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भाग I · स्था. 11.2025 
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अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के अर्थव्यवस्था भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 2,305 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे) (511) · उद्योग, निवेश एवं MSME (471) · पूंजी बाज़ार एवं SEBI (298) · मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग (297) · विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतक (278) · राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST) (189) · रोज़गार एवं समावेशी विकास (142) · बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDI (119)

GS3अर्थव्यवस्था › राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)मेन्स

7वें राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) के अध्यक्ष के.एन

चर्चा में क्यों: 7वें राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) के अध्यक्ष के.एन. हरिलाल ने तर्क दिया कि GST व्यवस्था और FRBM एक्ट ने राज्य सरकारों की वित्तीय स्वायत्तता (Financial Autonomy) को कम कर दिया है।

7वें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के.एन. हरिलाल ने रेखांकित किया कि केंद्र सरकार GST व्यवस्था के तहत एकतरफा रूप से अप्रत्यक्ष कर निर्धारित करती है। उन्होंने उल्लेख किया कि GST लागू होने के बावजूद इससे केंद्र का राजस्व नहीं बढ़ा है, जो एक संभावित राजकोषीय संकट (Fiscal Crisis) का संकेत देता है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • अधिनियम / विधेयकFiscal Responsibility and Budget Management (FRBM) Act: राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया कानून।
  • तथ्यGST: वस्तुओं और सेवाओं की सप्लाई पर एक डेस्टिनेशन-आधारित टैक्स (destination-based tax)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में वर्तमान वस्तु एवं सेवा कर (GST) ढांचे और राजकोषीय विधानों का राज्य सरकारों की राजकोषीय संघवाद और वित्तीय स्वायत्तता पर पड़ने वाले प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • राजकोषीय स्वायत्तता में कमी: अप्रत्यक्ष टैक्स रेट का केंद्रीकृत निर्धारण राज्य स्तर पर राजस्व उत्पादन को सीमित कर रहा है
  • विधायी बाधाएं: राजकोषीय घाटा लक्ष्यों के मुकाबले राज्यों के खर्च की फ्लेक्सिबिलिटी पर FRBM एक्ट का असर
  • राजस्व में ठहराव: संरचनात्मक सुधारों के बावजूद सेंट्रल GST राजस्व में महत्वपूर्ण वृद्धि की कमी

मुख्य शब्द: राजकोषीय संघवाद · वित्तीय स्वायत्तता · रेवेन्यू शेयरिंग · राजकोषीय अनुशासन · GST व्यवस्था

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स

बार्कलेज (Barclays) और इक्विरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities) ने भविष्यवाणी की है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके बाद हुए जवाबी हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं

चर्चा में क्यों: बार्कलेज (Barclays) और इक्विरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities) ने भविष्यवाणी की है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके बाद हुए जवाबी हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

बार्कलेज (Barclays) का अनुमान है कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) के कारण ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इक्विरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities) ने उल्लेख किया है कि ऐसी घटनाओं के कारण कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी की अवधि अक्सर अनिश्चित होती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यब्रेंट क्रूड (Brent Crude): वैश्विक तेल कीमतों के लिए एक प्रमुख बेंचमार्क।
  • तथ्यबार्कलेज (Barclays): तेल की कीमतों के लक्ष्यों का अनुमान लगाने वाला वित्तीय संस्थान।
  • तथ्यइक्विरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities): प्राइस ड्यूरेशन पर टिप्पणी करने वाली एनालिस्ट फर्म।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक अस्थिरता के वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारत के राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति के दबाव पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय दबाव: ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत से राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है और बुनियादी ढांचे के लिए उपलब्ध पूंजी कम हो रही है
  • महंगाई का दबाव: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का घरेलू ईंधन और ट्रांसपोर्ट लागत पर सीधा असर, जिससे CPI प्रभावित हो रहा है
  • सप्लाई चेन की कमजोरी: मध्य पूर्वी तेल पर भारी निर्भरता भारत को क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवधानों के प्रति संवेदनशील बनाती है

मुख्य शब्द: भू-राजनीतिक जोखिम · राजकोषीय घाटा · आयात महंगाई · ऊर्जा सुरक्षा · ब्रेंट क्रूड

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

कैबिनेट ने सरकार की विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetisation) रणनीति को समर्थन देने के लिए इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL) के IPO प्लान को मंजूरी दी है

चर्चा में क्यों: कैबिनेट ने सरकार की विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetisation) रणनीति को समर्थन देने के लिए इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL) के IPO प्लान को मंजूरी दी है।

IIFCL एक ऐसी कंपनी है जो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure projects) के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करती है। डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने इसके IPO के लिए मंजूरी दी है, जिससे प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग सरकारी विनिवेश (Disinvestment) के लिए किया जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाDIPAM: डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (Department of Investment and Public Asset Management) सरकारी विनिवेश (disinvestment) की निगरानी करता है।
  • तथ्यIIFCL: यह विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • तथ्यIPO की कार्यवाही (Proceeds): इसे सरकार की विनिवेश (disinvestment) और एसेट मोनेटाइजेशन (asset monetisation) रणनीति के लिए आवंटित किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सरकार के परिसंपत्ति मुद्रीकरण (एसेट मोनेटाइजेशन) लक्ष्यों और बुनियादी ढांचा विकास के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सार्वजनिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचा वित्तपोषण संस्थानों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय रणनीति: सार्वजनिक संपत्तियों के परिसमापन और निरंतर दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी: सार्वजनिक क्षेत्र के फाइनेंस में फंडिंग बेस को डाइवर्सिफाई करने और ऑपरेशनल ट्रांसपेरेंसी सुधारने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: एसेट मोनेटाइजेशन · विनिवेश · कैपिटल मार्केट्स · इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

फरवरी 2026 में FPI इनफ्लो (FPI inflows) 22,615 करोड़ रुपये के साथ 17 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया

चर्चा में क्यों: फरवरी 2026 में FPI इनफ्लो (FPI inflows) 22,615 करोड़ रुपये के साथ 17 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण भारत-U.एस. के बीच हुआ अंतरिम व्यापार समझौता और कंपनियों के मजबूत मुनाफे रहे।

फरवरी 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया। यह निवेश 2025 में भारतीय इक्विटी से ₹1.66 लाख करोड़ के शुद्ध बहिर्वाह (net outflow) के बाद आया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यफरवरी 2026 में FPI इनफ्लो (FPI inflow) ₹22,615 करोड़ तक पहुंच गया, जो सितंबर 2024 के बाद से सबसे अधिक है।
  • तथ्यवर्ष 2025 में भारत में इक्विटी (Equities) से ₹1.66 लाख करोड़ का नेट आउटफ्लो (Net Outflow) देखा गया।
  • तथ्यFPI की दिलचस्पी विशेष रूप से फाइनेंशियल और कैपिटल गुड्स सेक्टर में देखी गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय पूंजी बाजारों में प्रत्यक्ष विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) प्रवाह की अस्थिरता को प्रभावित करने वाले कारकों और व्यापक व्यापक आर्थिक स्थिरता पर उनके प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।

  • बाहरी निर्भरता: ग्लोबल लिक्विडिटी शिफ्ट और जियोपॉलिटिकल ट्रेड डील्स के प्रति घरेलू इक्विटी मार्केट की संवेदनशीलता
  • सेक्टरल कंसंट्रेशन: फाइनेंशियल और कैपिटल गुड्स में केंद्रित FPI निवेश का मार्केट वोलाटिलिटी पर असर

मुख्य शब्द: पूंजी प्रवाह · मार्केट में उतार-चढ़ाव · फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट · मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी · व्यापार नीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए गुजरात में माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Technology) की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्ट और पैकेजिंग यूनिट का उद्घाटन किया

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए गुजरात में माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Technology) की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्ट और पैकेजिंग यूनिट का उद्घाटन किया।

यह सुविधा उन्नत सेमीकंडक्टर वेफर्स (semiconductor wafers) को तैयार मेमोरी और स्टोरेज उत्पादों में बदलने के लिए बनाई गई है। भारत के सेमीकंडक्टर बाजार के 2030 तक 110 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यभारत का सेमीकंडक्टर मार्केट प्रोजेक्शन: 2030 तक $110 बिलियन।
  • स्थानMicron Technology की असेंबली यूनिट गुजरात में स्थित है।
  • विज्ञान-तकनीकयह फैसिलिटी Semiconductor Assembly, Test और Packaging (ATP) पर केंद्रित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण के संदर्भ में घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के रणनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • सप्लाई चेन रेजिलिएंस: AI और क्रिटिकल मिनरल एप्लिकेशंस के लिए विदेशी चिपमेकर्स पर निर्भरता कम करना
  • इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: वेफर असेंबली से हाई-वैल्यू मेमोरी और स्टोरेज प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम · सप्लाई चेन रेजिलिएंस · तकनीकी संप्रभुता · रणनीतिक स्वायत्तता · वैल्यू एडिशन

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स

केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) ने थर्मल पावर खरीद लागत में कमी के कारण बिजली उपभोक्ताओं को ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) की पहली बार रिफंड की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) ने थर्मल पावर खरीद लागत में कमी के कारण बिजली उपभोक्ताओं को ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) की पहली बार रिफंड की घोषणा की है।

