-फ़्रीक्वेंसी सेंसर नेटवर्क की ज़रूरत
आर्थिक एकीकरण: मौसम की सटीकता को कृषि पैदावार की स्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग से जोड़ना
तकनीकी छलांग: चरम मौसम की अनिश्चितता को संभालने के लिए डिटरमिनिस्टिक से एन्सेम्बल फोरकास्टिंग की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: क्लाइमेट-स्मार्ट · एन्सेम्बल फोरकास्टिंग · डेटा एसिमिलेशन · आपदा शमन · पृथ्वी विज्ञान
चर्चा में क्यों: DRDO के चेयरमैन समीर वी. कामत ने SRM यूनिवर्सिटी-A.पी. का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य राष्ट्रीय रक्षा तकनीक को मजबूत करने के लिए अकादमिक संस्थानों, उद्योगों और DRDO प्रयोगशालाओं के बीच एक सहयोगी अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र (Research Ecosystem) को बढ़ावा देना था।
DRDO के चेयरमैन ने इंटीग्रेटेड कम्प्यूटेशनल मैटेरियल्स इंजीनियरिंग (ICME) का उपयोग करके त्वरित सामग्री विकास (Accelerated Materials Development) पर आधारित शोध पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय ने AI, क्वांटम टेक्नोलॉजीज, ग्रीन हाइड्रोजन और हेल्थ इंजीनियरिंग में अनुसंधान की पहलों को प्रदर्शित किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकICME: Integrated Computational Materials Engineering का उपयोग Accelerated Materials Development के लिए किया जाता है।
पदसमीर वी. कामत: DRDO के चेयरमैन और Defence R&D के सचिव।
तथ्यप्रमुख रिसर्च एरिया में AI, क्वांटम टेक्नोलॉजीज, ग्रीन हाइड्रोजन और हेल्थ इंजीनियरिंग शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लक्ष्य को साकार करने हेतु शैक्षणिक संस्थानों और रक्षा उद्योग के मध्य एक सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
R&D सिनर्जी: डिफेंस में थ्योरेटिकल एकेडमिक रिसर्च और प्रैक्टिकल इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन के बीच की दूरी को कम करना
टेक्नोलॉजी लीपफ्रॉगिंग: हाई-एंड इम्पोर्टेड मटेरियल पर निर्भरता कम करने के लिए ICME और क्वांटम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
ह्यूमन कैपिटल: नेशनल डिफेंस टेक्नोलॉजी पाइपलाइन में मल्टी-डिसीप्लिनरी यूनिवर्सिटी प्रोग्राम्स को जोड़ना
चर्चा में क्यों: भारत सरकार ने भारत AI इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit) का आयोजन किया। इसका उद्देश्य वैश्विक मॉडल-बिल्डिंग रेस (model-building races) के बजाय उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (public infrastructure) के रूप में AI के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित करना है।
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit) भारत सरकार द्वारा आयोजित एक पांच दिवसीय कार्यक्रम है। यह किसी विकासशील देश में आयोजित होने वाला इस तरह का पहला शिखर सम्मेलन है, जो अमेरिका और चीन जैसी बड़ी शक्तियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय सार्वजनिक सेवाओं के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के उपयोग पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यIndia AI Impact Summit: भारत सरकार द्वारा आयोजित एक पांच दिवसीय कार्यक्रम।
विज्ञान-तकनीकयह समिट सार्वजनिक सेवाओं के लिए सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में AI पर केंद्रित है।
पदइस समिट में उभरती अर्थव्यवस्थाओं (Emerging Economies) के पॉलिसी मेकर्स और टेक एग्जीक्यूटिव्स शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उभरती अर्थव्यवस्थाओं में डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मॉडल विकास के बजाय इसे एक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित करने की रणनीति के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: AI-आधारित सार्वजनिक सेवाओं के लिए मजबूत डेटा सेंटर और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की ज़रूरत
रेगुलेटरी बैलेंस: सार्वजनिक सेवाओं में तेज़ी से AI डिप्लॉयमेंट के साथ डेटा प्राइवेसी और एथिकल सेफ़गार्ड्स के बीच संतुलन बनाना
ग्लोबल कोऑपरेशन: नॉन-डिस्क्रिमिनेटरी AI स्टैंडर्ड्स स्थापित करने के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं की कलेक्टिव बारगेनिंग का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: सार्वजनिक बुनियादी ढांचा · डिजिटल डिवाइड · उभरती अर्थव्यवस्थाएं · AI गवर्नेंस · तकनीकी संप्रभुता
