यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के सामाजिक न्याय भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,364 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: शिक्षा नीति (453) · स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य (452) · कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे) (419) · गरीबी, भूख एवं पोषण (37) · मानव संसाधन एवं कौशल विकास (3)
चर्चा में क्यों: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा मरीज की सुरक्षा पर जोर देने वाले एक आदेश के बाद, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मेडिकल कॉलेजों को अपने पाठ्यक्रम में स्पष्ट प्रिस्क्रिप्शन (prescription) लिखने को शामिल करने का निर्देश दिया है।
NMC ने मेडिकल कॉलेजों को दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन (prescription) संबंधी प्रथाओं की निगरानी के लिए उप-समितियाँ गठित करने का निर्देश दिया है। आयोग ने संस्थानों को तर्कसंगत दवा उपयोग (rational drug use) को बढ़ावा देने के लिए दवाओं के जेनेरिक नाम बड़े अक्षरों (capital letters) में लिखने का निर्देश भी दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थानेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission - NMC): भारत में मेडिकल शिक्षा और प्रैक्टिस के लिए नियामक संस्था।
तथ्यNMC का निर्देश: मेडिकल कॉलेजों के लिए यह अनिवार्य है कि वे प्रिस्क्रिप्शन में स्पष्ट लिखावट और जेनेरिक नामों को कैपिटल लेटर्स (Capital letters) में शामिल करें।
स्थानपंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट: वह न्यायिक संस्था जिसने पेशेंट सेफ्टी (patient safety) पर निर्देश शुरू किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: चिकित्सा नुस्खे (मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन) के अभ्यासों का मानकीकरण किस प्रकार रोगी की सुरक्षा को बढ़ा सकता है और स्वास्थ्य के अधिकार को एक मौलिक अधिकार के रूप में सुनिश्चित करने में सहायक हो सकता है, चर्चा कीजिए।
पेशेंट सेफ्टी: अस्पष्ट लिखावट और नॉन-जेनेरिक ड्रग नेमिंग के कारण होने वाली दवाओं की गलतियों को कम करना
रेगुलेटरी ओवरसाइट: क्लीनिकल कम्युनिकेशन और राशनल ड्रग यूज़ प्रोटोकॉल्स को स्टैंडर्डाइज़ करने में NMC की भूमिका
मुख्य शब्द: मरीज की सुरक्षा · रेशनल ड्रग यूज़ · मेडिकल एथिक्स · रेगुलेटरी कंप्लायंस · स्वास्थ्य का अधिकार
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने हाई कोर्ट को सूचित किया है कि शैक्षणिक संस्थानों और छात्रावासों में रैगिंग को समाप्त करने के लिए एक ड्राफ्ट कानून (Draft legislation) को 45 दिनों के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा।
कानून विभाग द्वारा विधेयक का मसौदा (Draft Bill) आगे बढ़ा दिया गया है और अब यह मुख्यमंत्री एवं राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए लंबित है। यह कदम केरल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (KeLSA) द्वारा रैगिंग के कारण छात्रों की मृत्यु के संबंध में दायर जनहित याचिका (Public Interest Litigation - PIL) के बाद उठाया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाKeLSA: केरल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (Kerala Legal Services Authority) ने मजबूत एंटी-रैगिंग कानूनों की मांग करते हुए PIL फाइल की।
स्थानकेरल: राज्य सरकार विधान सभा में पेश किए जाने वाले विशिष्ट कानून (legislation) का ड्राफ्ट तैयार कर रही है।
तथ्यसरकार ने 45 दिनों की समय सीमा के भीतर ड्राफ्ट लेजिस्लेशन (draft legislation) को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग पर अंकुश लगाने के लिए कठोर विधायी ढांचे की आवश्यकता और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य-संचालित कानूनी निकायों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत जवाबदेही: छात्रों को होने वाले नुकसान के मामलों में शैक्षिक प्रमुखों और हॉस्टल प्रशासकों की जिम्मेदारी तय करना
कानूनी प्रवर्तन में कमी: अपराधियों के लिए प्रशासनिक दिशा-निर्देशों से दंडात्मक विधायी उपायों की ओर बदलाव
साइकोलॉजिकल सेफ्टी: छात्रों की आज़ादी और कमज़ोर छात्रों को शारीरिक और मानसिक शोषण से बचाने की राज्य की ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: विधायी ढांचा · जनहित याचिका · संस्थागत जवाबदेही · छात्र कल्याण · राज्य का हस्तक्षेप
चर्चा में क्यों: मंड्या जिला-स्तरीय गारंटी योजना कार्यान्वयन प्राधिकरण (Mandya District-Level Authority for Implementation of Guarantee Schemes) ने रिपोर्ट दी है कि गृह लक्ष्मी योजना के तहत महिला लाभार्थियों को ₹2,123 करोड़ की राशि वितरित की गई है।
मंड्या जिला-स्तरीय गारंटी योजना कार्यान्वयन प्राधिकरण (Mandya District-Level Authority for Implementation of Guarantee Schemes) ने रिपोर्ट दी है कि 4,61,599 महिला लाभार्थियों को ₹2,123 करोड़ वितरित किए गए। इस योजना के अंतर्गत वे व्यक्ति शामिल नहीं हैं जो आयकर (Income Tax) और GST का भुगतान करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यमंड्या जिले में 4,61,599 महिला लाभार्थियों को ₹2,123 करोड़ वितरित किए गए।
योजनागृह लक्ष्मी योजना अगस्त में शुरू की गई।
तथ्यइनकम टैक्स और GST देने वाले लाभार्थी गृह लक्ष्मी योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
तथ्यभुगतान Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से किए जा रहे हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में महिला-केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावकारिता को बढ़ाने में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और करदाता बहिष्करण जैसे कठोर पात्रता मानदंड किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
समावेशी घर्षण: आधार सीडिंग और ई-केवाईसी में प्रशासनिक बाधाएं लास्ट-माइल डिलीवरी को प्रभावित कर रही हैं
राजकोषीय अखंडता: लीकेज रोकने के लिए सामाजिक-आर्थिक पात्रता के तौर पर टैक्स-पेयर स्टेटस का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर · समाज कल्याण · लास्ट-माइल डिलीवरी · ई-केवाईसी · जेंडर-केंद्रित नीति
चर्चा में क्यों: बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने महाराष्ट्र के पहाड़ी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को असुरक्षित तरीके से घर पर प्रसव (home delivery) के लिए मजबूर किए जाने से संबंधित रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लिया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को 19 दिसंबर, 2025 तक हलफनामा (affidavit) जमा करने का निर्देश दिया है। पहाड़ी क्षेत्रों में संवेदनशील आबादी के लिए चिकित्सा सहायता की कमी का अध्ययन करने हेतु अधिवक्ता गीता देशपांडे को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानऔरंगाबाद बेंच: बॉम्बे हाई कोर्ट की एक बेंच।
पदAmicus Curiae: पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच (healthcare access) के अध्ययन के लिए एडवोकेट गीता देशपांडे को नियुक्त किया गया।
तथ्यकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से 19 दिसंबर, 2025 तक हलफनामा (affidavits) पेश करने की मांग की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में संवेदनशील आबादी तक मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में बाधा डालने वाली संस्थागत और भौगोलिक चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
भौगोलिक बाधा: कठिन इलाका और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की कमी
इम्प्लीमेंटेशन गैप: दूर-दराज और पहाड़ी आबादी तक राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं को पहुँचाने में विफलता
संस्थागत निगरानी: मातृ मृत्यु और होम-डिलीवरी सुरक्षा की मज़बूत मॉनिटरिंग की ज़रूरत
मुख्य शब्द: सुओ मोटो · मातृ स्वास्थ्य · लास्ट-माइल डिलीवरी · कमज़ोर आबादी · स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने हितों के टकराव (conflict of interest) को कम करने के लिए उच्च शिक्षा के नियमन, एक्रिडिटेशन (accreditation) और मानक निर्धारण को अलग-अलग परिषदों में विभाजित करनेकरनेके उद्देश्य से 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल' (VBSA) 2025 का प्रस्ताव रखा है।
VBSA 2025 यह प्रस्ताव करता है कि शिक्षा मंत्रालय संस्थागत अनुपालन (Institutional Compliance) के आधार पर अनुदान वितरण का प्रबंधन करेगा। इस विधेयक का उद्देश्य वस्तुनिष्ठ मानक सुनिश्चित करने के लिए नियामक कार्यों (Regulatory Functions) को वित्तपोषण तंत्र से अलग करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकविकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल (Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill) 2025।
तथ्यशिक्षा मंत्रालय, अनुपालन (compliance) पर आधारित संस्थागत प्रदर्शन के आधार पर ग्रांट (grant) वितरण को संभालेगा।
संस्थारेगुलेशन, एक्रेडिटेशन और स्टैंडर्ड्स-सेटिंग के लिए अलग-अलग काउंसिल स्थापित किए जाएंगे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च शिक्षा में संस्थागत स्वायत्तता सुनिश्चित करने और हितों के टकराव को न्यूनतम करने के उद्देश्य से विनियामक और वित्तपोषण कार्यों के प्रस्तावित पृथक्करण का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
राजनीतिक हस्तक्षेप: शैक्षणिक संस्थानों पर राजनीतिक लाभ के लिए ग्रांट वितरण के इस्तेमाल का जोखिम
रेगुलेटरी क्लैरिटी: एक्रिडिटेशन और स्टैंडर्ड्स-सेटिंग के लिए अलग-अलग काउंसिल के बीच प्रशासनिक टकराव की संभावना
स्वायत्तता बनाम जवाबदेही: राज्य स्तर की अकादमिक आज़ादी और केंद्र के कंप्लायंस-आधारित फंडिंग मैट्रिक्स के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: हितों का टकराव · संस्थागत स्वायत्तता · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · डिकपलिंग · जवाबदेही · अकादमिक मानक
चर्चा में क्यों: स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा है कि कर्नाटक सरकार सहायता प्राप्त स्कूलों (aided schools) के शिक्षकों को 'आरोग्य संजीवनी' योजना के तहत कैशलेस इलाज का लाभ देने पर विचार कर रही है।
