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भाग I · स्था. 11.2025 
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,480 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (539) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (353) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (252) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (212) · रक्षा तकनीक (120) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

केरल वन विभाग हाथी दांत के स्टॉक को जलाने से निकलने वाली राख को आयुर्वेदिक दवाओं के लिए एक संभावित सामग्री के रूप में व्यावसायिक रूप से बेचने की संभावना तलाश रहा है

चर्चा में क्यों: केरल वन विभाग हाथी दांत के स्टॉक को जलाने से निकलने वाली राख को आयुर्वेदिक दवाओं के लिए एक संभावित सामग्री के रूप में व्यावसायिक रूप से बेचने की संभावना तलाश रहा है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देशों के बाद, केरल वन विभाग को ₹260 करोड़ मूल्य के हाथी दांत के स्टॉक को नष्ट करने का कार्य सौंपा गया है। इससे उत्पन्न होने वाली राख का मूल्यांकन आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन के लिए उपयुक्त औषधीय गुणों हेतु किया जा रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यकेरल में हाथीदांत (Ivory) के स्टॉक की अनुमानित कीमत ₹260 करोड़ है।
  • संस्थाहाथी दांत के स्टॉक (ivory stocks) के विनाश के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट जिम्मेदार संस्था है।
  • विज्ञान-तकनीकहाथी दांत (Ivory) को जलाने से उत्पन्न होने वाली राख के औषधीय गुणों की आयुर्वेदिक दवाओं में जांच की जा रही है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वन्यजीव संरक्षण कानूनों के प्रवर्तन और जब्त किए गए अवैध उत्पादों को औद्योगिक या औषधीय उपयोगों के लिए पुन: उपयोग करने की संभावना के बीच संतुलन बनाए रखने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी बाधा: राख से बने औषधीय कंपाउंड्स की सुरक्षा और प्रभावकारिता को प्रमाणित करने के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल की कमी
  • नैतिक दुविधा: उप-उत्पादों के व्यावसायीकरण के जरिए अवैध वन्यजीव व्यापार में 'ग्रीनवाशिंग' की संभावना

मुख्य शब्द: वन्यजीव संरक्षण · आयुर्वेदिक दवा · संसाधनों का पुन: उपयोग · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · जैव विविधता संरक्षण

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

नेचर मेडिसिन (Nature Medicine) में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि OpenAI के ChatGPT Health प्लेटफॉर्म में अक्सर मेडिकल इमरजेंसी (medical emergencies) को पहचानने में विफलता देखी गई है, जिससे मरीजों को नुकसान पहुँचने की संभावना बनी रहती है

चर्चा में क्यों: नेचर मेडिसिन (Nature Medicine) में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि OpenAI के ChatGPT Health प्लेटफॉर्म में अक्सर मेडिकल इमरजेंसी (medical emergencies) को पहचानने में विफलता देखी गई है, जिससे मरीजों को नुकसान पहुँचने की संभावना बनी रहती है।

अध्ययन में 60 वास्तविक रोगी परिदृश्यों (patient scenarios) का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि ChatGPT Health ने आधे से अधिक मामलों को गलत तरीके से वर्गीकृत किया। AI ने अक्सर उन मामलों में भी मरीजों को घर पर रहने या नियमित अपॉइंटमेंट बुक करने की सलाह दी, जहाँ तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • विज्ञान-तकनीकChatGPT Health: मेडिकल से जुड़े सवालों के लिए OpenAI द्वारा विकसित एक AI प्लेटफॉर्म।
  • रिपोर्ट / सूचकांकNature Medicine: वह जर्नल जिसने मेडिकल इमरजेंसी को पहचानने में AI की विफलता पर आधारित अध्ययन प्रकाशित किया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे में जनरेटिव एआई (Generative AI) की तैनाती के नैतिक और सुरक्षा निहितार्थों पर चर्चा कीजिए और जोखिमों को कम करने के लिए उपयुक्त विनियामक तंत्रों का सुझाव दीजिए।

  • लायबिलिटी की अस्पष्टता: AI द्वारा दी गई सलाह से होने वाले मेडिकल मालप्रैक्टिस के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचे की कमी
  • एल्गोरिथमिक बायस: नॉन-रिप्रेजेंटेटिव ट्रेनिंग डेटा के कारण विशिष्ट डेमोग्राफिक्स में AI द्वारा लक्षणों को कम आंकने का जोखिम
  • सुरक्षा-विश्वसनीयता का ट्रेड-ऑफ: AI हेल्थ टूल्स की पहुंच और गलत सुरक्षा के जोखिम के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: जेनरेटिव AI · एल्गोरिद्मिक जवाबदेही · मेडिकल एथिक्स · डेटा इंटीग्रिटी · ह्यूमन-इन-द-लूप

संयुक्त राष्ट्र ने पेरिस एग्रीमेंट (Paris Agreement) के मार्केट मैकेनिज्म के तहत पहले कार्बन क्रेडिट्स को मंजूरी दी है

चर्चा में क्यों: संयुक्त राष्ट्र ने पेरिस एग्रीमेंट (Paris Agreement) के मार्केट मैकेनिज्म के तहत पहले कार्बन क्रेडिट्स को मंजूरी दी है। इसमें दक्षिण कोरिया और म्यांमार को लाभ पहुँचाने के लिए म्यांमार में एक क्लीन कुकिंग प्रोजेक्ट शामिल है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव, साइमन स्टिल ने प्रभावशाली परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने की इस तंत्र की क्षमता पर प्रकाश डाला। इस नए तंत्र को अधिक रूढ़िवादी (conservative) बनाया गया है, जिसमें पिछली योजनाओं की तुलना में क्रेडिट किए गए उत्सर्जन में 40% की कमी शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनपेरिस एग्रीमेंट मार्केट मैकेनिज्म (Paris Agreement market mechanism) वैश्विक उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को समर्थन देने के लिए UN द्वारा संचालित एक पहल है।
  • तथ्यनए कार्बन क्रेडिट मैकेनिज्म में पिछले प्रयासों की तुलना में क्रेडिट किए गए उत्सर्जन में 40% की कमी शामिल है।
  • स्थानपहले स्वीकृत कार्बन क्रेडिट्स (carbon credits) को म्यांमार में एक क्लीन कुकिंग प्रोजेक्ट (clean cooking project) से जोड़ा गया है।
  • तथ्ययह प्रोजेक्ट दक्षिण कोरिया और म्यांमार दोनों के लिए क्रेडिट जनरेट करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पेरिस समझौते के अंतर्गत वैश्विक नेट-जीरो लक्ष्यों की प्राप्ति में बाजार-आधारित कार्बन क्रेडिट तंत्र की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए, साथ ही 'ग्रीनवाशिंग' की रोकथाम के संदर्भ में इसकी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • इंटीग्रिटी रिस्क: 'ग्रीनवाशिंग' की संभावना जहाँ क्रेडिट्स वास्तविक एटमॉस्फेरिक कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन को नहीं दर्शाते
  • रेगुलेटरी बदलाव: हाई-इंटीग्रिटी क्रेडिट इश्यूएंस सुनिश्चित करने के लिए 40% रिडक्शन बफर की ओर बदलाव
  • फाइनेंसिंग फ्लो: विकासशील देशों में स्थानीय क्लीन कुकिंग प्रोजेक्ट्स तक इंटरनेशनल क्लाइमेट फाइनेंस पहुँचाने का मैकेनिज्म

मुख्य शब्द: कार्बन क्रेडिट्स · पेरिस समझौता · ग्रीनवॉशिंग · क्लाइमेट फाइनेंस · उत्सर्जन में कमी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

NASA ने अंतरिक्ष यात्री माइक फिन्के (Mike Fincke) के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से अब तक के पहले समर्पित मेडिकल इवैक्युएशन (medical evacuation) की पुष्टि की है

चर्चा में क्यों: NASA ने अंतरिक्ष यात्री माइक फिन्के (Mike Fincke) के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से अब तक के पहले समर्पित मेडिकल इवैक्युएशन (medical evacuation) की पुष्टि की है। यह कदम उन्नत मेडिकल इमेजिंग की सीमाओं के कारण उठाया गया है।

SpaceX Crew-11 मिशन के पायलट और Expedition 74 के कमांडर, माइक फिन्के (Mike Fincke) को पृथ्वी पर जल्दी वापस आने की आवश्यकता पड़ी। वर्तमान में वे ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर (Johnson Space Center) में पुनर्वास (rehabilitation) की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकSpaceX Crew-11: इस मिशन का पायलट माइक फिन्के (Mike Fincke) हैं।
  • पदमाइक फिन्के: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर एक्सपेडिशन 74 के कमांडर।
  • तथ्ययह घटना ISS से पहला समर्पित मेडिकल इवैक्युएशन (medical evacuation) है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के लिए उन्नत चिकित्सा देखभाल और आपातकालीन निकासी प्रदान करने में आने वाली तकनीकी और रसद संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में कमी: माइक्रो-ग्रेविटी वातावरण में सीमित डायग्नोस्टिक इमेजिंग क्षमताएं
  • लॉजिस्टिक जटिलता: इमरजेंसी रिटर्न ट्रेजेक्टरी के लिए हाई-रिस्क ऑर्बिटल मैकेनिक्स और फ्यूल की ज़रूरतें

मुख्य शब्द: अंतरिक्ष अन्वेषण · एयरोस्पेस मेडिसिन · लॉजिस्टिक्स · स्पेसएक्स · NASA

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगमेन्स

भारत ने AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) में मानव-केंद्रित और नैतिक AI विकास को बढ़ावा देने के लिए MANAV नामक एक वैश्विक AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क (AI governance framework) के अपने दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया

चर्चा में क्यों: भारत ने AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) में मानव-केंद्रित और नैतिक AI विकास को बढ़ावा देने के लिए MANAV नामक एक वैश्विक AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क (AI governance framework) के अपने दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया।

AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact summit) में भारत के MANAV फ्रेमवर्क पर चर्चा करने के लिए 100 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया। यह फ्रेमवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में नैतिक दिशा-निर्देशों, जवाबदेही, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुलभता, वैधता और पारदर्शिता पर जोर देता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकMANAV: भारत का प्रस्तावित ग्लोबल AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क।
  • तथ्यAI Impact समिट में 100 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया।
  • विज्ञान-तकनीकभारत का AI फोकस डीपफेक्स (deepfakes) से निपटने और बच्चों की भलाई सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: नैतिक एआई (AI) विकास सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करने में 'मानव' (MANAV) जैसे वैश्विक एआई शासन ढांचे की स्थापना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • संप्रभुता बनाम ग्लोबलिज़्म: नेशनल डेटा सोवरेनिटी और इंटरनेशनल AI स्टैंडर्ड्स की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • एथिकल सेफ़गार्ड्स: प्रोएक्टिव रेगुलेटरी फ्रेमवर्क्स के ज़रिए डीपफेक्स और बच्चों की सुरक्षा से निपटना
  • ह्यूमन कैपिटल: AI-आधारित इकोनॉमी के लिए स्किलिंग और रीस्किलिंग के जरिए डिजिटल डिवाइड को कम करना

मुख्य शब्द: इंसान-केंद्रित AI · AI गवर्नेंस · राष्ट्रीय संप्रभुता · नैतिक ढाँचे · डिजिटल स्किलिंग

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

ISRO ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि NVS-02 सैटेलाइट के अपने निर्धारित ऑर्बिट (orbit) तक न पहुँच पाने का कारण इंजन की ऑक्सीडाइज़र लाइन में एक खराब वाल्व था, जो एक ढीले इलेक्ट्रिकल कनेक्टर (electrical connector) के कारण हुआ था

चर्चा में क्यों: ISRO ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि NVS-02 सैटेलाइट के अपने निर्धारित ऑर्बिट (orbit) तक न पहुँच पाने का कारण इंजन की ऑक्सीडाइज़र लाइन में एक खराब वाल्व था, जो एक ढीले इलेक्ट्रिकल कनेक्टर (electrical connector) के कारण हुआ था।

जांच समिति में पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन और पूर्व ISRO अध्यक्ष एस. सोमनाथ शामिल थे। रिपोर्ट में कक्षीय विचलन (orbital deviation) के प्राथमिक कारण के रूप में ऑक्सीडाइज़र लाइन वाल्व के सिग्नल एक्टिवेशन में विफलता की पहचान की गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकNVS-02: वह सैटेलाइट जो इंजन ऑक्सीडाइज़र लाइन वाल्व (engine oxidiser line valve) की खराबी के कारण अपने निर्धारित ऑर्बिट तक पहुँचने में विफल रहा।
  • पदके. विजयराघवन: ISRO जांच पैनल में शामिल पूर्व प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर।
  • पदएस. सोमनाथ: जांच पैनल में शामिल किए गए पूर्व ISRO चेयरमैन।
  • तथ्ययह विफलता विशेष रूप से एक ढीले इलेक्ट्रिकल कनेक्टर (electrical connector) के कारण हुई, जिससे सिग्नल एक्टिवेशन रुक गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के कक्षीय उपग्रह प्रक्षेपणों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अंतरिक्ष मिशन इंजीनियरिंग में अतिरेक (Redundancy) और विश्वसनीयता (Reliability) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • टेक्निकल बॉटलनैक: ऑक्सीडाइज़र लाइन्स में हार्डवेयर कनेक्टिविटी की वजह से सिग्नल ट्रांसमिशन फेल
  • रिस्क मिटिगेशन: ऑर्बिटल इंसर्शन के लिए क्रिटिकल प्रोपल्शन सिस्टम्स में मल्टी-लेयर्ड रिडंडेंसी की ज़रूरत

मुख्य शब्द: ऑर्बिटल मैकेनिक्स · अनावश्यकता · स्पेस मिशन की विश्वसनीयता · प्रोपल्शन सिस्टम · ISRO

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केरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे प्रकाश-उत्सर्जक पदार्थ (light-emitting material) के लिए पेटेंट हासिल किया है

चर्चा में क्यों: केरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे प्रकाश-उत्सर्जक पदार्थ (light-emitting material) के लिए पेटेंट हासिल किया है, जो एक ही होस्ट मटेरियल से पूरे दृश्य स्पेक्ट्रम (visible spectrum) को उत्पन्न करने में सक्षम है।

यह तकनीक एक कस्पिडाइन-स्ट्रक्चर्ड (cuspidine-structured) रेयर-अर्थ गैलेट (rare-earth gallate) कंपाउंड का उपयोग फॉस्फोर होस्ट के रूप में करती है। इसे केरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं सैम सोलोमन और दिव्या विजयन द्वारा विकसित किया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकपेटेंट किया गया मटेरियल एक सिंगल होस्ट मटेरियल से रंगों का पूरा विजिबल स्पेक्ट्रम (visible spectrum) पैदा करता है।
  • विज्ञान-तकनीकयह तकनीक एक फॉस्फोर होस्ट (phosphor host) के रूप में कस्पिडाइन-स्ट्रक्चर्ड (cuspidine-structured) रेयर-अर्थ गैलेट (rare-earth gallate) कंपाउंड का उपयोग करती है।
  • तथ्यइसके अनुप्रयोगों में ऊर्जा-कुशल लाइटिंग (energy-efficient lighting), डिस्प्ले टेक्नोलॉजी (display technologies), सिक्योरिटी टूल्स (security tools) और मेडिकल इमेजिंग (medical imaging) शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: फॉस्फोर होस्ट सामग्री और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स में हो रही प्रगति भारत के ऊर्जा दक्षता और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों में किस प्रकार योगदान दे सकती है, चर्चा कीजिए।

  • एनर्जी एफिशिएंसी: बड़े पैमाने पर डिस्प्ले और लाइटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बिजली की खपत में कमी
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: आयातित हाई-परफॉरमेंस ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और रेयर-अर्थ मैटेरियल्स पर निर्भरता कम करना

मुख्य शब्द: ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स · फॉस्फोर होस्ट · दुर्लभ-पृथ्वी कंपाउंड्स · ऊर्जा दक्षता · बौद्धिक संपदा

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और AIWC ने एक टेलीमेट्री स्टडी (Telemetry study) के जरिए यह पुष्टि की है कि ऑलिव रिडले समुद्री कछुए चेन्नई तट पर स्थित नेस्टिंग बीचेस (Nesting beaches) के प्रति गहरा लगाव दिखाते हैं

चर्चा में क्यों: वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और AIWC ने एक टेलीमेट्री स्टडी (Telemetry study) के जरिए यह पुष्टि की है कि ऑलिव रिडले समुद्री कछुए चेन्नई तट पर स्थित नेस्टिंग बीचेस (Nesting beaches) के प्रति गहरा लगाव दिखाते हैं।

इस अध्ययन में ओलिव रिडले समुद्री कछुओं (Olive Ridley sea turtles) की घोंसला बनाने के बाद की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए 'फ्लिपर टैग' का उपयोग किया गया। 'कयाल' नाम की एक सैटेलाइट-टैग्ड मादा कछुए ने एक ही नेस्टिंग सीजन (nesting season) में तीन बार उसी तट पर लौटकर 389 अंडे दिए।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • पर्यावरणओलिव रिडले समुद्री कछुए (Olive Ridley sea turtles) विशिष्ट नेस्टिंग बीचेस (nesting beaches) के प्रति मजबूत निष्ठा (fidelity) दिखाते हैं।
  • संस्थाWildlife Institute of India (WII) और Advanced Institute for Wildlife Conservation (AIWC) ने टेलीमेट्री स्टडी (telemetry study) आयोजित की।
  • तथ्यतमिलनाडु फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने स्टडी एरिया में 1,150 घोंसले (nests) हासिल किए और 1,35,304 अंडों की सुरक्षा की।
  • स्थानयह अध्ययन तमिलनाडु के चेन्नई तट पर केंद्रित था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: समुद्री जैव विविधता के संरक्षण में टेलीमेट्री और रेडियो-टैगिंग के महत्व तथा प्रजनन आवासों (nesting habitats) की सुरक्षा में राज्य वन विभागों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा-आधारित संरक्षण: सुरक्षा के लिए टेलीमेट्री का उपयोग कर हाई-फिडेलिटी नेस्टिंग साइट्स की पहचान और प्राथमिकता तय करना
  • हैबिटेट इंटीग्रिटी: तटीय विकास और विशिष्ट नेस्टिंग बीच कॉरिडोर के संरक्षण के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: टेलीमेट्री · समुद्री जैव विविधता · हैबिटेट फिडेलिटी · संरक्षण जीवविज्ञान · तटीय प्रबंधन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानमेन्स

बायोइकोनॉमी कॉन्क्लेव 2026 में बायोकॉन लिमिटेड (Biocon Ltd.) की संस्थापक किरण मजुमदार-शॉ ने भारत के जैविक डेटा और AI मॉडल्स पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए 'बायोटेक सोवरेन्टी' (biotech sovereignty) की वकालत की

चर्चा में क्यों: बायोइकोनॉमी कॉन्क्लेव 2026 में बायोकॉन लिमिटेड (Biocon Ltd.) की संस्थापक किरण मजुमदार-शॉ ने भारत के जैविक डेटा और AI मॉडल्स पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए 'बायोटेक सोवरेन्टी' (biotech sovereignty) की वकालत की।