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने केरल के कन्नूर में ₹600 करोड़ के साइंस और IT पार्क के लिए आधारशिला रखी। इसका उद्देश्य ज्ञान-आधारित उद्योगों (knowledge-based industries) और बायो-प्रोस्पेक्टिंग (bio-prospecting) को बढ़ावा देना है।
यह परियोजना चेरियावलप्पु, अञ्जारकंडी में स्थित है और इसकी अनुमानित लागत ₹600 करोड़ है। इसका पर्यवेक्षण केरल स्टेट काउंसिल फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एनवायरनमेंट द्वारा किया जाएगा और कन्नूर यूनिवर्सिटी से इसे शैक्षणिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानScience and IT Park को केरल के कन्नूर में अञ्जारकंडी के चेरियावलप्पु में स्थापित किया जा रहा है।
तथ्यसाइंस और IT पार्क प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹600 करोड़ है।
संस्थाकेरल स्टेट काउंसिल फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एनवायरनमेंट (Kerala State Council for Science, Technology and Environment) पार्क की एडवांस सुविधाओं की निगरानी करेगी।
विज्ञान-तकनीकइस पार्क का उद्देश्य केरल की जैव विविधता (biodiversity) का उपयोग करने के लिए बायो-प्रोसेसिंग और बायो-प्रोस्पेक्टिंग में वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सतत आर्थिक विकास के लिए ज्ञान-आधारित उद्योगों और जैव-अन्वेषण (bio-prospecting) के माध्यम से क्षेत्रीय जैव विविधता का लाभ कैसे उठाया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
बायोडायवर्सिटी मोनेटाइजेशन: केरल के अनोखे जैविक संसाधनों के संरक्षण के साथ कमर्शियल बायो-प्रोस्पेक्टिंग का संतुलन
नॉलेज इकोनॉमी: क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को प्राथमिक क्षेत्रों से हाई-वैल्यू रिसर्च और बायो-प्रोसेसिंग हब में बदलना
मुख्य शब्द: बायो-प्रोस्पेक्टिंग · नॉलेज-आधारित इंडस्ट्रीज · बायो-प्रोसेसिंग · क्षेत्रीय विकास · जैव विविधता का उपयोग
चर्चा में क्यों: केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज (Kufos) ने समुद्री जीव विज्ञान (Marine Biology) प्रशिक्षण और ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) के साथ एक समझौता किया है।
यह समझौता कुफोस और लक्षद्वीप में एम.एससी. मरीन बायोलॉजी (MSc. Marine Biology) कार्यक्रम के लिए ₹4.12 करोड़ का प्रावधान करता है। इस पहल को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के तहत डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNIOT: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (National Institute of Ocean Technology) चेन्नई में स्थित है।
योजनाDeep Ocean Mission: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के तहत एक मिशन।
तथ्यफंडिंग राशि: MSc. मरीन बायोलॉजी प्रोग्राम के लिए ₹4.12 करोड़।
स्थानKufos: केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज।
मेन्स के लिए
प्रश्न: समुद्री जीव विज्ञान के क्षेत्र में मानव संसाधन का विकास भारत के 'ब्लू इकोनॉमी' (नीली अर्थव्यवस्था) के लक्ष्यों और सतत समुद्री शासन में किस प्रकार योगदान दे सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
स्किल गैप: गहरे समुद्र की खोज और रिसोर्स मैनेजमेंट के लिए स्पेशलाइज्ड मरीन बायोलॉजिस्ट की कमी
रिसर्च सिनर्जी: अकादमिक यूनिवर्सिटीज और स्पेशलाइज्ड नेशनल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट्स के बीच संस्थागत सहयोग
आर्थिक बदलाव: टिकाऊ आजीविका और हाई-टेक मैरीटाइम इंडस्ट्रीज के लिए समुद्री जैव विविधता का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: ब्लू इकोनॉमी · डीप ओशन मिशन · समुद्री जीव विज्ञान · मानव संसाधन विकास · पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
चर्चा में क्यों: प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर अजय कुमार सूद ने AI गवर्नेंस में बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि AI पर अत्यधिक निर्भरता के कारण उनकी सोचने की क्षमता (critical thinking) प्रभावित न हो।
केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (Principal Scientific Adviser) अजय कुमार सूद ने ऐसे गवर्नेंस फ्रेमवर्क (governance frameworks) की वकालत की जो बच्चों को AI-आधारित प्लेटफॉर्म्स के जोखिमों से सुरक्षित रखें। उन्होंने उल्लेख किया कि जहाँ AI व्यक्तिगत शिक्षण और फीडबैक प्रदान करता है, वहीं यह युवा उपयोगकर्ताओं के स्वतंत्र समस्या-समाधान कौशल (independent problem-solving skills) के लिए जोखिम पैदा करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदअजय कुमार सूद: भारत सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर (Principal Scientific Adviser)।