कर्नाटक सरकार 'आरोग्य संजीवनी' योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान करने के लिए सहायता प्राप्त स्कूलों (aided schools) के शिक्षकों को इसमें शामिल करने पर विचार कर रही है। मंत्री ने सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए एक भर्ती कैलेंडर की भी घोषणा की है और अगले शैक्षणिक वर्ष तक मिड-डे मील योजना के बोझ को सरल बनाने की योजना बनाई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाआरोग्य संजीवनी: कर्नाटक सरकार की एक योजना जो कैशलेस इलाज (cashless treatment) प्रदान करती है।
तथ्यकर्नाटक सरकार अगले शैक्षणिक वर्ष तक मिड-डे मील स्कीम (Mid-day Meal Scheme) के बोझ को सरल बनाने की योजना बना रही है।
पदमधु बंगारप्पा: कर्नाटक में स्कूल एजुकेशन और लिटरेसी के मंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सार्वजनिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के बीच समान लाभ और बुनियादी ढांचे के वितरण को सुनिश्चित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत असमानता: सरकारी और एडिड स्कूल स्टाफ के बीच स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर तक असमान पहुंच
प्रशासनिक बोझ: मिड-डे मील मैनेजमेंट की जटिलता से स्कूलों की कार्यक्षमता प्रभावित
पॉलिसी इंटीग्रेशन: राज्य-विशिष्ट स्वास्थ्य योजनाओं को विभिन्न श्रेणियों के शिक्षण संस्थानों तक पहुँचाने में चुनौतियाँ
मुख्य शब्द: समान वितरण · सहायता प्राप्त स्कूल · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · प्रशासनिक सरलीकरण · शिक्षा प्रशासन
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने केरल प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोसिएशन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है। यह याचिका केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें क्लीनिकल संस्थानों के लिए सेवाओं की सूची और पैकेज रेट (Package rates) प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।
केरल हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार, क्लीनिकल संस्थानों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी सेवाओं और कीमतों से संबंधित जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इन संस्थानों को शिकायत निवारण डेस्क (Grievance Desks) बनाए रखने होंगे और प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट रेफरेंस नंबर के साथ पंजीकृत करना होगा। इन दिशा-निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका केरल प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोसिएशन और हुसैन कोया थंगल द्वारा दायर की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थासुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया: शीर्ष अदालत ने 3 फरवरी को याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दी।
तथ्यकेरल हाई कोर्ट: क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (clinical establishments) के लिए सर्विस लिस्ट और पैकेज रेट्स के संबंध में गाइडलाइन्स जारी कीं।
तथ्यकेरल प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोसिएशन: याचिकाकर्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में मरीजों के सूचना के अधिकार और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की परिचालन स्वायत्तता के बीच संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: अनिवार्य प्राइस ट्रांसपेरेंसी और प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर ऑटोनॉमी के बीच टकराव
मरीज के अधिकार: स्वास्थ्य के अधिकार के हिस्से के रूप में सेवा की जानकारी तक पहुंच सुनिश्चित करना
जवाबदेही तंत्र: प्राइवेट क्लीनिकों में अनिवार्य ग्रीवेंस डेस्क और यूनिक रेफरेंस नंबरों की प्रभावशीलता
मुख्य शब्द: सूचना का अधिकार · स्वास्थ्य सेवा में पारदर्शिता · रेगुलेटरी ओवरसाइट · मरीज के अधिकार · प्राइवेट हेल्थकेयर गवर्नेंस
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के मंत्री एन. लोकेश ने विमानन पेशेवरों की वैश्विक कमी को दूर करने के लिए भारत के पहले एकीकृत एविएशन, एयरोस्पेस और डिफेंस (AAD) एडुसिटी (EduCity) शुरू करने की घोषणा की।
GMR–MANSAS एविएशन एडुसिटी (Aviation EduCity) आंध्र प्रदेश के भोगपुरम के पास स्थित होगा। यह 136 एकड़ में फैला हुआ है और इसका उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (on-the-job training) को एकीकृत करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानभोगापुरम: आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित एविएशन एडुसिटी (Aviation EduCity) का स्थान।
तथ्यGMR–MANSAS एविएशन एडुसिटी (Aviation EduCity) 136 एकड़ में फैला है।
तथ्ययह प्रोजेक्ट भारत का पहला इंटीग्रेटेड एविएशन, एयरोस्पेस और डिफेंस (AAD) एडुसिटी (EduCity) है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एईडीयू सिटी (AAD EduCity) जैसे एकीकृत शैक्षिक केंद्रों के माध्यम से भारत के तेजी से विस्तारित होते विमानन और एयरोस्पेस क्षेत्रों में कौशल अंतराल को कैसे पाटा जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
स्किल-मिसमैच: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के लिए एकेडमिक करिकुलम को रियल-टाइम इंडस्ट्री की जरूरतों के साथ जोड़ना
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप: इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग के लिए GMR-MANSAS सहयोग का लाभ उठाना
ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस: भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय लेबर की कमी को दूर करना
मुख्य शब्द: कौशल विकास · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · व्यावसायिक प्रशिक्षण · एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर · मानव संसाधन विकास
चर्चा में क्यों: रिपोर्ट्स में इस बात पर जोर दिया गया है कि दस्तावेजीकरण की सख्त शर्तें, विशेष रूप से पिता का ट्रांसफर सर्टिफिकेट और जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate) की मांग।
यह मुद्दा बेंगलुरु की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले स्वच्छता कार्यकर्ताओं और एकल माताओं से संबंधित है, जिन्हें अपने बच्चों की शिक्षा संबंधी लाभों के लिए आवेदन खारिज होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान व्यवस्था में पिता का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य है, जो अक्सर विधवाओं के नेतृत्व वाले परिवारों या औपचारिक शिक्षा से वंचित परिवारों के लिए प्राप्त करना कठिन होता है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यदस्तावेजी बाधा विशेष रूप से पिता के ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता से संबंधित है।
स्थानस्कॉलरशिप (Scholarship) न मिलने के रिपोर्ट किए गए मामले मुख्य रूप से कर्नाटक के बेंगलुरु में केंद्रित हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सामाजिक कल्याण योजनाओं से कमजोर वर्गों के व्यवस्थित बहिष्करण में कठोर प्रशासनिक दस्तावेजीकरण आवश्यकताओं की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
प्रशासनिक बाधा: सख्त दस्तावेज़ संबंधी ज़रूरतें पिछड़े और एकल-अभिभावक परिवारों के लिए 'पेपरवर्क ट्रैप' पैदा कर रही हैं
पॉलिसी एक्सक्लूजन: जेंडर-बायस्ड नियम डिजाइन महिला प्रधान परिवारों की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को समझने में विफल
मुख्य शब्द: सिस्टमैटिक एक्सक्लूजन · प्रशासनिक बाधाएं · जेंडर-न्यूट्रल पॉलिसी · सामाजिक कल्याण तक पहुँच · हाशिए पर रहने वाले समुदाय
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने आठ साल पुराने स्टे ऑर्डर (stay order) में संशोधन करते हुए तमिलनाडु सरकार को हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVs) स्थापित करने के लिए जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को छह सप्ताह के भीतर JNVs के लिए भूमि की पहचान करने का निर्देश दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन (P. Wilson) ने तर्क दिया कि यह योजना हिंदी थोपने के लिए एक 'बैकडोर एंट्री' है, जबकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसका मुख्य ध्यान ग्रामीण शिक्षा पर है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाजवाहर नवोदय विद्यालय (JNVs) ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली छात्रों के लिए स्थापित स्कूल हैं।
स्थानयह निर्देश विशेष रूप से तमिलनाडु के प्रत्येक जिले में JNVs की स्थापना से संबंधित है।
तथ्यसुप्रीम कोर्ट ने राज्य को आवश्यक भूमि की पहचान करने के लिए छह सप्ताह की समय-सीमा (timeline) निर्धारित की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय शैक्षिक योजनाओं को लागू करने के लिए केंद्र की शक्तियों और भाषाई एवं सांस्कृतिक पहचान पर राज्यों की स्वायत्तता के बीच संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
संघीय टकराव: केंद्र के शैक्षिक निर्देशों और राज्य स्तर के भाषाई संरक्षण के बीच विवाद
पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: ग्रामीण शैक्षिक इक्विटी और भाषाई वर्चस्व पर क्षेत्रीय चिंताओं के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सहकारी संघवाद · शिक्षा में समानता · भाषाई पहचान · न्यायिक हस्तक्षेप
चर्चा में क्यों: सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवकुट्टी ने STARS योजना के तहत सभी 14 जिलों में मॉडल ऑटिज़्म कॉम्प्लेक्स (Model Autism Complexes) स्थापित करने की घोषणा की है।
सरकार ने सभी 14 जिलों में स्थापित किए जाने वाले प्रत्येक मॉडल ऑटिज्म कॉम्प्लेक्स (Model Autism Complex) के लिए ₹2.75 करोड़ आवंटित किए हैं। STARS (Strengthening Teaching-Learning and Results for States) योजना इन सुविधाओं के लिए प्राथमिक ढांचा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाSTARS: Strengthening Teaching-Learning and Results for States scheme.