बायोइकोनॉमी कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन एसोसिएशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी लेड एंटरप्राइजेज (ABLE) द्वारा किया गया। मंत्री प्रियंक एम. खड़गे ने कर्नाटक को भारत की तेजी से बढ़ती बायोइकोनॉमी (Bioeconomy) के केंद्र के रूप में रेखांकित किया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पदकिरण मजुमदार-शॉ: Biocon Ltd. की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन और फाउंडर।
  • संस्थाABLE: एसोसिएशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी लेड एंटरप्राइजेज (Association of Biotechnology Led Enterprises), बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक अखिल भारतीय मंच।
  • तथ्यBiotech संप्रभुता (sovereignty) में जैविक डेटा, AI मॉडल्स और मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण शामिल है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: एआई-संचालित जैव प्रौद्योगिकी के युग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक लचीलेपन को सुनिश्चित करने में 'जैव-प्रौद्योगिकी संप्रभुता' (biotech sovereignty) के महत्व की चर्चा कीजिए।

  • डेटा सुरक्षा: जीनोमिक डेटा और प्रोप्राइटरी बायोलॉजिकल डेटासेट तक अनधिकृत पहुंच के जोखिम
  • मैन्युफैक्चरिंग ऑटोनॉमी: महत्वपूर्ण हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग के लिए विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कम करना
  • AI एथिक्स: बायोटेक में AI के तेज़ी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी प्रोटोकॉल के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: बायोटेक संप्रभुता · स्वास्थ्य सुरक्षा · बायोइकोनॉमी · डेटा प्राइवेसी · मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म्स

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सुप्रीम कोर्ट ने नदियों में प्रदूषण से जुड़े पांच साल पुराने एक 'सुओ मोटो' (suo motu) मामले को बंद कर दिया है और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को निर्देश दिया है कि वह इस मुद्दे को नदी-दर-नदी के आधार पर फिर से शुरू करे और इसकी निगरानी करे

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने नदियों में प्रदूषण से जुड़े पांच साल पुराने एक 'सुओ मोटो' (suo motu) मामले को बंद कर दिया है और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को निर्देश दिया है कि वह इस मुद्दे को नदी-दर-नदी के आधार पर फिर से शुरू करे और इसकी निगरानी करे।

सुप्रीम कोर्ट ने नगर पालिकाओं द्वारा नदियों में सीवेज के प्रदूषण से संबंधित 2021 के 'सूओ मोटो' (suo motu) मामले को बंद कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने NGT को नदियों के उपचार (remediation) की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थानेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT): सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित निकाय, जिसे नदी प्रदूषण के मामलों को फिर से खोलने और उनकी निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
  • तथ्यनगरपालिकाओं से होने वाले सीवेज प्रदूषण के संबंध में जनवरी 2021 में सुओ मोटो (suo motu) केस शुरू किया गया था।
  • स्थानयमुना नदी: दिल्ली जल बोर्ड द्वारा हरियाणा से होने वाले प्रदूषक डिस्चार्ज (pollutant discharge) के खिलाफ दायर की गई अर्जेंट पिटीशन में शामिल नदी।
  • पदCJI सूर्यकांत: इस बेंच की अध्यक्षता की, जिसने 24 फरवरी, 2026 को केस बंद कर दिया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका और भारत में बड़े पैमाने पर होने वाले नदी प्रदूषण की निगरानी से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • जुडिशियल ओवररीच बनाम एग्जीक्यूटिव जवाबदेही: पर्यावरण निगरानी में कोर्ट की भूमिका और म्युनिसिपल सीवेज मैनेजमेंट की व्यावहारिक चुनौतियों के बीच संतुलन
  • निगरानी की बाधाएं: पूरे देश के नदी प्रदूषण का एक साथ आकलन करने में कठिनाई बनाम स्थानीय, नदी-दर-नदी सुधार का तरीका

मुख्य शब्द: स्वो मोटो · नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल · जीवन का अधिकार · नदी सुधार · पर्यावरण न्यायशास्त्र

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत के कारण हुए एक विमान हादसे के बाद

चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत के कारण हुए एक विमान हादसे के बाद, DGCA ने VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (VSR Ventures Pvt Limited) के चार विमानों को जमीन पर रोक दिया है।

DGCA ने दुर्घटना के लिए स्वीकृत प्रक्रियाओं के पालन न करने और अपर्याप्त प्रशिक्षण को प्राथमिक कारकों के रूप में पहचाना। इसके जवाब में, रेगुलेटर ने चार्टर कंपनियों के लिए एक सुरक्षा रैंकिंग सिस्टम की घोषणा की और पुराने विमानों के लिए ऑडिट को और कड़ा किया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाDGCA: भारत में सिविल एविएशन (civil aviation) के लिए नियामक संस्था (regulatory body)।
  • तथ्यVSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड: वह चार्टर कंपनी जिसके चार विमानों को ग्राउंडेड (grounded) कर दिया गया था।
  • तथ्यSafety Ranking System: DGCA द्वारा चार्टर कंपनियों के लिए एक नया सुधारात्मक उपाय (corrective measure) घोषित किया गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में चार्टर विमानन को नियंत्रित करने वाले विनियामक ढांचे का मूल्यांकन कीजिए और पुराने विमानों के लिए सुरक्षा मानकों को बढ़ाने हेतु सुझाव दीजिए। मूल्यांकन कीजिए।

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: स्वीकृत फ्लाइट प्रोसीजर और पायलट ट्रेनिंग स्टैंडर्ड्स के उल्लंघन को दूर करना
  • सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर: ऑडिट परफॉरमेंस के आधार पर चार्टर ऑपरेटर्स के बीच अंतर करने के लिए सेफ्टी रैंकिंग सिस्टम लागू करना
  • एसेट मैनेजमेंट: पुराने विमानों की ऑपरेशनल व्यवहार्यता और सुरक्षा निगरानी की बढ़ती जरूरतों के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: रेगुलेटरी ओवरसाइट · एविएशन सेफ्टी · अनुपालन · चार्टर एविएशन · ऑडिट फ्रेमवर्क

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व्हाट्सएप (WhatsApp) और मेटा (Meta) ने सुप्रीम कोर्ट में ₹213.14 करोड़ के जुर्माने के खिलाफ अपील की है

चर्चा में क्यों: व्हाट्सएप (WhatsApp) और मेटा (Meta) ने सुप्रीम कोर्ट में ₹213.14 करोड़ के जुर्माने के खिलाफ अपील की है। यह कार्रवाई CCI द्वारा व्हाट्सएप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी (privacy policy) को लेकर दिए गए फैसले के बाद हुई है, जिसमें कहा गया था कि यूजर्स को डेटा साझा करने के लिए मजबूर करके व्हाट्सएप ने बाजार में अपनी स्थिति का गलत फायदा उठाया।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India - CCI) ने व्हाट्सएप (WhatsApp) पर उसकी 'टेक-इट-ऑर-लीव-इट' (take-it-or-leave-it) प्राइवेसी पॉलिसी के लिए ₹213.14 करोड़ का जुर्माना लगाया है। व्हाट्सएप ने 16 मार्च, 2026 तक यूजर की सहमति के संबंध में NCLAT के निर्देशों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यCCI द्वारा लगाया गया जुर्माना: ₹213.14 करोड़।
  • संस्थाNCLAT: नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (National Company Law Appellate Tribunal)।
  • संस्थाCCI: Competition Commission of India (भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग)।
  • तथ्यWhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट का वर्ष: 2021।
मेन्स के लिए

प्रश्न: डिजिटल अर्थव्यवस्था में 'टेक-इट-ऑर-लीव-इट' (लेने या छोड़ने वाले) गोपनीयता नीतियों के उपभोक्ता अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों और एक सुदृढ़ प्रतिस्पर्धा-विरोधी (एंटी-ट्रस्ट) विनियामक तंत्र की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

  • मार्केट डोमिनेंस: डेटा शेयरिंग के लिए बिग टेक द्वारा मोनोपॉली पावर का दुरुपयोग
  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: प्लेटफॉर्म ऑपरेशनल इंटीग्रिटी और व्यक्तिगत डेटा सॉवरेन्टी के बीच संतुलन
  • सहमति आर्किटेक्चर: जबरन डेटा हार्वेस्टिंग से हटकर यूजर-सेंट्रिक परमिशन की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: बाज़ार में दबदबा · डेटा संप्रभुता · एंटीट्रस्ट रेगुलेशन · प्राइवेसी पॉलिसी · डिजिटल इकोनॉमी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

IISER तिरुपति ने तिरुपति नेचर सोसाइटी और आंध्र प्रदेश वन विभाग के सहयोग से 'गरुड़ एटलस' (Garuda Atlas) पक्षी-मैपिंग प्रोजेक्ट के पांचवें संस्करण को संपन्न किया है

चर्चा में क्यों: IISER तिरुपति ने तिरुपति नेचर सोसाइटी और आंध्र प्रदेश वन विभाग के सहयोग से 'गरुड़ एटलस' (Garuda Atlas) पक्षी-मैपिंग प्रोजेक्ट के पांचवें संस्करण को संपन्न किया है।

सर्वेक्षण में तिरुपति और उसके आसपास के क्षेत्रों में 55,000 से अधिक पक्षियों और 274 प्रजातियों को दर्ज किया गया है। इस क्षेत्र में पहली बार देखे गए उल्लेखनीय पक्षियों में इंडियन येलो टिट (Indian Yellow Tit), शाहीन फाल्कन (Shaheen Falcon) और ब्लैक ईगल (Black eagle) शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पर्यावरणइंडियन येलो टिट (Indian Yellow Tit): गरुड़ एटलस (Garuda Atlas) सर्वे के दौरान पहली बार तिरुपति क्षेत्र में रिकॉर्ड किया गया।
  • तथ्यगरुड़ एटलस (Garuda Atlas): तिरुपति क्षेत्र में 274 प्रजातियों और 55,000 से अधिक पक्षियों का दस्तावेजीकरण करने वाला एक बर्ड-मैपिंग प्रोजेक्ट।
  • संस्थाIISER तिरुपति: बर्ड-मैपिंग प्रोजेक्ट में शामिल प्राथमिक शैक्षणिक संस्थान।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में संरक्षण प्रयासों में समुदाय-आधारित जैव विविधता मानचित्रण और नागरिक विज्ञान के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • डेटा इंटीग्रेशन: गैर-सरकारी प्रकृति संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों से डेटा को मानकीकृत करने में चुनौतियां
  • संरक्षण निगरानी: प्रवासी कॉरिडोर और हैबिटेट्स की पहचान और सुरक्षा के लिए लोकल बर्ड-मैपिंग का उपयोग