तथ्यAI के लाभ: पर्सनलाइज्ड लर्निंग (personalized learning) और समय पर फीडबैक।
तथ्यAI के जोखिमों की पहचान: क्रिटिकल थिंकिंग (critical thinking) और स्वतंत्र समस्या समाधान में बाधा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित व्यक्तिगत शिक्षण के नैतिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और स्वचालित प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता के विरुद्ध बच्चों के संज्ञानात्मक विकास की सुरक्षा हेतु एक रूपरेखा का सुझाव दीजिए। विश्लेषण कीजिए।
कॉग्निटिव डेवलपमेंट: एल्गोरिथमिक निर्भरता के कारण क्रिटिकल थिंकिंग और स्वतंत्र समस्या-समाधान कौशल कम होने का जोखिम
रेगुलेटरी गैप: मौजूदा AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क्स में बच्चों के लिए खास सुरक्षा मानकों की कमी
शैक्षिक समानता: पर्सनलाइज्ड लर्निंग में डिजिटल डिवाइड को रोकते हुए AI टूल्स तक समावेशी पहुंच सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: एल्गोरिथमिक गवर्नेंस · संज्ञानात्मक विकास · डिजिटल सुरक्षा उपाय · नैतिक AI · पर्सनलाइज्ड लर्निंग
चर्चा में क्यों: जलवायु परिवर्तन और बारिश की कमी के कारण, केरल के वन अधिकारियों ने फरवरी 2026 में जंगलों के असामान्य रूप से जल्दी सूखने की सूचना दी है, जिससे जंगल की आग (wildfire) का खतरा बढ़ गया है।
फरवरी 2026 को केरल में पिछले एक दशक से अधिक समय में सबसे शुष्क महीना दर्ज किया गया। वन कर्मचारी वर्तमान में जंगल की आग को रोकने के लिए पत्तियों के झड़ने से जमा हुए सूखे बायोमास (biomass) का प्रबंधन कर रहे हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानकेरल: राज्य ने शुरुआती जंगल सूखने और आग की घटनाओं में वृद्धि की रिपोर्ट दी है।
तथ्यफरवरी 2026: इस क्षेत्र में पिछले एक दशक से अधिक समय में सबसे शुष्क महीने के रूप में पहचाना गया।
पर्यावरणड्राइड बायोमास (Dried biomass): पत्तियों के झड़ने से जंगल की सतह पर जमा होता है और जंगल की आग (wildfires) के लिए ईंधन का काम करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जलवायु परिवर्तन के कारण वन बायोमास संचय में होने वाले परिवर्तन केरल जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में वनाग्नि के बढ़ते जोखिमों में किस प्रकार योगदान देते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
इकोलॉजिकल फीडबैक: बायोमास के तेज़ी से सूखने से जंगलों में नमी कम हो रही है और आग की तीव्रता बढ़ रही है
मैनेजमेंट बॉटलनैक: आग फैलने से रोकने के लिए घने ट्रॉपिकल कैनोपियों से सूखे पत्तों को हटाने में मुश्किल
मुख्य शब्द: जलवायु परिवर्तन · वाइल्डफायर मैनेजमेंट · बायोमास संचय · वन पारिस्थितिकी · ट्रॉपिकल बायोडायवर्सिटी
चर्चा में क्यों: CSIR-NIIST पोषण सुरक्षा और जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) से भरपूर, उच्च प्रोटीन और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला 'डिजाइनर राइस' (designer rice) जारी करने के लिए तैयार है।
CSIR-NIIST (तिरुवनंतपुरम) ने इस चावल की किस्म को विकसित किया है और इसकी तकनीक TATA Consumer Products Limited और SS Soul Foods (तमिलनाडु) को हस्तांतरित करेगी। इस नवाचार के लिए NIIST के निदेशक सी. आनंदरामकृष्ण को 'टाटा ट्रांसफॉर्मेशन प्राइज 2024' (Tata Transformation Prize 2024) से सम्मानित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यडिज़ाइनर राइस की विशेषताएँ: उच्च प्रोटीन कंटेंट, लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (low glycemic index) और फोर्टिफाइड माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (fortified micronutrients)।
पदएन. कलाईसेल्वी: CSIR की डायरेक्टर जनरल।
स्थानSS Soul Foods: तमिलनाडु स्थित।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की कुपोषण और जीवनशैली से संबंधित गैर-संचारी रोगों की दोहरी चुनौती के समाधान में जैव-संवर्धन (bio-fortification) और 'डिजाइनर' फसलों की महत्वपूर्ण भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
पोषण सुरक्षा: मुख्य आहार में प्रोटीन की कमी और सूक्ष्म पोषक तत्वों के अंतर को दूर करना
पब्लिक हेल्थ इंटरवेंशन: डायबिटीज और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर को मैनेज करने के लिए ग्लाइसेमिक लोड कम करना
कमर्शियल व्यवहार्यता: बायो-फोर्टिफाइड फूड प्रोडक्ट्स को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