KSEB मासिक बिलिंग वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 2 पैसे और द्वि-मासिक (bi-monthly) बिलिंग वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 1 पैसा वापस लौटाएगा। यह रिफंड मार्च के बिलों के माध्यम से प्रोसेस किया जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यमंथली बिलिंग वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 2 पैसे का रिफंड मिलता है।
  • तथ्यBi-monthly बिलिंग वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 1 पैसे का रिफंड मिलता है।
  • संस्थाKSEB (Kerala State Electricity Board) केरल में बिजली वितरण का प्रबंधन करने वाली राज्य संस्था है।
  • तथ्यरिफंड थर्मल पावर खरीद लागत में कमी के कारण है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राज्य स्तर पर बिजली शुल्क संरचनाओं पर ईंधन की बदलती कीमतों के प्रभाव और उपभोक्ता कल्याण सुनिश्चित करने में सार्वजनिक उपयोगिता बोर्डों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • राजकोषीय पारदर्शिता: लागत की बचत को अंतिम उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाने का मैकेनिज्म
  • सब्सिडी की स्थिति: थर्मल पावर खरीद लागत और सस्ती बिजली तक पहुंच के बीच संतुलन
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: टैरिफ एडजस्टमेंट में स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन्स की भूमिका

मुख्य शब्द: फ्यूल सरचार्ज · थर्मल पावर · सार्वजनिक उपयोगिता · उपभोक्ता कल्याण · टैरिफ स्ट्रक्चर

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासप्रीलिम्स + मेन्स

केरल सरकार ने 'अश्योर्ड पेंशन स्कीम' (Assured Pension Scheme

चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने 'अश्योर्ड पेंशन स्कीम' (Assured Pension Scheme - APS) को 1 अप्रैल, 2026 से शुरू करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत नए कर्मचारियों को APS और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में से किसी एक को चुनने का विकल्प मिलेगा।

यह योजना 30 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति पर कर्मचारी के मूल वेतन (Basic Pay) के अधिकतम 50% पेंशन का प्रावधान करती है। यह उन कर्मचारियों पर लागू होती है जिनकी नियुक्ति 1 अप्रैल, 2026 के बाद हुई है, और वे APS या NPS में से किसी एक को चुनने के लिए पात्र होंगे।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यAPS अधिकतम पेंशन: बेसिक पे का 50%।
  • तथ्यAPS के लिए आवश्यक सर्विस पीरियड: 30 साल।
  • तथ्यपात्रता: 1 अप्रैल, 2026 के बाद नियुक्त कर्मचारी।
  • तथ्यकर्मचारी APS और National Pension System (NPS) के बीच चुनाव कर सकते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सुनिश्चित पेंशन योजना (Assured Pension Scheme) बनाम राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) जैसी परिभाषित अंशदान प्रणाली (Defined Contribution System) को लागू करने के राजकोषीय निहितार्थों और प्रशासनिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय स्थिरता: गारंटीड पेंशन देनदारियों पर राज्य का दीर्घकालिक खर्च बनाम मार्केट-लिंक्ड NPS
  • कर्मचारी कल्याण: राज्य के बजट की सीमाओं के साथ नौकरी की सुरक्षा और रिटायरमेंट की गरिमा के बीच संतुलन
  • पॉलिसी चॉइस: पब्लिक सर्विस में डिफाइंड बेनिफिट स्कीम्स और डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन मॉडल्स के बीच ट्रेड-ऑफ

मुख्य शब्द: राजकोषीय स्थिरता · डिफाइंड बेनिफिट स्कीम · लोक सेवा · पेंशन सुधार · कर्मचारी कल्याण

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासप्रीलिम्स + मेन्स

DFS डायरेक्टर मनसा गंगोत्री काटा ने तेलंगाना के बैंकों से 'नेशनल स्ट्रैटेजी फॉर फाइनेंशियल इंक्लूजन 2025-30' के तहत 'लास्ट-माइल एक्सेस' (अंतिम छोर तक पहुंच) और महिलाओं के वित्तीय समावेशन को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है

चर्चा में क्यों: DFS डायरेक्टर मनसा गंगोत्री काटा ने तेलंगाना के बैंकों से 'नेशनल स्ट्रैटेजी फॉर फाइनेंशियल इंक्लूजन 2025-30' के तहत 'लास्ट-माइल एक्सेस' (अंतिम छोर तक पहुंच) और महिलाओं के वित्तीय समावेशन को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय रणनीति 2025–30 का उद्देश्य अंतिम छोर तक पहुंच (last-mile access) और महिलाओं के वित्तीय समावेशन में सुधार करना है। इसकी सिफारिशों में यह सुनिश्चित करना शामिल है कि बैंक कॉरेस्पोंडेंट्स (Bank Correspondents) में कम से कम 30% महिलाएं हों और DBT लिंकेज तथा PMJDY खातों के उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • योजनाNational Strategy for Financial Inclusion 2025–30: लास्ट-माइल एक्सेस और महिलाओं के फाइनेंशियल इन्क्लूजन (Financial Inclusion) को बेहतर बनाने के लिए एक फ्रेमवर्क।
  • तथ्यप्रस्तावित लक्ष्य: कम से कम 30% बैंक कॉरेस्पॉन्डेंट्स (Bank Correspondents) महिलाएं होनी चाहिए।
  • तथ्यDBT (Direct Benefit Transfer): एक मैकेनिज्म जिसके जरिए सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति 2025-30 के उद्देश्यों की प्राप्ति में बैंक प्रतिनिधियों (बैंक कॉरेस्पोंडेंट्स) की भूमिका और लैंगिक-विशिष्ट रणनीतियों के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: विकेंद्रीकृत बैंकिंग एजेंटों के जरिए शहरी-ग्रामीण अंतर को कम करना
  • जेंडर-केंद्रित समावेश: फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम में महिलाओं की भागीदारी के सामाजिक-सांस्कृतिक अवरोधों को दूर करना
  • MSME क्रेडिट फ्लो: जमीनी स्तर पर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए MSME सेक्टर में लिक्विडिटी की कमी को दूर करना

मुख्य शब्द: वित्तीय समावेशन · लास्ट-माइल एक्सेस · डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर · प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग · बैंक कॉरेस्पॉडेंट्स

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुडुचेरी में ₹1,571 करोड़ की 74 परियोजनाओं की आधारशिला रखने वाले हैं

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुडुचेरी में ₹1,571 करोड़ की 74 परियोजनाओं की आधारशिला रखने वाले हैं। यह निर्णय केंद्र शासित प्रदेश (UT) को स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजना में शामिल किए जाने के बाद लिया गया है।

केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए SASCI योजना के तहत पुडुचेरी को शामिल करने की मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में शहरी सड़कें, ड्रेनेज नेटवर्क और एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone) शामिल हैं, जिसमें एक फार्मा पार्क, टेक्सटाइल पार्क, IT पार्क और IIT मद्रास का एक रिसर्च सेंटर होगा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनाSASCI: Special Assistance to States for Capital Investment स्कीम UTs/States को इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड एक्सेस करने की अनुमति देती है।
  • तथ्यपुडुचेरी में कुल प्रोजेक्ट वैल्यू: ₹1,571 करोड़।
  • स्थानपुडुचेरी: केंद्र शासित प्रदेश जिसे फार्मा पार्क और टेक्सटाइल पार्क सहित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स मिल रहे हैं।
  • संस्थाIIT मद्रास: नए स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (Special Economic Zone) के भीतर एक रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा।
मेन्स के लिए

प्रश्न: केंद्र शासित प्रदेशों में औद्योगिक विविधीकरण और आर्थिक विकास को गति देने में लक्षित बुनियादी ढांचा निवेश और विशेष सहायता योजनाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • इंडस्ट्रियल सिनर्जी: मल्टी-सेक्टरल इकोनॉमिक हब बनाने के लिए फार्मा, टेक्सटाइल और IT पार्क्स को एक साथ स्थापित करना
  • राजकोषीय संघवाद: केंद्र शासित प्रदेशों बनाम राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर गैप को कम करने में SASCI की भूमिका
  • अर्बन रेजिलिएंस: स्मार्ट सिटी टेनमेंट्स के साथ ड्रेनेज और सीवरेज नेटवर्क का एकीकरण

मुख्य शब्द: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · पूंजीगत निवेश · स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन · औद्योगिक विविधीकरण · अर्बन प्लानिंग

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स

NABARD ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए कर्नाटक में प्राथमिकता वाले क्षेत्र (Priority Sector) के लिए ₹4.99 लाख करोड़ की ऋण क्षमता का अनुमान लगाया है

चर्चा में क्यों: NABARD ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए कर्नाटक में प्राथमिकता वाले क्षेत्र (Priority Sector) के लिए ₹4.99 लाख करोड़ की ऋण क्षमता का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष के अनुमान से 12% अधिक है।

