यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के सामाजिक न्याय भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,356 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: शिक्षा नीति (451) · स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य (449) · कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे) (418) · गरीबी, भूख एवं पोषण (35) · मानव संसाधन एवं कौशल विकास (3)
चर्चा में क्यों: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार को हसिला बील वेटलैंड (wetland) से बेदखल किए गए 566 परिवारों को राशन, चिकित्सा सेवा और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया है।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार के चार विभागों को एक अस्थायी शिविर (makeshift camp) में रह रहे 566 परिवारों को आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इन परिवारों को दी जाने वाली सुविधाओं का विवरण देते हुए 9 मार्च तक हलफनामा (affidavit) पेश करने की मांग की है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थागुवाहाटी हाई कोर्ट: वह न्यायिक संस्था जिसने असम सरकार को आदेश जारी किया।
योजनाNFSA (National Food Security Act): इसके तहत कोर्ट ने राशन के प्रावधान का निर्देश दिया।
स्थानहसीला बील: वह वेटलैंड (wetland) क्षेत्र जहाँ से परिवारों को बेदखल किया गया था।
तथ्य566 परिवार: वर्तमान में इस अस्थाई कैंप (makeshift camp) में रहने वाले परिवारों की संख्या।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विस्थापित आबादी के प्रति राज्य के संवैधानिक दायित्वों और बेदखल समुदायों के जीवन के अधिकार को सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
जीवन का अधिकार: अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों के रूप में स्वच्छता और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करना
प्रशासनिक जवाबदेही: राज्य विभागों के लिए अस्थायी आवास के बजाय व्यवस्थित पुनर्वास प्रदान करने की आवश्यकता
न्यायिक निगरानी: बेदखली पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के कार्यान्वयन की निगरानी में हाई कोर्ट की भूमिका
मुख्य शब्द: जीवन का अधिकार · न्यायिक सक्रियता · पुनर्वास · सामाजिक न्याय · प्रशासनिक जवाबदेही
चर्चा में क्यों: तेलंगाना में एकीकृत विज्ञान प्रयोगशालाओं (Integrated Science Labs) वाले माध्यमिक स्कूलों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है, हालांकि यह तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों से पीछे है।
तेलंगाना में 13,103 माध्यमिक स्कूल हैं, जिनमें से 67.2% स्कूलों में एकीकृत विज्ञान प्रयोगशालाएं (Integrated Science Labs) उपलब्ध हैं। ऐसी सुविधाओं के लिए राष्ट्रीय औसत 57.1% है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतेलंगाना के माध्यमिक स्कूलों में इंटीग्रेटेड साइंस लैब्स (Integrated Science Labs) वाले स्कूलों का प्रतिशत: 67.2%।
तथ्यएकीकृत साइंस लैब्स (integrated science labs) वाले सेकेंडरी स्कूलों का राष्ट्रीय औसत: 57.1%।
तथ्यतेलंगाना की तुलना में अधिक लैब उपलब्धता वाले राज्य: तमिलनाडु, ओडिशा और पंजाब।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विज्ञान शिक्षा को सुदृढ़ करने में प्रयोगशाला अवसंरचना के महत्व और विभिन्न भारतीय राज्यों में प्रयोगशालाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर में असमानता: स्कूलों में लैब की उपलब्धता में क्षेत्रीय अंतर से विज्ञान की समान शिक्षा प्रभावित
शिक्षण पद्धति में बदलाव: थ्योरी से अनुभव आधारित लर्निंग की ओर बदलाव जिसमें भारी पूंजी निवेश की ज़रूरत है
रिसोर्स एलोकेशन: लैब मेंटेनेंस की लागत और बुनियादी क्लासरूम इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: अनुभवात्मक शिक्षा · इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विटी · शिक्षण पद्धति में बदलाव · पूंजीगत व्यय · शिक्षा में असमानता
चर्चा में क्यों: करूर विस्या बैंक ने दक्षिण भारतीय जनजातीय भाषाओं को संरक्षित करने के लिए मद्रास यूनिवर्सिटी में एक 'इंडिजिनस एंड एंडेंजर्ड लैंग्वेजेज लेबोरेटरी' (Indigenous and Endangered Languages Laboratory) की स्थापना के लिए फंड दिया है।
यह प्रयोगशाला सोलिगा, कोटा, टोडा, इरुला और बडगा सहित स्वदेशी समुदायों की भाषाओं के दस्तावेजीकरण और अध्ययन पर केंद्रित है। यह बुजुर्गों और विद्वानों को शामिल करते हुए एक सामुदायिक सहभागिता मॉडल (Community Engagement Model) का उपयोग करती है, ताकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान के हस्तांतरण को सुनिश्चित किया जा सके।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यलक्षित समुदाय: सोलिगा, कोटा, टोडा, इरुला और बडागा।
पदकरूर विस्य बैंक (KVB): इसने अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के माध्यम से लैब को फंड किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण में लुप्तप्राय स्वदेशी भाषाओं के दस्तावेजीकरण के महत्व और भाषाई संरक्षण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
ज्ञान का क्षरण: भाषाई बदलाव और औपचारिक दस्तावेज़ीकरण की कमी के कारण मौखिक परंपराओं का तेज़ी से खत्म होना
समुदाय-केंद्रित संरक्षण: शैक्षणिक दस्तावेज़ीकरण और स्वदेशी भाषियों के अधिकारों और एजेंसी के बीच संतुलन
CSR एक उत्प्रेरक के रूप में: सार्वजनिक शिक्षा में सांस्कृतिक संरक्षण की कमियों को दूर करने के लिए प्राइवेट कॉर्पोरेट फंड्स का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: भाषाई विविधता · सांस्कृतिक निरंतरता · स्वदेशी अधिकार · ज्ञान का संरक्षण · CSR पहल
चर्चा में क्यों: केरल के उच्च शिक्षा मंत्री आर. बिंदु ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कॉलेजों के बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम में सुधार के लिए ₹6,000 करोड़ के निवेश की योजना की घोषणा की।
केरल सरकार ने चार साल की अवधि के दौरान बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) के लिए ₹6,000 करोड़ आवंटित किए हैं। इस पहल में चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स को लागू करना और अनुसंधान (Research) एवं रोजगार क्षमता (Employability) पर केंद्रित संशोधित पाठ्यक्रम शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकेरल के कॉलेज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए चार वर्षों में ₹6,000 करोड़ का निवेश।
योजनाScholar Connect: छात्रों को डायस्पोरा (diaspora) विशेषज्ञों से जोड़ने वाली एक योजना।
तथ्यकेरल के कॉलेजों में चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (undergraduate programs) का कार्यान्वयन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक अर्थव्यवस्था में छात्रों की रोजगार क्षमता को बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम को उद्योग की मांगों और अनुसंधान क्षमताओं के साथ संरेखित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
करिकुलम-इंडस्ट्री गैप: अकादमिक आउटपुट को जॉब मार्केट की बदलती जरूरतों और रिसर्च-आधारित स्किल डेवलपमेंट के साथ जोड़ना
डायस्पोरा एंगेजमेंट: घरेलू छात्रों के लिए मेंटरशिप गैप को कम करने हेतु वैश्विक भारतीय विशेषज्ञता का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: रोज़गार क्षमता · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · पाठ्यक्रम सुधार · रिसर्च स्किल्स · डायस्पोरा जुड़ाव
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, आंध्र प्रदेश विधान सभा ने राज्य के कानूनों से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभावपूर्ण संदर्भों को हटाने के लिए दो संशोधन विधेयक (Amendment Bills) पारित किए।
धार्मिक बंदोबस्त मंत्री (Endowments Minister) अनम रामनारायणा रेड्डी ने श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 सहित कई संशोधनों को पेश किया। यह कदम कुष्ठ रोग से प्रभावित नागरिकों के लिए संवैधानिक समानता सुनिश्चित करने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम का हिस्सा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकश्री वेंकटेश्वर वैदिक यूनिवर्सिटी (संशोधन) बिल, 2026: आंध्र प्रदेश विधान सभा द्वारा पारित।
तथ्यइन संशोधनों का उद्देश्य राज्य के कानूनों से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभावपूर्ण संदर्भों को हटाना है।
पदअनाम रामनारायणा रेड्डी: आंध्र प्रदेश के एंडोमेंट्स मिनिस्टर (Endowments Minister)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को सुनिश्चित करनेके लिए हाशिए पर स्थित समूहों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण कानूनी प्रावधानों को हटाना किस प्रकार एक संवैधानिक आवश्यकता है, चर्चा कीजिए।
संवैधानिक जनादेश: अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता और गरिमा के अधिकार के साथ राज्य के कानूनों को जोड़ना