मुख्य शब्द: बायो-फोर्टिफिकेशन · पोषण सुरक्षा · ग्लाइसेमिक इंडेक्स · तकनीकी हस्तांतरण · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने क्वांटम टेक्नोलॉजी के विकास को बढ़ावा देने और भारत को क्वांटम कंप्यूटर के वैश्विक निर्यातक के रूप में स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं की स्थापना की घोषणा की है।
मिशन डायरेक्टर सी.वी. श्रीधर के नेतृत्व में अमरवती स्टेट क्वांटम मिशन, आंध्र प्रदेश में इस पहल का नेतृत्व कर रहा है। रायलसीमा यूनिवर्सिटी और क्लस्टर यूनिवर्सिटी ने क्वांटम टेक्नोलॉजी में सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए संयुक्त रूप से एक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आयोजन किया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यभारत का लक्ष्य क्वांटम टेक्नोलॉजी (Quantum Technology) में वैश्विक रैंकिंग में टॉप 10 में शामिल होना है।
पदसी.वी. श्रीधर, अमरवती स्टेट क्वांटम मिशन (Amaravati State Quantum Mission) के मिशन डायरेक्टर हैं।
स्थानइस पहल का नेतृत्व आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है।
विज्ञान-तकनीकइस मिशन का उद्देश्य भारत को क्वांटम कंप्यूटर्स (quantum computers) का निर्यातक बनाना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता और आर्थिक विकास के संदर्भ में स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताओं के विकास के रणनीतिक महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग के लिए विदेशी हार्डवेयर पर निर्भरता कम करना
आर्थिक छलांग: हाई-वैल्यू क्वांटम टेक्नोलॉजी के उपभोक्ता से निर्यातक बनने की ओर बदलाव
ह्यूमन कैपिटल बॉटलनेक: थ्योरी और प्रैक्टिकल एप्लीकेशन के बीच के अंतर को कम करने के लिए फैकल्टी ट्रेनिंग की ज़रूरत
मुख्य शब्द: क्वांटम कंप्यूटिंग · तकनीकी संप्रभुता · मानव पूंजी विकास · रणनीतिक स्वायत्तता · स्वदेशी इनोवेशन
चर्चा में क्यों: NIMHANS के शोधकर्ताओं ने चूहों में पार्किंसंस रोग के इलाज के लिए डेंटल पल्प स्टेम सेल-व्युत्पन्न एक्सोसोम्स (dental pulp stem cell-derived exosomes) का उपयोग करने वाली एक नॉन-इनवेसिव इंट्रानेजल थेरेपी (non-invasive intranasal therapy) के उत्साहजनक प्री-क्लिनिकल परिणाम रिपोर्ट किए हैं।
इस अध्ययन के लिए वित्त पोषण इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया गया। इस थेरेपी से चूहों में मोटर कोऑर्डिनेशन (motor coordination), डोपामिन के स्तर, न्यूरोट्रांसमीटर संतुलन और इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स (inflammatory markers) में सुधार देखा गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकExosomes: डेंटल पल्प स्टेम सेल्स (dental pulp stem cells) से प्राप्त एक्सट्रासेलुलर वेसिकल्स (extracellular vesicles) जिनका उपयोग अध्ययन में किया जाता है।
संस्थाICMR: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (Indian Council of Medical Research), जिसने इस स्टडी को फंड किया।
तथ्यसबस्टेंटिया निग्रा (Substantia nigra): पार्किंसंस बीमारी से प्रभावित मस्तिष्क का विशिष्ट क्षेत्र जिसे इस थेरेपी द्वारा टारगेट किया जाता है।
विज्ञान-तकनीकइंट्रानैसल थेरेपी (Intranasal therapy): स्टेम सेल-व्युत्पन्न एक्सोसोम्स (stem cell-derived exosomes) के लिए एक नॉन-इनवेसिव (non-invasive) डिलीवरी मेथड।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में पार्किंसंस रोग जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों के उपचार में स्टेम सेल-व्युत्पन्न चिकित्सा और पुनर्योजी चिकित्सा (रिजेनरेटिव मेडिसिन) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
रीजेनरेटिव पोटेंशियल: सबस्टैंशिया नाइग्रा में डोपामिनर्जिक न्यूरॉन रिजनरेशन शुरू करने की एक्सोसोम की क्षमता
सफल रैट मॉडल से ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल और सेफ्टी प्रोटोकॉल की ओर बढ़ना
चर्चा में क्यों: भारत ने वैश्विक AI गवर्नेंस और कस्टमर सर्विस सेक्टर में नौकरियों के विस्थापन (job displacement) के जोखिमों पर चर्चा करने के लिए नई दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की।
AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) नई दिल्ली में आयोजित एक पांच दिवसीय कार्यक्रम था, जिसमें विश्व के नेताओं और टेक सीईओ (CEOs) ने भाग लिया। भारत के IT मंत्रालय ने 'अनेक' लोगों के लिए AI के उपयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया, साथ ही स्वैच्छिक उद्योग प्रतिबद्धताओं (voluntary industry commitments) की प्रभावशीलता पर भी चिंता व्यक्त की।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानAI Impact Summit की मेजबानी नई दिल्ली में की गई।