मुख्य शब्द: बायोडायवर्सिटी मैपिंग · सिटिजन साइंस · पक्षियों का संरक्षण · आवास दस्तावेज़ीकरण

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IISc के शोधकर्ताओं ने लैटरल हाइपोथैलेमिक एरिया (LHA) में एक न्यूरल सर्किट की पहचान की है, जो तीव्र तनाव (acute stress) के दौरान खुजली के व्यवहार को रोकता है

चर्चा में क्यों: IISc के शोधकर्ताओं ने लैटरल हाइपोथैलेमिक एरिया (LHA) में एक न्यूरल सर्किट की पहचान की है, जो तीव्र तनाव (acute stress) के दौरान खुजली के व्यवहार को रोकता है। यह खोज तनाव के कारण होने वाली पुरानी खुजली (chronic itch) के इलाज के लिए एक संभावित रास्ता प्रदान कर सकती है।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने तनाव और खुजली के बीच संबंध स्थापित करने वाले एक न्यूरल सर्किट (neural circuit) का मानचित्र तैयार किया है। 'सेल रिपोर्ट्स' (Cell Reports) जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में लैटरल हाइपोथैलेमिक एरिया (LHA) में विशिष्ट न्यूरॉन्स की पहचान की गई है। ये न्यूरॉन्स तीव्र तनाव के दौरान सक्रिय हो जाते हैं ताकि खुजली को कम किया जा सके।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकलेटरल हाइपोथैलेमिक एरिया (Lateral hypothalamic area - LHA): मस्तिष्क का वह विशिष्ट क्षेत्र जहाँ के न्यूरॉन्स ने तनाव के दौरान खुजली (itch) को कम करने का काम किया।
  • संस्थाइंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc): वह रिसर्च संस्थान जिसने इस स्टडी को कंडक्ट किया।
  • तथ्यCell Reports: वह वैज्ञानिक जर्नल जहाँ यह स्टडी (study) प्रकाशित हुई थी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: न्यूरोबायोलॉजी और न्यूरल मैपिंग में हुई प्रगति तनाव से संबंधित पुरानी स्वास्थ्य स्थितियों के लिए लक्षित उपचारों (targeted therapies) के विकास में किस प्रकार योगदान दे सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • मैकेनिज्म-आधारित थेरेपी: सिस्टमिक लक्षण मैनेजमेंट से टारगेटेड न्यूरल सर्किट इंटरवेंशन की ओर बदलाव
  • न्यूरो-साइकोसोमैटिक लिंक: क्रोनिक इच में मनोवैज्ञानिक तनाव के शारीरिक लक्षणों को समझना

मुख्य शब्द: न्यूरल सर्किट · लैटरल हाइपोथैलेमिक एरिया · न्यूरोबायोलॉजी · पुरानी खुजली · तनाव की प्रतिक्रिया

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CSIR-NGRI ने रोजगार योग्य कौशल (employable skills) को बढ़ाकर अनुसंधान और उद्योग की जरूरतों के बीच की दूरी को पाटने के लिए भू-तापीय ऊर्जा अन्वेषण (geothermal energy exploration) पर एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (G2E2) शुरू किया है

चर्चा में क्यों: CSIR-NGRI ने रोजगार योग्य कौशल (employable skills) को बढ़ाकर अनुसंधान और उद्योग की जरूरतों के बीच की दूरी को पाटने के लिए भू-तापीय ऊर्जा अन्वेषण (geothermal energy exploration) पर एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (G2E2) शुरू किया है।

छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन CSIR-NGRI के निदेशक सुरेश कुमार और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) के पूर्व उप-महानिदेशक पी.बी. सरोलकर द्वारा किया गया। यह कोर्स भूतापीय संसाधन मूल्यांकन (geothermal resource assessment) के लिए हीट-फ्लो अध्ययन, हाइड्रो-जियोकेमिस्ट्री और भूभौतिकीय विधियों को कवर करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाCSIR-NGRI: काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च - नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट।
  • विज्ञान-तकनीकG2E2: भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal energy) अन्वेषण पर केंद्रित एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • विज्ञान-तकनीकजियोथर्मल रिसोर्स असेसमेंट (Geothermal resource assessment) के तरीकों में हीट-फ्लो स्टडीज, हाइड्रोजियोकेमिस्ट्री और जियोफिजिकल मेथड्स शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की नेट-जीरो अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण में जीवाश्म ईंधन के एक सतत विकल्प के रूप में भू-तापीय ऊर्जा (geothermal energy) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • स्किल गैप: गहरे भूतापीय संसाधनों के लिए हाइड्रोजियोकेमिस्ट्री और जियोफिजिकल तरीकों में विशेषज्ञ वर्कफोर्स की कमी
  • तकनीकी बाधा: हीट-फ्लो और रिज़र्व की विशेषताओं की मैपिंग में उच्च शुरुआती एक्सप्लोरेशन लागत और तकनीकी जटिलताएँ

मुख्य शब्द: नवीकरणीय ऊर्जा · जियोथर्मल एक्सप्लोरेशन · कौशल विकास · सतत विकास · ऊर्जा सुरक्षा

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BITS पिलानी-हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी कम ऊर्जा वाली एयर-कंडीशनिंग तकनीक विकसित की है जिसमें रेफ्रिजरेंट (refrigerant) का उपयोग नहीं होता है

चर्चा में क्यों: BITS पिलानी-हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी कम ऊर्जा वाली एयर-कंडीशनिंग तकनीक विकसित की है जिसमें रेफ्रिजरेंट (refrigerant) का उपयोग नहीं होता है। यह तकनीक औद्योगिक अपशिष्ट ताप (industrial waste heat) का उपयोग करके डिसिकेंट-कोटेड हीट एक्सचेंजर्स (desiccant-coated heat exchangers) के जरिए हवा से नमी कम करती है।

यह तकनीक हवा से नमी कम करने के लिए डेसिकेंट-कोटेड हीट एक्सचेंजर्स (desiccant-coated heat exchangers) का उपयोग करती है, जिससे पारंपरिक रेफ्रिजरेंट्स (refrigerants) की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। बिजली की खपत को कम करने के लिए यह औद्योगिक अपशिष्ट ताप (industrial waste heat) या नवीकरणीय तापीय स्रोतों जैसे कम-श्रेणी के ताप स्रोतों पर काम करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकDesiccant-coated heat exchangers: नई कूलिंग टेक्नोलॉजी में हवा से नमी (dehumidify) कम करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  • तथ्यलो-ग्रेड हीट सोर्स (Low-grade heat sources): इसमें सिस्टम के लिए इंडस्ट्रियल वेस्ट हीट या रिन्यूएबल थर्मल सोर्स शामिल हैं।
  • स्थानटारगेट शहर: यह टेक्नोलॉजी मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे ह्यूमिड (humid) शहरों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी गई है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के जलवायु लक्ष्यों और औद्योगिक ऊर्जा दक्षता में रेफ्रिजरेंट-मुक्त और अपशिष्ट-ऊष्मा-संचालित शीतलन प्रौद्योगिकियों को अपनाने के योगदान का विश्लेषण कीजिए।

  • डिकार्बोनाइजेशन: हाई-पावर इलेक्ट्रिकल कूलिंग से हटकर वेस्ट-हीट यूटिलाइजेशन पर शिफ्ट होने से स्कोप 2 एमिशन कम करना
  • रिसोर्स एफिशिएंसी: रिहायशी और कमर्शियल कूलिंग के लिए इंडस्ट्रियल वेस्ट हीट को रीपर्पॉज़ करके सर्कुलर इकोनॉमी अप्रोच
  • क्लाइमेट अडैप्टेशन: हाई-ह्यूमिडिटी वाले तटीय शहरों में अर्बन हीट आइलैंड प्रभावों को कम करना

मुख्य शब्द: डीकार्बोनाइजेशन · सर्कुलर इकोनॉमी · ऊर्जा दक्षता · वेस्ट हीट रिकवरी · सस्टेनेबल कूलिंग

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काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों ने फिशिंग कैट प्रोजेक्ट (Fishing Cat Project) के सहयोग से पहला वैज्ञानिक मूल्यांकन किया

चर्चा में क्यों: काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों ने फिशिंग कैट प्रोजेक्ट (Fishing Cat Project) के सहयोग से पहला वैज्ञानिक मूल्यांकन किया, जिसमें इस पार्क को विश्व स्तर पर संकटग्रस्त 'फिशिंग कैट' के लिए एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में स्थापित किया गया है।

अध्ययन में कैमरा ट्रैप छवियों का उपयोग करते हुए टाइगर रिज़र्व के 450 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में कम से कम 57 व्यक्तियों की पहचान की गई। फिशिंग कैट एक आर्द्रभूमि विशेषज्ञ (wetland specialist) है जो ब्रह्मपुत्र के बाढ़ के मैदानों में पाया जाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • पर्यावरणफिशिंग कैट (Fishing cat): एक वैश्विक रूप से संवेदनशील वेटलैंड स्पेशलिस्ट प्रजाति (wetland specialist species)।
  • तथ्यइस अध्ययन में 450+ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कम से कम 57 फिशिंग कैट (fishing cat) व्यक्तियों की पहचान की गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के जैव विविधता संरक्षण लक्ष्यों के संदर्भ में, संवेदनशील प्रजातियों के लिए 'गढ़' (strongholds) की पहचान करने और उन्हें संरक्षित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • हैबिटेट फ्रैगमेंटेशन: कृषि विस्तार का वेटलैंड स्पेशलिस्ट कॉरिडोर पर प्रभाव
  • संरक्षण पद्धति: दुर्लभ निशाचर प्रजातियों की निगरानी में कैमरा-ट्रैपिंग की प्रभावशीलता
  • इकोसिस्टम सर्विसेज: ब्रह्मपुत्र फ्लडप्लेन की जैव विविधता बनाए रखने में एपेक्स और मेसो-प्रेडेटर्स की भूमिका

मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · वेटलैंड इकोलॉजी · प्रजातियों का गढ़ · कैमरा ट्रैपिंग · ब्रह्मपुत्र फ्लडप्लेन्स

7 फरवरी को ब्रेक फेल होने के कारण रनवे से बाहर निकल जाने की घटना के बाद

चर्चा में क्यों: 7 फरवरी को ब्रेक फेल होने के कारण रनवे से बाहर निकल जाने की घटना के बाद, भारतीय वायुसेना ने अपने लगभग 30 सिंगल-सीट तेजस (Tejas) लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के बेड़े को ग्राउंड कर दिया है।

इस घटना में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के एक तेजस जेट ने फ्रंटलाइन एयरबेस पर रनवे से आगे निकलकर रनवे से बाहर लैंडिंग कर ली, जिससे एयरफ्रेम को भारी नुकसान पहुँचा। मार्च 2024 और नवंबर 2025 की घटनाओं के बाद, यह विमान के शामिल होने के बाद से तीसरे तेजस विमान के नुकसान का मामला है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकतेजस: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित एक सिंगल-सीट लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (light combat aircraft)।
  • तथ्य7 फरवरी की घटना के बाद, IAF ने तकनीकी निरीक्षण के लिए लगभग 30 सिंगल-सीट Tejas जेट्स के बेड़े को ग्राउंड कर दिया।
  • तथ्यभारत ने फरवरी 2021 में INR480 बिलियन का और सितंबर 2025 में INR623.7 बिलियन का कॉन्ट्रैक्ट तेजस Mk-1A जेट्स के लिए साइन किया।
  • तथ्यTejas Mk-1A की डिलीवरी में देरी का कारण GE Aerospace द्वारा इंजन डिलीवरी की डेडलाइन (deadline) चूकना है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: 'मेक इन इंडिया' पहल के बावजूद स्वदेशी विमान निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में भारत के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • सप्लाई चेन निर्भरता: इंजन के पुर्जों के लिए GE एयरोस्पेस पर निर्भरता से तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में देरी
  • क्वालिटी एश्योरेंस: एयरफ्रेम में बार-बार होने वाली तकनीकी खराबी के कारण निरीक्षण के लिए पूरे बेड़े को ग्राउंडेड करना ज़रूरी
  • स्वदेशीकरण की बाधाएं: तेज़ खरीद की जरूरतों और हाई-प्रिसिजन एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की जटिलताओं के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग · रक्षा खरीद · सप्लाई चेन · एयरोस्पेस इंजीनियरिंग · आत्मनिर्भरता

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NIOT के वैज्ञानिकों ने समुद्र की निगरानी (oceanographic monitoring) में सुधार के लिए रियल-टाइम कंडक्टिविटी

चर्चा में क्यों: NIOT के वैज्ञानिकों ने समुद्र की निगरानी (oceanographic monitoring) में सुधार के लिए रियल-टाइम कंडक्टिविटी, टेम्परेचर और डेप्थ (CTD) डेटा इकट्ठा करने हेतु वेव प्रोपल्शन-आधारित वर्टिकल प्रोफाइलर (WVP) विकसित किया है।

WVP अपनी गति के लिए बुऑय (buoys) का उपयोग करता है और इसे कई सेंसरों के स्थान पर एक एकल डिवाइस के रूप में उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। भारत के तट पर एक सप्ताह का परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसके बाद भविष्य के प्रोटोटाइप को दो बुऑय में स्थापित किया जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • विज्ञान-तकनीकWVP: NIOT द्वारा विकसित वेव प्रोपल्शन-आधारित वर्टिकल प्रोफाइलर (Wave propulsion-based vertical profiler)।
  • तथ्यCTD डेटा: यह रियल-टाइम में कंडक्टिविटी (conductivity), टेम्परेचर (temperature) और डेप्थ (depth) को मापता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: WVP जैसी वास्तविक समय की समुद्र विज्ञान निगरानी प्रौद्योगिकियों में प्रगति किस प्रकार भारत के समुद्री अनुसंधान और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियों को सुदृढ़ कर सकती है, चर्चा कीजिए।

  • डेटा ग्रैनुलैरिटी: रियल-टाइम CTD मॉनिटरिंग से समुद्र के हीट कंटेंट और लवणता बदलाव का हाई-रिज़ॉल्यूशन मॉडलिंग संभव है
  • तकनीकी स्वायत्तता: स्वदेशी वेव-प्रोपल्शन डिज़ाइन के ज़रिए इम्पोर्टेड सेंसर एरे पर निर्भरता कम करना

मुख्य शब्द: समुद्र विज्ञान · रियल-टाइम मॉनिटरिंग · वेव प्रोपल्शन · समुद्री अनुसंधान · जलवायु अनुकूलन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन' पर हस्ताक्षर होने के बाद 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' को वैश्विक स्तर पर AI के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन' पर हस्ताक्षर होने के बाद 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' को वैश्विक स्तर पर AI के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit) का समापन 20 फरवरी, 2026 को दिल्ली में हुआ।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • स्थानIndia AI Impact Summit 20 फरवरी, 2026 को दिल्ली में संपन्न हुआ।
  • विज्ञान-तकनीकसमिट ने एनिमल केयर, लाइवस्टॉक ट्रैकिंग, कल्चरल प्रिजर्वेशन और ऑर्गन डोनेशन में AI की प्रगति को प्रदर्शित किया।
  • पदप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि उत्पादकता के लिए तकनीक के साथ परंपरा के मेल में AI के उपयोग पर जोर दिया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ग्लोबल साउथ के देशों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के लाभों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करने में 'नई दिल्ली घोषणा' के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • डिजिटल डिवाइड: विकसित अर्थव्यवस्थाओं द्वारा तकनीकी वर्चस्व का जोखिम बनाम विकासशील देशों के लिए समान पहुंच
  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: कृषि और हेल्थकेयर में तेज़ AI इनोवेशन के साथ मज़बूत KYC और फ्रॉड प्रिवेंशन उपायों के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: समान वितरण · तकनीकी संप्रभुता · डिजिटल समावेश · AI गवर्नेंस · कृषि उत्पादकता

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IIT Madras ने शिक्षा को लोकतांत्रिक बनाने और प्रोफेशनल्स को डेटा-आधारित कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से मैनेजमेंट और डेटा साइंस में एक ऑनलाइन बैचलर ऑफ साइंस (BS) प्रोग्राम शुरू किया है

चर्चा में क्यों: IIT Madras ने शिक्षा को लोकतांत्रिक बनाने और प्रोफेशनल्स को डेटा-आधारित कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से मैनेजमेंट और डेटा साइंस में एक ऑनलाइन बैचलर ऑफ साइंस (BS) प्रोग्राम शुरू किया है।

यह कार्यक्रम एक अंतःविषय (interdisciplinary) ऑनलाइन कोर्स है, जो कक्षा 12वीं या उसके समकक्ष योग्यता वाले छात्रों के लिए खुला है। इसमें कई एग्जिट विकल्प (exit options) उपलब्ध हैं और इसे डायरेक्टर वी. कामकोटी के नेतृत्व में शुरू किया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यपात्रता: ऑनलाइन BS प्रोग्राम के लिए क्लास XII या समकक्ष योग्यता।
  • विज्ञान-तकनीकप्रोग्राम फोकस: मैनेजमेंट और डेटा साइंस।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा ऑनलाइन अंतःविषय (interdisciplinary) डिग्री कार्यक्रमों के विस्तार से भारत की उभरती डेटा अर्थव्यवस्था में कौशल अंतराल (skill gap) को कैसे संबोधित किया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • पहुँच का लोकतंत्रीकरण: हाई-क्वालिटी ऑनलाइन पेडागोजी के ज़रिए शहरी-ग्रामीण अंतर को कम करना
  • करिकुलम का विकास: पारंपरिक इंजीनियरिंग से इंटरडिसिप्लिनरी डेटा-ड्रिवन मैनेजमेंट की ओर बदलाव
  • इंडस्ट्री-एकेडेमिया सिनर्जी: डेटा मैनेजमेंट के लिए एकेडमिक आउटपुट को रियल-टाइम इंडस्ट्रियल रिक्वायरमेंट्स के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: शिक्षा का लोकतंत्रीकरण · स्किल गैप · इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग · डेटा साइंस · ऑनलाइन पेडागोजी

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NASA एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन ने घोषणा की है कि रॉकेट फ्यूलिंग टेस्ट के सफल होने के बाद

चर्चा में क्यों: NASA एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन ने घोषणा की है कि रॉकेट फ्यूलिंग टेस्ट के सफल होने के बाद, आर्टेमिस II (Artemis II) लूनर फ्लाई-अराउंड मिशन 6 मार्च तक लॉन्च किया जा सकता है।

आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरी जाएगी। हाइड्रोजन रिसाव को रोकने के लिए दो सील (seals) बदलने के बाद, गुरुवार की रात को रॉकेट का दूसरा ईंधन भरने का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकArtemis II: NASA का एक मिशन जिसमें चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चंद्रमा के चारों ओर उड़ान (lunar fly-around) शामिल है।
  • तथ्यNASA ने Artemis II लॉन्च की तारीख 6 मार्च तय की है।
  • विज्ञान-तकनीकरॉकेट फ्यूलिंग टेस्ट में हाइड्रोजन लीकेज को ठीक करने के लिए दो सील्स (seals) को बदला गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: आर्टेमिस जैसे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने में किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं, चर्चा कीजिए।