विधायी सुधार: कुष्ठ रोग से प्रभावित समुदायों के लिए समावेशी शासन की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: संवैधानिक समानता · भेदभावपूर्ण कानून · सामाजिक समावेश · विधायी संशोधन · गरिमा का अधिकार
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने के लिए PPP (Public-Private Partnership) मॉडल के तहत 61 निर्वाचन क्षेत्रों में मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों की स्थापना की घोषणा की है।
इस पहल के अंतर्गत आंध्र प्रदेश के 61 निर्वाचन क्षेत्रों में मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल स्थापित करने और मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने का प्रावधान है। इस परियोजना में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार के लिए क्रिटिकल केयर ब्लॉक और ट्रॉमा सेंटर का निर्माण शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानआंध्र प्रदेश: मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल एक्सपेंशन प्रोजेक्ट (multi-speciality hospital expansion project) को लागू करने वाला राज्य।
तथ्य61 निर्वाचन क्षेत्र: नए अस्पताल स्थापित करने के लिए लक्षित क्षेत्रों की संख्या।
योजनाPPP मॉडल: हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (Public-Private Partnership) मॉडल का उपयोग किया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली में बुनियादी ढाँचे के अंतराल को पाटने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय बाधा: आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में सार्वजनिक फंडिंग और निजी मुनाफे के बीच संतुलन
सेवा समानता: प्राइवेट-लेड इंफ्रास्ट्रक्चर में पिछड़े वर्गों के लिए किफायती पहुंच सुनिश्चित करना
रेगुलेटरी ओवरसाइट: PPP हेल्थकेयर मॉडल में क्वालिटी स्टैंडर्ड और प्राइसिंग की मजबूत मॉनिटरिंग की ज़रूरत
मुख्य शब्द: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · स्वास्थ्य सेवा इन्फ्रास्ट्रक्चर · क्रिटिकल केयर · सेवा वितरण · ग्रामीण-शहरी अंतर
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के लंबित रहने के दौरान, नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) को सहायता प्राप्त स्कूलों में 20,000 से अधिक शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति करने की अनुमति देने के ढील को आगे बढ़ा दिया है।
केरल सरकार का यह निर्णय वर्तमान में प्रोविजनल या दैनिक वेतन (daily wage) के आधार पर कार्यरत 20,000 से अधिक शिक्षकों को प्रभावित करता है। इस आदेश के तहत सहायता प्राप्त स्कूलों (aided schools) के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आरक्षित पदों पर दिव्यांग व्यक्तियों की नियुक्ति करें।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानकेरल: राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों के नियमितीकरण (regularisation) के लिए आदेश जारी किया जा रहा है।
तथ्यवर्तमान में 20,000 से अधिक शिक्षक प्रोविजनल (provisional) या दैनिक वेतन (daily wage) के आधार पर काम कर रहे हैं।
संस्थाNair Service Society (NSS): एक ऐसी संस्था जिसे विशिष्ट सहायता प्राप्त स्कूलों (aided schools) के पदों पर स्थायी नियुक्तियां करने की अनुमति है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शिक्षा क्षेत्र में संविदात्मक और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने में आने वाली चुनौतियों और सार्वजनिक सेवा वितरण की गुणवत्ता पर इसके प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
संस्थागत अस्थिरता: 20,000 से ज्यादा शिक्षकों के लिए जॉब सिक्योरिटी की कमी से पढ़ाई की निरंतरता प्रभावित
आरक्षण विवाद: समुदाय आधारित कोटा और दिव्यांगों के लिए बने नियमों के बीच संतुलन
प्रशासनिक बाधा: जिला स्तर की कमेटियों की गतिविधियों में देरी से स्कूलों में स्टाफ की तैनाती प्रभावित
मुख्य शब्द: नियमितीकरण · सहायता प्राप्त स्कूल · नौकरी की सुरक्षा · समावेशी शिक्षा · प्रशासनिक शासन
चर्चा में क्यों: कॉलेजिएट एजुकेशन विभाग ने सरकारी फर्स्ट-ग्रेड कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी के लिए शैक्षणिक और व्यावसायिक प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता की जांच करने हेतु एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है।
SOP के अनुसार, प्रत्येक कॉलेज में एक 'प्रमाण पत्र सत्यापन समिति' (Certificates Verification Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जिसके अध्यक्ष कॉलेज के प्रिंसिपल होंगे। यह समिति PG मार्कशीट, NET, SLET, K-SET, Ph.D., M.Phil., PwD और कल्याण कर्नाटक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए जिम्मेदार होगी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थासर्टिफिकेट वेरिफिकेशन कमेटी (Certificates Verification Committee): गेस्ट फैकल्टी के क्रेडेंशियल को सत्यापित करने के लिए प्रिंसिपल के नेतृत्व में एक कॉलेज-स्तरीय निकाय।
तथ्यEMIS: वह एजुकेशन मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (Education Management Information System) पोर्टल जहाँ प्रमाणपत्रों में विसंगतियों (discrepancies) की रिपोर्ट की जानी चाहिए।
तथ्यK-SET: नए SOP के तहत सत्यापित किए जाने वाले विशिष्ट योग्यता प्रमाणपत्रों में से एक।
तथ्यSLET: State Level Eligibility Test, गेस्ट फैकल्टी के लिए सत्यापित की जाने वाली एक योग्यता।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सार्वजनिक उच्च शिक्षा में शैक्षणिक सत्यनिष्ठा और योग्यता-आधारित भर्ती सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ सत्यापन तंत्र के महत्व पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत अखंडता: सरकारी फंड वाले शैक्षणिक संस्थानों में अयोग्य कर्मियों के प्रवेश को रोकना
प्रशासनिक जवाबदेही: EMIS जैसे सेंट्रलाइज्ड डिजिटल पोर्टल्स के जरिए विसंगतियों की रिपोर्टिंग को आसान बनाना
मुख्य शब्द: अकादमिक ईमानदारी · स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर · योग्यता तंत्र · सार्वजनिक जवाबदेही · सत्यापन तंत्र
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें सब्सिडी वाले ई-स्कूटर और वित्तीय सहायता शामिल है। इन योजनाओं का संचालन तेलंगाना स्टेट माइनॉरिटीज फाइनेंस कॉर्पोरेशन (TGMFC) द्वारा किया जाएगा।
इन योजनाओं में सब्सिडी वाले ई-स्कूटर, महिलाओं और कमजोर व्यावसायिक समूहों के लिए वित्तीय सहायता, तथा तुरका कशा मुस्लिम समुदाय के लिए टूल किट और जनरेटर शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 19 फरवरी, 2026 को शुरू हुए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थातेलंगाना स्टेट माइनॉरिटीज फाइनेंस कॉर्पोरेशन (TGMFC) इन कल्याणकारी योजनाओं को संचालित करने वाली संस्था है।
तथ्यये योजनाएं टरका काशा मुस्लिम समुदाय को टूल किट्स और जनरेटर्स सहित विशिष्ट सहायता प्रदान करती हैं।
तथ्यकल्याणकारी योजनाओं के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 19 फरवरी, 2026 को शुरू हुए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सामाजिक-आर्थिक समावेश को बढ़ावा देने में लक्षित कल्याणकारी योजनाओं की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
समावेशन तंत्र: एसेट-आधारित सब्सिडी के ज़रिए अल्पसंख्यक उप-समूहों की विशिष्ट व्यावसायिक कमज़ोरियों को दूर करना
प्रशासनिक दक्षता: कल्याणकारी लाभों की लास्ट-माइल डिलीवरी को सुव्यवस्थित करने में समर्पित राज्य निगमों की भूमिका
मुख्य शब्द: सामाजिक-आर्थिक समावेश · लक्षित हस्तक्षेप · अल्पसंख्यक कल्याण · एसेट-आधारित सब्सिडी · लास्ट-माइल डिलीवरी
चर्चा में क्यों: तेलंगाना आदिवासी कल्याण विभाग ने अपने STEM-60 कार्यक्रम की सफलता की रिपोर्ट दी है, जिसके तहत आदिवासी छात्रों को राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के लिए मुफ्त आवासीय कोचिंग प्रदान की गई थी।
तेलंगाना जनजातीय कल्याण विभाग द्वारा वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के अगस्त महीने में STEM-60 कार्यक्रम शुरू किया गया। यह कार्यक्रम JEE और NEET की तैयारी करने वाले ST छात्रों के लिए मुफ्त आवासीय कोचिंग, अलग छात्रावास, पौष्टिक भोजन और विषय-वार फैकल्टी सपोर्ट प्रदान करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यSTEM-60 प्रोग्राम ने JEE Main परीक्षा में 53.57% पास प्रतिशत हासिल किया।
तथ्यइस प्रोग्राम के तहत पंद्रह आदिवासी छात्रों ने JEE Advanced क्वालीफाई किया और पांच छात्रों ने NITs के लिए एलिजिबिलिटी हासिल की।
योजनाSTEM-60 तेलंगाना सरकार की एक पहल है जो ST छात्रों के लिए रेजिडेंशियल कोचिंग (residential coaching) प्रदान करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के उच्च शिक्षा परिदृश्य में अनुसूचित जनजातियों के लिए लक्षित आवासीय कोचिंग कार्यक्रम शैक्षिक असमानता को पाटने में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, चर्चा कीजिए।
