द हिंदू ने आंध्र प्रदेश के राजकोषीय प्रक्षेपवक्र (fiscal trajectory) का विश्लेषण किया है
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चर्चा में क्यों
द हिंदू ने आंध्र प्रदेश के राजकोषीय प्रक्षेपवक्र (fiscal trajectory) का विश्लेषण किया है, जिसमें प्राथमिक घाटे (primary deficits) के बने रहने के बावजूद पूंजीगत व्यय (capital expenditure) में वृद्धि और आंतरिक संसाधन जुटाने की ओर बढ़ते झुकाव पर प्रकाश डाला गया है।
पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश की 2023-24 से 2026-27 तक की राजकोषीय योजना (fiscal plan) पूंजीगत व्यय (capital expenditure) में भारी वृद्धि और राजस्व घाटे (revenue deficit) में अनुमानित गिरावट दर्शाती है। राज्य प्राथमिक घाटे (primary deficit) के साथ काम करना जारी रखे हुए है, जिसके कारण ऋण सेवा (debt servicing) और चालू व्यय (current expenditures) दोनों के लिए उधार लेने की आवश्यकता है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यआंध्र प्रदेश का फिस्कल ट्रजेक्टोरी (fiscal trajectory) 2023-24 और 2026-27 के बीच की अवधि को कवर करता है।
- तथ्यप्राइमरी डेफिसिट (Primary Deficit) यह दर्शाता है कि सरकार कर्ज के भुगतान (debt servicing) और चालू खर्चों (current expenditures) दोनों के लिए उधार ले रही है।
- तथ्यटैक्स रिसीट्स (Tax receipts) में वृद्धि के माध्यम से इंटरनल रिसोर्स मोबिलाइजेशन (Internal resource mobilization) को लक्षित किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राजकोषीय स्थिरता बनाए रखते हुए ऋण शोधन आवश्यकताओं और पूंजीगत व्यय के बीच संतुलन साधने में भारतीय राज्यों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- डेट-ट्रैप का जोखिम: चालू खर्चों के लिए भारी उधार बनाम उत्पादक पूंजी निवेश
- राजस्व में उतार-चढ़ाव: मानसून की अनिश्चितता और राष्ट्रीय आर्थिक रुझानों के कारण राज्य के टैक्स कलेक्शन में जोखिम
- फ़िस्कल मल्टीप्लायर: कैपिटल स्पेंडिंग के लिए ऐसी ज़रूरत जिससे रिटर्न डेट सर्विसिंग कॉस्ट से ज़्यादा हो
मुख्य शब्द: राजकोषीय सुधार · पूंजीगत व्यय · प्राथमिक घाटा · आंतरिक संसाधन जुटाना · ऋण सेवा · राजकोषीय स्थिरता
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।