विज्ञान-तकनीकAI की प्रगति को कस्टमर सर्विस सेक्टर में जॉब डिस्प्लेसमेंट (job displacement) के लिए एक जोखिम के रूप में पहचाना गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के लिए एक वैश्विक शासन ढांचा स्थापित करने की चुनौतियों और वैश्विक कार्यबल पर एआई-संचालित रोजगार विस्थापन के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: केरल के परिवहन मंत्री के.बी. गणेश कुमार वैकोम बोट स्टेशन पर तीन नई सोलर-पावर्ड (solar-powered) नावों का उद्घाटन करने वाले हैं। इसका उद्देश्य इस स्टेशन को भारत का पहला एनर्जी-न्यूट्रल (energy-neutral) स्टेशन बनाना है।
यह परियोजना 2017 में केरल के पहले सौर ऊर्जा से चलने वाले यात्री जहाज 'आदित्य' के शुभारंभ के साथ शुरू हुई थी। नए बेड़े में लंबे समय तक चलने के लिए बेहतर बैटरी क्षमता दी गई है और डीजल से चलने वाले जहाजों के स्थान पर इन्हें तट पर चार्जिंग सुविधाओं (shore charging facilities) द्वारा संचालित किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानवायकोम बोट स्टेशन केरल में स्थित है।
तथ्यवायकोम भारत का पहला एनर्जी-न्यूट्रल (energy-neutral) बोट स्टेशन बनने जा रहा है।
विज्ञान-तकनीकनया बेड़ा डीजल से चलने वाले जहाजों की जगह बेहतर बैटरी क्षमता वाली सोलर-पावर्ड बोट्स (solar-powered boats) से बदलता है।
तथ्ययह प्रोजेक्ट 2017 में आदित्य नाम के पहले सोलर-पावर्ड पैसेंजर बोट के साथ शुरू किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के समुद्री और अंतर्देशीय जलमार्ग क्षेत्रों में डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन में कमी) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सौर ऊर्जा संचालित जल परिवहन की ओर संक्रमण की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: सोलर-पावर्ड वेसल्स के लिए भारी शुरुआती कैपिटल कॉस्ट और स्पेशलाइज्ड शोर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
ऑपरेशनल व्यवहार्यता: बैटरी एनर्जी डेंसिटी की सीमाओं और लंबी दूरी के कमर्शियल वॉटर ट्रांसपोर्ट की मांग के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: एनर्जी न्यूट्रलिटी · डीकार्बोनाइजेशन · रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाना · सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट · कार्बन फुटप्रिंट में कमी
चर्चा में क्यों: वैज्ञानिकों ने कोवलम-नेममली बैकवाटर्स (backwaters) को एक लैगूनल वेटलैंड (lagoonal wetland) के रूप में संरक्षित करने के लिए तमिलनाडु सरकार से ममल्लान रिज़र्वॉयर प्रोजेक्ट को वापस लेने का आग्रह किया है।
पारिस्थितिकीविदों, जलविज्ञानियों, पक्षीविज्ञानियों और समुद्री जीवविज्ञानियों के एक समूह ने मम्मलान जलाशय (Mamallan Reservoir) प्रस्ताव के संबंध में तमिलनाडु सरकार को एक पत्र सौंपा है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि कोवलम-नेममली बैकवाटर एक टाइडल-मार्श इकोटोन (tidal-marsh ecotone) के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि ज्वारीय प्रवाह (tidal flow) को प्रतिबंधित करने से समुद्री जैव विविधता को नुकसान पहुँचेगा।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानकोवलम-नेम्मली बैकवाटर (backwaters): तमिलनाडु में एक टाइडल-मार्श इकोटोन (tidal-marsh ecotone)।
पर्यावरणममल्लान रिज़र्वॉयर (Mamallan Reservoir): एक प्रस्तावित प्रोजेक्ट जिस पर वैज्ञानिक लैगूनल वेटलैंड्स (lagoonal wetlands) पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव के कारण विरोध कर रहे हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तटीय ज्वारीय-दलदल पारिस्थितिकी तंत्र (coastal tidal-marsh ecotones) पर बड़े पैमाने की जलाशय परियोजनाओं के पारिस्थितिक निहितार्थों और तटीय प्रबंधन में आर्द्रभूमि संरक्षण के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
पारिस्थितिक गिरावट: लैगूनल वेटलैंड्स में सीमित टाइडल फ्लो के कारण जैव विविधता के नुकसान का जोखिम
बाढ़ जोखिम प्रबंधन: तटीय क्षेत्रों में रिज़र्वोयर निर्माण से जुड़े अनसुलझे बाढ़ जोखिम
संरक्षण के ट्रेड-ऑफ: इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और टाइडल-मार्श इकोटोन्स के संरक्षण के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: टाइडल-मार्श इकोटोन · समुद्री जैव विविधता · लैगूनल वेटलैंड · पारिस्थितिक प्रभाव · वेटलैंड संरक्षण