NABARD ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए कर्नाटक के लिए ₹4.99 लाख करोड़ की प्राथमिकता वाले क्षेत्र (Priority Sector) के ऋण की क्षमता का अनुमान लगाया है। इस अनुमान में कृषि ऋण, MSMEs, निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास और नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यFY 2026–27 के लिए कर्नाटक के लिए अनुमानित प्रायोरिटी सेक्टर क्रेडिट पोटेंशियल (Priority Sector Credit Potential): ₹4.99 लाख करोड़।
  • तथ्यकर्नाटक के लिए क्रेडिट पोटेंशियल (credit potential) में पिछले वर्ष की तुलना में 12% की अनुमानित वृद्धि।
  • तथ्यक्रेडिट पोटेंशियल (Credit Potential) में शामिल क्षेत्र: फार्म क्रेडिट, MSMEs, एक्सपोर्ट क्रेडिट, एजुकेशन, हाउसिंग और रिन्यूएबल एनर्जी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कर्नाटक जैसे कृषि प्रधान राज्यों में समावेशी आर्थिक विकास और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में प्राथमिकता वाले क्षेत्र के ऋण (प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग) के महत्व की चर्चा कीजिए।

  • क्रेडिट एक्सेसिबिलिटी: ग्रामीण कर्नाटक में MSMEs और छोटे किसानों के लिए फाइनेंसिंग गैप को कम करना
  • इंफ्रास्ट्रक्चर लिंकेज: उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को रिन्यूएबल एनर्जी क्रेडिट के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग · ग्रामीण ऋण · समावेशी विकास · वित्तीय समावेशन · MSME फाइनेंसिंग

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासप्रीलिम्स + मेन्स

महाराष्ट्र के श्रम मंत्री आकाश फंडकर ने घोषणा की कि केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Gig and Platform Workers) के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोड पेश किया है, ताकि उनके लाभों के लिए एक राष्ट्रीय बोर्ड स्थापित किया जा सके

चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र के श्रम मंत्री आकाश फंडकर ने घोषणा की कि केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Gig and Platform Workers) के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोड पेश किया है, ताकि उनके लाभों के लिए एक राष्ट्रीय बोर्ड स्थापित किया जा सके।

प्रस्तावित राष्ट्रीय बोर्ड गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा, बीमा और परिवार कल्याण लाभ प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य राजस्थान और कर्नाटक में वर्तमान में लागू राज्य-विशिष्ट कानूनों का स्थान लेना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यनेशनल बोर्ड स्वास्थ्य सेवा, बीमा और परिवार कल्याण लाभ प्रदान करेगा।
  • स्थानराजस्थान और कर्नाटक में वर्तमान में गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए राज्य-विशिष्ट कानून हैं।
  • पदआकाश फंडकर महाराष्ट्र के लेबर मिनिस्टर (Labour Minister) हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की विकसित होती अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: राज्य-विशिष्ट श्रम सुरक्षा और केंद्रीकृत नेशनल सोशल सिक्योरिटी कोड के बीच टकराव
  • इनक्लूजन गैप: प्लेटफॉर्म-आधारित 'गिग' इकोनॉमी में नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले फायदों की कमी को दूर करना

मुख्य शब्द: गिग इकोनॉमी · सामाजिक सुरक्षा · प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स · श्रम कल्याण · औपचारिकीकरण

आंध्र प्रदेश टाइटेनियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर भारत की निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से अपने बीच सैंड मिनरल (Beach Sand Mineral) भंडारों में रणनीतिक रूप से निवेश कर रहा है

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश टाइटेनियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर भारत की निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से अपने बीच सैंड मिनरल (Beach Sand Mineral) भंडारों में रणनीतिक रूप से निवेश कर रहा है।

आंध्र प्रदेश में भारत के दूसरे सबसे बड़े बीच सैंड मिनरल (Beach Sand Mineral - BSM) भंडार मौजूद हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य अपनी 1,053 किलोमीटर लंबी तटरेखा के साथ एक मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करना है, ताकि एयरोस्पेस, परमाणु ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे उद्योगों को आपूर्ति की जा सके।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यआंध्र प्रदेश में भारत में दूसरा सबसे बड़ा बीच सैंड मिनरल (Beach Sand Mineral) रिजर्व है।
  • स्थानआंध्र प्रदेश की तटरेखा की लंबाई 1,053 किलोमीटर है।
  • विज्ञान-तकनीकबीच सैंड मिनरल्स (Beach sand minerals - BSM) में टाइटेनियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (rare earth elements) शामिल हैं।
  • तथ्यक्रिटिकल मिनरल्स (Critical minerals) का उपयोग एयरोस्पेस, न्यूक्लियर फ्यूल और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजीज में किया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण के संदर्भ में महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति सुरक्षित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • सप्लाई चेन सुरक्षा: रेयर अर्थ एलिमेंट्स और टाइटेनियम के लिए चीन पर निर्भरता कम करना
  • इंडस्ट्रियल सिनर्जी: खनिज निष्कर्षण को हाई-वैल्यू एयरोस्पेस और न्यूक्लियर फ्यूल मैन्युफैक्चरिंग से जोड़ना
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: राज्य स्तर के खनिज निवेश को राष्ट्रीय रक्षा और क्लीन एनर्जी प्रोग्राम के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: महत्वपूर्ण खनिज · रणनीतिक स्वायत्तता · सप्लाई चेन रेजिलिएंस · दुर्लभ मृदा तत्व · घरेलू मैन्युफैक्चरिंग

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत को AI सुपरपावर के रूप में स्थापित करने के लिए अगले दो वर्षों में AI और डीप-टेक (deep-tech) में 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता की घोषणा की

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत को AI सुपरपावर के रूप में स्थापित करने के लिए अगले दो वर्षों में AI और डीप-टेक (deep-tech) में 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता की घोषणा की।

रिलायंस ग्रुप ने डेटा केंद्रों और बुनियादी ढांचे (infrastructure) के लिए 110 बिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं, अडानी ग्रुप ने 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित AI डेटा केंद्रों के लिए 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर देने का लक्ष्य रखा है। इस पहल के अंतर्गत IndiaAI मिशन और YUVAi जैसे कार्यक्रमों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यरिलायंस ग्रुप की प्रतिबद्धता: डेटा सेंटर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए US$110 बिलियन।
  • तथ्यअडानी ग्रुप की प्रतिबद्धता: 2035 तक रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले AI डेटा सेंटर्स के लिए US$100 बिलियन का निवेश।
  • योजनाIndiaAI मिशन और YUVAi भारत की AI महत्वाकांक्षाओं के लिए प्रमुख पहल हैं।
  • पदअश्विनी वैष्णव इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक एआई (AI) महाशक्ति बनने की अपनी महत्वाकांक्षाओं को बनाए रखने के लिए कार्यबल के कौशल पुनर्गठन (reskilling) के अंतराल को पाटने में भारत के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • स्किल मिसमैच: तेज़ी से होता AI एडॉप्शन बनाम मौजूदा वर्कफोर्स में डीप-टेक कॉम्पिटेंसी की कमी
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: AI डेटा सेंटर्स की भारी ऊर्जा मांग के लिए बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी की जरूरत
  • असमानता का जोखिम: AI आधारित GDP ग्रोथ से उच्च-कुशल क्षेत्रों को फायदा मिलने पर आर्थिक असमानता बढ़ने की संभावना

मुख्य शब्द: डीप-टेक · वर्कफोर्स रीस्किलिंग · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर · नवीकरणीय ऊर्जा · आर्थिक असमानता

बिहार विधानसभा ने सूक्ष्म ऋण (microloans) को विनियमित करने और जबरन वसूली की कार्रवाई को रोकने के लिए 'बिहार माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (रेगुलेशन ऑफ मनी लेंडिंग एंड प्रिवेंशन ऑफ कोअर्सिव एक्शन्स) बिल, 2026' पारित किया है

चर्चा में क्यों: बिहार विधानसभा ने सूक्ष्म ऋण (microloans) को विनियमित करने और जबरन वसूली की कार्रवाई को रोकने के लिए 'बिहार माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (रेगुलेशन ऑफ मनी लेंडिंग एंड प्रिवेंशन ऑफ कोअर्सिव एक्शन्स) बिल, 2026' पारित किया है।

यह विधेयक उधारकर्ताओं को दो से अधिक ऋणदाताओं (lenders) से ऋण लेने पर रोक लगाता है। सूक्ष्म वित्त (microfinance) उद्योग में बिहार की हिस्सेदारी 15% है। IIFL Capital Services ने इस विधेयक के लागू होने के बाद डिफ़ॉल्ट (delinquencies) की दर में वृद्धि होने की भविष्यवाणी की है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यबिहार माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री का 15% हिस्सा कवर करता है।
  • अधिनियम / विधेयकबिहार माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (रेगुलेशन ऑफ मनी लेंडिंग एंड प्रिवेंशन ऑफ कोअर्सिव एक्शन्स) बिल, 2026।
  • तथ्ययह बिल उधारकर्ताओं (borrowers) को दो से अधिक ऋणदाताओं (lenders) से ऋण लेने पर रोक लगाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में सूक्ष्म वित्त (माइक्रोफाइनेंस) क्षेत्र में उधारकर्ताओं को दंडात्मक ऋण प्रथाओं से बचाने और इस क्षेत्र की तरलता एवं पुनर्भुगतान स्वास्थ्य को बनाए रखने के बीच निहित समझौतों (trade-offs) का विश्लेषण कीजिए।

  • क्रेडिट एक्सेस में बाधा: कम आय वाले उधारकर्ताओं के लिए क्रेडिट उपलब्धता कम होने का जोखिम
  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: रेगुलेटेड NBFCs और अनरेगुलेटेड इनफॉर्मल लेंडर्स के बीच अंतर करना मुश्किल
  • डिफ़ॉल्ट रिस्क: नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ने की संभावना जो माइक्रो-लेंडिंग मॉडल की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है