  • तकनीकी संप्रभुता: चंद्र संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा और स्थायी चंद्र आउटपोस्ट स्थापित करना
  • सेफ्टी प्रोटोकॉल: गहरे अंतरिक्ष में मानव अन्वेषण के लिए सख्त हेल्थ क्वारंटीन और हार्डवेयर रिडंडेंसी की ज़रूरतें

मुख्य शब्द: चंद्र अन्वेषण · स्पेस टेक्नोलॉजी · मानव अंतरिक्ष उड़ान · NASA · आर्टेमिस प्रोग्राम

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) में 250 बिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता हासिल हुई और इसमें 5 लाख से अधिक आगंतुक शामिल हुए

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) में 250 बिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता हासिल हुई और इसमें 5 लाख से अधिक आगंतुक शामिल हुए।

AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) का आयोजन दिल्ली के भारत मंडपम में किया गया, जिसमें 500 से अधिक सत्र और 400 प्रदर्शक शामिल हुए। इसके परिणामस्वरूप 'दिल्ली घोषणा' (Delhi Declaration) पर 70 से अधिक देशों द्वारा हस्ताक्षर किए गए और डीप टेक (deep tech) वेंचर कैपिटल के लिए 20 बिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता हासिल हुई।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यAI Impact Summit में $250 बिलियन के निवेश की प्रतिबद्धता (investment commitments) हासिल हुई।
  • तथ्यSummit ने विशेष रूप से डीप टेक वेंचर कैपिटल (deep tech venture capital) में $20 बिलियन जुटाए।
  • स्थानभारत मंडपम, दिल्ली में AI Impact Summit की मेजबानी की गई।
  • तथ्यदिल्ली डिक्लेरेशन (Delhi Declaration) पर 70 से अधिक देशों ने हस्ताक्षर किए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: डीप टेक (deep tech) के क्षेत्र में भारत को एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करने में वैश्विक एआई (AI) शिखर सम्मेलनों के महत्व और अंतर्राष्ट्रीय एआई शासन पर 'दिल्ली घोषणा' के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • भू-राजनीतिक नेतृत्व: दिल्ली घोषणापत्र के ज़रिए वैश्विक AI मानकों को आकार देने में भारत की भूमिका
  • पूंजी का प्रवाह: घरेलू डीप टेक इकोसिस्टम पर 250 बिलियन डॉलर के निवेश का असर
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधाएं: शहरी केंद्रों में बड़े पैमाने पर टेक समिट और लॉजिस्टिकल बॉटलनैक्स को मैनेज करना

मुख्य शब्द: डीप टेक · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · डिजिटल डिप्लोमेसी · वेंचर कैपिटल · ग्लोबल लीडरशिप

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने वैश्विक बाजारों के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरण बनाने हेतु एक 'क्वांटम इकोसिस्टम' और 'अमरावती क्वांटम वैली' विकसित करने की योजना की घोषणा की है।

इस पहल का उद्देश्य स्वदेशी AI इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरणों का निर्माण करना है। राज्य विभिन्न क्षेत्रों में डीपटेक (Deeptech) अनुप्रयोगों के विस्तार की योजना बना रहा है ताकि एक व्यापक क्वांटम इकोसिस्टम स्थापित किया जा सके।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकक्वांटम इकोसिस्टम (Quantum Ecosystem): आंध्र प्रदेश में क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरण बनाने के लिए प्रस्तावित एक इंफ्रास्ट्रक्चर।
  • तथ्यअमरावती क्वांटम वैली: आंध्र प्रदेश में क्वांटम टेक्नोलॉजी के विकास के लिए निर्धारित हब।
  • विज्ञान-तकनीकइंडिजिनस AI इंफ्रास्ट्रक्चर: वह बुनियादी तकनीक जिसका उद्देश्य राज्य के क्वांटम इकोसिस्टम (quantum ecosystem) को सपोर्ट करना है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता और वैश्विक बाजार प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे स्वदेशी डीपटेक (deeptech) पारिस्थितिकी तंत्रों के विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: क्वांटम हार्डवेयर के लिए स्पेशलाइज्ड क्रायोजेनिक कूलिंग और हाई-प्रिसिजन फैब्रिकेशन लैब्स की ज़रूरत
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: महत्वपूर्ण डेटा और एन्क्रिप्शन को सुरक्षित करने के लिए विदेशी क्वांटम प्रोसेसर पर निर्भरता कम करना
  • स्किल की कमी: क्वांटम मैकेनिक्स और एडवांस्ड मैटेरियल्स साइंस में कुशल विशेष वर्कफोर्स की ज़रूरत

मुख्य शब्द: डीपटेक · क्वांटम कंप्यूटिंग · तकनीकी संप्रभुता · स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर · रणनीतिक स्वायत्तता

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तमिलनाडु सरकार ने प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 को वापस ले लिया है

चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 को वापस ले लिया है, जिसका उद्देश्य प्राइवेट यूनिवर्सिटीज स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि की आवश्यकता को कम करना था।

तमिलनाडु सरकार ने प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और इसी बिल के 2023 वाले संस्करण, दोनों को वापस ले लिया है। प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के लिए भूमि की आवश्यकताओं में कटौती को लेकर AIADMK और अन्य दलों द्वारा 2025 के बिल का विरोध किया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • अधिनियम / विधेयकतमिलनाडु प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (Amendment) बिल, 2025: प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के लिए भूमि की आवश्यकताओं को कम करने का प्रस्ताव।
  • तथ्यसरकार ने पोंगल सहायता के लिए फंडिंग सहित 2025-26 के Final Supplementary Estimates पेश किए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में निजी विश्वविद्यालयों के लिए भूमि आवश्यकताओं को कम करने के शैक्षिक मानकों और शहरी नियोजन पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: स्थापना में आसानी और शैक्षणिक मानकों व इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता बनाए रखने के बीच संतुलन
  • भूमि उपयोग विवाद: शैक्षिक विस्तार और शहरी विकास या कृषि भूमि संरक्षण के बीच प्रतिस्पर्धा

मुख्य शब्द: रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर · विधायी वापसी · पूरक अनुमान · भूमि उपयोग नीति

मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में महाराष्ट्र के बेला ग्राम को भारत की पहली 'नेट-जीरो' (net-zero) पंचायत के रूप में रेखांकित किया गया

चर्चा में क्यों: मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में महाराष्ट्र के बेला ग्राम को भारत की पहली 'नेट-जीरो' (net-zero) पंचायत के रूप में रेखांकित किया गया, जिसे स्थानीय नेतृत्व और नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के बदलाव के माध्यम से हासिल किया गया है।

सरपंच शारदा गायधने के नेतृत्व में बेलग्राम ने वृक्षारोपण, कचरा पृथक्करण और सौर ऊर्जा की ओर बदलाव के माध्यम से नेट-जीरो (Net-zero) का लक्ष्य हासिल किया। पॉलिसी एंड डेवलपमेंट एडवाइजरी ग्रुप (PDAG) ने पंचायत नेतृत्व को जलवायु कार्रवाई योजनाओं (Climate action plans) के लिए एक प्रमुख चालक के रूप में पहचाना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • स्थानबेला ग्राम: महाराष्ट्र में स्थित भारत की पहली नेट-जीरो (net-zero) पंचायत।
  • तथ्यPDAG: Policy & Development Advisory Group ने क्लाइमेट एक्शन में पंचायत नेतृत्व पर जोर दिया।
  • तथ्यसोलर ग्रामम: केरल के पेरिंजनम में एक ग्राम पहल, जो सोलर एनर्जी पर केंद्रित है।
  • तथ्यसियारी: झारखंड का एक गाँव जो जल संरक्षण और रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) को बढ़ावा देता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विकेंद्रीकृत शासन और पंचायत नेतृत्व किस प्रकार जमीनी स्तर पर भारत के 'नेट-जीरो' उत्सर्जन लक्ष्यों की ओर संक्रमण को गति दे सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।

  • संस्थागत एजेंसी: राज्य स्तर के आदेशों से आगे बढ़कर क्लाइमेट एक्शन प्लान लागू करने के लिए ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाना
  • कम्युनिटी-आधारित एडाप्टेशन: क्लाइमेट रेजिलिएंस के लिए स्थानीय ज्ञान और वेस्ट मैनेजमेंट का इस्तेमाल
  • एनर्जी ट्रांजिशन: ग्रामीण विद्युतीकरण और कार्बन न्यूट्रलिटी के लिए विकेंद्रीकृत सोलर अपनाना एक मॉडल के रूप में

मुख्य शब्द: नेट-जीरो · विकेंद्रीकृत शासन · क्लाइमेट रेजिलिएंस · नवीकरणीय ऊर्जा · जमीनी स्तर का नेतृत्व

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वन्यजीव अपराध विशेषज्ञों ने दुनिया में पहली बार शिकारियों को दोषी ठहराने की जानकारी दी है

चर्चा में क्यों: वन्यजीव अपराध विशेषज्ञों ने दुनिया में पहली बार शिकारियों को दोषी ठहराने की जानकारी दी है, जिसमें शेर के शरीर के अंगों को एक विशिष्ट डेटाबेस से मिलाने के लिए DNA प्रोफाइलिंग का उपयोग किया गया।