तथ्यप्रत्येक मॉडल ऑटिज़्म कॉम्प्लेक्स (Autism Complex) के लिए ₹2.75 करोड़ की फंडिंग आवंटित की गई है।
तथ्य2027 तक SSLC परीक्षाओं में न्यूनतम विषय लागू किए जाने हैं।
तथ्यप्लस टू हायर सेकेंडरी छात्रों के लिए ब्रेल (Braille) पाठ्यपुस्तकें वितरित की गईं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ऑटिज्म जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों से ग्रस्त बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करने में विशिष्ट बुनियादी ढांचे और समावेशी शैक्षिक संसाधनों के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
इन्फ्रास्ट्रक्चरल गैप: ग्रामीण और जिला स्तर पर विशेष क्लिनिकल और पेडागोजिकल सुविधाओं की ज़रूरत
समावेशी शिक्षा पद्धति: मेनस्ट्रीमिंग से लेकर ब्रेल और विषय-न्यूनतम फ्रेमवर्क के जरिए विशेष सहायता की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: समावेशी शिक्षा · न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर · STARS स्कीम · शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर · शिक्षा का अधिकार
चर्चा में क्यों: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने 2014 में की गई संदिग्ध प्रविष्टियों की समीक्षा के बाद, पश्चिम बंगाल की केंद्रीय OBC सूची से 35 मुस्लिम समुदायों को बाहर करने की सिफारिश की है।
NCBC की सिफारिश जनवरी 2025 में 2014 की सूची में किए गए संशोधनों की समीक्षा के बाद दी गई थी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले ही 2024 में कई मुस्लिम समुदायों को शामिल करने के फैसले को रद्द कर दिया था। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट पिछड़ेपन के दावों के समर्थन में मात्रात्मक डेटा (quantifiable data) की मांग कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाNCBC: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (National Commission for Backward Classes)।
तथ्यपश्चिम बंगाल की Central OBC लिस्ट से बाहर करने के लिए 35 मुस्लिम समुदायों की सिफारिश की गई।
स्थानकलकत्ता हाई कोर्ट ने 2024 में OBC में शामिल किए गए नामों को रद्द कर दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सूची में समुदायों को शामिल करने के लिए सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को निर्धारित करने के मानदंडों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
डेटा इंटीग्रिटी: पिछड़ेपन के दावों की पुष्टि के लिए मात्रात्मक सामाजिक-आर्थिक डेटा की आवश्यकता
न्यायिक निगरानी: राज्य स्तरीय आरक्षण सूचियों के ऑडिट में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
प्रशासनिक जांच: केंद्रीय सूचियों में अनियमित शामिलियों की पहचान में NCBC की भूमिका
मुख्य शब्द: सामाजिक न्याय · आरक्षण नीति · मापने योग्य डेटा · संवैधानिक निकाय · पिछड़ेपन के मापदंड
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा के नियमों में व्यापक बदलाव के लिए 12 सदस्यीय अम्ब्रेला कमीशन (Umbrella Commission) की स्थापना का प्रस्ताव देते हुए 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025' पेश किया है।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) आयोग में 12 सदस्य होंगे और यह UGC, AICTE और NCTE के कार्यों का स्थान लेगा। इस विधेयक का उद्देश्य रेगुलेटरी, एक्रेडिटेशन और स्टैंडर्ड्स काउंसिल की निगरानी को एक ही अंब्रेला बॉडी (umbrella body) के तहत केंद्रीकृत करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
अधिनियम / विधेयकविकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025: उच्च शिक्षा विनियमन (regulation) में व्यापक बदलाव के लिए प्रस्तावित बिल।
संस्थाVBSA: एक प्रस्तावित 12-सदस्यीय अम्ब्रेला कमीशन (umbrella commission) जो अलग-अलग रेगुलेटरी, एक्रेडिटेशन और स्टैंडर्ड्स काउंसिल की निगरानी करेगा।
तथ्यVBSA, University Grants Commission (UGC), All India Council for Technical Education (AICTE) और National Council for Teacher Education (NCTE) के कार्यों का स्थान लेगा।
योजनानेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020: सरकार ने प्रस्तावित रेगुलेटरी ओवरहाल (regulatory overhaul) के लिए इसे आधार बताया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उच्च शिक्षा के विनियमन हेतु एक 'अम्ब्रेला कमीशन' (छाता आयोग) के गठन के निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के साथ किस प्रकार संरेखित होता है? विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी कंसोलिडेशन: नौकरशाही के ओवरलैप को कम करने के लिए UGC, AICTE और NCTE की निगरानी को सुव्यवस्थित करना
मानकीकरण बनाम स्वायत्तता: केंद्रीकृत एक्रेडिटेशन मानकों और विविध संस्थानों की अकादमिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन
एन्फोर्समेंट मैकेनिज्म: नेशनल एजुकेशनल स्टैंडर्ड्स के पालन को सुनिश्चित करने के लिए ग्रेड वाले जुर्माने लागू करना
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी ओवरहॉल · अम्ब्रेला कमीशन · एक्रेडिटेशन स्टैंडर्ड्स · शैक्षिक शासन · NEP 2020 अलाइनमेंट
चर्चा में क्यों: AIIMS दिल्ली ने इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में एक अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें युवा वयस्कों में COVID-19 टीकाकरण और अचानक होने वाली मौतों के बीच किसी भी संबंध को खारिज किया गया है।
AIIMS दिल्ली द्वारा किए गए एक साल के अध्ययन में युवा वयस्कों के बीच अचानक हुई मौतों के 2,214 मामलों की जांच की गई। इस अध्ययन में पाया गया कि इन मौतों का प्राथमिक कारण टीकाकरण के बजाय अंतर्निहित कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाAIIMS: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जो दिल्ली में स्थित है।
तथ्यअध्ययन का सैंपल साइज: अचानक हुई मौतों के 2,214 मामले।
तथ्यप्राथमिक कारण की पहचान: अंतर्निहित कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में चिकित्सा संबंधी भ्रामक सूचनाओं (medical misinformation) से निपटने में आने वाली चुनौतियों और साक्ष्य-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
सूचना की असमानता: सोशल मीडिया पर अनवेरिफाइड दावों का तेज़ी से फैलना बनाम धीमी साइंटिफिक पीयर-रिव्यू साइकिल
जनता के भरोसे में कमी: नेशनल इम्यूनाइजेशन लक्ष्यों और हर्ड इम्यूनिटी पर वैक्सीन हिचकिचाहट का असर
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर गैप: युवा आबादी में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों की शुरुआती स्क्रीनिंग की ज़रूरत
मुख्य शब्द: सबूतों पर आधारित मेडिसिन · सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार · गलत सूचना · कार्डियोवास्कुलर स्वास्थ्य · पीयर-रिव्यूड रिसर्च
चर्चा में क्यों: एक बहु-देशीय अध्ययन (multi-country study) से पता चला है कि भारत में लगभग पांच में से एक गर्भवती महिला 'अर्ली जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस' (Early Gestational Diabetes Mellitus - EGDM) से प्रभावित होती है, जिससे भविष्य में जीवनभर के लिए डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
इस अध्ययन में भारत, ऑस्ट्रेलिया, कुवैत और ग्रेट ब्रिटेन की 3,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि EGDM की व्यापकता लेट जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस (LGDM) की तुलना में अधिक है, जो 19.5% है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यEGDM की व्यापकता: अध्ययन में शामिल लगभग पांच में से एक गर्भवती महिला इससे प्रभावित है।
तथ्यLGDM की व्यापकता (prevalence): 19.5% की दर से दर्ज की गई।
विज्ञान-तकनीकEGDM रिस्क: यह हाई ब्लड शुगर लेवल और जीवन में आगे चलकर डायबिटीज होने के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है।
पदवी. मोहन: मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (Madras Diabetes Research Foundation) के चेयरमैन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बढ़ते गर्भकालीन मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज) के सार्वजनिक स्वास्थ्य निहितार्थों पर चर्चा कीजिए और इसके प्रारंभिक परीक्षण एवं दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए उपयुक्त रणनीतियों का सुझाव दीजिए।