संसाधनों की असमानता: आदिवासी बहुल क्षेत्रों में हाई-क्वालिटी कोचिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को दूर करना
होलिस्टिक सपोर्ट: STEM में शैक्षणिक सफलता के लिए पोषण और आवासीय स्थिरता को बुनियादी शर्त के रूप में जोड़ना
मुख्य शब्द: शिक्षा में समानता · टारगेटेड इंटरवेंशन · सामाजिक गतिशीलता · STEM शिक्षा · जनजातीय कल्याण
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली केंद्र-राज्य संबंधों पर उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव के तहत राज्य विश्वविद्यालयों के चांसलर के रूप में गवर्नरों की भूमिका को समाप्त करने की बात कही गई है।
समिति ने संघवाद और शैक्षणिक स्वायत्तता (Academic Autonomy) को ध्यान में रखते हुए शिक्षा पर अधिकार वापस राज्यों को सौंपने की सिफारिश की है। इसमें सुझाव दिया गया है कि शीर्ष विश्वविद्यालयों को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नियंत्रण से मुक्त किया जाए और प्रवेश नियंत्रण वापस राज्यों को लौटा दिया जाए।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदगवर्नर: कमेटी की आलोचना के अनुसार, वर्तमान में कई स्टेट यूनिवर्सिटीज में चांसलर की भूमिका निभाते हैं।
तथ्यसमिति सिफारिश करती है कि एडमिशन कंट्रोल (Admissions Control) को विशेष रूप से राज्यों को वापस लौटा दिया जाए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शैक्षिक संघवाद और शैक्षणिक स्वायत्तता के संदर्भ में राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में राज्यपालों की भूमिका के संवैधानिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संघीय टकराव: उच्च शिक्षा में UGC के जरिए केंद्र का नियंत्रण और राज्य की स्वायत्तता के बीच विवाद
संस्थागत बाधा: चांसलर के रूप में राज्यपाल की भूमिका से विश्वविद्यालय की प्रशासनिक स्वतंत्रता और शैक्षणिक आजादी पर असर
मुख्य शब्द: शैक्षिक फेडरलिज्म · अकादमिक स्वायत्तता · सहकारी संघवाद · यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन · संवैधानिकवाद
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने KEAM 2026 इंजीनियरिंग परीक्षा के लिए एक संशोधित सामान्यीकरण फॉर्मूला (normalisation formula) की घोषणा की है। इसमें तमिलनाडु मॉडल को अपनाया गया है ताकि अलग-अलग बोर्डों के छात्रों के साथ निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
नया KEAM 2026 फॉर्मूला सामान्यीकृत प्रवेश परीक्षा (normalised entrance exam) के अंकों और अंतिम वर्ष की योग्यता परीक्षा (qualifying examination) के अंकों को 50:50 का वेटेज प्रदान करता है। यह बदलाव केरल हाई कोर्ट द्वारा CBSE और ICSE स्ट्रीम के छात्रों पर पिछले फॉर्मूले के प्रभाव के संबंध में किए गए हस्तक्षेप के बाद लागू किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यKEAM 2026 नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला: एंट्रेंस एग्जाम स्कोर को 50% वेटेज और फाइनल ईयर क्वालीफाइंग मार्क्स को 50% वेटेज दिया जाएगा।
संस्थाकेरल हाई कोर्ट: वह बॉडी जिसने एग्जाम नॉर्मलाइजेशन (exam normalisation) से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए हस्तक्षेप किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विभिन्न शैक्षिक बोर्डों से आने वाले छात्रों के लिए समानता सुनिश्चित करते हुए, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश परीक्षाओं के मानकीकरण के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
असेसमेंट इक्विटी: बोर्ड-विशिष्ट ग्रेडिंग स्टैंडर्ड्स और प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा की कठिनाई के बीच संतुलन
संस्थागत टकराव: अल्पसंख्यक छात्रों के हितों की रक्षा के लिए राज्य स्तरीय प्रवेश नीतियों में न्यायिक हस्तक्षेप
मुख्य शब्द: नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला · शिक्षा में समानता · मानकीकृत परीक्षण · न्यायिक निगरानी · योग्यता आधारित व्यवस्था
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने MICE टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बार और बीयर पार्लर के संचालन का समय आधी रात तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, 5-स्टार FL3 लाइसेंस वाले होटलों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि वे सुबह 3 बजे तक संचालित हो सकें।
केरल सरकार ने बार के समय की वर्तमान सीमा को बढ़ाकर मध्यरात्रि तक कर दिया है। 5-स्टार वर्गीकरण या उससे ऊपर वाले FL3 लाइसेंस प्राप्त बार होटलों को ₹5 लाख का वार्षिक किराया शुल्क देकर सुबह 3 बजे तक संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यकेरल में स्टैंडर्ड बार और बीयर पार्लर के संचालन का समय मध्यरात्रि तक बढ़ा दिया गया है।
तथ्य5-स्टार क्लासिफिकेशन या उससे ऊपर वाले FL3 लाइसेंस प्राप्त बार होटल्स को रात 3 बजे तक संचालित करने की अनुमति है।
तथ्य5-स्टार FL3 लाइसेंस वाले बार होटलों को सुबह 3 बजे तक संचालित करने के लिए ₹5 लाख की वार्षिक रेंटल फीस (Annual rental fee) आवश्यक है।
स्थानकेरल सरकार ने MICE टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपनी पॉलिसी में बदलाव किया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मदिरा विनियमन के संदर्भ में पर्यटन आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करने के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।
सार्वजनिक स्वास्थ्य का ट्रेड-ऑफ: पर्यटन के लिए शराब की उपलब्धता और नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: MICE टूरिज्म · सार्वजनिक स्वास्थ्य · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · आर्थिक उदारीकरण · सामाजिक प्रभाव
चर्चा में क्यों: वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु ने तमिलनाडु की राज्य-संचालित विश्वविद्यालयों के लिए राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) में सुधार के उद्देश्य से ₹767 करोड़ का वार्षिक कंपोजिट ग्रांट (Composite Grant) और ₹175 करोड़ का परफॉरमेंस फंड (Performance Fund) की घोषणा की है।
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों के लिए ₹767 करोड़ का वार्षिक कंपोजिट ग्रांट (Composite Grant) और ₹175 करोड़ का परफॉर्मेंस इंसेंटिव ग्रांट (Performance Incentive Grant) घोषित किया है। यह कदम एक समिति की रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया है कि पिछला ग्रांट मॉडल शैक्षणिक उत्कृष्टता या वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने में विफल रहा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकंपोजिट ग्रांट की राशि: तमिलनाडु में राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के लिए सालाना ₹767 करोड़।
तथ्यपरफॉरमेंस इंसेंटिव ग्रांट (Performance Incentive Grant): राजकोषीय प्रबंधन (fiscal management) को प्रोत्साहित करने के लिए ₹175 करोड़ का फंड स्थापित किया गया।
संस्थाग्रांट मॉडल के तहत विश्वविद्यालयों को विशिष्ट अकाउंटिंग सिस्टम (accounting systems) अपनाने और वैधानिक आवश्यकताओं (statutory requirements) का पालन करना आवश्यक है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में राज्य द्वारा संचालित उच्च शिक्षा संस्थानों में राजकोषीय अनुशासन और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ाने में प्रदर्शन-आधारित वित्तपोषण के महत्व की चर्चा कीजिए।
राजकोषीय जवाबदेही: बजट की बर्बादी रोकने के लिए ब्लॉक ग्रांट्स से परफॉरमेंस-लिंक्ड इंसेंटिव्स की ओर बदलाव
संस्थागत स्वायत्तता: अकादमिक आज़ादी और अनिवार्य अकाउंटिंग सिस्टम व वैधानिक कंप्लायंस की ज़रूरतों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: राजकोषीय अनुशासन · परफॉरमेंस-लिंक्ड इंसेंटिव्स · उच्च शिक्षा के लिए फंडिंग · सार्वजनिक जवाबदेही · सांख्यिकीय अनुपालन
चर्चा में क्यों: उत्तराखंड सरकार फर्जी प्रविष्टियों (entries) को रोकने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण शुल्क (registration fee) लगाने पर विचार कर रही है।
उत्तराखंड सरकार ने चार धाम यात्रा के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए शुल्क निर्धारित करने हेतु एक समिति का गठन किया है। यह यात्रा प्रतिवर्ष 50 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती है और राज्य की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण चालक है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानचार धाम यात्रा: उत्तराखंड राज्य में एक तीर्थ यात्रा मार्ग।
तथ्यचार धाम यात्रा में सालाना 50 लाख से अधिक तीर्थयात्री आते हैं।