मुख्य शब्द: माइक्रोफाइनेंस · दबावपूर्ण कार्रवाई · क्रेडिट रेगुलेशन · डिफ़ॉल्ट दरें · वित्तीय समावेशन

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इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) की रिपोर्ट के अनुसार

चर्चा में क्यों: इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) की रिपोर्ट के अनुसार, पूंजीगत व्यय के सुपर साइकल (Capital expenditure super cycles) के लिए सरकारों द्वारा भारी मात्रा में कर्ज लेने के कारण, 2025 में वैश्विक कर्ज (Global debt) बढ़कर 348 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

वर्ष 2025 में वैश्विक ऋण (Global debt) में लगभग 29 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई। इस उछाल का मुख्य कारण संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और यूरो ज़ोन से हुआ सरकारी उधार था, जो इस वृद्धि का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा था।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाइंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF): वह संस्था जिसने रिकॉर्ड वैश्विक कर्ज के आंकड़े रिपोर्ट किए।
  • तथ्य2025 में ग्लोबल डेट (Global debt) रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचकर US$348 ट्रिलियन हो गया।
  • तथ्यवर्ष 2025 के दौरान वैश्विक कर्ज (global debt) में US$29 ट्रिलियन की बढ़ोतरी हुई।
  • तथ्यअमेरिका, चीन और यूरो ज़ोन से सरकारी उधार ने कर्ज में हुई वृद्धि का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा कवर किया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक ऋण स्थिरता पर 'पूंजीगत व्यय सुपर साइकिल' (capital expenditure super cycles) के निहितार्थों और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए उच्च सरकारी ऋण से जुड़े जोखिमों का विश्लेषण कीजिए।

  • कर्ज की स्थिरता: इंफ्रास्ट्रक्चर और AI के लिए तेज़ी से उधार लेने के कारण बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में फिस्कल इनसॉल्वेंसी का जोखिम
  • इन्वेस्टमेंट-डेट नेक्सस: क्लाइमेट अडैप्टेशन से होने वाले लंबे समय के विकास और तत्काल फिस्कल प्रेशर के बीच ट्रेड-ऑफ
  • भू-राजनीतिक ऋण गतिशीलता: वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर अमेरिका और चीन के उधार लेने के पैटर्न का प्रभाव

मुख्य शब्द: ऋण स्थिरता · पूंजीगत व्यय · राजकोषीय नीति · सुपर साइकिल्स · वैश्विक वित्तीय स्थिरता

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तेलंगाना सरकार, IDBI Capital और DMIL द्वारा किए जा रहे वित्तीय और तकनीकी ऑडिट के लंबित होने के दौरान

चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार, IDBI Capital और DMIL द्वारा किए जा रहे वित्तीय और तकनीकी ऑडिट के लंबित होने के दौरान, L&T Metro Rail Hyderabad (L&TMRH) से हैदराबाद मेट्रो रेल (HMR) फेज-I को खरीदने (buyout) पर विचार कर रही है।

तेलंगाना सरकार ने HMR फेज-I के ऑडिट के लिए IDBI Capital और दिल्ली मेट्रो इंटरनेशनल लिमिटेड (DMIL) को नियुक्त किया है। ऑडिट के परिणाम यह निर्धारित करेंगे कि 162-किमी वाले मेट्रो फेज-II के लिए जॉइंट वेंचर (Joint Venture) की सुविधा हेतु कैबिनेट सब-कमेटी के समक्ष अंतिम बायआउट फिगर (buyout figure) प्रस्तुत किया जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाDMIL: दिल्ली मेट्रो इंटरनेशनल लिमिटेड, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की एक कंसल्टेंसी आर्म (consultancy arm)।
  • तथ्यHMR Phase II: हैदराबाद में आठ कॉरिडोर में फैलाए जाने वाले प्रस्तावित 162-km मेट्रो नेटवर्क का विस्तार।
  • स्थानहैदराबाद मेट्रो रेल (HMR): तेलंगाना में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) आधारित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को राज्य के स्वामित्व में परिवर्तित करने में आने वाली चुनौतियों और दीर्घकालिक शहरी गतिशीलता नियोजन (अर्बन मोबिलिटी प्लानिंग) पर इसके निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • वैल्यूएशन की जटिलता: PPP बायआउट के दौरान नॉन-टैंजिबल एसेट्स और ऑपरेशनल लायबिलिटी को मापना मुश्किल
  • राजकोषीय बाधा: फेज़ II विस्तार के लिए तत्काल बायआउट लागत और दीर्घकालिक कैपिटल एक्सपेंडिचर के बीच संतुलन
  • कॉन्ट्रैक्टुअल फ्रिक्शन: प्राइवेट संस्थाओं के साथ कन्सेशन एग्रीमेंट खत्म करने में कानूनी और वित्तीय बाधाएं

मुख्य शब्द: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट · अर्बन मोबिलिटी · राजकोषीय नीति · एसेट बायआउट

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केरल के बिजली मंत्री के

चर्चा में क्यों: केरल के बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी, कासरगोड के मयलाट्टी में राज्य की पहली बड़े पैमाने की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का उद्घाटन करने वाले हैं।

कासरकोड के मयलाट्टी में बीईएसएस (BESS) प्रोजेक्ट से प्रतिदिन 5 लाख यूनिट तक बिजली की आपूर्ति होने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट शाम के व्यस्त घंटों (peak hours) के दौरान उपयोग के लिए सोलर प्लांट्स से प्राप्त अतिरिक्त बिजली को स्टोर करेगा। इसका निर्माण JSW Neo Energy द्वारा केंद्र सरकार से प्राप्त वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding) के साथ किया जा रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • स्थानकेरल का पहला बड़े पैमाने का BESS, कसरगोड के मयल्टी में स्थित है।
  • तथ्यBESS फैसिलिटी को रोजाना 5 लाख यूनिट तक बिजली संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • संस्थाJSW नियो एनर्जी (Neo Energy) मायलाट्टी (Mylatti) BESS प्रोजेक्ट के लिए कंस्ट्रक्शन एंटिटी है।
  • योजनाइस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार से Viability Gap Funding (VGF) का समर्थन प्राप्त है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के विद्युत ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण से उत्पन्न होने वाली आंतरायिकता (intermittency) की चुनौतियों को दूर करने में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) किस प्रकार सहायक हो सकती है, चर्चा कीजिए।

  • ग्रिड स्टेबिलिटी: हाई-कैपेसिटी स्टोरेज के जरिए सोलर और विंड इंटरमिटेंसी को कम करना
  • आर्थिक व्यवहार्यता: बाहरी बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करना और राज्य की उपयोगिताओं के लिए लागत दक्षता में सुधार करना
  • पॉलिसी सपोर्ट: बड़े पैमाने पर ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने में वायबिलिटी गैप फंडिंग की भूमिका

मुख्य शब्द: अनिरंतरता · ग्रिड स्टेबिलिटी · रिन्यूएबल इंटीग्रेशन · वायबिलिटी गैप फंडिंग · ऊर्जा सुरक्षा

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सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के चेयरपर्सन ने चेतावनी दी है कि सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (Renewable Energy Sources) की अस्थिर प्रकृति के कारण भारत का इलेक्ट्रिक ग्रिड 'खतरनाक' उतार-चढ़ाव (Oscillations) का सामना कर रहा है

चर्चा में क्यों: सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के चेयरपर्सन ने चेतावनी दी है कि सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (Renewable Energy Sources) की अस्थिर प्रकृति के कारण भारत का इलेक्ट्रिक ग्रिड 'खतरनाक' उतार-चढ़ाव (Oscillations) का सामना कर रहा है।

भारत ने 2025 में 48 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (renewable capacity) जोड़ी, लेकिन वर्तमान में ग्रिड अस्थिरता और बैटरी स्टोरेज की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। मई और दिसंबर 2025 के बीच, ग्रिड की इन सीमाओं के कारण लगभग 2,300 गीगावाट-घंटे सौर ऊर्जा का उपयोग नहीं हो सका (curtailed)।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यभारत ने 2025 में 48 GW की रिन्यूएबल कैपेसिटी (renewable capacity) जोड़ी।
  • तथ्यमई और दिसंबर 2025 के बीच 2,300 gigawatt-hours सोलर पावर को कम (curtail) कर दिया गया।
  • तथ्यभारत का लक्ष्य 2047 तक वर्तमान नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (renewable capacity) से लगभग चार गुना तक पहुंचना है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के राष्ट्रीय ग्रिड में उच्च-भेदन (high-penetration) वाले नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को एकीकृत करने में आने वाली तकनीकी और ढांचागत चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा ग्रिड दोलनों (grid oscillations) को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

  • ग्रिड स्टेबिलिटी: इंटरमिटेंट सोलर और विंड स्रोतों से होने वाले वोल्टेज फ्लक्चुएशन को मैनेज करने में तकनीकी सीमाएं
  • स्टोरेज की कमी: बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की कमी से बिजली की भारी कटौती हो रही है
  • आधुनिकीकरण का अंतर: बिजली के स्रोतों के बीच तेज़ी से स्विचिंग की सुविधा के लिए 'स्मार्ट' ग्रिड टेक्नोलॉजी की ज़रूरत