चर्चा में क्यों: बेंगलुरु स्थित ICAR-NIANP के वैज्ञानिक कैंसर के मरीजों में प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने और असिस्टेड रिप्रोडक्शन (Assisted Reproduction) को बेहतर बनाने के लिए प्रीएन्ट्रल फॉलिकल्स (अपरिपक्व अंडे) को वापस प्राप्त करने और विकसित करने की तकनीक पर काम कर रहे हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल न्यूट्रिशन एंड फिजियोलॉजी (NIANP) के शोधकर्ता प्रीएन्ट्रल फॉलिकल्स (preantral follicles) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो प्राकृतिक रूप से ओवरी के भीतर नष्ट हो जाते हैं। इस तकनीक के माध्यम से इन फॉलिकल्स से विकसित किए गए अंडों का उपयोग करके सफलतापूर्वक पहला भैंस भ्रूण (buffalo embryo) तैयार किया गया है। वर्तमान में इस तकनीक को बड़े घरेलू जानवरों के लिए अनुकूलित किया जा रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकPreantral follicles: अपरिपक्व अंडे (Immature eggs) जो प्राकृतिक रूप से ओवरी के अंदर नष्ट हो जाते हैं।
संस्थाNIANP: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल न्यूट्रिशन एंड फिजियोलॉजी (National Institute of Animal Nutrition and Physiology), जो ICAR का एक हिस्सा है।
तथ्यइस तकनीक का उपयोग सफलतापूर्वक भैंस का भ्रूण (embryo) बनाने के लिए किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी (reproductive biotechnology) की उन संभावनाओं का विश्लेषण कीजिए जो प्रजनन संबंधी चुनौतियों के समाधान और कीमोथेरेपी जैसे गहन चिकित्सा उपचारों से गुजर रहे रोगियों के प्रजनन स्वास्थ्य को संरक्षित करने में सहायक हो सकती हैं।
क्लीनिकल यूटिलिटी: कीमोथेरेपी से होने वाली बांझपन की समस्या को कम करने के लिए ओवेरियन टिश्यू का संरक्षण
बायोटेक स्केलेबिलिटी: बोवाइन एम्ब्रियो प्रोडक्शन से ह्यूमन असिस्टेड रिप्रोडक्शन की ओर बदलाव
नैतिक विचार: क्लोनिंग और उन्नत असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी की रेगुलेटरी ओवरसाइट
मुख्य शब्द: असिस्टेड रिप्रोडक्शन · प्रेंट्रल फॉलिकल्स · प्रजनन क्षमता का संरक्षण · बायोटेक्नोलॉजी · ओवेरियन टिश्यू क्रायोप्रिजर्वेशन
चर्चा में क्यों: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने ग्रेट निकोबार द्वीप के ₹92,000 करोड़ के मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। ट्रिब्यूनल ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें इस प्रोजेक्ट की रणनीतिक महत्ता के आधार पर दी गई पर्यावरणीय मंजूरियों (Environmental Clearances) को चुनौती दी गई थी।
इस परियोजना के अंतर्गत 160 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में एक पोर्ट, एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर प्लांट का निर्माण शामिल है। यह परियोजना उन क्षेत्रों को प्रभावित करती है जहाँ स्वदेशी निकोबारी और शोम्पेन समुदाय निवास करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
स्थानग्रेट निकोबार आइलैंड: प्रस्तावित मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की लोकेशन।
तथ्यप्रोजेक्ट की लागत: ₹92,000 करोड़।
तथ्यभूमि क्षेत्र: पोर्ट, एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर प्लांट के लिए 160 वर्ग किमी (sq km) से अधिक।
संस्थानेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT): वह संस्था जिसने एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस (environmental clearances) प्रदान किए।
पर्यावरणस्वदेशी समुदाय: प्रोजेक्ट एरिया में निकोबारी और शोम्पेन समुदाय रहते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रीय रणनीतिक बुनियादी ढांचा विकास और जैव विविधता के संरक्षण एवं स्वदेशी अधिकारों के बीच उत्पन्न होने वाले संघर्ष का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
इकोलॉजिकल ट्रेड-ऑफ: समुद्री सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और द्वीपों की अनोखी जैव विविधता के संरक्षण के बीच संतुलन
आदिवासी समुदायों के अधिकार: बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शोम्पेन और निकोबारी समुदायों के लिए कानूनी सुरक्षा
न्यायिक निगरानी: एनजीटी की भूमिका 'रणनीतिक महत्व' और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) मानदंडों के बीच संतुलन बनाने में
मुख्य शब्द: रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर · पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र · स्वदेशी अधिकार · पर्यावरण क्लीयरेंस · जैव विविधता संरक्षण
