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भाग I · स्था. 11.2025 
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सामाजिक न्याय करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के सामाजिक न्याय भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,364 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: शिक्षा नीति (453) · स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य (452) · कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे) (419) · गरीबी, भूख एवं पोषण (37) · मानव संसाधन एवं कौशल विकास (3)

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असम विधानसभा ने 'असम निषेध बहुविवाह विधेयक, 2025' (Assam Prohibition of Polygamy Bill, 2025) पारित किया है

चर्चा में क्यों: असम विधानसभा ने 'असम निषेध बहुविवाह विधेयक, 2025' (Assam Prohibition of Polygamy Bill, 2025) पारित किया है। इस विधेयक का उद्देश्य उन व्यक्तियों को दंडित करना है जो पहली शादी को कानूनी रूप से समाप्त किए बिना दूसरी शादी करते हैं।

यह विधेयक पिछली शादी को छिपाने के लिए 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने की सजा निर्धारित करता है। इसमें विशेष रूप से असम के छठी अनुसूची (Sixth Schedule) वाले क्षेत्रों और अनुच्छेद 342 के तहत मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियों को शामिल नहीं किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • अधिनियम / विधेयकअसम बहुविवाह निषेध विधेयक (Assam Prohibition of Polygamy Bill), 2025: पहली शादी के कानूनी रूप से खत्म हुए बिना दूसरी शादी करने पर दंड का प्रावधान करता है।
  • तथ्यपिछली शादी छिपाने पर सजा: 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना।
  • तथ्यदोहरा अपराध करने वाले अपराधी: बिल में निर्धारित सजा का दोगुना सामना करेंगे।
  • संविधानअनुच्छेद 342: यह अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) की मान्यता से संबंधित है।
  • स्थानअसम के Sixth Schedule क्षेत्र: बिल के लागू होने से मुक्त।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बहुपत्नी विवाह को प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से राज्य-स्तरीय विधानों के कानूनी और सामाजिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए, साथ ही जनजातीय पहचानों के संवैधानिक संरक्षण के साथ इसके संतुलन की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

  • कानूनी विवाद: महिलाओं के लिए राज्य-निर्धारित सुरक्षा और व्यक्तिगत वैवाहिक अधिकारों के बीच संतुलन
  • संघीय टकराव: राज्य कानूनों और छठी अनुसूची सुरक्षा के बीच अधिकार क्षेत्र की जटिलताएँ
  • सांस्कृतिक संवेदनशीलता: धार्मिक व्याख्याओं बनाम वैधानिक कानूनी ढांचे को समझना

मुख्य शब्द: लैंगिक न्याय · कानूनी बहुलवाद · संवैधानिक सुरक्षा · वैधानिक रोक · सामाजिक कानून

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर दिए गए आदेश के बाद

चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर दिए गए आदेश के बाद, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) ने संस्थानों को आवारा कुत्तों की मौजूदगी की रिपोर्ट देने और कार्य योजना (Action Plan) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

GBA ने यह अनिवार्य किया है कि सरकारी और निजी दोनों संस्थान कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें। पशुपालन विभाग को GBA की सीमाओं के भीतर आवारा कुत्तों के लिए विशिष्ट फीडिंग स्पॉट (feeding spots) निर्धारित करने का कार्य सौंपा गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (Greater Bengaluru Authority - GBA): बेंगलुरु में अर्बन मैनेजमेंट और स्ट्रै डॉग रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार संस्था।
  • तथ्यनोडल ऑफिसर्स (Nodal officers): संस्थान के परिसरों में कचरे का प्रबंधन, स्वच्छता और आवारा कुत्तों के दोबारा प्रवेश को रोकने के लिए जिम्मेदार।
  • पदएनिमल हसबेंड्री डिपार्टमेंट (Animal Husbandry Department): आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित फीडिंग स्पॉट (feeding spots) तय करने के लिए जिम्मेदार।
मेन्स के लिए

प्रश्न: शहरी आवारा कुत्तों के प्रबंधन में सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा प्रभावी आवारा कुत्ते जनसंख्या नियंत्रण हेतु एक बहु-हितधारक ढांचे का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम: घने शहरी इलाकों में ज़ूनोटिक बीमारी और रेबीज़ के खतरे को मैनेज करना
  • कानूनी विवाद: जीवन के अधिकार (सुरक्षा) और क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट के तहत पशु कल्याण सुरक्षा के बीच संतुलन
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: स्टैंडर्डाइज्ड वेस्ट मैनेजमेंट और डेडिकेटेड फीडिंग ज़ोन की कमी से आवारा कुत्तों का जमावड़ा