मुख्य शब्द: ग्रिड स्टेबिलिटी · रिन्यूएबल इंटीग्रेशन · पावर कर्टेलमेंट · स्मार्ट ग्रिड · ऊर्जा ट्रांज़िशन

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तेलंगाना स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (TGSRTC) ने राज्य के GI-मान्यता प्राप्त हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने के लिए सार्वजनिक बसों को मोबाइल गैलरी में बदलने हेतु 'GI on Wheels' की शुरुआत की है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (TGSRTC) ने राज्य के GI-मान्यता प्राप्त हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने के लिए सार्वजनिक बसों को मोबाइल गैलरी में बदलने हेतु 'GI on Wheels' की शुरुआत की है।

इस पहल का उद्घाटन राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा द्वारा महात्मा गांधी बस स्टेशन पर किया गया। इसमें कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए TGSRTC और जवाहरलाल नेहरू आर्किटेक्चर एंड फाइन आर्ट्स यूनिवर्सिटी के छात्रों को शामिल किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाTGSRTC: तेलंगाना स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन।
  • स्थानमहात्मा गांधी बस स्टेशन: 'GI on Wheels' के उद्घाटन का स्थान।
  • तथ्यGI on Wheels: GI-recognized हस्तशिल्प (handicrafts) के लिए सार्वजनिक बसों को मोबाइल गैलरी के रूप में उपयोग करने की पहल।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में नवीन विपणन रणनीतियों के माध्यम से भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को बढ़ावा देना ग्रामीण कारीगरों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में किस प्रकार योगदान दे सकता है, चर्चा कीजिए।

  • मार्केट एक्सेस: ग्रामीण कारीगर क्लस्टर्स और शहरी उपभोक्ता बाजारों के बीच की दूरी को कम करना
  • ब्रांड संरक्षण: GI कानूनी ढांचे के जरिए पारंपरिक शिल्प को औद्योगिक नकल से बचाना
  • आजीविका सृजन: पिछड़े शिल्प समुदायों के लिए टिकाऊ आर्थिक वैल्यू चेन बनाना

मुख्य शब्द: भौगोलिक संकेत · कारीगर सशक्तिकरण · सांस्कृतिक प्रचार · आर्थिक समावेश · ब्रांड प्रोटेक्शन

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तेलंगाना सरकार को पे रिवीजन कमीशन (PRC) की सिफारिशों को लागू करने में राजकोषीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार को पे रिवीजन कमीशन (PRC) की सिफारिशों को लागू करने में राजकोषीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि राज्य पहले से ही भारत की कुछ सबसे अधिक सरकारी वेतन संरचनाओं में से एक बनाए हुए है।

PRC की अध्यक्षता सेवानिवृत्त नौकरशाह एन. शिवा शंकर द्वारा की गई थी। वर्तमान में, तेलंगाना के राजस्व व्यय में वेतन और पेंशन की हिस्सेदारी 21% है। अनुमान है कि दो दशकों के बाद एक जूनियर लाइनमैन का शुरुआती वेतन ₹52,000 से बढ़कर ₹1.91 लाख हो जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यतेलंगाना के राजस्व व्यय (revenue expenditure) में वेतन और पेंशन का हिस्सा 21% है।
  • पदएन. शिव शंकर ने तेलंगाना के लिए Pay Revision Commission (PRC) का नेतृत्व किया।
  • तथ्यजूनियर लाइनमैन की एंट्री-लेवल सैलरी ₹52,000 से बढ़कर ₹1.91 लाख होने वाली है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में राज्य-स्तरीय राजकोषीय स्वास्थ्य और सतत विकास पर उच्च वेतन-से-राजस्व व्यय अनुपात के राजकोषीय निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय स्थिरता: राजस्व व्यय के मुकाबले उच्च वेतन अनुपात से बुनियादी ढांचे के लिए पूंजीगत व्यय सीमित हो रहा है
  • कर्ज-सेवा का दबाव: पेंशन देनदारियों में बढ़ोतरी से बढ़ते ब्याज भुगतान ने राजकोषीय दबाव को और बढ़ा दिया
  • केंद्र-राज्य तनाव: महंगाई भत्ता की मांग और राज्य की राजकोषीय सेहत के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: राजकोषीय स्थिति · राजस्व व्यय · पे-रिवीजन कमीशन · वेतन-से-राजस्व अनुपात · राजकोषीय स्थिरता

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सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए वार्षिक और त्रैमासिक राष्ट्रीय लेखा अनुमानों (Annual and Quarterly National Accounts Estimates) की नई श्रृंखला जारी की है

चर्चा में क्यों: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए वार्षिक और त्रैमासिक राष्ट्रीय लेखा अनुमानों (Annual and Quarterly National Accounts Estimates) की नई श्रृंखला जारी की है।

वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में दर्ज की गई 7.4% की वृद्धि से अधिक है। यह नई श्रृंखला पिछली श्रृंखला का स्थान लेती है, जिसमें 2011-12 को आधार वर्ष (Base Year) के रूप में उपयोग किया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्य2025-26 के अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए GDP ग्रोथ: 7.8%।
  • तथ्यवर्तमान वित्त वर्ष के लिए अनुमानित GDP ग्रोथ: 7.6%।
  • संस्थाMinistry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) वह संस्था है जो नेशनल अकाउंट्स (National Accounts) के अनुमान जारी करती है।
  • तथ्यराष्ट्रीय खातों (National Accounts) के लिए नया बेस ईयर (Base Year): 2022-23।
  • तथ्यजुलाई-सितंबर 2025-26 के लिए संशोधित ग्रोथ रेट (growth rate): 8.4%।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राष्ट्रीय लेखांकन में आधार वर्ष को अद्यतन करने के महत्व और भारत की आर्थिक वृद्धि के मापन की सटीकता पर इसके प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।

  • मेथडोलॉजिकल शिफ्ट: रियल जीडीपी कैलकुलेशन और महंगाई इंडेक्सिंग पर बेस ईयर बदलने का असर
  • डेटा रिवीज़न: एडवांस एस्टीमेट्स और फाइनल नेशनल अकाउंट्स सीरीज़ के बीच विसंगतियों को दूर करना

मुख्य शब्द: GDP · आधार वर्ष · नेशनल अकाउंट्स · आर्थिक विकास

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नोमुरा (Nomura) ने अनुमान लगाया है कि व्यापार में बाधाओं के कम होने और निरंतर पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के कारण

चर्चा में क्यों: नोमुरा (Nomura) ने अनुमान लगाया है कि व्यापार में बाधाओं के कम होने और निरंतर पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के कारण, वित्त वर्ष 2026 में भारत की GDP वृद्धि 7.5% और वित्त वर्ष 2027 में 7.1% रहने की संभावना है, जबकि महंगाई लगभग 4% के आसपास रहेगी।

नोमुरा (Nomura) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.5% और वित्त वर्ष 2027 के लिए 7.1% की जीडीपी (GDP) वृद्धि का अनुमान लगाया है। मजबूत अर्थव्यवस्था और कम महंगाई के कारण, RBI से वर्तमान नीतिगत रुख बनाए रखने और दरों में कटौती न करने की उम्मीद है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यनोमुरा (Nomura) द्वारा वित्त वर्ष 2026 के लिए अनुमानित GDP ग्रोथ 7.5% है।
  • तथ्यनोमुरा (Nomura) द्वारा FY27 के लिए अनुमानित GDP ग्रोथ 7.1% है।
  • तथ्यनोमुरा (Nomura) के अनुसार महंगाई 4% के आसपास बनी रहेगी।
  • तथ्यसाल के अंत तक रुपया 90 के आसपास रहने का अनुमान है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की लचीली आर्थिक वृद्धि में योगदान देने वाले कारकों और इस गति को बनाए रखने में राज्य-आधारित पूंजीगत व्यय की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • फ़िसकल मल्टीप्लायर: निजी क्षेत्र की मांग पर राज्य स्तर के निरंतर पूंजीगत व्यय का प्रभाव
  • मौनेटरी-फ़िस्कल कोऑर्डिनेशन: महंगाई के लक्ष्यों के साथ ब्याज दरों पर RBI के रुख को संतुलित करना
  • बाहरी भेद्यता: घरेलू महंगाई पर भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिम

मुख्य शब्द: जीडीपी ग्रोथ · महंगाई लक्ष्यीकरण · पूंजीगत व्यय · मौनेटरी पॉलिसी · व्यापार में रुकावटें

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विशेषज्ञ 500 से अधिक हवाई अड्डों को जोड़ने के बावजूद UDAN योजना के सामने आ रही परिचालन संबंधी चुनौतियों के बीच

चर्चा में क्यों: विशेषज्ञ 500 से अधिक हवाई अड्डों को जोड़ने के बावजूद UDAN योजना के सामने आ रही परिचालन संबंधी चुनौतियों के बीच, इसकी दीर्घकालिक स्थिरता और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन कर रहे हैं।