तथ्यउत्तराखंड सरकार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए विशेष शुल्क पर विचार कर रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले धार्मिक तीर्थयात्राओं के प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और धार्मिक स्वतंत्रता एवं सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन: ऊँचाई वाले इलाकों की चुनौतियों के बीच श्रद्धालुओं के अधिकारों को प्राथमिकता देना
आर्थिक-पारिस्थितिक संघर्ष: हिमालय के पर्यावरण क्षरण के मुकाबले पर्यटन के आर्थिक लाभों का प्रबंधन
मुख्य शब्द: भीड़ प्रबंधन · पारिस्थितिक संवेदनशीलता · सार्वजनिक सुरक्षा · सस्टेनेबल टूरिज्म · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: स्थानीय स्वशासन मंत्री एम.बी. राजेश ने बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों के कल्याण में सुधार के लिए 100 BUDS संस्थानों को मॉडल स्टेटस (Model Status) में अपग्रेड करने की घोषणा की।
इस पहल में बुनियादी ढांचे का विकास, उपकरणों की उपलब्धता और कर्मचारियों के लिए एक स्वास्थ्य/जीवन बीमा योजना शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्य100 BUDS संस्थानों के अपग्रेडेशन के लिए ₹4.7 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
तथ्यपहला चरण चुनिंदा जिलों में 41 संस्थानों पर केंद्रित है।
तथ्य30 BUDS स्कूलों के लिए वाहन खरीद हेतु फंडिंग प्रदान की गई।
योजनाBUDS स्टाफ के लिए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस स्कीम शामिल की गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में समावेशी विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में दिव्यांगजनों के लिए विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण BUDS स्कूलों में विशेष उपकरणों और सुलभ सुविधाओं की कमी
ह्यूमन रिसोर्स वेलफेयर: हेल्थ इंश्योरेंस और बेहतर वर्किंग कंडीशंस के जरिए स्टाफ रिटेंशन सुनिश्चित करना
क्वालिटी स्टैंडर्डाइजेशन: संशोधित गाइडलाइन्स के जरिए बेसिक स्कूलिंग से 'मॉडल' स्टेटस की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: समावेशी शिक्षा · समाज कल्याण · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · मॉडल संस्थान · ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट
चर्चा में क्यों: सिविल सोसाइटी ग्रुप 'कैम्पेन फॉर रोहित एक्ट' ने कर्नाटक सरकार से उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव से SC/ST छात्रों की सुरक्षा के लिए 'रोहित वेमुला बिल 2025' पारित करने का आग्रह किया है।
प्रस्तावित रोहित वेमुला (उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से SC/ST की सुरक्षा) विधेयक 2025 का उद्देश्य SC/ST छात्रों के शिक्षा के अधिकार और गरिमा की रक्षा करना है। इस समूह ने सार्वजनिक परामर्श के लिए विधेयक के मसौदे को जारी करने और विधान सभा में इसे पारित करने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा की मांग की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानकर्नाटक।
तथ्ययह बिल 2026 के आगामी बजट सत्र के लिए प्रस्तावित है।
तथ्ययह बिल विशेष रूप से विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों (Higher Educational Institutions) में होने वाले भेदभाव को लक्षित करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त प्रणालीगत जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए विशिष्ट विधायी ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत अंतर: जाति आधारित उत्पीड़न के खिलाफ सक्रिय सुरक्षा प्रदान करने में मौजूदा नियमों की कमी
प्रक्रियात्मक पारदर्शिता: सामाजिक न्याय कानून की समावेशी ड्राफ्टिंग सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक परामर्श की आवश्यकता
मुख्य शब्द: प्रणालीगत भेदभाव · सामाजिक न्याय · विधायी ढांचा · गरिमा का अधिकार · शिक्षा की समानता
चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश सरकार की CM Rise Schools परियोजना के तहत, मौजूदा शिक्षकों को इन संस्थानों में नियुक्ति प्राप्त करने के लिए एक प्रतियोगी चयन प्रक्रिया (competitive selection process) से गुजरना होगा।
CM Rise Schools परियोजना के अंतर्गत चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और पिछले प्रदर्शन का मूल्यांकन शामिल है। इन स्कूलों के लिए चुने गए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें इन संस्थानों से बाहर स्थानांतरण (Transfer) करने की अनुमति नहीं होती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यCM Rise Schools प्रोजेक्ट: शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए मध्य प्रदेश सरकार की एक पहल।
तथ्यचयन के मानदंड: लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और पिछले प्रदर्शन का मूल्यांकन।
तथ्यचयन के बाद: शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है और उन्हें CM Rise स्कूलों से ट्रांसफर करने पर रोक होती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में प्रदर्शन-आधारित शिक्षक नियुक्तियों और गतिशीलता पर प्रतिबंधों से शैक्षिक समानता और ग्रामीण स्कूली बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।
ग्रामीण-शहरी असमानता: ग्रामीण स्कूलों से अनुभवी स्टाफ के हाई-प्रोफाइल सीएम राइज संस्थानों में जाने की संभावना
टीचर मोबिलिटी: संस्थागत स्थिरता और शिक्षकों के तबादले के अधिकार के बीच टकराव
क्वालिटी बनाम एक्सेस: चुनिंदा स्कूलों के लिए स्पेशल ट्रेनिंग और समान शैक्षिक मानकों के बीच ट्रेड-ऑफ
मुख्य शब्द: शिक्षा में समानता · टीचर्स की मोबिलिटी · संस्थागत स्वायत्तता · ग्रामीण-शहरी अंतर · परफॉरमेंस-लिंक्ड पोस्टिंग
चर्चा में क्यों: समुदाय के नेता 2027 की जनगणना में 'डिनोटिफाइड ट्राइब्स' (DNTs) के लिए एक अलग वर्गीकरण कॉलम की मांग कर रहे हैं, ताकि 'क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट' से जुड़े ऐतिहासिक कलंक को दूर किया जा सके।
भारत सरकार ने 1952 में इन समुदायों को DNTs के रूप में मान्यता दी थी, लेकिन तब से इन्हें जनगणना की गणना से बाहर रखा गया है। राष्ट्रीय DNT आयोग ने एक स्थायी राष्ट्रीय आयोग की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने इसके बजाय एक कल्याण बोर्ड (Welfare Board) का विकल्प चुना।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यDNTs को 1952 से जनगणना की गिनती से बाहर रखा गया है।
संस्थासरकार ने DNTs के लिए एक स्थायी राष्ट्रीय आयोग के बजाय एक वेलफेयर बोर्ड (Welfare Board) को चुना।
तथ्यDNTs को वर्तमान में मौजूदा पिछड़ा वर्ग सूचियों में शामिल किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: डिनोटिफाइड ट्राइब्स (अधिसूचित जनजातियों) के समक्ष उत्पन्न सामाजिक-कानूनी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और हाशिए पर स्थित समुदायों के लिए विशिष्ट जनगणना वर्गीकरण की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिए।
ऐतिहासिक कलंक: सामाजिक गतिशीलता पर क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के बचे हुए प्रभाव
संस्थागत अंतर: वेलफेयर बोर्ड की सीमाएं बनाम स्थायी नेशनल कमीशन
डेटा विजिबिलिटी: DNTs के लिए लक्षित नीति निर्माण पर जनगणना से बाहर होने का प्रभाव
मुख्य शब्द: सामाजिक कलंक · पिछड़े समुदाय · जनगणना गणना · ऐतिहासिक भेदभाव · पॉलिसी इंटरवेंशन
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने गिग वर्कर्स (Gig workers) को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स (Aggregator platforms) से 1% कल्याण शुल्क (Welfare fee) वसूलने की अधिसूचना जारी की है।
सेवा की श्रेणी (फूड डिलीवरी, राइड-हेलिंग, लॉजिस्टिक्स और ई-मार्केटप्लेस) के आधार पर प्रति लेनदेन शुल्क ₹0.5 से ₹1 के बीच भिन्न होगा। सरकार भुगतान की निगरानी करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक पेमेंट एंड वेलफेयर फी वेरिफिकेशन सिस्टम (Payment and Welfare Fee Verification System - PWFVS) लागू करेगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकर्नाटक में गिग वर्कर्स (Gig workers) के लिए वेलफेयर फीस: ट्रांजैक्शन वैल्यू का 1%।
तथ्यसर्विस कैटेगरी के आधार पर प्रति ट्रांजैक्शन ₹0.5 से ₹1 तक की फीस।
संस्थाPWFVS: ट्रैकिंग और पारदर्शिता के लिए पेमेंट एंड वेलफेयर फी वेरिफिकेशन सिस्टम (Payment and Welfare Fee Verification System)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था के युग में गिग श्रमिकों (gig workers) के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक औपचारिक विनियामक ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत बाधा: मौजूदा श्रम कानूनों के तहत प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर्स के लिए 'एम्प्लॉयर' स्टेटस तय करने में कठिनाई
राजकोषीय स्थिरता: एग्रीगेटर मुनाफे और व्यापक सामाजिक सुरक्षा लाभ की लागत के बीच संतुलन