चर्चा में क्यों: 12 फरवरी, 2026 को मालदीव में एल. कुनाहंडू (L. Kunahandhoo) के पास एक निर्जन द्वीप पर एक लॉन्च व्हीकल का मलबा पाया गया है। बताया जा रहा है कि इस मलबे पर ISRO का लोगो और राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) अंकित था।
यह मलबा ISRO के LVM3-M6 मिशन का पेलोड फेयरिंग (Payload Fairing - PLF) माना जा रहा है, जो मालदीव के तट पर बहकर आ गया है। इसी मिशन से संबंधित मलबे की एक समान बरामदगी की रिपोर्ट 28 दिसंबर, 2025 को श्रीलंका के ट्रिनकोमाली में भी दी गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकLVM3: ISRO का सबसे भारी रॉकेट, एक तीन-स्टेज लॉन्च व्हीकल (launch vehicle) जिसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर्स (solid strap-on motors), एक लिक्विड कोर स्टेज (liquid core stage) और एक क्रायोजेनिक अपर स्टेज (cryogenic upper stage) शामिल है।
तथ्यLVM3-M6 / ब्लूबर्ड (BlueBird) ब्लॉक-2 मिशन: 19 दिसंबर, 2025 को लॉन्च किया गया, जिसमें USA की SpaceMobile कंपनी का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (BlueBird Block-2) कम्युनिकेशन सैटेलाइट शामिल था।
तथ्यLVM3-M6 मिशन: इससे पहले 2 नवंबर को CMS-03 कम्युनिकेशन सैटेलाइट लॉन्च किया गया था।
स्थानएल. कुनाहंडू (L. Kunahandhoo): मालदीव का एक निर्जन द्वीप जहाँ मलबा पाया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों और कक्षीय सुरक्षा एवं समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी गैप: नॉन-फंक्शनल ऑर्बिटल मलबे की ट्रैकिंग और क्लीयरिंग के लिए बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधियों की कमी
समुद्री सुरक्षा: शिपिंग लेन और तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अंतरिक्ष मलबे के गिरने से होने वाले खतरे
लायबिलिटी फ्रेमवर्क: अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मलबे के प्रभाव के लिए जिम्मेदारी तय करने में जटिलता
चर्चा में क्यों: हरियाणा सरकार ने नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में खाद्य और औषधि सुरक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए 28 मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी (MFTL) वैन तैनात करने हेतु ₹53.21 करोड़ को मंजूरी दी है।
हरियाणा सरकार ने खाद्य सुरक्षा के उन्नयन के लिए ₹53.21 करोड़ आवंटित किए हैं। इस राशि का उपयोग 28 MFTL वैन और करनाल स्थित जिला खाद्य प्रयोगशाला के आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा। FSSAI ने पहले ही पांच MFTL वैन तैनात कर दी हैं, जो ₹20 प्रति सैंपल की दर से मौके पर ही परीक्षण की सुविधा प्रदान करती हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यहरियाणा सरकार ने NCR में फूड और ड्रग सेफ्टी सिस्टम के लिए ₹53.21 करोड़ को मंजूरी दी।
तथ्यNCR में 28 मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी (MFTL) वैन तैनात की जाएंगी।
स्थानडिस्ट्रिक्ट फूड लेबोरेटरी (District Food Laboratory) हरियाणा के करनाल में स्थित है।
तथ्यFSSAI MFTL वैन सैंपल के लिए ₹20 की मामूली फीस पर ऑन-द-स्पॉट टेस्टिंग की सुविधा प्रदान करती हैं।
संस्थाफूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) खाद्य सुरक्षा मानकों की निगरानी करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) जैसे तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में मोबाइल परीक्षण इकाइयों (mobile testing units) के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: पेरी-अर्बन इलाकों में मान्यता प्राप्त टेस्टिंग लैब्स की कमी को दूर करना
रेगुलेटरी ओवरसाइट: मिलावटी खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए ऑन-द-स्पॉट सर्विलांस को मजबूत करना
मुख्य शब्द: खाद्य सुरक्षा · सार्वजनिक स्वास्थ्य · रेगुलेटरी ओवरसाइट · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · मानकीकरण
चर्चा में क्यों: xAI के विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने AI चैटबॉट Grok से जुड़े नैतिक जोखिमों और सुरक्षा चिंताओं पर चिंता जताई है, जिसमें उन्होंने वैश्विक नियमन (Global Regulation) की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है।