UDAN योजना को 2016 में हवाई यात्रा को अधिक किफायती बनाने और भारत के छोटे शहरों को जोड़ने के लिए शुरू किया गया था। इसने अब तक 500 से अधिक हवाई अड्डों को सफलतापूर्वक जोड़ा है और लाखों यात्रियों को सेवा प्रदान की है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • योजनाUDAN: क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी और सामर्थ्य (affordability) को बेहतर बनाने के लिए 2016 में लॉन्च किया गया।
  • तथ्यUDAN स्कीम ने भारत भर में 500 से अधिक एयरपोर्ट्स को जोड़ा है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में 'उड़ान' (UDAN) जैसी क्षेत्रीय उड्डयन योजनाओं की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • ऑपरेशनल व्यवहार्यता: टियर-2 और टियर-3 शहरों में लो-लोड फैक्टर उड़ानों को बनाए रखने की भारी लागत
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: छोटे क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स पर सहायक सेवाओं और फीडर ट्रांसपोर्ट की कमी
  • आर्थिक व्यवहार्यता: सब्सिडी वाले किराए और प्राइवेट एयरलाइंस के मुनाफे के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · इंफ्रास्ट्रक्चर सस्टेनेबिलिटी · किफायती होना · एविएशन पॉलिसी · लास्ट-माइल कनेक्टिविटी

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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने वित्त वर्ष 2022-2023 के लिए बिहार में राजस्व बकाया और टैक्स नियमों के पालन न होने के गंभीर मामलों पर ध्यान आकर्षित किया है

चर्चा में क्यों: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने वित्त वर्ष 2022-2023 के लिए बिहार में राजस्व बकाया और टैक्स नियमों के पालन न होने के गंभीर मामलों पर ध्यान आकर्षित किया है।

बिहार के लिए CAG की रिपोर्ट (वित्त वर्ष 2022-2023) में ₹4,884.86 करोड़ की बकाया राजस्व राशि की पहचान की गई है, जिसमें से ₹1,430.32 करोड़ की राशि पांच साल से अधिक समय से बकाया है। रिपोर्ट में TDS/TCS टैक्स लायबिलिटी में ₹64.91 करोड़ की विसंगतियों और राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (SPSEs) में हुई हानि का भी उल्लेख किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाCAG: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक।
  • तथ्य₹4,884.86 करोड़: वित्त वर्ष 2022-2023 के लिए बिहार में कुल बकाया राजस्व (Outstanding Revenue)।
  • तथ्य₹1,430.32 करोड़: बिहार में पांच साल से अधिक पुराने बकाया राजस्व (Revenue arrears)।
  • तथ्य₹64.91 करोड़: TDS/TCS टैक्स लायबिलिटी में विसंगतियां।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में राज्य-स्तरीय सार्वजनिक वित्त प्रबंधन में राजकोषीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • राजस्व की चोरी: कमज़ोर रिकवरी सिस्टम के कारण सरकारी खजाने में कई सालों का बकाया बकाया
  • संस्थागत निगरानी: सेस कलेक्शन के लिए विभागीय निर्देशों के उल्लंघन की पहचान में CAG की भूमिका
  • सार्वजनिक उद्यमों का जोखिम: राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में वित्तीय नुकसान से राजकोषीय स्थिति पर असर

मुख्य शब्द: राजकोषीय अनुशासन · राजस्व बकाया · पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट · ऑडिट ओवरसाइट · टैक्स कंप्लायंस

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासमेन्स

कर्नाटक सरकार न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी के एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पर विचार कर रही है

चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी के एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिस पर महंगाई के आधार पर वेतन की मांग करने वाले यूनियनों और परिचालन लागत (operational costs) को लेकर चिंतित उद्योग निकायों के बीच गतिरोध बना हुआ है।

कर्नाटक में न्यूनतम वेतन में वृद्धि के लिए मसौदा प्रस्ताव अप्रैल 2025 में घोषित किया गया था। यूनियनों का तर्क है कि वर्तमान गणना पद्धति महंगाई को ध्यान में नहीं रखती है, जबकि उद्योग निकायों का दावा है कि प्रस्तावित वृद्धि छोटे व्यवसायों के लिए बहुत अधिक है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यकर्नाटक में न्यूनतम वेतन (minimum wage) बढ़ाने का प्रस्ताव अप्रैल 2025 में घोषित किया गया।
  • संस्थान्यूनतम वेतन (Minimum wage) में संशोधन वर्तमान में नए लेबर कोड्स (labor codes) के कार्यान्वयन से प्रभावित हो रहे हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के विकसित होते श्रम परिदृश्य में, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की परिचालन व्यवहार्यता और जीवन निर्वाह मजदूरी (living wages) की आवश्यकता के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • मेथडोलॉजिकल गैप: वर्तमान वेतन गणना फॉर्मूले का रियल-टाइम महंगाई दरों के साथ इंडेक्स न हो पाना
  • MSME की संवेदनशीलता: छोटे व्यवसायों की लिक्विडिटी और अस्तित्व पर भारी वेतन वृद्धि का असमान असर
  • रेगुलेटरी ट्रांज़िशन: नए लेबर कोड्स के रोलआउट के साथ न्यूनतम वेतन संशोधनों को जोड़ने की जटिलता

मुख्य शब्द: निर्वाह मजदूरी · महंगाई इंडेक्सिंग · MSME की व्यवहार्यता · लेबर कोड · वेतन पद्धति

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासमेन्स

दो प्रमुख आयोगों ने कर्नाटक सरकार से सार्वजनिक क्षेत्र की भर्तियों को वर्तमान आर्थिक प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने और स्वीकृत पदों की समय-समय पर समीक्षा करने का आग्रह किया है

चर्चा में क्यों: दो प्रमुख आयोगों ने कर्नाटक सरकार से सार्वजनिक क्षेत्र की भर्तियों को वर्तमान आर्थिक प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने और स्वीकृत पदों की समय-समय पर समीक्षा करने का आग्रह किया है।

कर्नाटक में स्वीकृत सार्वजनिक रोजगार पदों में से लगभग 36% पद वर्तमान में रिक्त हैं। कानूनी चुनौतियों और बजटीय बाधाओं के बीच भर्ती के लंबित कार्य को पूरा करने के लिए सरकार ने आयु पात्रता मानदंडों में ढील दी है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यकर्नाटक में स्वीकृत सार्वजनिक रोजगार पदों (public employment posts) का 36% रिक्त है।
  • पदकर्नाटक सरकार ने भर्ती के लंबित मामलों (backlogs) को हल करने के लिए आयु पात्रता मानदंडों (age eligibility criteria) में ढील दी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बढ़ती आर्थिक प्राथमिकताओं के साथ सार्वजनिक क्षेत्र की नियुक्तियों को संरेखित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए, साथ ही इस प्रक्रिया में राजकोषीय विवेक और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

  • राजकोषीय बाधा: सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार पर बजट की सीमाओं के साथ मानव पूंजी की ज़रूरत को संतुलित करना
  • प्रशासनिक सुस्ती: बढ़ती अर्थव्यवस्था में अनावश्यक पदों की पहचान और उन्हें खत्म करने में चुनौतियां
  • कानूनी-नियामक टकराव: समयबद्ध भर्ती प्रक्रियाओं की गति पर चल रहे मुकदमे का असर

मुख्य शब्द: राजकोषीय विवेक · मानव पूंजी · प्रशासनिक दक्षता · सार्वजनिक क्षेत्र में सुधार · आर्थिक तालमेल

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

SEBI ने 'सॉल्यूशन-ओरिएंटेड' म्यूचुअल फंड कैटेगरी को खत्म कर दिया है और फंड के नाम और विवरण को मानकीकृत (standardize) करने के लिए 'लाइफ साइकिल फंड्स' जैसी नई कैटेगरी पेश की हैं

चर्चा में क्यों: SEBI ने 'सॉल्यूशन-ओरिएंटेड' म्यूचुअल फंड कैटेगरी को खत्म कर दिया है और फंड के नाम और विवरण को मानकीकृत (standardize) करने के लिए 'लाइफ साइकिल फंड्स' जैसी नई कैटेगरी पेश की हैं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने यह अनिवार्य किया है कि म्यूचुअल फंड योजनाओं के नाम और विवरण एक निर्धारित प्रारूप के अनुसार होने चाहिए। नियामक ने स्पष्ट किया है कि अब विदेशी प्रतिभूतियों (foreign securities) को एक अलग एसेट क्लास (asset class) के रूप में नहीं माना जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यहटाया गया कैटेगरी: 'solution-oriented' म्यूचुअल फंड कैटेगरी।
  • तथ्यनई कैटेगरी शुरू की गई: life cycle funds।
  • तथ्यविदेशी सिक्योरिटीज (Foreign securities): स्पष्ट किया गया कि उन्हें एक अलग एसेट क्लास (asset class) के रूप में नहीं माना जाएगा।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सेबी (Sebi) जैसे नियामकों द्वारा निर्धारित मानकीकृत वर्गीकरण और नामकरण परंपराएं म्यूचुअल फंड उद्योग में निवेशक सुरक्षा और बाजार पारदर्शिता में किस प्रकार योगदान देती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • इन्फॉर्मेशन एसिमेट्री: स्टैंडर्डाइज्ड नेमिंग से रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए अलग-अलग फंड ऑफरिंग्स को समझना आसान होता है
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: नए फंड प्रकारों के प्रसार और स्पष्ट इन्वेस्टर कम्युनिकेशन की ज़रूरत के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: निवेशक संरक्षण · बाज़ार में पारदर्शिता · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · एसेट क्लासिफिकेशन · सूचना की असमानता