2024 में, अधिकारियों ने एक संदिग्ध के गाँव में मिले शेर के शरीर के हिस्सों का मिलान DNA डेटाबेस से किया। यह डेटाबेस विक्टोरिया फॉल्स वाइल्डलाइफ ट्रस्ट (Victoria Falls Wildlife Trust) द्वारा बनाया गया था, जिसे पीपल्स पोस्टकोड लॉटरी (People's Postcode Lottery) से फंडिंग प्राप्त हुई थी।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकDNA profiling: शिकारियों को दोषी ठहराने के लिए वैज्ञानिक सबूत के रूप में शरीर के अंगों को डेटाबेस से मैच करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • संस्थाविक्टोरिया फॉल्स वाइल्डलाइफ ट्रस्ट (Victoria Falls Wildlife Trust): वह संस्था जो लायन DNA डेटाबेस बनाने के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यशेर के अंगों को अपने पास रखने के लिए दो व्यक्तियों को 24 महीने की जेल की सजा सुनाई गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वन्यजीव तस्करी और अवैध शिकार से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ढाँचों को सुदृढ़ करने में फॉरेंसिक जैव प्रौद्योगिकी (forensic biotechnology) की प्रगति किस प्रकार सहायक हो सकती है, चर्चा कीजिए।

  • सबूत का मानक: वन्यजीव अपराधों में परिस्थितिजन्य से फॉरेंसिक-आधारित वैज्ञानिक सबूतों की ओर बदलाव
  • ग्लोबल एनफोर्समेंट: अवैध वन्यजीव व्यापार पर नज़र रखने के लिए सीमाओं के पार DNA डेटाबेस का मानकीकरण
  • फंडिंग मॉडल: संरक्षण-आधारित फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने में प्राइवेट लॉटरी फंडिंग की भूमिका

मुख्य शब्द: DNA प्रोफाइलिंग · वन्यजीव अपराध · फॉरेंसिक सबूत · संरक्षण तकनीक · जैव विविधता संरक्षण

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मानसिक स्वास्थ्य संस्था 'माइंड' (Mind) ने AI से जुड़े जोखिमों और सुरक्षा उपायों पर दुनिया में पहली बार एक साल लंबी जांच शुरू की है

चर्चा में क्यों: मानसिक स्वास्थ्य संस्था 'माइंड' (Mind) ने AI से जुड़े जोखिमों और सुरक्षा उपायों पर दुनिया में पहली बार एक साल लंबी जांच शुरू की है। यह कदम 'गार्जियन' द्वारा की गई उस जांच के बाद उठाया गया है, जिसमें सामने आया कि गूगल के AI ओवरव्यूज (AI Overviews) गलत चिकित्सा सलाह दे रहे हैं।

'माइंड' (Mind) एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चैरिटी है, जो मानसिक स्वास्थ्य सहायता में AI की भूमिका की जांच के लिए एक साल लंबा इनक्वायरी (Inquiry) शुरू कर रही है। यह इनक्वायरी 'गार्जियन' (Guardian) द्वारा किए गए एक जांच के बाद शुरू की गई है, जिसमें पाया गया कि गूगल के 'AI ओवरव्यूज' (AI Overviews) ने मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों पर गलत और संभावित रूप से खतरनाक चिकित्सा सलाह प्रदान की थी।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • संस्थाMind: एक मेंटल हेल्थ चैरिटी जो मेंटल हेल्थ में AI रिस्क (AI risks) की पहली ग्लोबल इंक्वायरी शुरू कर रही है।
  • विज्ञान-तकनीकGuardian की एक जांच में Google के AI Overviews को गलत मेडिकल सलाह (medical advice) देने के लिए पहचाना गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य सहायता और डेटा सटीकता के संदर्भ में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के एकीकरण से उत्पन्न होने वाले नैतिक निहितार्थों और विनियामक आवश्यकताओं का विश्लेषण कीजिए।

  • एल्गोरिद्मिक बायस: कमजोर आबादी को AI द्वारा गलत या हानिकारक मेडिकल सलाह देने का जोखिम
  • रेगुलेटरी वैक्यूम: AI-आधारित मेंटल हेल्थ इंटरवेंशन के लिए स्टैंडर्ड सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी
  • डेटा प्राइवेसी: AI मॉडल्स द्वारा संवेदनशील व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य डेटा के इस्तेमाल से जुड़े नैतिक सवाल

मुख्य शब्द: एल्गोरिद्मिक जवाबदेही · डिजिटल हेल्थ एथिक्स · रेगुलेटरी सेफ़गार्ड्स · AI सुरक्षा मानक · मानसिक स्वास्थ्य की वकालत

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साइंस (Science) जर्नल में रिपोर्ट के अनुसार, स्टैनफोर्ड मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने एक नेजल स्प्रे वैक्सीन (nasal spray vaccine) विकसित की है, जो फ्लू

चर्चा में क्यों: साइंस (Science) जर्नल में रिपोर्ट के अनुसार, स्टैनफोर्ड मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने एक नेजल स्प्रे वैक्सीन (nasal spray vaccine) विकसित की है, जो फ्लू, कोविड-19 (Covid-19) और एलर्जी के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है।

इस वैक्सीन का परीक्षण चूहों पर किया गया और इसने कई महीनों तक विभिन्न वायरस, बैक्टीरिया और एलर्जी पैदा करने वाले कारकों के खिलाफ फेफड़ों की व्यापक सुरक्षा प्रदर्शित की। इसके वितरण का तरीका नेज़ल स्प्रे (nasal spray) है, जिसे हर साल लगने वाले कई इंजेक्शनों के विकल्प के रूप में तैयार किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकStanford Medicine के वैज्ञानिकों ने श्वसन संक्रमण (respiratory infections) के लिए एक नेज़ल स्प्रे वैक्सीन (nasal spray vaccine) विकसित की है।
  • तथ्यइस वैक्सीन ने चूहों में वायरस, बैक्टीरिया और एलर्जी ट्रिगर्स (allergy triggers) के खिलाफ व्यापक सुरक्षा दिखाई।
  • विज्ञान-तकनीकयह स्टडी (study) जर्नल *Science* में प्रकाशित हुई थी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में मौसमी और महामारी संबंधी श्वसन संक्रमणों की चुनौतियों के समाधान में 'यूनिवर्सल वैक्सीन प्लेटफॉर्म' (सार्वभौमिक वैक्सीन प्लेटफॉर्म) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: नेज़ल स्प्रे डिलीवरी से कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और बार-बार सुई के इस्तेमाल की ज़रूरत कम हो जाती है
  • पैथोजन की व्यापकता: ब्रॉड-स्पेक्ट्रम प्रोटेक्शन वायरस के तेज़ी से होने वाले म्यूटेशन और मल्टी-पैथोजन आउटब्रेक की चुनौती से निपटता है
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सुलभता: यूनिवर्सल वैक्सीन से क्रोनिक एलर्जी मैनेजमेंट और श्वसन स्वास्थ्य के लिए इम्यूनाइजेशन शेड्यूल को आसान बनाया जा सकता है

मुख्य शब्द: यूनिवर्सल वैक्सीन · श्वसन संबंधी संक्रमण · बायोटेक्नोलॉजी · सार्वजनिक स्वास्थ्य · इम्यूनोलॉजी

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

NASA और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के वेडेल सी (Weddell Sea) से समुद्री जल के नमूने एकत्र किए हैं

चर्चा में क्यों: NASA और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के वेडेल सी (Weddell Sea) से समुद्री जल के नमूने एकत्र किए हैं। इसका उद्देश्य यूरोपा और एन्सेलाडस जैसे बर्फीले चंद्रमाओं पर स्थित सतह के नीचे के महासागरों के व्यवहार का अध्ययन और सिमुलेशन करना है।

NASA और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिका के वेडेल सागर (Weddell Sea) से समुद्री जल का नमूना एकत्र किया है। इस अध्ययन का उद्देश्य 'सिम्युलेटर ऑफ ओशन वर्ल्ड क्रायोवोल्केनिज्म' (Simulator of Ocean World Cryovolcanism) का उपयोग करके कृत्रिम अंतरिक्ष स्थितियों में कार्बनिक यौगिकों और लवणों का विश्लेषण करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकवेडेल सी (Weddell Sea): अंटार्कटिका में स्थित एक सागर जिसका उपयोग NASA द्वारा सब-सरफेस ओशन डायनेमिक्स (subsurface ocean dynamics) के अध्ययन के लिए किया जाता है।
  • विज्ञान-तकनीकयूरोपा, एन्सेलाडस और प्लूटो: बर्फीले पिंड (Icy bodies) जिनके सब-सरफेस ओशन (subsurface oceans) को अंटार्कटिक समुद्री जल का उपयोग करके मॉडल किया जा रहा है।
  • विज्ञान-तकनीकओशन वर्ल्ड क्रायोवोल्केनिज्म (Ocean World Cryovolcanism) सिम्युलेटर: एक लैबोरेटरी डिवाइस जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि ओशन से वैक्यूम (vacuum) में परिवर्तन के दौरान मटेरियल में क्या बदलाव आते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अंटार्कटिक महासागरों जैसे पृथ्वी के चरम वातावरण का अध्ययन खगोल-जीवविज्ञान (astrobiology) की प्रगति और अलौकिक जीवन की खोज में किस प्रकार योगदान देता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • एनालॉग रिसर्च: अन्य ग्रहों के सतह के नीचे के महासागरों में रासायनिक बदलावों को समझने के लिए पृथ्वी के क्रायोस्फेरिक वातावरण का उपयोग
  • तकनीकी छलांग: वैक्यूम स्थितियों में ऑर्गेनिक कंपाउंड की स्थिरता पहचानने के लिए क्रायोवोलकैनिज्म सिमुलेशन को आगे बढ़ाना

मुख्य शब्द: एस्ट्रोबायोलॉजी · क्रायोवोलकनिज्म · एनालॉग रिसर्च · सतह के नीचे के महासागर · ऑर्गेनिक कंपाउंड्स

केरल स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड और CSIR-NIIST ने सामुदायिक ज्ञान की सुरक्षा के लिए एक पारंपरिक ज्ञान डॉकेटिंग सिस्टम (Traditional Knowledge Docketing System

चर्चा में क्यों: केरल स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड और CSIR-NIIST ने सामुदायिक ज्ञान की सुरक्षा के लिए एक पारंपरिक ज्ञान डॉकेटिंग सिस्टम (Traditional Knowledge Docketing System - TKDS) वाली इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) नीति का मसौदा प्रस्तावित किया है।