पारदर्शिता तंत्र: यह सुनिश्चित करना कि PWFVS विकेंद्रीकृत कार्यकर्ताओं को फंड आवंटन में होने वाली लीकेज को प्रभावी ढंग से रोके
मुख्य शब्द: गिग इकोनॉमी · सामाजिक सुरक्षा · प्लेटफ़ॉर्म एग्रीगेटर्स · श्रम कल्याण · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 से पता चला है कि राज्य में उच्च महिला साक्षरता दर के बावजूद, वहां 28% मामलों में सगोत्र विवाह (consanguineous marriages) और गैर-जीवित जन्म (non-live births) की उच्च दर देखी गई है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, अन्य संबंधित राज्यों की तुलना में तमिलनाडु में सगोत्र विवाह (consanguineous marriages) की उच्चतम दर (28%) दर्ज की गई है। रिपोर्ट में पहली शादी की औसत आयु 22 वर्ष बताई गई है और इसमें गैर-जीवित जन्म (non-live births) के साथ समाप्त होने वाली गर्भधारण का उच्च अनुपात भी सामने आया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतमिलनाडु में सगोत्र विवाह (Consanguineous marriage) की व्यापकता: 28% (Economic Survey 2025-26)।
तथ्यतमिलनाडु में पहली शादी की औसत आयु (Median age): 22 वर्ष।
तथ्यतुलनात्मक राज्यों में तमिलनाडु में नॉन-लाइव बर्थ (non-live births) का अनुपात सबसे अधिक है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सगोत्र विवाह (consanguineous marriages) की निरंतरता में योगदान देने वाले सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों का विश्लेषण कीजिए और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य परिणामों पर इसके प्रभावों का परीक्षण कीजिए।
जेनेटिक रिस्क: सगे भाई-बहन या करीबी रिश्तेदारों के बीच होने वाले विवाहों में ऑटोसोमल रिसेसिव डिसऑर्डर और जन्मजात विसंगतियों के मामले बढ़े
गवर्नेंस में बदलाव: इनपुट-आधारित हेल्थकेयर मैट्रिक्स से आउटकम-आधारित मैटरनल हेल्थ इंडिकेटर्स की ओर बदलाव
सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएं: उच्च महिला साक्षरता और आर्थिक सशक्तिकरण के बावजूद पारंपरिक विवाह मानदंडों का बने रहना
मुख्य शब्द: सगोत्र विवाह · मातृ स्वास्थ्य · परिणाम-आधारित गवर्नेंस · गैर-जीवित जन्म · सामाजिक-सांस्कृतिक संकेतक
चर्चा में क्यों: विजन 2031 (Vision 2031) की बैठक में विशेषज्ञों ने केरल से आग्रह किया कि वह स्वास्थ्य सेवा के अपने फोकस को मृत्यु दर में कमी लाने के बजाय स्वस्थ जीवन प्रत्याशा (healthy life expectancy), वित्तीय सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता में सुधार की ओर ले जाए।
इस बैठक में केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज और सौम्या स्वामीनाथन (पूर्व WHO मुख्य वैज्ञानिक) तथा बी. एकबल जैसे विशेषज्ञ शामिल हुए। प्रमुख सिफारिशों में संरचित क्रोनिक केयर पाथवे (structured chronic care pathways), जेरिएट्रिक सेवाओं (geriatric services) का विस्तार और संज्ञानात्मक कार्य (cognitive function) पर आहार विविधता के प्रभाव पर शोध शामिल था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदसौम्या स्वामीनाथन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) में पूर्व मुख्य वैज्ञानिक।
तथ्यकेरल का स्वास्थ्य फोकस शिफ्ट: मृत्यु दर में कमी से स्वस्थ जीवन प्रत्याशा (healthy life expectancy) और वित्तीय सुरक्षा (financial protection) की ओर।
तथ्यप्रस्तावित स्वास्थ्य सेवा विस्तार: फैमिली मेडिसिन (Family medicine), जेरिएट्रिक सर्विसेज (Geriatric services) और होम-बेस्ड केयर मॉडल्स (Home-based care models)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: केरल जैसे वृद्ध होती आबादी वाले राज्यों में स्वास्थ्य सेवा के मॉडल को मृत्यु दर-केंद्रित दृष्टिकोण से बदलकर स्वस्थ जीवन प्रत्याशा और वित्तीय सुरक्षा पर केंद्रित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
डेमोग्राफिक प्रेशर: तेज़ी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी में सोशल आइसोलेशन और जेरियाट्रिक केयर की ज़रूरतों को पूरा करना
आर्थिक बाधा: स्ट्रक्चर्ड क्रोनिक केयर पाथवे के जरिए जेब से होने वाले भारी खर्च को कम करना
पोषण संबंधी हस्तक्षेप: आहार विविधता को संज्ञानात्मक स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जोड़ना
मुख्य शब्द: स्वस्थ जीवन प्रत्याशा · अपनी जेब से किया गया खर्च · वृद्धजन सेवाएँ · क्रोनिक केयर पाथवे · सामाजिक अलगाव
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने धार्मिक और सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्टों (Charitable Trusts) को 'तमिलनाडु रेगुलेशन ऑफ राइट्स एंड रिस्पॉन्सिबिलिटीज़ ऑफ लैंडलॉर्ड्स एंड टेनेंट्स एक्ट, 2017' से छूट दी है।
आवास और शहरी विकास विभाग ने हिंदू, ईसाई और मुस्लिम धार्मिक सार्वजनिक ट्रस्टों तथा सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्टों (Charitable Trusts) के स्वामित्व वाले परिसरों को छूट देने का आदेश जारी किया है। 2017 का अधिनियम शहरी क्षेत्रों और गांवों में किराए को विनियमित करने और मकान मालिक-किरायेदार के अधिकारों में संतुलन बनाने के लिए बनाया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकतमिलनाडु रेगुलेशन ऑफ राइट्स एंड रिस्पॉन्सिबिलिटीज़ ऑफ लैंडलॉर्ड्स एंड टेनेंट्स एक्ट (Tamil Nadu Regulation of Rights and Responsibilities of Landlords and Tenants Act) को 2017 में लागू किया गया था।
तथ्ययह एक्ट फरवरी 2019 में शहरी क्षेत्रों में लागू हुआ और फरवरी 2021 में सभी गांवों में विस्तारित किया गया।
संस्थाहाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट छूट के आदेश (exemption order) के लिए जारी करने वाला अथॉरिटी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्टों को राज्य के पट्टा नियमों से छूट देने के धार्मिक और सामाजिक निहितार्थों के आलोक में, मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकारों के बीच संतुलन पर इसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी एसिमेट्री: ट्रस्ट के स्वामित्व वाली संपत्तियों बनाम प्राइवेट होल्डिंग्स में किरायेदार अधिकारों के असमान संरक्षण की संभावना
प्रशासनिक चूक: छूट प्राप्त धार्मिक परिसरों में किराया विनियमन और बेदखली प्रक्रियाओं की निगरानी में चुनौतियां
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी छूट · मकान मालिक-किरायेदार अधिकार · जनता का भरोसा · वैधानिक नियमन · प्रशासनिक आदेश
चर्चा में क्यों: पटियाला हाउस कोर्ट एक ऐसे मामले की जांच कर रहा है जिसमें एक पीड़ित को मुआवजा नहीं दिया गया क्योंकि बिना बीमा वाली गाड़ी की कोई भी संपत्ति वसूलने योग्य नहीं थी। यह मामला वर्तमान सड़क दुर्घटना मुआवजे के ढांचे में एक बड़ी खामी को उजागर करता है।
यह मामला दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में एक साइकिल चालक और एक ड्राइवर की मृत्यु से संबंधित है। कोर्ट, बिना बीमा वाले और बिना किसी रिकवरेबल एसेट्स (recoverable assets) वाले वाहनों के पीड़ितों के लिए सरकारी योजनाओं की जांच करने हेतु सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से सहायता मांग रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थापटियाला हाउस कोर्ट्स: दिल्ली स्थित एक न्यायिक निकाय जो वर्तमान में मुआवजे के मामले की जांच कर रहा है।
पदगोरंग गोयल: नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (District Legal Services Authority) के पैनल में शामिल एक लीगल एड काउंसिल।
तथ्यकोर्ट उन मामलों के लिए समाधान चाहता है जहाँ बिना इंश्योरेंस वाले वाहन की कोई रिकवरेबल एस्टेट (recoverable estate) उपलब्ध नहीं है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बीमा रहित वाहनों के पीड़ितों को सामाजिक न्याय प्रदान करने में वर्तमान मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा ढांचे की सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संस्थागत अंतर: बिना संपत्ति वाले अनइन्शोर्ड वाहनों के पीड़ितों के लिए अनिवार्य राज्य-समर्थित फंड की कमी
कानूनी अड़चन: मौजूदा ढांचा रिकवरेबल एस्टेट्स पर निर्भर है, जिससे 'इनसॉल्वेंट' अनइंश्योर्ड ड्राइवरों के पीड़ितों को बाहर रखा गया है
पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड के विस्तार की लागत और यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी की ज़रूरत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सामाजिक न्याय · कानूनी खामी · मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड · राज्य दायित्व · मुआवज़ा ढांचा
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए 14 और 15 साल की लड़कियों के लिए राज्यव्यापी मुफ्त HPV टीकाकरण कार्यक्रम शुरू कर रही है।
राज्य ने क्वाड्रीवैलेंट गार्डासिल 4 (Gardasil 4) वैक्सीन की 4.6 लाख खुराकें खरीदी हैं। टीकाकरण फरवरी के अंत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में शुरू किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतेलंगाना ने 4.6 लाख डोज़ क्वाड्रिवेलेंट गार्डासिल 4 (Gardasil 4) वैक्सीन की खरीदीं।