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) अपने आगामी IPO के प्रबंधन के लिए इन्वेस्टमेंट बैंकों से प्रस्ताव (pitch) आमंत्रित कर रहा है

चर्चा में क्यों: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) अपने आगामी IPO के प्रबंधन के लिए इन्वेस्टमेंट बैंकों से प्रस्ताव (pitch) आमंत्रित कर रहा है, जिसे ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) के रूप में तैयार किया गया है।

NSE IPO के मध्य-मार्च 2026 में शुरू होने की उम्मीद है। यह एक ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) के रूप में होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक कुल इक्विटी का 4-4.5% हिस्सा बेचेंगे। अनलिस्टेड मार्केट में इस एक्सचेंज की वैल्यू ₹5 लाख करोड़ है, और इससे लगभग ₹23,000 करोड़ जुटाए जाने की संभावना है।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्यNSE अनलिस्टेड मार्केट वैल्यूएशन: ₹5 लाख करोड़।
  • तथ्यNSE IPO से लगभग ₹23,000 करोड़ जुटाने की उम्मीद है।
  • तथ्यLIC, NSE का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बना हुआ है।
  • तथ्यNSE IPO स्ट्रक्चर: ऑफर फॉर सेल (OFS) जहाँ एक्सचेंज को कोई नया फंड प्राप्त नहीं होता है।
  • संस्थारोथ्सचाइल्ड (Rothschild) NSE को लीड बैंकर्स और लीगल काउंसिल्स चुनने में सहायता कर रहा है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों के सार्वजनिक संस्थाओं में परिवर्तन के भारतीय पूंजी बाजार की पारदर्शिता और विनियामक ढांचे पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • मार्केट इंटीग्रिटी: एक्सचेंज ओनरशिप और लिस्टिंग प्लेटफॉर्म की न्यूट्रलिटी के बीच हितों का टकराव
  • कैपिटल मोबिलाइजेशन: रिटेल इन्वेस्टर सेंटिमेंट और लिक्विडिटी पर बड़े पैमाने पर ऑफर फॉर सेल (OFS) का असर
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: पब्लिक लिस्टिंग के बाद एक्सचेंज गवर्नेंस पर SEBI द्वारा कड़ी निगरानी

मुख्य शब्द: बिक्री के लिए उपलब्ध · कैपिटल मार्केट्स · मार्केट लिक्विडिटी · कॉरपोरेट गवर्नेंस · पब्लिक लिस्टिंग

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)मेन्स

तेलंगाना के IT और इंडस्ट्रीज मंत्री, डी

चर्चा में क्यों: तेलंगाना के IT और इंडस्ट्रीज मंत्री, डी. श्रीधर बाबू ने राज्य के GDP योगदान को बढ़ाने के लिए 2047 तक इसे एक वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब (Global Logistics Hub) में बदलने के रोडमैप की घोषणा की है।

तेलंगाना सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत के GDP में राज्य के योगदान को 5% से बढ़ाकर 10% करना है। इस रणनीति के तहत मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स, रेल से जुड़े बुनियादी ढांचे और ग्रेड-A वेयरहाउसिंग के माध्यम से 3 ट्रिलियन डॉलर की राज्य अर्थव्यवस्था बनाने की योजना शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यतेलंगाना का लक्ष्य 2047 तक भारत के GDP में 10% का योगदान देना है।
  • तथ्यलक्ष्य: 2047 तक राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार $3 ट्रिलियन।
  • तथ्यप्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर घटक: मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स, रेल-लिंक्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, एयर कार्गो और कोल्ड चेन।
  • पदडी. श्रीधर बाबू: तेलंगाना के IT और Industries मंत्री।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में बहु-आयामी रसद (multi-modal logistics) और ग्रेड-ए वेयरहाउसिंग का विकास क्षेत्रीय आर्थिक विकास और औद्योगिक एकीकरण को कैसे उत्प्रेरित कर सकता है, चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी: रेल-लिंक्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए टर्नअराउंड टाइम कम करना
  • इकोनॉमिक स्केलिंग: हाई-वैल्यू GDP योगदान लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य-स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाना
  • रेगुलेटरी ईज़: प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने में पारदर्शी पॉलिसी फ्रेमवर्क और तेज़ अप्रूवल का असर

मुख्य शब्द: मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स · ग्रेड-A वेयरहाउसिंग · GDP में योगदान · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · डिजिटल एकीकरण

नीति आयोग द्वारा गठित नेशनल क्रिटिकल एंड स्ट्रैटेजिक मिनरल्स कमेटी (National Critical and Strategic Minerals Committee) की बैठक हुई

चर्चा में क्यों: नीति आयोग द्वारा गठित नेशनल क्रिटिकल एंड स्ट्रैटेजिक मिनरल्स कमेटी (National Critical and Strategic Minerals Committee) की बैठक हुई, जिसमें लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए रणनीतियों पर चर्चा की गई।

डॉ. डी.के. सिंह (पूर्व BARC वैज्ञानिक) की अध्यक्षता वाली इस समिति में डॉ. बुद्धप्रकाश ज्योति (SCCL के CMD) भी शामिल हैं। यह समिति आयात पर निर्भरता कम करने के लिए लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare earth elements), कोबाल्ट और निकल पर ध्यान केंद्रित करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थानेशनल क्रिटिकल एंड स्ट्रैटेजिक मिनरल्स कमेटी (National Critical and Strategic Minerals Committee) का गठन नीति आयोग द्वारा किया गया है।
  • तथ्यआत्मनिर्भरता के लिए पहचाने गए प्रमुख खनिजों में लिथियम (lithium), रेयर अर्थ एलिमेंट्स (rare earth elements), कोबाल्ट (cobalt) और निकल (nickel) शामिल हैं।
  • पदडॉ. डी.के. सिंह भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के पूर्व वैज्ञानिक हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक महत्व और उनकी आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • सप्लाई चेन की कमजोरी: ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए रेयर अर्थ एलिमेंट्स और लिथियम के आयात पर भारी निर्भरता
  • भू-राजनीतिक लाभ: हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में बाहरी सप्लाई शॉक को कम करने के लिए घरेलू स्रोतों को सुरक्षित करना एक रणनीतिक ज़रूरत है

मुख्य शब्द: रणनीतिक स्वायत्तता · सप्लाई चेन रेज़िलिएंस · खनिज सुरक्षा · आयात प्रतिस्थापन · क्रिटिकल मिनरल्स

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

T-Hub ने त्रिपुरा सरकार के निदेशालय ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Directorate of Information Technology) के साथ मिलकर राज्य में एक व्यवस्थित स्टार्टअप इकोसिस्टम और इंक्यूबेशन फ्रेमवर्क (Incubation Framework) स्थापित करने के लिए साझेदारी की है

चर्चा में क्यों: T-Hub ने त्रिपुरा सरकार के निदेशालय ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Directorate of Information Technology) के साथ मिलकर राज्य में एक व्यवस्थित स्टार्टअप इकोसिस्टम और इंक्यूबेशन फ्रेमवर्क (Incubation Framework) स्थापित करने के लिए साझेदारी की है।

T-Hub, जो एक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप इनक्यूबेटर है, त्रिपुरा निदेशालय सूचना प्रौद्योगिकी (Directorate of Information Technology) के साथ मिलकर काम करेगा। इस पहल के अंतर्गत इनक्यूबेशन फ्रेमवर्क तैयार करना, इनोवेशन सेंटर का विकास, एक्सेलेरेशन प्रोग्राम और निवेशकों से जुड़ाव शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाT-Hub: त्रिपुरा सरकार के साथ साझेदारी करने वाला एक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप इनक्यूबेटर (technology startup incubator)।
  • तथ्यडायरेक्टरेट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Directorate of Information Technology): त्रिपुरा की वह राज्य संस्था जो स्टार्टअप इकोसिस्टम पार्टनरशिप के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यपार्टनरशिप के घटक: इसमें इनोवेशन सेंटर/पार्क का विकास, मेंटर एक्सचेंज और लीडरशिप वर्कशॉप शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पूर्वोत्तर भारत में क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देनेके लिए स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के महत्व की चर्चा कीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: दूरदराज के क्षेत्रों में स्पेशलाइज्ड इनोवेशन पार्क्स और इनक्यूबेशन सेंटर्स की ज़रूरत
  • कैपिटल एक्सेस: रीजनल स्टार्टअप्स और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर नेटवर्क्स के बीच की दूरी को कम करना
  • स्किल डेवलपमेंट: स्ट्रक्चर्ड एक्सीलरेशन और लीडरशिप वर्कशॉप के जरिए मेंटर-स्टूडेंट गैप को कम करना

मुख्य शब्द: स्टार्टअप इकोसिस्टम · इन्क्यूबेशन फ्रेमवर्क · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · क्षेत्रीय विकास · इनोवेशन सेंटर

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

आंध्र प्रदेश सरकार ने पर्यटन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से विशिष्ट पर्यटन क्षेत्रों में माइक्रोब्रूअरीज (microbreweries) की अनुमति देने के लिए ए.पी

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने पर्यटन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से विशिष्ट पर्यटन क्षेत्रों में माइक्रोब्रूअरीज (microbreweries) की अनुमति देने के लिए ए.पी. ब्रूअरी रूल्स, 2006 में संशोधन किया है।