डायग्नोस्टिक गैप: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में शुरुआती चरण के जेस्टेशनल डायबिटीज के लिए स्टैंडर्ड स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल की कमी
लॉन्ग-टर्म मॉर्बिडिटी: शुरुआती जेस्टेशनल डायबिटीज और क्रोनिक टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: मेटाबॉलिक स्क्रीनिंग के लिए सुसज्जित विशेष मैटरनल हेल्थ क्लीनिकों की कमी
मुख्य शब्द: मातृ स्वास्थ्य · जेस्टेशनल डायबिटीज · निवारक स्वास्थ्य सेवा · मेटाबोलिक डिसऑर्डर · सार्वजनिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग
चर्चा में क्यों: एक संसदीय पैनल ने सिफारिश की है कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) को हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) को इसके उत्कृष्ट अनुभवात्मक शिक्षा मॉडल (experiential education model) के लिए मान्यता प्रदान करनी चाहिए।
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) लद्दाख स्थित एक संस्थान है, जिसकी स्थापना शिक्षाविद सोनम वांगचुक द्वारा की गई है। संसदीय पैनल ने सुझाव दिया है कि UGC, शिक्षा में नवाचार के केंद्रों (Centres of Innovation in Education) के माध्यम से इसे लागू करने के लिए HIAL के मॉडल का अध्ययन करे।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाUGC: University Grants Commission भारत में शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता देने के लिए जिम्मेदार संस्था है।
स्थानHIAL: लद्दाख स्थित एक संस्थान जो अनुभवात्मक शिक्षा (experiential education) पर केंद्रित है।
तथ्यHIAL के कार्यों में आइस स्तूपों (ice stupas) का कार्यान्वयन और सामुदायिक सहभागिता गतिविधियाँ शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लद्दाख जैसे ग्रामीण और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की शिक्षा प्रणालियों में अनुभवात्मक अधिगम (experiential learning) मॉडलों के महत्व पर चर्चा कीजिए। इन मॉडलों को संस्थागत मान्यता के माध्यम से किस प्रकार व्यापक स्तर पर विस्तारित किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।
शिक्षा पद्धति में बदलाव: दूर-दराज के क्षेत्रों में रट्टा मारने के बजाय कम्युनिटी-सेंट्रिक एक्सपीरेंशियल मॉडल पर ज़ोर
संस्थागत बाधा: गैर-पारंपरिक, समुदाय-आधारित शैक्षिक हस्तक्षेपों के लिए औपचारिक मान्यता की कमी
स्केलेबिलिटी की समस्या: आइस स्तूप जैसे स्थानीय और साइट-विशिष्ट नवाचारों को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल करने की चुनौतियां
मुख्य शब्द: अनुभवात्मक शिक्षा · शिक्षा में नवाचार · सामुदायिक सहभागिता · संस्थागत मान्यता · विकेंद्रीकृत लर्निंग
चर्चा में क्यों: पारदर्शिता बढ़ाने और संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के 'UMEED' पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण में उत्तर प्रदेश ने देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
उत्तर प्रदेश ने UMEED पोर्टल पर 92,832 वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण किया है, जिससे यह कार्य मूल समय सीमा से छह महीने पहले ही पूरा हो गया। इस पोर्टल का प्रबंधन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाUMEED: Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development पोर्टल।
पदकेंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (Union Ministry of Minority Affairs): वक्फ प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की देखरेख करने वाला केंद्रीय मंत्रालय।
तथ्यउत्तर प्रदेश ने UMEED पोर्टल पर 92,832 वक्फ प्रॉपर्टीज (Waqf properties) को रजिस्टर किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन के डिजिटलीकरण से पारदर्शिता को कैसे बढ़ाया जा सकता है और सामुदायिक संपत्तियों के दुरुपयोग को कैसे रोका जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत पारदर्शिता: अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए ज़मीन के मालिकाना हक के रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाना
गवर्नेंस की कुशलता: इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सामुदायिक कल्याण के लिए प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंटेशन को आसान बनाना
मुख्य शब्द: पारदर्शिता · डिजिटल गवर्नेंस · एसेट मैनेजमेंट · अल्पसंख्यक कल्याण · संपत्ति के अधिकार
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को एक राष्ट्रीय अंग आवंटन नीति (National Organ Allocation Policy) बनाने और 'पंजीकरण जन्म और मृत्यु नियम 1999' (Registration of Births and Deaths Rules 1999) में संशोधन करने का निर्देश दिया है, ताकि इसमें ब्रेन डेथ (Brain Death) प्रमाणन को शामिल किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में 'पंजीकरण जन्म और मृत्यु नियम 1999' (Registration of Births and Deaths Rules 1999) के फॉर्म 4 और 4A में संशोधन शामिल है। केरल 2020 में ब्रेन डेथ (brain death) प्रमाणन को अंग दान से अलग करने वाला पहला राज्य था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाK-SOTTO: केरल स्टेट ऑर्गॅन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन ऑर्गनाइजेशन (Kerala State Organ and Tissue Transplantation Organisation) ब्रेन डेथ निर्धारण के लिए ट्रेनिंग प्रदान करता है।
तथ्यकेरल 2020 में ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन (brain death certification) को ऑर्गन डोनेशन (organ donation) से अलग करने वाला पहला राज्य बना।
अधिनियम / विधेयकRegistration of Births and Deaths Rules 1999: ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन (brain death certification) को शामिल करने के लिए नियमों में संशोधन की आवश्यकता।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में एक सुदृढ़ राष्ट्रीय अंग आवंटन प्रणाली की सुविधा हेतु मस्तिष्क मृत्यु प्रमाणन के मानकीकरण में निहित संस्थागत और प्रक्रियात्मक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
क्लीनिकल हिचकिचाहट: ब्रेन डेथ तय करने में ज़ीरो-एरर नतीजों के भारी दबाव के कारण प्रैक्टिसर्स की झिझक
रेगुलेटरी गैप: केरल के 2020 डी-लिंकिंग जैसे खंडित राज्य-स्तरीय अभ्यासों को बदलने के लिए मानकीकृत राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की ज़रूरत
कानूनी-प्रक्रियात्मक बाधा: जन्म और मृत्यु पंजीकरण नियमों को क्लिनिकल ऑर्गन डोनेशन प्रोटोकॉल के साथ जोड़ने की ज़रूरत
मुख्य शब्द: देखभाल का मानक · ऑर्गन आवंटन · ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · क्लिनिकल प्रोटोकॉल
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक फेडरेशन ऑफ अनटचेबल नोमैडिक कम्युनिटीज (Karnataka Federation of Untouchable Nomadic Communities) को आश्वासन दिया है कि वह आंतरिक आरक्षण (Internal Reservation) के लिए एक विधेयक और एक अलग नोमैडिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Nomadic Development Corporation) पर विचार करेगी।
कर्नाटक फेडरेशन ऑफ अनटचेबल नोमैडिक कम्युनिटीज ने घुमंतू समुदायों को श्रेणी 'सी' (Category C) से अलग करने और उन्हें एक अलग श्रेणी के तहत 1% आरक्षण देने का प्रस्ताव दिया है। सरकार सोमवार को सदन में आंतरिक आरक्षण (Internal Reservation) पर एक विधेयक पेश करने की योजना बना रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यघुमंतू समुदायों (nomadic communities) के लिए प्रस्तावित आरक्षण: एक अलग कैटेगरी के तहत 1%।
संस्थानोमैडिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Nomadic Development Corporation): घुमंतू समुदायों के कल्याण के लिए एक प्रस्तावित संस्था।