पदAuxiliary Nurse Midwives वे नामित कर्मचारी हैं जिन्हें वैक्सीन देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
तथ्यटीकाकरण कार्यक्रम का लक्ष्य 14 और 15 वर्ष की किशोरियों (adolescent girls) को लक्षित करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की रोकथाम में सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों के महत्व की चर्चा कीजिए।
एक्सेसिबिलिटी गैप: ग्रामीण प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स में वैक्सीन कोल्ड-चेन का रखरखाव सुनिश्चित करना
जेंडर-विशिष्ट स्वास्थ्य: किशोरियों के टीकाकरण में सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करना
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर: इलाज के बजाय शुरुआती दौर में इम्यूनाइजेशन पर फोकस बदलना
मुख्य शब्द: निवारक स्वास्थ्य सेवा · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · टीकाकरण कवरेज · गैर-संचारी रोग
चर्चा में क्यों: कर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने मध्य और उत्तर कर्नाटक के सैकड़ों बच्चों द्वारा पेपर (मिर्च) की कटाई के सीजन के दौरान स्कूल से गायब रहने पर चिंता जताई है।
कर्नाटक के मध्य और उत्तरी जिलों के 2 से 13 वर्ष की आयु के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, क्योंकि उनके माता-पिता कॉफी एस्टेट के काम के लिए मलनाद (Malnad) जिलों में पलायन कर रहे हैं। ये बच्चे अक्सर सड़क किनारे बने अस्थाई तंबुओं में रहते हैं और अपने भाई-बहनों की देखभाल में लगे रहते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानमलनाड: कर्नाटक का एक क्षेत्र जो कॉफी एस्टेट्स और काली मिर्च की खेती के लिए जाना जाता है।
तथ्यप्रभावित बच्चे आमतौर पर 2 से 13 वर्ष की आयु के होते हैं।
संस्थाकर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (Karnataka State Commission for Protection of Child Rights): प्रवासी बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षिक वातावरण की वकालत करने वाली संस्था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के मार्ग में आने वाली प्रणालीगत बाधाओं की चर्चा कीजिए और उनके शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
संस्थागत अंतर: मौसमी प्रवासी आबादी के लिए मोबाइल स्कूल या फ्लेक्सिबल लर्निंग मॉड्यूल की कमी
सामाजिक-आर्थिक बाधा: भाई-बहनों की देखभाल में बाल श्रम और अस्थायी रहने की स्थिति
पॉलिसी में रुकावट: अधिक भौगोलिक गतिशीलता वाले बच्चों को ट्रैक करने और नामांकित करने में कठिनाई
मुख्य शब्द: शिक्षा का अधिकार · प्रवासी श्रमिक · समावेशी शिक्षा · बाल अधिकार · मौसमी प्रवास
चर्चा में क्यों: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के आंकड़ों से पता चलता है कि शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने के लिए प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस (Professors of Practice - PoPs) की नियुक्ति में तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात भारत में सबसे आगे हैं।
UGC ने 2022 में उच्च शिक्षण संस्थानों (Higher Education Institutions - HEIs) को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' (Professors of Practice) के रूप में उद्योग विशेषज्ञों को नियुक्त करने की अनुमति देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। आंकड़े दर्शाते हैं कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तुलना में निजी विश्वविद्यालयों ने सबसे अधिक संख्या में PoPs की नियुक्ति की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाUGC: University Grants Commission वह संस्था है जिसने Professors of Practice के लिए 2022 के गाइडलाइन्स जारी किए।
तथ्यPoPs की भर्ती में तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात शीर्ष तीन राज्य हैं।
तथ्यप्राइवेट यूनिवर्सिटीज ने सेंट्रल यूनिवर्सिटीज की तुलना में अधिक संख्या में PoPs को नियुक्त किया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यह चर्चा कीजिए कि 'प्रैक्टिस के प्रोफेसरों' (Professors of Practice) की नियुक्ति किस प्रकार स्नातकों की रोजगार क्षमता को बढ़ा सकती है और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों तथा औद्योगिक क्षेत्र के बीच कौशल अंतराल को कम करने में सहायक हो सकती है।
पेडागॉजिकल शिफ्ट: थ्योरेटिकल करिकुलम से इंडस्ट्री-अलाइन्ड प्रैक्टिकल लर्निंग की ओर बदलाव
रेगुलेटरी ओवरसाइट: एकेडमिक रिगर और इंडस्ट्री-लेड प्रैक्टिकल एक्सपर्टाइज के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: एकेडेमिया-इंडस्ट्री लिंकेज · स्किल गैप · उच्च शिक्षा सुधार · रोज़गार क्षमता · शिक्षा में नवाचार
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को निर्देश दिया है कि वह जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट (Saturated fat) की मात्रा अधिक वाले पैक किए गए खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैकेज वॉर्निंग लेबल्स (FOPL) लगाने पर विचार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले परामर्शों के बावजूद लेबलिंग मानदंडों पर FSSAI की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया है। कोर्ट ने सूचित उपभोक्ता विकल्पों से संबंधित याचिका के तर्क पर प्रतिक्रिया देने के लिए FSSAI को चार सप्ताह का समय दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाFSSAI: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया।
तथ्यFOPL: हाई शुगर, सॉल्ट और सैचुरेटेड फैट के लिए फ्रंट-ऑफ-पैकेज (Front-of-package) वॉर्निंग लेबल्स।
पदसुप्रीम कोर्ट: FSSAI को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में गैर-संचारी रोगों (NCDs) से निपटने के लिए अनिवार्य 'फ्रंट-ऑफ-पैकेज' लेबलिंग किस प्रकार एक सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप के रूप में कार्य कर सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
इन्फॉर्मेशन एसिमेट्री: जटिल पोषण संबंधी डेटा और उपभोक्ता की समझ के बीच के अंतर को दूर करना
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: व्यापार की आज़ादी और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के बीच संतुलन
बिहेवियरल इकोनॉमिक्स: खान-पान के चुनाव को प्रभावित करने के लिए विजुअल वार्निंग के जरिए 'नज' थ्योरी का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: गैर-संचारी रोग · सूचना की असमानता · सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप · नियामक निगरानी · उपभोक्ता संरक्षण
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश, बीमारियों का जल्द पता लगाने और व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रोफाइलिंग (Personalized health profiling) सहित AI-आधारित स्वास्थ्य सुधारों को लागू करने के लिए गेट्स फाउंडेशन (Gates Foundation) के साथ साझेदारी कर रहा है।
राज्य सरकार ने AI-आधारित मेडिकल उपकरणों की पहचान करने के लिए 'MedTech Challenge' शुरू किया है। इसके तहत वर्तमान में 20 शॉर्टलिस्ट की गई तकनीकों का सरकारी अस्पतालों में परीक्षण किया जा रहा है। इस पहल में 'Sanjeevani' नामक एक पायलट प्रोजेक्ट और एक उच्च-शक्ति वाले विशेषज्ञ सलाहकार समूह (Expert Advisory Group) को शामिल किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यआंध्र प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में टेस्टिंग के लिए 20 AI-इनेबल्ड (AI-enabled) मेडिकल टेक्नोलॉजीज को शॉर्टलिस्ट किया गया है।
योजनाSanjeevani: आंध्र प्रदेश में स्वास्थ्य सुधार के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट।
संस्थागेट्स फाउंडेशन: एक प्राइवेट फाउंडेशन जो राज्य के हेल्थकेयर रिफॉर्म्स के लिए टेक्निकल सपोर्ट प्रदान करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का एकीकरण ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य पहुंच में मौजूद प्रणालीगत असमानताओं को कैसे दूर कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
डेटा प्राइवेसी: पब्लिक डेटाबेस में पर्सनल हेल्थ प्रोफाइल तक अनधिकृत पहुंच के जोखिम
डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से AI-आधारित डायग्नोस्टिक्स तक समान पहुंच में बाधा
रेगुलेटरी ओवरसाइट: सार्वजनिक खरीद में AI-इनेबल्ड मेडिकल डिवाइसेस के लिए स्टैंडर्ड सर्टिफिकेशन की ज़रूरत
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने 223 पंचायत सचिवों के लिए अंतर-जिला प्रतिनियुक्ति (inter-district deputation) को मंजूरी दी है, जिन्होंने अपनी स्थानीय कैडर स्थिति खो दी थी। इस निर्णय का उद्देश्य उनकी कठिनाइयों को कम करना और ग्रामीण विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में सुधार करना है।