केरल स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड (KSBB) और CSIR-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी इस नीति को प्रस्तावित करने वाली प्राथमिक संस्थाएं हैं। इस ड्राफ्ट में सामुदायिक ज्ञान को प्रलेखित करने और 'नॉलेज इकोनॉमी' (knowledge economy) ढांचे के भीतर 'IP कमर्शियलाइजेशन' (IP commercialisation) को बढ़ावा देने के लिए एक TKDS शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाKSBB: केरल स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड (Kerala State Biodiversity Board) वह संस्था है जो IPR पॉलिसी में बदलाव का प्रस्ताव दे रही है।
  • विज्ञान-तकनीकTKDS: Traditional Knowledge Docketing System का प्रस्ताव सामुदायिक ज्ञान (community-held knowledge) को डॉक्यूमेंट करने के लिए दिया गया है।
  • तथ्यड्राफ्ट पॉलिसी 23 फरवरी तक पब्लिक फीडबैक के लिए खुली है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में स्वदेशी बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और जैव-चोरी (बायो-पायरेसी) को रोकने में पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण तंत्र के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • कानूनी सुरक्षा: समुदाय के पास मौजूद जैविक और सांस्कृतिक ज्ञान के अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकना
  • आर्थिक समावेश: 'IP कमर्शियलाइजेशन' को बढ़ावा देने और पारंपरिक ज्ञान धारकों के अधिकारों के बीच संतुलन
  • संस्थागत ढांचा: स्थानीय विरासत के दस्तावेजीकरण और सुरक्षा में राज्य जैव विविधता बोर्ड की भूमिका

मुख्य शब्द: बौद्धिक संपदा अधिकार · पारंपरिक ज्ञान · बायो-पायरेसी · नॉलेज इकोनॉमी · सामुदायिक अधिकार

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संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने भारत में आयोजित एक वैश्विक AI समिट में चेतावनी दी कि AI का विकास जिम्मेदारी से नियंत्रित होना चाहिए

चर्चा में क्यों: संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने भारत में आयोजित एक वैश्विक AI समिट में चेतावनी दी कि AI का विकास जिम्मेदारी से नियंत्रित होना चाहिए, न कि केवल कुछ अरबपतियों के समूह द्वारा।

संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रमुख ने भारत में आयोजित एक वैश्विक AI शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने एक ऐसे गवर्नेंस फ्रेमवर्क (governance framework) की वकालत की जो यह सुनिश्चित करे कि AI का लाभ कुछ निजी संस्थाओं के बजाय सामूहिक रूप से मानवता को मिले।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पदएंटोनियो गुटेरेस वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी-जनरल हैं।
  • स्थानग्लोबल AI समिट की मेजबानी भारत ने की।
  • तथ्यUN प्रमुख ने जोर दिया कि AI का भविष्य 'कुछ अरबपतियों की सनक' (whims of a few billionaires) द्वारा नियंत्रित नहीं होना चाहिए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को विनियमित करने और निजी संस्थाओं द्वारा प्रौद्योगिकी के एकाधिकार को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय बहुपक्षीय शासन ढाँचों की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

  • डेमोक्रेटिक डेफिसिट: ग्लोबल AI सेफ्टी स्टैंडर्ड्स में निजी कॉर्पोरेट हितों द्वारा सार्वजनिक हित पर हावी होने का जोखिम
  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: अलग-अलग अधिकार क्षेत्रों और संप्रभु सीमाओं में एक समान AI एथिक्स लागू करने में कठिनाई
  • डिजिटल डिवाइड: AI से होने वाली संपत्ति की एकाग्रता वैश्विक आर्थिक असमानता को और बढ़ा सकती है

मुख्य शब्द: बहुपक्षवाद · एल्गोरिद्मिक गवर्नेंस · तकनीकी संप्रभुता · डिजिटल एथिक्स · जनहित

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गार्टनर (Gartner) ने अनुमान लगाया है कि 2026 तक वैश्विक AI खर्च 2.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा

चर्चा में क्यों: गार्टनर (Gartner) ने अनुमान लगाया है कि 2026 तक वैश्विक AI खर्च 2.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर में निजी और कॉर्पोरेट निवेश में भारी उछाल को दर्शाता है।

गार्टनर (Gartner) के अनुमान के अनुसार, वैश्विक AI खर्च 2026 तक 2.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो 2025 की तुलना में 44% की वृद्धि है। 2013 से अब तक AI पर 1.6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, जिसमें अमेरिका का वैश्विक खर्च में 62% हिस्सा है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यगार्टनर (Gartner) के अनुसार, वैश्विक AI खर्च 2026 तक $2.5 ट्रिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
  • तथ्यदुनिया भर में AI पर होने वाले खर्च में US की हिस्सेदारी 62% के साथ सबसे अधिक है।
  • तथ्य2013 से अब तक AI पर $1.6 ट्रिलियन से अधिक खर्च किए गए हैं।
  • विज्ञान-तकनीकइन्वेस्टमेंट के मुख्य क्षेत्रों में डेटा सेंटर, साइबर सिक्योरिटी और मशीन लर्निंग एवं डेटा साइंस के प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) में निजी निवेश के तीव्र विस्तार का वैश्विक आर्थिक संरचनाओं पर पड़ने वाले प्रभावों और इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय विनियामक ढाँचों की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

  • मार्केट कंसंट्रेशन: AI इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में अमेरिकी नेतृत्व वाली प्राइवेट कैपिटल और वेंचर कैपिटल का दबदबा
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: डेटा सेंटर और स्पेशलाइज्ड हार्डवेयर की भारी मांग से सप्लाई चेन पर दबाव
  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: अलग-अलग वैश्विक इन्वेस्टमेंट ज्यूरिसडिक्शन में AI सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को एक समान बनाने की चुनौतियां

मुख्य शब्द: पूंजी प्रधान · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · वेंचर कैपिटल · मशीन लर्निंग · बाज़ार में एकाग्रता

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बिल गेट्स और Nvidia के जेन्सेन हुआग (Jensen Huang) आयोजन के दौरान हुई संगठनात्मक कमियों और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) से हट गए

चर्चा में क्यों: बिल गेट्स और Nvidia के जेन्सेन हुआग (Jensen Huang) आयोजन के दौरान हुई संगठनात्मक कमियों और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) से हट गए।

AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) में गूगल (Google), OpenAI और एंथ्रोपिक (Anthropic) के नेतृत्व द्वारा मुख्य भाषण दिए गए। अडानी ग्रुप, माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और योट्टा (Yotta) द्वारा महत्वपूर्ण निवेश के वादे किए गए।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • पदसुंदर पिचाई: Google के CEO।
  • पदसैम ऑल्टमैन: OpenAI के CEO।
  • पदडारियो अमोदेई: Anthropic के CEO।
  • तथ्यअडानी ग्रुप, माइक्रोसॉफ्ट और योट्टा से निवेश के वादे हासिल किए गए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में तीव्र तकनीकी अंगीकरण के साथ सुरक्षा और नैतिक चिंताओं के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के लिए एक सुदृढ़ विनियामक ढांचा तैयार करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • सुरक्षा-इनोवेशन ट्रेड-ऑफ: एआई की तेज़ तैनाती और बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियमों और एथिकल गार्डरेल्स के बीच संतुलन
  • पब्लिक-प्राइवेट घर्षण: बड़े पैमाने पर होने वाले पब्लिक-प्राइवेट टेक्नोलॉजी समिट में लॉजिस्टिकल और संगठनात्मक बाधाओं को दूर करना
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधाएं: हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल टेक्नोलॉजी इवेंट्स के दौरान शहरी लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों को मैनेज करना

मुख्य शब्द: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · डेटा एथिक्स · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · तकनीकी संप्रभुता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' को संबोधित किया

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ग्लोबल साउथ (Global South) में समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए AI के लोकतंत्रीकरण (democratization) की वकालत की।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit) में इमैनुएल मैक्रों, लुइज़ इनासियो लुला दा सिल्वा और शेरिंग टोबगे जैसे विश्व नेताओं ने शिरकत की। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विशाल युवा आबादी और तकनीकी प्रतिभा (tech talent pool) को AI विकास और इसके व्यापक उपयोग के लिए प्रमुख चालक के रूप में रेखांकित किया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • स्थानभारत मंडपम: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit) के लिए आयोजन स्थल।
  • तथ्यभारत का AI नेतृत्व इसकी बड़ी युवा आबादी और टेक टैलेंट पूल (tech talent pool) के कारण है।
  • पदइमैनुएल मैक्रों, लुइज़ इनासियो लुला दा सिल्वा और शेरिंग टोबगे विश्व नेताओं के रूप में शिखर सम्मेलन में शामिल हुए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ग्लोबल साउथ के लिए समावेशी विकास को बढ़ावा देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की क्षमता और इस तकनीक के लोकतंत्रीकरण में भारत की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • डिजिटल डिवाइड: विकसित अर्थव्यवस्थाओं में AI के केंद्रीकरण का जोखिम बनाम ग्लोबल साउथ देशों के लिए इसकी पहुंच
  • AI का लोकतंत्रीकरण: तेज़ी से होती तकनीकी अपनावट और नैतिक सुरक्षा उपायों व डेटा संप्रभुता के बीच संतुलन
  • ह्यूमन कैपिटल: ग्लोबल AI इनोवेशन और डिप्लॉयमेंट में आगे रहने के लिए भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाना

मुख्य शब्द: AI का लोकतंत्रीकरण · ग्लोबल साउथ · डिजिटल इन्क्लूजन · तकनीकी संप्रभुता · डेमोग्राफिक डिविडेंड

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अर्थव्यवस्था · कृषि · पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी · आपदा प्रबंधन · आंतरिक सुरक्षा

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