स्थानकर्नाटक: राज्य सरकार आंतरिक आरक्षण बिल (Internal Reservation Bill) का प्रस्ताव दे रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में हाशिए पर स्थित समूहों के लिए समावेशी विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में घुमंतू समुदायों के लिए आंतरिक आरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
पहचान आधारित समावेश: खानाबदोश आबादी के सामने आने वाली विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करना बनाम सामान्य वर्ग के लाभ
प्रशासनिक ढांचा: विशिष्ट लॉजिस्टिक जरूरतों वाली मोबाइल आबादी को मैनेज करने के लिए डेडिकेटेड कॉर्पोरेशंस की स्थापना
मुख्य शब्द: आंतरिक आरक्षण · सामाजिक न्याय · खानाबदोश समुदाय · समावेशी विकास · नीति निर्माण
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री एम. सुब्रह्मणन ने सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) को रोकने के लिए 9-14 वर्ष की आयु की 3,38,000 लड़कियों के लिए एक मुफ्त HPV टीकाकरण कार्यक्रम की घोषणा की है।
यह कार्यक्रम शुरू में चार उच्च-प्रसार वाले जिलों में शुरू किया जाएगा और बाद में तमिलनाडु के सभी 38 जिलों में विस्तारित किया जाएगा। राज्य सरकार ने अपने पिछले बजट में इस कार्यक्रम के लिए ₹36 करोड़ आवंटित किए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्ययह प्रोग्राम 9-14 वर्ष की आयु की 3,38,000 लड़कियों को लक्षित करता है।
तथ्यटीकाकरण शेड्यूल में प्रत्येक लड़की के लिए दो खुराक शामिल हैं।
तथ्यराज्य सरकार ने अपने पिछले बजट में HPV वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए ₹36 करोड़ आवंटित किए।
स्थानयह प्रोग्राम अंततः तमिलनाडु के सभी 38 जिलों में विस्तारित होगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लैंगिक-विशिष्ट स्वास्थ्य असमानताओं को दूर करने और गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बोझ को कम करने में लक्षित टीकाकरण कार्यक्रमों के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
सार्वजनिक स्वास्थ्य समानता: सर्वाइवल रेट में क्षेत्रीय असमानता कम करने के लिए हाई-इंसिडेंस क्लस्टर्स को संबोधित करना
राजकोषीय संघवाद: राज्य-स्तरीय बजट आवंटन और विशेष वैक्सीन वितरण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर: किशोरियों के लिए इलाज के बजाय शुरुआती दौर में इम्यूनाइजेशन पर फोकस शिफ्ट करना
मुख्य शब्द: निवारक स्वास्थ्य सेवा · टीकाकरण · सार्वजनिक स्वास्थ्य समानता · लिंग-विशिष्ट स्वास्थ्य · गैर-संचारी रोग
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने पिछले तीन वर्षों में राज्य में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की 14,526 मौतों को स्वीकार किया है। उन्होंने पालघर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण और बीमारी की गंभीर स्थिति पर चिंता जताई है।
महाराष्ट्र ने तीन साल की अवधि के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की 14,526 मौतों की सूचना दी है। राज्य ने नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate - NMR) को कम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals) 2030 के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है, लेकिन राज्य अभी भी शिशु और मातृ मृत्यु दर से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यपिछले तीन वर्षों में महाराष्ट्र में 5 साल से कम उम्र के 14,526 बच्चे मारे गए।
स्थानपालघर: इसे कुपोषण और बीमारियों वाले एक आदिवासी क्षेत्र (tribal area) के रूप में पहचाना गया है।
योजनाIntegrated Child Development Services (ICDS): कुपोषण को कम करने के लिए महाराष्ट्र द्वारा लागू की गई योजना।
योजनाप्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: कुपोषण को कम करने के लिए महाराष्ट्र द्वारा लागू की गई योजना।
योजनासुपोषित मुंबई: कुपोषण को कम करने के लिए महाराष्ट्र द्वारा लागू की गई एक स्कीम।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में नवजात मृत्यु दर के लक्ष्यों को प्राप्त करने के बावजूद, जनजातीय क्षेत्रों में शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम करने में निरंतर बनी रहने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
भौगोलिक असमानता: सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण पालघर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण की अधिकता
पोषण की कमी: सबसे पिछड़े ग्रामीण आबादी तक पहुँचने में मौजूदा योजनाओं की विफलता
डेटा-पॉलिसी गैप: NMR लक्ष्यों को पूरा करने और उच्च कुल शिशु मृत्यु दर के बीच अंतर
मुख्य शब्द: नियोनेटल मॉर्टालिटी रेट · कुपोषण · सतत विकास लक्ष्य · जनजातीय कल्याण · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने 16.94 लाख महिलाओं को मासिक स्टाइपेंड (stipend) प्रदान करने के लिए 'कलैग्नार मगलिर उरीमै थिट्टम' के दूसरे चरण की शुरुआत की।
कलाईग्नार मगलिर उरिमाइ थिट्टम (Kalaignar Magalir Urimai Thittam) योजना के तहत महिलाओं को ₹1,000 की मासिक स्टाइपेंड (stipend) प्रदान की जाती है। इस कार्यक्रम को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पुडुचेरी, कर्नाटक, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम सहित कई राज्यों में लागू किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाकलैग्नर मगलिर उरिमै थिट्टम (Kalaignar Magalir Urimai Thittam): तमिलनाडु राज्य सरकार की एक योजना जो महिलाओं को ₹1,000 का मासिक स्टाइपेंड (stipend) प्रदान करती है।
तथ्यइस योजना के दूसरे चरण का लक्ष्य तमिलनाडु में 16.94 लाख महिलाओं को लाभ पहुँचाना है।
तथ्यइस योजना को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पुडुचेरी, कर्नाटक, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम सहित कई राज्यों में लागू किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में 'कलैग्नार मगलिर उरिमाइ थिट्टम' जैसी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं के महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा में योगदान का विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय स्थिरता: मासिक स्टाइपेंड पर होने वाले लंबे समय के सरकारी खर्च और एकमुश्त इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के बीच संतुलन
सशक्तीकरण बनाम निर्भरता: क्या कैश ट्रांसफर आर्थिक स्वायत्तता को बढ़ावा देते हैं या सरकारी कल्याण पर सिस्टमैटिक निर्भरता पैदा करते हैं
मुख्य शब्द: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर · महिला सशक्तिकरण · सामाजिक सुरक्षा · राजकोषीय संघवाद · लैंगिक समानता
चर्चा में क्यों: सिविल सोसाइटी समूह 'कैम्पेन अगेंस्ट हेट स्पीच' ने कर्नाटक सरकार से प्रस्तावित 'कर्नाटक हेट स्पीच एंड हेट क्राइम्स (प्रिवेंशन) बिल, 2025' पर सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation) के दायरे को बढ़ाने का आग्रह किया है।
'कैम्पेन अगेंस्ट हेट स्पीच' समूह ने विधेयक के उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन हेट स्पीच के लिए अलग से दंड के प्रावधानों की कमी की आलोचना की। उन्होंने अधिकारियों को दी गई व्यापक शक्तियों और सेंसरशिप (censorship) की संभावना से जुड़ी चिंताओं पर भी प्रकाश डाला।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानकर्नाटक: वह राज्य जहाँ Hate Speech and Hate Crimes (Prevention) Bill, 2025 प्रस्तावित है।
तथ्यहेट स्पीच के खिलाफ अभियान: बिल पर व्यापक स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट (stakeholder engagement) की वकालत करने वाला सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षण और घृणास्पद भाषण (हेट स्पीच) की रोकथाम के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
कानूनी अस्पष्टता: 'हेट क्राइम' की व्यापक परिभाषा से मनमानी कार्रवाई का जोखिम
लोकतांत्रिक कमी: समावेशी विधायी ड्राफ्टिंग सुनिश्चित करने के लिए मल्टी-स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन की ज़रूरत
कार्यपालिका की अतिरेक: अधिकारियों को दी गई विवेकाधीन शक्तियों के दायरे को लेकर चिंताएं
मुख्य शब्द: भाषण की स्वतंत्रता · हेट स्पीच · जनता से परामर्श · विधायी निगरानी · सिविल सोसाइटी एंगेजमेंट