एलन मस्क की कंपनी xAI के कर्मचारियों ने Grok द्वारा गैर-सहमति वाली महिलाओं की यौन रूप से स्पष्ट तस्वीरें और नस्लवादी टिप्पणियाँ उत्पन्न करने के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने रिपोर्ट दी है कि आने वाले वर्षों में AI के कारण कई व्हाइट-कॉलर (white-collar) नौकरियों का स्वचालन (automation) होने की संभावना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकxAI: एलन मस्क द्वारा स्थापित एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) कंपनी।
विज्ञान-तकनीकGrok: xAI द्वारा विकसित एक AI चैटबॉट।
संस्थाCenter for AI Safety (CAIS): एक संगठन जो AI सेफ्टी और रेगुलेशन की वकालत करता है।
तथ्यमाइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने रिपोर्ट में बताया है कि AI में अगले कुछ वर्षों में व्हाइट-कॉलर जॉब्स (white-collar jobs) को ऑटोमेट करने की क्षमता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की तीव्र प्रगति के नैतिक निहितार्थों और सामाजिक-आर्थिक जोखिमों का विश्लेषण कीजिए तथा स्वचालन (automation) के प्रति मानव-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
नैतिक निगरानी: जेनरेटिव AI मॉडल्स के लिए सुरक्षा मानकों पर वैश्विक सहमति की कमी
लेबर मार्केट में रुकावट: व्हाइट-कॉलर भूमिकाओं के ऑटोमेशन से स्ट्रक्चरल अनएम्प्लॉयमेंट की स्थिति
रेगुलेटरी वैक्यूम: AI-जनरेटेड मिसइन्फॉर्मेशन और उत्पीड़न को रोकने के लिए बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क की कमी
मुख्य शब्द: एल्गोरिद्मिक बायस · तकनीकी बेरोजगारी · नैतिक शासन · इंसान-केंद्रित AI · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मोरन में पूर्वोत्तर के पहले इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) के उद्घाटन के बाद केंद्र सरकार से और अधिक इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी की मांग की है।
असम सरकार मजुली, डिफू, उमरांगसो और मानस में चार अतिरिक्त हवाई अड्डे बनाने की योजना बना रही है। इन स्थलों के लिए अगले महीने व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility study) निर्धारित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानमोरान: उत्तर-पूर्व के पहले इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का स्थान।
तथ्यअसम सरकार ने माजुली, डिफू, उमरांगसो और मानस में चार अतिरिक्त एयरपोर्ट बनाने की योजना बनाई है।
पदहिमंत बिस्वा सरमा: असम के मुख्यमंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आपातकालीन लैंडिंग सुविधाओं और क्षेत्रीय हवाई अड्डों की स्थापना के रणनीतिक और विकासात्मक महत्व का विश्लेषण कीजिए।
स्ट्रेटेजिक डेप्थ: सीमा से सटे राज्यों में लॉजिस्टिकल तैयारी और बैकअप इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना
कनेक्टिविटी गैप: विकेंद्रीकृत एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए क्षेत्रीय अलगाव को कम करना
आर्थिक उत्प्रेरक: भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाकों में सामान और लोगों की तेज़ आवाजाही को आसान बनाना
मुख्य शब्द: रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर · क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · लॉजिस्टिक्स तैयारी · एविएशन विकास · व्यवहार्यता अध्ययन
चर्चा में क्यों: NASA और SpaceX ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण खाली कराए गए चालक दल (crew) की जगह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर चार नए अंतरिक्ष यात्रियों को पहुँचाया है।
नई चालक दल (crew) में जेसिका मेयर और जैक हैथवे (NASA), सोफी एडेनोट (फ्रांस) और आंद्रेई फेड्याएव (रूस) शामिल हैं। एक मेडिकल इवैक्युएशन (medical evacuation) के कारण स्पेसवॉक और शोध कार्य रुक गए थे, जिसके बाद इस आगमन से ISS फिर से अपनी पूरी क्षमता के साथ सक्रिय हो गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
विज्ञान-तकनीकISS: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station), लो अर्थ ऑर्बिट (low Earth orbit) में स्थित एक मॉड्यूलर स्पेस स्टेशन।
तथ्यनए क्रू में NASA (USA), फ्रांस और रूस के प्रतिनिधि शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व और निम्न पृथ्वी कक्षा (low Earth orbit) में दीर्घकालिक मानव उपस्थिति बनाए रखने की तार्किक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
बहुपक्षीय समन्वय: साझा ऑपरेशनल सेफ्टी प्रोटोकॉल के साथ संप्रभु हितों का संतुलन
लॉजिस्टिक बाधाएं: माइक्रोग्रेविटी वातावरण में मेडिकल इमरजेंसी और रिसर्च की निरंतरता को मैनेज करना
मुख्य शब्द: अंतरिक्ष अन्वेषण · अंतरराष्ट्रीय सहयोग · एयरोस्पेस लॉजिस्टिक्स · मानव अंतरिक्ष उड़ान