मुख्य शब्द: सार्वजनिक स्वास्थ्य · पशु कल्याण · अर्बन गवर्नेंस · ज़ूनोटिक बीमारियाँ · मल्टी-स्टेकहोल्डर अप्रोच

अमिटी यूनिवर्सिटी में उत्पीड़न के आरोपों के खिलाफ एक छात्र द्वारा दायर याचिका के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना

चर्चा में क्यों: अमिटी यूनिवर्सिटी में उत्पीड़न के आरोपों के खिलाफ एक छात्र द्वारा दायर याचिका के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, शासन और UGC द्वारा की जाने वाली निगरानी की जांच के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित कानूनों, उन्हें मिलने वाले सरकारी लाभों और UGC द्वारा अपनाई जाने वाली निगरानी व्यवस्था के विवरण मांगे हैं। अदालत ने प्रबंधन समिति की संरचना, भर्ती प्रक्रियाओं, शिकायत निवारण तंत्र और न्यूनतम कर्मचारी वेतन से जुड़े डेटा की भी मांग की है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थायूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC): भारत में यूनिवर्सिटी मानकों की निगरानी और विनियमन के लिए जिम्मेदार संस्था।
  • तथ्ययह जांच प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में मैनेजिंग कमिटी के गठन और रिक्रूटमेंट प्रोसेस (recruitment processes) को कवर करती है।
  • तथ्यकोर्ट प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में स्टाफ को दिए जाने वाले न्यूनतम वेतन (minimum salaries) के बारे में जानकारी मांग रहा है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में निजी विश्वविद्यालयों के शासन में निहित विनियामक चुनौतियों का परीक्षण कीजिए और जवाबदेही एवं छात्र कल्याण सुनिश्चित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए।

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: प्राइवेट यूनिवर्सिटी के गवर्नेंस और स्टाफ वेलफेयर को लेकर UGC की निगरानी में कमी
  • जवाबदेही का अंतर: निजी संस्थानों में पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र और मानकीकृत भर्ती प्रोटोकॉल की कमी

मुख्य शब्द: रेगुलेटरी ओवरसाइट · संस्थागत जवाबदेही · छात्र कल्याण · शासन में पारदर्शिता · शिक्षा की समानता

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असम कैबिनेट ने लगातार हो रहे सामुदायिक प्रदर्शनों के बाद छह समुदायों—चुटिया, कोच-राजबोंगी, मटक, मोरन

चर्चा में क्यों: असम कैबिनेट ने लगातार हो रहे सामुदायिक प्रदर्शनों के बाद छह समुदायों—चुटिया, कोच-राजबोंगी, मटक, मोरन, ताई अहोम और 'टी ट्राइब्स' (आदिवासी)—को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की सिफारिश करने वाली एक रिपोर्ट को मंजूरी दी है।

इस रिपोर्ट को असम कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया है और इसे शिक्षा मंत्री रानोज पेगु के नेतृत्व वाली असम सरकार (GoM) द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट ने असम की कपड़ा विरासत (textile heritage) को समर्पित एक नए संग्रहालय के लिए भूमि हस्तांतरण को भी मंजूरी दी है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यST स्टेटस के लिए छह समुदायों की सिफारिश की गई है: चुटिया, कोच-राजबोंगशी, मटक, मोरन, ताई अहोम और 'टी ट्राइब्स' (Adivasis)।
  • पदरानोज पेगु असम के शिक्षा मंत्री हैं।
  • स्थानअसम राज्य कैबिनेट ने रिपोर्ट को मंजूरी दी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विविध समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा प्रदान करने के सामाजिक-राजनीतिक निहितार्थों और पहचान-आधारित मांगों को संबोधित करने में राज्य सरकारों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • पहचान की राजनीति: मान्यता प्राप्त STs के लिए मौजूदा संवैधानिक सुरक्षा और आदिवासी पहचान की मांगों के बीच संतुलन
  • प्रशासनिक बाधा: बहु-समुदाय समावेश के लिए पैतृक वंश और सांस्कृतिक विशिष्टता की पुष्टि की जटिलता

मुख्य शब्द: अनुसूचित जनजाति का दर्जा · पहचान की राजनीति · सामाजिक न्याय · राज्य स्तर पर शासन · आदिवासी अधिकार

GS2 के अन्य विषय

राजव्यवस्था एवं संविधान · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध

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