चर्चा में क्यों: कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुसार मेडिकल स्नातकों को स्थायी पंजीकरण (Permanent Registration) प्राप्त करने से पहले अनिवार्य सरकारी सेवा पूरी करनी होगी।
कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग के नए दिशा-निर्देश मौजूदा मेडिकल रजिस्ट्रेशन कानूनों पर प्रभावी होंगे। कर्नाटक मेडिकल काउंसिल अस्थायी पंजीकरण जारी करने के लिए जिम्मेदार है, जबकि अंतिम डिग्री प्रमाणपत्र 2012 के अधिनियम द्वारा शासित होते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाकर्नाटक मेडिकल काउंसिल: मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए टेम्परेरी रजिस्ट्रेशन (temporary registrations) जारी करने के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्यकर्नाटक में स्थायी मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने के लिए अनिवार्य सरकारी सेवा (Mandatory government service) एक पूर्व शर्त है।
अधिनियम / विधेयक2012 एक्ट: राज्य में फाइनल डिग्री सर्टिफिकेट जारी करने को नियंत्रित करने वाला कानून।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के समान वितरण की प्राप्ति में चिकित्सा स्नातकों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
ह्यूमन रिसोर्स गैप: अनिवार्य ग्रामीण पोस्टिंग और शहरी इलाकों में हेल्थकेयर की कमी के जोखिम के बीच संतुलन
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: राज्य स्तर के अनिवार्य सेवा आदेशों और नेशनल मेडिकल काउंसिल मानकों के बीच संभावित टकराव
मुख्य शब्द: समान स्वास्थ्य सेवा · ग्रामीण-शहरी असमानता · ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · रेगुलेटरी मैंडेट
चर्चा में क्यों: डॉ. अनुराग श्रीवास्तव द्वारा कैंसर को देशव्यापी अधिसूचित बीमारी (notifiable disease) घोषित करनेकी मांग से संबंधित एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किए हैं।
यह याचिका एम्स (AIIMS) के सेवानिवृत्त ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग श्रीवास्तव द्वारा दायर की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि पूरे भारत में व्यवस्थित कैंसर निगरानी (Cancer Surveillance) के अभाव के कारण एक 'डेटा ब्लैक होल' पैदा हो जाता है, जो शुरुआती पहचान और प्रभावी नीति निर्धारण में बाधा डालता है।
चर्चा में क्यों: राज्यसभा में एक निजी सदस्य के प्रस्ताव में केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन करने का आग्रह किया गया है, ताकि प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा (Early Childhood Care and Education - ECCE) को मुफ्त और अनिवार्य बनाया जा सके।
मनोनीत सांसद सुधा मूर्ति ने तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण ECCE (Early Childhood Care and Education) तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करनेसंबंधी प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में इस देखभाल को प्रदान करने के लिए आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदसुधा मूर्ति: राज्यसभा की नामित सदस्य।
तथ्यECCE का टारगेट आयु वर्ग: तीन से छह वर्ष के बीच के बच्चे।
संस्थाआंगनवाड़ी सेवाएं: भारत में प्रारंभिक बचपन की देखभाल (early childhood care) के लिए प्राथमिक बुनियादी ढांचा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में समान मानव संसाधन विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा के लिए संवैधानिक गारंटी की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत बाधा: मौजूदा आंगनवाड़ी केंद्रों में अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन क्षमता
संवैधानिक जनादेश: ECCE को नीतिगत लक्ष्य से बच्चों के मौलिक अधिकार में बदलना
इक्विटी गैप: गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक बचपन की शिक्षा तक पहुंच में क्षेत्रीय असमानता को दूर करना
मुख्य शब्द: संवैधानिक संशोधन · प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा · आंगनवाड़ी सेवाएँ · यूनिवर्सल एक्सेस · मानव पूंजी
चर्चा में क्यों: स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने खुलासा किया है कि कर्नाटक में इस साल 188 स्कूलों में नामांकन शून्य है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच के संकट को दर्शाता है।
कर्नाटक में कुल 188 स्कूलों में शून्य नामांकन (zero enrollment) दर्ज किया गया, जिसमें 160 लोअर प्राइमरी, 29 हायर प्राइमरी और 3 हाई स्कूल शामिल हैं। तुमकुरु जिले में ऐसे स्कूलों की सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई, जो कि 45 है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकर्नाटक में 188 स्कूलों में इस वर्ष जीरो एनरोलमेंट (zero enrollment) की रिपोर्ट मिली है।
स्थानतुमकुरु जिले में जीरो-एनरोलमेंट स्कूलों की संख्या सबसे अधिक (45) है।
तथ्यकर्नाटक में RTE अनुपालन दर (compliance rate) 23.6% बताई गई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण भारत में स्कूली नामांकन में गिरावट के लिए उत्तरदायी कारकों का विश्लेषण कीजिए और शिक्षा के अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन में सुधार हेतु उचित उपाय सुझाइए।
संस्थागत अंतर: 23.6% की कम RTE अनुपालन दर सार्वभौमिक पहुंच में बाधा
ह्यूमन रिसोर्स की कमी: शिक्षकों के खाली पदों की बड़ी संख्या स्कूलों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है
भौगोलिक असमानता: तुमकुरु और कालाबुरगी जैसे विशिष्ट जिलों में शून्य-नामांकन वाले स्कूलों की अधिकता
मुख्य शब्द: शिक्षा का अधिकार · शिक्षा की समानता · मानव पूंजी · ग्रामीण-शहरी अंतर · इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने UGC, AICTE और NCTE के स्थान पर एक एकल उच्च शिक्षा नियामक (Single Higher Education Regulator) स्थापित करने के लिए 'विकसित भारत शिक्षा अधिकार विधेयक' (Viksit Bharat Shiksha Adhikshan Bill) को मंजूरी दी है।
यह विधेयक भारत में चिकित्सा और कानून महाविद्यालयों को छोड़कर, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए विनियमन (regulation), मान्यता (accreditation) और पेशेवर मानकों की निगरानी हेतु एक एकल नियामक (single regulator) का प्रस्ताव करता है। हालांकि आयोग नियामक कार्यों को संभालेगा, लेकिन वित्तपोषण (funding) प्रशासनिक मंत्रालय के अधीन ही रहेगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
अधिनियम / विधेयकViksit Bharat Shiksha Adhikshan Bill: एक सिंगल हायर एजुकेशन रेगुलेटर (single higher education regulator) बनाने के लिए प्रस्तावित कानून।
तथ्यनया रेगुलेटर University Grants Commission (UGC), All India Council for Technical Education (AICTE) और National Council for Teacher Education (NCTE) की जगह लेगा।
तथ्यप्रस्तावित रेगुलेटर (regulator) मेडिकल और लॉ कॉलेजों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर रखता है।
संस्थारेगुलेटरी कमीशन (Regulatory Commission) एक्रेडिटेशन और स्टैंडर्ड्स को संभालेगा, जबकि फंडिंग एडमिनिस्ट्रेटिव मिनिस्ट्री (Administrative Ministry) के पास रहेगी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च शिक्षा के लिए एक एकल नियामक की स्थापना, शैक्षणिक शासन को सुव्यवस्थित करने के राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के साथ किस प्रकार संरेखित होती है, चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी एफिशिएंसी: एक्रेडिटेशन को आसान बनाने के लिए UGC, AICTE और NCTE के ओवरलैपिंग मैंडेट्स को कम करना
संस्थागत स्वायत्तता: केंद्रीकृत रेगुलेटरी ओवरसाइट और विविध उच्च शिक्षा संस्थानों की अकादमिक आज़ादी के बीच संतुलन
राजकोषीय ढांचा: प्रशासनिक फंडिंग मैकेनिज्म से रेगुलेटरी फंक्शन्स को अलग करना
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी स्ट्रीमलाइनिंग · अकादमिक एक्रेडिटेशन · NEP 2020 · संस्थागत शासन · शिक्षा नीति