तेलंगाना सरकार ने पंचायत राज और ग्रामीण विकास मंत्री दानसारी अनुसूया के माध्यम से 223 पंचायत सचिवों के लिए अंतर-जिला प्रतिनियुक्ति (inter-district deputation) को मंजूरी दी है। यह प्रतिनियुक्ति ग्रेड की परवाह किए बिना, उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध दो वर्षों के लिए वैध है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतेलंगाना में इंटर-डिस्ट्रिक्ट डेप्यूटेशन (inter-district deputation) के लिए 223 पंचायत सचिवों को मंजूरी दी गई।
तथ्यसेक्रेटरीज के लिए स्वीकृत डेप्यूटेशन पीरियड दो साल है।
पददनासरी अनुसूया तेलंगाना में पंचायत राज और ग्रामीण विकास मंत्री हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण शासन में प्रशासनिक लचीलापन किस प्रकार कर्मियों की स्थिरता सुनिश्चित करते हुए कल्याणकारी योजनाओं के वितरण को सुदृढ़ कर सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
प्रशासनिक दक्षता: कैडर स्थिरता और ग्रामीण पदों को भरने के लिए लचीले तैनाती की ज़रूरत के बीच संतुलन
सेवा वितरण: स्थानीय विकास योजनाओं की निरंतरता पर कर्मियों के विस्थापन का प्रभाव
मुख्य शब्द: प्रशासनिक लचीलापन · ग्रामीण शासन · कैडर मैनेजमेंट · सेवा वितरण · डिप्यूटेशन
चर्चा में क्यों: केरल ज्यूडिशियल एकेडमी अपने बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक कार्यक्रमों को अपडेट कर रही है ताकि वह अपने पहले दृष्टिबाधित ट्रेनी जज, सी. थान्या नथान को समायोजित कर सके।
केरल न्यायिक अकादमी (Kerala Judicial Academy) गैर-फिसलन वाले रैंप, लिफ्ट, हैंडरेल, टैक्टाइल गाइडेंस पाथ (tactile guidance paths) और ब्रेल संकेत (Braille signage) स्थापित कर रही है। शैक्षणिक कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं के लिए OCR-अनुरूप सामग्री, ऑडियो फॉर्मेट और वॉयस-टू-टेक्स्ट टूल शामिल किए जाएंगे।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
संस्थाकेरल ज्यूडिशियल एकेडमी: केरल में ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को ट्रेनिंग देने के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्यटैक्टाइल गाइडेंस पाथ (Tactile guidance paths) और ब्रेल साइनेज (Braille signage): दृष्टिबाधितों की एक्सेसिबिलिटी (accessibility) के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर अपडेट।
मेन्स के लिए
प्रश्न: न्यायपालिका में संस्थागत समावेशिता के महत्व पर चर्चा कीजिए और कानूनी पेशे में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदमों का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: पुरानी न्यायिक इमारतों में यूनिवर्सल डिज़ाइन की कमी से शारीरिक गतिशीलता में बाधा
पढ़ाने के तरीके में बदलाव: पारंपरिक प्रिंट-आधारित सिलेबस से मल्टी-मोडल सुलभ लर्निंग फॉर्मेट की ओर बदलाव
पॉलिसी इंटीग्रेशन: सभी स्टेट ज्यूडिशियल ट्रेनिंग एकेडमी में स्टैंडर्डाइज्ड एक्सेसिबिलिटी प्रोटोकॉल की ज़रूरत
मुख्य शब्द: समावेशी न्यायपालिका · यूनिवर्सल डिज़ाइन · पहुँच योग्यता · दिव्यांगजन · संस्थागत सुधार
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक शिक्षा के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (National Education Policy) 2020 के साथ तालमेल बिठाने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को रिकॉर्ड ₹32,308 करोड़ आवंटित किए हैं।
आंध्र प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को ₹32,308 करोड़ आवंटित किए हैं। इसमें स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के अपग्रेड और जनजातीय स्कूलों के सुधार के लिए विशेष रूप से ₹1,500 करोड़ शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्य₹32,308 करोड़: 2026-27 के लिए आंध्र प्रदेश में स्कूल एजुकेशन (School Education) के लिए कुल बजट आवंटन।
तथ्य₹1,500 करोड़: आंध्र प्रदेश में स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए विशिष्ट आवंटन।
योजनानेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020: राज्य में लागू किए जा रहे नए करिकुलम (curriculum) का ढांचा।
विज्ञान-तकनीकAI-driven लर्निंग टूल्स: नई एजुकेशन इनिशिएटिव्स के हिस्से के रूप में पेश की जाने वाली टेक्नोलॉजी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सार्वजनिक स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में ग्रामीण-शहरी विभाजन को पाटने में परिणाम-आधारित शिक्षा और बुनियादी ढांचा निवेश किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
शिक्षा पद्धति में बदलाव: NEP 2020 के ढांचे के तहत रट्टा मारने के बजाय परिणाम आधारित मूल्यांकन पर ज़ोर
डिजिटल डिवाइड: आदिवासी और ग्रामीण स्कूल क्लस्टर्स में AI-आधारित लर्निंग टूल्स तक समान पहुंच सुनिश्चित करना
राजकोषीय जवाबदेही: बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और लंबे समय के टीचर ट्रेनिंग व क्वालिटी मैट्रिक्स के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: आउटकम-आधारित शिक्षा · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · NEP 2020 · डिजिटल साक्षरता · राजकोषीय आवंटन
चर्चा में क्यों: स्वास्थ्य मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव द्वारा जानकारी दी गई है कि राज्य सरकार ने 2026-2027 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के आवंटन में 9.5% की वृद्धि की घोषणा की है, जिसे अब बढ़ाकर ₹19,306 करोड़ कर दिया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ₹19,306 करोड़ का आवंटन कुल बजट परिव्यय का 5.81% है। इसमें प्रमुख फंडिंग के अंतर्गत डॉ. NTR वैद्य सेवा ट्रस्ट के लिए ₹4,000 करोड़ और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए ₹838 करोड़ शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यवर्ष 2026-2027 के लिए हेल्थ सेक्टर (Health sector) आवंटन: ₹19,306 करोड़।
तथ्यस्वास्थ्य क्षेत्र का आवंटन: कुल बजट परिव्यय (Budget outlay) का 5.81%।
योजनाप्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन: ₹838 करोड़ आवंटित।
संस्थाडॉ. NTR वैद्य सेवा ट्रस्ट: ₹4,000 करोड़ आवंटित।
तथ्यसरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए आवंटन: ₹2,819 करोड़।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य असमानता कम करने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के विस्तार की ज़रूरत
राजकोषीय प्राथमिकता: शिक्षा और ग्रामीण विकास की मांगों के बीच स्वास्थ्य खर्चों का संतुलन
मिशन-आधारित विकास: प्राथमिक और सेकेंडरी केयर पर आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन का प्रभाव
मुख्य शब्द: सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च · स्वास्थ्य सेवा इंफ्रास्ट्रक्चर · राजकोषीय आवंटन · यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज · आयुष्मान भारत
चर्चा में क्यों: KCHR और NORKA-Roots ने अफ्रीका में रहने वाले केरलवासियों के प्रवास प्रोफाइल (migration profile) को मैप करने के लिए एक प्रोजेक्ट शुरू किया है, ताकि ऐतिहासिक और समकालीन प्रवास की कहानियों को दर्ज किया जा सके।
केरल काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च (KCHR) और NORKA-Roots मिलकर 'मैपिंग द माइग्रेशन प्रोफाइल ऑफ केरलाइट्स इन अफ्रीका' प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। यह परियोजना एक व्यापक आर्काइव (archive) तैयार करने के लिए आर्काइवल रिसर्च, मौखिक इतिहास, सामुदायिक सहभागिता और डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन का उपयोग करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
संस्थाKCHR: केरल काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च (Kerala Council for Historical Research), जिसे राज्य के इतिहास को दस्तावेजीकृत करने का काम सौंपा गया है।
तथ्यइस प्रोजेक्ट का उद्देश्य गल्फ क्षेत्र से आगे अफ्रीका तक के माइग्रेशन (migration) की कहानियों को डॉक्यूमेंट करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: किसी राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सार्वजनिक स्मृति को आकार देने में पार-राष्ट्रीय प्रवास प्रतिमानों के दस्तावेजीकरण और संग्रहण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
सांस्कृतिक संरक्षण: सबाल्टर्न माइग्रेशन नैरेटिव्स के मिटने से रोकने के लिए मौखिक इतिहासों को आर्काइव करना
नीति उपयोगिता: गैर-गल्फ प्रवासी समुदाय को बेहतर कल्याण वितरण के लिए डेटाबेस बनाना
ट्रांसनेशनल पहचान: क्षेत्रीय सांस्कृतिक संरक्षण और वैश्वीकृत माइग्रेशन की हकीकत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: ट्रांसनेशनलिज्म · सार्वजनिक स्मृति · मौखिक इतिहास · माइग्रेशन प्रोफाइल · सांस्कृतिक संरक्षण
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने 2025-26 के लिए 'कलैग्नारिन कनावु इल्लम' कार्यक्रम के तहत एक लाख अतिरिक्त घर बनाने के लिए ₹3,500 करोड़ की मंजूरी दी है।