यह संशोधन नगर निगम की सीमाओं के भीतर पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित माइक्रोब्रूअरीज (microbreweries), निर्धारित पर्यटन केंद्रों और तीन-स्टार या उससे अधिक श्रेणी के होटलों को अनुमति देता है। इस नीति का उद्देश्य शराब के विकल्पों में विविधता लाना और राज्य में बीच टूरिज्म (beach tourism) को बढ़ावा देना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यम्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की सीमाओं से पांच किलोमीटर के बेल्ट के भीतर माइक्रोब्रूअरीज (Microbreweries) की अनुमति है।
  • तथ्यनिर्धारित पर्यटन केंद्रों और थ्री-स्टार और उससे ऊपर के होटलों में स्थापना की अनुमति है।
  • अधिनियम / विधेयकयह नीति परिवर्तन A.P. Brewery Rules, 2006 में संशोधन करके किया गया था।
  • स्थानयह पॉलिसी विशेष रूप से आंध्र प्रदेश राज्य पर लागू होती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राज्य-संचालित पर्यटन नीतियों और आबकारी नियमों में संशोधनों के क्षेत्रीय आर्थिक विकास और बुनियादी ढाँचे के निर्माण में उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • राजस्व उत्पादन: तटीय पर्यटन पर संभावित पर्यावरणीय प्रभावों के साथ बढ़ते राज्य एक्साइज राजस्व में संतुलन
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: हाई-ट्रैफ़िक टूरिज्म बेल्ट में सुरक्षा मानकों और ज़ोनिंग कंप्लायंस को सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: आर्थिक विविधीकरण · पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · राज्य एक्साइज पॉलिसी

भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से पूरे भारत में 20% तक इथेनॉल मिश्रण (Ethanol blending) और न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (Research Octane Number

चर्चा में क्यों: भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से पूरे भारत में 20% तक इथेनॉल मिश्रण (Ethanol blending) और न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (Research Octane Number - RON) 95 वाले पेट्रोल की बिक्री को अनिवार्य कर दिया है।

यह अधिदेश (mandate) इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के लिए न्यूनतम RON (Research Octane Number) 95 की आवश्यकता निर्धारित करता है। 2023 से निर्मित अधिकांश वाहन E20 ब्लेंडिंग के साथ संगत हैं, जिससे इंजन के घिसाव या माइलेज पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यअनिवार्य इथेनॉल ब्लेंडिंग लेवल: 20% तक (E20)।
  • तथ्यन्यूनतम आवश्यक रिसर्च ऑक्टेन नंबर (Research Octane Number - RON): 95।
  • तथ्यकार्यान्वयन की तारीख: 1 अप्रैल, 2026।
  • तथ्यप्राथमिक फीडस्टॉक (feedstock) स्रोत: गन्ना, मक्का और कृषि अधिशेष (agricultural surplus)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इथेनॉल सम्मिश्रण को बढ़ावा देने के योगदान का पर्यावरणीय चिंताओं के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।

  • इंपोर्ट सब्स्टिट्यूशन: कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और चालू खाता घाटा सुधारना
  • कृषि जुड़ाव: गन्ना और मक्का किसानों के लिए मांग का स्थिर आधार बनाना
  • तकनीकी अनुकूलता: 2023 के बाद के वाहन बेड़े के लिए इंजन की लंबी उम्र और फ्यूल एफिशिएंसी सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · इथेनॉल ब्लेंडिंग · आयात प्रतिस्थापन · डीकार्बोनाइजेशन · कृषि आधारित अर्थव्यवस्था

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग और सेमीकंडक्टर्स के लिए राज्य को एक हब के रूप में स्थापित करने हेतु 10 प्रमुख परियोजनाओं के लिए ₹44,241.97 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है

चर्चा में क्यों: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग और सेमीकंडक्टर्स के लिए राज्य को एक हब के रूप में स्थापित करने हेतु 10 प्रमुख परियोजनाओं के लिए ₹44,241.97 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है।

इस निवेश के अंतर्गत ओडिशा के आठ जिलों में भारत फोर्ज लिमिटेड, ASP Semicon प्राइवेट लिमिटेड और मैग्नोवा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा परियोजनाएं संचालित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य लगभग 8,765 रोजगार पैदा करना है और यह 'समृद्ध ओडिशा 2036' (Samruddha Odisha by 2036) के विजन को समर्थन प्रदान करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्यकुल स्वीकृत निवेश: ₹44,241.97 करोड़।
  • तथ्यअनुमोदित परियोजनाओं की संख्या: 10।
  • तथ्यअनुमानित रोजगार सृजन: 8,765।
  • स्थानओडिशा: राज्य '2036 तक समृद्ध ओडिशा' (Samruddha Odisha by 2036) विजन का लक्ष्य रख रहा है।
  • तथ्यप्रमुख लक्षित उद्योग: हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग (high-precision engineering), सेमीकंडक्टर्स (semiconductors), रेयर अर्थ मैग्नेट्स (rare earth magnets) और रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में उच्च-तकनीकी विनिर्माण केंद्रों को बढ़ावा देने और सतत आर्थिक विकास प्राप्त करने में राज्य-नेतृत्व वाली औद्योगिक नीतियों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • औद्योगिक विविधीकरण: पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की ओर बदलाव
  • रोज़गार सृजन: ग्रामीण और अर्ध-शहरी जिलों में बड़े पैमाने के कैपिटल इन्वेस्टमेंट को स्थानीय जॉब क्रिएशन से जोड़ना

मुख्य शब्द: औद्योगिक नीति · पूंजीगत निवेश · नौकरी सृजन · सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम · राज्य-नेतृत्व वाला विकास

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकमेन्स

द हिंदू ने केरल की अर्थव्यवस्था के 'केरल मॉडल' (सामाजिक कल्याण) से हटकर वर्तमान में राजकोषीय दबाव और युवाओं की बेरोजगारी जैसी चुनौतियों की ओर बदलाव पर प्रकाश डाला है

चर्चा में क्यों: द हिंदू ने केरल की अर्थव्यवस्था के 'केरल मॉडल' (सामाजिक कल्याण) से हटकर वर्तमान में राजकोषीय दबाव और युवाओं की बेरोजगारी जैसी चुनौतियों की ओर बदलाव पर प्रकाश डाला है।

केरल की अर्थव्यवस्था उच्च साक्षरता दर और कम शिशु मृत्यु दर की विशेषता रखती है। यहाँ की विकास दर मुख्य रूप से खाड़ी देशों से प्राप्त प्रेषण (remittances) द्वारा संचालित हुई है, जबकि अब राज्य का लक्ष्य एक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था (knowledge-based economy) की ओर बढ़ना है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यकेरल की आर्थिक वृद्धि मुख्य रूप से Gulf देशों से प्राप्त रेमिटेंस (remittances) द्वारा संचालित होती है।
  • स्थानकेरल: भारत का एक राज्य जो सामाजिक कल्याण के 'केरल मॉडल' (Kerala Model) के लिए जाना जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विकास के 'केरल मॉडल' का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और चर्चा कीजिए कि राज्य राजकोषीय दबावों का समाधान करते हुए एक कल्याण-केंद्रित अर्थव्यवस्था से ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर कैसे संक्रमण कर सकता है।

  • राजकोषीय स्थिरता: बढ़ते राज्य ऋण और राजकोषीय घाटे के साथ उच्च सामाजिक कल्याण खर्चों के बीच संतुलन
  • लेबर मार्केट मिसमैच: युवा आबादी के लिए रेमिटेंस पर निर्भर खपत से आधुनिक रोजगार की ओर बदलाव
  • स्ट्रक्चरल शिफ्ट: लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए पारंपरिक सामाजिक कल्याण से नॉलेज-आधारित इकोनॉमी की ओर बढ़ना

मुख्य शब्द: केरल मॉडल · रेमिटेंस इकोनॉमी · राजकोषीय दबाव · नॉलेज-आधारित इकोनॉमी · समाज कल्याण · मानव विकास

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए जापानी उद्यमियों को आमंत्रित करने हेतु टोक्यो का दौरा किया

चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए जापानी उद्यमियों को आमंत्रित करने हेतु टोक्यो का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की संभावनाओं पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक 'जापान इंडस्ट्रियल सिटी' और बुंदेलखंड क्षेत्र में एक नए औद्योगिक शहर की योजना की घोषणा की। इस दौरान उत्तर प्रदेश को खाद्यान्न और इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों (components) के एक प्रमुख उत्पादक राज्य के रूप में रेखांकित किया गया।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यबुंदेलखंड: उत्तर प्रदेश का वह क्षेत्र जिसके लिए एक नए इंडस्ट्रियल सिटी (Industrial City) का प्रस्ताव दिया गया है।
  • तथ्यउत्तर प्रदेश: इसे खाद्यान्न और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स (electronics components) के प्रमुख उत्पादक के रूप में पहचाना गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के कृषि प्रधान राज्यों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने में राज्य-संचालित औद्योगिक गलियारों और बुनियादी ढांचा विकास की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • लॉजिस्टिक्स सिनर्जी: इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को हब के रूप में इस्तेमाल करना
  • क्षेत्रीय असंतुलन: संतुलित क्षेत्रीय विकास और ग्रामीण रोज़गार के लिए बुंदेलखंड का इंडस्ट्रियलाइजेशन एक टूल

मुख्य शब्द: FDI · इंडस्ट्रियल कॉरिडोर · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग · क्षेत्रीय विकास

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