चर्चा में क्यों: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मणिपुर के सेनापति जिले का दौरा किया। उन्होंने सभी समुदायों से शांति और सुलह के प्रयासों में सहयोग करने का आग्रह किया और साथ ही विविध जनजातीय समूहों की सुरक्षा पर जोर दिया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने 12 दिसंबर, 2025 को मणिपुर के सेनापति जिले का दौरा किया। उन्होंने विशेष रूप सेमरम जनजाति को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group - PVTG) के रूप में रेखांकित किया और दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा के लिए परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणमरम जनजाति: मणिपुर में इसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group - PVTG) के रूप में मान्यता दी गई है।
स्थानसेनापति जिला: मणिपुर में राष्ट्रपति की यात्रा का स्थान।
तथ्यराष्ट्रपति का दौरा 12 दिसंबर, 2025 को हुआ।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पूर्वोत्तर भारत में समावेशी विकास सुनिश्चित करने और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने में विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों (PVTGs) की पहचान करने और उनके संरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
पहचान का संरक्षण: आदिवासी स्वायत्तता और मुख्यधारा के विकासात्मक इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच संतुलन
सुरक्षा-विकास नेक्सस: सांप्रदायिक तनाव कम करने के लिए दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी को जोड़ना
संस्थागत निगरानी: मणिपुर में जातीय सुलह कराने में केंद्र सरकार की भूमिका
मुख्य शब्द: सांप्रदायिक सद्भाव · समावेशी विकास · PVTG सुरक्षा · शांति और सुलह · जनजातीय स्वायत्तता
चर्चा में क्यों: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (Social Media Intermediaries) को आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) का सम्मान करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश उनके नाम, तस्वीरों और AI द्वारा बनाए गए वीडियो के अनधिकृत उपयोग के संबंध में दिया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पवन कल्याण की याचिका पर सात दिनों के भीतर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादी को न्यायपालिका के पास जाने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म्स पर शिकायत दर्ज करानी होगी। इस मामले की सुनवाई 22 दिसंबर को निर्धारित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदपवन कल्याण आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं।
तथ्यदिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (social media intermediaries) को कार्रवाई करने के लिए 7 दिनों की डेडलाइन दी।
विज्ञान-तकनीकइस याचिका में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाले AI-जनरेटेड वीडियो को हटाने का अनुरोध शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जेनरेटिव एआई (Generative AI) और अनधिकृत डिजिटल सामग्री निर्माण के युग में 'व्यक्तित्व अधिकारों' (Personality Rights) के कानूनी और नैतिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
रेगुलेटरी गैप: AI-जनरेटेड डीपफेक्स और अनधिकृत लाइक्स के इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाले विशिष्ट कानून की कमी
प्लेटफ़ॉर्म लायबिलिटी: इंटरमीडियरी इम्युनिटी और पर्सनालिटी राइट्स के उल्लंघन को रोकने की ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन
न्यायिक प्रक्रिया: न्यायिक हस्तक्षेप से पहले इंटरनल प्लेटफॉर्म शिकायत तंत्र का इस्तेमाल करना अनिवार्य
मुख्य शब्द: पर्सनैलिटी राइट्स · जेनरेटिव AI · इंटरमीडियरी लायबिलिटी · डिजिटल पहचान · डीपफेक्स
चर्चा में क्यों: तेलंगाना विमेंस सेफ्टी विंग ने महिलाओं द्वारा संचालित परिवहन सेवा प्रदान करने के लिए 'She Bikes and She Autos' पहल और उत्पीड़न से निपटने के लिए 'He for She' कार्यक्रम की घोषणा की है।
तेलंगाना विमेंस सेफ्टी विंग, महिलाओं द्वारा संचालित बाइक और ऑटो सेवाओं को शुरू करने के लिए कैब एग्रीगेटर्स (cab aggregators) के साथ साझेदारी कर रहा है। उत्पीड़न के खिलाफ पुरुषों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए 2026 में 'ही फॉर शी' (He for She) कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाShe Bikes and She Autos: महिलाओं द्वारा संचालित परिवहन के लिए तेलंगाना राज्य की एक पहल।
तथ्यHe for She: उत्पीड़न के खिलाफ हस्तक्षेप करने के लिए पुरुषों को प्रोत्साहित करने हेतु एक नियोजित 2026 प्रोग्राम।
स्थानतेलंगाना: उत्पीड़न की कम रिपोर्टिंग दर की समस्या को हल करने के लिए राज्य द्वारा पहल शुरू की जा रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में महिलाओं की शहरी सुरक्षा में सुधार के लिए समुदाय-आधारित पहल और लिंग-पृथक परिवहन सेवाओं के योगदान का विश्लेषण कीजिए।
रिपोर्टिंग में अंतर: बदले के डर या सामाजिक कलंक के कारण कम अपराध रिपोर्टिंग दर
सोशल इंजीनियरिंग: बायेस्टैंडर ज़िम्मेदारी से जुड़े सांस्कृतिक मानदंडों को बदलने के लिए पुरुषों की भागीदारी का इस्तेमाल
सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर: शहरी केंद्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन विकल्पों की कमी को दूर करना
मुख्य शब्द: जेंडर-सेंसिटिव अर्बन मोबिलिटी · बाइस्टैंडर इंटरवेंशन · सार्वजनिक सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर · सोशल इंजीनियरिंग · लिंग आधारित हिंसा
चर्चा में क्यों: NIMHANS के शोधकर्ताओं ने 'ऑनलाइन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स' में एक अध्ययन प्रकाशित किया है। इस अध्ययन में भारत की उच्च शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियों के भीतर डिजिटल टूल्स (digital tools) के रणनीतिक और साक्ष्य-आधारित एकीकरण (evidence-informed integration) की वकालत की गई है।
यह अध्ययन कम डिजिटल साक्षरता, निम्न और मध्यम आय वाले देशों से सीमित साक्ष्यों और अनियंत्रित ऐप्स (unregulated apps) के प्रसार जैसी बाधाओं की पहचान करता है। यह एक 'स्टेप्ड-केयर मॉडल' (stepped-care model) का प्रस्ताव करता है, जिसमें तकनीक के माध्यम से सामान्य समस्याओं का समाधान किया जाएगा, जबकि जटिल जरूरतों के लिए मानव-आधारित सेवाओं का उपयोग किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्ययह स्टडी टेक्नोलॉजी और मानव-आधारित सेवाओं के बीच संतुलन बनाने के लिए 'स्टेप्ड-केयर मॉडल' (stepped-care model) की वकालत करती है।
विज्ञान-तकनीकयह पेपर मेंटल हेल्थ ऐप डेवलपर्स के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन्स की आवश्यकता पर जोर देता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के मानसिक स्वास्थ्य ढांचे में डिजिटल स्वास्थ्य उपकरणों को एकीकृत करने में निहित चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण कीजिए।
डेटा गवर्नेंस: अनरेगुलेटेड मेंटल हेल्थ ऐप्स में प्राइवेसी ब्रीच और गोपनीयता की कमी के जोखिम
ह्यूमन-टेक बैलेंस: यह सुनिश्चित करना कि तकनीक मानव-आधारित क्लिनिकल इंटरवेंशन की जगह लेने के बजाय उसे सहारा दे
डिजिटल डिवाइड: मानसिक स्वास्थ्य सहायता तक समान पहुंच पर कम डिजिटल साक्षरता का प्रभाव
मुख्य शब्द: स्टेप्ड-केयर मॉडल · डिजिटल साक्षरता · डेटा गवर्नेंस · सबूतों पर आधारित · मेंटल हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स
चर्चा में क्यों: इंडियन मेडिकल पार्लियामेंटेरियंस फोरम (IMPF) ने नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज (NPRD 2021) के तहत इलाज में आने वाली रुकावटों के कारण दुर्लभ लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर्स (Lysosomal Storage Disorders) से पीड़ित बच्चों की देखभाल में पैदा हुए संकट पर चिंता जताई है।
अनिल बोन्दे के नेतृत्व में 45 डॉक्टर-जनप्रतिनिधियों से बने एक बहुदलीय निकाय, IMPF ने सरकार से पात्र LSD रोगियों के लिए ₹50 लाख की सीमा को हटाने या बढ़ाने का आग्रह किया है। इस मंच ने इस बात पर जोर दिया कि NPRD 2021 के तहत उपचार में आने वाली बाधाएं दर्जनों युवा रोगियों को जोखिम में डाल रही हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाइंडियन मेडिकल पार्लियामेंटेरियंस फोरम (IMPF) 45 डॉक्टर-से-विधायक (doctors-turned-lawmakers) की एक क्रॉस-पार्टी बॉडी है।
योजनानेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज (NPRD 2021) भारत में दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए एक फ्रेमवर्क प्रदान करती है।
तथ्यपात्र Lysosomal Storage Disorder (LSD) मरीजों के लिए वर्तमान कैप ₹50 लाख है।
पदअनिल बोन्डे IMPF के चेयरपर्सन और राज्यसभा के सदस्य हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति (NPRD 2021) के अंतर्गत अति-दुर्लभ विकारों (ultra-rare disorders) के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए।
फंडिंग की समस्या: हाई-कॉस्ट अल्ट्रा-रेयर लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर इलाज के लिए ₹50 लाख की कैप अपर्याप्त
पॉलिसी गैप: फंड के लिए भरोसेमंद मैकेनिज्म की कमी से बच्चों के इलाज में रुकावटें
मुख्य शब्द: दुर्लभ बीमारियाँ · स्वास्थ्य समानता · पॉलिसी सुधार · सार्वजनिक स्वास्थ्य गवर्नेंस · लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर
चर्चा में क्यों: सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड सोशल स्टडीज (CESS) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि हालांकि तेलंगाना में उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ा है, लेकिन राज्य को निजीकरण और बढ़ती असमानता से महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021-22 के लिए तेलंगाना के उच्च शिक्षा क्षेत्र में सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) 40% दर्ज किया गया है। यह रिपोर्ट छोटे संस्थानों के आकार और वित्तीय संसाधनों के अपर्याप्त आवंटन को प्रमुख प्रणालीगत समस्याओं के रूप में पहचानती है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्य2021-22 में तेलंगाना का उच्च शिक्षा ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (Gross Enrolment Ratio) 40% तक पहुंच गया।
संस्थासेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड सोशल स्टडीज (CESS) वह संस्था है जिसने यह रिपोर्ट तैयार की है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेलंगाना जैसे राज्यों में उच्च शिक्षा के तीव्र निजीकरण का हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच पर पड़ने वाले प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संसाधनों की असमानता: प्राइवेट संस्थानों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम कम फंड वाले पब्लिक कॉलेज
एक्सेस बैरियर: प्राइवेट सेक्टर में भारी ट्यूशन फीस उच्च शिक्षा के लिए एक सामाजिक-आर्थिक फ़िल्टर बन रही है
रेगुलेटरी गैप: प्राइवेट संस्थानों द्वारा स्टैंडर्ड क्वालिटी बेंचमार्क पूरे करने के लिए मजबूत ओवरसाइट की ज़रूरत
मुख्य शब्द: कुल नामांकन अनुपात · शिक्षा में समानता · निजीकरण · संसाधन आवंटन · सामाजिक-आर्थिक स्तरीकरण
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बुनियादी ढांचे और छात्रों के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए उस्मानिया यूनिवर्सिटी (Osmania University) को एक वैश्विक संस्थान में बदलने हेतु ₹1,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की।
यह परियोजना दिसंबर 2027 तक पूरी होने वाली है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यओसमानिया यूनिवर्सिटी के ग्लोबल मेकओवर के लिए ₹1,000 करोड़ का निवेश आवंटित किया गया है।
तथ्यप्रोजेक्ट पूरा होने की डेडलाइन दिसंबर 2027 है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च शिक्षा में प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थियों के लिए अवसर प्रदान करने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में राज्य-वित्तपोषित बुनियादी ढांचा निवेश की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: प्रमुख राज्य विश्वविद्यालयों और ग्रामीण कॉलेजों के बीच शैक्षणिक सुविधाओं की असमानता को दूर करना
सोशल मोबिलिटी: इंटीग्रेटेड हेल्थ और हॉस्टल सुविधाओं के जरिए फर्स्ट-जनरेशन लर्नर्स के लिए पहुंच बढ़ाना
मुख्य शब्द: सामाजिक न्याय · उच्च शिक्षा · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी · राज्य वित्तपोषण
चर्चा में क्यों: किडवाई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी द्वारा 'इंडियन जर्नल ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी' में प्रकाशित एक अध्ययन में 45 वर्ष से कम आयु के भारतीयों में कोलोरैक्टल कैंसर (colorectal cancer) के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई है।
इस अध्ययन में किडवे मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (Kidwai Memorial Institute of Oncology) में 2019 और 2024 के बीच निदान किए गए मरीजों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि इन मरीजों में से लगभग एक-तिहाई की उम्र 45 वर्ष से कम थी, जो वैश्विक औसत की तुलना में काफी अधिक है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाकिडवाई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (Kidwai Memorial Institute of Oncology): वह रिसर्च बॉडी जिसने कोलोरैक्टल कैंसर (colorectal cancer) पर अध्ययन किया।
तथ्य2019 और 2024 के बीच किडवाई (Kidwai) में निदान किए गए colorectal cancer के मरीजों में से एक-तिहाई मरीज 45 साल से कम उम्र के थे।
विज्ञान-तकनीकइंडियन जर्नल ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (Indian Journal of Surgical Oncology): वह प्रकाशन जहाँ अध्ययन जारी किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बदलते खान-पान के तौर-तरीकों और जीवनशैली के कारकों का भारतीय युवाओं में कोलोरेक्टल कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों की बढ़ती घटनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
एपिडेमियोलॉजिकल शिफ्ट: तेज़ी से होते शहरीकरण के कारण युवा आबादी में लाइफस्टाइल से जुड़े कैंसर के मामले बढ़े
डायग्नोस्टिक एक्सेसिबिलिटी: बीमारी के बढ़ने से पहले ही मामलों की पहचान करने के लिए बेहतर स्क्रीनिंग क्षमताएं
न्यूट्रिशनल ट्रांजिशन: प्रोसेस्ड फूड और सुस्त जीवनशैली की ओर बदलाव से गट हेल्थ पर असर
मुख्य शब्द: गैर-संचारी रोग · पोषण संबंधी बदलाव · महामारी संबंधी बदलाव · प्रारंभिक स्क्रीनिंग · लाइफस्टाइल फैक्टर्स
चर्चा में क्यों: केरल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (KeLSA) द्वारा दायर एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation) के बाद, केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर अपने एंटी-रैगिंग कानून को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।
केरल हाई कोर्ट ने यह आदेश तब जारी किया जब राज्य सरकार ने सूचित किया कि प्रस्तावित कानून (draft legislation), जिसमें दोषियों के लिए विशिष्ट दंड का प्रावधान शामिल है, अभी अंतिम रूप से तय होना बाकी है। यह कानूनी कार्यवाही KeLSA द्वारा हाल की घटनाओं, जिसमें रैगिंग का एक घातक मामला शामिल था, के जवाब में शुरू की गई थी।
स्थानकेरल हाई कोर्ट: एंटी-रैगिंग (anti-ragging) पर राज्य की विधायी देरी की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
तथ्यकोर्ट ने राज्य सरकार को एंटी-रैगिंग कानून (anti-ragging law) को अंतिम रूप देने के लिए एक सप्ताह की समय सीमा तय की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग को रोकने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचे की आवश्यकता और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में न्यायिक सक्रियता की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
विधायी जड़ता: अपराधियों के लिए विशिष्ट सजा तय करने में देरी से तत्काल रोक लगाने में बाधा
संस्थागत जवाबदेही: शैक्षिक निकायों और कानून प्रवर्तन के बीच मानकीकृत रिपोर्टिंग मैकेनिज्म की ज़रूरत
न्यायिक निगरानी: छात्र कल्याण के आदेशों पर राज्य को कार्रवाई के लिए मजबूर करने में हाई कोर्ट की भूमिका
मुख्य शब्द: न्यायिक सक्रियता · छात्र कल्याण · विधायी देरी · जनहित याचिका · निवारण