इस कार्यक्रम के लिए वित्त पोषण तीन घटकों से प्राप्त किया जाएगा। इसमें पूल्ड असाइन्ड रेवेन्यू स्कीम कंपोनेंट (SCPAR) के तहत ₹1,000 करोड़, PRI डिवोल्यूशन ग्रांट के रूप में ₹1,000 करोड़ और राज्य अनुदान के रूप में ₹1,500 करोड़ शामिल हैं। यह 2024-25 में एक लाख घरों के लिए पूर्व में स्वीकृत ₹3,100 करोड़ की राशि के बाद लिया गया निर्णय है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकलाईनारिन कनवु इल्लम (Kalaignarin Kanavu Illam) प्रोग्राम: 2025-26 के लिए ₹3,500 करोड़ स्वीकृत।
तथ्यफंडिंग के स्रोत: SCPAR (₹1,000 करोड़), PRI डिवोल्यूशन ग्रांट्स (₹1,000 करोड़), और स्टेट ग्रांट (₹1,500 करोड़)।
तथ्यपिछला आवंटन: 2024-25 में एक लाख घरों के लिए ₹3,100 करोड़।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में शहरी गरीबी को कम करने और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाने में राज्य-संचालित आवास योजनाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय संघवाद: राज्य-विशिष्ट कल्याण के लिए पूल्ड असाइन्ड रेवेन्यू और PRI डिवोल्यूशन ग्रांट्स का उपयोग
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: शहरी सोशल सिक्योरिटी के लिए आवास की कमी को दूर करना एक ज़रूरी शर्त
मुख्य शब्द: सभी के लिए आवास · राजकोषीय हस्तांतरण · पंचायती राज संस्थान · समाज कल्याण · शहरी गरीबी
चर्चा में क्यों: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की आलोचना हुई है, क्योंकि कट-ऑफ संशोधन के बाद तेलंगाना के मेडिकल कॉलेजों में मात्र 1 अंक जैसे कम स्कोर वाले छात्रों को PG सीटें मिल गईं।
NBEMS ने 13 जनवरी को क्वालीफाइंग कट-ऑफ स्कोर में संशोधन किया, जिसके तहत विभिन्न श्रेणियों के लिए स्कोर कम कर दिए गए। 9 फरवरी को, कलोजी नारायण राव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (KNRUHS) ने मॉप-अप फेज की अलॉटमेंट लिस्ट जारी की। इस सूची के अनुसार, तेलंगाना में 1 से 100 के बीच स्कोर वाले 20 से अधिक छात्रों ने PG में प्रवेश प्राप्त कर लिया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNBEMS: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज।
स्थानKNRUHS: कलोजि नारायण राव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (तेलंगाना)।
तथ्यMop-up phase allotment list 9 फरवरी को जारी की गई।
तथ्यकट-ऑफ रिवीजन की तारीख: 13 जनवरी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में व्यावसायिक चिकित्सा परीक्षाओं में योग्यता संबंधी कट-ऑफ को कम करने के स्वास्थ्य सेवा वितरण की गुणवत्ता और शैक्षणिक मानकों पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
मेरिटोक्रेसी का गिरता स्तर: कम क्वालीफाइंग स्कोर वाले उम्मीदवारों को शामिल करने से क्लिनिकल क्षमता से समझौता होने का जोखिम
रेगुलेटरी ओवरसाइट: प्राइवेट और सरकारी संस्थानों के बीच विसंगतियों को रोकने के लिए सीट अलॉटमेंट के स्टैंडर्डेड क्राइटेरिया की ज़रूरत
मुख्य शब्द: योग्यता आधारित व्यवस्था · शैक्षणिक मानक · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता · प्रोफेशनल एथिक्स
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) के दौरान बिना बीमा वाले व्यक्तियों को तत्काल उपचार प्रदान करने वाले अस्पतालों के लिए प्रतिपूर्ति (Reimbursement) का मार्ग स्थापित करने हेतु ड्राफ्ट नियम अधिसूचित किए हैं।
ये नियम 2018 के गुड समरीटन और मेडिकल प्रोफेशनल प्रोटेक्शन एक्ट (Good Samaritan and Medical Professional Protection Act) पर आधारित हैं। अस्पताल AB-ArK या PMJAY दरों के आधार पर प्रतिपूर्ति (reimbursement) के लिए सुवर्ण आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट (SAST) को दावे जमा कर सकते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थासुवर्ण आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट (SAST) वह संस्था है जिसे कर्नाटक में अस्पताल के रिइम्बर्समेंट (reimbursement) क्लेम प्राप्त करने के लिए नामित किया गया है।
योजनाAyushman Bharat Arogya Karnataka (AB-ArK) और PMJAY वे स्कीम्स हैं जिनका उपयोग रिइम्बर्समेंट रेट्स (reimbursement rates) निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
अधिनियम / विधेयकड्राफ्ट रूल्स 2018 के गुड समरीटन एंड मेडिकल प्रोफेशनल प्रोटेक्शन एक्ट (Good Samaritan and Medical Professional Protection Act) पर आधारित हैं।
तथ्यये नियम विशेष रूप से बिना बीमा वाले व्यक्तियों को 'गोल्डन ऑवर' (golden hour) के दौरान देखभाल प्रदान करने को लक्षित करते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में 'गुड समैरिटन' (नेक मददगार) और अस्पतालों के लिए एक समर्पित प्रतिपूर्ति तंत्र स्थापित करने के महत्व की चर्चा कीजिए।
संस्थागत बाधा: प्राइवेट अस्पतालों और स्टेट ट्रस्ट बॉडीज के बीच क्लेम प्रोसेसिंग में जटिलता
वित्तीय स्थिरता: बिना बीमा वाले मरीजों के लिए मुफ्त इमरजेंसी केयर और अस्पताल के ऑपरेशनल खर्चों के बीच संतुलन
कानूनी सुरक्षा: मेडिकल लापरवाही के लिए जवाबदेही बनाए रखते हुए फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स को छूट सुनिश्चित करना
चर्चा में क्यों: गृह मंत्रालय (MHA) क्षेत्रीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा को सुगम बनाने के लिए एक मानक अंग्रेजी मेडिकल डिक्शनरी (Medical Dictionary) बनाने हेतु बोलियांगृह मंत्रालय (MHA) क्षेत्रीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा को सुगम बनाने के लिए एक मानक अंग्रेजी मेडिकल डिक्शनरी (Medical Dictionary) बनाने हेतु बोलियां आमंत्रित कर रहा है, जिसका बाद में 15 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा।
गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत राजभाषा विभाग (DoL) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ तालमेल बिठाने के लिए इस परियोजना का नेतृत्व कर रहा है। इसके पहले चरण में कम से कम 1,00,000 चिकित्सा शब्दों और व्याख्यात्मक शब्दों का अनुवाद किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाराजभाषा विभाग (DoL), गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत कार्य करता है।
तथ्यपरियोजना के पहले चरण का लक्ष्य कम से कम 100,000 मेडिकल टर्म्स (medical terms) का अनुवाद करना है।
तथ्यडिक्शनरी को शुरू में 15 भारतीय भाषाओं में अनुवादित किया जाएगा।
योजनायह पहल National Education Policy 2020 के अनुरूप है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण कैसे हो सकता है और यह भाषाई बाधाओं को दूर करने में किस प्रकार सहायक सिद्ध होगा? चर्चा कीजिए।
भाषाई समावेशिता: ग्रामीण छात्रों के नामांकन को बेहतर बनाने के लिए प्रोफेशनल कोर्सेज में अंग्रेजी के दबदबे को कम करना
शिक्षण संबंधी बदलाव: अलग-अलग क्षेत्रीय बोलियों में जटिल तकनीकी शब्दावली को मानकीकृत करने की चुनौतियां
हेल्थकेयर इक्विटी: बेहतर ग्रामीण स्वास्थ्य परिणामों के लिए मेडिकल ट्रेनिंग और स्थानीय मरीज संवाद के बीच के अंतर को कम करना
मुख्य शब्द: भाषाई लोकतंत्र · शिक्षा में समावेशिता · नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 · चिकित्सा शिक्षा · क्षेत्रीय भाषा एकीकरण
चर्चा में क्यों: केरल के राजस्व मंत्री के. राजन ने घोषणा की है कि Kudumbashree द्वारा दिव्यांग बच्चों के लिए डे-केयर, प्रशिक्षण और विकासात्मक सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित नीति बनाई जाएगी।
कुदुम्बश्री केरल कृषि विश्वविद्यालय में सातवें राज्य स्तरीय 'बड्स आर्ट्स फेस्टिवल' (Buds Arts Festival) का आयोजन कर रही है। इस पहल का उद्देश्य केरल भर के 14,000 से अधिक ऐसे बच्चों को सहायता प्रदान करना है जो बौद्धिक चुनौतियों (intellectual challenges) का सामना कर रहे हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाकुदुम्बश्री (Kudumbashree): केरल में एक कम्युनिटी-आधारित संगठन जो विकासात्मक सहायता और डेकेयर (daycare) प्रदान करता है।
तथ्ययह पहल केरल में 14,000 से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
स्थानकेरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी: सातवें स्टेट-लेवल Buds Arts फेस्टिवल का आयोजन स्थल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में दिव्यांग बच्चों के सामाजिक-आर्थिक समावेश को सुनिश्चित करने में समुदाय-आधारित संगठनों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
संस्थागत तालमेल: विशेष डे-केयर और वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए कुटुंबश्री के ग्रासरूट नेटवर्क का इस्तेमाल
एक्सेसिबिलिटी गैप: सिर्फ समावेश से आगे बढ़कर विशेष विकासात्मक सहायता और बौद्धिक अवसर प्रदान करना
मुख्य शब्द: समावेशी विकास · कम्युनिटी-आधारित पुनर्वास · सामाजिक समावेश · विकलांगता अधिकार · जमीनी स्तर पर शासन